Showing posts with label Vaccine. Show all posts
Showing posts with label Vaccine. Show all posts

फ्री वैक्सीन में खोट निकाल रहे राहुल गाँधी को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का टका सा जवाब

                                                                                                                                        साभार 
कोरोना टीकाकरण पर केंद्र सरकार के ताज़ा फैसले से बिफरे राहुल गाँधी को जब प्रधानमंत्री के राष्ट्र को सम्बोधन में से कुछ खोट निकालने लायक नहीं मिला तो उन्होंने ट्विटर पर एक जबरदस्ती का सवाल दाग दिया, जिसका करारा जवाब उन्हें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मिला। बता दें कि पीएम मोदी ने सोमवार (जून 7, 2021) को राष्ट्र के नाम सम्बोधन में केंद्र सरकार की तरफ से मुफ्त वैक्सीन राज्यों को देने की घोषणा की।

टीकाकरण की रणनीति पर पुनर्विचार करने और 1 मई से पहले की व्यवस्था को वापस लाते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राज्यों के जिम्मे जो 25 प्रतिशत टीकाकरण था, उसे अब भारत सरकार द्वारा करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय को दो सप्ताह में अमल में ला दिया जाएगा। दो सप्ताह में केन्द्र और राज्य नए दिशानिर्देशों के मुताबिक जरूरी तैयारियाँ करेंगे। आगामी 21 जून से, भारत सरकार 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन प्रदान करेगी।

इस पर राहुल गाँधी ने कहा कि उनके पास सिर्फ एक ‘सीधा सा सवाल’ है, “अगर वैक्सीन मुफ्त में दी जा रही है कि प्राइवेट अस्पताल इसके लिए क्यों चार्ज लेंगे?” साथ ही उन्होंने ‘फ्री वैक्सीन फॉर ऑल’ का टैग भी लगाया। दअरसल, प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम सम्बोधन में घोषणा की है कि निजी अस्पतालों द्वारा 25 प्रतिशत टीकों की सीधी खरीद की व्यवस्था जारी रहेगी। राहुल गाँधी की नाराजगी इसी से जुड़े फैसले से थी।

प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार, राज्य सरकारें इस बात की निगरानी करेंगी कि निजी अस्पतालों द्वारा टीकों की निर्धारित कीमत पर केवल 150 रुपए का ही सर्विस चार्ज लिया जाए। राहुल गाँधी का सवाल इसी पर था। कभी उनकी ही पार्टी में रहे हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गाँधी के ‘एक सीधा सा सवाल’ का ‘एक सीधा सा जवाब’ दिया है। साथ ही सलाह दी कि वो बच्चों की तरह जबरदस्ती सब कुछ में गलतियाँ न निकालें।

असम के मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा, “सरकारी अस्पतालों में 18 से अधिक की उम्र वाले हर एक भारतीय नागरिक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा मुफ्त में कोरोना वैक्सीन दी जाएगी। जिन्हें रुपए देकर वैक्सीन लेनी है, उनके लिए प्राइवेट अस्पतालों का रुख करने की व्यवस्था है।” असल में हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल को समझाया कि मुफ्त में वैक्सीन के लिए प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लेने की ज़रूरत ही नहीं है, सरकार ने इसकी व्यवस्था पहले ही कर रखी है।

राहुल गाँधी अक्सर हिमंत बिस्वा सरमा के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने कॉन्ग्रेस के अंतिम दिनों का एक किस्सा सुनाया था, जब वो राहुल गाँधी की एक बैठक में गए थे। उन्होंने बताया था कि उन्होंने देखा कि तरुण गोगोई और सीपी जोशी जैसे वरिष्ठ नेता उसी प्लेट से बिस्किट उठा कर खा रहे हैं, जिसे राहुल गाँधी के कुत्ते ‘पीडी’ ने जूठा कर दिया था। इस अपमान के बाद सरमा ने कॉन्ग्रेस छोड़ भाजपा का रुख किया था।

वैक्सीन पॉलिसी: पी चिदंबरम और राजदीप सरदेसाई ने कोरोना वैक्सीन को लेकर फैलाया था प्रोपेगंडा; चिदंबरम ने वापस लिया बयान

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने जहाँ कोरोना वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाया, वहीं ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने भी अपने पुराने बयान से यू-टर्न लेते हुए केंद्र सरकार के फैसले का श्रेय विपक्षी नेताओं को दे डाला। विपक्षी नेताओं ने सोशल मीडिया पर हंगामा करने में देर नहीं मचाई और दावा किया कि वैक्सीन नीति की प्रक्रिया ‘सेंट्रलाइज्ड’ हो, ये उनकी शुरू से माँग थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने भी यही किया।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘राष्ट्र के नाम सम्बोधन’ का संदेश यही है कि केंद्र सरकार ने अपनी पिछली गलतियों से सीख ली है और उसने जो दो प्रमुख गलतियाँ की थीं, उसे सुधारने का प्रयास किया है। लेकिन, साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर झाँसा देने का आरोप लगाते ये भी कहा कि उन्होंने अपनी गलतियों के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने दावा किया कि किसी ने भी ऐसा नहीं कहा था कि केंद्र को वैक्सीन की खरीद नहीं करनी चाहिए।

तमिलनाडु के कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अब मोदी कह रहे हैं कि राज्यों ने वैक्सीन की खरीद के लिए इच्छा प्रकट की थी, इसीलिए उन्हें ये सुविधा दी गई थी। उन्होंने सवाल दागा था कि किस राज्य के किस मुख्यमंत्री ने किस समय वैक्सीन की खरीद के लिए इच्छा प्रकट की थी या ऐसी माँग की थी? इसके बाद लोगों ने उनके सामने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का पत्र पेश किया, जिसमें उन्होंने यही माँग रखी थी।

फिर पी चिदंबरम ने अपने बयान को गलत बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स ने मुख्यमंत्री ममता का पत्र शेयर किया है, जिसके बाद वो अपने बयान में भूल-सुधार करते हैं। चिदंबरम ने ये बयान ANI को दिया था। दरअसल, फरवरी 24, 2021 के उस पत्र में ममता बनर्जी ने माँग की थी कि राज्य सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर राज्यों को बड़ी संख्या में वैक्सीन की खरीद की अनुमति देनी चाहिए।

