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अयोध्या को ₹#डीखाना, माता सीता अन्य देवियों के लिए बहुत गंदा बोलने वाली फिरकापरस्त हीर खान को तुरंत जेल में डालो

हीर खान, वीडियो, यूट्यूब
                                  उत्तर प्रदेश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने वाली  हीर खान को तुरंत                                                             साभार : यूट्यूब 
बेंगलुरु के बाद फिरकापरस्त अब उत्तर प्रदेश को जलाने की कोशिश में अपनी लड़कियों को आगे कर रहे हैं। कल(अगस्त 24) एक दसवीं की छात्रा गणेश के मीम्स बनाने का समाचार आया तो आज हिन्दुओं की देवियों को अति अश्लील गालियों का वीडियो। केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों को ऐसे साम्प्रदायिकों को जितनी जल्दी हो जेल में डालें, जहाँ केवल एक बार नाश्ता और एक बार खाना दिया जाये। इनके हिमायत में बोलने वाले मानवाधिकार और समर्थकों को भी Victim Card खेलने के अपराध में मुकदमा चलाकर जेल में बंद करें। इन साम्प्रदायिकतों को खुलकर बता दिया जाये कि अब नहीं बहेगा हिन्दू-मुसलमान का खून। इस खून पर बैठ बहुत मालपुए खाने के साथ-साथ तिजोरियां भर ली। अब तिजोरी खाली करने का समय आ गया है।  
यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई हैं। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की है।
हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”
उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछाड़ लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।


ऐसी गन्दी अपमानजनक वीडियो पर ट्विटर पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है:-

यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में जबरदस्त आक्रोश का माहौल है। हीर खान ने अपनी बदजुबानी जारी रखते हुए आगे कहा, “सेकुलरिज्म की माँ का भों#ड़ा, भाईचारा निभाने वालों की माँ का भों#ड़ा। साथ में उनकी भी माँ का भों#ड़ा जो कहते हैं कि भगवानों को गाली मत दो। उनकी भी माँ-बहनों को $#द डालेंगे। सीता, दुर्गा और काली – सबको कोठे पर बिठा कर चु#$ डालेंगे।”

लखनऊ पुलिस कमिश्नर के ट्विटर हैंडल ने सूचना दी है कि उक्त मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दे दिया गया है। अपनी हर वीडियो में ज़हर उगलने वाली हीर खान ने उस वीडियो में कहा है, “वो नाजायज थी और मात्र 6 साल की थी, जब रावण ने उसका ख़ून निकाल दिया था। जितने भी सेक्युलर पत्रकार हैं, तेरी माँ का भों#ड़ा। तुमलोग सोच रहे थे कि तुम इस्लाम को गाली दोगे और हम सुनते रहेंगे?”
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लड़की का प्रतीकात्मक चित्र जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हो, उस राज्य ...
महिला ने लगातार माँ सीता और माँ दुर्गा के लिए अपशब्द कहे। साथ ही उसने ये भी धमकी दी कि जिसे मन हो, वो जाकर एफआईआर करा दे। हीर खान के इस यूट्यब चैनल पर कई वीडियो हैं। वो वहाँ जनवरी 2020 से वीडियो डाल रही है। उसका कहना है कि उसका पुराना यूट्यूब चैनल डिलीट हो गया है। कुछ वीडियो में तो वो पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर के लिए भी अपने ‘प्यार’ का प्रदर्शन करती रहती है।

उत्तर प्रदेश : 10वीं की फिरकापरस्त मुस्लिम छात्रा द्वारा भगवान गणेश पर बनाए आपत्तिजनक मीम

10वीं की छात्रा ने हिंदुओं के प्रति दिखाई नफरत
                                                     लड़की का प्रतीकात्मक चित्र 

जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हो, उस राज्य में हिन्दू के देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक मीम बनाए जाएं, उससे ज्यादा दुःखद यह है कि जिस समाचार एजेंसी ने इस समाचार को प्रसारित किया है, वह छात्रा के स्कूल से संपर्क कर सकती हैं लेकिन छात्रा का नाम छुपाने के साथ-साथ स्कूल का नाम भी सार्वजनिक करने से डर रही है, लेकिन क्या स्थिति विपरीत होती क्या तब भी दोनों ही नाम गोपनीय रखे जाते। 
यह कौन-सा सर्वधर्म सद्भाव है? बेंगलुरु में देखा नहीं हाल? कमलेश तिवारी हत्या को भी क्या भूल गए क्या? आखिर किस कारण ऐसी साम्प्रदायिक छात्रा और उसके स्कूल, गांव, जिला, शहर को छिपाया गया? यह बलात्कार पीड़ित नहीं है, जिस कारण इसकी शक्ल और नाम को गोपनीय रखा जाए। 
योगी पुलिस और सरकार को इस गरीब, मजलूम नादान लड़की, इसके अब्बू, अम्मी और भाई-बहनों के बैंक खातों की भी जाँच करे, क्योकि बिना किसी प्रलोभन के कोई भी साम्प्रदायिक हरकत नहीं कर सकता। ताकि कोई इसका समर्थक Victim Card खेलने का साहस न कर सके। भारत में बहुत बह लिया हिन्दू-मुसलमान का खून। अगर इस सरकार के रहते भी साम्प्रदायिकतों के नकेल नहीं डाली गयी, फिर योगी सरकार और अन्य अखिलेश और मायावती आदि की सरकारों में कोई अंतर नहीं रह पाएगा।   
वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक बेहद पुराने और प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ती है। 10वीं कक्षा की वह छात्रा है। वह आजकल दोस्तों के बीच हिंदुओं के प्रति अपनी नफरत को लेकर चर्चा में है।
उसने भगवान गणेश और जीसस को लेकर किए आपत्तिजनक पोस्ट की है। इस ओर हमारा ध्यान उसके ही कुछ सहपाठियों ने दिलाया। असल में जब सहपाठियों ने इसके लिए आपत्ति जाहिर की तो समुदाय विशेष से आने वाली इस इस छात्रा ने उनसे कथित तौर पर कहा कि हिंदू धर्म पर क्यों नहीं हॅंस सकते?
हालाँकि अब छात्रा ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया है। मगर उसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि कक्षा 10 में पढ़ने वाली बच्ची के दिमाग में किस तरह की गंदगी और दूसरे धर्मों के प्रति नफरत भरी हुई है। यह बेहद दुखद और चिंतनीय है।
छात्रा द्वारा किया गया आपत्तिजनक पोस्ट
हमने इस बारे में स्कूल का पक्ष जानने के लिए प्रिंसिपल को कई बार फोन किया। मगर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद हमने छात्रा की क्लास टीचर को फोन किया। जब हमने इस बारे में उनसे बात की तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।
छात्रा द्वारा किया गया आपत्तिजनक पोस्ट
उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। छात्रा का व्यवहार पूछने पर वो कहती हैं कि वो उसे अच्छी तरह से नहीं जानती। अभी ऑनलाइन क्लासेस चल रही है, तो वो कभी आती है, कभी नहीं।
जब उसकी क्लास के बच्चों ने उससे पूछा कि क्या उसी ने इस तरह का पोस्ट डाला है, तो उसने कहा कि हाँ, उसी ने ये पोस्ट डाला है और आगे भी डालती रहेगी। उसने कहा कि तुमलोग भी तो मुसलमानों पर बने मीम्स पर हँसते हो तो हिंदू धर्म के मीम पर क्यों नहीं हँस सकते।
मीम पोस्ट करने पर छात्रा का
अपने दोस्तों को जवाब
फिलहाल छात्रा ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट प्राइवेट कर लिया है। उसकी क्लास की ही एक छात्रा ने ऑप इंडिया को बताया कि वो पहले भी अप्रत्यक्ष रूप से हिन्दुओं के खिलाफ मीम्स और पोस्ट डाला करती थी। वो बताती है कि किसी ने भी उसके धर्म के खिलाफ कुछ भी नहीं कहा था, इसके बावजूद उसने इस तरह का पोस्ट डाला।
मीम पोस्ट करने पत्र छात्रा का
अपने दोस्तों को जवाब
सवाल उठता है कि आखिर इन बच्चों के मन में ये जहर भर कौन रहा है। कहाँ से इनके दिमाग में इतनी गंदगी आती है? बच्ची की ये हरकत उसकी परवरिश पर भी सवाल उठाता है। क्या उनके परिवार में सभी धर्मों का सम्मान करना नहीं सिखाया जाता? क्या उन्हें नहीं बताया जाता कि जिस तरह उसे अपनी मजहब के प्रति आस्था है, बाकी धर्म के लोगों की भी अपनी आस्था होती है।
क्या उनके परिवार के लोगों की इस पोस्ट पर कोई आपत्ति नहीं होगी? इसके साथ ही स्कूल के शिक्षकों का इस बारे में पता न होना भी सवाल के दायरे में आता है। जब ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, तो फिर उनकी नजर में कैसे नहीं आया? 
14-15 साल की बच्ची के जेहन में इतनी कट्टरता कहाँ से आई होगी? वैसे ये पहली बार नहीं है, जब बच्चों के ऐसी कट्टरता सोशल मीडिया में दिखी हो। नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने के समय भी आपने ऐसे अनगिनत वीडियो और फोटो देखा होगा, जिसमें बच्चे गालियाँ दे रहे हैं, देश के प्रधानमंत्री के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैं, आजादी के नारे लगा रहे हैं।
भला एक छोटा सा बच्चा, जिसे न तो आजादी का मतलब पता होगा और न ही सीएए का, वह कैसे इस तरह की बातें कर सकता है। हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पाकिस्तान का लगभग 4-5 साल का बच्चा कहता है कि अगर इस्लामाबाद में मंदिर बना तो ये याद रखना मैं उन हिंदुओं को चुन-चुनकर मारूँगा।
हैरानी की बात है कि लोग इसे गर्व के साथ शेयर करते हैं और उसे शाबासी भी देते हैं। हिंदुओं के देवी-देवता पर आए दिन धड़ल्ले से टिप्पणी कर दी जाती है, मगर जब इस्लाम या पैगंबर टिप्पणी की जाती है, तो बात कत्लेआम तक पहुँच जाती है। कमलेश तिवारी की हत्या और हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगे तो याद ही होंगे आपको। तो क्या धर्मनिरपेक्षता, सर्वधर्म सद्भाव का बोझ सिर्फ हिंदुओं के कंधों पर है?
नोट: छात्रा की पहचान उजगार नहीं हो इसकी वजह से हमने स्कूल और शिक्षकों के नाम का भी जिक्र नहीं किया है। इस स्टोरी का मकसद हमारा ध्यान उस बेहद गंभीर समस्या की ओर खींचना है जो एक खास समुदाय के बच्चों को मजहबी तौर पर कट्टर बना रहा। जब आधुनिक स्कूल में पढ़ने वाली एक छात्रा के मन में दूसरे धर्म के लोगों के लिए इतनी नफरत भरी है तो आप समझ सकते हैं कि उनका क्या हाल होगा जो मुल्लों से तालीम ले रही हैं या फिर जो शिक्षा से दूर हैं।

