Showing posts with label imran khan. Show all posts
Showing posts with label imran khan. Show all posts

‘जेलों में PTI की महिला कार्यकर्ताओं से हो रहे बलात्कार’: इमरान खान, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री

पाकिस्तान के पूर्व पीएम और तहरीक ए इंसाफ पार्टी (PTI) के चेयरमैन इमरान खान ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि जेलों में बंद पीटीआई की महिला कार्यकर्ताओं के साथ रेप हो रहा है। शनिवार (27 मई 2023) की देर रात मुल्क के आंतरिक मामलों के मंत्री ( Interior Minister) राणा सनाउल्लाह ने इमरान के आरोपों को बेबुनियाद करार दिया था। उन्होंने इसे पीटीआई कार्यकर्ताओं की साजिश बताया। सनाउल्लाह के इस बयान पर इमरान खान ने पलटवार किया। रविवार (28 मई) को इमरान ने कहा कि सरकार के मंत्री अपने काले कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

इमरान ने जमान पार्क स्थित अपने घर से पीटीआई समर्थकों को संबोधित किया। इमरान खान ने कहा कि राणा सनाउल्लाह की प्रेस कॉन्फ्रेंस (शनिवार) के बाद मुझे अपनी बात पर यकीन हो गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की फासीवादी सरकार के मंत्री काले कारनामों को छिपाने के लिए कवर-अप करने की कोशिश कर रहे हैं। इमरान खान ने जेल में बंद अपनी पार्टी के महिला कार्यकर्ताओं के प्रति चिंता जताते हुए न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की माँग की।

सनाउल्लाह का दावा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान के गृहमंत्री सनाउल्लाह ने इमरान और उनके समर्थकों पर सरकार को बदनाम करने के लिए साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने एक कॉल इंटरसेप्ट किया है। इस कॉल में पीटीआई के वर्कर्स कथित तौर पर एनकाउंटर और रेप की साजिश रचने की बात करते हुए पाए गए हैं। इसके कुछ ही घंटों के बाद इमरान ने आरोप लगाने शुरू किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, राणा सनाउल्लाह ने दावा किया कि इंटरसेप्ट किए गए कॉल में पीटीआई कार्यकर्ता के घर रेड डालने के और गोलीबारी की साजिश की बात सामने आई। कथित तौर पर पीटीआई के लोग यह कह रहे थे कि रेड के बहाने हुई फायरिंग में मौतों को दुनिया में मानवाधिकार उल्लंघन के रूप में दिखाया जा सकता है। ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून‘ के मुताबिक, राणा ने कहा कि इसी तरह पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं की रेप की फर्जी कहानियाँ बनाने को लेकर भी बातचीत हुई थी। सनाउल्लाह के अनुसार कुछ ही देर के बाद इमरान खान ने पीटीआई महिला कार्यकर्ताओं से बलात्कार का आरोप लगा दिया।

क्या कहा था इमरान ने?

दरअसल 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरा पाकिस्तान जल उठा था। पीटीआई कार्यकर्ताओं ने मुल्क भर में प्रदर्शन किया था। पीटीआई कार्यकर्ताओं और इमरान समर्थकों ने देश के सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी हमले कर दिए थे। प्रदर्शनकारियों में बड़े पैमाने पर महिलाएँ भी शामिल थीं। हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को जेल में डाला गया। महिलाओं समेत सैकड़ों लोग अब भी हिरासत में है। इमरान ने जेल में बंद इन्हीं महिलाओं के साथ बदसलूकी और बलात्कार का आरोप लगाया था।
इमरान ने कहा था कि जेल में बंद महिला पार्टी वर्कर्स के साथ गलत सलूक किया जा रहा है। रेप की भी खबरें मिल रही हैं।


इमरान खान को रिहा किए जाने पर विरोधियों का पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पर हमला

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के भीतर घुसते PDM कार्यकर्ता
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को गिरफ्तार किए जाने के बाद उनके समर्थन उग्र हो गए, जिससे देश भर में हिंसा हुई और उन्हें रिहा करना पड़ा। अब सत्ताधारी PDM के कार्यकर्ताओं ने इमरान खान की रिहाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के बाहर PDM के मुखिया मौलाना फैज़लुर रहमान और PML-N की मरयम नवाज शरीफ की बैठक भी हुई है। उधर इमरान खान ने दावा किया है कि उनकी पार्टी PTI के 7000 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

साथ ही उन्होंने कई निहत्थे कार्यकर्ताओं की फ़ौज और पुलिस द्वारा हत्या किए जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि वहीं दूसरी तरफ PDM के गुंडे सुरक्षा एजेंसियों की सह पर उपद्रव कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाहर हजारों कार्यकर्ता इमरान खान के विरोध में जुटे हुए हैं। इमरान खान ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस साल सितंबर में जस्टिस काजी फैज ईसा को पाकिस्तान का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना है, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उन्हें रोकने के लिए जाल बिछाया जा रहा है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि न्यायपालिका में बैठे इमरान खान के लोगों ने जस्टिस ईसा को अलग-थलग कर दिया है। कई लोग मान रहे हैं कि PDM सुप्रीम कोर्ट को डराने-धमकाने के लिए उसका घेराव कर रहा है। पाकिस्तान के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश, जो इमरान खान के समर्थक हैं, उनमें और पाकिस्तान की सरकार में ठन गई है। उधर अल-कादिर केस में इमरान खान की बीवी बुशरा ने भी लाहौर हाईकोर्ट का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट पर मजहबी तत्वों द्वारा हमले की बात भी कही जा रही है। इस्लामाबाद के ‘रेड ज़ोन’ में कई प्रदर्शनकारी घुसे हुए हैं, जिससे आतंकी हमलों की आशंका भी बढ़ गई है। इमरान खान के विरोधी इस बात से नाराज़ हैं कि न्यायपालिका ने उन्हें राहत कैसे दे दी। मौलाना फजलुर रहमान प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे हैं। धरना प्रदर्शन कहाँ किया जाना है, इसे लेकर भी विवाद चल रहा है। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट को घेर कर कई कार्यकर्ता बैठे है


पाकिस्तान : इमरान खान की पार्टी में चीफ जस्टिस की सास, जमानत पर बोलीं मरियम नवाज- आप भी ज्वाइन कर लो PTI

इमरान खान और चीफ जस्टिस की करीबियों पर सवाल (तस्वीर साभार: आजतक)
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को कल मुल्क की सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने उन्हें जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया। इस निर्णय के बाद जस्टिस बंदियाल पर पाकिस्तान की सरकार भड़की हुई है। सत्ताधारी पार्टी के नेता जजों के घर जलाने की बात कर रहे हैं। चीफ जस्टिस को पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ में शामिल होने को कहा जा रहा है।

इमरान खान और चीफ जस्टिस बंदियाल की करीबियाँ

पाकिस्तान सरकार के मंत्रियों का इस तरह चीफ जस्टिस पर नाराज होना पिछले कुछ वाकयों के मद्देनजर है। उमर अता बंदियाल ने 2 फरवरी 2022 को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली ती। इसके बाद ऐसे कई मौके आए जब उन्होंने इमरान खान की माँगों पर सुनवाई की।
इसी वर्ष जनवरी में जब पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में विधानसभा भंग हुई तो इमरान खान जल्द चुनाव कराए जाने पर जोर देने लगे। वहीं शहबाज सरकार इसका विरोध कर रही थी। ऐसे में बंदियाल ने इस मुद्दे पर खुद स्वत: संज्ञान ले लिया और चुनाव की तारीख अक्टूबर से मई में कर दी। शहबाज सरकार को ये चीज नागवार गुजरी और उन्होंने संसद में ऐसा प्रस्ताव पारित किया जिसके बाद चीफ जस्टिस के पास किसी भी मामले पर खुद संज्ञान लेने का अधिकार छिन गया।

चीफ जस्टिस बंदियाल की सास का पीटीआई कनेक्शन

बंदियाल की करीबियों के अलावा उनकी सास भी एक वजह हैं जो सत्ताधारी पार्टी इस समय उनको निशाना बना रही हैं। कुछ दिन पहले बंदियाल की सास महजबीन नून और इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के वकील तारिक रहीम की बीवी राफिया तारिक के बीच हुई बातचीच की ऑडियो वायरल हुई थी।
दोनों महिलाओं बातचीत में कथित रूप से मुख्य न्यायधीश के स्टैंड की तारीफ कर रही थीं और जल्द चुनाव कराए जाने पर पक्ष रख रही थीं। इसमें अता बंदियाल की सास साफ बता रही थीं कि वह जल्द चुनाव कराने के सीजेपी के फैसले के पक्ष में हैं बस उन्हें अपने दामाद की थोड़ी चिंता है।
उनकी यह ऑडियो वायरल होने के बाद मरियम नवाज ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को ‘सास कोर्ट’ कहा था। उन्होंने कहा था कि कोर्ट के फैसले बीवियों और सास की पसंद-नापसंद के आधार पर लिए जा रहे हैं। ऐसे तरीके मुल्क के लिए खतरनाक है।

पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने साधा जज पर निशाना

तो इस तरह पाकिस्तान के चीफ जस्टिस से सत्तारूढ़ पार्टी पहले ही नाराज थी और अब इमरान खान को रिहाई देने के बाद तो शहबाज सरकार के मंत्री उनपर अधिक हमलावर हो गए हैं। नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज ने भी इमरान की रिहाई को लेकर चीफ जस्टिस पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस आज देश के खजाने से 60 अरब रुपए गबन करने वाले अपराधी को रिहा करके बहुत खुश थे। देश की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील संस्थानों पर हमलों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार चीफ जस्टिस हैं, जो एक अपराधी की ढाल बनकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। उनको चीफ जस्टिस का पद छोड़कर उनकी सास की तरह पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी में शामिल हो जाना चाहिए।
पाकिस्तान सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री मरियम औरंगजेब ने इमरान खान को चीफ जस्टिस बंदियाल का ‘लाड़ला’ कहा। मरियम ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को धमकी देते हुए कहा कि आज पाकिस्‍तान जल रहा है, कल को अगर जजों के घरों में घुसकर कोई आग लगाएगा तो … औरंगजेब ने कहा कि आप फैसला करें, किसी का घर नहीं बचेगा।

