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क्या भारतीय सेना ने पीओके में फिर की सर्जिकल स्ट्राइक?

                                                                                                        प्रतीकात्मक फोटो, साभार: एचटी
क्या पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर (PoK) में भारतीय सेना ने फिर से सर्जिकल स्ट्राइक की है। यह सवाल 22 अगस्त 2023 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट से खड़ी हुई है। इसके मुताबिक स्पेशल फोर्स के कमांडो ने नियंत्रण रेखा (LOC) पार कर पीओके में कई आतंकियों को ढेर किया। आतंकी लॉन्च पैड तबाह कर दिए।

दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि 19 अगस्त की रात यह सर्जिकल स्ट्राइक हुई। भारत सेना के स्पेशल फोर्स के 12 से 15 कमांडो ने राजौरी के तरकुंडी सेक्टर और पुंछ के भिंभर गली से रात के समय पैदल एलओसी पार की। पीओके में करीब ढाई किलोमीटर भीतर घुसकर कोटली जिला के नकयाल में आतंकियों के 4 लांचिंग पैड को तबाह कर दिया। इसमें कम से कम 7 से 8 आतंकवादी भी मारे गए।

हालाँकि रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में इस रिपोर्ट का खंडन किया है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि कोई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ नहीं की गई। लेकिन भारत ने पाकिस्तान की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया है। मंत्रालय के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के बालाकोट सेक्टर से आतंकवादियों का समूह घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा था। सैनिकों ने सोमवार (21 अगस्त) की सुबह दो आतंकवादियों को बालाकोट सेक्टर के हमीरपुर क्षेत्र में खराब मौसम और ऊबड़-खाबड़ जमीन का इस्तेमाल कर एलओसी पार करने की कोशिश करते हुए देखा था।

मंत्रालय के बयान के मुताबिक, “कई खुफिया एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिले खुफिया इनपुट से पता चला है कि बालाकोट सेक्टर में आतंकवादियों की मौजूदगी है और ये नियंत्रण रेखा पार करने का इंतजार कर रहे थे। इन सूचनाओं के आधार पर निगरानी शुरू की गई। इस दौरान सेना को बेहद अलर्ट रखा गया था और सटीक जगहों पर सेना कई एमबुश (घात) लगाए थी। जैसे ही आतंकवादियों ने घुसपैठ करने की कोशिश की भारतीय सेना ने मौसमी हालातों का फायदा उठाते हुए उन पर भारी गोलीबारी की। इससे आंतकियों को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा।”

बयान के मुताबिक, “जोरदार और असरदार गोलीबारी का नतीजा ये हुआ कि नियंत्रण रेखा के पास एक आतंकवादी जमीन पर ही ढेर हो गया। इसके बाद अतिरिक्त सैनिकों को इस क्षेत्र में भेजा गया और मौसम सही होने और दृश्यता में सुधार होने के बाद दोपहर में तलाशी अभियान शुरू किया गया।”

रक्षा मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि जमीनी तलाशी के दौरान एक एके-47, पाकिस्तान में बनी दवाएँ, दो मैगजीन और 30 जिंदा कारतूस और दो ग्रेनेड बरामद किए गए। तलाशी के दौरान खून के निशान भी मिले हैं। खून के निशान और इस तथ्य को देखते हुए कि जवाबी कार्रवाई के बाद एक आतंकवादी ढेर हो गया था, यह संभावना है कि भारतीय सेना की गोलीबारी के दौरान कम से कम एक आतंकवादी की मौत हो गई।

भारत के 4 मोस्ट वांटेड आतंकी पहुँच गए 72 हूरों के पास, 3 पाकिस्तान से और 1 PoK से

                          खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या (फाइल फोटो)
जब से भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, पाकिस्तान के लिए काँटों की सेज तैयार हो गयी। जिससे यह संदेह हो रहा है कि क्या भारत का वर्तमान विपक्ष पाकिस्तान को पोषित कर रहा था? यह वह ज्वलंत प्रश्न है जिसका 
जवाब पाकिस्तान के भूतपूर्व, वर्तमान हुक्ममारों और भारत के वर्तमान विपक्ष को देना होगा। वरना कांग्रेस नेताओं को नरेंद्र मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान से मदद मांगने की क्या जरुरत थी? मोदी सरकार बनने के बाद से ही पाकिस्तान में कंगाली ने अपना डेरा डाला है, तभी से पाकिस्तानियों से कंगाली में डालने वालों को 72 हूरों के पास पहुँचाने का जिम्मा ले लिया है। क्योकि पाकिस्तान में सरकार किसी भी हो, भारत को लहूलुहान करने के नाम पर पाले जा आतंकवादियों पर सबसे ज्यादा खर्च किया जाता रहा है। विश्व में पाकिस्तानियों को बहुत ही बेइज्जत निगाहों से देखा जा रहा है, जिसका किसी भी पाकिस्तानी शासक को चिंता नहीं। सियासतखोरों से लेकर फौजी हुक्मरान विदेशों में धन जमा कर सुरक्षित हैं, भारत की तरह उद्योग आदि पर ध्यान नहीं दिया, जिसका अंजाम आज अवाम भुगत रही है। 

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी सैयद नूर शालोबार की गोली मार कर हत्या कर दी गई। शनिवार (04 मार्च, 2023) को अज्ञात हमलावरों ने कश्मीर में कई आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार शालोबार को गोलियों से भून डाला। नूर शालोबार से पहले सैयद खालिद राजा, एजाज अहमद अहंगर और बशीर अहमद नाम के आतंकियों की भी गोली मार कर हत्या हो चुकी है। मारे गए चारों आतंकी भारत में मोस्ट वांटेड थे। इनमें से एक को POK में ढेर किया गया जबकि 3 का शिकार पाकिस्तान में ही बनाया गया।

सैयद नूर शालोबार

रिपोर्टों के मुताबिक सैयद नूर शालोबार पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के साथ मिलकर कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहा था। उसपर आतंकी संगठनों के लिए नए लोगों खास कर कश्मीरियों की भर्ती की जिम्मेदारी थी। शालोबार 4 मार्च को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों के हाथों मारा गया।

अलबद्र कमांडर सैयद खालिद राजा

27 फरवरी को कश्मीर में सक्रिय रहे आतंकी सैयद खालिद राजा को मार दिया गया था। खालिद राजा अल-बद्र का आतंकी कमांडर था। खालिद कुछ समय से पाकिस्तान के कराची में रह रहा था। जहाँ वह ‘फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्ज’ का वाइस चेयरमैन बना दिया गया था। हालाँकि वह कश्मीरी आतंकियों के साथ जुड़ा हुआ था और पाकिस्तान में बैठकर उनकी मदद कर रहा था। खालिद को हमलावरों ने उसके घर के बाहर ही गोली मार दी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

