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Operation Sindoor : ‘मारेंगे 100 जूता, गिनेंगे 1’ पर अमल कर रहा भारत, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में 20 एयरबेस टारगेट करने की दी जानकारी: पाकिस्तान ने डोजियर में 28 फौजी अड्डे की तबाही कबूली

                                      पाकिस्तान का कबूलनामा ( फोटो साभार- इंडियन आर्मी )
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के 20 नहीं बल्कि 28 ठिकानों को ध्वस्त किया था। ये खुलासा खुद पाकिस्तान ने अपने डोजियर में किया है।

पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक डोजियर में माना है कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को जितना नुकसान हुआ है वो भारत द्वारा बताए गए नुकसान से कहीं अधिक था। पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना द्वारा मारे गए 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की सूची भी दी है।

पाकिस्तान के “ऑपरेशन बनियान उन मार्सोस” पर तैयार किए गए डोजियर के मानचित्रों में पेशावर, झंग, हैदराबाद (सिंध), गुजरात, पंजाब, गुजरांवाला, भवालनगर, अटक और छोर पर हुए हमलों को दर्शाया गया है। भारतीय वायु सेना और सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले महीने के हमलों के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जगहों पर हुए हमलों का खुलासा नहीं किया था।

                                      (भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)

हाल ही में हुए इस खुलासे से नई दिल्ली से सीजफायर के लिए इस्लामाबाद की अपील को समझा जा सकता है। इसके अलावा डोजियर से पाकिस्तान की कलई भी खुल रही है। पाकिस्तान ने भारतीय पक्ष को काफी नुकसान पहुँचाने का दावा किया था और भारतीय हमलों में उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है, ये भी कहा था।

भारतीय सेना की प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय जवाबी हमले के दायरे और उसकी व्यापकता को अच्छी तरह से समझाया जा सकता है। इस स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान ने 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की जानकारी दी है।

मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढाँचे के खिलाफ भारत द्वारा किए गए सटीक हमलों से होने वाले विनाश को दिखाया था। इसमें मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षण केंद्र और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय सहित नौ लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था। मुजफ्फराबाद, कोटली, रावलकोट, चकस्वारी, भिंबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल उन जगहों में शामिल थे, जिन पर ऑपरेशन के दौरान हमला किया गया था।

                                (भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी हिस्से में रिहायशी इलाकों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। जबकि नई दिल्ली ने साफ कहा था कि उसने सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला किया है।

पाकिस्तान पर जवाबी हमले में भारत ने 11 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। नूर खान, रफीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चुनियन, सरगोधा, स्कारू, भोलारी और जैकबाबाद उन ग्यारह हवाई ठिकानों में शामिल थे जिन्हें निशाना बनाया गया। तीन दिनों तक चली यह तनातनी तब खत्म हुई जब पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाया।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ एक रेडलाइन खींच दी है। भारत में अब कोई भी आतंकवादी हमला युद्ध अपराध माना जाएगा, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

हाल में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सैन्य क्षमताओं का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, जैसा कि पाकिस्तान के डोजियर से पता चलता है, भारत ने जितना स्वीकार किया है, उससे कहीं ज़्यादा जोरदार और दूर तक हमला किया।

भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बदले की कार्रवाई की थी। पहलगाम में 26 मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसका जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

भारत-पाक के बीच सीजफायर : ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान को पहुँची करारी चोट, शाम 5 बजे से थमी लड़ाई

                            भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर (फोटो साभार: Rediff)
Operation Sindoor से पाकिस्तान को पहुंची जबरदस्त आर्थिक मार ने पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया। अगर अभी भी पाकिस्तान ने आतंकवादी हमले बंद नहीं किए तो इससे भी जबरदस्त नुकसान को उठाना पड़ेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि मदरसों और मस्जिदों की आड़ में जो आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था सब दुनिया के सामने आ गया। 10 मई की रात में भारत द्वारा पाकिस्तान को पहुंचे नुकसान ने घुटने पर आने को मजबूर कर दिया। अगर लड़ाई कम से कम 3 दिन और चल गयी IMF से मिला अनुदान भी पाकिस्तान को बचा नहीं सकता था।  Cease fire के लिए भारत के आगे गिरगिराया। इतने दिनों में हुए पाकिस्तान को हुए नुकसान ने पाकिस्तान को 30 साल पीछे धकेल दिया है। 

भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर कई दिनों तक चली तनातनी आखिरकार थम गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने शनिवार (10 मई 2025) को ऐलान किया कि दोनों देशों ने ‘तुरंत और पूरी तरह से युद्ध रोकने (Full and Immediate Ceasefire)’ करने का फैसला किया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “पूरी रात चली बातचीत के बाद, अमेरिका की मदद से भारत और पाकिस्तान सीजफायर पर राजी हुए। दोनों को समझदारी दिखाने की बधाई।”

भारत और पाकिस्तान के बीच अचानक घोषित हुए संघर्षविराम के पीछे बड़ी कूटनीतिक वजह है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर बीते कई दिनों से अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ लगातार बातचीत में शामिल थे। शाम 5 बजे से ही युद्ध विराम लागू हो चुका है।

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस बारे में आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारतीय डीजीएमओ को 3.35 बजे शाम को कॉल किया था, जिसके बाद दोनों पक्षों में फायरिंग और सैन्य अभियानों को रोकने की सहमति बनी। ये समझौता शाम 5 बजे से लागू हो गया।

ये खबर तब आई जब दोनों देश एक-दूसरे की फौजी चौकियों पर हमले कर रहे थे। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, जिससे पाक बैकफुट पर आ गया।

कुछ हफ्तों में भारत-पाक सीमा पर हालात बेहद गर्म थे। 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिसके लिए भारत ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। भारतीय सेना ने ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलों का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी फौजी ठिकानों को निशाना बनाया। खबरों के मुताबिक, रावलपिंडी और चकलाला जैसे इलाकों में पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ।

पाकिस्तान ने भी पलटवार किया। उसने भारत पर 400 ड्रोनों और मिसाइलों से हमले का इल्जाम लगाया। पाकिस्तानी फौज ने ‘ऑपरेशन बनयान उल मरसूस’ शुरू कर भारतीय ठिकानों पर हमले किए। जम्मू, अमृतसर और पूंछ में धमाकों की खबरें आईं। लेकिन भारतीय सेना ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। 8-9 मई की रात भारत ने पाकिस्तानी ड्रोनों को मार गिराया और सीमा पर कालाबाजी दिखाने वालों को सबक सिखाया।

