आईएनएक्स मीडिया केस में सरकारी गवाह के तौर पर शामिल हुई इंद्राणी मुखर्जी ने कहा है कि पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई द्वारा हिरासत में लिया जाना एक 'अच्छी खबर' है। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी खबर है कि पी चिदंबरम को हिरासत में लिया गया है।' इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी अपने बेटी शीन बोरा की हत्या के मामले में जेल में बंद है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंद्राणी मुखर्जी ने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया केस में मिली जमानत को रद्द किया जाना चाहिए। इंद्राणी और उनके पति पीटर आईएनएक्स मीडिया ग्रुप के पूर्व प्रमोटर हैं। इस मामले में इंद्राणी मुखर्जी ने अपना बयान धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज कराया था। उन्होंने अपना बयान ईडी के सामने दर्ज कराते हुए कहा था कि वह और उनके पति पीटर मुखर्जी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से उनके नॉर्थ ब्लाक के ऑफिस में मिले थे। इसके साथ ही इंद्राणी ने दावा किया था कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को व्यवसाय में मदद करने के लिए कहा था और इसके बदले में आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने का वादा किया था।
Indrani Mukerjea, who turned approver in INX Media case, on being asked about arrest of P Chidambaram: It's good news that P Chidambaram has been arrested. (file pic) pic.twitter.com/McwrbOUZTP
इंद्राणी मुखर्जी के इसी बयान को आधार बनाकर ईडी ने चार्जशीट दाखिल किया था और इसे सबूत के रूप में पेश किया था। गौरतलब है कि पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को सीबीआई ने बड़े ही नाटकीय अंदाज में 21 अगस्त की देर रात को उनके घर से हिरासत में लिया था। इसके बाद जांच एजेंसी ने पी चिदंबरम को एक विशेष अदालत में पेश किया था। जहां पर कोर्ट ने पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में रहने का आदेश दिया और बाद में इसे बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया गया था। अवलोकन करें:-
पी.चिदंबरम और इंद्राणी मुख़र्जी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की परे....
गौरतलब है कि 2017 में सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें कहा गया था कि पी चिदंबरम ने वित्त मंत्री रहते हुए 2007 में आईएनएक्स मीडिया ग्रुप में 305 करोड़ रूपए के एफआईपीबी की मंजूरी दी थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और देश के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. INX मीडिया मामले में चिदंबरम की संलिप्तता पर कोर्ट क्या फैसला लेती है इसका जवाब वक़्त की गर्त में छुपा है. मगर जैसा सरकार का रुख है, चिदंबरम के घर के सदस्य खासे तनाव में हैं. कहीं न कहीं उनको भी ये डर सताने लग गया है कि आज नहीं तो कल उनका भी हश्र कुछ वैसा ही होगा जैसा फिलहाल चिदंबरम का है. INX मीडिया केस में फंसे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लेकर डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान ने ट्वीट कर पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर गंभीर आरोप लगाए हैं. गौरव प्रधान के मुताबिक इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में कहा था कि उन्होंने कार्ति चिदंबरम की कंपनी को 10 लाख डॉलर दिए थे. बतौर गौरव प्रधान इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को ये भी कहा था कि पी चिदंबरम उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बना चुके हैं और उन्होंने दो और महिला एंकर की मांग की थी. बतौर गौरव प्रधान शीना बोरा ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पी चिदंबरम की सारी मांगों को माना क्योंकि उनके ऊपर 300 करोड़ रुपये आयकर जुर्माना लगा था.
Indrani in her confession to agencies said - Apart from paying $1 Million to @KartiPC Karti’s firms - PC fucked me many times and demanded 2 lady anchors. She named Anchors too 1 later became a Cine actress. I obliged to all demands of PC bcoz my Income Tax Fine was Rs 300cr https://t.co/FXfVFLp2Xb
गौरव प्रधान ने दूसरे ट्वीट में कहा कि इंद्राणी मुखर्जी ने जांच एजेंसियों को ये भी बताया है कि पत्रकार एम के वेणु ने इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी की पी चिदंबरम से मीटिंग फिक्स करवाई थी. उन्होंने कहा कि जहां तक दो महिला एंकरों की बात है जिसे कथित तौर पर पी चिदंबरम ने मांगा था वो 9 एक्स म्यूजिक चैनल से थीं. गौरतलब है कि डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान इससे पहले भी कई बार विवादित खुलासे करते रहे हैं. इसी कड़ी में उन्होंने पी चिदंबरम को लेकर ये खुलासा किया है.