आईएस आतंकी एजाज अहमद अहंगर

इसी तरह कश्मीर में पैदा हुए आतंकी एजाज अहमद अहंगर को 22 फरवरी, 2023 को मार गिराया गया था। अहंगर इस्लामिक स्टेट से जुड़ा हुआ था और भारतीयों पर हमला करने के लिए आत्मघाती हमलावरों को तैयार करता था। गृह मंत्रालय ने जनवरी 2023 में ही अहंगर को आतंकी घोषित किया था। अहंगर को अबू उस्मान अल-कश्मीरी के नाम से भी जाना जाता था। रिपोर्टों के मुताबिक अहंगर को तालिबान ने अफगानिस्‍तान के कुनार इलाके में मार गिराया।

बशीर अहमद पीर

21 फरवरी, 2023 को हिजबुल मुजाहिद्दीन के टॉप कमांडर बशीर अहमद पीर को पाकिस्तान के रावलपिंडी में मार गिराया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक बशीर अपने घर के पास मस्जिद में नमाज पढ़ने गया था। मस्जिद से बाहर निकलने के बाद बाइक सवार दो हमलावरों ने आतंकी को गोली मारी और चलते बने। अक्टूबर 2022 में भारत में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में शामिल होने की वजह से उसे आतंकवादी घोषित किया गया था।
बशीर कश्मीर में आतंकवाद के लिए भर्ती किए गए नौजवानों को हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराता था। इसके अलावा पीओके में संचालित आतंकी शिविरों और लॉन्च पैड्स से आतंकियों को भारत में घुसपैठ कराने में भी मदद कर रहा था। बशीर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का रहने वाला था लेकिन पिछले 15 सालों से वह पाकिस्तान में रह रहा था।
अल-बद्र के आतंकी खालिद के हत्या की जिम्मेदारी सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी ने ली है। सिंधुदेश रिवॉल्युशनरी आर्मी नाम का संगठन पाकिस्तान से अलग सिंधुदेश बनाने की माँग कर रहा है। आतंकी अहंगर को तालिबान ने मारा जबकि बाकी के 2 आतंकियों नूर शालोबार और बशीर अहमद पीर को ढेर करने वालों के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी है।

भारत में शामिल होने के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान के लोग कर रहे रैलियां, नारे लग रहे- आर-पार जोड़ दो करगिल रोड खोल दो


एक तरफ पाकिस्तान कंगाली की कगार पर है तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्धि को देखते हुए गिलगित बाल्टिस्तान के बुद्धिजीवी अब इसका विलय भारत में करना चाहते हैं। इसके लिए वहां लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के हिस्से गिलगित बाल्टिस्तान में इन दिनों लोगों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पाकिस्तानी सेना वहां डेमोग्राफी बदलने के लिए दूसरे प्रांतों के लोगों को वहां बसा रही है। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना की शह पर पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के लोग उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इन लोगों को सुरक्षा देने के लिए बाकायदा पाकिस्तानी सेना के जवान तैनात किए जा रहे हैं। जिसके बाद लोगों ने हाईवे को जाम कर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इन लोगों ने भारत से दखल देने की मांग भी की है। गिलगित बाल्टिस्तान जम्मू और कश्मीर का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान लगभग सात दशकों से PoK पर अवैध कब्जा कर रखा है। लेकिन अब उसे भारत में शामिल करने की मांग उठने लगी है। वहां रैलियों में अब नारे लग रहे हैं- आर-पार जोड़ दो करगिल रोड खोल दो।

गिलगित-बाल्टिस्तान में बेशर्मी से डेमोग्राफी बदल रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने पिछले दशकों में गिलगित-बाल्टिस्तान में बेशर्मी के साथ डेमोग्राफी को बदलने का काम किया है। डोगरा शासकों द्वारा लागू किया गया स्टेट सब्जेट रूल बाहरी लोगों को इस रियासत में स्थायी निवासी बनने से रोकता था। जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस क्षेत्र के डेमोग्राफिक प्रोफाइल को बदलने के लिए इसे 1970 के दशक में जानबूझकर हटा दिया था। बीते वर्षों में, पाकिस्तानी सरकार ने शिया और इस्माइली बहुल क्षेत्र में विभिन्न समूहों, विशेष रूप से पश्तून और तालिबानी लोगों के बसने को प्रोत्साहित किया है, जिससे वहां सांप्रदायिकता और धार्मिक उग्रवाद में वृद्धि हुई है। पाकिस्तानी सरकार ने जनसंख्या विस्थापन को भी बढ़ावा दिया है। इसके लिए उसने डायमर-बाशा और स्कार्दू-करज़ुरा जैसे बांधों के निर्माण का बहाना बनाया। उसका कहना है कि इनके निर्माण के परिणामस्वरूप ऐसा हो रहा है और हजारों स्थानीय निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया और उनकी स्थानीय संस्कृति और पहचान को खत्म करने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान का सहयोगी चीन भी शिनजियांग में ऐसा ही कर रहा है। वहां मुसलमानों को खुलेआम अपने धर्म का पालन करने तक की इजाजत नहीं दी जा रही है। अगर पाकिस्तान, कश्मीर में मुसलमानों की हित बात करता है तो वह चीन के शिनजियांग प्रांत में मुसलमानों के सांस्कृतिक और धार्मिक दमन को लेकर चुप क्यों है।

नेहरू ने गलती न की होती तो कश्मीर में कोई समस्या नहीं होती 

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गलतियों की वजह से भारत का अभिन्न हिस्सा रहे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) और गिलगित बाल्टिस्तान आज नासूर बन चुका है। आजादी के समय अगर इनका विलय सही से हो गया होता तो पाकिस्तान का हमला नहीं होता, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर नहीं होता, मामला संयुक्त राष्ट्र तक नहीं पहुंचता, बाद के दशकों में कश्मीर पर लड़ने का पाकिस्तान के पास कोई अधिकार नहीं होता, जिहादी आतंकवाद नहीं होता और 1990 में कश्मीरी हिंदुओं का सामूहिक पलायन नहीं होता। 21 अक्टूबर, 1947 तक भी नेहरू ने ऐक्शन दिखाया होता तो भी आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर नहीं होता। लेकिन नेहरू की भारी गलतियों यह आज तक समस्या बनी हुई है।

