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‘कांग्रेस ने बिना टेंडर थाली में सजाकर विझिंगम बंदरगाह अडानी को दे दिया था’: निर्मला सीतारमण ने राहुल गाँधी को याद दिलाई

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि राहुल गाँधी अडानी का नाम लेकर भाजपा पर आरोप लगाते हैं, लेकिन सच यह है कि कांग्रेस ने बिना किसी टेंडर के विझिंगम बंदरगाह अडानी को दिया था। सीतारमण ने कहा है कि भाजपा ने अडानी को कभी अनुचित लाभ नहीं दिया। राहुल गाँधी प्रधानमंत्री पर झूठे आरोप लगाकर बार-बार अपराध कर रहे हैं।

सीतारमण ने 6 अप्रैल 2023 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कहा, “राहुल गाँधी को लगता है कि अडानी को सभी चीजें दे दी गई हैं। यह सच नहीं है। सच्चाई यह है कि कांग्रेस ने थाली में सजाकर विझिंगम बंदरगाह अडानी को दे दिया था। यह किसी टेंडर के आधार पर नहीं दिया गया। अब वहाँ कांग्रेस की सरकार नहीं, बल्कि सीपीएम की सरकार है। उन्हें इस बारे में सवाल पूछने और केरल सरकार से उस आदेश को रद्द करने की माँग करने से किसने रोक रखा है?”

निर्मला सीतारमण ने आगे कहा, “मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि राहुल गाँधी प्रधानमंत्री पर निराधार आरोप लगाकर बार-बार अपराध कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने साल 2019 में भी ऐसा ही किया था। अब फिर से वही सब कर रहे हैं।”

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है, “साल 2013 में जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदेश में थे तब राहुल गाँधी ने एक अध्यादेश को बकवास बताते हुए फाड़ दिया था और उसे कूड़ेदान में फेंक दिया था। राजस्थान में भी अडानी को पूरा सोलर पावर प्रोजेक्ट दे दिया गया। राहुल गाँधी सोलर प्रोजेक्ट को रद्द करने से कौन रोक रहा है? वह मोदी-अडानी भाई-भाई चिल्लाते हैं, राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं कर रहे हैं?”

सीतारमण ने राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए कहा, “वह छत्तीसगढ़ में भी ऐसा क्यों नहीं कह पा रहे हैं? अगर साठ-गाँठ वाला पूँजीवाद कहीं हो रहा है तो यह सिर्फ कांग्रेस की सत्ता वाले राज्यों में ही हो रहा है। इस पर राहुल गाँधी एक शब्द भी नहीं बोलेंगे। अगर वह प्रधानमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं तो वे जाएँ और अपनी ही सरकारों के आदेशों को रद्द करें।”

वित्त मंत्री ने कहा है कि पहले तो वे झूठे आरोप लगाते हैं फिर उसे 100 बार दोहराते हैं। इसके बाद भगवान से प्रार्थना कर इसका लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि साल 2019 में राफेल को लेकर प्रधानमंत्री पर दिए गए अपने बयानों के लिए राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट में माफी माँगनी पड़ी थी।

निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि राफेल पर माफी माँगने से पहले राहुल गाँधी को आरएसएस के खिलाफ गलत बयानबाजी करने के लिए लिखित में माफी माँगनी पड़ी थी। उन्होंने कहा, “अब आज कह रहे हैं कि वह गाँधी हैं, सावरकर नहीं। क्या राहुल गाँधी यह भूल चुके हैं कि वो पहले दो बार माफी माँग चुके हैं।”

PTI की फर्जी पत्रकारिता : कुल एक्टिव केस और एक्टिव केस के प्रतिशत में अंतर समझ नहीं आता

