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हिंदी नहीं… हकीकत में उर्दू है बाहरी भाषा: उर्दू अरबी शब्द को हिंदी में क्या कहते हैं? वोटबैंक की लालच में हकीकत कब तक नजरअंदाज करेंगे कांग्रेस से जुड़े द्रविड़-कन्नड़-मराठा नेता, कब तक चलेगी गुंडागर्दी की राजनीति?

                                                                                                                                                                        फोटो साभार - ऑपइंडिया हिन्दी
अब राज ठाकरे की पार्टी और गुंडों में क्या फर्क है? चुनाव आयोग को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की मान्यता पर विचार करना चाहिए। ग़नीमंत यह है इस गुंडा पार्टी का किसी भी सदन में कोई सदस्य नहीं अगर होता फिर तो गुंडागर्दी का आलम देखते ही बनता। लोग महाराष्ट्र छोड़ भाग रहे होते। 
भाषाई कट्टरता और हिंसक प्रवृत्ति एक बार फिर भारतीय सामाजिक और राजनीतिक दृश्य को तब कलंकित करती दिखी जब 29 जून 2025 को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के मीरा रोड उपनगर में एक मिठाई की दुकान के 48 वर्षीय मालिक बाबूलाल खिमजी चौधरी पर केवल इसलिए हमला कर दिया कि उन्होंने मराठी में बातचीत करने से इनकार कर दिया था।  

बाबूलाल खिमजी चौधरी की ‘जोधपुर स्वीट्स और नमकीन’ नाम की दुकान है। उन पर तब हमला हुआ जब मनसे के कार्यकर्ता करण कंडांगीरे (मनसे उप शहर प्रमुख), पामोद नीलेकट (वाहतुक सेना जिला आयोजक), अक्षय दलवी, सचिन सालुंखे और अमोल पाटिल समेत 7 लोग दुकान में आकर मराठी में लेनदेन की माँग करने लगे।

बातचीत जल्द ही बहस में तब्दील हो गई। ये टकराव तब और उग्र हो गया जब पीड़ित ने उनके उस झूठे दावे पर आपत्ति जताई कि महाराष्ट्र विधानसभा ने व्यवसायों में मराठी भाषा के प्रयोग और मराठी भाषी कर्मचारियों की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है।

यह घटना न केवल भाषा के नाम पर की जा रही गुंडागर्दी को दिखाता है, बल्कि उन क्षेत्रीय दलों की रणनीति पर भी सवाल उठाता है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा में बने रहने के लिए इस तरह से गुंडागर्दी का सहारा ले रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को चोट पहुँचाती हैं, साथ ही यह पूरे राज्य में गुस्सा और समाज में आपसी झगड़े को भी बढ़ावा देती हैं।

भाषा की लड़ाई से राजनीति हुई फिर जिंदा

महाराष्ट्र में हाल ही में भाषा के नाम पर गैर-मराठी बोलने वालों को परेशान किया गया। एमएनएस के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर जल्दी ही जमानत पर छोड़ दिया गया।

एमएनएस और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) जैसे दल लंबे समय से मराठी अस्मिता की बात करते आ रहे हैं, लेकिन यह ज्यादातर दूसरों को डराने और परेशान करने तक ही सीमित रहा है।

कुछ ही दिनों पहले, जब राज्य सरकार ने स्कूलों में हिंदी शुरू करने का फैसला वापस लिया, तो उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने ‘मराठी मानुष’ की एकता की बात की। इसके विरोध में उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने सरकारी आदेश की प्रतियाँ जला दीं थी।

महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहाँ कई भाषाएँ बोलने वाले लोग रहते हैं। यहाँ बॉलीवुड जैसी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री भी है। आम मराठी लोग गैर-मराठी बोलने वालों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन MNS जैसी कुछ क्षेत्रीय पार्टियाँ भाषा के नाम पर झगड़े और डर का माहौल बना रही हैं।

राज्य की बीजेपी सरकार ने इसे लेकर साफ और सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार (4 जुलाई 2025) को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मराठी भाषा पर गर्व करना गलत नहीं है, लेकिन भाषा के नाम पर गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग भाषा के आधार पर मारपीट करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमें सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करना चाहिए।