इस दौरान पी चिदंबरम अपनी ही पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी का वो पत्र भी भूल गए, जो उन्होंने अप्रैल 8, 2021 को लिखा था। राहुल गाँधी ने तब माँग की थी कि वैक्सीन की खरीद में राज्य सरकारों की ज्यादा भूमिका होनी चाहिए। तब उन्होंने ‘सेंट्रलाइज्ड प्रोपेगंडा’ को गलत करार दिया था। खुद पी चिदंबरम ने NDTV को वैक्सीन की प्रक्रिया डिसेंट्रलाइज करने को कहा था। शेखर गुप्ता ने भी एक ट्वीट में लिखा था कि कई राज्यों ने ऐसी माँग की है।

ज्ञात हो कि टीकाकरण की रणनीति पर पुनर्विचार करने और 1 मई से पहले की व्यवस्था को वापस लाते हुए प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि राज्यों के जिम्मे जो 25 प्रतिशत टीकाकरण था, उसे अब भारत सरकार द्वारा करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय को दो सप्ताह में अमल में ला दिया जाएगा। दो सप्ताह में केन्द्र और राज्य नए दिशा निर्देशों के मुताबिक जरूरी तैयारियाँ करेंगे। आगामी 21 जून से, भारत सरकार 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी भारतीय नागरिकों को मुफ्त कोरोना वैक्सीन प्रदान करेगी।

वहीं राजदीप सरदेसाई ने राज्यों को वैक्सीन को वैक्सीन की खरीद का अधिकार दिए जाने के समय मनमोहन सिंह को श्रेय देते हुए उनकी तारीफों के पुल बाँधे थे, लेकिन अब वो इस प्रक्रिया के वापस लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं को श्रेय देते नहीं अघा रहे। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने राज्यों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह मान ऐसा किया है। लेकिन, तब राजदीप ने कहा था कि मनमोहन की सलाह पर राज्यों को ये अधिकार मिला है।

दिल्ली : ‘आबादी के हिसाब से 16 लाख अधिक वैक्सीन मिली, फिर भी अफरा-तफरी का माहौल क्यों बना रहे केजरीवाल’? : गौतम गंभीर, सांसद, ने दागे 5 सवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में युवाओं की वैक्सीन खत्म हो गई है और उनके वैक्सीन सेंटर पिछले 4 दिनों से बंद हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों की कोवैक्सीन भी खत्म हो गई है। बकौल दिल्ली मुख्यमंत्री, उन्होंने केंद्र सरकार को लिखा है लेकिन अभी तक वैक्सीन आई नहीं है। केजरीवाल ने यहाँ तक दावा किया कि कोरोना महामारी के इस दौर में देश भर में कई टीका केंद्र बंद हो गए हैं।
केजरीवाल को शायद नहीं मालूम कि उत्तर प्रदेश में सबको वैक्सीन लगाई जा रही है, जबकि भाजपा विरोधी राज्यों में बर्बादी भी की जा रही है। दूसरे, ऑक्सीजन की ऑडिट से पहले तक खूब शोर मचाया जा रहा था, परन्तु ऑडिट की बात होते ही, ऑक्सीजन की कमी का शोर मचाने वाले वैक्सीन पर आ गए हैं और जब इसकी भी ऑडिट शुरू होगी, फिर देखो किस मुद्दे पर शोर मचाकर मोदी विरोध में जनता को पागल बनाएंगे। इस मुख्यमंत्री का मुख्य उद्देश्य विवाद खड़े कर मुफ्त में बिजली, पानी और अब कोरोना में मरने वालों को मुफ्त में लकड़ियां देकर सत्ता का सुख भोगने वाली पार्टी है। जिसे शर्म नाम की कोई चीज नहीं। जनता आज नहीं तो कल इस सच्चाई को जानेगी कि मोदी विरोधियों की लड़ाई कोरोना से नहीं, सिर्फ और सिर्फ मोदी से है। 
प्रमाण देखिए, यह वीडियो उस समय वायरल हुआ था, जब चारों तरफ मोदी विरोध में मोदी विरोधी ऑक्सीजन की कमी का शोर मचा रहे थे।   

आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो ने कहा कि देश में वैक्सीन की जबर्दस्त किल्लत है और अगर देश के लोगों को सही समय पर वैक्सीन लगा दी जाती तो शायद कोरोना दूसरी लहर के प्रकोप को काफी कम किया जा सकता था। उन्होंने कहा, “मेरी जानकारी के मुताबिक, शायद अभी तक कोई भी राज्य वैक्सीन के एक भी अतिरिक्त टीके का इंतज़ाम नहीं कर पाया है। ये वक्त 130 करोड़ लोगों को मिलकर इस महामारी से मुकाबला करने का है।”

केजरीवाल ने आगे ज्ञान देते हुए कहा कि कोरोना को हराने के लिए हमें टीम इंडिया बनकर काम करना पड़ेगा। लोगों ने उनके इस बयान को लेकर उनकी आलोचना की। किसी ने उसने कोरोना वैक्सीन ऑर्डर के डिटेल्स माँगे, तो किसी ने बताया कि बिहार जैसे गरीब राज्य का भी कोरोना टीकाकरण में शानदार प्रदर्शन रहा है। एक यूजर ने पूछा कि बाकी CM इतने परेशान क्यों नहीं हैं? एक अन्य यूजर ने उनसे पूछा कि केंद्र सरकार पर आरोप-प्रत्यारोप के अलावा उन्होंने किया ही क्या है?