न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया यानि पीटीआई भी लिबरल गैंग का हिस्सा बन गई है और केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए हर हथकंडा अपना रही है। ताजा घटनाक्रम में पीआईटी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान को गलत ढंग से रिलीज किया जिससे लोगों में कंफ्यूजन पैदा हो गया। दरअसल, प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 की स्थिति पर मुख्यमंत्रियों से बात करते हुए कहा कि Active cases का प्रतिशत कम हुआ है, Recovery rate बढ़ा है, लेकिन पीटीआई ने इसे पीएम मोदी के नाम से कोविड-19 के केसेस में कमी आई लिखकर ट्वीट कर दिया। PTI का ट्वीट यह है, हालांकि पीटीआई द्वारा बाद में इस ट्वीट को डिलिट कर दिया।
सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ PM मोदी की आज मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से संबंधित आँकड़ों को लेकर क्या कहा, यह आप नीचे के आधिकारिक ट्वीट में देख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोरोना से संबंधित एक्टिव केस का प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक्टिव केस कम हो रहा है। एक्टिव केस का प्रतिशत कम होना और एक्टिव केस का कम होना – दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन शायद PTI को यह गणित नहीं मालूम।
PTI को यह गणित नहीं मालूम, यह आप उसके ट्वीट से समझ सकते हैं। PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपने ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट ऊपर देखिए।
अब बात करते हैं आँकड़ों की। इसके लिए थोड़ा ग्राफ देखा जाए। समझा जाए कि एक्टिव केस बढ़ रहा है या घट रहा है? या फिर एक्टिव केस का प्रतिशत बढ़ रहा है या घट रहा है?

गणित अच्छा हो तो ऊपर का ग्राफ देख कर समझ सकते हैं कि एक्टिव केस का प्रतिशत हर दिन घट रहा रहा है। लेकिन PTI को इससे क्या मतलब! उसे फेक न्यूज फैलाने से मतलब था, और वो काम उसने बखूबी कर दिया।
देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया है कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है।
कुछ दिनों पहले PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए थे। और तो और, उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा था। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।
ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है। पीटीआई पहले भी कई बार खबरों को गलत तरीके से रिलीज कर सरकार को बदनाम करती रही है। ये हैं पीटीआई की कुछ करतूतें।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा फीस को लेकर फैलाई भ्रामक खबरें
पिछले साल पीटीई ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए सीबीएसई परीक्षा फीस बढ़ाए जाने की खबर खबर रिलीज की थी, जिसके बाद पूरे देश में भ्रम फैल गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई भाषा की ओर से जारी इस खबर में कहा गया है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा शुल्क में 24 गुना वृद्धि की है। अब इस वर्ग के छात्रों को 50 रुपये के बजाय 1200 रुपये का शुल्क देना होगा। सामान्य वर्ग के छात्रों के शुल्क में भी दो गुनी वृद्धि की गई है और अब उन्हें 750 रुपये के स्थान पर 1500 रुपये देने होंगे। यदि कोई छात्र अतिरिक्त विषय लेता है तो उसे 300 रुपये और चुकाने होंगे।
पीटीआई की खबर से उलट सच्चाई यह थी कि दिल्ली को छोड़कर देशभर को एससी-एसटी छात्रों को पहले 750 रूपये परीक्षा फीस देने होते थे। पांच साल से फीस में कोई वृद्धि नहीं होने के कारण सीबीएसई ने सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए फीस 750 रुपये से बढ़ा कर 1500 रुपये कर दिए, जबकि एससी/एसटी छात्रों के लिए फीस 750 रुपये से बढ़ाकर सिर्फ 1200 रुपये किए हैं।
वित्त मंत्री के बयान को तोड़-मरोड़कर बनाई Fake News
न्यूज एजेंसी  PTI ने इसके पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के राज्यसभा के प्रश्नकाल में दिए गये बयान पर फेक खबर चलाई थी। 2 जुलाई, 2019 को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की आर्थिक स्थिति के बारे जानकारी देते हुए देश के अच्छे आर्थिक संकेतों का उल्लेख किया। वित्त मंत्री के बयान से जब PTI को कोई चासनी वाली खबर नहीं मिली तो उसने अपनी खबर की टीआरपी बढ़ाने के लिए हेडलाइन में ही चासनी डाल दी। हेडलाइन पर चासनी पड़ते ही, सभी समाचार पत्र और चैनल इस खबर पर चीटियों की तरह चिपक गये। सबसे पहले NDTV ने वित्त मंत्री के बयान की खबर को अपने वेबसाइट पर डाला-