हिंदी को लेकर विवाद करना और अंग्रेजी को अपनाना समझ से बाहर है। कानून हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। एक अहम बात यह भी है कि जहाँ हिंदी, गुजराती और दूसरी भाषाएँ बोलने वालों को निशाना बनाया जाता है, वहीं उर्दू भाषा को इस गुस्से से अछूता रखा गया है।

हिंदी और मराठी एक जैसी लिपि और जड़ों से जुड़ी हैं, फिर भी हिंदी को ‘उत्तर भारतीय थोपाव’ कहा जाता है, जबकि उर्दू पर कोई सवाल नहीं उठता।

देश के कई राज्यों में भाषा को लेकर भेदभाव और राजनीतिक विवाद बढ़ती जा रही है। तमिलनाडु में DMK सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का यह कहकर विरोध किया कि यह तमिल भाषियों पर हिंदी थोपने का प्रयास है।

हालाँकि नीति में हिंदी अनिवार्य नहीं थी और छात्र इसके विकल्प के तौर पर अपनी पसंद की कोई भी भाषा चुन सकते थे। मार्च 2024 में महाराष्ट्र के पुणे के भूषण मंडलिक को तमिलनाडु में सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि वह तमिल नहीं बोल पाते थे।

इसी तरह कर्नाटक में एक ओड़िया रेस्टोरेंट को स्थानीय भाषा कन्नड़ के नाम पर अपनी ओड़िया नेमप्लेट हटाने के लिए मजबूर किया गया, जबकि पहले से कन्नड़ में नाम का बोर्ड लगा हुआ था।

झारखंड में 2022 में JMM सरकार ने भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची से बाहर कर दिया, जबकि उर्दू को बनाए रखा और हिंदी को किसी भी जिले में क्षेत्रीय भाषा का दर्जा नहीं दिया गया, जिससे भारी विरोध हुआ।

शिवसेना (UBT) ने भी मुस्लिम बहुल इलाकों में उर्दू में पोस्टर लगाकर उद्धव ठाकरे को ‘अली जनाब’ बताया, लेकिन हिंदी को अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता है। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में भी उर्दू को बढ़ावा दिया जा रहा है जबकि हिंदी का विरोध किया जाता है।

यूपी में उर्दू अनुवाद की माँग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसका मकसद बच्चों को मौलवी बनाना है, वैज्ञानिक नहीं। इन सभी घटनाओं से साफ है कि कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के लिए भाषा को हथियार बना रहे हैं, जहाँ खासकर हिंदी को निशाना बनाया जा रहा है और उर्दू को विशेष छूट दी जा रही है।

हिंदी से नफरत लेकिन वोट के लिए उर्दू और अंग्रेजी भाषा स्वीकार्य

देश में भाषाओं को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यह विवाद भाषा की असली चिंता से ज्यादा राजनीति से जुड़ा है। कुछ क्षेत्रीय और मुस्लिम-तुष्टिकरण करने वाली पार्टियाँ हिंदी का विरोध हमेशा से करती रही हैं और इसे थोपने का आरोप भी लगाती हैं।

जबकि उर्दू को बढ़ावा देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती तो सवाल ये है कि भाषा के साथ इस तरह का राजनीतिक और सामाजिक भेदभाव आखिर क्यों हो रहा है। उत्तर प्रदेश में 1989 में कॉन्ग्रेस सरकार ने सिर्फ मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बना दिया था।

यही हाल पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी देखा गया, जहाँ उर्दू को विशेष दर्जा मिला। लेकिन हिंदी, जो संस्कृत से निकली है और देश की जमीन से जुड़ी है, उसे ‘उत्तर भारतीय थोपाव’ कहकर बदनाम किया जाता है। उर्दू की उत्पत्ति इस्लामी आक्रमणों के समय हुई थी, जब विदेशी शासकों को स्थानीय जनता से संवाद के लिए एक मिली-जुली भाषा की जरूरत थी।

उर्दू में फारसी और अरबी के शब्द शामिल हैं, लेकिन इसकी व्याकरण हिंदी की है। मुगलों और उनके बाद कई शासकों ने इसे बढ़ावा दिया, जिससे यह शासन और प्रशासन की भाषा बनी। बॉलीवुड में भी उर्दू को खास बढ़ावा मिलात रहा है।

गीतकारों और लेखकों ने उर्दू के शब्दों और इस्लामिक शब्दावली (जैसे जन्नत, खुदा, काफिर आदि) को फिल्मों में खूब इस्तेमाल किया, जिससे हिंदी को कमतर और उर्दू को ज्यादा शिष्ट भाषा की तरह पेश किया गया।

