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चिदंबरम ने माना- राहुल मामले में नहीं मिल रहा जनता का समर्थन; समर्थन में जनता तो दूर कांग्रेसी भी नहीं पहुँचे

मोदी सरनेम मामले से पहले तीन बार माफी मांग चुके राहुल गांधी पार्टी के लिए बोझ बन गए हैं। सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी पर मानहानि के 6 केस दर्ज हैं और वह सात मामलों में जमानत पर हैं। कांग्रेस की निगेटिव राजनीति को लोग नकारने लगे हैं।

राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कांग्रेस द्वारा आयोजित सत्याग्रह में कई कांग्रेसी भी रुचि नहीं ले रहे हैं। इन सभाओं में भीड़ न जुटने पर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के हाईकमान वाले नेता नाराज हैं। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निष्क्रिय बता कर 86 नेताओं के नाम भेजे जाने के दावे किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं पर कांग्रेस आला कमान जल्द कार्रवाई कर सकता है। इस कार्रवाई में पार्टी में महत्वहीन पद देना और आने वाले चुनावों में बड़ी जिम्मेदारी से अलग करना भी शामिल हैं।

टीवी परिचर्चाओं में भाजपा द्वारा एक बात बड़ी प्रमुखता से कही जाती है, पार्टी ही राहुल को गंभीरता से नहीं ले रही। जहां तक सदस्यता जाने की बात है, इसके पीछे भी कांग्रेस का ही हाथ होता प्रतीत हो रहा है। मुस्लिम मुद्दों पर कांग्रेस में एक से बढ़कर एक धुरन्दर वकील खड़े हो जाते हैं, लेकिन राहुल के मुद्दे पर सभी के खामोश रहने के पीछे बहुत बड़ा षड्यंत्र जान पड़ता है। किसी ने राहुल को माफ़ी मांगने तक के लिए नहीं कहा।  

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से खबर दी जा रही है कि पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने धरने-प्रदर्शन से दूर नेताओं को कार्रवाई का इशारा भी कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी लाइन पर न चलने वाले नेताओं की कांग्रेस में कोई जरूरत नहीं है। जयपुर के एक सम्मेलन में खुद वह पहले पहुँच गए थे, लेकिन अन्य कार्यकर्ता बाद में आए। इस दौरान उन्होंने यह भी पाया कि पार्टी मुख्यालय की तरफ से भेजे गए पोस्टरों को अनदेखा कर के जयपुर जिला टीम ने अपना खुद का पोस्टर बना डाला था। इस बात से डोटासरा का पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया।

गोविन्द सिंह डोटसरा ने गुस्से में यह तक कह डाला कि पर्दे के पीछे जो भी लोग खेल कर रहे हैं उन पर पार्टी की नजर है। धरने-प्रदर्शन से दूर लोगों गोविन्द सिंह ने 6 महीने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पार्टी लाईन से हट कर चल रहे लोग कांग्रेसी नहीं रह जाएँगे। राहुल गाँधी की लोकसभा सदस्यता खत्म होने का जिक्र करते हुए गोविन्द सिंह ने कहा कि अब भी जिसका खून नहीं खौल रहा है उसके कांग्रेसी होने पर प्रश्नचिन्ह है। अंत में उन्होंने राहुल के साथ नहीं तो कांग्रेसी नहीं भी कहा।

राहुल गाँधी की शान में कसीदे गढ़ते हुए गोविन्द सिंह ने कहा, “लानत है ऐसी राजनीति के ऊपर। ऐसी पार्टी जिसने हमें मान सम्मान दिया। ऐसा नेता जिसने इस देश को अपने और अपने परिवार के खून से सींचा है। अगर उसके ऊपर इस तरह की बात आती है तो मान लो कि देश के हर नागरिक को तैयार रहना चाहिए। जो AC के अंदर बैठे TV पर कौन आया-कौन गया देख रहे हैं ऐसे कांग्रेसियों की हमको जरूरत नहीं है।”

राहुल, प्रियंका और सोनिया के ऊलजलूल बयानों से अब कांग्रेसी भी जरुरत से ज्यादा दुःखी हो चुके हैं। कुछ कांग्रेस समर्थकों का मत है कि जब तक कांग्रेस परिवार की गुलामी में रहेगी, इसका डूबना निश्चित है। ये तीनों बोलने से पहले बिलकुल भी नहीं सोंचते कि जनता का मत क्या है और हमें क्या बोलना चाहिए और क्या नहीं।   

चिदंबरम ने माना- राहुल मामले में नहीं मिल रहा जनता का समर्थन

‘सारे मोदी चोर हैं’ बयान पर सूरत कोर्ट से दोषी ठहराए जाते ही कानून के अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म हो गई। सूरत कोर्ट से मौका दिए जाने पर भी नाखून कटाकर शहीद होने की कोशिश में राहुल गांधी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। जबकि राहुल गांधी इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में तीन बार माफी मांग चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी को ‘पीड़ित दिखाओ और कांग्रेस बचाओ’ अभियान के तहत वकीलों की फौज होते हुए भी पार्टी ने विक्टिम कार्ड खेलने की कोशिश की।

राहुल गांधी को अयोग्य ठहराने जाने पर प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के तमाम नेताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नैरेटिव बनाने के लिए देश भर में धरना प्रदर्शन और सत्याग्रह किया। दिल्ली सहित अन्य जगहों पर काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन किया गया। लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में जिस तरह से पिछड़ी जाति का अपमान किया है, उससे पार्टी को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने यह स्वीकार भी किया है कि राहुल गांधी को लेकर पार्टी को आम लोगों का समर्थन नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने माना कि राहुल के समर्थन में लोग सड़कों पर नहीं उतर रहे हैं।

इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत में जब चिदंबरम से पूछा गया कि राहुल गांधी के अयोग्य होने के बाद जनता उनके समर्थन में आंदोलन करने क्यों नहीं आ रही है। तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से लोग प्रदर्शन करने सड़क पर नहीं उतर रहे हैं। सीएए मामले में भी सिर्फ मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। हैरानी है कि दूसरे देशों की तरह लोग यहां प्रदर्शन करने नहीं आ रहे हैं। ये निराशाजनक है कि राहुल मामले में भी लोगों में कोई गुस्सा नहीं दिख रहा है।

सोनिया-राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस मुक्त भारत की ओर पार्टी
वर्तमान में भले ही मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन ये सभी जानते हैं कि मनमोहन सिंह की तरह उनका भी संचालन रिमोट कंट्रोल से हो रहा है। पार्टी के लिए गांधी परिवार ही सब कुछ है। पार्टी के सभी नेताओं के लिए सर्वेसर्वा सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही हैं। जिस राहुल गांधी के लिए पार्टी के नेता फिलहाल धरना-प्रदर्शन में लगे हैं उनके नेतृत्व में पार्टी 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से ही पतन की ओर है। लोकसभा-विधानसभा से लेकर नगर निकायों के चुनावों तक में पार्टी को लगातार मुंह की खानी पड़ रही है। 2014 के बाद से अब तक 8 साल में 53 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, इनमें से 44 में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस अब देश के कुछ राज्यों तक में सिमट कर रह गई है। इनमें भी सिर्फ दो राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही उसकी पूर्ण बहुमत की सरकार और कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं। झारखंड में पार्टी छोटे सहयोगी दल की भूमिका में है। राहुल गांधी के कारण पार्टी के सैकड़ों जनाधार वाले नेता पार्टी छोड़कर बाहर जा चुके हैं।