पटेल की चलती तो यूं नासूर न बनती कश्मीर की समस्या

सरदार पटेल कश्मीर को किसी भी तरह के विशेष राज्य का दर्जा देने के खिलाफ थे लेकिन नेहरू द्वारा कश्मीर का मुद्दा गृहमंत्रालय से लेकर अपने पास रखने के कारण पटेल विवश होकर रह गए थे। नेहरू की कश्मीर के प्रमुख नेता शेख अब्दुल्ला से निकटता की वजह से भी पटेल इस मुद्दे पर ज्यादा कुछ नहीं कर पाए। सरदार पटेल पर कई किताबें लिखने वाले पीएन चोपड़ा अपनी किताब “कश्मीर एवं हैदराबादः सरदार पटेल” में लिखते हैं कि “सरदार पटेल मानते थे कि कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में नहीं ले जाना चाहिए था। कई देशों से सीमाओं के जुड़ाव के कारण कश्मीर का विशेष सामरिक महत्व था इस बात को पटेल बखूबी समझते थे इसीलिए वह हैदराबाद की तर्ज पर बिना किसी शर्त कश्मीर को भारत में मिलाना चाहते थे।” “इसके लिए उन्होंने लगभग रियासत के महाराज हरि सिंह को तैयार भी कर लिया था। लेकिन शेख अब्दुल्ला से महाराजा के मतभेद और नेहरू से शेख की नजदीकियों ने सारा मामला बिगाड़ दिया।” खास बात ये है कि कश्मीर में आज भी जो भारत का नियंत्रण है उसके पीछे भी पटेल का ही दिमाग माना जाता है। विपरीत परिस्थितियों में सेना को जम्मू कश्मीर भेजने का साहस सरदार पटेल ही दिखा सकते थे।

गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के पश्चिमी सिरे पर गिलगित और इसके दक्षिण में बाल्टिस्तान स्थित है। गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन यह आजादी के बाद से पाकिस्तान के कब्जे में है। यह क्षेत्र उपेक्षित, अलग-थलग और लगभग अविकसित है। पाकिस्तानी संविधान में भी इस हिस्से को राज्य के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के संविधान में भी इस हिस्से को शामिल नहीं किया गया है। पाकिस्तान पिछली कुछ सरकारों ने गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवां प्रांत बनाने की तैयारी कर रहे हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान की राजधानी गिलगित है। गिलगित-बाल्टिस्तान 7 जिलों में बंटा हुआ है। इनमें गान्चे, स्कर्दू, गिलगित, दिआमेर, गिजर, अस्तोर और हुंजा नगर शामिल हैं।

पाकिस्तान के कब्जे में कैसे गया गिलगित-बाल्टिस्तान

1947 में भारत की आजादी से पहले गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर रियासत का हिस्सा था। लेकिन, 1935 में अंग्रेजों ने पूरे गिलगित-बाल्टिस्तान को कश्मीर के महाराजा से 60 साल की लीज पर ले रखा था। यह इलाका काफी ऊंचाई पर स्थित है, ऐसे में उस समय पूरे गिलगित-बाल्टिस्तान की रक्षा के लिए अंग्रेजों ने गिलगित स्काउट्स नाम की सैन्य टुकड़ी को तैनात किया था। जब भारत आजाद हुआ तो अंग्रेजों ने इस लीज को एक अगस्त 1947 को रद्द करके क्षेत्र को जम्मू एवं कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को लौटा दिया। 1947 में जब कश्मीर पर पाकिस्तानी फौज ने हमला कर दिया तो 31 अक्टूबर को महाराजा हरिसिंह ने भारत के साथ विलय के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इस तरह गिलगित-बाल्टिस्तान भी भारत का हिस्सा बन गया। तब जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने ब्रिगेडियर घंसार सिंह को गिलगित-बाल्टिस्तान का गवर्नर बनाया।

गिलगित-बाल्टिस्तान की सेना ने विद्रोह कर पाक से मिलाया हाथ

गिलगित-बाल्टिस्तान के स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को स्वीकार नहीं किया। उसने अंग्रेज सैन्य अधिकारियों और अपने विश्वासपात्रों के साथ मिलकर गिलगित-बाल्टिस्तान के गवर्नर घंसार सिंह को जेल में डाल दिया। इतना ही नहीं, उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान में मिलाने का समझौता भी कर लिया। 2 नवंबर 1947 को विद्रोह के फलस्वरूप गिलगित में पाकिस्तानी झंडा फहरा दिया गया। पाकिस्तान ने तुरंत मोहम्मद आलम नाम के शख्स को यहां का सदर नियुक्त कर दिया।

कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाना थी बड़ी गलती

आजादी के समय जम्मू-कश्मीर पर कबायलियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर दिया। पाकिस्तानी फौज ने पुंछ, नौसेरा के कई इलाकों पर अपना कब्जा जमा लिया। जब राजा हरि सिंह ने भारत के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर मदद की गुहार लगाई, तब भारतीय सेना ने कार्रवाई शुरू की। इससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ और वे पीछे हटने लगे। लेकिन इस मामले के संयुक्त राष्ट्र में चले जाने के कारण दोनों पक्षों ने युद्धविराम का ऐलान कर दिया। इस कारण जिस हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा बना रहा वो आज पाक अधिकृत कश्मीर के नाम से जाना जाता है।

जब पटेल ने कहा- मिस्‍टर नेहरू! डू यू वॉन्‍ट टू लूज कश्‍मीर?

जवाहर लाल नेहरू ने जब कश्मीर मुद्दे पर संयुक्‍त राष्‍ट्र में जाने की बात की थी तो सरदार पटेल ने आगाह किया था – ‘मिस्‍टर नेहरू! डू यू वॉन्‍ट टू लूज कश्‍मीर?’ (क्‍या आप कश्‍मीर को खो देना चाहते हैं)। इस पर नेहरू चुप हो जाते हैं। उसके बाद नेहरू फिर गलती करते हैं। कैबिनेट की पहली मीटिंग में ही पटेल प्रस्‍ताव रखते हैं कि जिन दर्रों से ये कबायली घुस रहे हैं और पाकिस्‍तानी सेना आ रही है, इन पर एयरफोर्स से बम बार्डिंग कराकर रस्‍ता रोकते हैं। नेहरू इस प्रस्‍ताव को नहीं मानते हैं। उसके बाद वह कश्‍मीर अपने हाथ में लेकर चलते हैं। नतीजा सभी जानते हैं। तब सेना ने कहा था कि जब तक इन कबायलियों को कश्‍मीर से खदेड़ नहीं दिया जाता है तब तक युद्ध विराम नहीं करें। उसके बावजूद नेहरू ने युद्ध विराम किया। नेहरू ने ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) बनवाया। वही आर्टिकल 370 लाए।

नेहरू ने हरि सिंह की विलय याचिका तीन बार खारिज की

नेहरू ने कश्मीर मामले पर एक नहीं कई गलतियां की हैं। उन्होंने ही संविधान के विभाजनकारी अनुच्छेद 370 का निर्माण किया। नेहरू ने महाराजा हरि सिंह की भारत में विलय की याचिका को एक बार नहीं, तीन बार खारिज किया। ऐसे में अब समय आ गया है जब इतिहास को गलत तरीके से पेश करने के सभी प्रयासों का खंडन होना चाहिए। जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के लोगों को सच से रूबरू करना चाहिए।

नेहरू ने आजादी के बाद उसी लॉर्ड माउंटबैटन को भारत का गवर्नर जनरल बनाया जिसने देश को बांटा