बेटी शीना बोरा की हत्या मामले में जेल की सजा काट रही इंद्राणी मुखर्जी ने साल 2007 में अपने तीसरे पति पति पीटर मुखर्जी के साथ मिलकर आईएनएक्स मीडिया नाम से कंपनी की शुरूआत की थी जिसमें वो सीईओ की भूमिका में थी. इंद्राणी मुखर्जी ने साल 2009 में कंपनी से इस्तीफा दे दिया और अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. गौरव प्रधान के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया कंपनी में पैसों के हेरफेर के मामले में ही पूछताछ के दौरान ही इंद्राणी मुखर्जी ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को लेकर ये सब बातें जांच एजेंसियों को बताई हैं.
जानकारी के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया ने साल 2007 में विदेशों से 305 करोड़ रुपये का फंड हासिल किया था. आरोप है कि शीना बोरा और पीटर मुखर्जी ने फंड के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड FIPB से मंजूरी पाने में कथित तौर पर गड़बड़ियां की. मामला जब सीबीआई के पास गया तो सीबीआई की पूछताछ में इंद्राणी ने पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम का नाम लिया. इसी सिलसिले में सीबीआई ने 16 फरवरी 2018 को कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी.
पी चिदंबरम
चिदंबरम का विवादों से पुराना नाता है. 2004 में वित्त मंत्री बनने से पहले चिदंबरम वेदांत की लीगल टीम का हिस्सा थे. 2002 में जब यूके के वित्तीय सेवा प्राधिकरण ने स्टरलाइट को वेदांत रिसोर्स पीएलसी के रूप में पुनर्गठित करने की अनुमति दी थी. इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने स्टरलाइट के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के परिवार के तीन सदस्यों को कारण बताओ नोटिस दिया. नोटिस में मांग की गई थी कि स्टरलाइट के निदेशक अपनी होल्डिंग कंपनियों वॉलकन और ट्विनस्टार के जरिये विदेशी मुद्रा लेनदेन पर करों का भुगतान करने से बच रहे हैं इसके लिए वो जवाब दें. नोटिस में बताया गया था कि प्रथम दृष्टया सबूत हैं कि, 1993 में हुई मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अग्रवाल दोषी हैं. सात सालों तक ये केस कोर्ट में खिंचता रहा और स्टरलाइट ने हर संभव प्रयास किये कि कैसे मामले पर तारीख पर तारीख मिलती रहे. बताया जाता है कि 2003 में पी चिदंबरम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्टारलाइट के खिलाफ ईडी द्वारा लगे गए आरोपों से कंपनी का बचाव किया था. इसके बाद अगले साल यानी 2004 में चिदंबरम वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के पद पर नियुक्त किये गए और इसी के बाद वो यूपीए 1 के कार्यकाल में भारत के वित्त मंत्री बने.
आईएनएक्स मीडिया, एयरसेल-मैक्सिस केस
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि 2006 में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को एयरसेल से पांच प्रतिशत हिस्सा मिला. ध्यान रहे कि इस मामले में एयरसेल के 74 प्रतिशत शेयर हासिल करने के लिए मैक्सिस कम्युनिकेशन ने उसे 4000 करोड़ रुपए दिए थे. स्वामी के अनुसार, चिदंबरम ने विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के सौदे को तब तक के लिए रोक दिया जब तक कि उनके बेटे को शिवा की कंपनी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी नहीं मिली. इस मुद्दे को कई बार संसद में उठाया गया और चिदंबरम के इस्तीफे की मांग की गई. हालांकि बाद में चिदंबरम और उनकी सरकार ने आरोपों से इनकार किया. मामले पर द पायनियर और इंडिया टुडे ने तमाम तरह के दस्तावेज पेश किये जिसमें दर्शाया गया कि चिदंबरम ने अपने पद का दुरूपयोग किया और 7 महीने तक सौदे को रोके रखा. आरोप ये भी लगे कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के पुत्र कार्ति चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम 2 जी स्पेक्ट्रम मामले के प्रत्यक्ष लाभार्थी थे. कार्ति चिदंबरम की कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग की एयरसेल टेलीकॉम कंपनियों में पांच फीसदी हिस्सेदारी थी और पिता पी चिदंबरम ने सुनिश्चित किया कि एयरसेल-मैक्सिस सौदे के लिए एफआईपीबी क्लीयरेंस तभी दिया जाएगा जब उनके बेटे कार्ति की कंपनी एयरसेल वेंचर्स में हिस्सेदारी होगी. इसके अलावा ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) एयरसेल सौदे में कार्ति की संलिप्तता की जांच कर रहा है. ज्ञात हो कि पहले 2012 और फिर 2016 में मीडिया में खबरें आई कि ऐसे तमाम मौके आए जब कार्ति ने अपने पिता के पद का इस्तेमाल करते हुए खुद को फायदा पहुंचाया. बताया ये भी गया कि कार्ति की उनके मित्रों द्वारा आंशिक रूप से स्वामित्व वाली छोटी छोटी कम्पनियां जो मॉरीशस और सिंगापुर में हैं उसमें भी उनकी हिस्सेदारी है. इसके अतिरिक्त कार्ति को यूके और अन्य देशों में अपनी वैध कमाई से अधिक धन के साथ अचल संपत्ति रखने का भी दोषी पाया गया है. इन तमाम बातों के अलावा चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति पर भ्रष्टाचार, पद के दुरूपयोग, इनसाइडर ट्रेडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं. ध्यान रहे कि, 20 अगस्त 2019 को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने INX मीडिया मामले में चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया.