मरियम औरंगजेब ने कहा कि किसी का घर नहीं बचेगा। सियासतदानों के घर, गृह मंत्री राणा सनाउल्‍लाह का घर जलाया गया, एंबुलेंस जली, मस्जिद जली, स्‍कूल जले क्‍यों वे इस देश के नहीं हैं। रेडियो पाकिस्‍तान आपका नहीं है। इस मुल्‍क को जलाने वाला, सियासत के नाम पर दहशतगर्द और किस भ्रष्‍टाचार के केस में उसे 60 अरब रुपए का जवाब देना है। अगर अदालत ने सजा दी होती तो यह हालात नहीं होते, आज मुल्क जल नहीं रहा होता।

इमरान खान को बवासीर बीमारी की वजह से नंगा नहीं करना है, न ही रेप… बाँस-सरिया डालने पर रोक

इमरान खान के 'दाग' को चेक कर रहा उनका पाकिस्तानी समर्थक? (फाइल फोटो)
पाकिस्तान में चल रही हिंसा और इमरान खान की गिरफ्तारी के बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के स्टैंप से एक लेटर वायरल हुआ है। इस लेटर में दावा था कि पाकिस्तान सरकार ने पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान से वादा किया था कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद बाद उन्हें कोई नंगा नहीं करेगा, उनके साथ रेप नहीं होगा और उन्हें सरिया-बाँस आदि से नहीं प्रताड़ित किया जाएगा।

इस लेटर में यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम का भी नाम है जिन्हें (लेटर के मुताबिक) जिम्मेदारी दी गई है कि वो इस बात की देख-रेख करें कि पुलिस कस्टडी में पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ये सब न हो।

अब जियो फैक्ट चेक ने इस लेटर को फर्जी बताया है। लेटर में कहा गया है कि एक अधिकारी ने उन्हें नाम न बताने की शर्त पर बताया कि इस तरह का कोई एग्रीमेंट इमराऩ खान, पाकिस्तान सरकार और यूएस राजदूत के बीच नहीं हुआ था। इस लेटर में एक यूसुफ नसीम खोकर का नाम है, जिनको इंटीरियर सेक्रेट्री बताया गया है। जियो फैक्ट चेक के अनुसार, यूसुफ नसीम 7 मार्च को रिटायर हो चुके हैं और लेटर की तारीख 8 मई 2023 की डाली गई है।

बता दें कि इस लेटर में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के इमरान खान और पाकिस्तानी सरकार को दो पार्टियाँ बताया गया है जिनके बीच यह करार हुआ। इसमें लिखा है कि इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद उनके साथ निम्नलिखित बर्ताव नहीं होंगे।

  1. पीटीआई के इमरान खान अहमद नियाजी को पूछताछ के दौरान नंगा नहीं किया जाएगा।
  2. किसी को ये इजाजत नहीं दी जाएगी कि वो पीटीआई के इमरान खान का रेप करे। खासकर तब जब वो बवासीर के मरीज हैं।
  3. इमरान खान को किसी भी तरह के बाँस-सरिया-डंडे से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
पत्र में यह भी लिखा है कि ये सारी नियम और शर्तों की देखरेख अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम द्वारा की जाएगी क्योंकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खा, यूएस राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के अलावा किसी पर विश्वास नहीं कर सकते। इस पत्र में देख सकते हैं कि इमरान अहमद खान नियाजी, इंटीरियर सेक्रेट्री यूसुफ नसीम खोकर और अमेरिकी राजदूत डोनाल्ड ब्लूम के हस्ताक्षर दिखाए गए है। जियो फैक्ट चेक ने पूरे पत्र को फर्जी बताया है।

पाकिस्तान : क्या इमरान का बीवी बुशरा के साथ रिश्ता ‘अवैध’? : निकाह कराने वाले मौलवी सईद का दावा- इद्दत की शर्ते पूरी नहीं हुईं

                                            इमरान खान और बुशरा बीबी (तस्वीर साभार: dailyO)
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) का बुशरा बीबी (Bushra Bibi) से निकाह जायज नहीं है। मौलवी मुफ्ती सईद का कहना है कि यह निकाह इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक नहीं हुआ था। इसी मौलवी ने दोनों का निकाह करवाया था। इस्लामाबाद की अदालत में मोहम्मद हनीफ की याचिका पर सुनवाई के दौरान मौलवी ने यह बात कही।

मौलवी ने खुलासा किया कि बुशरा बीबी ने निकाह इद्दत के दौरान की गई थी। मुस्लिम महिलाएँ शौहर की मौत अथवा तलाक के बाद दूसरा निकाह इद्दत का समय पूरा करने के बाद ही कर सकती हैं। इस दौरान उन्हें दूसरे पुरुष से निकाह की इस्लाम इजाजत नहीं देता।

इद्दत का समय परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। अमूमन यह करीब 89 दिन का होता है। बुशरा बीबी ने नवंबर 2017 में तलाक लिया था। इमरान खान के साथ उनका निकाह 1 जनवरी 2018 को हुआ था। यानी तलाक और निकाह के बीच 89 दिन का गैप नहीं रखा गया था।

रिपोर्टों के अनुसार मौलवी ने बताया कि उसे 2018 में लाहौर के रक्षा आवास प्राधिकरण में निकाह के लिए ले जाया गया था। खुद को बुशरा बीबी की बहन बताने वाली एक महिला की सहमति के बाद उसने निकाह करवाया था। मौलवी सईद के अनुसार इस महिला ने उनसे कहा था कि शरीयत के हिसाब से निकाह के लिए सभी शर्तें पूरी की गई हैं।

1 जनवरी 2018 को लाहौर में हुए इस निकाह के गवाह इमरान खान के दोस्त जुल्फी बुखारी और उनकी तहीरक-ए-इंसाफ पार्टी के पूर्व नेता अवन चौधरी थे। मौलवी ने अदालत को यह भी बताया कि इमरान खान ने फरवरी 2018 में उनसे दोबारा संपर्क किया। फिर से निकाह कराने को कहा, क्योंकि उनका मानना था कि पहली बार निकाह शरिया कानून के अनुसार नहीं था। दूसरी बार जब मौलवी से संपर्क किया गया था, तब तक इद्दत का समय पूरा हो चुका था।

मुफ्ती ने अदालत को यह भी बताया कि निकाह के समय इमरान खान और बुशरा बीबी दोनों ही इद्दत का समय पूरा नहीं होने के बारे में जानते थे। लेकिन इमरान खान का मानना था कि इस निकाह से उन्हें प्रधानमंत्री बनने में मदद मिलेगी। कथित तौर पर ऐसा मुस्तकबिल किया गया था कि बुशरा बीवी से निकाह के बाद क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बन जाएँगे।

भारत को पाव-पाव परमाणु युद्ध की गीदड़भभकी देने वाला इमरान खान के करीबी शेख राशिद गिरफ्तार

पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार में मंत्री रहे शेख राशिद अहमद को इस्लामाबाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी 2 फरवरी 2023 तड़के हुई। शेख राशिद अवामी मुस्लिम लीग (AML) के मुखिया हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की एएमएल प्रमुख सहयोगी दल है। शेख राशिद से पहले इमरान की कैबिनेट में रहे फवाद चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने बताया है कि पूर्व मंत्री को मूरी मोटरवे (Murree Motorway) से गिरफ्तार किया गया है। हालाँकि उनके भतीजे शेख राशिद शफीक ने जियो न्यूज को बताया है कि गिरफ्तारी इस्लामाबाद के हाउसिंग सोसायटी के घर से हुई है। PTI ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें शेख राशिद अहमद विपक्षी पार्टी और पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि उनके घर के दरवाजों को तोड़ा गया। नौकरों को मारा गया। साथ ही यह पुलिस पर जबरदस्ती गाड़ी में बैठाने का आरोप लगाया है।

राशिद ने कहा, “पुलिस ने मेरे साथ ‘अन्याय’ किया। मुझे मोटरवे से गिरफ्तार नहीं किया है। मुझे मेरे आवास से हिरासत में लिया है। मेरा अपराध यह है कि मैं इमरान खान के साथ खड़ा हूँ। मैं 16 बार मंत्री रह चुका हूँ। एक बार भी मुझ पर इन मंत्रालयों में भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं।” पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि कम से कम 100 से 200 हथियारबंद ने उनके आवास पर छापा मारा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उन्हें इस तथ्य के बावजूद गिरफ्तार किया कि एक अदालत ने उन्हें जमानत दी थी और पुलिस महानिरीक्षक को 6 फरवरी 2023 को पेश होने का आदेश दिया था।

इमरान खान ने राशिद की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है, “हमने पहले कभी ऐसी पक्षपाती, प्रतिशोधी सरकार नहीं देखी। हमें सड़क पर उतर आंदोलन को मजूबर किया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जब देश दिवालिया हो चुका है क्या वह ऐसा कोई आंदोलन झेल सकता है।”

शेख राशिद मंत्री रहते हुए अक्सर भारत को एटमी युद्ध की गीदड़भभकी दिया करते थे। एक बार उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान के पास आधा पाव से लेकर एक पाव तक के एटम बम हैं। इतना ही नहीं यह भी कहा था कि पाकिस्तानी बम इस्लाम मानने वालों को नुकसान नहीं पहुँचाते हैं।

इमरान खान की पुतिन से मुलाकात पड़ी भारी: US फेडरल रिजर्व ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक पर लगाया 55 मिलियन डॉलर का जुर्माना