नेहरू ने ही आजादी के बाद लॉर्ड माउंटबैटन को भारत का गवर्नर जनरल बनाया था। आजादी के समय जो 562-563 रियासतें थीं वो सभी भारत का हिस्‍सा थीं। ये कोई स्‍वतंत्र राज्‍य नहीं थे। ब्रिटिश काल में इन्‍हें इंडियन प्रिंसली स्‍टेट कहा जाता था। दूसरे इंडियन प्रोविंस थे। अंग्रेजों ने भारत को दो टुकड़ों में नहीं 564 टुकड़ों में बांटा था। इन सबको स्‍वतंत्र देश बताकर वो इन्‍हें आजाद कर गए थे। अगर अंग्रेजों की यही नीति थी और लॉर्ड माउंटबैटन इसे करने वाले थे तो उसी को नेहरू ने भारत का पहला गवर्नर जनरल क्‍यों बना दिया। जिन अंग्रेजों ने 170 साल तक भारत के साथ न जानें क्‍या नहीं किया उसके प्रतिनिधि को आप कैसे यह पद दे सकते थे।

जिस बॉलीवुड ने राहत फ़तेह अली खान को मंच, इज्जत, शोहरत दी, उसी ने अब KPL का गाना ‘आजादी’ गाया

बॉलीवुड में पकिस्तानपरस्तों की कभी कमी नहीं रही। अपनी तिजोरियां भरने के लिए पाकिस्तान के उन लोगों को शोहरत देकर मालामाल किया, जिन्हें पाकिस्तान में कोई घास तक नहीं डालता। जबकि पाकिस्तान में उन्हीं फिल्मों के प्रदर्शन तक में अड़चने डाली जाती है। इतना सबकुछ होने पर भी हमारे पाकिस्तानपरस्त बॉलीवुड की आंखें नहीं खुलती। 
90 के दशक में शेख मुख्त्यार ने फिल्म नूरजहां बनाई, जो भारत में बॉक्स ऑफिस पर औंधेमुंह गिरने से कर्जे में डूबे अभिनेता-निर्माता-निर्देशक शेख बहुत ही गहरे संकट में फंस गए। किसी ने उन्हें पाकिस्तान जाकर फिल्म प्रदर्शित करने की सलाह दी, लेकिन वहां के फिल्म संगठन ने उनके सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा करने से कंगाली में और आटा गीला होने से बहुत ही विचलित होने लगे। किसी ने सलाह दी कि अभिनेता शत्रुघन सिन्हा मिलो, राष्ट्रपति जिया-उल-हक़ उन्हें अपना बेटा मानते हैं। देखो शायद बन जाये बात। शत्रुघन ने भी दरिया दिली का परिचय देकर कर्ज में डूबे मुख्तयार की नैया पार करवा, एक नया जीवन दिया। 
नूरजहां ही नहीं, और भी अन्य भारत में फ्लॉप हुई फिल्में पाकिस्तान में सोना उगलती हैं। और उन भारतीय फ्लॉप फिल्मों के आगे वहां सिनेमाओं पर चल रही चर्चित कलाकारों तक की असफल हो जाती है। यही कारण है कि पाकिस्तान फिल्म संघ ने भारतीय फिल्मों पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है।   
राहत फ़तेह अली खान है तो पाकिस्तानी गायक लेकिन उसे बॉलीवुड ने बेइंतहा, मंच, इज्जत, शोहरत और पैसा दिया, उसी का नतीजा है कि अब वह भारत के खिलाफ ही जहर उगलने लगा है, जी हाँ! दरअसल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ( POK ) में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ का आयोजन कराने जा रहा है, BCCI इसके विरोध में है, क्योंकि POK भारत का हिस्सा है, जिसपर पाकिस्तान का अवैध कब्जा है..

सिंगर राहत फ़तेह अली खान ने अब ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ का आधिकारिक गाना ‘आजादी’ गाया है। इस गाने के माध्यम से वो वहाँ की आज़ादी माँग रहे हैं, हालाँकि राहत आजादी की बात अपने जेहन से निकाल देनी चाहिए क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहले ही कह चुके हैं, जब जम्मू कश्मीर बोला जाता है तो उसमें POK भी आता है, सब भारत का हिस्सा है, POK के लिए जान दे देंगे।

राहत फ़तेह अली खान ने बॉलीवुड में अपना कैरियर 2003 में पूजा भट्ट द्वारा निर्देशित पाप फिल्म के गाने ‘लागी तुझ से मन की लगन’ से शुरू किया। इससे पहले भारत में विदेशी मुद्रा की स्मगलिंग भी कर चुके हैं, जिसके लिए ED ने नोटिस भेजा था। 

भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड(BCCI) ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में होने वाली ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ में हिस्सा लेने वाले क्रिकेटरों को भारत में लीग में खेलने या बीसीसीआई के साथ किसी भी व्यावसायिक संबंध रखने से रोक दिया जाएगा, वे भारत में क्रिकेट से संबंधित किसी भी काम का हिस्सा नहीं हो सकते हैं।

BCCI की इस चेतावनी का असर अब दिखने लगा है, इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर मोंटी पनेसर ने पाकिस्तान द्वारा POK में आयोजित किये जा रहे ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ में खेलने से इनकार कर दिया है..इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व बल्लेबाज हर्शल गिब्स ने भी बीसीसीआई की चेतावनी के चलते केपीएल से नाम वापस ले लिया था।

मोंटी पनेसर ने घोषणा की कि वह पाकिस्तान के ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ में भाग नहीं लेंगे और साथ ही अन्य भाग लेने वाले खिलाड़ियों को पाकिस्तान अधिकृत ‘कश्मीर प्रीमियर लीग’ में भाग लेने से पहले परिणामों के बारे में सोचने की चेतावनी दी।

इमरान खान सरकार वोट नहीं बूट के लायक, चुनावों में कर सकते हैं गड़बड़ी : मरयम नवाज

                                                                 मरयम नवाज़ 
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष और नवाज शरीफ की बेटी मरयम नवाज (Maryam Nawaz) ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ पर निशाना साधा है। गुलाम कश्मीर में चुनाव से पहले होने वाली सभाओं में सरकार पर हमलावर होते हुए मरयम नवाज ने कहा, “इमरान सरकार को वोट की जरूरत नहीं, वह बूट के लायक है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, गिलगिट-बाल्टिस्तान के नगर में उन्होंने कहा कि इमरान सरकार उनकी पार्टी के प्रमुख नवाज शरीफ के कार्यकाल में हुए कामों का श्रेय लेना चाहती है और इमरान खान सरकार उन्हें अपना बताकर जनता में भ्रम पैदा कर रही है।

मरयम नवाज ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनाव की गड़बड़ियों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि पीटीआई सरकार के मंत्री यहाँ पर चुनावों में गड़बड़ी करना चाहते हैं। उनके इरादों को सफल नहीं होने देना है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव में मतों की पहरेदारी करने का आग्रह भी किया।

पीएमएल-एन नेता मरयम नवाज ने आगे कहा की इस चुनाव में जनता को उनके कारनामों का जवाब देना है। वहीं, इस मामले में उन्होंने चुनाव आयोग को भी संदेश देते हुए कहा कि वे पीएमएल-एन पार्टी और जनता के वोट के बीच में न आएँ। और यदि वोटों की चोरी होती है तो जनता उन्हें कभी माफ़ नहीं करेगी।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कठिन समय में पार्टी छोड़ने वाले कार्यकर्ताओं को लताड़ते हुए यह भी कहा कि अब पार्टी में उनके लिए कोई जगह नहीं है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने हाल ही में घोषणा की थी कि 15 नवंबर को गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा के लिए चुनाव होंगे। इमरान खान सरकार ने पहले इस क्षेत्र को अंतरिम प्रांत का दर्जा देने की घोषणा की थी, जिसका लोगों ने जमकर विरोध किया था।

इससे पहले एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मरयम ने कहा किइमरान खान को अब घर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए, फर्जी शासकों के दिन पूरे हो चुके हैं और इन्हें सबसे बड़ा झटका 15 नवंबर को लगेगा।

राममंदिर : श्रीरंगनाथ स्वामी मंदिर से कावेरी नदी का पवित्र जल क्यों मंगवाया गया?