वित्तमंत्री ने खबर को Fake बताया
इस खबर की वही हेडलाइन थी, जो PTI ने दी थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में अपने पूरे बयान के दौरान नोटबंदी पर कोई बात नहीं कही थी, लेकिन फिर भी PTI और NDTV ने खबर से हटकर, खबरों में टीआरपी लाने के लिए नोटबंदी की हेडलाइन दी और लिखा-Demonetization has no effect on Indian Economy-Nirmala Sitharaman, इस खबर के प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर आते ही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सवाल खड़ कर दिए-

कांग्रेसी अखबार ‘नवजीवन’ ने झूठी हेडलाइन पर पूरी खबर गढ़ दी
NDTV और PTI की खबरों को आधार बनाकर कांग्रेसी समाचार पत्र ‘नवजीवन’ ने हेडलाइन ही नहीं पूरी खबर नोटबंदी पर बना दिया –

नवजीवन ने पीटीआई की केवल हेडलाइन पढ़कर ही पूरी खबर को अपने मन मुताबिक गढ़ दिया। यह ऐसी खबर थी, जिसका कोई आधार नहीं था, जिसके कोई सबूत नहीं थे, फिर भी सरकार के खिलाफ एजेंडा खड़ा करने के लिए हेडलाइन खड़ी कर दी गई।
‘फेक न्यूज’ एजेंसी पीटीआई
उत्तर प्रदेश में भाजपा की योगी सरकार ने 11 जुलाई 2017 को विधानसभा में 2017-18 का बजट पेश किया। इस बजट पर रिपोर्टिंग करते हुए पीटीआई ने समाचार दिया कि “उत्तर प्रदेश की सरकार ने सेकेंडरी और उच्च शिक्षा के लिए पूर्व सरकार की तुलना में बजट में कटौती कर दी है। पूर्व की अखिलेश यादव की सरकार ने 2016-17 में सेकेंडरी शिक्षा के लिए 9,990 करोड़ रुपये दिये थे, जबकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 9,414 करोड़ रुपये की कटौती करके मात्र 576 करोड़ रुपये दिये हैं। इसी तरह से उच्च शिक्षा के बजट में भी कटौती की गई है। पिछले बजट में उच्च शिक्षा को 2,742 करोड़ रुपये दिये गये थे, जबकि इस साल के बजट में 2469.73 करोड़ रुपये की कटौती करते हुए, मात्र 272.77 करोड़ रुपये ही दिए गये हैं।”

योगी सरकार की ओर से शिक्षा बजट में इतनी भारी कटौती सचमुच एक बड़ी खबर थी। यह सभी समाचार पत्रों और टेलीविजन न्यूज चैनलों के लिए टीआरपी वाली स्टोरी भी थी। पीटीआई की इस खबर को आंख मूंद कर सभी ने अपने-अपने समाचार पत्र और चैनलों में बड़ी खबर बनाया।
इसी फेक न्यूज को आधार बनाकर, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया-
इसी तरह से पीटीआई की एक फेक न्यूज को सोशल मीडिया पर सही मानकर प्रतिक्रिया दी जाने लगी।