वैक्सीन पॉलिसी: पी चिदंबरम और राजदीप सरदेसाई ने कोरोना वैक्सीन को लेकर फैलाया था प्रोपेगंडा; चिदंबरम ने वापस लिया बयान

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जहाँ कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाया, वहीं ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी अपने पुराने बयान से यू-टर्न लेते हुए केंद्र सरकार के फैसले का श्रेय विपक्षी नेताओं को दे डाला। विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर हंगामा करने में देर नहीं मचाई और दावा किया कि वैक्सीन नीति की प्रक्रिया ‘सेंट्रलाइज्ड’ हो, ये उनकी शुरू से माँग थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी यही किया।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ का संदेश यही है कि केंद्र सरकार ने अपनी पिछली गलतियों से सीख ली है और उसने जो दो प्रमुख गलतियाँ की थीं, उसे सुधारने का प्रयास किया है। लेकिन, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर झाँसा देने का आरोप लगाते ये भी कहा कि उन्होंने अपनी गलतियों के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने दावा किया कि किसी ने भी ऐसा नहीं कहा था कि केंद्र को वैक्सीन की खरीद नहीं करनी चाहिए।

तमिलनाडु के कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अब मोदी कह रहे हैं कि राज्यों ने वैक्सीन की खरीद के लिए इच्छा प्रकट की थी, इसीलिए उन्हें ये सुविधा दी गई थी। उन्होंने सवाल दागा था कि किस राज्य के किस मुख्यमंत्री ने किस समय वैक्सीन की खरीद के लिए इच्छा प्रकट की थी या ऐसी माँग की थी? इसके बाद लोगों ने उनके सामने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पत्र पेश किया, जिसमें उन्होंने यही माँग रखी थी।

फिर पी चिदंबरम ने अपने बयान को गलत बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने मुख्यमंत्री ममता का पत्र शेयर किया है, जिसके बाद वो अपने बयान में भूल-सुधार करते हैं। चिदंबरम ने ये बयान ANI को दिया था। दरअसल, फरवरी 24, 2021 के उस पत्र में ममता बनर्जी ने माँग की थी कि राज्य सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर राज्यों को बड़ी संख्या में वैक्सीन की खरीद की अनुमति देनी चाहिए।

इस दौरान पी चिदंबरम अपनी ही पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का वो पत्र भी भूल गए, जो उन्होंने अप्रैल 8, 2021 को लिखा था। राहुल गाँधी ने तब माँग की थी कि वैक्सीन की खरीद में राज्य सरकारों की ज्यादा भूमिका होनी चाहिए। तब उन्होंने ‘सेंट्रलाइज्ड प्रोपेगंडा’ को गलत करार दिया था। खुद पी चिदंबरम ने NDTV को वैक्सीन की प्रक्रिया डिसेंट्रलाइज करने को कहा था। शेखर गुप्ता ने भी एक ट्वीट में लिखा था कि कई राज्यों ने ऐसी माँग की है।

ज्ञात हो कि टीकाकरण की रणनीति पर पुनर्विचार करने और 1 मई से पहले की व्यवस्था को वापस लाते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राज्यों के जिम्मे जो 25 प्रतिशत टीकाकरण था, उसे अब भारत सरकार द्वारा करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय को दो सप्ताह में अमल में ला दिया जाएगा। दो सप्ताह में केन्द्र और राज्य नए दिशा निर्देशों के मुताबिक जरूरी तैयारियाँ करेंगे। आगामी 21 जून से, भारत सरकार 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन प्रदान करेगी।

वहीं राजदीप सरदेसाई ने राज्यों को वैक्सीन को वैक्सीन की खरीद का अधिकार दिए जाने के समय मनमोहन सिंह को श्रेय देते हुए उनकी तारीफों के पुल बाँधे थे, लेकिन अब वो इस प्रक्रिया के वापस लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं को श्रेय देते नहीं अघा रहे। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने राज्यों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह मान ऐसा किया है। लेकिन, तब राजदीप ने कहा था कि मनमोहन की सलाह पर राज्यों को ये अधिकार मिला है।

सिब्बल के बाद पी चिदम्बरम ने कहा : ‘जमीन पर जीरो है कांग्रेस’

एक पुरानी फिल्म "अदालत" का बहुचर्चित गीत "सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या किया..." कांग्रेस पर शत-प्रतिशत चरितार्थ हो रहा है। आज एक के बाद एक कांग्रेसी पार्टी के पतन पर जो चीख-पुकार कर रहे हैं, असली जिम्मेदार ये ही लोग हैं, जो सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटाकर सोनिया गाँधी को अध्यक्ष बनाने के समय उठी आवाज़ को दबाने में परिवार की गुलामी करते हुए, विरोध स्वरों को मुखरित नहीं होने दिया। पार्टी में इतने दिग्गज नेता होते हुए गुलामों की भांति अनुभवहीन गाँधी परिवार की गुलामी करना कांग्रेस को भारी पड़ रहा है। 

2004 में मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाए जाने का भी विरोध हुआ, लेकिन नगाड़े की आवाज़ में तूती की आवाज़ किसी ने नहीं सुनी। फिर 2014 में मोदी लहर को रोकने अरविन्द केजरीवाल को प्रोत्साहित करने पर भी विरोध को नज़रअंदाज़ कर दिया गया। परिवार की गुलामी की पराकाष्ठा तो उस समय भी उजागर हो गयी थी, जब राहुल को अध्यक्ष बनाये जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, "जितनी जल्दी हो राहुल बाबा को अध्यक्ष बनाइए।" किसी ने लेशमात्र भी मंथन करने का साहस नहीं किया कि आखिर किस कारण विपक्ष खेमे से राहुल के अध्यक्ष बनाये जाने की आवाज़ उठी है? कदम-कदम पर हिन्दू और हिन्दुत्व को नीचा दिखाना, इस्लामिक आतंकवादियों को बचाने बेकसूर हिन्दू साधु और संतों को जेलों में डालना, जेलों में उन्हें प्रताड़ित करना, और भी अनेकों ऐसे कारण है जिनकी वजह से कांग्रेस की हालत चुनाव-दर-चुनाव पतली हो रही है।  
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों और कई राज्यों के उपचुनावों में लचर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस पार्टी को अपने ही दिग्गज नेताओं से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बाद अब यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने बयान दिया है। उन्होंने कांग्रेस के नीतिगत ढाँचे की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के प्रदर्शन में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट ही आई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इतना साहसी बनना होगा कि गिरावट के उन कारणों को पहचाने और उन पर काम करे। 

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की तरफ से यह प्रतिक्रिया बिहार विधानसभा और मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश उपचुनाव में दयनीय प्रदर्शन के बाद सामने आई है। चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। दैनिक भास्कर को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन पर खुल कर आलोचना की। चिदंबरम ने कहा कि उपचुनाव इस बात प्रमाण हैं कि कांग्रेस की संगठनात्मक दृष्टिकोण से कोई पकड़ नहीं रह गई है। इतना ही नहीं जिन राज्यों में उपचुनाव हुए हैं उनमें कांग्रेस कमज़ोर ही हुई है। 