भारत का कहना था कि पाकिस्तान बार-बार सीजफायर तोड़ रहा था और आतंकियों को भेज रहा था। भारतीय सेना ने न सिर्फ इन हमलों को रोका, बल्कि पाकिस्तान के फौजी ठिकानों को भी निशाना बनाया।

दूसरी तरफ, बलूच विद्रोहियों ने भी पाकिस्तान को निशाना बनाया। बलूच लिबरेशन आर्मी ने मंगोचार शहर पर कब्जा कर लिया और 39 ठिकानों पर हमले किए। उन्होंने CPEC हाइवे को ब्लॉक कर दिया और पाकिस्तानी सेना को बैकफुट पर धकेल दिया। बलूच नेता मीर यार बलूच ने कहा, “पाकिस्तान का पतन करीब है। हम आजादी चाहते हैं और भारत से दूतावास खोलने की अपील करते हैं।” इससे पाकिस्तान पर दो तरफा दबाव पड़ा।

ट्रंप की मध्यस्थता के बाद सीजफायर तो हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान भी इसकी पुष्टि कर देंगे। वहीं, सऊदी अरब ने भी मध्यस्थता की पेशकश की है। जानकारों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को साफ संदेश दिया कि भारत अब चुप नहीं रहेगा। लेकिन शांति के लिए दोनों देशों को भरोसा बनाए रखना होगा।

भारत ने पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक किया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी अमेरिका समेत कई देशों को दी, कहा- पाकिस्तान टारगेट नहीं, आतंकवादियों पर हमला

                                       वायुसेना का ऑपरेशन सिंदूर ( फोटो साभार- एनडीटीवी)
भारत ने पहलगाम हमले का बदला लेते हुए पाकिस्तान में स्थित 9 आतंकी ठिकाने को तबाह कर दिया है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पीओके के अलावा बहावलपुर, कोटली और मुजफ्फराबाद में ठिकानों को निशाना बनाया है। इसमें लश्कर ए तैय्यबा के ज्यादातर ठिकाने हैं। भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान थर्रा उठा है।

आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सेना, रक्षा मंत्रालय और भारत सरकार तीनों ने आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि भारतीय एक्शन आतंकवाद के खिलाफ है। इसमें पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं को टारगेट नहीं किया गया है। पड़ोसी मुल्क के साथ संघर्ष को बढ़ाना इसका मकसद नहीं है।

आतंकियों के ठिकानों पर भारत के एक्शन के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- ‘भारत माता की जय’.

हालाँकि पाकिस्तान एलओसी पर लगातार गोलाबारी कर रहा है। पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक की बात कबूली है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि कश्मीर में आतंकवादी हमले के मद्देनजर दोनों देशों के बीच तनाव के बीच भारत ने कोटली, बहावलपुर और मुजफ्फराबाद में मिसाइल हमले किए।

पाकिस्तान ने इस्लामाबाद और लाहौर हवाई अड्डों पर आने-जानेवाली सभी उड़ानें अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं.

भारतीय एयर स्ट्राइक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत की. वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी बयान में कहा गया कि अजीत डोभाल ने उन्हें की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी दी।

भारतीय हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होने कहा, “यह शर्मनाक है. हमने इसके बारे में अभी-अभी सुना, जब हम ओवल ऑफिस में दाखिल हो रहे थे. लगता है कुछ लोगों को पहले से अंदेशा था कि कुछ होने वाला है, शायद अतीत की घटनाओं के आधार पर. भारत और पाकिस्तान लंबे समय से लड़ते आ रहे हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि यह तनाव जल्द से जल्द समाप्त हो.”

भारत में इस्लामी शासन लाना चाहता था डॉक्टर इश्तियाक, राजस्थान से उत्तर प्रदेश तक तैयार कर रखे थे आतंकी

                   रांची का डॉ इश्तियाक अलकायदा मॉड्यूल का मुखिया (फोटो साभार: ETV Bharat)
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, एनआईए, झारखंड एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के जिस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, उसका मुखिया राँची के अस्पताल में काम करने वाला डॉक्टर इश्तियाक निकला है। वो आतंकियों को हमले की ट्रेनिंग भी दे रहा था, जिसमें से 6 आतंकी राजस्थान के भिवाड़ी में ट्रेनिंग करते पकड़े गए हैं। तो झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। एक आतंकवादी की गिरफ्तारी यूपी से की गई है। अब तक इस मॉड्यूल के 16 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के आतंकी डॉ इश्तियाक के लिंक हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की वजह बनी जमीन घोटाले से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी ने इस मामले में बबलू खान नाम के शख्स को समन किया है। ईडी अब यह जाँच कर रही है कि जमीन घोटाले से अर्जित राशि से कहीं आतंकी संगठन को फंडिंग तो नहीं हुई है।

चूँकि जमीन घोटाले में जेल में बंद अफसर खान और ताल्हा खान का बबलू खान रिश्तेदार है। वहीं, डॉ इश्तियाक बबलू खान के अस्पताल से जुड़ा रहा है। दोनों की पारिवारिक रिश्तेदारी भी है। इसके साथ ही अफसर अली और ताल्हा खान सेना जमीन घोटाला और हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन घोटाले में चार्जशीटेड हैं। ऐसे में ईडी ने अपनी जाँच को आतंकवाद की फंडिंग की तरफ भी घुमा दिया है। अब बबलू खान से पूछताछ कर ईडी और अन्य एजेंसियाँ ये पता करेंगी कि कहीं जमीन घोटाले के पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए तो नहीं किया।