पीटीआई ने कैसे बनायी ‘फेक न्यूज’
अफसोस की बात यह है कि पीटीआई की खबर होने के कारण किसी भी अखबार या न्यूज चैनेल ने इसकी सत्यता परखने की कोशिश नहीं की। जब इसकी सत्यता की परख की गई तो पता चला कि यह एक फेक न्यूज थी। वास्तव में, पीटीआई ने उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा पेश बजट के कुछ अंशों के आधार पर ही यह रिपोर्ट की थी। अगर यह रिपोर्ट बजट अनुमान के कागजों को ठीक ढंग से पढ़कर बनाई गयी होती तो पता चलता कि योगी सरकार ने शिक्षा के लिए बजट में कमी नहीं बल्कि 34 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। अखिलेश यादव की सरकार ने 2016-17 में जहां 46,442 करोड़ रुपये शिक्षा के लिए दिये थे वही 2017-18 में योगी आदित्यनाथकी सरकार ने 62, 351 करोड़ रुपये दिए हैं।

जब इस फेक न्यूज पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधिकारिक बयान दिया और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी, तो पता चला कि यह फेक खबर पीटीआई ने दी है। इसके बाद सरकार की खिंचाई करने वालों ने पीटीआई के इस फेक न्यूज पर प्रतिक्रिया ना देकर चुप्पी साध ली।
जनता के सामने सच लाने वाले पत्रकार और मीडिया संस्थान जब खबरों को जान- बूझकर तोड़ते मरोड़ते हैं तो Fake Journalism की जड़ें ही मजबूत होती हैं। ये पत्रकार और मीडिया संस्थान, देश और देश की प्रजातंत्रिक व्यवस्थाओं के साथ विश्वासघात करते हैं, जिसकी कीमत देश की जनता और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को चुकानी पड़ती है।

क्यों जरूरी है अखबारी कागज पर टैक्स लगाना

News Printन्यूज प्रिंट यानी अखबार के कागज पर लगाए गए आयात शुल्क को वापस नहीं लिया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 23 को इस संबंध में उठाई गई मांग को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि आयातित न्यूज प्रिंट पर लगाए गए 10 प्रतिशत सीमा शुल्क से घरेलू कागज उद्योग को अच्छे अवसर उपलब्ध होंगे।
राज्यसभा में वित्त विधेयक 2019 पर चर्चा के दौरान निर्मला सीतारमण का कहना था कि अभी तक न्यूज प्रिंट का आयात सस्ता होने की वजह से घरेलू कागज निर्माता कंपनियों को खरीदार नहीं मिल रहे थे। उनका यह भी कहना था कि अपने देश में न्यूज प्रिंट के उत्पादन की क्षमता है, लेकिन फिर भी इसे बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। इसके अलावा विदेशी बाजारों में पिछले कुछ महीनों में न्यूज प्रिंट की कीमतों में काफी कमी आयी है। इसका दाम 700 डॉलर प्रति टन से कम होकर 500 डॉलर प्रति टन पर आ गया। 
विश्व बाजार में न्यूज प्रिंट के दाम घटने से भारतीय न्यूज प्रिंट निर्माताओं को खरीदार नहीं मिल रहे थे। इससे वे काफी प्रभावित हो रहे थे। वित्त मंत्री का कहना था, 'एक तरफ तो हम ‘मेक इन इंडिया’ की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफअप्रत्यक्ष रूप से आयात की अनुमति दे रहे हैं, इसका कोई मतलब नहीं है। जब हम भारतीय उद्योग को गति देने की कोशिश कर रहे हैं तो ऐसा कदम जरूरी हो जाता है।’ 
सीतारमण वाईएसआर-कांग्रेस के नेता वी विजयसाई रेड्डी के सवाल का जवाब दे रही थी। रेड्डी ने चर्चा के दौरान कहा था कि शुल्क लगाने से छोटे अखबार प्रभावित होंगे जो पहले से विज्ञापन आय में कमी से जूझ रहे हैं। इससे पहले इंडियन न्यूजपेपर सोसायटी (आईएनएस) ने सरकार से अखबारों और पत्रिकाओं में उपयोग होने वाले कागज पर 10 प्रतिशत सीमा शुल्क के बजट प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि समाचार पत्र और पत्रिका के प्रकाशक पहले से ही कई तरह के वित्तीय दबाव को झेल रहे हैं। विज्ञापन आय कम हुई है, लागत बढ़ी है ऊपर से तेजी से फैलते डिजिटल उद्योग से भी इस उद्योग पर दबाव बढ़ा है।