महागठबंधन की हार अपना नज़रिया रखते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि महागठबंधन के जीतने की उम्मीदें थीं फिर भी हम जीतते जीतते हार गए। इन तमाम आलोचनात्मक दलीलों के बाद कांग्रेस पार्टी के लिए आशावादी नज़र आते हुए उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले कांग्रेस ने हिन्दी बेल्ट 3 राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में जीत हासिल की थी। 

इसके बाद एआईएमआईएम और सीपीआई (एमएल) का उल्लेख करते हुए चिदंबरम ने कहा कि छोटे दल अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं क्योंकि इनकी ज़मीनी स्तर पर पकड़ बेहद मजबूत है। कांग्रेस, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सबसे कमज़ोर कड़ी साबित हुई है। पार्टी को तमाम तरह के बदलावों की ज़रूरत है और ऐसे बदलाव नहीं होने की सूरत में राजनीतिक नुकसान बढ़ता ही जाएगा। 

अंत में कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। यह एक बड़ा कारण था कि कांग्रेस इतनी कम सीटों पर जीत हासिल हुई जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल पिछले 20 वर्षों से चुनाव जीत रहे हैं। पार्टी को सिर्फ 45 उम्मीदवार उतारने चाहिए थे, शायद तब बेहतर नतीजे हासिल होते। इसके ठीक पहले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर कई सवाल खड़े किए थे। 

उनका कहना था कि हार दर हार के बाद पार्टी के नेतृत्व ने इस प्रक्रिया को अपनी नियति मान कर स्वीकार कर लिया। कपिल सिब्बल के इस बयान पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सलमान खुर्शीद ने आलोचना की थी। इन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी के भीतर रह कर पार्टी को नुकसान पहुँचाने वाले नेता खुद बाहर चले जाएं। इसके अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन ने भी कपिल सिब्बल के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कपिल सिब्बल को पार्टी छोड़ ही देनी चाहिए।

चीनी माल के बहिष्कार करने से चीन को नुकसान नहीं होगा : पी. चिदंबरम, कांग्रेस नेता

पी चिदंबरम
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज भारत को स्वतंत्र हुए इतने वर्ष हो गए, परन्तु आत्मनिर्भर नहीं बन पाया, क्यों? पहले सोने की चिड़िया से चर्चित देश कृषिप्रधान देश बना और अब घोटालाप्रधान देश, क्यों? इसका मुख्य कारण है भारत में जयचन्दों यानि स्लीपर सैल्स का होना। 1962 में हुए चीन से युद्ध के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी चीन के समर्थन में खड़ी थी, भारत के पक्ष में नहीं। और कांग्रेस इस पार्टी के हम प्याला हम निवाला बन देश के वास्तविक इतिहास को धूमिल करने में व्यस्त रहते, चीन को भारत की धरती को हथियाने का अवसर दिया जाता रहा। आज चीन से असली लड़ाई अपनी खोई जमीन को वापस लेने की है। ठीक इसी भांति पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का हिस्सा हड़पने को वापस लेने की है। लेकिन भारत में छुपे जयचन्द छद्दम देशप्रेमी बन जनता को छलने वाले चीन और पाकिस्तान के समर्थन में शोर मचाकर जनता को भ्रमित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। 
यदि आज महात्मा गाँधी जीवित होते और विदेशी सामान की होली जला रहे होते, निश्चित रूप से छद्दम देशप्रेमियों के विरोध का सामना करना पड़ता।   
चीन के साथ हालिया तनाव के बीच देश में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मॉंग जोर पकड़ती जा रही है। लेकिन, पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है चीन के सामान का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा।
20 जून, 2020 को चिदंबरम ने कहा कि हमें जितना संभव हो सके उतना आत्मनिर्भर बनना चाहिए, लेकिन हम बाकी दुनिया से अलग नहीं हो सकते। भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जारी रखनी चाहिए और चीनी वस्तुओं का बहिष्कार नहीं करना चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि चीनी सामानों का बहिष्कार करने से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं होगा। जब हम भारत की रक्षा जैसे बहुत गंभीर मामलों पर चर्चा कर रहे हैं, तो हमें बहिष्कार जैसे मुद्दों को बीच में नहीं लाना चाहिए।

नोएडा में करीब 20 हजार MSME ने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इसी तरह कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) ने भी चीनी उत्पादों के बहिष्कार की अपील की है।
पिछले दिनों गलवान में चीनी सैनिकों के धोखे से किए गए हमले में 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। हालॉंकि भारतीय सैनिकों ने इस का मुॅंहतोड़ जवाब दिया था और चीन के 43 सैनिकों के मरने की खबर भी है। इस घटना को लेकर भी कई कांग्रेस नेता अनर्गल प्रलाप अलाप चुके हैं।
कारगिल से कांग्रेस पार्षद जाकिर हुसैन ने तो इस घटना का हवाला देकर सेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसका ऑडियो वायरल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
उससे पहले कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रह चुके हुसैन दलवई ने कहा था कि इस घटना में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा है। भारतीय सेना को अपमानित करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें वहाँ लाठी लेकर क्यों भेजा गया, क्या वहाँ आरएसएस की कोई शाखा थी? महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता दलवई ने कहा कि भारत-चीन के बीच हुई झड़प में चीन की तरफ से कोई सैनिक नहीं मरा, सिर्फ हमारे जवान मारे गए हैं।
उन्होंने कहा, “हमने जवानों को लाठियाँ देकर क्यों बॉर्डर पर भेजा, क्या वहाँ RSS की शाखा थी? ऐसा है तो सैनिकों को क्यों आरएसएस के लोगों को ही बॉर्डर पर भेजो। वे सीमा पर पहरा देंगे।”
आरएसएस के कुछ पदाधिकारियों से इस विषय पर चर्चा करने पर जवाब मिला कि "यदि सरकार ने ऐसा किया तो ये लोग सेना के मन में संशय पैदा करना का कोई अवसर नहीं छोड़ेंगे। दूसरे यह कि जब भी देश पर कोई विपदा आने पर अन्य पार्टियों की अपेक्षा आरएसएस कार्यकर्ता ही अग्रिम भूमिका निभाता रहा है। इतिहास इसका गवाह है किसी प्रमाण की जरुरत नहीं।"  
इतना ही नहीं राजनीतिक पार्टी डीएमके (DMK) के आधिकारिक ‘कलैगनार टीवी’ (Kalaignar TV) पर प्रसारित एक शो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वरवणई सेंथिल (Varavanai Senthil) नाम के होस्ट को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए चीनी आक्रामण का बचाव करते देखा जा सकता है।
वीडियो में टीवी एंकर सेंथिल को चीन का समर्थन करते हुए करते हुए सुना जा सकता है कि भारतीयों के खिलाफ पीएलए सैनिकों द्वारा किया गया हमला मोदी सरकार की कुछ नीतियों की प्रतिक्रिया थी, विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करना।
इंटेलिजेंस एजेंसीज द्वारा 52 चाइनीज़ ऐप्स को रेड फ्लैग 
भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियों की ओर से करीब 52 चाइनीज ऐप्स को रेड फ्लैग किया गया है और खतरनाक माना गया है। इन ऐप्स में TikTok, UC Browser, Xender और Shareit भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय इंटेलिजेंस ने चीन से जुड़े ऐसे ऐप्स को यूजर्स की सेफ्टी और प्रिवेसी को लेकर चिंताजनक माना है। ऐसे ऐप्स की लिस्ट में कुछ सबसे पॉप्युलर नाम भी शामिल हैं और इनकी मदद से डेटा विदेश के सर्वर्स पर भेजा जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में सरकार की ओर से चीन के ऐप्स को या तो ब्लॉक किया जाए या फिर यूजर्स को इनका इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाए। यह बात इंटेलिजेंस इनपुट्स के हवाले से कही गई है कि इस ऐप्स की मदद से भारतीयों का डेटा चोरी किया जा रहा था। ये रिपोर्ट्स भारत और चीन के बीच तनाव के दौरान सामने आई हैं। इंटेलिजेंस एजेंसी की ओर से दी गई यह सलाह नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल सेक्रेटेरियट की ओर से कही गई बात से भी जुड़ी है। रिपोर्ट में किसी अनाम गर्वर्मेंट ऑफिशल के हवाले से भी कहा गया है कि देश की सुरक्षा के लिए चाइना से जुड़े ऐप्स खतरा साबित हो सकते हैं।
ढेरों पॉप्युलर ऐप्स लिस्ट में
इंटेलिंजेंस की ओर से जिन ऐप्स को रेड फ्लैग दिखाया गया है, उनमें TikTok, Vault-Hide, Vigo Video, Weibo, WeChat, SHAREit, UC News, UC Browser, BeautyPlus, Helo, LIKE, Kwai, ROMWE, SHEIN, NewsDog, Photo Wonder, APUS Browser, VivaVideo- QU Video Inc, Perfect Corp, CM Browser और Virus Cleaner (Hi Security Lab) शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन ऐप्स की जांच की जा रही है।
शाओमी के कई ऐप्स शामिल
लिस्ट में शामिल बाकी चाइनीज ऐप्स Mi Community, DU recorder, YouCam Makeup, Mi Store, 360 Security, DU Battery Saver, DU Browser, DU Cleaner, DU Privacy, Clean Master - Cheetah, CacheClear DU apps studio, Baidu Translate, Baidu Map, Wonder Camera, ES File Explorer, QQ International, QQ Launcher, QQ Security Centre, QQ Player, QQ Music, QQ Mail, QQ NewsFeed, WeSync, SelfieCity, Clash of Kings, Mail Master, Mi Video call-Xiaomi और Parallel Space भी हैं। ये सभी ऐप्स अलग-अलग तरह से यूजर्स का डेटा स्टोर करते हैं।