डॉ इश्तियाक ने की थी खिलाफत की तैयारी

अलकायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) के इस मॉड्यूल का संचालन रांची निवासी डॉ. इश्तियाक कर रहा था और उसने इस मॉड्यूल का विस्तार राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक कर लिया था। डॉ. इश्तियाक रांची के प्रतिष्ठित मेडिका अस्पताल में सेवा दे रहा था। हालाँकि एटीएस की कार्रवाई के बाद 22 अगस्त को ही मेडिका के मैनेजमेंट ने डॉ. इश्तियाक अहमद को टर्मिनेट कर दिया।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश से भी इस मॉड्यूल के आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए आतंकियों के पास से एके-47 सहित कई हथियारों की बरामदगी की भी सूचना है। झारखंड के आईजी ऑपरेशन अमोल होमकर ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आठ लोगों से पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर इश्तियाक देश में खिलाफत घोषित करने के साथ कई आतंकी हमलों की फिराक में था।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से मिले इनपुट पर झारखंड एटीएस ने रांची के बरियातू जोड़ा तालाब के अल हसन रेसीडेंसी में दबिश देकर डॉक्टर इश्तियाक को गिरफ्तार किया, इसके बाद उसके लैपटॉप और मोबाइल फोन की जाँच की। जाँच में कई संदिग्ध चीजें मिलने के बाद एटीएस उसे गुप्त ठिकाने पर ले गई, जहाँ पूछताछ कर यूपी, राजस्थान समेत अन्य शहरों में गतिविधि की जानकारी उससे जुटाई गई। डॉक्टर इश्तियाक को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया जा रहा है।
डॉ इश्तियाक अहमद अलकायदा इन इंडियन सब कॉटिनेंट के इस मॉडयूल को लीड कर रहा था। उसने राजस्थान के भिवंड़ी में भी छह संदिग्धों को ट्रेनिंग के लिए भेजा था। इन सभी की गिरफ्तारी भी राजस्थान पुलिस ने की है। मौके से पुलिस ने एके 47 राइफल, प्वाइंट 38 बोर की रिवाल्वर और छह जिंदा कारतूस , .32 बोर की 30 जिंदा कारतूस, एके 47 की 30 कारतूस, डमी इंसास, एयर राइफल, आयरन एल्बो पाइप, हैंड ग्रेनेड समेत अन्य चीजें जब्त की हैं। खास बात ये है कि राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किए गए 6 आतंकी भी झारखंड के ही निकले हैं।
  • डॉ इश्तियाक पेशे से रेडियोलॉजिस्ट है, जिसने राँची के RIMS से मेडिकल की पढ़ाई की
  • मेडिका अस्पताल में 3 साल तक फुल टाइम कर चुका है काम
  • बीते 3 साल से पार्ट टाइम दे रहा था मेडिका अस्पताल में सेवा
  • हजारीबाग में भी क्लीनिक चलाता है इश्तियाक
  • भारत को इस्लामिक देश बनाने की कर रहा था कोशिश
झारखंड एटीएस की टीम ने गुरुवार (22 अगस्त 2024) लोहरदगा में कुडू के हेंजला कौवाखाप गाँव अलताफ उर्फ इल्ताफ की तलाश में पहुँची थी। उसके घर से दो हथियार और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके साथ ही राँची के चान्हों इलाके में एटीएस की टीम ने कई जगहों पर दबिश दी। एटीएस ने चान्हों के बलसोकरा के मोहम्मद मोदब्बीर, रिजवान, चटवल के मुफ़्ती रहमतुल्लाह मजहिरी और पिपराटोली के मतिउर रहमान को हिरासत में लिया है।
एटीएस की टीम ने एक साथ चान्हों के बलसोकरा, चटवल, पिपराटोली के अलावा पकरियो गाँव के एनामुल अंसारी, शहबाज अंसारी तथा शहबाज अंसारी के घर में छापेमारी की। छापेमारी के दौरान मोहम्मद मोदब्बिर, मोहम्मद रिजवान, मुफ़्ती व मतीउर रहमान को उनके घर से और मुफ्ती रहमतुल्लाह को एटीएस ने उसके मदरसा से हिरासत में लिया। इस दौरान पकरियो में छापेमारी में एनामुल अंसारी और शहबाज घर में नहीं मिले। परिजनों की ओर से बताया गया कि जेयारत अंसारी का बेटा शहबाज परीक्षा के लिए दिल्ली गया हुआ है, जबकि शहबाज और एनामुल अंसारी तबलीगी जमात में गए हुए हैं।

कश्मीर में गिरिजा टिक्कू तो इजरायल में शानी लौक, एक मजहबी सोच ने यहूदी और हिंदुओं को सदियों से किया तबाह

                                                                                                                          साभार 
मुग़ल आतताइयों से लेकर पाकिस्तान प्रायोजित जिहादी आतंकवादियों ने जिस तरह का तांडव 1990 में भारत के कश्मीर में किया था उसी तरह का तांडव 7 अक्टूबर हमास आतंकियों ने इजरायल में किया। भारत से करीब 4 हजार किलोमीटर की दूरी पर इजरायल स्थित है। जगह बदल गया, चेहरे बदल गए लेकिन मजहबी सोच, जिहादी बर्बरता कायम रही। कश्मीर में गिरिजा टिक्कू तो इजरायल में शानी लौक, एक मजहबी सोच ने यहूदी और हिंदुओं को सदियों तक तबाह किया है। कश्मीर में साल 1990 में जिहादी आतंकवादियों ने नंगा नाच किया था। कश्मीरी पंडितों की बस्तियों में सामूहिक बलात्कार और लड़कियों के अपहरण किए गए। नरसंहार में सैकड़ों पंडितों का कत्लेआम हुआ। लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हुए थे। इसी तरह इजरायल में सैकड़ों यहूदियों की हत्या कर दी गई। जिहादी आतंकवादियों ने लड़कियों, महिलाओं के साथ बलात्कार किया, उनका अपहरण कर लिया। केवल एक गांव में 40 बच्चों को मार दिया गया। जिहादियों ने बर्बरता की सीमा पार करते हुए उनका गला तक काट दिया।

मुंबई हमले के अंदाज में इजरायल पर किया गया हमला
हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमला 26/11 के मुंबई हमले के आतंकियों के स्टाइल में हमला किया। इससे शक की सुई पाकिस्तान भी जाता है कि पाकिस्तानी सेना ने हमास आतंकियों को प्रशिक्षित किया है। हालांकि मुंबई हमले में 10 आतंकवादी शामिल थे जबकि इजरायल पर सैकड़ों आतंकवादियों ने बड़े पैमाने पर हमला किया गया। इजरायल की जमीन पर पहुंचते ही इन आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गाजा पट्टी के करीब आतंकियों ने एक महिला को भी मार डाला। लेकिन इन आतंकियों को इसे मारने भर से ही सुकून नहीं मिला, बल्कि उन्होंने इसके शव को नग्न किया, हाथ पैर बांध कर गाड़ी पर बांध दिया। इसके बाद आतंकी फिलिस्तीनियों के बीच इसका शव घुमाने लगे। उसके बात पता चला है कि यह इजरायल की नहीं बल्कि एक जर्मन नागरिक थी। हमास ने जो इजराइल में किया उसकी धमकी भारत के जिहादी सोच वाले मुसलमान हिंदुओं को बार-बार देते रहे हैं। हिंदुओं को अपनी जाति भूलना पड़ेगा, एक होना पड़ेगा क्योंकि एक मजहबी सोच वाली किताब में सभी हिंदुओं को काफिर ही कहा गया है। आज हर भारतीयों की इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