वहीं नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर ने अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जवाब दिया है। गौतम गंभीर ने कहा कि टीकाकरण को लेकर केजरीवाल सरकार ने जिस तरह अफरा-तफरी और लोगों के अंदर डर का माहौल बनाया हुआ है, वो उनकी घटिया और निचले स्तर की राजनीति को बताता है।

उन्होंने केजरीवाल को आँकड़ों का आइना दिखाते हुए कहा कि दिल्ली की कुल आबादी 2 करोड़ है जो पूरे देश की जनसंख्या का लगभग 1.6% के बराबर है। अभी देश में कुल 20 करोड़ वैक्सीन लगी हैं, यानी कुल आबादी और कुल वैक्सीन के हिसाब से दिल्ली को लगभग 35 लाख वैक्सीन मिलना चाहिए जबकि इससे 16 लाख अधिक वैक्सीन मिले हैं, फिर भी केजरीवाल केंद्र पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने AAP सरकार से 5 सवाल पूछे:

  1. केंद्र सरकार जब केजरीवाल सरकार को वैक्सीन दे रही थी, तब कंपनी से सीधा खरीदने की माँग कर रहे थे, लेकिन जब इजाजत मिली तब पलटकर केंद्र सरकार से वैक्सीन की माँग क्यों करने लगे?
  2. केजरीवाल सरकार इसकी जानकारी दे कि दिल्ली में 50 लाख से अधिक लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, वैक्सीन खरीद में AAP का क्या योगदान है?
  3. केजरीवाल सरकार ने वैक्सीन खरीदने के लिए ऑर्डर कब दिया? केंद्र की इजाजत के बाद भी अभी तक वैक्सीन क्यों नहीं ली?
  4. दिल्ली की भोली-भाली जनता को वैक्सीन के नाम पर धोखा क्यों? AAP नेताओं ने अपने चहेतों के लिए टाइम स्लॉट बुक कर रखा है।
  5. केंद्र द्वारा रोडमैप दिए जाने के बावजूद केजरीवाल अफरा-तफरी क्यों पैदा कर रहे हैं?
दिल्ली में टीकाकरण की गति भी काफी धीमी है। जिन्हें दूसरा डोज लगवाना है, उनके लिए समस्या उत्पन्न हो गई है। 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए सरकारी साइट्स पर फ्री वैक्सीनेशन लगभग बंद हो गया है। केवल प्राइवेट अस्पतालों में पेड वैक्सीनेशन जारी है। जिनके दूसरे डोज का समय बीत जाएगा, उनका क्या होगा? कोवैक्सीन की उपलब्धता तो और भी कम है। मात्र 6 जगहों पर 18-44 उम्र के लोगों को वैक्सीन दिए जा रहे हैं।

कोरोना वैक्सीन के खिलाफ मिशनरी प्रोपेगंडा पर चुप क्यों मीडिया? ‘बाइबिल ठीक करेगा कोरोना’

देश भर में कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर जहाँ केंद्र सरकार जागरूकता फैलाने में लगी हुई है और रोज ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं कुछ देश विरोधी मजहबी ताकतें ऐसी हैं जो मोदी विरोधियों के संरक्षण में कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को कमजोर कर के कट्टरता के सहारे लोगों को बरगलाने में लगी हुई है। हाल ही में हमने बताया था कि कैसे ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA)’ के अध्यक्ष JA जयलाल देश के अस्पतालों में ईसाई धर्मांतरण की साज़िश रच रहे थे।

भारत के स्वास्थ्य प्रोफेशनल्स के सबसे बड़े परिषद ‘इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (IMA)’ के अध्यक्ष JA जयलाल ‘सेक्युलर संस्थाओं’ के ईसाई धर्मांतरण की इच्छा रखते हैं और चाहते हैं कि अस्पतालों का इस्तेमाल भी ईसाई धर्मांतरण के लिए हो। उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि IMA ‘जीसस क्राइस्ट के प्यार’ को साझा करे और सभी को भरोसा दिलाए कि जीसस ही व्यक्तिगत रूप से रक्षा करने वाले हैं। उनका मानना है कि चर्चों और ईसाई दयाभाव के कारण ही विश्व में पिछली कई महामारियों और रोगों का इलाज आया।

इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति जब इस तरह की बातें करता है तो मीडिया उसकी आलोचना क्यों नहीं करती? मीडिया में उसकी आलोचना तो दूर की बात, कहीं उसकी मंशा को लेकर एक खबर तक नहीं मिलेगी। जिस व्यक्ति को एक वैज्ञानिक और मेडिकल प्रोफेशनल्स की संस्था का मुखिया चुना गया है, वो इसके इस्तेमाल मजहबी गतिविधियों के लिए करता है और मीडिया में कहीं कोई सवाल नहीं।

इन चीजों का अब दुष्प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में ईसाई संगठनों ने कोरोना वैक्सीन को लेकर इतनी अफवाहें फैलाई हैं कि वहाँ लोग इसे ‘शैतानी ताकत’ बताते हुए इसकी डोज लेने से इनकार कर रहे हैं। ‘प्रेयर वॉरियर्स’ जैसी संस्थाएँ इसके पीछे हैं। एक ईसाई संगठन ने टीकाकरण को ‘ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध’ बताते हुए इससे दूर रहने की अपील की थी। बरगलाया गया कि कोरोना का टीका लेने वाले ईसाई साम्राज्य में प्रवेश नहीं कर पाएँगे।

इसके पीछे जयलाल किस्म के लोग ही हैं। ये लोग मेडिकल संस्थाओं से लेकर चर्चों तक में बैठे हुए हैं। ऐसा नहीं है कि अन्य मजहबों में ये समस्या नहीं है। महाराष्ट्र और गुजरात में मुस्लिमों को कोरोना वैक्सीनेशन के प्रति जागरूक करने के लिए मस्जिदों से अजान के वक़्त इसके बारे में बताया गया, लेकिन असर ढाक के तीन पात ही रहा। कुछ मुस्लिम बहुल इलाकों में अफवाह फैली कि कोरोना वैक्सीन से लोग नपुंसक हो जाएँगे।

लेकिन, ईसाई मिशनरियों द्वारा इस तरह के अफवाह फैलाने के दुष्परिणाम दूरगामी होते हैं। भारत में ईसाईयों में अधिकतर वो लोग हैं, जो पहले हिन्दू थे और गरीबी के कारण उन्हें लालच देकर ईसाई बनाया गया। धर्मांतरण का ये खेल केरल से लेकर झारखंड और उत्तर-पूर्व तक चल रहा है। गरीबों पर इस महामारी की सबसे ज्यादा मार पड़ी है और उन्हें ही टीके से दूर किया जा रहा है। मणिपुर के ईसाईयों का मानना है कि उन्हें वैक्सीन नहीं, बाइबिल बचाएगी।