हिन्दी बने पूरे देश की भाषा: गृहमंत्री रहते पी चिदंबरम ने की थी पैरवी

पी चिदंबरम हिंदी

आज कांग्रेस हो अथवा दक्षिण की पार्टियां या फिर उत्तर एवं पूर्व के अलावा अन्य दूसरे राज्यों के नेता हिन्दी भाषा का विरोध करते हों, लेकिन दिल्ली तक अपना सफर तय करने के लिए हिन्दी का ज्ञान प्राप्त करते हैं। लेकिन अपने-अपने राज्यों में वोट लेने के लिए हिन्दी भाषा का विरोध करते हैं, ताकि जनता मुख्यधारा से न जुड़ सकें, अब इसे नेताओं की दोगली मानसिकता न कहा जाए तो क्या कहा जाए? मासूम और भोली जनता इनके झांसे में आकर प्रदर्शन और भूख हड़तालें कर, इन नेताओं के सपनों को साकार करते हैं। क्या हिन्दी भाषा को लॉलीपॉप समझते हैं ये नेता? आखिर कब इस दोगली मानसिकता का अंत होगा?
दिल्ली अथवा किसी भी हिन्दी भाषी राज्य में दक्षिण के किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव नहीं किया जाता, जबकि दक्षिण में एकदम विपरीत। जिसका व्यक्तिगत अनुभव अपने बैंगलोर एवं हैदराबाद प्रवास के दौरान करता हूँ। ऐसा नहीं है, समस्त लोग ऐसा भेदभाव करते हैं, हैं कुछ जो हिन्दी न जानते हुए भी प्रिंट रेट पर वस्तु देते हैं, लेकिन कुछ लोग हिंदी भाषियों से प्रिंट रेट से ज्यादा कीमत वसूलते हैं। 
भ्रष्टाचार के आरोपों में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम 74 वर्ष के हो गए। आज भले चिदंबरम हर बात पर मोदी सरकार को कोसते हों पर किसी वक्त हिंदी को लेकर उन्होंने ठीक वैसी ही लाइन ली थी, जैसा इस बार हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था। दिलचस्प यह है कि जब चिदंबरम ने हिंदी की पैरवी की थी, तब वे भी केन्द्र में गृह मंत्री ही हुआ करते थे। अभी शाह के बयान से बिफरी डीएमके भी तब उनके साथ सरकार में शामिल थी।
सितम्बर 14, 2019 को हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा था कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा होने के कारण हिंदी राष्ट्र की एकता बनाने रखने में अहम योगदान दे सकती है। हालाँकि, शाह ने कहा कि भारत में बोली जाने वाली सभी भाषाओं का अपना अलग ही महत्व है, लेकिन हिंदी के रूप में एक ऐसी भाषा की ज़रूरत है जो वैश्विक स्तर पर देश की पहचान बने। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी मातृभाषा का इस्तेमाल करें, लेकिन हिंदी का इस्तेमाल कर सरदार और बापू के सपने को भी साकार करें।
अब आते हैं कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम के करीब 9 साल पहले हिंदी को लेकर दिए बयान पर। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। यूपीए सरकार में गृह मंत्री रहते चिदंबरम ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए हिंदी में भाषण दिया था। उन्होंने कहा था कि वो राजभाषा हिंदी को पूरे देश की भाषण बनाने की आशा रखते हैं। साथ ही उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को सम्बोधित करते हुए कहा था कि हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। देखें वीडियो:

अब उन्हीं पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम ‘हिंदी थोपे जाने’ की बात करते हैं और उनकी पार्टी के गठबंधन साथी स्टालिन हिंदी के ख़िलाफ़ बयान देते हैं। स्टालिन की डीएमके भी उस समय कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन में थी, जब चिदंबरम ने 2010 में हिंदी को पूरे देश की भाषा के रूप में विकसित करने की बात कही थी। तमिल अभिनेता कमल हासन कहते हैं कि कोई भी ‘शाह, सुल्तान या सम्राट’ हिंदी को पूरे देश की भाषा नहीं बना सकता। चिदंबरम की ही पार्टी के नेता सिद्दारमैया हिंदी के अमित शाह के बयान को एकता तोड़ने वाला बताते हैं।
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हिन्दी दिवस पर BJP अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) द्वारा दिए गए भाषण पर सियासत जारी है. हिन्दी दिवस के मौके पर गृहमंत्री अमित श....