जिहादी आतंकवादियों की दरिदंगी, बच्चों के सिर काट दिए
इजरायल की सेना एक कस्बे में गई तब वहां 40 बच्चों की लाश मिली जिनमें गर्दन काट दिए गए थे। 20 महिलाओं की लाश मिली जिनके साथ बलात्कार करके मारा गया था। ये जिहादी सोच वाले दरिंदे हैं, यह राक्षस हैं जो पूरी इंसानियत और मानवता के लिए खतरा है और जो इनका समर्थन कर रहे हैं वह इसे भी बड़ा दरिंदा है। दक्षिणी इज़राइल के किबुत्ज़ बेरी में प्रवेश करने वाले आईडीएफ सैनिकों को 100 से अधिक बच्चे मिले जिनके सिर कटे हुए थे, पूरे परिवारों को हमास के आतंकवादियों ने बिस्तर पर ही गोलियों से भून दिया था। यह कट्टरपंथी इस्लामवादियों का असली चेहरा है। आज की सभ्य दुनिया में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद का समूल नाश जरूरी है।

कश्मीर में गिरिजा टिक्कू के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या
इस्लामिक आतंकवाद का बर्बर रूप कश्मीर को झेलना पड़ा। 11 जून 1990 को जब गिरिजा कुमारी टिक्कू सैलरी लेने के लिए स्कूल गईं थीं। वह स्कूल में लैब असिस्टेंट का काम करती थीं। स्कूल बांदीपोरा जिले में था और सैलरी लेने के बाद वह उसी दिन उसी गांव में जहां स्कूल था अपनी एक सहकर्मी के घर मिलने गईं। इस बीच उन पर आतंकियों की नजर थी जैसे ही वह उस घर में पहुंची उनका अपहरण हो जाता है। गांव वालों को यह बात पता चली लेकिन आतंकियों के डर से कोई आगे नहीं बढ़ा। आगे गिरिजा कुमारी के साथ क्या हुआ यह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। आतंकियों ने न केवल अपहरण किया बल्कि सामूहिक बलात्कार भी किया। दरिंदों का मन जब इससे भी नहीं भरा तो जिंदा आरा मशीन के बीच में रखकर गिरिजा को काट दिया। आतंकी इससे कई संदेश देना चाहते थे और कश्मीरी हिंदुओं के बीच डर बैठाना चाहते थे। एक लंबा अरसा बीत जाने के बाद विवेक अग्निहोत्री की फिल्म कश्मीर फाइल्स में इस दर्द को बयां किया गया।

खून से लथपथ, हिंसा से आक्रांत मजबूर लोगों को घर छोड़ना पड़ा
अमेरिका में कश्मीरी मूल की लेखिका सुनंदा वशिष्ठ का एक वीडियो फिल्म आने के बाद काफी वायरल हो रहा है। जिसमें वह प्रदेश से धारा 370 को समाप्त किए जाने का समर्थन करते हुए कहती हैं कि मेरे माता-पिता कश्मीरी पंडित हैं, मैं हिंदू कश्मीरी पंडित हूं। हम कश्मीर के उस पीड़ित समुदाय से आते हैं जिन्हें इस्लामिक कट्टरपंथ के कारण अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। हिंदू महिलाओं का गैंगरेप किया गया और उनके शव के टुकड़े कर के फेंके गए। खून से लथपथ, हिंसा से आक्रांत हम मजबूर और डरे हुए लोग थे जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। सुनंदा ने उस दौर की भयानक हिंसा को याद करते हुए कहा कि हमारे घर जलाए गए, बागों में आग लगाई गई। धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया। आतंकियों ने गिरिजा टिक्कू जैसी महिलाओं का गैंगरेप किया, उनके शव के टुकड़े-टुकड़े किए गए। सुनंदा वशिष्ठ का 2019 का वीडियो अब वायरल हो रहा है।

‘अल्लाह हू अकबर’ के नारों के बीच शानी लौक का शव अर्धनग्‍न घुमाया
कश्मीर में हिंदुओं की नफरत की तरह इजरायल में यहूदी की नफरत में अंधे इन आतंकियों ने सड़क पर मौजूद हर शख्स को गोलियों से भूनना शुरू कर दिया। जब महिला को मारने का वीडियो सामने आया था, तब ऐसी रिपोर्ट थीं कि यह इजराली सेना की एक सैनिक है। लेकिन अब इस लड़की की पहचान जर्मनी की रहने वाली शानी लौक (Shani Louk) के रूप में हुई है। 30 साल की शानी एक संगीत समारोह में थीं, जो शांति के लिए आयोजित किया गया था। लेकिन अचानक से आतंकियों ने यहां तांडव मचाना शुरू कर दिया। एक ट्रक पर शानी लौक की अर्धनग्न डेड बॉडी रखकर आतंकवादी इज़राइल पर अपने हमलों का जश्न मनाते हुए “अल्लाहु अकबर” का नारा लगा रहे थे।

इस्लामी आतंकवाद का क्रूर चेहरा था डायरेक्ट एक्शन डे
भारत ने इस्लामी आतंकवाद का एक क्रूर चेहरा उस वक्त भी देखा था जब आजादी मिल रही थी और मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग मनवाने के लिए डायरेक्ट एक्शन डे का एलान कर दिया था। स्वतंत्रता प्राप्ति के ठीक एक साल पहले 16 अगस्त 1946 को भारत ने मजहबी कट्टरपंथ का वह रूप देखा जो दशकों तक याद रखा जाने वाला था। भारत की आजादी की दास्तां खून की स्याही से लिखी गई है। इतिहास के पन्नों में दर्ज कहानियां इसकी गवाह हैं कि ब्रिटिश हूकूमत से स्वाधीनता की लड़ाई में जितना खून बहा था। उससे कहीं ज्यादा खून आजादी मिलने के वक्त मजहबी सोच के कारण बहा था। इसमें अंग्रेजों की बंटवारे और फूट की राजनीति आग में घी का काम किया था। जैसे-जैसे स्वाधीनता की दिन नजदीक आता जा रहा था, नेहरू और जिन्ना में मतभेद और मनभेद भी शुरु हो गये थे। जिन्ना ने 16 अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे की घोषणा कर दी। बंगाल में उस दिन 16 अगस्त 1946 को सुबह भी सबकुछ सामान्य था। लेकिन मस्जिदों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ नजर आ रही थी। इतने सारे लोग कहां से आये थे कोई नहीं जानता था। इसके बाद सड़कों पर हजारों की संख्या लोग हाथों में लाठी-ठंडे और अन्य हथियारों से लैस होकर एकत्रित होने लगे।