पूर्वी यूक्रेन में रूसी सैनिकों द्वारा चल रहे ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ के बीच रूस में मेहमानवाजी का लुत्फ उठा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अमेरिका ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक (NBP) और इसकी न्यूयॉर्क ब्रांच पर $55 मिलियन का जुर्माना लगाया है। इस संबंध में जारी रिपोर्ट के अनुसार, यूएस फेडरल रिजर्व और न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज द्वारा यह जुर्माना एंटी मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का उल्लंघन करने पर लगाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक फेडरल रिजर्व ने 20.4 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है तो वहीं न्यूयॉर्क स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने पाकिस्तान के नेशनल बैंक ने $35 मिलियन का भुगतान करने के लिए कहा है। 4 मार्च, 2021 को की गई जाँच के आधार पर जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि NBP ने 16 मार्च, 2016 को ‘कमियों’ को ठीक करने के लिए अधिकारियों के साथ एक लिखित समझौता किया था। हालाँकि, हाल की जाँच में पाया गया है कि NBP ‘लिखित समझौते के प्रत्येक प्रावधान का पूर्ण अनुपालन करने’ में विफल रहा है।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चूँकि पाकिस्तान का नेशनल बैंक अमेरिकी कानूनों का पालन करने में विफल रहा है। यूएस फेडरल रिजर्व ने एनबीपी को कॉरपोरेट गवर्नेंस और मैनेजमेंट ओवरसाइट में सुधार करने का आदेश दिया है। रिजर्व बैंक ने एनबीपी से आदेश के 60 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों को लागू करने की माँग की है। इसमें NBP को दस दिनों के भीतर एक अधिकारी को नामित करने के लिए भी कहा है जो रिजर्व बैंक की लिखित योजनाओं को ‘कोऑर्डिनेट और सबमिट करने के लिए जिम्मेदार’ होगा। इस बीच, NYDFS के अधीक्षक एड्रिएन ए हैरिस ने घोषणा की कि NBP और उसकी न्यूयॉर्क शाखा द्वारा लगाए गए दंड का भुगतान करने के लिए सहमत हो गई है। 

इमरान खान बुधवार (24 फरवरी 2022) को दो दिवसीय यात्रा पर रूस पहुँचे। हालाँकि, मॉस्को पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद, रूसी राष्ट्रपति ने पूर्वी यूक्रेन में ‘स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ का आदेश दिया। वर्तमान हालात में व्लादिमीर पुतिन और इमरान खान की मुलाकात के सामरिक मायने निकाले जा रहे हैं। बाद में व्लादिमीर पुतिन ने क्रेमलिन में प्रधानमंत्री खान के साथ आमने-सामने बैठक की। 

‘खतरनाक हो जाऊँगा… किसी को छिपने की जगह नहीं मिलेगी’ – इमरान खान की विपक्ष को धमकी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 23 जनवरी 2022 को विपक्षी दलों को खुली धमकी दी। इमरान खान ने कहा कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लिए मजबूर किया गया, तो वह और भी ज्यादा खतरनाक हो जाएँगे। इसके साथ ही खान ने विपक्ष की कोई भी बात मानने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) द्वारा 23 मार्च को आयोजित होने वाले लॉन्ग मार्च को लेकर प्रधानमंत्री जवाब दे रहे थे।

पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट द्वारा 23 मार्च को जुलूस निकालने की योजना पर पूछे गए सवाल के जवाब में इमरान खान ने कहा कि यह कदम विफल हो जाएगा। उन्होंने कहा, “अगर मैं सड़कों पर आ गया तो आप (विपक्ष) सबको छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी।” 

पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट एक गठबंधन है, जिसमें करीब एक दर्जन पार्टियाँ हैं। इस गठबंधन को राजनीति में पाकिस्तानी सेना की दखलअंदाजी और चुनाव में ‘गड़बड़ी’ कर इमरान खान को ‘कठपुतली’ प्रधानमंत्री बनाने के खिलाफ गठित किया गया था। इस गठबंधन का कहना है कि राजनीति में सेना की दखल कम होनी चाहिए। पीडीएम का आरोप है कि इमरान खान सेना के हाथों की कठपुतली हैं जिन्हें इलेक्शन में गड़बड़ी करके जितवाया गया था।

PDM के अध्यक्ष और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजली के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने ऐलान किया है कि विपक्षी पार्टियाँ 23 मार्च को इस्लामाबाद में लंबा मार्च निकालेंगी। उन्होंने इमरान की सरकार को ‘अक्षम और नाजायज’ कहा और बोले कि इससे पाकिस्तान को छुटकारा दिलाया जाएगा।

नवाज शरीफ वापस नहीं आएँगे, उन्हें पैसों से प्यार – इमरान खान

नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ पर भी इमरान खान बरसे। इमरान ने कहा कि वह शहबाज शरीफ को विपक्ष का नेता नहीं राष्ट्र का क्रिमिनल मानते हैं। इमरान ने आरोप लगाया कि पूरा शरीफ परिवार लंदन भाग जाएगा और फिर वहीं रहेगा, जिस तरह नवाज शरीफ (पूर्व पीएम) अपने दो बेटों के साथ रह रहे हैं। क्या नवाज वापस पाकिस्तान आएँगे? इस सवाल पर इमरान ने कहा, “वो तो रोज कहते हैं कि पाकिस्तान आएँगे। मैं तो इंतजार कर रहा हूँ। नवाज वापस आएँ, हम उनका इंतजार कर रहे हैं लेकिन मैं जानता हूँ कि वह वापस नहीं आएँगे। नवाज शरीफ को पैसे से प्यार है।”
नवाज शरीफ नवंबर 2019 से यूके में रह रहे हैं। तब लाहौर हाईकोर्ट ने उनको चार हफ्ते की जमानत दी थी, जिसमें उनको विदेश जाकर इलाज कराकर वापस आना था। लेकिन वह वापस नहीं आए। नवाज को भ्रष्टाचार के मामले में सात साल की सजा हुई थी। इमरान खान के जनता के नाम संबोधन की कुछ क्लिप्स भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। एक वीडियो में वह पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों को घटिया बता रहे हैं।

‘आपने घबराना नहीं’: इमरान सरकार द्वारा तीन महीने से नहीं दी सैलरी नहीं देने पर सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने कसा तंज

       वेतन नही देने पर सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने इमरान सरकार पर कसे तंज (साभार: ट्विटर/ बिजनेस स्टैंडर्ड)
पाकिस्तान में बदहाली, भुखमरी और दिवालियापन इस कदर बढ़ गया है कि अब उसके दूतावास भी उसके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं। इसी क्रम में सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने 3 महीने से सैलरी नहीं मिलने के कारण अब पाक सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की है। दूतावास ने ट्विटर पर पाकिस्तानी सरकार को फटकार लगाई और नकदी के संकट से जूझ रही इमरान खान सरकार पर तंज कसने के लिए इमरान खान के ‘आप ने घबराना नहीं है’ का रैप शेयर किया।

सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने आर्टिस्ट साद अलवी द्वारा गाए गए गाने को शेयर किया, जिसमें दिवालिया होने के बावजूद अपने देश के लोगों को झूठी उम्मीदें देने के लिए इमरान खान का मजाक उड़ाया गया है। सर्बिया में पाकिस्तानी दूतावास ने ट्वीट किया, “महंगाई पिछले सभी रिकॉर्ड को तोड़ रही है, @ImranKhanPTI आप कब तक उम्मीद करते हैं कि हम सरकारी अधिकारी चुप रहेंगे और आपके लिए काम करते रहेंगे। पिछले 3 महीनों से फीस जमा नहीं करने के कारण, हमारे बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया गया है। क्या यह #नयापाकिस्तान है?”

सर्बिया में पाकिस्तानी एम्बेसी ने जिस 0.56 मिनट के गीत को पोस्ट किया था, उसे साद अलावी ने कम्पोज किया था। इस रैप में प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रसिद्ध ‘आप ने घबराना नहीं है’ भाषण को म्यूजिकल तरीके से पेश किया है। रैप गाने की शुरुआत पाकिस्तान के पीएम के द्वारा राष्ट्र को संबोधित करते हुए होती है, जिसमें वो कहते हैं, “आपने, सबसे पहले, घबराना नहीं है”। इमरान खान ने ये भाषण पिछले साल मार्च में उस वक्त दिया था, जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल रहा था।

इसमें मिक्सिंग करने के लिए अलावी ने पाकिस्तान में महंगाई पर तंज कसते कुछ आकर्षक गीत भी जोड़े। गाने में साबुन, गेहूँ और दवा जैसी जरूरी चीजों से लेकर शिक्षा तक अलवी ने पीएम का मजाक उड़ाया और लोगों से नहीं घबराने की अपील की। मार्च में रिलीज हुआ यह गाना लोगों के बीच हिट हो गया था।

पिछले महीने ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस देश में पैसे की कमी को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था कि उनके पास देश को चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, जिस कारण कर्ज लेना पड़ता है। उन्होंने ये बात इस्लाबाद में चीनी उद्योग के लिए फेडरल ब्यूरो ऑफ रेवेन्यू के ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम (टीटीएस) के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते कही थी।

मौजूदा दौर में पाकिस्तान तमाम तरह की समस्याओं का सामना कर रहा है। वहाँ की अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता है औऱ इस कारण से देश में खाद्य महंगाई बढ़ी है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष की राजनीतिक एकता और लगातार गिरती साख इमरान खाने के सामने कई सारे संकट खड़े हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण करने के लिए सरकार के पास संसाधनों की कमी हो गई है।

हालात इतने बुरे हैं कि अब देश को आर्थिक संकट से उबारने के लिए पाकिस्तानी सेना के पास अपना रक्षा बजट कम करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हाल ही में एक आकलन किया गया था, जिसके मुताबिक पाकिस्तान को अगले दो वर्षों (2021-2023) में 51.6 बिलियन अमरीकी डॉलर (38,75,10,32,40,000 भारतीय रुपए) के बाहरी वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी।