वित्त मंत्रालय ने पत्रकारों पर यूं कसा 'शिकंजा'

Financeकभी बीजेपी की धाकड़ प्रवक्ता रहीं निर्मला सीतारमण एक समय पत्रकारों की फेवरेट हुआ करती थीं, लेकिन अब वही पत्रकार और उनका बेतकल्लुफाना रवैया मैडम को अखरने लगा है। क्योकि अब वो आम प्रवक्ता नहीं रहीं, पहले देश की रक्षा मंत्री बनीं और अब वित्त मंत्री बन गईं हैं। उनके पहले बजट पर जब पत्रकारों ने सवाल उठाने शुरु किए तो वो शायद नाराज हो गईं। कई पत्रकारों ने ट्विटर पर लिख दिया कि नॉर्थ ब्लॉक में जहां फाइनेंस मिनिस्ट्री का दफ्तर है, वहां पत्रकारों की एंट्री बैन कर दी गई है तो उन्होंने एक फरमान जारी किया है।
इस नोटिस में लिखा है कि एंट्री बैन की खबर गलत है, लेकिन अब PIB एक्रिटेड पत्रकार भी बिना अपॉइंटमेंट के अंदर नहीं जा सकते। यानी अब तक जो पत्रकार ऐसे ही किसी अधिकारी सोर्स से खबर निकाल लेते थे, अब वो अंदर जा नहीं पायेंगे। अधिकारी वैसे भी अपॉइंटमेंट देते ही कहां है,और दिया तो वो सब कागजों में दर्ज हो जायेगा और उसकी वजह बतानी पड़ेगी। यानी अनऑफिशियल ख़बरें मिलना बन्द हो जाएंगी। पत्रकार इस फरमान की तुलना इमरजेंसी के दौर के फरमानों से कर रहे हैं।
पत्रकारों को खुश करने के लिए वित्त मंत्री महोदया ने एक ये काम किया है कि बाहर एक वेटिंग रूम बनवा दिया है, जिसमें पानी, चाय, काफी और मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग की सुविधा मिलेगी एसी के साथ। हालांकि पत्रकार समझ रहे हैं कि ये लॉलीपॉप उन्हें दफ्तर और अपने अधिकारियों, कर्मचारियों से दूर रखने की वजह से किया गया है। 
कुल मिलाकर निर्मला सीतारमण ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि उनके विभाग से भी खबरें निकालना आसान नहीं होगा, चाहे इसके लिए उन्हें अपने करीबी पत्रकारों की भी नाराजगी भी क्यों न मोल लेनी पड़े। 