इसने उर्दू की एक खास छवि बना दी और आम हिंदी को हाशिए पर डाल दिया। इसका नतीजा ये रहा कि आज भी कुछ राजनीतिक दल उर्दू को विशेष दर्जा देते हैं, उसके लिए फंड जारी करते हैं जबकि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को नजरअंदाज किया जाता है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हिंदी बोलने वाले आम लोगों को निशाना बनाया जाता है, जबकि उर्दू बोलने वाले मुसलमानों पर कोई सवाल नहीं उठाता। मुसलमानों से कोई यह नहीं पूछता कि वे मराठी या कन्नड़ में बात क्यों नहीं करते।

हाल ही में महाराष्ट्र में एमएनएस का एक कार्यकर्ता मुस्लिम इलाके में मराठी थोपने गया तो उसे माफी तक माँगनी पड़ी और वो भी हिंदी में। इसके बावजूद हिन्दी को सम्मान नहीं मिल पा रहा है, लोग उसी का विरोध कर रहे है।

अगर इसे ठीक तरह से समझने की कोशिश की जाए, तो ये भाषा की लड़ाई नहीं बल्कि एकतरफा राजनीति है जिसमें मुस्लिम समुदाय और उर्दू को छूने से सभी पार्टियाँ डरती हैं क्योंकि विरोध का डर होता है, जबकि हिंदुओं और हिंदी के खिलाफ बोलना ‘सुरक्षित’ माना जाता है। यही कारण है कि उर्दू, जो सच में एक बाहरी और थोपी गई भाषा थी, आज विशेष दर्जा पाती है और हिंदी को बदनाम किया जाता है।

भाषा पर गर्व करना गलत नहीं है और जो लोग किसी राज्य में रहते हैं, अगर वे वहाँ की भाषा सीखें तो यह एक अच्छा कदम है। लेकिन जबरदस्ती करना, डराना और दुकान या संस्थानों को अपनी मातृभाषा में बोर्ड न लगाने देना गलत है।

इससे भाषाओं का सम्मान नहीं होता, बल्कि नफरत और दूरी बढ़ती है। सच तो ये है कि यह पूरा भाषा विवाद कुछ नेताओं द्वारा केवल मोदी सरकार का विरोध करने और क्षेत्रीय गर्व के नाम पर राजनीतिक फायदा उठाने का एक तरीका है, न कि भाषाओं को बचाने या बढ़ाने की कोई सच्ची कोशिश।

हनुमान चालीसा: जानिए किस चौपाई से क्या लाभ होता है

त्रेता युग मे सम्पूर्ण राक्षस कुल का नाश कर रामराज्य स्थापित कर प्रभु श्रीराम अपने लीला सहयोगीगणों के साथ अपने निज धाम पधारने लगे तो हनुमानजी अपने प्रभु के बिना कैसे रह सकते थे, लेकिन प्रभु मे उन्हे कलयुग मे राम नाम के प्रचार, सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के दलन के लिये पृथ्वी मे ही रुकने का आदेश दिया। कलयुग प्रारम्भ होने पर आतताई, लुटेरों तथा अधर्मी लोगो से सज्जनों की रक्षा के लिये भगवान शिव पार्वती ने रामचरितमानस तथा हनुमानचालीसा की रचना अवधी भाषा मे की। 