इसी तरह मध्य प्रदेश के रतलाम में एक महिला डॉक्टर मरीजों से ये कहते हुए पाई गई कि वो ठीक होने के लिए जीसस से प्रार्थना करें। बाजना गाँव में अनुबंध पर बहाल ये डॉक्टर ‘कोरोना को मारने के लिए’ ईसाई मजहबी गतिविधियों का प्रचार कर रही थी। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस घटना के बारे में ट्वीट करते हुए कहा भी कि दवाई की जगह धर्म परिवर्तन की घुट्टी पिलाने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आज अगर ये सब हो रहा है तो इसके पीछे वो नेतागण भी जिम्मेदार हैं, जो विपक्ष में बैठे हुए हैं। राहुल गाँधी से लेकर अखिलेश यादव तक ने कोरोना वैक्सीन को लेकर जम कर अफवाहों का बाजार गर्म किया। अखिलेश ने तो इसे "बीजेपी वैक्सीन" बताया था। विपक्षी दलों व इनके नेताओं ने कभी वैक्सीन के ट्रायल को लेकर तो कभी इसके ‘साइड इफेक्ट्स’ को लेकर अफवाहें फैलाईं। आज यही नेता टीकाकरण के आँकड़े दिखा कर इसके धीमे होने का आरोप लगा रहे हैं।

इनके लिए वैक्सीन पहले अच्छा था और अब बुरा हो गया है। इन नेताओं ने जम कर विदेशी वैक्सीन्स की पैरवी की। इसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह से पत्र भी लिखवाया गया। वो अलग बात है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने स्वदेशी वैक्सीन की दोनों डोज ले ली थी। इसके बाद दोनों कोरोना संक्रमित हुए लेकिन अस्पताल से सकुशल वापस आए। वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद एंटीबॉडी बनने में दो हफ्ते का वक़्त लगता है।

इन सबके बावजूद सवाल किस से पूछे जा रहे हैं? हिन्दुओं से। निशाना किस पर साधा जा रहा है? मंदिरों पर। उन मंदिरों पर जो लंदन से लेकर अयोध्या तक जनहित के कार्यों में लगे हुए हैं। UK की सरकार ने कोरोना के खिलाफ जागरूकता के लिए वहाँ के स्वामीनारायण मंदिर की मदद ली। अयोध्या में राम मंदिर ने अपने निर्माण से पहले ही ऑक्सीजन प्लांट्स लगवाने का फैसला लिया। कई मंदिरों ने राज्यों और केंद्र के आपदा कोष में धन दान किए। 

मुंबई में जैन मंदिरों ने खुद को कोविड केयर सेंटर्स में तब्दील कर लिया। काशी विश्वनाथ मंदिर ने गरीबों के भोजन का बीड़ा उठाया। तिरुपति बालाजी मंदिर के कर्मचारियों ने अपना 1 दिन का वेतन दान किया। पटना के महावीर मंदिर, गुजरात के सोमनाथ मंदिर और बनासकांठा के अम्बाजी मंदिर ने एक-एक करोड़ रुपए सरकार को दान में दिए। इस तरह हर छोटे बड़े मंदिरों, मठों व साधुओं ने अपना-अपना योगदान दिया।

अवलोकन करें:-

मध्य प्रदेश : आदिवासी बहुल इलाके में कोविड-19 ड्यूटी के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार करती नर्स

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
मध्य प्रदेश : आदिवासी बहुल इलाके में कोविड-19 ड्यूटी के दौरान ईसाई धर्म का प्रचार करती नर्स
‘चीन के प्रोपेगंडा ने मीडिया को बना दिया अंधा, वुहान लैब से कोरोना के लीक होने पर नहीं की गई रिसर

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘चीन के प्रोपेगंडा ने मीडिया को बना दिया अंधा, वुहान लैब से कोरोना के लीक होने पर नहीं की गई रिसर

कभी किसी खबर में सुना कि इन्होंने दान के बदले में धर्मांतरण को आगे बढ़ाया हो? ये काम तो वो लोग कर रहे हैं, जिन्हें दवाओं और मेडिकल गाइडलाइंस के प्रति लोगों में जागरूकता फैलानी चाहिए। पर IMA के JA जयलाल जैसे लोग उलटे बाबा रामदेव पर आरोप लगा रहे हैं कि जीवन को खतरे में डालने और एलोपैथी दवाओं को लेकर झूठी अफवाह फैलाने के लिए उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

18-44 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के सरकारी केंद्रों पर ऑन साइट रजिस्ट्रेशन होगा

दुनिया के सबसे बड़ी वैक्सीनेशन अभियान में और अधिक तेजी लाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए CoWIN डिजिटल प्लेटफॉर्म की साइट पर रजिस्ट्रेशन करने की छूट दे दी है। 18 से अधिक उम्र वालों का ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन और अपॉइंटमेंट किया जा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह निर्णय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए एप्लीकेशन के आधार पर लिया है।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य वैक्सीन की बर्बादी को कम करना और इंटरनेट, स्मार्ट फोन या मोबाइल फोन तक पहुँच के बिना भी टीका लगाने की सुविधा देना है।

केंद्र सरकार ने बयान जारी कर कहा है, “ऑनलाइन स्लॉट के साथ रजिस्ट्रेशन कराने वाला व्यक्ति अपॉइंटमेंट के बावजूद जिस दिन नहीं आता है तो दिन के अंत तक कुछ वैक्सीन अनउपयोगी रह जाती हैं। ऐसे मामलों में कम से कम टीकों की बर्बादी हो इसके लिए लाभार्थियों के ऑन साइट रजिस्ट्रेशन भी होगा।”

शुरुआती चरण में सरकार यह सुविधा केवल सरकारी कोविड टीकाकरण सुविधाओं पर शुरू करेगी। वहीं हर राज्य अपने-अपने राज्यों में ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन को एक्टिवेट करने के लिए खुद ही उत्तरदायी होगा।