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            श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर  (फोटो साभार: TOI)
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमिपूजन के साथ ही इसके लिए दशकों से चल रहा आंदोलन समाप्त हो गया है। राम मंदिर भूमिपूजन की खासियत ये रही कि यहाँ देश भर के कई पवित्र हिन्दू तीर्थों से मिट्टी और जल लाया गया – कन्याकुमारी से तीनों समुद्रों के संगम का जल, रामेश्वरम की मिट्टी, POK में स्थित शरद पीठ की मिट्टी और कई अन्य स्थलों से भी चीजें आईं।
यहाँ इस्लामी आक्रांताओं ने कभी तबाही मचाई थी?
क्या आप जानते हैं कि आखिर इन सब स्थलों का जल एवं मिट्टी क्यों मंगवाई गयी? इसका मूल कारण है, ताकि जनता उन धार्मिक तीर्थों की महानता को स्मरण कर सकें कि किस तरह मुग़ल आतताइयों से इन धार्मिक स्थलों की रक्षा की गयी थी। जिसे छद्दम इतिहासकारों ने चंद चांदी के टुकड़ों की खातिर अपने जमीर को बेच भारत के वास्तविक इतिहास को छुपा कर मुगलों के खूनी इतिहास पर पर्दा डाल उन्हें महान बताकर झूठा इतिहास पढ़ने के विवश किया गया। अयोध्या में राममंदिर का इस कारण भी कट्टरपंथियों और छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा विरोध किया जा रहा है। यह जल और मिट्टी केवल नींव में ही नहीं दबी, बल्कि उसके फलीफुत होने पर जो वास्तविक इतिहास की फुलवारी निकलेगी, उससे इन सबको भय सता रहा है।   
श्रीरंगम(श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर) से कावेरी नदी का पवित्र जल भी ले जाया गया
श्रीरंगम की मिट्टी का वहाँ जाना बहुत बड़ी बात है क्योंकि ये वैष्णवजनों के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। वैष्णव, यानी भगवान विष्णु की उपासना करने वाले हिन्दू। भगवान राम विष्णु के 7वें अवतार हैं। इस पृथ्वी पर 106 वैष्णव दिव्य देशम हैं और श्रीरंगम का श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर उनमें से सबसे पुराना माना जाता है। 12 अलवरों की कृति ‘नलाईरा दिव्य प्रबंधम’ में इन सबका जिक्र मिलता है। ये फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है, जो अभी सक्रिय है।