हनुमान चालीसा की चमत्कारी चौपाइयां

रामचरितमानस तथा हनुमान चालीसा की एक-एक चौपाई भगवान शिव द्वारा रचित शाबर मंत्र है। जिनके पाठ करने से जातक की सभी समस्याओं का समाधान होता है। कुछ लोग रट्टा मारकर इसे पढ़ते है यदि अर्थ समझकर इसे दिल से पढ़ा जाय तो इसकी एक-एक चौपाई जीवन के हर क्षेत्र मे सफलता देने वाली है। ध्यान रहे हनुमानजी पवनपुत्र है और पवन यानी हवा आपके आसपास ही है। आप श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा की चौपाईयों का पाठ करें पवनरुप मे हनुमानजी आपकी मदद के लिये आपके साथ ही है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई के पाठ से गुरुकृपा होती है
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
अर्थ -गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से बल बुद्धि और निरोगी काया
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।
अर्थ-हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से हनुमत कृपा मिलती है
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥
अर्थ - श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से शारीरिक और आत्मिक बल की प्राप्ति होती है
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥
अर्थ- हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से बुरी संगत से छुटकारा और अच्छे लोगो का साथ मिलता है
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥
अर्थ- हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से आर्थिक समृद्धि अच्छा खानपान, संस्कार और पहनावा प्राप्त होता है
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥
अर्थ- आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।
हनुमान चालीसा की यह चौपाई विजय दिलाती है
हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥
अर्थ- आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से प्रताप बढ़ता है
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥
अर्थ - हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से ज्ञान, बुद्धि और त्वरित बुद्धि
विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥
अर्थ - आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।
हनुमान चालीसा की यह चौपाई रामकृपा और यश दिलाती है
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥
अर्थ -आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है
हनुमान चालीसा की यह चौपाई महान संकट में चमत्कारिक कृपा दिलाती है
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥
अर्थ -आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से भयानक संकट या शत्रुपक्ष से घिरने पर मदद मिलती है
भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥
अर्थ - आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से शारीरिक व्याधि निवारण मे मदद मिलती है
लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥
अर्थ -आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से वरिष्ठ लोगों की कृपा प्राप्त होती है
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥
अर्थ -श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से यश और मान सम्मान मिलता है
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥
अर्थ - श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से सभी ओर प्रसिद्धि और कीर्ति बढ़ती है
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥
अर्थ-श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से यश कीर्ति की वृद्धि होती है, मान सम्मान मिलता है
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥
अर्थ -यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।
हनुमान चालीसा की यह चौपाई राजकीय मान सम्मान दिलाती है।
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥
अर्थ -आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।
हनुमतकृपा का विश्वास सभी ओर सफलता का सूचक है
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17
अर्थ-आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से सूर्यकृपा मिलती है, विद्या, ज्ञान और प्रतिष्ठा मिलती है
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥
अर्थ-जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया
हनुमान चालीसा की यह चौपाई जातक को महान से महान संकट से मुक्ति दिलाती है
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥
अर्थ- आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से जीवन की सभी समस्याओं का अंत होता है
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥
अर्थ -संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से प्रभु कृपा प्राप्त होती है
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥
अर्थ - श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से जातक निर्भयता तथा सभी सुख प्राप्त करता है
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥
अर्थ- जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से जातक को अनंत कीर्ति प्राप्त होती है
आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥
अर्थ-आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से बुरी आत्मा, भूतप्रेत दूर भागते हैं
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥
अर्थ-जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से सभी कष्टों का नाश होता है
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥
अर्थ-वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई का स्मरण जातक को सभी बंधनों से मुक्त करता है
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥
अर्थ -हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ राजकीय कार्यों मे सफलता मिलती है
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥
अर्थ -तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।
हनुमान चालीसा की यह चौपाई सभी मनोरथ सिद्ध करने वाली है
और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥
अर्थ -जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ जातक की हर ओर कीर्ति मे वृद्धि करती है
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥
अर्थ -चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से दुष्टों का नाश होता है
साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥
अर्थ -हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है
हनुमान चालीसा की यह चौपाई माता सीता के आशीर्वाद से मनोरथ पूर्ण करती है
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
अर्थ -आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।
अष्ट सिद्धियों के नाम
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से मूल रहस्यों की प्राप्ति होती है
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥
अर्थ-आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।
हनुमान चालीसा की यह चौपाई हनुमत कृपा से सभी दुखों का नाश करती है
तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥
अर्थ -आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है
हनुमान चालीसा की यह चौपाई आपका बुढ़ापा और परलोक दोनो सुधारती है
अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥
अर्थ -अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे
अन्य किसी देव की आराधना करने की आवश्यकता नही होती
और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥
अर्थ -हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ सभी प्रकार के कष्ट हरने मे समर्थ है
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥
अर्थ-हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।
हनुमानजी गुरु स्वरूप मे आपकी मदद करते है
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥
अर्थ- हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।
जातक बंधन से छुटकारा पाता है
जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥
अर्थ - जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई से शिव पार्वती की कृपा होती है
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥
अर्थ -भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ निरंतर प्रभु कृपा दिलाती है
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥
अर्थ -हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास करते है
हनुमान चालीसा की यह चौपाई जीवन मे मंगलदायक और संकटों को हरती है
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
अर्थ -हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिये।
रामचरितमानस, हनुमान चालीसा और रामरक्षास्त्रोत सभी शिव आज्ञा से रचित है इन पर भगवान शिव जो की आदिगुरु है। महाकाल है मां भगवती सहित कृपा है इसीलिये गणेशजी और शिवपार्वती का ध्यान कर इन चौपाई का निरन्तर पाठ करें निश्चित ही सफलता प्राप्त होगी। प.चंद्रशेखर हिमांशु