चिदंबरम ने तब सरकारी दफ़्तरों में अधिकारियों के बीच पत्र-व्यवहार व अन्य संचार माध्यमों में भी हिंदी का इस्तेमाल किए जाने की पैरवी की थी। आज उनके बटे, उनकी पार्टी और उनके गठबंधन साथी शाह के बयान के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रहे हैं। इससे तो यही माना जा सकता है कि सत्ता में रहने और न रहने पर कॉन्ग्रेस नेताओं की सोच समान विषय को लेकर भिन्न रहती है। या फिर यह भी हो सकता है कि अंधविरोध के इस दौर में वह ये नहीं देखना चाहते कि मोदी-शाह सही बोल रहे या ग़लत, सिर्फ़ विरोध करना जानते हैं।

क्या सीबीआई के हाथ चिदंबरम से ऊपर भी पहुंच सकते हैं ?

P Chidambaram कांग्रेस के नेता पी चिदंबरम तक सीबीआई के हाथ पहुंचने से पार्टी के आलाकमान की बेचैनी भी बढ़ गयी है। इस बेचैनी की मूल वजह है कि अब बहुत जल्दी ही सीबीआई के हाथ और ऊपर तक पहुंचने वाले हैं। इस समय सीबीआई ने जिस मामले में चिदंबरम पर शिकंजा कसा है वह तो बहुत मामूली है। असली खेल से तो पर्दा अभी उठना बाकी है। चिदंबरम के पास मनमोहन सरकार में वित्त और गृह जैसे मंत्रालय हुआ करते थे। वही वह दौर था जब देश में आतंकवाद की सर्वाधिक घटनाएं होती थीं। उसी समय भारत के सरकारी बैंको से नकली नोटों के जखीरे मिला करते थे। भारत नेपाल सीमा पर सिद्धार्थ नगर में स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया के कैश चेस्ट से करोडो रुपये के नकली नोटों की बरामदगी उस समय के अखबारों में खूब सुर्ख़ियों में आयी लेकिन समय के साथ ही सब दब गया था। सरकार के बैंक में करोडो के नकली नोटों का होना अपने आप में आश्चर्य में डालने वाला था लेकिन उस समय की राष्ट्रीय मीडिया को इसमें कुछ भी नहीं दिखा और मामला स्थानीय अखबारों की सुर्खियां बन कर रह गया। जबकि उसी समय जांच के दौरान बैंक अधिकारियों ने बताया था कि ये नोट तो खुद रिज़र्व बैंक से ही आये थे। अब जब चिदंबरम पर शिकंजा कैसा है तो बहुत कुछ धीरे धीरे सामने आने लगा है। 

जानकार सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने नोटबंदी करके इस घोटाले को रोक तो दिया, मगर उसके बाद यह बात निकल कर सामने आयी कि देश में बिलकुल असली जैसे दिखने वाले एक ही नंबर के कई नोट चल रहे थे। ये ऐसे नोट थे, जिन्हे पहचानना लगभग नामुमकिन था क्योकि ये उसी कागज़ पर छपे थे जिस पर भारत सरकार नोट छपवाती है। "डे ला रू" जो कि एक ब्रिटिश कंपनी है, इसके साथ मिलकर तत्कालीन वित्तमंत्री पी चिदंबरम एक बड़ा खेल खेल रहे थे, जिसमें उनके एडिशनल सचिव अशोक चावला और वित्त सचिव अरविंद मायाराम भी शामिल थे। घोटाले का प्रारम्भ 2005 में तब हुई जब वित्त मंत्रालय में अरविन्द मायाराम वित्त सचिव के पद पर थे और अशोक चावला एडिशनल सचिव के पद पर थे। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद 2006 में सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड एक कंपनी बनाई गयी, जिसके मैनेजिंग डायरेक्टर अरविंद मायाराम थे और चेयरमैन अशोक चावला थे। यानी दो सरकारी अधिकारी अपने अपने पदों पर रहते हुए अतिरिक्त प्रभार में इस कंपनी को चला रहे थे। इस प्रकार नियुक्तियों के लिए अपॉइंटमेंट्स कमिटी ऑफ़ कैबिनेट (ACC) के सामने विषय को रखकर उसके अनुमोदन की आवश्यकता होती है। किन्तु चिदंबरम ने भला कब नियम-कायदों की परवाह की जो अब करते? अर्थात् ACC के सामने इन नियुक्तियों का विषय लाया ही नहीं गया और ऐसे ही इनकी नियुक्ति कर दी गयी जो इस दृष्टि से पूरी तरह अवैध थी। इसके बाद असली खेल शुरू हुआ। इस घोटाले में चिदंबरम के दायें व बायें हाथ बताये जाने वाले अशोक चावला व अरविंद मायाराम ने भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL), जो कि नोटों की छपाई का काम देखती है, उससे कहा कि उनकी कंपनी के साथ मिलकर सिक्योरिटी पेपर प्रिंटिंग के सप्लायर को ढूँढो जिसके बाद पहले से ब्लैकलिस्टेड की जा चुकी डे ला रू कंपनी से नोटों की छपाई में इस्तमाल होने वाले सिक्योरिटी पेपर को लेना जारी रखा गया। 


क्या इसके लिये चिदंबरम् को घूस दी गयी थी? इस ब्रिटिश कंपनी द्वारा या पाकिस्तान के आईएसआई द्वारा चिदंबरम को पैसा दिया जा रहा था? यह गंभीर जाँच का विषय है। दरअसल वित्त वर्ष 2009-10 के दौरान नकली मुद्रा रैकेट का पता लगाने के लिए सीबीआई ने भारत नेपाल सीमा पर विभिन्न बैंकों के करीब 70 शाखाओं पर छापेमारी की तो बैंकों से ही नकली करेंसी पकड़ी गयी। जब पूछताछ की गयी तो उन बैंक शाखाओं के अधिकारियों ने सीबीआई से कहा कि जो नोट सीबीआई ने छापें में बरामद किये हैं वे तो स्वयं रिजर्व बैंक से ही उन्हें मिले हैं। यह एक बेहद गंभीर खुलासा था क्योंकि इसके अनुसार आरबीआई भी नकली नोटों के खेल में संलिप्त लग रहा था। हालाँकि इतनी अहम खबर को इस देश की मीडिया ने दिखाना आवश्यक नहीं समझा क्योंकि उस समय कांग्रेस सत्ता में थी।


इस खुलासे के बाद सीबीआई ने भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानो में भी छापेमारी की और आश्चर्यजनक तरीके से भारी मात्रा में 500 और 1,000 रुपये के जाली नोट पकड़े गये। आश्चर्य की बात यह थी कि लगभग वैसे ही समान जाली मुद्रा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई द्वारा भारत में तस्करी से पहुँचाया जाता था। अब प्रश्न उठा कि ये जाली नोट आखिर भारतीय रिजर्व बैंक के तहखानों में कैसे पहुँच गये? आखिर ये सब देश में चल क्या रहा था? जाँच के लिये शैलभद्र कमिटी का गठन हुआ और 2010 में कमिटी उस वक़्त चौंक गयी जब उसे ज्ञात हुआ कि भारत सरकार द्वारा ही समूचे राष्ट्र की आर्थिक संप्रभुता को दाँव पर रख कर कैसे अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी को 1 लाख करोड़ की छपाई का ठेका दिया गया था। जाँच हुई तो ज्ञात हुआ कि डे ला रू कंपनी में ही घोटाला चल रहा था। एक षड्यंत्र के तहत भारतीय करेंसी छापने में उपयोग होने वाले सिक्योरिटी पेपर की सिक्योरिटी को घटाया जा रहा था ताकि पाकिस्तान सरलता से नकली भारतीय करेंसी छाप सके और इसका उपयोग भारत में आतंकवाद फैलाने में किया जा सके। 