इस मंदिर के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास को ‘कोविल ओलुगू’ में दर्ज किया गया है। कोविल ओलुगू में इस मंदिर के इतिहास का पूरा विवरण है। काफी बड़ी अवधि में इसका विस्तार किया गया है – चोला साम्राज्य के दौरान इसके इतिहास से लेकर 18वीं शताब्दी में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा इस पर कब्जा किए जाने तक। ये तमिल के मणिप्रवला लिपि में लिखित है। इसे श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के इतिहास का सबसे पुष्ट स्रोत माना जाता है।
जिस मंदिर का इतना बड़ा इतिहास डॉक्यूमेंट कर के रखा गया हो, आश्चर्य की बात है कि आजकल के किसी भी इतिहासकार ने दिल्ली सल्तनत के दौरान मंदिर पर हुए हमलों को लेकर कुछ नहीं लिखा है और न ही इसका ठीक तरह से अध्ययन किया गया। चोला और पाण्ड्या साम्राज्य के समय श्रीरंगम का श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर पूरी दुनिया के वैष्णव भक्तों का सबसे बड़ा स्थल था। उस समय युद्ध और अनिश्चितता का दौर आता-जाता रहता था लेकिन जो भी सत्ता में रहा, उसने मंदिर के प्रबंधन का अच्छी तरह ध्यान रखा।
श्रीरंगन के श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर पर पहला इस्लामिक हमला 
उस समय युद्ध और तनावों के बावजूद किसी ने भी श्रीरंगम को नुकसान नहीं पहुँचाया और न ही इसकी प्रतिष्ठा में कोई कमी आने दी। लेकिन, सन 1310 में मलवेरमान कुलशेखरम पाण्ड्या की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके बेटों के बीच सत्ता के लिए संघर्ष शुरू हो गया। लेकिन, उन्हें ये पता होना चाहिए था कि उसी समय दिल्ली सल्तनत की फौजें दक्षिण भारत पर चढ़ाई करने बढ़ रही थी।
मलिक कफूर, जो अलाउद्दीन खिलजी का सबसे प्रमुख दास फौज कमांडर था, 1311 में उसने काकतिया, यादव और होयसाला साम्राज्यों को अपने आधीन कर के उन्हें दिल्ली सल्तनत के अंदर आने के लिए मजबूर कर दिया। इसके बाद उसकी नजर पाण्ड्या साम्राज्य की ओर पड़ी, जिसे आमिर खुसरो ने बार-बार मालाबार कह कर संबोधित किया है। यहाँ के धन-वैभव से दिल्ली सल्तनत की जीभ लपलपाने लगी।
आखिरकार मार्च 1311 में मलिक कफूर की फौज ने पाण्ड्या साम्राज्य में घुसने में कामयाबी पाई और कुलशेखरा पाण्ड्या के बेटे वीर पाण्ड्या को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। वो लोग थोप्पूर से होकर वहाँ घुसे थे। हालाँकि, वो ऐसा करने में असफल रहे और उन्होंने गुस्से में चिदंबरम मंदिर को निशाना बनाया और फिर श्रीरंगम की ओर बढ़ गए। वो श्रीरंगम में उत्तरी छोर से घुसे थे। श्रीरंगम उस समय अपने धन-वैभव के लिए भी प्रसिद्ध था।
वहाँ घुसते ही मलिक कफूर की फौज ने वैष्णव संतों के साथ अत्याचार शुरू किया और उन्हें आसानी से हरा दिया। इसके बाद मंदिर में तोड़-फोड़ शुरू हुई और खजाना लूट लिया गया। मंदिर से कई बहुमूल्य चीजें चोरी कर ली गईं। इसके बाद मई 1311 में वो वापस दिल्ली की तरफ कूच करने लगा। हालाँकि, पाण्ड्या के सत्ताधीशों ने अगले एक दशक में श्रीरंगम और श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर का पुराना धन-वैभव वापस लाने में कामयाबी पाई।
दूसरा हमला : 12000 हिन्दुओं ने अपने प्राणों की आहुति दी और भगवान 48 वर्षों तक इधर-उधर भटकते रहे 
1320 में पंजाब के गवर्नर गाजी मलिक की मदद से राज्य के वफ़ादारों ने ही खिलजियों को सत्ता से उखाड़ फेंका। भारतीय-तुर्की दासों के वंशज मलिक ने इसके बाद गियाशुद्दीन तुगलक के नाम से गद्दी पर बैठ कर तुगलक वंश की स्थापना की। खिजलियों के अंतर्गत डेक्कन में कुछ राज्य थे लेकिन तुगलक ने उन पर सम्पूर्ण रूप से कब्ज़ा करने का मन बनाया। वो वहाँ पूर्ण फौजी नियंत्रण चाहता था।
उसने 1321 में एक बहुत ही विशाल फ़ौज भेजी, ताकि पूरी दक्षिण भारत पर कब्ज़ा कर सके। इस फ़ौज का नेतृत्व उसका सबसे बड़ा बेटा उलुग खान कर रहा था, जो बाद में मोहम्मद बिन तुगलक के नाम से दिल्ली की गद्दी पर बैठा। हालाँकि, 1321 में उसका ये सपना ध्वस्त हो गया क्योंकि तुगलकों की फ़ौज को वारंगल में बुरी हार मिली। इसके बाद भी 2 साल बाद उसने वारंगल फतह कर के मालाबार की और कूच किया।
तमिलनाडु को ही तब मालाबार के नाम से जाना जाता था। पहले तो उसने तोडाइमंडलम पर कब्ज़ा किया और उसके बाद वो श्रीरंगम की ओर बढ़ा। यह एक ऐसा आक्रमण था, जिसकी चर्चा वैष्णव जगत के कई साहित्यों में होती है। श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर में उलुग खान द्वारा मचाई गई तबाही का जिक्र गुरूपरम्पराई, प्रपन्नमित्रं और कोविल ओलुगू में विस्तृत रूप से मिलती है। ये सभी आक्रमण की अवधि 1323 ही बताते हैं।
जब उलुग खान की फौज श्रीरंगम पहुँची, तब वहाँ मंदिरों में एक मेला और त्योहार चल रहा था। श्रीरंगनाथस्वामी की प्रतिमा (उरचवार आझागिया मानवला पेरूमाल) को मुख्य मंदिर से कावेरी नदी के तट पर स्थित एक मंदिर में ले जाया जा रहा था। 12000 वैष्णव भक्त इस यात्रा में शामिल थे। जैसे ही वहाँ इस्लामी फौज के आने की खबर फैली, श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के मुख्य पुजारी श्रीरंगराजनाथम वदुलदेशिका ने यात्रा को समाप्त कर दिया।
उन्होंने प्रतिमा को मंदिर के धन के साथ दक्षिण की तरफ भेज दिया। इसके बाद जैसे ही उलुग खान वहाँ पहुँचा, वो मूर्ति को न पाकर पागल हो गया और उसने 12,000 वैष्णव भक्तों का सिर कलम करने का आदेश जारी कर दिया। इसे कोविल उलुगू में एक ऐसे आक्रमण के रूप में बताया गया है, जिसने 12,000 सिर का बलिदान ले लिया। इस्लामी आक्रान्ताओं से बचने के लिए श्रीरंगनाथस्वामी की प्रतिमा मंदिर-मंदिर घूमती रही।
अंत में वो प्रतिमा तिरुमल पहुँची, जहाँ उसे कोई खतरा नहीं था और वहाँ वो सुरक्षित थी। इस्लामी आक्रान्ताओं से बचने के लिए प्रतिमा को 48 वर्ष अपने मंदिर से बाहर बिताने पड़े। इसके बाद 1371 में विजयनगर साम्राज्य ने इस्लामी आक्रान्ताओं के मंसूबों को ध्वस्त कर श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर में प्रतिमा को पुनः स्थापित किया। दूसरा वाला आक्रमण भयंकर इसलिए थे क्योंकि तुगलकों ने दिल्ली से मलाबार पर नियंत्रण कर लिया था।
एक दशक तक वो ऐसे ही राज करते रहे। इसे वैष्णव इतिहास का सबसे अँधकार भरा युग माना जाता है। इस्लामी आक्रांता उलुग खान का एक प्रतिनिधि तो श्रीरंगम में ही रहता था और उसने पवित्र श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर के सामने ही अपना घर बना लिया था। उसने श्रीरंगम के आसपास के गाँवों पर कुछ वर्ष तक राज किया। कहते हैं कि मंदिर में रहते-रहते उसे तरह-तरह की बीमारियाँ हो गई थीं। बाद में वो कन्नूर गया, जहाँ उसने पॉयसलेसवार मंदिर को नुकसान पहुँचाया।
इधर बुक्का राय ने श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर को इस्लामी आक्रान्ताओं से बचा कर इसका पुराना वैभव को वापस लाने में सफलता पाई और उसके बाद विजयनगर के संगम वंश ने भी इसे जारी रखा। लेकिन, वामपंथी इतिहासकारों ने इन घटनाओं को हमारी किताबों में जगह नहीं दी क्योंकि वो चाहते थे कि हमें गलत इतिहास पढ़ाया जाए। इस्लामी आक्रान्ताओं के कृत्यों को छिपाने की कोशिश हुई।

‘हमें जिंदा रहने दो’ : चीन और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ POK में विरोध प्रदर्शन