क्या तालिबान ने पाकिस्तान में दस्तक दे दी है? एंकर ने पहना हिजाब

                                               पाकिस्तानी एंकर ने लाइव शो में पहना हिजाब 
अफगानिस्तान की जनता तो तालिबान के खिलाफ सड़कों पर है, लेकिन पाकिस्तान के लोगों में धीरे-धीरे तालिबान का रंग चढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान की सरकार तालिबान के गले में फूलों का हार पहना रही है तो पाकिस्तान के अलग अलग इलाकों में तालिबान के समर्थन में रैलियाँ निकाली जा रही हैं और अब तालिबान के समर्थन में पाकिस्तान की एक मशहूर टीवी एंकर ने लाइव शो के दौरान हिजाब पहन लिया।

पाकिस्तानी एंकर ने पहना हिजाब 

पाकिस्तान में अलग अलग तरीकों से तालिबान के समर्थन में कसीदे पढ़े जा रहे हैं और खुद प्रधानमंत्री इमरान खान तालिबान के समर्थन में निकलने वाली रैलियों के मुख्य नेता हैं। पाकिस्तान की मशहूर टीवी एंकर किरन नाज़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वो लाइव शो में हिजाब पहनती नजर आ रही हैं।

 

वीडियो में दिख रहा है कि किरण नाज न्यूज पढ़ते हुए तालिबान की तारीफ कर रही हैं और उनके बगल में हिजाब रखा हुआ है। कुछ देर तक तालिबान की शान में कसीदे पढ़ने के बाद किरण नाज बगल में रखा हुआ हिजाब उठाती हैं और उसे टीवी पर पहन लेती हैं। किरण नाज ने हिजाब पहनकर उन लोगों के नाम गिनाने शुरू किए, जिन्होंने शोहरत हासिल की है और जो हिजाब पहनती हैं।

एंकर ने हिजाब पहनकर क्या कहा 

तालिबान के समर्थन में बोलते हुए लाइव टीवी पर किरण नाज़ ने कहा, “मैं आज के शो में हिजाब पहनकर बैठूँगीं और आज का शो मैं हिजाब के साथ करूँगी।” फिर किरण नाज़ ने लाइव टीवी के दौरान हिजाब पहन लिया और फिर उन्होंने कहा, ”हिबाज पहनने वाली औरतें भी इसी तरह से नॉर्मल होती हैं, जैसा की हिजाब नहीं पहनने वालीं। इसे पहनने के बाद ना मेरे लफ्जों में कोई कमी आएगी, ना ही मरी सोच में तब्दीली आएगी।” इसके बाद पाकिस्तान की एंकर ने मिसालें देनी शुरू कर दी।

दरअसल लाइव शो में पाकिस्तान के प्रोफेसर परवेज हूडभोय बता रहे थे कि अब यूनिवर्सिटी में भी सब कुछ नॉर्मल नहीं है, लड़कियों को हिजाब पहनने को कहा जा रहा है। इसके जवाब में एंकर ही हिजाब के बचाव में उतर गई। वीडियो के मुताबिक कायदे आजम यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे परवेज हुडभोय ने कहा था, “मैंने साल 1973 से पढ़ाना शुरू किया, तब 47 साल पहले एक लड़की भी आपको बमुश्किल बुर्के में दिखाई देती थी। अब तो हिजाब बुर्का आम हो गया है। अब तो नॉर्मल लड़की तो दिखाई ही नहीं देती है और जब वो क्लास में बैठती हैं हिजाब में बुर्के में लिपटी हुईं तो उनकी एक्टिविटी क्लास में बहुत घट जाती है। यहाँ तक कि पता ही नहीं चलता कि वो क्लास में है या नहीं”

तालिबान के रंग में रंगा पाकिस्तान 

किरण नाज़ पाकिस्तान की कोई पहली जर्नलिस्ट नहीं हैं, जिन्होंने तालिबान का समर्थन किया है। पाकिस्तानी मीडिया का एक बड़ा हिस्सा लगातार तालिबान को समर्थन दे रहा है और तालिबान का आना पाकिस्तान के लिए अच्छा बता रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद तालिबान की काफी समर्थन कर चुके हैं और उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि ‘तालिबान ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ा है’। 

वहीं, इसी हफ्ते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हक्कानी नेटवर्क का भी बचाव किया है और उन्होंने हक्कानी नेटवर्क को ‘सीधी-साधी जनजाति’ का हिस्सा बता दिया। जिसके बाद पूरी दुनिया में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की आलोचना हो रही है और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।

इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा ‘पागलखाने’ पहुँचीं ; ‘ड्रग्स एडिक्ट कहाँ रहते हैं’

                            बुशरा बीवी के साथ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो, साभार: द प्रिंट)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा पिछली बार 2019 में तब चर्चा में आईं थी, जब एक टीवी चैनल ने दावा कर दिया था कि उनका अक्स आईने में नहीं दिखता। साथ ही यह भी कहा था कि वे जिन्नों को गोश्त खिलाती हैं। बाद में पाकिस्तानी मीडिया ने इसे फेक न्यूज बताया। बावजूद बुशरा बीवी की रहस्यमयी जिंदगी को लेकर कयास लगते रहते हैं। अब वे पाकिस्तान के पंजाब मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (PIMH) का दौरा करने को लेकर चर्चा में हैं।

बुशरा बीवी 15 सितंबर 2021 को यहाँ पहुँचीं थी। उन्होंने मरीजों से बात की। ड्रग्स एडिक्ट कहाँ रखे जाते हैं, इसके बारे में पूछा। सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे में सुधार को लेकर रिपोर्ट तलब की। उल्लेखनीय है कि इस संस्थान को स्थानीय लोग बोलचाल की भाषा में पागलखाना कहते हैं। बुशरा का यह दौरा पाकिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पीटीवी पर लाइव दिखाया गया।

पीटीवीके अनुसार बुशरा बीवी ने संस्थान के विभिन्न विभागों का दौरा किया। उन्हें वहाँ पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया गया। इस दौरान उन्होंने मरीजो से भी बातचीत कर उनका हाल जाना। उन्होंने नशा करने वालों मानसिक रूप से बीमार बुजुर्गों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान देने पर जोर दिया। कर्मचारियों को मरीजों की अधिक से अधिक मदद करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा बुशरा बीवी ने अस्पताल के किचेन में जाकर वहाँ पर खानपान की सुविधाओं का जायजा लिया। सामान्यतया बुशरा बीबी आमतौर बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के सार्वजनिक स्थानों पर जाती रहती हैं। बहरहाल पंजाब मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (PIMH) के उनके दौरे के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था को कड़ा करते हुए प्रशासन ने वहाँ लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दिया था।

इससे पहले मार्च में उन्होंने लाहौर के दाता दरबार के पास एक सरायखाने का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने लोगों के साथ रोटियाँ भी खाई थी। वह पिछले साल इस्लामाबाद सरायखानों का दौरा कर लोगों से बातचीत करते हुए पति की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ की तारीफ की थी। वहाँ परोसे जा रहे खाने का स्वाद चखा था। साथ ही सरायखानों में सुविधाओं के सुधार की बात की थी। तहरीक-ए-इंसाफ की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए बुशरा बीवी ने कहा था कि लोगों की देखभाल करना उनकी सरकार की जिम्मेदारी है।

FATF ने बढ़ाई इमरान खान की मुसीबत : खस्ताहाल पाकिस्तान को 3800 करोड़ डॉलर का फटका!

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को एफएटीएफ यानी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ओर से बड़ा झटका लगा है। मीडिया रिपार्ट्स के मुताबिक, आर्थिक संकट की मार झेल रहे पाकिस्‍तान की हालत भविष्य में और भी खराब हो सकती है। दरअसल, इस्लामाबाद स्थित स्वतंत्र थिंक-टैंक ‘तबादलाबी‘ द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च पेपर में कहा गया है, ”एफएटीएफ द्वारा साल 2008 से देश को ग्रे लिस्ट में बनाए रखने के कारण पाकिस्तान को 38 अरब डॉलर का भारी नुकसान हुआ है।” यह रिसर्च पेपर नाफी सरदार ने लिखा है। इसका शीर्षक ‘पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर एफएटीएफ की ग्रे-लिस्टिंग का प्रभाव’ है।

शोध पत्र में आगे कहा गया है कि एफएटीएफ (FATF) की ग्रे-लिस्टिंग में पाकिस्तान को 2008 से रखा गया है। अनुमान है कि 2019 तक इससे लगभग 3,800 करोड़ डॉलर का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का नुकसान हुआ है। अनुमान के मुताबिक, सकल घरेलू उत्पाद में कुल 450 करोड़ डॉलर और 360 करोड़ डॉलर का नुकसान के लिए निर्यात और आवक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आंशिक रूप से जिम्मेदार हैं। ये नुकसान एफएटीएफ ग्रे-लिस्टिंग के नकारात्मक परिणामों की ओर इशारा करते हैं।

रिपोर्ट में पाकिस्तान को भविष्य में होने वाले इस नुकसान से बचाने के लिए जल्द से जल्द FATF की सभी शर्तों को पूरा करने की अपील की गई है। पाकिस्तान ने अब तक FATF की 27 में से 26 मानकों को पूरा किया है। अब उसे मनी लॉन्ड्रिंग और टेटरिज्म की फिनांसिंग से संबंधित FATF की 7 नई शर्तों को पूरा करना है।

वहीं, एफएटीएफ ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। एफएटीएफ ने कहा, ”पाकिस्तान में रह रहे इन आतंकवादियों में जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक हाफिज सईद और उसका ऑपरेशनल कमांडर जकीउर रहमान लखवी शामिल हैं।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से अपनी महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए काम करना जारी रखना चाहिए।

एफएटीएफ मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने वाले संगठनों पर नजर रखने वाली संस्था है। इसका गठन साल 1989 में किया गया था, जिसमें 37 देश और दो क्षेत्रीय संगठन शामिल हैं। एफएटीएफ द्वारा कुछ मानक बनाए गए हैं, जिससे अपराध और आतंकवाद को वित्तीय सहायता देने से रोका जाता है। एफएटीएफ के मानकों का पालन नहीं करने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से सहायता मिलने में मुश्किल होती है।