बजट पर प्रतिक्रियाएँ : नयी बोतल में पुरानी शराब : कांग्रेस

बजट पर आया कांग्रेस का रिएक्शन, कहा- नयी बोतल में पुरानी शराब
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी- (फाइल फोटो)
कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा जुलाई 5 को पेश बजट को ‘‘नयी बोतल में पुरानी शराब'' करार देते हुए दावा किया कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और सिर्फ पुराने वादों को दोहराया गया है. लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''''इसमें कुछ भी नया नहीं है. पुरानी बातों को ही दोहराया गया है. यह नयी बोतल में पुरानी शराब है.'' उन्होंने कहा, ‘‘वे न्यू इंडिया की बात कर रहे हैं, जबकि कोई नयी पहल नहीं की गई है. पेट्रोल और डीजल पर उप कर लगा दिया गया. वे एक ऐसे भारत को पेश कर रहे हैं जो सबके लिए हसीन ख्वाब जैसा है, लेकिन हकीकत में कृषि और अर्थव्यवस्था तथा दूसरे क्षेत्रों को लेकर जो पहले वादे किए गए थे उसमें कुछ नया नहीं किया गया.''
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने कहा कि इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ नहीं है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘ ‘गांव-गरीब व किसान' हाशिये पर. क्या थोथे शब्दों से कृषि संकट हल होगा? न किसान की आय दुगनी करने का रास्ता, न न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) का वादा, अकाल-सूखे से लड़ने का कोई उपाय, न ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संकट का सुधार. केवल डीज़ल पर दो रुपये का अतिरिक्त भार.''
गौरतलब है कि ‘‘गांव, गरीब और किसान'' तथा प्रत्येक नागरिक के जीवन को ‘‘अधिक सरल'' बनाने के लक्ष्य के साथ पेश किए गये नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मीडिया, विमानन, बीमा और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को उदार करने का प्रस्ताव किया गया है.
बजट में बुनियादी आर्थिक और सामाजिक ढांचा के विस्तार, पेंशन और बीमा योजनाओं को आम लोगों की पहुंच के दायरे में ले जाने के विभिन्न प्रस्ताव किए गए हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए वित्त वर्ष 2019-20 के अपने बजट भाषण में कहा कि हालिया चुनाव में एक आकर्षक और मजबूत भारत की उम्मीदें लहरा रही थीं और लोगों ने एक ऐसी सरकार को चुना जिसने काम कर के दिखाया.
Budget 2019: 'न खाता न बही, जो निर्मला कहें वो सही ': बजट पर योगेंद्र यादव ने कसा तंज'न खाता न बही, जो निर्मला कहें वो सही ': योगेन्द्र यादव 
एक परंपरा से अलग हटते हुए बजट दस्तावेज को ब्रीफकेस में न लेकर एक लाल रंग के कपड़े में रखा और उसके ऊपर अशोक चिन्ह लगा था. इस पर सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार के. सुब्रमण्यन का कहा, ''वित्त मंत्री ने लाल रंग के कपड़े में बजट दस्तावेज को रखा है. यह एक भारतीय परंपरा है. यह पश्चिमी विचारों की गुलामी से निकलने का प्रतीक है. यह बजट नहीं है, 'बही खाता' है.'' इस बजट को लेकर स्वराज इंडिया के संस्थापक व चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है.
योगेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ''मैं तो हैरान हूं, ये कैसी बजट स्पीच है. अभी पूरी बजट स्पीच हाथ मे नहीं आई, लेकिन बजट में कहीं इस बात का ज़िक्र नही की किस मद में कितना.'' उन्होंने के. सुब्रमणयन के बही खाता वाले बयान पर तंज कसते हुए कहा, ''बजट में ना खाता न बही, जो निर्मला कहें वो सही. जीरो बजट फार्मिंग की बात की लेकिन ये जीरो बजट स्पीच है. किसानों को उम्मीद थी लेकिन, सूखे का ज़िक्र नहीं. बटाईदार, ठेके पर खेती करने वालों का कोई जिक्र नहीं.''
देश की पहली पूर्ण कालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में अपना प्रथम बजट पेश करते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार का मकसद हमारे नागरिकों के जीवन को अधिक सरल बनाना है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान पर दिये जाने वाले जोर की प्रतिध्वनि वित्त मंत्री के बजट भाषण में भी सुनाई दी. उन्होंने कहा, ‘‘यह सूचना देते हुए प्रसन्न एवं संतुष्ट हूं कि भारत को दो अक्तूबर 2019 को खुले में शौच करने से मुक्त घोषित किया जाएगा.''