 सरकार द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, “राज्य व केंद्रशासित प्रदेश को स्थानीय परिस्थिति के आधार पर 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए ऑन-साइट रजिस्ट्रेशन की सुविधा वाले समूहों के पंजीकरण और नियुक्तियों को खोलने का निर्णय लेना चाहिए, ताकि टीके की बर्बादी को कम करने और टीकाकरण की सुविधा के लिए एक अतिरिक्त उपाय किया जा सके।

केंद्र ने दी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सलाह

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सभी जिला टीकाकरण अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की सलाह दी है। साथ ही केंद्र ने सभी जिला टीकाकरण अधिकारियों को साइट पर रजिस्ट्रेशन समेत अन्य मुद्दों पर राज्य सरकार के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की सिफारिश भी की है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि टीकाकरण की सुविधा का लाभार्थी अधिकतम लाभ उठा सकें, इसके लिए टीकाकरण सेवाएँ प्रदान करने के लिए पूरी तरह से आरक्षित सत्र भी आयोजित किए जा सकते हैं। साथ ही ऐसे लाभार्थियों को पर्याप्त संख्या में जुटाने के लिए पहले से कोशिशें करने की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रजिस्ट्रेशन के दौरान अधिकतम सुरक्षा व सावधानी बरतने की नसीहत दी है, जिससे वैक्सीनेशन के दौरान सेंटरों पर अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके।
देश के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है कि अब तक 19 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन के डोज लग चुके हैं।

राजस्थान में 11.5 लाख कोविड वैक्सीन की खुराक बर्बाद; राहुल गाँधी खामोश क्यों?

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन, कई जगहों में वैक्सीन की बर्बादी भी हो रही है। राजस्थान इस मामले में सबसे आगे है। पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस शासित राजस्थान में कुल 11.5 लाख (करीब 7 फीसदी) वैक्सीन के डोज खराब हो गए हैं।

चुरू जिले में सबसे ज्यादा 39.7 प्रतिशत वैक्सीन बर्बाद हो गई है। इस मामले में 24.60 फीसदी के साथ हनुमानगढ़ दूसरे नंबर पर है, जबकि 17.13 प्रतिशत वैक्सीन भरतपुर में बेकार हो गई है। वैक्सीन बर्बादी के मामले में यह जिला तीसरे नंबर पर है। वहीं 16.71 फीसदी वैक्सीन को बर्बाद करके कोटा चौथे नंबर पर है।

वैक्सीन की बर्बादी पर राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय मंत्री और जोधपुर के सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री गहलोत को फटकार लगाई और कहा कि इससे राज्य में कोरोना का संकट घटने की बजाय बढ़ा है।

शेखावत ने कहा, “प्रधानमंत्री बार-बार कह रहे हैं कि कोविड के टीके की एक खुराक बर्बाद करना किसी व्यक्ति को जीवन कवच से वंचित करने जैसा है, लेकिन जिनकी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने की आदत ही बन चुकी हो तो उन्हें कैसे सुधारेंगे?” उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि आखिर वैक्सीन की बर्बादी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?

केंद्रीय मंत्री ने वैक्सीन की बर्बादी को अपराध बताते हुए कहा, “ये लोगों के जीवन का सवाल है इसलिए इस कृत्य नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि ये गहलोत की जिम्मेदारी है कि वे अपराधियों को सजा दें, अन्यथा हम ये मान लें कि इसके लिए मुख्यमंत्री खुद ही जिम्मेदार हैं।

वैक्सीन की बर्बादी पर मोदी कर चुके हैं आगाह

कोरोना संक्रमण के कारण वैक्सीन की कमी के बीच इसकी बर्बादी को लेकर नरेंद्र मोदी ने 20 मई 2021 को सभी जिलाधिकारियों से कोविड -19 टीकों की कम से कम बर्बादी सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।

पीएम ने कहा था, “वैक्सीन की बर्बादी एक गंभीर मुद्दा है। एक भी खुराक बर्बाद करने का मतलब है किसी के जीवन को ढाल देने से वंचित कर देना।”

उन्होने कहा था, “जब आप सभी को टीके दिए जाते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह बर्बाद न हो। आप सभी को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में इस पर नजर बनाकर रखना चाहिए।”

वैक्सीन विरोधी अभियान चला रही कांग्रेस 

भारत सरकार द्वारा कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए चलाए जा रहे वैक्सीनेशन अभियान के खिलाफ पिछले कुछ महीनों से गैर-एनडीए दल खासकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी टीकाकरण अभियान पर ओछी राजनीति कर रहे हैं।

कांग्रेस भाजपा शासित केंद्र सरकार की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रही है। वह कोरोना की वैक्सीन बनाने वाली भारतीय कंपनियों के खिलाफ कैंपेनिंग करते हुए विदेशी कंपनियों के महंगे टीकों का प्रचार कर रही है। इसी साल जनवरी में केंद्र सरकार ने कोरोना के इलाज के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के एमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। लेकिन उसे बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने अभियान चलाया।

अपने प्रोपेगैंडा के शुरुआती चरण में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर, मनीष तिवारी और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव जैसे कांग्रेस नेताओं ने टीकाकरण के अभियान को ही सीमित कर दिया। उसके इस प्रोपागैंडा में वामपंथी मीडिया कांग्रेस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहा है और लोगों में वैक्सीन के प्रति भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

केजरीवाल सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर उठी आपराधिक मुकदमा दायर करने की मांग

कोरोना महामारी को लेकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की लापरवाही को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कोरोना से निपटने में विफल रहे हैं। केजरीवाल सरकार ने अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने की कोशिश की। उन्होंने दिल्ली के लिए जरूरत से ज्यादा मैट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की। केजरीवाल ने पहले कहा कि दिल्ली को 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है, फिर उनकी पार्टी के नेता राघव चड्डा ने कहा कि दिल्ली में 976 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। केजरीवाल सरकार ने ऑक्सीजन तो मंगा लिया, लेकिन दिल्ली के पास ना तो इसे रखने, ना ही वितरण की कोई व्यवस्था थी। केजरीवाल सरकार ने ऑक्सीजन भेजने वाली कंपनियों को इसे अपने पास ही रखने को कहा। इसको लेकर अस्पताल और ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनियों ने शिकायत की। इसपर जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ऑक्सीजन ऑडिट की मांग की तो केजरीवाल ने मामले से ध्यान हटाने के लिए वैक्सीन का रोना शुरू कर दिया और आनन-फानन में केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी कि उसके पास सरप्लस ऑक्सीजन हैं जिसे जरूरतमंद राज्यों को दे दिया जाए।

केजरीवाल सरकार की इस लापरवाही पर लोगों नें काफी नाराजगी है। वे सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार की लापरवाही के कारण लोगों की मौत हुई है तो क्यों ना उनपर आपराधिक मुकदमा दायर हो?