पाकिस्तानी इजरायल पर शाहीन का उपयोग करना चाहते हैं

पाकिस्तान के लोग बेहद महत्वाकांक्षी हैं। फिर जब से पाकिस्तान ने परमाणु बनाया है, पाकिस्तान सरकार और वहां की जनता इस भ्रम में है कि जैसे परमाणु सिर्फ पाकिस्तान के ही पास है, और वह इसकी धमकी से सबको डराते रहेंगे। पता नहीं किस भ्रम में हैं? पाकिस्तानियों को नहीं मालूम कि दूसरे की आग में कूदने का अंजाम कितना भयानक होगा, जानकर उनके होश उड़ जाएंगे। उन्हें शायद नहीं मालूम कि शाहीन छोड़ने से पहले जब इजराइल अपना मिसाइल फेंकेगा शायद पाकिस्तान का दुनियां के नक़्शे से ही नाम मिट सकता है। हमास और इस्लामी आतंकवादियों द्वारा इजरायल पर जारी हमलों के बीच पाकिस्तान न केवल फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा है, बल्कि अपने प्रधानमंत्री से भी यह कह रहा है कि वो दुनिया को दिखा दें कि वह परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार (मई 12, 2021) को फिलिस्तीन के लोगों के प्रति अपना समर्थन दोहराने के लिए ट्विटर का सहारा लिया, जिसमें इजरायल द्वारा किए जा रहे अत्याचारों की निंदा की गई। बुधवार को, इमरान खान ने ट्विटर पर खुद को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में पेश किया और अमेरिकी बुद्धिजीवी नोम नोम चोमस्की के एक पुराने लेख से एक अंश ट्वीट करते हुए कहा कि वह गाजा और फिलिस्तीन के साथ एकजुटता से खड़े हैं।

दिसंबर 2012 के एक लेख में चोम्स्की ने यह उद्धरण दिया था। गाजा के एक व्यक्ति ने तख्ती पर लिखा था, “तुम मेरा पानी ले लो, मेरे जैतून के पेड़ को जला दो, मेरे घर को नष्ट कर दो, मेरी नौकरी ले लो, मेरी जमीन चुरा लो, मेरे पिता को कैद कर लो, मेरी माँ को मार दो, मेरे देश पर बमबारी करो, हम सबको भूखा रखो, हम सभी को अपमानित करो, लेकिन मुझे दोष देना है, मैंने रॉकेट वापस मार दिया।”

हालाँकि एक पाकिस्तानी नागरिक इस बात से परेशान था कि जब प्रधानमंत्री (इमरान) भी सिर्फ ट्वीट ही करेंगे तो फिर परमाणु शक्ति संपन्न देश होने का क्या फायदा। उसने लिखा, “खान साहब, अगर आपने भी सिर्फ ट्वीट ही करनी है तो न्यूक्लियर पावर कंट्री के पीएम होने का क्या फायदा?”

                                                         इजरायल पर परमाणु हमले की चर्चा करते पाकिस्तानी
एक अन्य पाकिस्तानी ने इस बात पर ध्यान देने की कोशिश की कि कैसे सिर्फ इजरायल पर परमाणु बम से हमला एक अच्छा विचार नहीं हो सकता है। इसके बाद अहमद शेख ने बताया कि वह यह नहीं कह रहा कि पाकिस्तान परमाणु बम का इस्तेमाल करे, लेकिन इमरान खान इजरायल को डरा-धमका तो सकते हैं। अपनी बात तो मनवा सकते हैं ना। परमाणु शक्ति होना आम बात नहीं है।

एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने पूछा कि पाकिस्तान को किसी और के युद्ध में क्यों शामिल होना चाहिए। उस पर शेख ने कहा कि यह मुसलमानों की लड़ाई है और मुसलमानों के साथ खड़ा होना उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

एक अन्य पाकिस्तानी, बिलाल ने रक्षा के लिए आवंटन पर सवाल उठाया, जबकि वर्तमान में मिसाइलों का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

                                     इजरायल पर मिसाइलों का उपयोग करने के लिए उत्साहित पाकिस्तानी
बिलाल ने खान से पूछा, “क्या हमारे पास ये परमाणु बम और मिसाइल हैं जो शादियों में सजावट के रूप में उपयोग करते हैं?” उसने दावा किया कि पाकिस्तान रक्षा पर इतना पैसा खर्च करता है, लेकिन आज उनका ‘क़िबला-ए-अव्वल’ (अल-अक्सा मस्जिद) ’दूसरों’ के हाथों में है और इसलिए खान को शर्म आनी चाहिए।

                                              पाकिस्तानी इजरायल पर शाहीन का उपयोग करना चाहते हैं
इसके जवाब में एक अन्य पाकिस्तानी ट्विटर यूजर ने कहा कि देश को परमाणु बम का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ऐसे अन्य हथियार हैं जिनका उपयोग फिलिस्तीन के आतंकवादियों की मदद के लिए किया जा सकता है।

एक पाकिस्तानी यूजर ने माँग की कि खान इजरायल के खिलाफ शाहीन 3 सरफेस-टू-सरफेस पर मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल करें। इसकी प्रभावी फायरिंग रेंज 2,500-3,000 किलोमीटर है। हास्यास्पद यह है कि पाकिस्तान के लाहौर से इजरायल के यरुशलम की दूरी 5,000 किलोमीटर से थोड़ी कम है। अगर फायर किया जाता है, तो शाहीन 3 मिसाइल ईरान में कहीं गिरने की संभावना है।

                                                       इमरान खान की तारीफ में ट्वीट
एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने मिसाइल उत्साही को धैर्य रखने के लिए कहा कि जैसे ही पाकिस्तान आक्रामकता दिखाता है, इज़राइल विश्व युद्ध शुरू कर देगा। एक अन्य पाकिस्तानी यूजर ने खुशी जताते हुए कहा कि वो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री नहीं है, इमरान खान हैं और यह भावनात्मक होने का समय नहीं है।

ट्विटर यूजर ने कहा कि खान 22 करोड़ पाकिस्तानियों के बारे में सोच रहे हैं और इसलिए भावनात्मक रूप से कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।

अन्य पाकिस्तानी यूजर्स ने भी खान को केवल निंदा करने के लिए नहीं, बल्कि ‘कुछ करने के लिए’ और बहादुरी दिखाने के लिए कहा।

इस बीच, पाकिस्तान फिलहाल कर्ज से जूझ रहा है। दिसंबर 2020 में समाप्त हुए 6 महीनों में पाकिस्तान के बाहरी ऋण में 3 बिलियन अमरीकी डालर की वृद्धि हुई। इसका कुल बाह्य ऋण 115.7 बिलियन अमरीकी डॉलर है।

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष तब बढ़ गया जब फिलिस्तीनी आतंकवादी यूनिट हमास ने यरुशलम में कई रॉकेट दागे, और इजरायली रक्षा बलों ने तरह तरह से जवाब दिया। मौजूदा संघर्ष के पीछे मुख्य कारण शेख जर्राह संपत्ति विवाद है। बता दें कि यह एक विवाद है जो पूर्वी यरूशलेम के पड़ोस से लगभग 300 फिलिस्तीनियों के निष्कासन का कारण बन सकता है।

अब पाकिस्तानी इजरायल पर परमाणु हमला करना चाहता है।

पाकिस्तान : खलीफा बनने की चाल में फँस गए इमरान खान, TLP के सामने घुटने टेके

                           कट्टरपंथी समूह के आगे बेबस इमरान खान की सरकार (फोटो साभार: Reuters)
पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के उदय के साथ ही स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है। अब वहाँ की सरकार मंगलवार (अप्रैल 20, 2021) को संसद में वोट करा कर इस बात का निर्णय लेगी कि मुल्क से फ्रांस के राजदूत को निकाला जाए या नहीं। फ्रांस के एम्बेसडर को निकाल बाहर करने के लिए कई दिनों से इस्लामी कट्टरवादियों का प्रदर्शन जारी है। ये TLP की 4 माँगों में से एक है।

पाकिस्तान की सरकार ने इस समूह के साथ सोमवार से बातचीत भी शुरू कर दी है। वहाँ के इंटीरियर मिनिस्टर शेख रशीद अहमद ने कहा कि लंबी बातचीत के बाद संसद में प्रस्ताव रखने पर सहमति बनी। इससे पहले इमरान खान को उम्मीद थी कि पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून का मुद्दा उठा कर वो मुल्क में अपने विरोधियों को शांत कर देंगे और दुनिया भर में इस्लाम के पैरोकार कहलाएँगे, लेकिन दाँव उलटा पड़ गया।

पिछले एक सप्ताह से पाकिस्तान में दंगे हो रहे हैं। पुलिस अधिकारियों की हत्या हो रही है। उन्हें बंधक बनाया जा रहा है। फ्रांस ने अपने नागरिकों से पाकिस्तान तत्काल छोड़ देने और वहाँ की यात्रा न करने को कहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने शार्ली हेब्दो के कार्टून का बचाव किया था, जिसका जवाब देकर पाक पीएम ने मसीहा बनने की कोशिश की थी। अब वो खुद के मुल्क में कानून-व्यवस्था संभालने में नाकामयाब रहे हैं।

इमरान खान ने पश्चिमी जगत की आलोचना करते हुए UN के अपने सम्बोधन में पैगंबर मुहम्मद के कार्टून का मुद्दा उठाया था। लेकिन, TLP इस मामले में कूद पड़ा और पैगम्बर मुहम्मद की सेवा करने का दावा करने वाली इस कट्टरवादी इस्लामी संस्था ने फ्रांस से सारे रिश्ते तोड़ने की माँग रख दी। सुरक्षा विशेषज्ञ अमीर राना ने कहा कि इन कट्टरवादी ताकतों को बढ़ावा देने का मतलब है कि उनकी माँगें नियंत्रण से बाहर होती चली जाएँगी शायद इमरान को अब ये समझ आ गया होगा।