बीजेपी की केन्द्र सरकार द्वारा बजट को हर मामले में व हर स्तर पर लुभावना बनाने की पूरी कोशिश की गई है लेकिन देखना है कि इनका यह बजट जमीनी हकीकत में देश की आमजनता के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है जबकि पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, बदतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवा से पीड़ित व परेशान है।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ 
बजट 2019 :  प्रचंड बहुमत पाने वाली मोदी सरकार ने आपको क्या दिया, 10 प्वाइंट्स में जानेंमोदी सरकार 2.0 का पहला बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश कर दिया है। दो घंटे 10 मिनट के बजट भाषण में जहां इनकम टैक्स के स्लैब को नहीं बदला गया है। वहीं, पेट्रोल डीजल पर एक रुपए की कस्टम ड्यूटी लगाई गई है। इस बजट पर सोशल मीडिया पर कई रिएक्शन सामने आए हैं। 
सोशल मीडिया पर बजट के बाद बजट 2019 हैशटैग ट्रेंड करने लगा। इसके अलावा निर्मला सीतारमण और बजट फॉर न्यू इंडिया ट्रेंड करने लगा। इन हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर कई मीम शेयर किए हैं।सोशल मीडिया पर सागर नाम के एक यूजर ने लिखा है- पैन कार्ड और आधार कार्ड की अदला-बदली। मतलब जो चाचा है वही भतीजा है, और वो भतीजा है वही चाचा है। वहीं, एक अन्य यूजर ने फिर हेरा फेरी फिल्म की फोटो का मीम शेयर किया है। 
पीएम मोदी और अमित शाह ने कही ये बात 
बजट पेश होने के बाद पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने भी कमेंट किया है।  भाजपा अध्यक्ष एवं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- आम बजट किसानों को समृद्ध और गरीब को सम्मानपूर्ण जीवन व्यतीत करने में सहायक होगा।
Finance Minister @nsitharaman ji presents a which lays the foundation of an inclusive & progressive nation, whose rise is powered by the hardwork of 130 crore Indians. The budget gives wings to India’s farmers, youngsters, women and poor to fulfil their dreams.









After hearing the budget people be like.....



Middle class person seeing the

Pan Card and Aadhar card will now be interchangeable. Matlab ki jo chacha hai wahi bhatija hai, aur jo bhatija hai wahi chacha hai.
पीएम मोदी ने बजट आम बजट को ‘देश को समृद्ध और जन-जन को समर्थ’बनाने वाला करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि इस बजट में आर्थिक सुधार, नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के साथ गांव एवं गरीब का कल्याण भी है।
बजट की अहम बातें 
बजट में पेट्रोल-डीजल और सोने चांदी के दाम बढ़ने जा रहे हैं। तेल के दामों के उपकर यानी सेस में 1 रुपए बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है।
lo1s6po8क्या सस्ता हुआ और किसके बढ़े दाम
गांव, गरीब, किसान और प्रत्येक नागरिक के जीवन को अधिक सरल बनाने के लक्ष्य के साथ पेश किए गये नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले आम बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मीडिया, विमानन, बीमा और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को उदार करने का प्रस्ताव किया गया है बजट में बुनियादी आर्थिक और सामाजिक ढांचा के विस्तार, पेंशन और बीमा योजनाओं को आम लोगों की पहुंच के दायरे में ले जाने के विभिन्न प्रस्ताव किए गए हैं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए वित्त वर्ष 2019-20 के अपने बजट भाषण में कहा कि हालिया चुनाव में एक आकर्षक और मजबूत भारत की उम्मीदें लहरा रही थीं और लोगों ने एक ऐसी सरकार को चुना जिसने काम करके दिखाया
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में पेट्रोल और डीजल पर उपकर में प्रति लीटर एक रुपये की वृद्धि करने की घोषणा की इसके साथ ही सोने पर सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया गयासीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए कहा कि दो करोड़ से पांच करोड़ रुपये और पांच करोड़ रुपये से अधिक की कर योग्य आय वाले करदाताओं पर अधिभार बढ़ाया गया है
साथ ही उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपये से ऊपर का कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों में डिजिटल लेनदेन पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क नहीं लगेगा बैंक खाते से एक करोड़ रुपये से अधिक की निकासी पर दो प्रतिशत की दर से टीडीएस लगाने की घोषणा की है वित्त मंत्री ने कहा कि इस वर्ष चरणबद्ध रूप से इलेक्ट्रॉनिक विधि से कर रिटर्न के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसमें व्यक्ति को अधिकारी के सामने नहीं आना पड़ेगा(एजेंसीज इनपुट्स)