अवलोकन करें:-
कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति ; जन विरोधी मोदी विरोधियों की एकजुटता
कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति ; जन विरोधी मोदी विरोधियों की एकजुटता
 

कोरोना वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति ; जन विरोधी मोदी विरोधियों की एकजुटता

जनता कोरोना जैसी घातक बीमारी से झूझ रही है, विपरीत इसके मोदी विरोधी कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने की बजाए मोदी से हिसाब चुकता करने के लिए ओछी राजनीती कर रहे हैं। जिसे देखो अपनी नाकामी को मोदी के सिर मढ़ जनता के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। और इस कटु सच्चाई को जानने के लिए जनता को ठंठे दिमाग से सोंचना होगा। 

दिल्ली समेत सब राज्यों को ऑक्सीजन दी जा रही थी, परन्तु  ऑक्सीजन की मांग बढ़ती जा रही थी, हॉस्पिटल भी ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे थे, मरीज से मनमानी फ़ीस वसूल रहे हैं, लेकिन जैसे ही ऑक्सीजन ऑडिट होने की बात उठी, ऑक्सीजन की कमी पर मच रहा शोर, ठीक उसी तरह शांत हो गया जैसे उबलते दूध पर एक बूंद पानी डाल दिया है। यानि अब कोई मोदी विरोधी तो क्या कोई हॉस्पिटल भी ऑक्सीजन की कमी का रोना नहीं रो रहा। अब मोदी विरोधी गैंग का वैक्सीन पर रोना शुरू हो चूका है, और जिस दिन इसकी भी ऑडिट की बात शुरू होने पर ये दांव भी फ़िस होने पर फिर ये गैंग मोदी विरोध का कोई नया पैंतरा ढूंढेगा। 

अब निम्न वीडियो को ध्यान से सुनकर मोदी विरोधियों से ही इसका जवाब माँगा जाए, कि जनधन खातों में धन कहाँ से जमा हो रहा है? सेना को आधुनिक अस्त्रों से संपन्न के लिए धन कहाँ से आ रहा है? और फ्री में लग रही वैक्सीन के लिए धन कहाँ से आ रहा है? आदि अनेकों ऐसी योजनाएं हैं, जो पिछली सरकारों तक कागजों तक रहती थीं और आज साकार हो रही हैं। इन सबके लिए धन कहाँ से आ रहा है, सोंचा किसी ने। 

अब इस सन्दर्भ में इस वीडियो का भी संज्ञान लें:
दिल्ली में ऑक्सीजन ऑडिट के आदेश ने अफरा-तफरी मचाने के साथ ही केंद्र सरकार और नरेंद्र मोदी के विरुद्ध लड़ाई को नए राजनीतिक पैंतरे प्रदान कर दिए हैं। इसका असर यह हुआ कि वैक्सीन की कमी से लेकर वैक्सीन मैत्री के तहत भारत द्वारा अन्य देशों को दिए गए वैक्सीन को आगे रखकर नई-नई चालें चली जा रही हैं। ऑडिट के आदेश के साथ अचानक केजरीवाल सरकार को पता चला कि दिल्ली में ऑक्सीजन सरप्लस हो गई है। जिस रफ्तार से सरप्लस ऑक्सीजन की घोषणा हुई, उसे सुनकर लगा जैसे अचानक कोई आँधी आई और दिल्ली के टैंकरों में ऑक्सीजन भर गई। लोगों ने जैसे ही बाकी के शहरों में ऑक्सीजन की डिमांड की दिल्ली की डिमांड से तुलना करना शुरू की वैसे ही 976 टन की डिमांड अचानक उतर कर 500 टन पर आ रुकी।

इधर सरकार के मंत्री इस बात में अड़ गए कि देखें जी, आस-पास के राज्यों को आवश्यकता हो या न हो, हम तो उन्हें सरप्लस ऑक्सीजन देकर रहेंगे। आप ये समझ लें कि हम जिम्मेदार सरकार चलाते हैं जो केवल दिल्ली नहीं बल्कि और राज्यों की समस्याएँ समझने और उन्हें हल करने की क्षमता रखती है। हाल ही में हमने पोस्टर लगाकर उत्तर प्रदेश के घर-घर में ऑक्सीजन पहुँचाने का सफल वादा भी किया था। ये कोरोना की दूसरी लहर न आती तो लोग उस वादे पर विश्वास भी कर लेते और हम विज्ञापनों में यूपी के घरों को ऑक्सीजन पहुँचाने का दावा ठोंक चुके होते। दावों को ऑक्सीजन देते रहने का हमारा पुराना रिकॉर्ड खँगाल लें। विश्वास न हो तो किसान आंदोलन को ऑक्सीजन पहुँचाने का हमारा रिकॉर्ड चेक कर लें, हम ऑक्सीजन देने से नहीं हिचकते। हमने विज्ञापन से कोरोना पर विजय प्राप्त करने का मॉडल तैयार किया है और अपने राज्य में उसका सफल परीक्षण भी किया है। 