इस समाचार के सामने आते ही भारत सरकार द्वारा डे ला रू कंपनी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। मगर अरविन्द मायाराम ने इस ब्लैकलिस्टेड कंपनी से सिक्योरिटी पेपर लेना जारी रखा। इसे लेने के लिये उसने गृह मंत्रालय से अनुमति ली। कहा गया कि यह फाइल चिदंबरम को दिखाई ही नहीं गयी, जबकि यह बात मानने लायक ही नहीं क्योकि वित्त मंत्रालय से यदि गृहमंत्रालय को कोई भी पत्र भेजा जाता है तो पहले अनुमोदन के लिये वित्तमंत्री के सामने पेश किया जाता है। डे ला रू कंपनी से भारत को दिये जाने वाले सिक्योरिटी पेपर के सिक्योरिटी फीचर को कम किया जा रहा था। यह कंपनी पाकिस्तान के लिये भी सिक्योरिटी पेपर छापने का काम करती है। फिर यह आरोप लगा कि इस कंपनी द्वारा भारत का सिक्योरिटी पेपर पाकिस्तान को गुपचुप तरीके से दिया जा रहा था ताकि भारत के नकली नोट छापने में पाक को सरलता हो। यहाँ पाक आईएसआई का नाम सामने आया कि आईएसआई की ओर से कंपनी के कर्मचारियों को घूस दी जाती थी। मगर इस खेल में अरविंद मायाराम क्यों शामिल थे? क्यों वे ब्लैकलिस्टेड कंपनी से पेपर लेते रहे?


जब 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आयी, तब गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ये बात पता चली कि इतना बड़ा गोलमाल चल रहा था। इसके बाद उन्होंने सिक्योरिटी पेपर डे ला रू कंपनी से लेना बंद करवाया। यह भी सामने आया कि इस कंपनी से सिक्योरिटी पेपर काफी महँगे दाम पर खरीदा जा रहा था, यानी यह कंपनी देश को लूट रही थी और देश का वित्तमंत्रालय इस काम में विदेशी कंपनी की मदद कर रहा था। मायाराम के इस काले कारनामे की खबर पीएमओ को हुई तो पीएमओ ने गंभीरतापूर्वक इस मामले को उठाया और मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा इसकी जांच करवाई। मुख्य सतर्कता आयुक्त द्वारा वित्तमंत्रालय से इससे जुडी फाइल माँगी गयी। इस वक़्त वित्तमंत्री अरुण जेटली बन चुके थे। मगर इसके बावजूद वित्त मंत्रालय द्वारा फाइल देने में देर की गयी। इसके बाद यह मामला पीएमओ से होता हुआ सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में आया और फिर मोदी ने खुद एक्शन लिया ।तब जाकर मुख्य सतर्कता आयुक्त के पास फाइल पहुँची।

अभी तक यह साफ़ नहीं हो सका है कि क्या जेटली ने फाइलें देने में देर करवाई या फिर कांग्रेसी चाटुकारों ने जो वित्त मंत्रालय तक में बैठे हैं, यह बात साफ़ नहीं हो पायी। नोटबंदी न करते मोदी तो नकली करेंसी का ये खेल चलता ही रहता। डे ला रू से सिक्योरिटी पेपर लेना बंद किया गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने और पीएम मोदी ने की नोटबंदी, जिसके कारण पाकिस्तान द्वारा नकली करेंसी की छपाई बेहद कम हुई और यही कारण है कि कांग्रेस के दस वर्षों में आतंकवादी घटनाएँ जो आम हो गयी थीं, वे मोदी सरकार के काल में नहीं के बराबर हुईं।

कश्मीर के अलावा देश के किसी भी राज्य में बम ब्लास्ट नहीं हो पाये। आतंकियों तक पैसा पहुँचना जो बंद हो गया था।पीएम मोदी ने जाँच करवाई और मायाराम के खिलाफ मुख्य सतर्कता आयुक्त और सीबीआई द्वारा आरोप तय किये गये।जिस मायाराम के खिलाफ चार्ज फ्रेम किये गये हैं, उसी को राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने आर्थिक सलाहकार के पद पर नियुक्त कर लिया। यानी एक घपलेबाज को अपना आर्थिक सलाहकार बना लिया।वहीँ अशोक चावला का नाम चिदंबरम के एयरसेल-मैक्सिस घोटाले में भी सामने आया। इसके बाद ने नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स के चेयरमैन व पब्लिक इंटरेस्‍ट डायरेक्‍टर पद से अशोक चावला को इस्तीफा देना पड़ा।

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आईएनएक्स मीडिया केस में सरकारी गवाह के तौर पर शामिल हुई इंद्राणी मुखर्जी ने कहा है कि पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी ....

जुलाई 2018 में सीबीआई ने चिदंबरम को एयरसेल-मैक्सिस मामले में आरोपी बनाया था। सीबीआई ने चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति और 16 अन्‍य के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें आर्थिक मामलों के पूर्व केंद्रीय सचिव अशोक कुमार झा, तत्‍कालीन अतिरिक्‍त सचिव अशोक चावला, संयुक्‍त सचिव कुमार संजय कृष्‍णा और डायरेक्‍टर दीपक कुमार सिंह, अंडर सेक्रेटरी राम शरण शामिल हैं। इस पूरे मामले से यह बात तो साफ़ हो जाती है कि चिदंबरम ने देश में केवल एक या दो नहीं बल्कि जहाँ-जहाँ से हो सका, वहां-वहां से देश को लूटा। चिदम्बरम व उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने मिलकर खूब लूटा और इस खेल में न केवल नौकरशाह शामिल रहे बल्कि न्यायपालिका में भी कई चिदंबरम भक्त बैठे हैं, जो आज भी उसे जेल जाने से बचाते आ रहे हैं। सभी में लूट का माल मिलकर बँटता था और यदि चिदंबरम जेल गये तो सीबीआई व ईडी की कम्बल कुटाई उनसे एक दिन भी नहीं झेली जायेगी और वो सब उगल देंगे। यदि ऐसा हुआ तो सभी जेल जायेंगे। यही कारण है कि चिदंबरम को हर बार अग्रिम जमानत दे दी जाती है। मगर यह भी तय माना जा रहा है कि इस बार चिदंबरम को जेल में डालना तय है और फिर कई अन्य गड़े मुर्दे भी बाहर आयेंगे। देश को कैसे-कैसे और किस-किस ने लूटा, सबको एक-एक करके सजा होगी। कांग्रेसी चाटुकार नौकरशाहों समेत माँ-बेटे व कई कांग्रेसी नेता सलाखों के पीछे पहुँचेंगे ।