डायरेक्ट एक्शन डे में 10 हजार से अधिक हिंदू मारे गए
ख्वाजा नजीमुद्दीन और बंगाल के मंत्री हसन शहीद सुहरावर्दी ने इस भीड़ के बीच में भाषण दिया। इस भाषण के बाद भीड़ बिल्कुल निरंकुश हो गई थी। बंगाल में हुए इस भीषण रक्तपात के लिए इतिहास सुहरावर्दी को ही साजिशकर्ता मानता है। इस सांप्रादायिक हिंसा के दौरान सैकड़ों हिंदू मौत के घाट उतार दिए गए थे। हजारों लोग जख्मी हुए थे और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। यह रक्तपात 22 अगस्त चलता रहा था। इसमें मरने वालों का आंकड़ा 10 हजार के बीच का है। इसके साथ ही बहुत सारे हिंदुओं को मारकर हुगली नदी में फेंक दिया गया। इसके अलावा 1200 के करीब भीषण आगजनी की घटनाएं हुईं. इनमें कितने लोग जिंदा जले, बता पाना मुश्किल है।

हिंदुओं के खून से लाल हो गया था कलकत्ता
16 अगस्त के एक दिन पहले तक किसी को यह नहीं पता चला था कि आखिरकार मुस्लिम लीग का डायरेक्ट एक्शन डे क्या है? तत्कालीन बंगाल में मुस्लिम लीग का ही शासन था और वहां सत्ता में बैठा हुआ था प्रधानमंत्री हसन शहीद सुहरावर्दी जिसे बंगाल में हिन्दुओं के खिलाफ किए गए भीषण नरसंहार का साजिशकर्ता माना जाता है। उसकी शह पर मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन के नाम पर बंगाल में खुलकर अपने हिन्दू विरोधी मंसूबे पूरे किए। मुस्लिमों ने जमकर तांडव मचाया। राजा बाजार, केला बागान, कॉलेज स्ट्रीट, हैरिसन रोड और बर्राबाजार जैसे इलाकों में हिन्दुओं के घरों और दुकानों को जलाया जाने लगा। हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा गया, हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, हिंदुओं की संपत्तियों को जला दिया गया। पूर्वी बंगाल के नोआखाली में भी हिन्दुओं का भीषण नरसंहार हुआ। मुस्लिम की भीड़ हिन्दुओं पर भूखे भेड़ियों की तरह टूट पड़ी थी। कलकत्ता में ही 72 घंटों के भीतर लगभग 6 लाख हिन्दू मार दिए गए। मजहबी दंगाइयों के शिकार हुए लगभग 20,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए और लगभग 100,000 लोगों को अपना सबकुछ छोड़कर जाना पड़ा।

कलकत्ता की सड़कों पर गूंजते रहे, ‘अल्लाह-हु-अकबर’, ‘लड़ के लेंगे पाकिस्तान’
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि 17 अगस्त जो कि डायरेक्ट एक्शन डे का सबसे खतरनाक दिन माना जाता है, उस दिन कलकत्ता की सड़कों पर चारों ओर सिर्फ, ‘अल्लाह-हु-अकबर’, ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘लड़ के लेंगे पाकिस्तान’ और ‘कायदे आजम जिंदाबाद’ ही सुनाई दे रहा था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम पर गौर से नजर रखने वाले अमेरिकी पत्रकार फिलिप टैलबॉट ने इंस्टीट्यूट ऑफ करंट वर्ल्ड अफेयर्स को भेजे गए अपने खत में डायरेक्ट एक्शन डे के बाद हुई मौतों के बारे में लिखा था, हालांकि जिस तरीके से मुस्लिम भीड़ ने कलकत्ता और उसके आसपास के इलाकों में दंगे को अंजाम दिया था उससे यह नहीं लगता कि मरने वाले हिन्दुओं की संख्या इतनी कम रही होगी। इसके अलावा हिन्दुओं की लाशों को नदी में भी बड़ी संख्या में फेंक दिया गया था। इसलिए मौतों का सही आंकड़ा क्या था, यह कहना बहुत मुश्किल है। जुगल चंद्र घोष नाम के एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि उसने 4 ट्रक देखे थे जिसमें 3 फुट की ऊंचाई तक लाशें भरी हुई थीं और इन लाशों से खून और विभिन्न अंग बाहर आ रहे थे। हर बार की तरह इस बार भी हिन्दुओं की मौतों का आंकड़ा बस इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गया।

मुगलकाल के बाद भारत के हिंदुओं पर मोपला में हुई जिहादी बर्बरता
भारत में इस्लाम अरब व्यापारियों के ज़रिये केरल के मालाबार तट के रास्ते आया था। मालाबार क्षेत्र की चेरामन जुमा मस्जिद, भारत में इस्लाम के प्रवेश का प्रतीक है। उस वक्त जो लोग जाति और वर्ण व्यवस्था से पीड़ित थे उन्होंने इस्लाम अंगीकार कर लिया। 20 अगस्त 1921 को मालाबार इलाके में मोपला विद्रोह की शुरुआत हुई थी। यहां हत्यारे थे मोपला मुसलमान और पीड़ित थे हिन्दू। इसे बड़ी चालाकी से वामपंथी इतिहासकारों के गिरोह ने ‘जमींदारों के खिलाफ किसानों की बगावत’ बता कर कई पीढ़ियों को झूठ की घुट्टी पिलाई। लेकिन सच्चाई यही है कि मोपला में जिहादी सोच वालों ने हिंदुओं का कत्लेआम किया। मोपला मुलसमानों के निशाने पर बड़े पैमाने पर हिंदू आए। इसमें हजारों हिंदुओं की हत्या कर दी गई। हजारों का धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बना दिया गया। हिंदू महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए। हाल के 100 साल के इतिहास में मोपला विद्रोह को हिंदुओं के खिलाफ मुसलमानों का पहला जिहाद कहा जाता है।