CAA का समर्थन करने पर 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने वाला जामिया का प्रोफेसर अबरार सस्पेंड

जामिया, अबरार अहमद
जामिया मिलिया इस्लामिया ने असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद को सस्पेंड कर दिया है। उसने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का दावा किया था। अबरार ने एक ट्वीट में ऐसा करने का दावा किया था। यूनिवर्सिटी ने ट्वीट कर उसे सस्पेंड करने की जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि अबरार ने जो दावा किया है वो गंभीर और अस्वीकार्य है। इसलिए जाँच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया है।
प्रोफेसर अबरार ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मेरे सभी विद्यार्थी पास हो गए, सिर्फ 15 गैर मुस्लिमों को छोड़कर, जो सीएए के समर्थन में थे या फिर सीएए का विरोध करने वालों के खिलाफ में थे।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए
दो ट्वीट के स्क्रीन शॉट
इतना ही नहीं उसने अपनी कक्षा के 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को धमकी दते हुए कहा था कि 55 छात्र उसके समर्थन में हैं। अगर उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों का विरोध नहीं बंद किया तो 55 छात्र उन्हे दंगों के माध्यम से सबक सिखाएँगे। वहीं जामिया के एक सूत्र ने कहा कि प्रोफेसरों को गैर मुस्लिम छात्रों के रोल नंबर पता है इसलिए प्रोफसर को गैर-मुस्लिम छात्रों की पहचान करना आसान है। हालाँकि बाद में अबरार ने अपने ट्वीट पर सफाई देते हुए इसे मजाक बताया था।
अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।
अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

इस्लामी संगठन SDPI पर बरसे केरल CM पिनराई विजयन, कहा- सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ रहे

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ राज्य में प्रदर्शनों में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) जैसी इस्लामी चरमपंथी संगठनों के सदस्यों की घुसपैठ के खिलाफ सोमवार (फरवरी 3, 2020) को आगाह किया और कहा कि वामपंथी सरकार समाज में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की किसी कोशिश को सफल नहीं होने देगी।
इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया पर जमकर बरसते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे चरमपंथी संगठन लोगों को बाँटने और प्रदर्शनों की आड़ में कुछ स्थानों पर कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान जवाब देते हुए कहा कि पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों ने कई स्थानों पर हिंसा और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के लिए ऐसे संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
विपक्षी कांग्रेस नीत यूडीएफ की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण और कानून के अनुरूप प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले किसी व्यक्ति के खिलाफ एक भी मामला नहीं दर्ज किया है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य में नागरिकता कानून के खिलाफ असाधारण प्रदर्शन हुए और इनमें से ज्यादातर प्रदर्शनों का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से किया गया। लेकिन हमारे राज्य में SDPI नामक एक समूह है जो चरमपंथी तरीके से सोचता है।

दरअसल पिनराई विजयन 200 CAA विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के बारे में एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने पहले कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, लेकिन हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। विजयन ने सवाल किया, “जब मैं SDPI के नाम का उल्लेख करता हूँ तो विपक्ष क्यों उत्तेजित हो रहा है? क्या वे कह रहे हैं कि मुझे SDPI और उग्रवाद के बारे में बात नहीं करनी चाहिए?”
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दिल्ली पुलिस ने बिहार पुलिस के सहयोग से जहानाबाद के काको से देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम को गिरफ़्तार किया। शाहीन ...
उल्लेखनीय है कि SDPI एक चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और देश के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलों के पीछे है। CAA के समर्थन में निकाली गई रैली के दौरान किए गए हमले के आरोपित 6 SDPI समर्थकों को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले SDPI समर्थकों ने CAA विरोध के नाम पर बीमार बेटे को ले जा रही एक कार को रोक दिया था।