POK विरोध प्रदर्शन
                                                                   साभार : ANI 
चीन और पाकिस्तान का बढ़ता याराना अब प्रकृति पर खतरा बन रहा है। यही कारण है कि POK के मुजफ्फराबाद में लगातार प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार (अगस्त 24, 2020) को भी वहाँ की सड़कों पर लोगों में गुस्सा देखने को मिला।
नीलम-झेलम नदी पर विशाल बाँध निर्माण को रुकवाने के लिए ‘दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ’ (सेव रिवर, सेव मुजफ्फराबाद) कमिटी के प्रदर्शनकारियों ने ‘नीलम-झेलम बहने दो , हमें जिंदा रहने दो’ जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन में सैंकड़ों लोग शामिल हुए। मुजफ्फराबाद को छोड़ दें, तो POK के अन्य शहरों से भी इस प्रदर्शन में काफी लोग थे।
पाकिस्तान ने भारत के डर से चीन को POK के कुछ हिस्से दे रखे हैं और वहाँ के खनिज संसाधनों को भी चीन के हवाले कर दिया है, जो POK का जम कर दोहन तो कर ही रहा है, साथ ही वहाँ कई सारे प्रोजेक्ट्स भी चला रहा है। इससे स्थानीय लोगों मे आक्रोश का माहौल है। 
हाल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आज़ाद पट्टन और कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी ने निर्माण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के हिस्से के रूप में 700.7 मेगावाट बिजली की आजाद पट्टन हाइड्रो प्रॉजेक्ट पर 6 जुलाई, 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे।
ये 1.54 बिलियन डॉलर की परियोजनाएँ चीनी जियोझाबा कंपनी द्वारा प्रायोजित की जाएँगी और कोहारला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट जो झेलम नदी पर बनाया जाएगा, वह पीओके के सुधनोटी जिले में आज़ाद पट्टन पुल से लगभग 7 किमी और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किमी दूर है।
कहा जा रहा है कि ये परियोजना साल 2026 तक पूरी होगी। जिसके बाद देश में बिजली सस्ती हो पाएगी। लेकिन वहाँ स्थानीय लोग इस समझौते के सख्त ख़िलाफ़ हैं। वह वहाँ पर चीनियों की उपस्थिति, बांधों के बड़े पैमाने पर निर्माण और नदियों के बहाव मोड़ने से उनके अस्तित्व पर पड़ रहे खतरे को लेकर खासा नाराज हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन और पाकिस्तान मिलकर पीओके और गिलगित बाल्टिस्टान के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं में इसे लेकर अक्सर रोष देखने को मिलता है।
ये विरोध प्रदर्शन पहली बार देखने को नहीं मिला है। इससे पहले भी मुजफ्फराबाद की जमीन पर ऐसे विरोध हुए हैं। 6 जुलाई को ऐसा ही नजारा क्षेत्र में देखने को मिला था। दरअसल, तब भी लोगों का यही आरोप था कि चीन द्वारा बनाए जा रहे बाँधों से वहाँ के वातावरण पर भी काफ़ी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं के खड़े होने की आशंका है। इसके बाद 13 अगस्त को एक बार फिर ऐसा ही माहौल मुजफ्फराबाद में फिर बना। तब भी लोगों ने विरोध करके अपना गुस्सा जाहिर किया था और जमकर नारेबाजी की थी।

इमरान को अब पाकिस्तानी सेना को भारत पर हमला करने का आदेश देना होगा: Pok के प्रधानमंत्री रज़ा फारूख हैदर ने दी धमकी

अपने विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले POK के प्रधानमंत्री रज़ा फारूख हैदर एक बार फिर गैर जिम्मेदाराना बयान के कारण सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने पाक पीएम इमरान खान से अपनी फौज के साथ भारत पर हमला करने के लिए कहा है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रज़ा फारूख कोरोना की स्थिति का जायजा लेने एलओसी के पास स्थित गाँव में आए थे। वहीं उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान और मीडिया से हुई बातचीत में ये विवादित बयान दिया।
मीडिया के साथ यहाँ बातचीत में हैदर ने कहा, “पीएम इमरान खान को अब जरूर कार्रवाई करना चाहिए और कड़ा कदम उठाना चाहिए। केवल बयान देने से अब काम नहीं चलेगा। आपको इससे आगे बढ़ते हुए अपनी सेना को भारत पर हमला करने का आदेश देना होगा।”

हैदर ने आगे कहा, “यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने भाइयों एवं बहनों की सुरक्षा करें। भारत पीओके के मौसम के बारे में हाल बता रहा है। इसे देखते हुए हमें भी दिल्ली के मौसम के बारे में अपडेट देना शुरू करना चाहिए।”
हैदर का ये बयान उस समय आया है, जब पीओके कोरोना की गिरफ्त में जकड़ता जा रहा है और वहाँ आवश्यक वस्तुएँ पहुँचाने में भी दिक्कत हो रही हैं। ऐसे में अपनी जनता के लिए सुविधाएँ आश्वस्त करने की जगह रजा फारूख भारत पर हमला करने की बात कर रहे हैं।
कुछ समय पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गिलगिट बाल्टिस्तान में आम चुनाव करने की इजाजत दे दी थी। इसके बाद भारत ने इसपर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए पाकिस्तानी राजनयिक को तलब करते हुए डिमार्शे जारी किया।
जिसमें विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ये कहा कि पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान भारत का अभिन्न अंग हैं जिस पर पाक का अवैध कब्जा है। इसलिए अब उसे इन क्षेत्रों को तुरंत खाली करना चाहिए।
इसके बाद 5 मई को भारतीय मौसम विभाग ने पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान के मौसम का हाल बताना शुरू किया। जिससे पाकिस्तान बौखला गया और रजा फारूख जैसे विवादित नेताओं ने भारत पर हमले का बयान दिया।
कुछ महीने पहले की बात करें, तो हैदर ने एक ऐसा ही विवादित बयान कश्मीर पर दिया था। हैदर ने उस समय कहा था कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाँ जरूर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार की मौजूदा रणनीति से कश्मीर को अगले 700 वर्षों में भी आजादी नहीं मिलेगी।

ब्लड बैंक के नाम सेक्स रैकेट चलाने वाला समीर बुखारी POK से गिरफ्तार

POK JUD सदस्य समीर बुखारी और पाकिस्तानी लेखक अमजद अयूब मिर्जा
JUD सदस्य समीर बुखारी और पाकिस्तानी लेखक अमजद अयूब मिर्जा
पाकिस्तान के आतंकी समूह जमात उत दावा के एक सदस्य सैयद समीर बुखारी को कल यानी बुधवार को सेक्स रैकेट का धंधा चलाने के आरोप में POK के बाग शहर से गिरफ्तार किया गया। बुखारी जमात-उत-दावा से जुड़ी अल-महफिज फाउंडेशन चलाता है। यह फाउंडेशन मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की अगुवाई वाले आतंकवादी संगठन जमात-उत-दावा का हिस्सा है।
एएनआई के अनुसार पुलिस ने उसे एक वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद गिरफ्तार किया है। वायरल वीडियो में वह बाग स्थित अपने कार्यालय में महिलाओं से छेड़छाड़ करता हुआ पाया गया। बुखारी एक ब्लड बैंक के नाम पर यह सेक्स रैकेट चला रहा था।
बुखारी के बारे में मौजूद सूचना बताती है कि वे एक समय पर जमात उत दावा के प्रमुख हाफिज सईद का खास व्यक्ति था। इसके अलावा पाकिस्तान के एक राजनैतिक कार्यकर्ता व लेखक अमजद अयूब मिर्जा का इस गिरफ्तारी पर कहना है, “मेरे लिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि यह खुलासा हुआ क्योंकि JuD हमारी बेटियों और बहनों को वेश्याओं के रूप में उन पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के पास भेजता है जो पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर या क्षेत्र में तैनात हैं।”
उनका कहना है कि POK में जो जिहादी कमांडर अपने प्रशिक्षण या मिशन से वापस आते हैं, उनकी संतुष्टि के लिए भी महिलाओं की तस्करी की जाती है।

मिर्जा का कहना है कि अभी सैयद समीर बुखारी को केवल इसलिए गिरफ्तार किया गया है क्योंकि एक वीडियो था जिसमें उसे POK में एक से अधिक महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करते दिखाया गया था। अगर यह वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं आता और वायरल नहीं होता, तो अल्लाह जानता है कि इस ‘सज्जन’ को गिरफ्तार करने की हिम्मत किसमें होती?