खिलाफत आंदोलन की आड़ में किया गया हिंदुओं का नरसंहार
केरल के मालाबार इलाके में हुआ मोपला विद्रोह खिलाफत आंदोलन के साथ भड़का था। दरअसल प्रथम विश्वयुद्ध में तुर्की की हार हुई थी। इसके बाद अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से हटा दिया था। अंग्रेजों की इस कार्रवाई से दुनियाभर के मुसलमान नाराज हो गए। तुर्की के सुल्तान की गद्दी वापस दिलाने के लिए ही खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल मुस्लिम नेताओं अबुल कलाम आजाद, जफर अली खां और मोहम्मद अली जैसे नेताओं ने खिलाफत आंदोलन का समर्थन किया। इस आंदोलन को बापू का भी समर्थन प्राप्त था। महात्मा गांधी इस आंदोलन के जरिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में हिंदू और मुसलमानों को एकसाथ लाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन जिहादी सोच वालों के मन में कुछ और चल रहा था और उन्होंने हिंदुओं का नरसंहार कर दिया।

मोपला में हजारों हिंदू मारे गए, स्वामी श्रद्धानंद की भी गोली मारकर हत्या
मोपलाओं ने कई पुलिस स्टेशनों में आग लगा दी। सरकारी खजाने लूट लिए गए। अंग्रेजों को अपने निशाने पर लेने के बाद इन लोगों ने इलाके के अमीर हिंदुओं पर हमले शुरू कर दिए। कहा जाता है कि मोपला विद्रोह के दौरान हजारों हिंदू मारे गए, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुए, हजारों हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ा। बाद में आर्य समाज की तरफ से उनका शुद्धिकरण आंदोलन चला। जिन हिंदुओं को मुस्लिम बना दिया गया था, उन्हें वापस हिंदू बनाया गया। इसी आंदोलन के दौरान आर्य समाज के नेता स्वामी श्रद्धानंद को उनके आश्रम में ही 23 दिसंबर 1926 को गोली मार दी गई।

जिहादी बर्बरता भारत में वही, भारत से 4600 किलोमीटर दूर इजरायल में भी वही
एक शिशु था। अपनी मां का स्तनपान कर रहा था। अचानक से कुछ जिहादी दंगाई आते हैं और मां की छाती से लगे उस बच्चे को छीन लेते हैं। फिर उस बच्चे के दो टुकड़े कर देते हैं। यह मोपला में हिंदुओं के साथ की गई बर्बरता की कहानी कहता है। इस घटना के बारे में कांग्रेस पार्टी पार्टी की पूर्व अध्यक्ष एनी बेसेंट ने भी लिखा है। इसी तरह भारत से 4600 किलोमीटर दूर, करीब 102 वर्षों बाद इजरायल में जिहादी सोच वालों की मानसिकता नहीं बदली है। इजरायल के एक गांव में हमास आतंकियों द्वारा बच्चों का गला काट दिया जाता है। उनका अंग-अंग काट डाला जाता है। नन्हे-नन्हे बच्चों को जला दिया जाता है। युद्ध कोई नई बात नहीं है लेकिन इतनी बर्बरता इस जिहादी सोच वालों में क्यों है। क्या किसी मासूम से बच्चे का गला रेतते समय इनके मन में क्षण भर भी ये ख्याल नहीं आता कि इसकी क्या गलती है? जिहादी 102 वर्ष पहले भी वही थे, आज भी वही हैं। भारत में ये वही हैं और भारत से 4600 किलोमीटर दूर भी वही हैं। ऐसे आतताइयों के लिए मानवता दिखाने की बात की जाती है। इन्हें पीड़ित बताया जाता है। इनके लिए भारत में मुसलमान सड़क पर उतरते हैं। धिक्कार है, लानत है!

मुगलकाल में तोड़े गए 60 हजार से ज्यादा मंदिर
जिहादी सोच वालों ने मुगलकाल में भारत में करीब 60 हजार मंदिर तोड़ दिए गए थे। काशी, मथुरा, दिल्ली, आगरा से लेकर मध्य प्रदेश के धार तक मंदिर-मस्जिद का विवाद जारी है। इन विवादों में हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम आक्रांताओं ने हिंदुओं की आस्था पर चोट पहुंचाई थी। 60 हजार से ज्यादा मंदिरों को तोड़ डाला गया था। कई मंदिरों को तोड़कर मस्जिदों का निर्माण कराया गया था। इन मंदिरों में ज्यादा हिंदू, जैन और बौद्ध मंदिरों को तोड़ दिया गया था। मुगलकाल में आक्रांताओं ने काफी तरह से भारत की संस्कृति, हिंदू धर्म की आस्था को खंडित करने की कोशिश की। मंदिरों को तोड़ने का काम इसी में से एक है। मुगल काल में तोड़े गए मंदिरों की एकदम सही संख्या बता पाना मुश्किल है, क्योंकि उस दौरान का इतिहास भी मुगल शासकों ने अपने अनुसार लिखवाया था। ये जरूर कहा जा सकता है कि कई हजार मंदिरों को मुगलों ने तोड़ दिया था। कई के सबूत आज भी मौजूद हैं।

मुगल आक्रांताओं द्वारा तोड़े गए 10 प्रमुख मंदिर

1. सोमनाथ मंदिर, काठियावाड़ गुजरात
गुजरात के काठियावाड़ में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ मंदिर है। ये समुद्र के किनारे स्थित है। इसका जिक्र महाभारत, श्रीमद्भागवत और स्कंद पुराण में भी विस्तार से है। कहा जाता है कि चंद्रदेव ने भगवान शिव को अपना नाथ मानकर यहां उनकी तपस्या की थी। चंद्रदेव को सोम नाम से भी जाना जाता है। इसलिए इस मंदिर का नाम सोमनाथ पड़ा। आक्रांताओं ने इसे 17 बार लूटा और क्षतिग्रस्त किया, लेकिन हर बार ये उतनी ही मजबूती के साथ फिर खड़ा हुआ। यह मंदिर ईसा पूर्व से पहले ही अस्तित्व में आ गया था। इसका पुनिर्निर्माण 649 ईस्वी में वैल्लभी के मैत्रिक राजाओं ने किया। पहली बार इस मंदिर को 725 ईस्वी में सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल जुनैद ने तुड़वाया। इसके बाद राजा नागभट्ट ने इसका पुनिर्निर्माण 815 ईस्वी में करवाया। 1024 में फिर से महमूद गजनवी ने इस पर हमला बोला और मंदिर की पूरी संपत्ति लूटने के बाद इसे नष्ट कर दिया। महमूद गजनवरी के आक्रमण के बाद 1093 ईस्वी में गुजरात के राजा भीमदेव, मालवा के राजा भोज ने इसका पुनिर्निर्माण कराया। 1297 में अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति नुसरत खां, 1395 में मुजफ्फरशाह, 1412 में उसके बेटे अहमद शाह, 1665 ईस्वी और 1706 में औरंगजेब ने इस पर हमला किया। मंदिर को क्षतिग्रस्त किया और लूटपाट की।