अभी तक वो संतुलन बिठाने में असफल रहे हैं। पाकिस्तान का कोई भी नेता, तानाशाह या फिर सैन्य अधिकारी इस्लाम या पैगम्बर मुहम्मद के मुद्दे पर विरोध में कुछ भी बर्दाश्त नहीं कर सकता, कम से कम खुले में। इमरान खान ने पाकिस्तानी समाज की ही कट्टरवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया था। लेकिन, फ्रांस के बॉयकॉट ने हिंसा का रूप ले लिया। आपको याद होगा जब सितंबर 2020 में एक पाकिस्तानी ने शार्ली हेब्दो के पेरिस स्थित पूर्व दफ्तर के सामने दो लोगों की हत्या कर दी थी।

इसके कुछ ही दिन पहले इमरान ने UN में इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाया था। बाद में पता चला कि वो आतंकी TLP के नेता खादिम रिजवी से प्रेरित है, जो मर चुका है। नवंबर 2020 में इस समूह ने राजधानी इस्लामाबाद की सड़कों पर जम कर हिंसा की। TLP के साद रिजवी ने सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप लगा कर फिर से रैली बुलाई। जब उसकी गिरफ़्तारी हुई और TLP को आतंकी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित किया गया, लोग उसके समर्थन में आ गए।

पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम की बातें करने वाले इमरान खान अब कह रहे हैं कि कानून-व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं है। मुल्क की मजहबी संगठनों ने TLP को समर्थन दे दिया है। अब इस समूह के खिलाफ इमरान जितनी कार्रवाई करेंगे, उनका ‘इस्लाम का नया खलीफा’ बनने का सपना उतना ही टूटता जाएगा। पाकिस्तान के सम्बन्ध यूरोप सहित अन्य देशों से खराब हो ही रहे हैं, साथ ही देश में भी सिविल वार सा छिड़ गया है।

इमरान खान ने मुल्क की जनता को सम्बोधित करते हुए कहा है कि TLP और पाकिस्तान की सरकार का लक्ष्य एक है, लेकिन तरीके अलग हैं। उन्होंने कहा कि 100 सड़कें जाम करने के कारण कोरोना के मरीजों तक ऑक्सीजन सिलिंडर्स नहीं पहुँच सके, जिससे कइयों की मौत हुई। उन्होंने कहा कि 4 लाख ट्वीट्स में से 70% फेक निकले हैं, जो पाकिस्तान के ‘विदेशी दुश्मनों’ की साजिश है। अपने सैन्य अधिकारियों का नाम लेने से डरने वाले इमरान ने भारत पर दोष मढ़ दिया।

इससे पहले उनके मंत्री कह रहे थे कि TLP को मिटा दिया जाएगा और उसके साथ कोई बातचीत नहीं हो रही, लेकिन अब उसके दबाव में संसद में प्रस्ताव तक लाया जा रहा। सवाल ये है कि 2-3 साल पहले राजनीति में आई TLP इतनी प्रभावशाली कैसे हो गई कि उसने पूरे मुल्क में तबाही फैलाई और पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिए। क्या बरेलवी समुदाय के इस संगठन के उभार के पीछे रावलपिंडी है? लाहौर में 24 घंटों से जो स्थिति है, उससे लगता है कि पुलिस के बदले अब वहाँ पाक सरकार को पैरा-मिलिट्री लगानी पड़ेगी।

क्या पाकिस्तान गृह युद्ध की तरफ बढ़ रहा है?

जिस तरह भारत के छद्दम सेक्युलरिस्ट गलत इतिहास पढ़ाकर अपनी जनता को मुर्ख बनाकर राज करते रहे, लेकिन समय ने ऐसा वार किया कि आज सत्ता के लिए सिर पटक रहे हैं, ठीक वही स्थिति पाकिस्तान की भी है, जहां अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए वहां की जनता को भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध इतिहास पढ़ाते रहे, भारत की तरह वहां भी समय रंग बदल रहा है। क्योकि जिस प्रकार सुगंध को छुपाया नहीं जा सकता, वैसे ही सच्चाई को भी नहीं छुपाया नहीं जा सकता। जिस गलत इतिहास की बुनियाद पर पाकिस्तानी सियासतखोर अपनी जनता को पागल बनाकर राज कर रहे हैं, वही गलत इतिहास उन्हें खाने को दौड़ रहा है।  
पाकिस्तान ने बड़ा कदम उठाते हुए Facebook, Twitter, Tiktok, WhatsApp और YouTube पर शुक्रवार(अप्रैल 16) को 11 से 3 बजे तक के लिए अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। शाम 4 बजे से ये सेवाएँ फिर से पहले की ही तरह काम करना शुरू कर देंगी।

सरकार ने यह फैसला देश में आंतरिक कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया है। इमरान सरकार ने यह कदम तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने के एक दिन बाद उठाया है। इतना ही नहीं पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पीईएमआरए) ने सभी टीवी चैनलों को प्रतिबंधित संगठन के किसी भी कवरेज से रोक दिया है।

सुरक्षाबलों को आशंका है कि टीएलपी शुक्रवार की नमाज के बाद देश भर में बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन कर सकता है।

आंतरिक मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि सरकार के पास पुख्ता सबूत है कि टीएलपी “आतंकवाद में लिप्त है और पूर्वाग्रह तरीके से काम करती है व देश की शांति और सुरक्षा के लिए चुनौती है”। यह भी कहा गया है कि इस संगठन ने जनता को डराया, धमकाया लोगों को चोटें पहुँचाई और कानूनी एजेंसियों से जुड़े लोगों की हत्या भी किए हैं।

टीएलपी पर आतंकवाद विरोधी अधिनियम, 1997 की धारा 11 बी (1) के तहत मुकदमा चलाया गया है। इस एक्ट के तहत सरकार आतंकवाद में शामिल संगठनों पर प्रतिबंध लगा सकती है।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख रशीद ने अप्रैल 14 को टीएलपी पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। इसके बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी उनके इस आदेश का अनुमोदन किया। इसके मुताबिक, धार्मिक समूह द्वारा किए गए हिंसक प्रदर्शनों में दो पुलिस अधिकारी मारे गए थे और सुरक्षाबलों के 30 वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।

टीएलपी कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने के बाद 12 अप्रैल को पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारी संगठन के मुखिया साद की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। साद की गिरफ्तारी के बाद उसके समर्थकों ने कई शहरों की सड़कों को जाम कर दिया था। हालाँकि, सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया है।

इस मामले में अब तक कम से कम 115 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 2,063 कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए हैं। पंजाब में 1669 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, सिंध में 228, खैबर पख्तूनख्वा में 193, और इस्लामाबाद में 43 आंदोलकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

पाकिस्तान में एक और कांड: विधानसभा में नेताओं ने एक-दूसरे को गिरा-गिराकर पीटा

पाकिस्तान की सिंध विधानसभा के अंदर प्रधानमंत्री इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता मार्च 2, 2021 को आपस में बुरी तरह भिड़ गए। हालात इस कदर काबू से बाहर हुए कि नेता एक-दूसरे को गिरा-गिराकर पीटते दिखे। असेंबली के अंदर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। मामला सीनेट चुनाव को लेकर था।

हालात इस कदर काबू से बाहर हुए कि नेता एक-दूसरे को गिरा-गिराकर पीटने लगे। नौबत तो ये आ गई की आपस में भिड़ रहे इमरान खान के नेताओं को रोकने के लिए सिक्योरिटी गार्ड्स को आना पड़ा।

दरअसल, मामला अपनी मर्जी से वोट डालने की बात से शुरू हुआ, बागी नेताओं ने सीनेट चुनाव के दौरान अपनी मर्जी से वोट डालने के लिए कहा जिसके बाद पीटीआई के नेताओं ने असेंबली को ही युद्ध का मैदान बना दिया। पार्टी के तीन विधायकों असलम आबरो, शहरयार शार और करीम बख्श गबोल ने ऐलान किया था कि वह अपने मन मुताबिक सीनेट चुनाव में वोट देंगे।

आबरो ने आरोप लगाया है कि सीनेट उम्मीदवारी के टिकट बेचे गए हैं और वह सैफुल्ला आबरो और फैसल वावडा के चुनाव से सहमत नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि वह पार्टी लाइन पर वोट नहीं देंगे। PTI के उम्मीदवारों को वोट नहीं देने से नाराज नेताओं ने इन तीनों नेताओं को बागी करार दिया और उनके विधानसभा में दाखिल होते ही उन पर हमला बोल दिया।

आपस में भिड़ते नेताओं को अलग कराने पीपीपी नेता भी आगे आए और मामला बढ़ता चला गया। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि सभा के अंदर किस कदर हंगामा मचा हुआ है। यहाँ तक कि भीड़ एक नेता को गिरा भी देती है। इस बीच सभा के कई सदस्य उठकर बाहर चले गए लेकिन गुस्साए नेता आपस में खींचतान करते रहे।

‘खालिस्तान को नए पड़ोसी के रूप में मान्यता देने को तैयार रहे पाक’ : खालिस्तान मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू

प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस के पाकिस्तान से नापाक गठजोड़ का खुलासा हुआ है। संगठन के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को लिखी चिट्ठी में कहा है कि खालिस्तान को अपने नए पड़ोसी के रूप में मान्यता देने के लिए पाकिस्तान को तैयार रहना चाहिए। पन्नू ने साफ किया है कि उसके संगठन सिख फॉर जस्टिस को पाकिस्तान और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन प्राप्त है। जाहिर है, लंबे समय तक पाकिस्तान से किसी भी प्रकार के संबंध से इनकार करते रहे सिख फॉर जस्टिस का आईएसआई से संबंध जाहिर हो गया है। यह भी स्पष्ट है कि किस प्रकार पाकिस्तान ने खालिस्तान के नाम पर चलाई जा रही इस पूरी साजिश को संचालित किया है।
खालिस्तान के सिख होने पर सिख समाज को शंका है, जिसका प्रमाण ये खुद ही दे रहे हैं, कि पाकिस्तान में महाराजा रंजीत सिंह की प्रतिमा तोड़े जाने पर विरोध में आवाज़ तक नहीं निकली। जिस कारण इनके सिख होने पर शंका की जा रही है। 