INX केस: इंद्राणी मुखर्जी - अच्छा है पी चिदंबरम सीबीआई हिरासत में हैं

P Chidambaram आईएनएक्स मीडिया केस में सरकारी गवाह के तौर पर शामिल हुई इंद्राणी मुखर्जी ने कहा है कि पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई द्वारा हिरासत में लिया जाना एक 'अच्छी खबर' है। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी खबर है कि पी चिदंबरम को हिरासत में लिया गया है।' इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी अपने बेटी शीन बोरा की हत्या के मामले में जेल में बंद है। 
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंद्राणी मुखर्जी ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में मिली जमानत को रद्द किया जाना चाहिए। इंद्राणी और उनके पति पीटर आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के पूर्व प्रमोटर हैं।
इस मामले में इंद्राणी मुखर्जी ने अपना बयान धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज कराया था। उन्होंने अपना बयान ईडी के सामने दर्ज कराते हुए कहा था कि वह और उनके पति पीटर मुखर्जी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से उनके नॉर्थ ब्लाक के ऑफिस में मिले थे।
इसके साथ ही इंद्राणी ने दावा किया था कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को व्यवसाय में मदद करने के लिए कहा था और इसके बदले में आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने का वादा किया था।

इंद्राणी मुखर्जी के इसी बयान को आधार बनाकर ईडी ने चार्जशीट दाखिल किया था और इसे सबूत के रूप में पेश किया था। गौरतलब है कि पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को सीबीआई ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में 21 अगस्त की देर रात को उनके घर से हिरासत में लिया था। 
इसके बाद जांच एजेंसी ने पी चिदंबरम को एक विशेष अदालत में पेश किया था। जहां पर कोर्ट ने पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में रहने का आदेश दिया और बाद में इसे बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया था।
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पी.चिदंबरम और इंद्राणी मुख़र्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की परे....

गौरतलब है कि 2017 में सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें कहा गया था कि पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप में 305 करोड़ रूपए के एफआईपीबी की मंजूरी दी थी।

इंद्राणी मुखर्जी ने सीबीआई से कहा- 300 करोड़ टैक्स जुर्माना से बचाने को पी चिदंबरम कई बार मेरे और मेरी दो एंकर संग सोए

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पी.चिदंबरम और इंद्राणी मुख़र्जी 
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. INX मीडिया मामले में चिदंबरम की संलिप्तता पर कोर्ट क्या फैसला लेती है इसका जवाब वक़्त की गर्त में छुपा है. मगर जैसा सरकार का रुख है, चिदंबरम के घर के सदस्य खासे तनाव में हैं. कहीं न कहीं उनको भी ये डर सताने लग गया है कि आज नहीं तो कल उनका भी हश्र कुछ वैसा ही होगा जैसा फिलहाल चिदंबरम का है.
INX मीडिया केस में फंसे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लेकर डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान ने ट्वीट कर पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. गौरव प्रधान के मुताबिक इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में कहा था कि उन्होंने कार्ति चिदंबरम की कंपनी को 10 लाख डॉलर दिए थे. बतौर गौरव प्रधान इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को ये भी कहा था कि पी चिदंबरम उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बना चुके हैं और उन्होंने दो और महिला एंकर की मांग की थी. बतौर गौरव प्रधान शीना बोरा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पी चिदंबरम की सारी मांगों को माना क्योंकि उनके ऊपर 300 करोड़ रुपये आयकर जुर्माना लगा था.

गौरव प्रधान ने दूसरे ट्वीट में कहा कि इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को ये भी बताया है कि पत्रकार एम के वेणु ने इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी की पी चिदंबरम से मीटिंग फिक्स करवाई थी. उन्होंने कहा कि जहां तक दो महिला एंकरों की बात है जिसे कथित तौर पर पी चिदंबरम ने मांगा था वो 9 एक्स म्यूजिक चैनल से थीं. गौरतलब है कि डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान इससे पहले भी कई बार विवादित खुलासे करते रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने पी चिदंबरम को लेकर ये खुलासा किया है.

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बेटी शीना बोरा की हत्या मामले में जेल की सजा काट रही इंद्राणी मुखर्जी ने साल 2007 में अपने तीसरे पति पति पीटर मुखर्जी के साथ मिलकर आईएनएक्स मीडिया नाम से कंपनी की शुरूआत की थी जिसमें वो सीईओ की भूमिका में थी. इंद्राणी मुखर्जी ने साल 2009 में कंपनी से इस्तीफा दे दिया और अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. गौरव प्रधान के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया कंपनी में पैसों के हेरफेर के मामले में ही पूछताछ के दौरान ही इंद्राणी मुखर्जी ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लेकर ये सब बातें जांच एजेंसियों को बताई हैं.
जानकारी के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया ने साल 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये का फंड हासिल किया था. आरोप है कि शीना बोरा और पीटर मुखर्जी ने फंड के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड FIPB से मंजूरी पाने में कथित तौर पर गड़बड़ियां की. मामला जब सीबीआई के पास गया तो सीबीआई की पूछताछ में इंद्राणी ने पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम का नाम लिया. इसी सिलसिले में सीबीआई ने 16 फरवरी 2018 को कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी.

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चिदंबरम का विवादों से पुराना नाता है. 2004 में वित्त मंत्री बनने से पहले चिदंबरम वेदांत की लीगल टीम का हिस्सा थे. 2002 में जब यूके के वित्तीय सेवा प्राधिकरण ने स्टरलाइट को वेदांत रिसोर्स पीएलसी के रूप में पुनर्गठित करने की अनुमति दी थी. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने स्टरलाइट के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के परिवार के तीन सदस्यों को कारण बताओ नोटिस दिया. नोटिस में मांग की गई थी कि स्टरलाइट के निदेशक अपनी होल्डिंग कंपनियों वॉलकन और ट्विनस्टार के जरिये विदेशी मुद्रा लेनदेन पर करों का भुगतान करने से बच रहे हैं इसके लिए वो जवाब दें.
नोटिस में बताया गया था कि प्रथम दृष्टया सबूत हैं कि, 1993 में हुई मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अग्रवाल दोषी हैं. सात सालों तक ये केस कोर्ट में खिंचता रहा और स्टरलाइट ने हर संभव प्रयास किये कि कैसे मामले पर तारीख पर तारीख मिलती रहे.
बताया जाता है कि 2003 में पी चिदंबरम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्टारलाइट के खिलाफ ईडी द्वारा लगे गए आरोपों से कंपनी का बचाव किया था. इसके बाद अगले साल यानी 2004 में चिदंबरम वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त किये गए और इसी के बाद वो यूपीए 1 के कार्यकाल में भारत के वित्त मंत्री बने.