2. राम जन्मभूमि, अयोध्या, उत्तर प्रदेश 
इतिहासकारों के मुताबिक, 1528 में बाबर के सेनापति मीर बकी ने अयोध्या के राम मंदिर को तुड़वाकर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। 1949 में कुछ लोगों ने गुंबद के नीचे राम मूर्ति की स्थापना कर दी थी। 1992 में कारसेवक ने विवादित ढांचे को तोड़ दिया। कोर्ट की लंबी लड़ाई के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया।

3. काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
कहा जाता है कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादिकाल से काशी में है। 1100 ईसा पूर्व राजा हरीशचंद्र और फिर सम्राट विक्रमादित्य ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। 1194 में मुहम्मद गौरी ने मंदिर में लूटपाट की और फिर तुड़वा दिया। बाद में इसे फिर हिंदू राजाओं ने बनवाया, लेकिन 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने इसे फिर तुड़वा दिया। 1585 ई. में राजा टोडरमल की मदद से पं. नारायण भट्ट ने फिर से यहां भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। 1632 में इसे फिर से तोड़ने के लिए शाहजहां ने सेना भेज दी, हालांकि हिंदुओं के विरोध के चलते ये नहीं हो सका, लेकिन काशी के 63 मंदिरों को शाहजहां ने तुड़वा दिया। 18 अप्रैल 1669 में औरंगजेब ने फिर से मंदिर पर आक्रमण कर दिया। दावा है कि मंदिर तोड़कर यहां पर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई। 1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने मंदिर का फिर से जीर्णोद्धार करवाया।

4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा, उत्तर प्रदेश
ऐसा कहा जाता है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्म स्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट करके उसी जगह 1660 ईस्वी में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था। 1770 में गोवर्धन में मुगलों और मराठाओं में जंग हुई। इसमें मराठा जीते। जीत के बाद मराठाओं ने फिर से मंदिर का निर्माण कराया।

5. मोढेरा सूर्य मंदिर, पाटन, गुजरात
अहमदाबाद से 100 किलोमीटर दूर पुष्पावती नदी के किनारे मोढेरा सूर्य मंदिर स्थापित है। इसका निर्माण सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ईस्वी में करवाया था। कहा जाता है कि मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने मंदिर पर आक्रमण किया और इसे तुड़वा दिया। इसमें लूटपाट भी की। कई मूर्तियों को खंडित करवा दिया।

6. हम्मी के मंदिर, हम्पी डम्पी, कर्नाटक
हम्पी मध्यकालीन हिंदू राज्य विजयनगरम् साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी। कर्नाटक में स्थित यह नगर यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थलों की सूची में भी शामिल है। यहां एक समय दुनिया के सबसे बेहतरीन और विशालकाय मंदिर बने थे, लेकिन 1565 में बरार की सेनाओं ने इसपर हमला कर दिया। इसे काफी हद तक नष्ट कर दिया।

7. रुद्र महालय, पाटन, गुजरात
पाटन जिले के सिद्धपुर में रुद्र महालय है। सरस्वती नदी के किनारे बसा ये काफी प्राचीन नगर है। इसका निर्माण 943 ईस्वी में मूलाराज सोलंकी ने शुरू करवाया था, जो 1140 ईस्वी में राजा सिद्धराज जयसिंह के काल में पूरा हुआ। 1094 में सिद्धराज ने रुद्र महालय का विस्तार करके श्रीस्थल का सिद्धपुर नाम रखा। इतिहासकारों का कहना है कि 1410-1444 ईस्वी के दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने इसका कई बार विध्वंस किया। अहमद शाह ने भी इसे तुड़वाया। इस मंदिर को आक्रांताओं ने तीन बार लूटा और बाद में इसके एक हिस्से पर मस्जिद बनवा दी।

8. मदन मोहन मंदिर, वृंदावन, मथुरा उत्तर प्रदेश
वैष्णव संप्रदाय के मदन मोहन मंदिर का निर्माण 1590 ईस्वी से 1627 ईस्वी के बीच रामदासी खत्री और कपूरी के द्वारा करवाया गया था। भगवान श्रीकृष्ण का एक नाम मदन मोहन भी है। भगवान की मूल प्रतिमा आज इस मंदिर में नहीं है। कहा जाता है कि मुगल शासन में प्रतिमा को राजस्थान स्थानांतरित कर दिया गया था। औरंगजेबकाल में इस मंदिर को भी निशाना बनाया गया था।

9. मार्तण्य सूर्य मंदिर, अनंतनाग कश्मीर
कश्मीर घाटी के अनंतनाग में कर्कोटा समुदाय के राजा ललितादित्य मुक्तिपाडा ने लगभग 725-61 ईस्वी में इस ऐतिहासिक और विशालकाय मार्तण्य सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था। ये कश्मीर के सबसे पुराने मंदिरों में शुमार है। अनंतनाग से पहलगाम के बीच एक जगह है, जिसे मटन कहा जाता है। कहा जाता है कि इसे मुस्लिम शासक सिकंदर बुतशिकन ने तुड़वाया दिया था। मुस्लिम इतिहासकार हसन अपनी किताब ‘हिस्ट्री ऑफ कश्मीर’ में लिखते हैं कि 1393 के आसपास सबसे ज्यादा कश्मीरी पंडितों पर सुल्तान बुतशिकन ने कहर बरपाया था। इतिहासकार नरेंद्र सहगल ने भी इसका जिक्र अपनी किताब व्यथित जम्मू कश्मीर में किया है। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘पंडितों पर जब अत्याचार हो रहा था तब हजरत अमीर कबीर (तत्कालीन धार्मिक नेता) ने ये सब अपनी आंखों से देखा। उसने मंदिर नष्ट किया और बेरहमी से कत्लेआम किया।’

10. मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु
भगवान शिव और देवी पार्वती को मीनाक्षी नाम से जाना जाता था। यह मंदिर उन्हीं को समर्पित है। राजा इंद्र ने इसकी स्थापना करवाई थी। हिंदू संत थिरुग्ननासम्बंदर ने इस मंदिर का वर्णन 7वीं शताब्दी से पहले ही कर दिया था। प्राचीन राजा पांडियन मंदिर के लिए लोगों से चंदा लेते थे। कहा जाता है कि 14वीं शताब्दी में मुगल मुस्लिम कमांडर मलिक काफूर ने मंदिर को तोड़ा और इसमें लूटपाट की। यहां से कई मूल्यवान आभूषण और रत्न लूटकर ले गया। बाद में अलग-अलग शासन में इसे हिंदू राजाओं ने बनवाया।


इजरायल ने 820 आतंकी ठिकाने तबाह करने के अलावा 163 फुटबॉल मैदान के बराबर हमास का सुरंग को भी किया ध्वस्त

इजरायल की सेना ने हमास के आतंकियों द्वारा किए जा रहे हमले के प्रत्युत्तर में और आक्रामक तरीके से पलटवार करना शुरू कर दिया है। इजरायली सेना ने एक 9.3 मील (14.96 किलोमीटर) लंबी सुरंग को ध्वस्त कर दिया, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसके लिए फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। इजरायल ने इसे ‘हमास का आतंकी मेट्रो टनल’ नाम दिया है।

‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF)’ ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी है कि इस सुरंग के क्षेत्रफल में 163 फुटबॉल के मैदान आ सकते हैं। या फिर यूँ कहें कि ये इसमें 46 एफिल टॉवर्स आ सकते हैं। इसमें 34 एम्पायर स्टेट बिल्डिंग्स समा सकते हैं। इस सुरंग की लम्बाई में दुनिया की सबसे ऊँची ईमारत बुर्ज खलीफा भी 18 की संख्या में आ सकते हैं। इजरायल ने कहा है कि अब इस 9.3 मील के क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसे रातोंरात ध्वस्त कर दिया गया।

इजरायल की सेना ने मई 18, 2021 बताया कि लेबनान की तरफ से उसके उत्तरी क्षेत्र की तरफ 6 रॉकेट्स फायर किए गए। हैरानी की बात तो ये है कि इनमें से एक भी रॉकेट इजरायल में नहीं पहुँच पाया और लेबनान में ही गिर गया। लेकिन, इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की और उन रॉकेट्स के स्रोत की तरफ जबरदस्त हमला बोला। IDF ने उत्तरी गाज़ा में हमास के मुख्य ऑपरेशन सेंटर पर भी धावा बोला।

इसी सेंटर से हमास के आंतरिक सुरक्षा बलों को संचालित किया जाता रहा है। इजरायल का कहना है कि ये फिलिस्तीन का ‘आतंकी केंद्र’ है। यहूदी मुल्क ने कहा कि उसने इसे ध्वस्त करने से पहले वहाँ से लोगों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय दिया। अब तक 820 से भी अधिक आतंकी केंद्रों पर इजरायल ने हमला किया है। साथ ही 21 बड़े आतंकी सरगनाओं को मार गिराया गया है। इन सबके पीछे हुस्सम अबू हर्बीद का हाथ बताया गया है।

उसने ही इजरायल पर एक हफ्ते पहले पहली बार रॉकेट से हमला किया, जिसके बाद हिंसा शुरू हुई। वो पिछले 15 वर्षों से इजरायल पर हमला करता आ रहा था। वो ‘नॉर्दर्न डिवीजन’ में इस्लामी जिहादी कमांडर के रूप में कार्यरत था। इजरायल ने उसे मार गिराया है। इजरायल का कहना है कि उसने अब तक ‘Operation Guardian of the Walls’ के तहत 130 आतंकियों को मार गिराया है। हमास के 460 रॉकेट्स मिसफायर हो गए। इजरायल की तरफ 3150 रॉकेट्स दागे गए, जिनमें 10 नागरिकों की मौत हो गई।

जम्मू-कश्मीर में वर्षों से बंद 50 हजार मंदिर खोलने की तैयारी में सरकार, जल्द होगा सर्वे: गृह राज्यमंत्री

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डीजम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार सालों से बंद पड़े 50 हजार मंदिरों को खोलने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक सरकार जल्द इन मंदिरों की पहचान करने के लिए सर्वेक्षण करवाने वाली है। इस खबर की पुष्टि खुद केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने की है। उन्होंने बताया है कि जिन मंदिरों का सर्वेक्षण सरकार करवाने जा रही है, वो ऐसे मंदिर हैं, जिन्हें तोड़ा गया है या फिर उनकी मूर्तियाँ खंडित की गई हैं। इसके अलावा गृह राज्य मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदिरों के साथ घाटी में लंबे वक्त से बंद पड़े स्कूलों को भी दोबारा खोलने के लिए भी सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "हमने कश्मीर घाटी में बंद पड़े स्कूलों के सर्वे के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जिन्हें दोबारा खोला जाएगा। इसके अलावा पिछले कुछ सालों में करीब 50 हजार मंदिर बंद हुए हैं, जिनमें से कुछ नष्ट हो गए थे और मूर्तियाँ टूटी हुई हैं। हमने ऐसे मंदिरों के सर्वे का भी आदेश दिया है। "

इस दौरान गृह राज्य मंत्री रेड्डी ने घाटी में सिनेमा खोलने के बारे में भी बात कही। उन्होंने कहा, “घाटी में पिछले 20 सालों से कोई सिनेमा नहीं खुला हुआ है, इसलिए हम एक सिनेमा खोलने की भी सोच रहे हैं। हम उन स्कूलों, सिनेमाघरों और मंदिरों का सर्वेक्षण करवाएँगे जिन्हें बंद कर दिया गया है।”
इसके अलावा उन्होंने मोदी सरकार के बारे में बताया कि मोदी सरकार कश्मीर में आतंकवाद मिटाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। हमारी सरकार घाटी से नफरत को जड़ से खत्म करके रहेगी।
दशकों तक घाटी में आतंकवाद के कारण पलायन के लिए मजबूर हुए कश्मीरियों के विस्थापन के बाद कई मंदिरों को वहाँ बंद कर दिया गया था और आतंकियों ने बड़ी तादाद में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करने के साथ मूर्तियों को भी खंडित किया था। यहाँ मंदिरों में तोड़फोड़ हुई थी और उनके द्वार भी बंद कर दिए गए थे। इन मंदिरों में शोपियाँ के भगवान विष्णु और पहलगाम में भगवान शिव के प्राचीन मंदिर भी हैं। जिन्हें अब सरकार खोलने की तैयारी में है।