कार्ति चिदंबरम
कार्ति चिदंबरम पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे और वर्तमान में तमिलनाडु के शिवगंगा से कांग्रेस सांसद हैं. बात अगर कार्ति चिदंबरम के ऊपर चल रहे मामलों की हो तो पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम पर एयरसेल मैक्सिस भ्रष्टाचार मामला और मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है. सीबीआई और ईडी द्वारा दर्ज एयरसेल मैक्सिस मामलों में चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति की जमानत संबंधी याचिकाएं निचली अदालत में लंबित हैं. दोनों को निचली अदालत ने गिरफ्तारी से 23 अगस्त तक अंतरिम राहत प्रदान की है. जुलाई 2018 में सीबीआई द्वारा दाखिल चार्ज शीट में चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के नाम सामने आए थे, आपको बताते चलें कि 2006 में वित्त मंत्री के पद पर रहते हुए चिदंबरम ने एक विदेशी कंपनी को एफआईपीबी मंजूरी दी थी जबकि ऐसा करने का अधिकार केवल सीसीईए के पास ही होता है. सीबीआई जांच कर रही है कि आखिर किस आधार पर ये मंजूरी चिदंबरम में विदेशी कंपनी को दी. इसके अलावा जहां एक तरफ कार्ति पर आय से अधिक संपत्ति और विदेशों में संपत्ति जमा करने के मामले हैं तो वहीं इनपर भ्रष्टाचार, पिता के पद का नाजायज फायदा उठाकर खुद को फायदा पहुंचाने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.
नलिनी चिदंबरम
चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ सीबीआई शारदा चिटफंड घोटाले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है. उन पर 1.4 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने का आरोप है. इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. आपको बताते चलें कि इसी साल फ़रवरी में, सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम जो खुद एक वरिष्ठ वकील और सुप्रीम कोर्ट के जज पीएस कैलासम की बेटी हैं, के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दावा किया था कि चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4 करोड़ रूपये प्राप्त हुए. इस मामले पर जानकारी देते हुए सीबीआई ने दलील दी थी कि नलिनी पर आरोप है कि उन्होंने शारदा समूह की कंपनियों की धनराशि के गबन और फर्जीवाड़े के मकसद से शारदा ग्रुप के मालिक सुदीप्त सेन और अन्य आरोपियों के साथ आपराधिक साजिश की. सीबीआई का आरोप था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह की पत्नी मनोरंजना सिंह ने सेन का परिचय नलिनी चिदंबरम से कराया ताकि वह सेबी, आरओसी जैसी विभिन्न एजेंसियों की जांच को प्रभावित कर सकें. दिलचस्प बात ये थी कि इसके लिए उनकी कंपनियों को 2010-12 के दौरान कथित तौर पर 1.4 करोड़ रूपये हासिल हुए. इस साल फरवरी में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उन्हें मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी. ज्ञात हो कि शारदा समूह ने आकर्षक ब्याज दर का झांसा देकर लोगों से 2,500 करोड़ रूपये लिए थे और बाद में लोगों को उनके पैसे नहीं लौटाए गए. कोलकाता हाई कोर्ट ने साल 2014 में जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा था. इस मामले के मद्देनजर फ़िलहाल नलिनी सिंह बेल पर हैं.