दो दिनों तक इस ऑफर का प्रचार किया गया पर जैसे ही लगने लगा कि इसे लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, वैक्सीन की कमी का रोना शुरू किया गया। यह सरकार विज्ञापन के अलावा जिस एक बात पर सबसे अधिक भरोसा करती है, वह है ‘रोवन’। रोवन इस सरकार का ऐसा कर्म है जिसे एक लम्बे समय तक प्रैक्टिस करके इसने अपना दर्शन बना लिया है। हमें काम नहीं करने दिया जा रहा है से लेकर हमें काम करने से रोका जा रहा है तक, यह सरकार हर बात के सहारे रो सकती है। जैसे ही मीडिया में कोविड की संभावित तीसरी लहर की बातें चलने लगीं और यह चर्चा शुरू हुई कि तीसरी लहर तो बारह से अठारह वर्ष के लोगों को प्रभावित करेगी, तब से केजरीवाल का रोवन शुरू हो गया; हमें तो जी दिल्ली के बच्चों की बड़ी चिंता है। इसी रोवन ने आम आदमी पार्टी के नेताओं और मंत्रियों को एक नया नैरेटिव थमा दिया गया जिसमें उस तीसरी लहर के प्रति चिंता प्रकट की गई जो अभी तक आई नहीं है। 

जो सामने है, उस पर बात करने से सरकार की अव्यवस्था उजागर हो रही है इसलिए ऐसी समस्या खोजो जो अभी तक पैदा नहीं हुई है और लोगों को गिफ्ट कर दो। जो पोस्टर दिल्ली में रातों-रात लॉकडाउन के समय लगाए गए, उन पोस्टरों का क्या औचित्य है जब वैक्सीन मैत्री के तहत दी जाने वाली वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार पहले ही वक्तव्य दे चुकी है? उसे उठाने का क्या औचित्य है जब उस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है? प्रधानमंत्री से जवाब माँगने से पहले क्या केजरीवाल ने दिल्ली में ऑक्सीजन की अव्यवस्था पर कोई जवाब दिया? दिल्ली हाई कोर्ट में रोज-रोज इस सरकार की छीछालेदर पूरे देश ने देखा, लेकिन क्या उस,पर केजरीवाल या उनके मंत्रियों ने कुछ कहा? देश में बनी वैक्सीन को लेकर जो बातें कही गईं और देश की जनता के बीच जो भ्रम और गलत जानकारियाँ फैलाई गई, उस पर कोई चर्चा हुई या किसी ने जवाब देने की बात की? 

प्रोपगेंडा के इस महायज्ञ में राहुल गाँधी ने भी अपनी ओर से आहुति दी। उन्होंने भी यह प्रश्न उठाया कि उनके बच्चों की वैक्सीन मोदी जी ने विदेश क्यों भेज दी? साथ ही उन्होंने माँग की कि सरकार उन्हें भी गिरफ्तार कर ले। राज्यों के विधानसभा चुनावों में वे भले ही हार गए हों पर वे कोरोना पर विजय प्राप्त करके अभी हाल ही में लौटे हैं। पता नहीं गिरफ्तार होकर क्यों रिस्क लेना चाहते हैं? वैसे आज तक यह नहीं पता लग सका कि उन्होंने वैक्सीन ली या नहीं पर अपने बच्चों की वैक्सीन को लेकर हल्ला मचा रहे हैं।भारत में बनने वाली वैक्सीन को अपने प्रोपेगेंडा में रद्दी करार देने वाले ये लोग अब कह रहे हैं कि; जिसे हमने रद्दी बताया था वह वैक्सीन हमारे बच्चों की थी। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने भले ही भारतीय वैक्सीन को रद्दी बताया था पर उनकी सरकार ने टीकाकरण अभियान में अनुसूचित जाति, जनजाति और समाज के कमजोर वर्ग को आरक्षण देने की माँग जरा भी देर नहीं की। अभी तक राहुल गाँधी ने नहीं बताया कि उनकी कॉन्ग्रेसी सरकार वही वैक्सीन देकर गरीबों की रक्षा कर रही है या उन्हें खतरे में डाल रही है?

दिल्ली यदि देश की राजधानी न होती तो बार-बार केंद्र सरकार आगे आकर केजरीवाल सरकार द्वारा खड़ी की गई समस्याओं का समाधान न कर पाती। कोरोना की पहली लहर से शुरू हुई केंद्र सरकार की मदद से केजरीवाल सरकार को बार-बार एक तरह का सुरक्षा कवच मिलता रहा है। पिछले वर्ष से ही DRDO या ITBP द्वारा बनाए गए कोविड हॉस्पिटल हों या टेस्टिंग सम्बंधित सुविधाएँ प्रदान करना हो, केंद्र सरकार ने केजरीवाल को बार-बार ऐसी सुविधाएँ दी हैं जो देश की और राज्य सरकारों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद केजरीवाल के पहले से ही निम्नस्तरीय राजनीतिक हथकंडे आए दिन गिरकर और नीचे के स्तर पर पहुँच जाते हैं। यह सन्देश देते हुए कि चीनी वायरस के विरुद्ध भारत की लड़ाई को ओछी राजनीति चीनी की तरह ही गला सकती है।

आखिर दिल्ली में ऑक्सीजन की इतनी खपत कैसे?

अरविन्द केजरीवाल जी आरोप लगाने की गन्दी राजनीति छोड़ कर इस संकट काल में कुछ काम कर लो। जब सब कुछ केंद्र की मोदी सरकार ने ही करना है, कुर्सी से क्यों चिपके बैठे हो? सिंहासन खाली करो ताकि मोदी सरकार दिल्ली को संभाले। आ जाना वाह-वाही लूटने, जो अब तक करते रहे हैं। केजरीवाल सरकार को शायद यह भी मालूम कि दिल्ली के कितने लोग हरियाणा और उत्तर प्रदेश जाकर ठीक होकर वापस दिल्ली आ रहे हैं। ज्ञात हो, अभी कुछ ही दिन पूर्व हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा था कि गुरुग्राम में 75%मरीज दिल्ली से हैं और सबका इलाज हो रहा है। आखिर कब तक आरोपों की गन्दी सियासत खेलकर दिल्ली वालों को पागल बनाकर मुफ्त की रेवड़ियों के लालच में उनकी ज़िंदगियों से खिलवाड़ करते रहोगे?
कोरोना संकट काल में शुरू से सब कुछ नियंत्रण में होने का दावा करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी नाकामी का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। केजरीवाल कभी बेड की कमी तो कभी ऑक्सीजन और वैक्सीन की कमी का रोना रोते रहते हैं। लेकिन उन्होंने खुद दिल्ली के लिए कुछ नहीं किया है।