आईएनएक्स मीडिया, एयरसेल-मैक्सिस केस

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि 2006 में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को एयरसेल से पांच प्रतिशत हिस्सा मिला. ध्यान रहे कि इस मामले में एयरसेल के 74 प्रतिशत शेयर हासिल करने के लिए मैक्सिस कम्युनिकेशन ने उसे 4000 करोड़ रुपए दिए थे. स्वामी के अनुसार, चिदंबरम ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के सौदे को तब तक के लिए रोक दिया जब तक कि उनके बेटे को शिवा की कंपनी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी नहीं मिली. इस मुद्दे को कई बार संसद में उठाया गया और चिदंबरम के इस्तीफे की मांग की गई. हालांकि बाद में चिदंबरम और उनकी सरकार ने आरोपों से इनकार किया.
मामले पर द पायनियर और इंडिया टुडे ने तमाम तरह के दस्तावेज पेश किये जिसमें दर्शाया गया कि चिदंबरम ने अपने पद का दुरूपयोग किया और 7 महीने तक सौदे को रोके रखा. आरोप ये भी लगे कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम 2 जी स्पेक्ट्रम मामले के प्रत्यक्ष लाभार्थी थे. कार्ति चिदंबरम की कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग की एयरसेल टेलीकॉम कंपनियों में पांच फीसदी हिस्सेदारी थी और पिता पी चिदंबरम ने सुनिश्चित किया कि एयरसेल-मैक्सिस सौदे के लिए एफआईपीबी क्लीयरेंस तभी दिया जाएगा जब उनके बेटे कार्ति की कंपनी एयरसेल वेंचर्स में हिस्सेदारी होगी.
इसके अलावा ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) एयरसेल सौदे में कार्ति की संलिप्तता की जांच कर रहा है. ज्ञात हो कि पहले 2012 और फिर 2016 में मीडिया में खबरें आई कि ऐसे तमाम मौके आए जब कार्ति ने अपने पिता के पद का  इस्तेमाल करते हुए खुद को फायदा पहुंचाया. बताया ये भी गया कि कार्ति की उनके मित्रों द्वारा आंशिक रूप से स्वामित्व वाली छोटी छोटी कम्पनियां जो मॉरीशस और सिंगापुर में हैं उसमें भी उनकी हिस्सेदारी है.
इसके अतिरिक्त कार्ति को यूके और अन्य देशों में अपनी वैध कमाई से अधिक धन के साथ अचल संपत्ति रखने का भी दोषी पाया गया है. इन तमाम बातों के अलावा चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति पर भ्रष्टाचार, पद के दुरूपयोग, इनसाइडर ट्रेडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं. ध्यान रहे कि, 20 अगस्त 2019 को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने INX मीडिया मामले में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया.

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कार्ति चिदंबरम

कार्ति चिदंबरम पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और वर्तमान में तमिलनाडु के शिवगंगा से कांग्रेस सांसद हैं. बात अगर कार्ति चिदंबरम के ऊपर चल रहे मामलों की हो तो पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम पर एयरसेल मैक्सिस भ्रष्टाचार मामला और मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है. सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज एयरसेल मैक्सिस मामलों में चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति की जमानत संबंधी याचिकाएं निचली अदालत में लंबित हैं. दोनों को निचली अदालत ने गिरफ्तारी से 23 अगस्त तक अंतरिम राहत प्रदान की है.
जुलाई 2018 में सीबीआई द्वारा दाखिल चार्ज शीट में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के नाम सामने आए थे, आपको बताते चलें कि 2006 में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए चिदंबरम ने एक विदेशी कंपनी को एफआईपीबी मंजूरी दी थी जबकि ऐसा करने का अधिकार केवल सीसीईए के पास ही होता है. सीबीआई जांच कर रही है कि आखिर किस आधार पर ये मंजूरी चिदंबरम में विदेशी कंपनी को दी.
इसके अलावा जहां एक तरफ कार्ति पर आय से अधिक संपत्ति और विदेशों में संपत्ति जमा करने के मामले हैं तो वहीं इनपर भ्रष्टाचार, पिता के पद का नाजायज फायदा उठाकर खुद को फायदा पहुंचाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.

नलिनी चिदंबरम

चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई शारदा चिटफंड घोटाले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है. उन पर 1.4 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप है. इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. आपको बताते चलें कि इसी साल फ़रवरी में, सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम जो खुद एक वरिष्ठ वकील और सुप्रीम कोर्ट के जज पीएस कैलासम की बेटी हैं, के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दावा किया था कि चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रूपये प्राप्त हुए.
इस मामले पर जानकारी देते हुए सीबीआई ने दलील दी थी कि नलिनी पर आरोप है कि उन्होंने शारदा समूह की कंपनियों की धनराशि के गबन और फर्जीवाड़े के मकसद से शारदा ग्रुप के मालिक सुदीप्त सेन और अन्य आरोपियों के साथ आपराधिक साजिश की.
सीबीआई का आरोप था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह की पत्नी मनोरंजना सिंह ने सेन का परिचय नलिनी चिदंबरम से कराया ताकि वह सेबी, आरओसी जैसी विभिन्न एजेंसियों की जांच को प्रभावित कर सकें. दिलचस्प बात ये थी कि इसके लिए उनकी कंपनियों को 2010-12 के दौरान कथित तौर पर 1.4 करोड़ रूपये  हासिल हुए.
इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. ज्ञात हो कि शारदा समूह ने आकर्षक ब्याज दर का झांसा देकर लोगों से 2,500 करोड़ रूपये लिए थे और बाद में लोगों को उनके पैसे नहीं लौटाए गए.
 कोलकाता हाई कोर्ट ने साल 2014 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था. इस मामले के मद्देनजर फ़िलहाल नलिनी सिंह बेल पर हैं.

पी चिदंबरम

चिदंबरम परिवार पर आयकर विभाग के आरोप

बीते दिनों आयकर विभाग ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके परिवार के सदस्यों - कार्ति चिदंबरम, नलिनी चिदंबरम, श्रीनिधि चिदंबरम के खिलाफ चार अभियोजन शिकायतें विदेशी संपत्ति में निवेश करने और अपने कर रिटर्न में इसका खुलासा नहीं करने के लिए दर्ज की हैं. इन शिकायतों पर जानकारी देते हुए कर अधिकारियों ने बताया कि चार्जशीट चेन्नई में एक विशेष अदालत के समक्ष ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिनियम, 2015 की धारा के तहत आई-टी विभाग द्वारा दायर की गई हैं.
नलिनी चिदंबरम, कार्ति और श्रीनिधि पर आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में 5.37 करोड़ रुपये की संपत्ति, ब्रिटेन में ही 80 लाख की संपत्ति और अमेरिका में 3.28 करोड़ रुपए की संपत्ति का पूरा खुलासा जांच एजेंसियों के सामने नहीं किया है.
चार्जशीट में आरोप है कि चिदंबरम परिवार ने टैक्स अथॉरिटी को इनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. साथ ही कार्ति की फर्म चेस ग्लोबल एडवाइजरी जिसने काले धन पर बने कानून का उल्लंघन किया है उसके विषय में भी कोई जानकारी जांच अधिकारियों को नहीं दी है. ज्ञात हो कि इस कानून को 2015 में मोदी सरकार द्वारा लाया गया था. इस कानून के अंतर्गत उन भारतीयों पर मुकदमा चलाने की बात थी जिन्होंने विदेशों में संपत्ति अर्जित कर रखी है.
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सीबीआई द्वारा कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी राजनीतिक दलों से ...

विभाग ने हाल ही में कार्ति और उनके परिवार के सदस्यों को उस मामले में नोटिस जारी किया था, जिसे उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के सामने चुनौती दी थी. आपको बताते चलें की बीते महीने ही टैक्स अथॉरिटी ने कार्ति को ब्लैक मनी एक्ट के आपराधिक धाराओं के तहत नए सिरे से समन जारी किया था और इस समन में उनकी ब्रिटेन की संपत्ति का ब्योरा था. कार्ति को चेन्नई में काले धन और 2015 के कर अधिनियम के प्रावधान के तहत मामले के जांच अधिकारी के सामने हाजिर करने के लिए कहा गया था जो विदेशों में अघोषित संपत्ति से संबंधित हैं.(एजेंसीज इनपुट्स सहित)