क्या ममता बनर्जी ने मंच से दी ‘बहन वाली गंदी गाली’?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर ये बताने की कोशिश की है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छी हिंदी जानती है। हालाँकि, ये बात और है कि जनता के बीच हिंदी बोलने की उनकी कोशिश ने उनकी जगहँसाई करवा दी है। कुछ यूजर्स तो ये तक कह रहे हैं कि उन्होंने गंदी गाली दी है।

जी हाँ, सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने ममता बनर्जी की वायरल क्लिप देख कर दावा किया कि उन्होंने क्लिप में केम छो के बाद ‘बैं%&” कहा। इसे सुन कई लोगों ने चुटकी ली।

हमने भी सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो को ध्यान से सुना। पड़ताल में पाया कि मुख्यमंत्री बनर्जी ने किसी तरह की कोई अभद्र बात नहीं कही है। मगर फिर भी वह लोगों के बीच हँसी का पात्र बन गई।

अपनी स्पीच में सीएम बनर्जी ने जताया कि वह गुजराती भाषा में भी पारंगत है। इसके बाद अपनी बात के सबूत देने के लिए वह कहने लगी, ‘केम छो? भाल छो।’ अब ये शब्द गुजराती के ही हैं। ‘केम छो’ का अर्थ होता है कि आप कैसे हो? जबकि भाल छो शब्द सुन कर लगता है कि उन्होंने खुद के गुजराती प्रवाह को साबित करने के लिए इसका प्रयोग किया।

बंगाली में भालो का अर्थ ‘बढ़िया’ होता है। तो, ‘आप कैसे हैं’ -सवाल का अर्थ बंगाली में ‘आमी भालो आछी’ कहकर ही दिया जाता है। जिसका अनुवाद होता है- ‘मैं बढ़िया हूँ’, ‘मैं अच्छे से हूँ’। गुजराती में इसी सवाल का अर्थ ‘माजामा’ होता है।

यानी ये तो स्पष्ट है कि जनता के सामने गुजराती भाषा में खुद को निपुण दिखाने के लिए सीएम ने बंगाली शब्द का प्रयोग गुजराती भाषा के साथ मिलाकर किया। शायद इसी कारण यूजर भी कन्फ्यूज हो गए और उस 2 मिनट 20 सेकेंड की वीडियो में 0.59 सेकेंड पर कहे गए शब्द पर हँसी उड़ाने लगे।

जनता के सामने खुद के भाषाई ज्ञान की जानकारी देते हुए सीएम बनर्जी ने पीएम मोदी पर कई बार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पीएम टेलीप्रॉम्पटर से पढ़कर स्पीच देते हैं। इसके अलावा उन्होंने अपने पंजाबी भाषा के ज्ञान से भी जनता को अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि वह बहुत समय पहले पंजाब गई थी। वहाँ वह मुश्किल से ही लोगों को पहचान पा रही थीं। उन्हें सब एक से लग रहे थे। मगर वहाँ गुरुद्वारे में उन्होंने हलवा माँग के खाया। अपनी जनता को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे बिहारियों के यहाँ लिट्टी मशहूर है, वैसे ही गुरुद्वारे में हलवा बहुत अच्छा मिलता है।

सबसे हास्यास्पद बात यह है कि ममता बनर्जी ने अपनी स्पीच में इतनी दफा हिंदी की गड़बड़ी की, लेकिन फिर भी आत्मविश्वास से वो शब्द दोहराती रहीं। उन्होंने एक जगह तो हिंदू धर्म में पूजनीय विष्णु भगवान के लिए माता शब्द का प्रयोग किया और कहा जय बिष्णु माता।