चिदंबरम परिवार पर आयकर विभाग के आरोप
बीते दिनों आयकर विभाग ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और उनके परिवार के सदस्यों - कार्ति चिदंबरम, नलिनी चिदंबरम, श्रीनिधि चिदंबरम के खिलाफ चार अभियोजन शिकायतें विदेशी संपत्ति में निवेश करने और अपने कर रिटर्न में इसका खुलासा नहीं करने के लिए दर्ज की हैं. इन शिकायतों पर जानकारी देते हुए कर अधिकारियों ने बताया कि चार्जशीट चेन्नई में एक विशेष अदालत के समक्ष ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिनियम, 2015 की धारा के तहत आई-टी विभाग द्वारा दायर की गई हैं. नलिनी चिदंबरम, कार्ति और श्रीनिधि पर आरोप है कि उन्होंने ब्रिटेन के कैम्ब्रिज में 5.37 करोड़ रुपये की संपत्ति, ब्रिटेन में ही 80 लाख की संपत्ति और अमेरिका में 3.28 करोड़ रुपए की संपत्ति का पूरा खुलासा जांच एजेंसियों के सामने नहीं किया है. चार्जशीट में आरोप है कि चिदंबरम परिवार ने टैक्स अथॉरिटी को इनके बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. साथ ही कार्ति की फर्म चेस ग्लोबल एडवाइजरी जिसने काले धन पर बने कानून का उल्लंघन किया है उसके विषय में भी कोई जानकारी जांच अधिकारियों को नहीं दी है. ज्ञात हो कि इस कानून को 2015 में मोदी सरकार द्वारा लाया गया था. इस कानून के अंतर्गत उन भारतीयों पर मुकदमा चलाने की बात थी जिन्होंने विदेशों में संपत्ति अर्जित कर रखी है.
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सीबीआई द्वारा कांग्रेस नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी राजनीतिक दलों से ...
विभाग ने हाल ही में कार्ति और उनके परिवार के सदस्यों को उस मामले में नोटिस जारी किया था, जिसे उन्होंने मद्रास उच्च न्यायालय के सामने चुनौती दी थी. आपको बताते चलें की बीते महीने ही टैक्स अथॉरिटी ने कार्ति को ब्लैक मनी एक्ट के आपराधिक धाराओं के तहत नए सिरे से समन जारी किया था और इस समन में उनकी ब्रिटेन की संपत्ति का ब्योरा था. कार्ति को चेन्नई में काले धन और 2015 के कर अधिनियम के प्रावधान के तहत मामले के जांच अधिकारी के सामने हाजिर करने के लिए कहा गया था जो विदेशों में अघोषित संपत्ति से संबंधित हैं.(एजेंसीज इनपुट्स सहित)
आईएनएक्स मीडिया केस में पी चिदंबरम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अर्जी लगाई गई थी। लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। बुधवार सुबह जस्टिस रमन्ना की कोर्ट में ये मामला गया। लेकिन उन्होंने इस केस को चीफ जस्टिस की कोर्ट में भेज दिया था। चिदंबरम की अर्जी में कुछ खामियों की वजह से उसमें सुधार किया गया और एक बार फिर जस्टिस रमन्ना की अदालत में उनके वकीलों ने दलील दी। लेकिन दूसरी बार भी जस्टिस रमन्ना ने सुनवाई से इनकार कर दिया। आईएनएक्स मीडिया घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व गृह मंत्री व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दी थी। इसके कुछ घंटों के बाद मंगलवार रात सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की टीम उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पर गई थी। आइएनएक्स मीडिया घोटाला मामले में सु्प्रीम कोर्ट के जज एनवी रामन ने चिदंबरम की फाइल को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के पास भेज दिया है। अब देखना है कि मुख्य न्यायाधीश इस मामले में क्या फैसला करते हैं। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिलेगी या नहीं। इधर इडी ने चिदंबरम के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर है। अब प्रवर्तन निदेशालय ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की है। इडी ने कोर्ट से मांग की है कि हमें सुने बिना कोई आदेश पारित ना करें। ताजा जानकारी के अनुसार चीफ जस्टिस अभी संविधान पीठ में बैठे हैं और अयोध्या केस में सुनवाई कर रहे हैं। जस्टिस रमना के मना करने के बाद कपिल सिब्बल तुरंत चीफ जस्टिस कोर्ट गए, लेकिन वहां केस मेंशन नहीं किया, बल्कि कोर्ट ने सीधे अयोध्या केस की सुनवाई शुरू कर दी। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें तगड़ा झटका देते हुए मंगलवार(अगस्त 20) दोपहर उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके चंद मिनट बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। गिरफ्तारी पर तीन दिन की अंतरिम राहत देने की मांग करते हुए कोर्ट में फिर अर्जी लगाई, लेकिन उस पर भी उन्हें राहत नहीं मिली। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चिदंबरम का पक्ष रखने के लिए वकील कपिल सिब्बल, विवेक तनखा और सलमान खुर्शीद मौजूद रहेंगे। इसके बाद चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल व अन्य तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सीजेआई से तत्काल सुनवाई के लिए मेंशनिंग की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने उन्हें बुधवार(अगस्त 21) को मेंशनिंग करने का निर्देश दिया। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सुनील गौर ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर 25 जनवरी को फैसला सुरक्षित रखा था। मंगलवार को उनकी याचिका खारिज कर दी गई। जस्टिस सुनील गौर ने कहा कि सीबीआई व ईडी दोनों मामलों में उनकी याचिकाएं खारिज की जाती हैं। इसके बाद चिदंबरम के वकील दयान कृष्णन ने आदेश के अमल पर तीन दिन की रोक लगाने का आग्रह किया। हाई कोर्ट ने इस पर कहा कि वह इस आग्रह पर विचार कर फैसला देगी। करीब चार बजे कोर्ट ने उनका यह आग्रह भी नामंजूर कर दिया। हाई कोर्ट द्वारा कोई भी राहत देने इनकार करने के बाद चिदंबरम ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से मुलाकात कर अगली रणनीति पर विचार किया। कपिल सिब्बल ने बताया कि बुधवार सुबह 10.30 बजे सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने के लिए केस की मेंशनिंग की जाएगी। पी. चिदंबरम पर क्या हैं आरोप ? वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) ने दो उपक्रमों को मंजूरी दी थी। आइएनएक्स मीडिया मामले में सीबीआई ने 15 मई, 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये की विदेशी धनराशि प्राप्त करने के लिए मीडिया समूह को दी गई एफआइपीबी मंजूरी में अनियमितताएं हुई। इसके बाद ईडी ने पिछले साल इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। क्या है INX मीडिया केस ? आइएनएक्स मीडिया केस साल 2007 में आइएनएक्स मीडिया को मिले पैसों के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआइपीबी) से मंजूरी मिलने से जुड़ा हुआ है। 305 करोड़ रुपये के इस हाई प्रोफाइल घोटाले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का भी नाम शामिल है। सीबीआई और ईडी केस में जांच कर रही है कि कैसे पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को 2007 में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से आईएनएक्स मीडिया के लिए मंजूरी मिल गई थी, जबकि उस वक्त वित्त मंत्री खुद उनके पिता पी. चिदंबरम थे। सीबीआई और ईडी की जांच में ये पता चला कि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलाने के लिए आईएनएक्स मीडिया के निदेशक पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी ने पी. चिदंबरम से मुलाकात की थी, जिससे विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी में कोई देरी ना हो। क्यों आई जेल जाने की नौबत, ‘स्कैम के पैसे से विदेशों खरीदी ये संपत्तियां’ आईएनएक्स मीडिया घोटाला मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिंदबरम पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। फिलहाल चिदंबरम भूमिगत हैं और केंद्रीय जांच एजेंसियां सीबीआइ व ईडी की टीमें चिदंबरम को बड़ी शिद्दत से तलाश रही हैं। इससे बचने के लिए चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। चूंकि चिदंबरम एक वकील हैं इसलिए उन्हें कानून से बचने के सारे दांवपेंच भी मालूम हैं। बावजूद इसके यदि चिदंबरम को सीबीआई और ईडी में से कोई भी गिरफ्तार कर लेती है तो उन्हें 28 दिन (14-14 दिन) तक जेल में रहना पड़ सकता है। चिदंबरम के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हो चुका है। आखिरकार, चिदंबरम को जेल जाने की नौबत क्यों आई है आइये करते हैं इसकी पड़ताल… कार्ती ने अपने पिता के वित्त मंत्री होने का उठाया फायदा दरअसल, पूरा मामला आईएनएक्स मीडिया घोटाले से जुड़ा हुआ है। इसमें 15 मई 2017 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस केस में आइएनएक्स मीडिया को सन 2007 में गलत तरीके से विदेशी निवेश की मंजूरी देने का है। पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए आइएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी मिली थी। जिस आइएनएक्स कंपनी के लिए विदेशी निवेश मंजूर किया गया था उसकी सलाहकार कंपनी चिदंबरम के बेटे की थी। आरोप यही हैं कि कार्ती चिदंबरम ने अपने पिता के वित्त मंत्री होने का फायदा उठाया। मामले में पी. चिदंबरम और कार्ती चिदंबरम दोनों ही आरोपी है। चार करोड़ निवेश की मंजूरी, जमा कराए 305 करोड़ आरोप है कि आइएनएक्स को टीवी न्यूज में विदेशी निवेश के लिए केवल चार करोड़ 62 लाख रुपये की मंजूरी मिली थी लेकिन कथित तौर पर हेराफेरी के जरिये करीब 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश लाया गया। आरोप यह भी हैं कि अवैध तरीके से लाई गई रकम को गलत तरीके से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल मेक्सेस दोनों ही मामलों में फंसे हैं। चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती से पूछताछ के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियां ईडी और सीबीआई उनकी हिरासत मांग रही हैं। गिरफ्तारी से बचने के लिए चिदंबरम को इन मामलों में हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी जो कि पिछले साल जुलाई से हाल फिलहाल तक कई बार बढ़ी। ‘आरोपी राहत पाने के हकदार नहीं’ कल यानी मंगलवार(अगस्त 20) का दिन चिदंबरम के लिए भारी साबित हुआ। दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम को तगड़ा झटका देते हुए बीते 19 महीने से लंबित उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही कुछ तल्ख टिप्पणियां भी की। अदालत ने कहा कि चिदंबरम को केवल इस बिना पर गिरफ्तारी से छूट नहीं दी जा सकती है कि वे संसद के सदस्य हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि मामले की मुकम्मल जांच के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है। 24 पेज के फैसले में यह साफ कर दिया गया कि इस तरह के मामले में आरोपी राहत पाने के हकदार नहीं हैं। स्कैम के पैसे से स्पेन में टेनिस क्लब, ब्रिटेन में कॉटेज…? प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि पी. चिदंबरम के बेटे ने कथित घोटाले की रकम से स्पेन में एक टेनिस क्लब, ब्रिटेन में कॉटेज एवं भारत में 54 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां खरीदी हैं। ईडी द्वारा साल 2008 में पास किए गए अटैचमेंट ऑर्डर के मुताबिक, कार्ती ने उक्त सारी संपत्तियां कथित तौर पर रिश्वत के पैसे से खरीदी हैं। मामले में जांच एजेंसियों द्वारा चिदंबरम का दिल्ली स्थित 16 करोड़ की कीमत वाला जोर बाग बंग्ला (Aircel-Maxis 2G scam case) अटैच किया जा चुका है। यही नहीं कार्ती के 09.23 करोड़ (Indian Overseas Bank’s Nungambakkam branch in Chennai) और 90 लाख (Advantage Strategic Consulting Pvt Ltd, ASCPL) के दो फिक्स डिपोजिट भी अटैच किए जा चुके हैं। एजेंसियों की मानें तो कार्ती के बेटे के बार्सिलोना स्थित टेनिस क्लब की कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये है। twiter पर उड़ता मजाक इस बीच, सोशल मीडिया पर उनका खूब मजाक बनाया जा रहा है। रोहित सरदाना ने ट्विटर पर लिखा कि साल 2010 में पी. चिदम्बरम गृहमंत्री थे। CBI ने सोहराबुद्दीन शेख़ एनकाउंटर मामले में अमित शाह को जेल में डाला था। साल 2019 में अमित शाह गृहमंत्री हैं। CBI पी. चिदम्बरम को जेल में डालने के लिए घर के दरवाज़े पर खड़ी है। समय का फेर! इसी तरह अनुराग मुस्कान नामक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया कि चिदंबरम जब पूछते थे कि विजय माल्या कैसे भागा? नीरव मोदी कैसे भागा? मेहुल चौकसी कैसे भागा? तो लगता था कि वो सरकार से सवाल पूछ रहे हैं। तब किसे पता था कि वो सवाल नहीं बल्कि भागने का तरीका पूछ रहे हैं। योगेश अग्रवाल नामक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया- मोदी है तो मुमकिन है, लेकिन अगर अमित शाह है तो कन्फर्म है। भाग चिदंबरम भाग...। रंजन सिंह राजपूत नामक व्यक्ति ने लिखा- हमेशा गुंडे बदमाश भागते थे। आज पूर्व वित्तमंत्री ही भाग गए, मतलब देश सही हाथों में है।