पन्नू ने यह चिट्ठी उस दिन लिखी है जब बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस और भारत विजय दिवस मना रहा है। पन्नू ने ढाका के पतन की तुलना खालिस्तान से की है। सरकारी सूत्रों को कहना है कि पन्नू की यह चिट्ठी उन किसानों के लिए भी आंख खोलने वाली है जिन्हें आंदोलन के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है।

भारत में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन के 16 सदस्यों के खिलाफ हाल में राष्ट्र जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा चार्जशीट किए हैं, जिन पर भारत के खिलाफ साजिश रचने और जनमत संग्रह करने के आरोप है। आरोप है कि विदेश में बैठकर सिख फॉर जस्टिस संगठन के सक्रिय सदस्य भारत के विरूद्ध षडयंत्र रचते हैं। एनआईए ने सभी आरोपियों के खिलाफ UAPA की धारा 12,17,18 और आईपीसी की धारा 120B, 124B, 153A, 153B और 505 चार्जशीट दाखिल की है। संगठन पर किसान आंदोलन की आड़ में खालिस्तानी मूवमेंट चलाने का भी आरोप हैं।

 2019 में सरकार सिख फॉर जस्टिस संगठन को प्रतिबंधित किया गया

केंद्र सरकार 10 जुलाई, 2019 को खालिस्तान समर्थक संगठन दि सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ) को इसकी राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एसएफजे को गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक कानून (UAPA) के तहत प्रतिबंधित घोषित करने का फैसला किया है। खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस संगठन अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में बैठकर चलाया जाता है। इस संगठन को UAPA, 1967 की धारा (1) के प्रावधानों के तहत गैर कानूनी घोषित किया गया है।

क्या है सिख फॉर जस्टिस संगठन

अमेरिका स्थित सिख फॉर जस्टिस संगठन का मुख्य उद्देश्य पंजाब में एक स्वतंत्र व संप्रभु देश स्थापित करना है। यह खालिस्तान के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखता है और इस प्रक्रिया में भारत की संप्रुभता व अंखडता को चुनौती देता है। प्रतिबंधित सिख फॉर जस्टिस संगठन खासकर ऑनलाइन फ्लेटफॉर्म के जरिए ऑपरेट करता है, जिसके लगभग दो लाख समर्थक बताए जाते हैं। हालांकि संगठन के सशरीर सदस्यों की संख्या बहुत कम है, जो कि महज 8-10 हैं। यह अपने अलगाववादी एजेंडा के तहत 2020 में सिख जनमत संग्रह की वकालत करता रहा है।

पंजाब पुलिस और एएनआई कई बार कर चुका है भंडाफोड़ 

पंजाब में अमन चैन भंग करने की जुगत में अक्सर लगा रहने वाला सिख फॉर जस्टिस के सक्रिय सदस्यों में से एक परमजीत सिंह पम्मा ने गत 30 जून, 2019 में वर्ल्ड कप क्रिकेट के एक मैच के दौरान भारत विरोधी बयानबाजी की थी। सिख फॉर जस्टिस के कारनामों का पंजाब पुलिस और एएनआई कई बार भंडाफोड़ कर चुकी है। यह मुख्य रूप से पंजाब के गरीब युवकों को बहकाकर उनसे हिंसा और आगजनी की घटनाएं करवाता था। 

सीरियन आतंकियों को कश्मीर भेजने पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया तुर्की : ग्रीस पत्रकार का दावा

एक समय था जब हर मुस्लिम देश किसी भी तरह की मदद के लिए सऊदी अरब की तरफ देखता था, लेकिन इस्लामिक आतंकवाद के चलते अधिकतर मुस्लिम देश आतंकवाद को पनाह देने वालों से दूरी बना रहे हैं। इस बदलते परिवेश में तुर्की विश्व में आतंकवाद को पनाह और संरक्षण के लिए चर्चित पाकिस्तान को हर संभव मदद के लिए आगे आने से, संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि क्या सीरिया और पाकिस्तान की तरह अन्य मुस्लिम देश तुर्की से दूरी बनाने की कोशिश करेंगे। भारत ने विश्व में पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है, जिस कारण IMF से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अंकुश ही नहीं लगा, बल्कि ग्रे लिस्ट में बना हुआ है। 

जैसाकि प्रधानमंत्री ने कुछ समय पूर्व ही स्पष्ट कहा था कि विश्व को केवल आतंकवाद ही नहीं, आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर भी सख्ती करनी होगी। जिस आज विश्व मोदी की बातों को गंभीरता से ले रहा है, तो क्या उस स्थिति में पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों में शुमार होगा?

 
पाकिस्तान की मदद करने के लिए अब तुर्की ने सीरिया के आतंकी समूहों को कश्मीर भेजने का निर्णय लिया है। यह खुलासा ग्रीस के एक मशहूर पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट में पत्रकार ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन पाकिस्तान की मदद के लिए कश्मीर में सीरिया के आतंकियों को भेजने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आतंकी समूहों से बात भी की है।

एंड्रियास माउंटजौरौली का यह लेख ग्रीस की न्यूज वेबसाइट Pentapostagma पर प्रकाशित है। इसमें उन्होंने लिखा है कि सीरियन नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने कुछ दिन पहले ही अपने साथी आतंकियों से कहा है कि तुर्की यहाँ से कश्मीर में अपने कुछ यूनिट्स को तैनात करना चाहता है। 

पत्रकार का दावा है कि उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर नियंत्रण करने वाली सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन है। उनके अनुसार इम्सा का कहना है कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य हथियारबंद गिरोहों से इस बारे में बात कर रहे हैं और कमांडरों से ऐसे लोगों के नाम बताने को कह रहे हैं जो कश्मीर जाना चाहते हैं।

रिपोर्ट से आतंकियों को कश्मीर जाने के लिए 2000 डॉलर की राशि देने की बात भी सामने आई है। आतंकियों को कहा जा रहा है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।

इससे पहले तुर्की ने आर्मीनिया के साथ लड़ाई में खुलकर अजरबैजान का साथ दिया था। इतना ही नहीं, फ्रांस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने भी इस पर खुलासा करते हुए कहा था कि तुर्की ने सीरिया में अपने सहयोगी आतंकी संगठन के लड़ाकों को काराबाख में लड़ाई के लिए तैनात किया था। साथ ही युद्ध के लिए काफी पैसा भी मुहैया करवाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की राष्ट्रपति खुद को मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा नेता बनाना चाहते हैं। वह खुद के कद को बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं। पत्रकार का दावा है कि पाकिस्तान और तुर्की एक दूसरे को सहयोग देकर दूसरे देशों की जमीन कब्जाना चाहते हैं। हाल में ही शील्ड ऑफ मेडेटेरियन युद्धाभ्यास के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान तुर्की पहुँचे थे।

रिपोर्ट कहती हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति पाक की सहायता से ग्रीस की जमीन हथियाने की फिराक में हैं, यही कारण है कि वह कश्मीर के मुद्दे पर उनकी सहायता के लिए आतंकी गुटों को भेजने की योजना बना रहे हैं। 

सऊदी शाहजादे और इजरायल के प्रधानमंत्री की सीक्रेट बैठक से क्यों उड़ गई है पाकिस्तान की नींद?

सऊदी अरब के शाहजादे मोहम्मद बिन सुल्तान और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच इस हफ्ते खुफिया मुलाकात की खबरों से कई इस्लामी देशों में हड़कंप है। मक्का-मदीना की स्थिति और अपनी माली हैसियत के कारण सऊदी अरब इस्लामी देशों का स्वाभाविक सिरमौर माना जाता है। लेकिन, पाकिस्तान समेत ज़्यादातर मुस्लिम देश इजरायल को अपना दुश्मन नंबर एक मानते हैं।

इनकी मौजूदा घोषित नीति इजरायल के साथ कोई संबंध नहीं रखने की है। खबर है कि इस रविवार (नवंबर 22, 2020) की देर शाम प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और शाहजादे मोहम्मद बिल सुल्तान करीब 3 घंटे तक सऊदी अरब के नियोम शहर में खुफिया तौर पर मिले। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो भी इस दौरान वहाँ मौजूद थे। संकेत हैं कि इस ख़ुफ़िया मुलाकात में दोनों देशों के बीच राजनयिक सम्बन्ध कायम करने के साथ साथ ईरान और तुर्की के बारे में भी बातचीत हुई।

अगर इनके बीच कोई खिचड़ी पकती है तो इससे पाकिस्तान का मौजूदा सिरदर्द निश्चित ही और बढ़ जाएगा। पाकिस्तान की तुर्की के साथ नजदीकियों को लेकर सऊदी अरब पहले से ही उससे बेहद नाराज है। इजरायल और सऊदी अरब के रिश्तो में अगर नजदीकियाँ बढ़ती हैं तो पाकिस्तान पूरी तरह से तुर्की की गोद में जा बैठेगा। ऐसा होता है तो बेहद नाजुक आर्थिक बदहाली के दौर से गुजरता हुआ पाकिस्तान, सऊदी अरब से मिलने वाली सहायता और आमदनी से हाथ धो बैठेगा।

पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया के कई इस्लामी देश इजराइल के साथ राजनयिक संबंध कायम कर चुके हैं। इनमें सूडान, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन शामिल है। अमीरात और इजरायल के बीच पहली उड़ान सऊदी अरब से ऊपर उड़ कर गई। इससे पहले ऐसी सोच भी मुमकिन नहीं थी। पिछले महीने ही पहला समुद्री व्यापारिक जहाज़ इजरायल से संयुक्त अरब अमीरात पहुँचा। पश्चिम एशिया का यह नया गठजोड़ दरअसल एक तरफ तुर्की के खिलाफ है तो दूसरी तरफ ईरान के भी खिलाफ है।

तुर्की के महत्वाकांक्षी राष्ट्रपति एर्दोआँ इन दिनों खुद को इस्लामी देशों का नेता बनाने की जोड़तोड़ में लगे हैं। पिछले कुछ समय से एक के बाद एक उन्होंने कई कदम उठाए हैं, जो कि तुर्की को इस्लामी कट्टरपंथ की तरफ ले जाने वाले हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके इस्लामी जनमानस सऊदी अरब की जगह तुर्की की ओर झुकने लगेगा। इसका ताजातरीन उदाहरण फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ एर्दोआँ के बयान हैं। आइए, सऊदी अरब और इजरायल की सीक्रेट बैठक से पाकिस्तान की नींद क्यों उड़ी है, ये समझते हैं।

स्कूल में चार्ली हेब्दो के कार्टून दिखाए जाने के बाद एक कट्टरपंथी मुस्लिम युवक ने फ़्रांस में उस शिक्षक की हत्या कर दी थी। इसके बाद फ़्रांस ने अपने देश में आतंकवाद और इस्लामी कट्टरपंथ के खिलाफ कई कदम उठाए। एर्दोआँ ने इस आतंकवादी घटना की निंदा करने के बजाय मैक्रों के कदमों को ही पागलपन  करार दिया था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भी इसमें पीछे नहीं रहे। उनकी सरकार ने फ्रांस के खिलाफ कई आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कीं।

पाकिस्तान के एक केंद्रीय मंत्री ने तो ट्वीट करके राष्ट्रपति मैक्रों को नाज़ी घोषित कर दिया। पिछले हफ्ते की इस घटना के बाद फ्रांस ने बाकायदा इस पर अपना आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है। सऊदी अरब मानता है कि इस्लामी देशों का नेतृत्व करने का नैसर्गिक अधिकार सिर्फ उसके पास है। उधर तुर्की प्राचीन ऑटोमन साम्राज्य की तर्ज़ पर एक बार फिर अपना दबदबा कायम करने की इच्छा रखता है।

इस उद्देश्य से कई टीवी सीरियल तुर्की में बनाए गए। ये वहाँ प्रचलित भी हुए। एर्दोआँ और तुर्की का ये रवैया सऊदी अरब को बेहद नागवार गुजरा है। उधर इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान तुर्की का एक तरह से पिछलग्गू बन गया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के पाकिस्तान से नाराज होने की सबसे खास वजह यही है। पाकिस्तान से सऊदी अरब की नाराजगी का आलम ये है कि कुछ समय पहले उसने पाकिस्तान को दिए गए कर्जे के 2 खरब डॉलर वापस देने के लिए कहा।

इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ने भी ऐसा ही किया। इन दोनों देशों ने पाकिस्तान को कर्जे पर तेल देने की सुविधा भी वापस ले ली। यहाँ तक कि जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा उन्हें मनाने के लिए सऊदी अरब गए तो कोई छह घंटे इंतज़ार कराने के बाद शाहजादे मोहम्मद बिन सुलतान ने उनसे मुलाकात नहीं की। पिछले ही हफ़्ते संयुक्त अरब अमीरात में पाकिस्तान से आने वालों को कामकाज और पर्यटक वीजा देने पर भी रोक लगा दी है।

स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि जो पाकिस्तानी संयुक्त अरब अमीरात में पहले से काम कर रहे हैं, उनकी भी तकलीफें काफी बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले पाकिस्तानी हर साल कोई 9 खरब डॉलर कमाकर अपने देश भेजते हैं। इनमें थोड़ी भी कटौती पाकिस्तान की पहले से ही लड़खड़ा रही अर्थव्यवस्था के लिए ऐसी परेशानी बन जाएगी, जिसका घाटा पूरा करने के लिए उसे और क़र्ज़ लेना पड़ेगा। पाकिस्तान पहले से ही गर्दन तक क़र्ज़ में डूबा हुआ है और उसे इसकी ब्याज चुकाने में भी दिक्कत हो रही है।

सवाल है कि आखिर मोहम्मद बिल सुल्तान पाकिस्तान से इतने नाराज क्यों हुए ? देखा जाए तो करीब 14 महीने पहले तक दोनों देशों के सम्बन्ध बेहद मधुर थे। यहाँ तक कि सितम्बर 2019 में जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74 वीं बैठक को सम्बोधित करने के लिए न्यूयॉर्क गए थे तो शाहजादे ने अपना निजी विमान उन्हें यात्रा के लिए बड़े आग्रह के साथ दिया था। उससे पहले फरवरी 2019 में जब शाहजादे पाकिस्तान गए थे तो इमरान खान हवाई अड्डे से खुद उनकी कार चला कर ले गए थे।

अर्थात, संयुक्त राष्ट्र महासभा में इमरान खान का भाषण होने तक स्थितियाँ बहुत अच्छी थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान इमरान खान ने खुद को ऐसे पेश किया मानो वे इस्लामी दुनिया का नेतृत्व स्वयं करना चाहते हैं। इस्लामोफोबिया पर भी उन्होने बड़े बोल बोले थे। अपनी इसी यात्रा के दौरान इमरान खान ने तुर्की और मलेशिया के साथ मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक टीवी चैनल शुरू करने की घोषणा कर दी थी।

उनके भाषण और टीवी चैनल की घोषणा से मोहम्मद बिन सुल्तान बहुत नाराज हो गए। यहाँ तक कि न्यूयॉर्क से अपने निजी जहाज को उन्होंने बीच हवा से ही वापस बुला लिया था। इमरान खान उस समय उसमें बैठ कर पाकिस्तान रवाना हो चुके थे। बाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को एक कमर्शियल फ्लाइट से वापस लौटना पड़ा था। इसके जरिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान को एक संकेत देने की कोशिश की थी।

लेकिन, इमरान खान ने संभवत इसे अपना व्यक्तिगत अपमान मान लिया। वे अंग्रेजी की उस कहावत को भूल गए, जिसमें कहा गया है  कि ‘माँगने वाले ऊँचे ख्वाब नहीं संजोया करते अथवा भिखारियों की महत्वाकांक्षाएँ नहीं हुआ करतीं।’ फिर तो एक के बाद एक इमरान ने कई कदम ऐसे उठाए, जो उन्होंने उन्हें तुर्की के और करीब ले जाते गए। उन्होंने पाकिस्तान में तुर्की में ऑटोमन साम्राज्य को महिमामंडित करने वाले सीरियल्स को दिखाना शुरू किया।

व्यक्तिगत तौर पर उन्होंने इसका खूब उल्लेख किया। उन्होंने तुर्की और मलेशिया के साथ मिलकर ओआईसी के खिलाफ एक संगठन बनाने की असफल कोशिश भी की। हद तो तब हुई, जब इसी अगस्त में पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह अहमद कुरैशी ने सरेआम कश्मीर के मामले को लेकर सऊदी की सार्वजनिक निंदा कर दी। इसे सऊदी अरब ने पाकिस्तान की बड़ी हिकामत माना। कुल मिला कर इन सब से सऊदी अरब की नाराजगी तुर्की और पाकिस्तान से लगातार बढ़ती ही चली गई।

यों भी पश्चिम एशिया में सऊदी अरब की तुर्की से प्रतिद्वंद्विता जग जाहिर है। इसी तरह ईरान के साथ भी सऊदी अरब के संबंध बेहद तल्ख हैं। ईरान एक शिया देश है तो सऊदी अरब सुन्नी देश। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सऊदी अरब, इजरायल और अमेरिका तीनों ही एक बड़ा खतरा मानते हैं। इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से पहले उनका देश तुर्की, सऊदी अरब और ईरान तीनों के बीच एक संतुलन बनाकर चलने की कोशिश करता था।

यह उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ था। इमरान खान ने अपनी मूर्खताजनित महत्वाकांक्षा और अहंकार में बरसों से बनाए इस नाज़ुक संतुलन को तोड़ दिया। इसी बीच भारत ने खाड़ी के देशों और इजरायल के साथ अपने संबंधों को और बेहतर बनाया। साथ ही इन देशों को ये भी बताया कि पाकिस्तान संचालित आतंकवाद खुद इन इस्लामी देशों के लिए भी कैसे गंभीर खतरा बन सकता है। अब आलम यह है कि पाकिस्तान की स्थिति साँप-छछूंदर जैसी हो गई है।

इमरान खान की हरकतों ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा है। अपने भारत विरोध में वे पश्चिम एशिया के उन देशों से भी दूर होते जा रहे हैं, जो इस्लामी देश होने के नाते परंपरागत तौर पर पाकिस्तान के बेहद करीब थे। इजरायल और सऊदी अरब के साथ आने के संकेत बिल्कुल स्पष्ट और साफ हैं। इजराइल और सऊदी अरब एक साथ अमेरिका से मिलकर तुर्की की नई पैदा हुई महत्वाकांक्षाओं को उसकी जगह दिखाना चाहते हैं, जिसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ना तय है।

साथ ही वे ईरान के भी पंख कुतरना चाहते हैं। मगर इससे ऐसा लगता है कि पाकिस्तान पर जैसे पहाड़ ही टूट पड़ा हो। पहले से ही राजनीतिक और आर्थिक रूप से बदहाल पाकिस्तान इन नई परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं है। अब उसके पास पूरी तरह से चीन का एक क्लाइंट स्टेट बन जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। आने वाले समय में पाकिस्तान के लिए स्थिति बद से बदतर हो सकती है। ठीक ही कहते हैं कि ‘ना खुदा ही मिला न विसाले सनम, ना इधर के रहे ना उधर के रहे।’