हिन्दी बने पूरे देश की भाषा: गृहमंत्री रहते पी चिदंबरम ने की थी पैरवी

पी चिदंबरम हिंदी

आज कांग्रेस हो अथवा दक्षिण की पार्टियां या फिर उत्तर एवं पूर्व के अलावा अन्य दूसरे राज्यों के नेता हिन्दी भाषा का विरोध करते हों, लेकिन दिल्ली तक अपना सफर तय करने के लिए हिन्दी का ज्ञान प्राप्त करते हैं। लेकिन अपने-अपने राज्यों में वोट लेने के लिए हिन्दी भाषा का विरोध करते हैं, ताकि जनता मुख्यधारा से न जुड़ सकें, अब इसे नेताओं की दोगली मानसिकता न कहा जाए तो क्या कहा जाए? मासूम और भोली जनता इनके झांसे में आकर प्रदर्शन और भूख हड़तालें कर, इन नेताओं के सपनों को साकार करते हैं। क्या हिन्दी भाषा को लॉलीपॉप समझते हैं ये नेता? आखिर कब इस दोगली मानसिकता का अंत होगा?
दिल्ली अथवा किसी भी हिन्दी भाषी राज्य में दक्षिण के किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जाता, जबकि दक्षिण में एकदम विपरीत। जिसका व्यक्तिगत अनुभव अपने बैंगलोर एवं हैदराबाद प्रवास के दौरान करता हूँ। ऐसा नहीं है, समस्त लोग ऐसा भेदभाव करते हैं, हैं कुछ जो हिन्दी न जानते हुए भी प्रिंट रेट पर वस्तु देते हैं, लेकिन कुछ लोग हिंदी भाषियों से प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत वसूलते हैं। 
भ्रष्टाचार के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम 74 वर्ष के हो गए। आज भले चिदंबरम हर बात पर मोदी सरकार को कोसते हों पर किसी वक्त हिंदी को लेकर उन्होंने ठीक वैसी ही लाइन ली थी, जैसा इस बार हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था। दिलचस्प यह है कि जब चिदंबरम ने हिंदी की पैरवी की थी, तब वे भी केन्द्र में गृह मंत्री ही हुआ करते थे। अभी शाह के बयान से बिफरी डीएमके भी तब उनके साथ सरकार में शामिल थी।
सितम्बर 14, 2019 को हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा होने के कारण हिंदी राष्ट्र की एकता बनाने रखने में अहम योगदान दे सकती है। हालाँकि, शाह ने कहा कि भारत में बोली जाने वाली सभी भाषाओं का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन हिंदी के रूप में एक ऐसी भाषा की ज़रूरत है जो वैश्विक स्तर पर देश की पहचान बने। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करें, लेकिन हिंदी का इस्तेमाल कर सरदार और बापू के सपने को भी साकार करें।
अब आते हैं कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम के करीब 9 साल पहले हिंदी को लेकर दिए बयान पर। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहते चिदंबरम ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि वो राजभाषा हिंदी को पूरे देश की भाषण बनाने की आशा रखते हैं। साथ ही उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को सम्बोधित करते हुए कहा था कि हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। देखें वीडियो:

अब उन्हीं पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ‘हिंदी थोपे जाने’ की बात करते हैं और उनकी पार्टी के गठबंधन साथी स्टालिन हिंदी के ख़िलाफ़ बयान देते हैं। स्टालिन की डीएमके भी उस समय कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन में थी, जब चिदंबरम ने 2010 में हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने की बात कही थी। तमिल अभिनेता कमल हासन कहते हैं कि कोई भी ‘शाह, सुल्तान या सम्राट’ हिंदी को पूरे देश की भाषा नहीं बना सकता। चिदंबरम की ही पार्टी के नेता सिद्दारमैया हिंदी के अमित शाह के बयान को एकता तोड़ने वाला बताते हैं।
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चिदंबरम ने तब सरकारी दफ़्तरों में अधिकारियों के बीच पत्र-व्यवहार व अन्य संचार माध्यमों में भी हिंदी का इस्तेमाल किए जाने की पैरवी की थी। आज उनके बटे, उनकी पार्टी और उनके गठबंधन साथी शाह के बयान के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रहे हैं। इससे तो यही माना जा सकता है कि सत्ता में रहने और न रहने पर कॉन्ग्रेस नेताओं की सोच समान विषय को लेकर भिन्न रहती है। या फिर यह भी हो सकता है कि अंधविरोध के इस दौर में वह ये नहीं देखना चाहते कि मोदी-शाह सही बोल रहे या ग़लत, सिर्फ़ विरोध करना जानते हैं।