अरविंद केजरीवाल चाहते हैं कि केंद्र सरकार उन्हें हर चीज थाली में परोस कर दे दे। उन्हें बस मुफ्तखोरों की तरह वाहवाही लेने दे। एक आरटीआई से पता चला कि केजरीवाल की दिल्ली में पिछले 7 साल में एक भी नया अस्पताल नहीं खुला है। हेल्थ सेक्टर के नाम पर केजरीवाल सरकार की पूरा जोर मोहल्ला क्लिनिक कर रहा। लेकिन इस कोरोना महामारी काल में इन मोहल्ला क्लीनिक में कोविड से संबंधित प्राथमिक उपचार भी नहीं हो रहा। एक वैक्सीन भी नहीं लग रहा है। क्यों? केजरीवाल जी क्या फायदा इन मोहल्ला क्लीनिकों का? दिल्ली में पता नहीं कितने ऐसे क्लिनिक होंगे, जिनकी निम्न क्लिनिक की तरह दुर्गति हो रही होगी। 

                      ये हाल है मौहल्ला क्लीनिकों का, क्या यह धन की बर्बादी नहीं? 

अरविंद केजरीवाल ने 26 अप्रैल को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि हम 1 करोड़ 34 लाख वैक्सीन का ऑर्डर देने वाले हैं और हमने ये मंजूरी दे दी है। इसकी कीमत 1400 करोड़ है, लेकिन 10 मई को डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया कहते हैं कि हमने ऑर्डर नहीं दिया है। बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने मई 9 को साफ कहा कि दिल्ली सरकार कोविड प्रबंधन नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार विज्ञापन पर सैकड़ो करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री रहते उन्होंने एक भी अस्पताल नहीं खोला।

केजरीवाल सरकार की नाकामी और लापरवाही पर लोग अब सवाल उठाने लगे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब दिल्ली में प्रति व्यक्ति ऑक्सीजन की उपलब्धता अधिकतम है, फिर वो ऑक्सीजन कहां जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि उत्तराखंड के 74114, हिमाचल के 32469, चंडीगढ़ के 8511, हरियाणा के 116867 और पंजाब के 74343 मामले को मिलाकर कुल 3,06,304 मामलों पर 652 मैट्रिक टन ऑक्सीजन मिलता है, लेकिन दिल्ली को सिर्फ 86232 मामलों के लिए 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत होती है… फिर भी दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से मौतें हो रही है, क्यों?


उपरोक्त दोनों वीडियो केजरीवाल द्वारा ऑक्सीजन की कमी का रोना क्यों रो रहे हैं, स्पष्ट कर रहा है। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि मंत्री इमरान और कालरा द्वारा यह जमाखोरी पंजाब चुनाव को ध्यान में रख वहां ऑक्सीजन देकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा को ठिकाने लगा कर पंजाब की सत्ता हथियाने का है। दिल्ली को तो फ्री की रेवड़ियों का लालच देकर पागल बनाते रहो। ऑक्सीजन की कमी से दिल्ली वालों की जान जाती हो, कोई बात नहीं, पंजाब हथियाना है। मोदी सरकार इन ऑक्सीजन जमाखोरों पर कब सख्ती से पेश आएगी? कुछ ही दिन पूर्व आप विधायक शोएब इक़बाल भी अरविन्द केजरीवाल और इनकी सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर चुके हैं।

ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से जहां कोरोना मरीज मर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी नवनीत कालरा और मंत्री इमरान हुसैन पर ऑक्सीजन कालाबाज़ारी करने का आरोप लगा है। दिल्ली पुलिस ने खान मार्केट के जिस खान चाचा रेस्टोरेंट में छापेमारी करके सैकड़ों ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए हैं, उसका मालिक नवनीत कालरा केजरीवाल का करीबी बताया जा रहा है। इतना ही नहीं केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के विधायक इमरान हुसैन पर भी ऑक्सीजन की कालाबाजारी करने का आरोप लगा है। केजरीवाल सरकार में मंत्री इमरान हुसैन दिल्ली दंगे के आरोपी ताहिर हुसैन का भाई है।

अवलोकन करें :-

केजरीवाल के मंत्री इमरान हुसैन पर ऑक्सीजन कालाबजारी करने पर टॉप ट्रेंड कर रहा है #OxygenChorAAP

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
केजरीवाल के मंत्री इमरान हुसैन पर ऑक्सीजन कालाबजारी करने पर टॉप ट्रेंड कर रहा है #OxygenChorAAP
‘दिल्ली में लागू हो राष्ट्रपति शासन, वरना सड़कों पर बिछ जाएँगी लाशें’ : शोएब इक़बाल, आप विधायक

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
‘दिल्ली में लागू हो राष्ट्रपति शासन, वरना सड़कों पर बिछ जाएँगी लाशें’ : शोएब इक़बाल, आप विधायक
दिल्ली में कोरोना के कुप्रबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी (AA)) की सरकार आम जनता और न्यायपालिका के निशाने पर तो है ही, अब उस...

दिल्ली : बंद पड़े इंदिरा गाँधी अस्पताल में दिखाए 150 बेड खाली को लेकर केजरीवाल सरकार को फिर पड़ी फट

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
दिल्ली : बंद पड़े इंदिरा गाँधी अस्पताल में दिखाए 150 बेड खाली को लेकर केजरीवाल सरकार को फिर पड़ी फट

ऑक्सीजन संकट पर पिछले दिनों दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के प्रमुख अरविंद केजरीवाल खुद एक प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं, क्या उन्हें नहीं पता कि ये चीजें कैसे काम करती हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि दिल्ली के लोगों को समय पर ऑक्सीजन मिले, इसके लिए दिल्ली सरकार अपना प्लांट क्यों नहीं लगाती है। ऑक्सीजन की कमी को लेकर केजरीवाल सरकार लताड़ लगाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अगर सभी राज्य अपने लिए टैंकर अरेंज कर रहे हैं और आपके पास टैंकर नहीं तो आप क्यों ऐसा नहीं कर रहे।