पाकिस्तान : भीख मांगने का नया तरीका : कोरोना मरीजों को जबरन भेज रही PoK, गिलगिट-बाल्टिस्तान

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक तरफ पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। ऐसे में भी पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान इन दिनों कोरोना की मार झेल रहा है और खबर यह आ रही है कि पाक अपने कोरोना के मरीजों को पाक अधिकृत कश्मीर भेज रहा है। अब महामारी से डरे सहमे स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का जमकर विरोध कर रहे हैं, लेकिन इसके बाद पाक की यह हरकत अभी जारी है। वहीं PoK के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अंतर्राष्ट्रीय मदद पाने के लिए पाकिस्तान संक्रमण को पूरे देश में फैलाना चाहता है।
1947 में पाकिस्तान बनने से आज तक के इसके इतिहास को देखे जाने पर देश के उत्थान के लिए संसाधनों जुटाने का प्रयत्न ही नहीं किया, बल्कि भारत विरोध कर भारत-विरोधियों से धन अर्जित करता रहा है। समय चक्र ऐसा घुमा कि आज भारत विरोधी भी भारत की ताकत को मानने को मजबूर हो गए हैं। फिर 1971 में पाकिस्तान से अलग हुए ईस्ट पाकिस्तान से बने बांग्लादेश पाकिस्तान से कहीं आगे निकल चुका है, लेकिन यह देश जहाँ 1947 में था आज भी वहीं है, आत्मनिर्भर होने का प्रयास तक नहीं किया। अब सरकार चलाने और अपनी कुर्सी की खातिर इस तरह की घिनौनी हरकतों से भीख मांगने की उधेड़ बुन में लगा हुआ है।   
पाकिस्तान के मीरपुर इलाके में स्थानीय लोग पाक सेना के इस कदम का खूब विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी लोगों का आरोप है कि पंजाब के कोरोना पॉजिटिव मरीजों को सेना से दूर करने के लिए पंजाब से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और गिलगिट-बाल्टिस्तान भेजा जा रहा है। दरअसल, पाकिस्तान के मीरपुर और दूसरे शहरों में स्पेशल क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं, जहाँ पंजाब के मरीजों को लाया जा रहा है। वहीं पाक सेना के टॉप अफसरों ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज को आर्मी के घरों के करीब न रखा जाए। नतीजन बड़ी संख्या में गाड़ियों में बंद करके ये मरीज POK और गिलगिट-बल्टिस्तान में भेजे जा रहे हैं।

वहीं कैंप में रखे गए एक मरीज का आरोप है कि कोरोना मरीजों के लिए क्वॉरंटीन के नाम पर बनाए गए कैंप्स में सीमित मेडिकल सुविधाएँ हैं। जैसे हालात यहाँ हैं उनसे लोगों के मन में बीमारी के और फैलने का डर भी पैदा हो गया है। युवक ने दावा किया कि अगर उन्हें कैंप पहुँचने से पहले वायरस इन्फेक्शन नहीं हुआ होगा और कैंप पहुँचने के बाद वह पॉजिटिव निकले तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा। यहाँ तक कि कैंपों में पानी या फ्लश की भी सुविधा नहीं है।
पाकिस्तान में पीओके और गिलगिट-बाल्टिस्तान ये दोनों ही सबसे ज्यादा पिछड़े इलाके हैं। इस इलाके का इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले से ही बहुत खराब है और ट्रेन्ड मेडिकल स्टाफ की भी कमी है। लोगों को डर है कि पूरे इलाके में वायरस फैल जाएगा और स्थानीय कश्मीरियों को खतरे में डाल दिया जाएगा। मुजफ्फराबाद के लोगों का कहना है कि पाक सेना को सिर्फ पंजाब की चिंता है। जानकारों का कहना है कि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से पंजाब के बराबर अहम नहीं है।
वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में कोरोना का कहर तेजी से फैल रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने भारत की तरह पहले से ही इसे लेकर बेहतर इंतजाम नहीं किए थे। पाकिस्तान में अब तक कोरोना के चलते 9 लोगों की मौत हो चुकी है साथ ही इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1190 हो गई है। इतना ही नहीं चीन से लौटे पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी खुद को 5 दिन सेल्फ- क्वारंटाइन कर लिया है। 
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भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में महाराष्ट्र है। राज्य में एक ही परिवार के 12 लोग क....
पाक की माली हालत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान में कोरोना की पहली मौत के तीन दिन बाद ही पाकिस्तान सरकार ने विश्व बिरादरी से आह्वान किया था कि कोरोना की चपेट में आने वाले गरीब देशों के कर्जे को माफ कर देना चाहिए।

सरकार ने जारी किया जम्मू कश्मीर- लद्दाख का नया मानचित्र, POK को दिखाया भारत का हिस्सा

New Mape of India
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के बाद सरकार द्वारा जारी नए नक्शों में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (पीओके) नवगठित जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और गिलगित बल्तिस्तान लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा है। गृह मंत्रालय ने भी एक अधिसूचना में भारत का नया नक्शा जारी किया है जिसमें दोनों केंद्रशासित प्रदेशों को दर्शाया गया है। इसमें पीओके की ‘राजधानी’ मुजफ्फराबाद को देश की भौगोलिक सीमा में दिखाया गया है।
नक्शों के अनुसार नए मानचित्र में पीओके जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा है और गिलगित बल्तिस्तान लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा है। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में करगिल तथा लेह दो जिले हैं और पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य का शेष हिस्सा नए जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में है।
इससे पहले पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में 1947 में कठुआ, जम्मू, ऊधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, मीरपुर, मुजफ्फराबाद, लेह और लद्दाख, गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटरी 14 जिले थे। 2019 तक पूर्ववर्ती जम्मू - कश्मीर राज्य की सरकार ने इन 14 जिलों के क्षेत्रों को पुनर्गठित करके 28 जिले बना दिए थे।
नए जिलों के नाम थे - कुपवाड़ा, बांदीपुर, गांदेरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्‍तवाड़, साम्बा और करगिल। इनमें से करगिल जिले को लेह और लद्दाख जिले के क्षेत्र से अलग करके बनाया गया था। विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने 1947 के लेह और लद्दाख जिलों के बाकी क्षेत्रों के अलावा 1947 के गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटरी जिलों के क्षेत्रों को समावेशित करते हुए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (कठिनाइयों को हटाना) दूसरे आदेश, 2019 द्वारा नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लेह जिले को परिभाषित किया है।
इसमें कहा गया है कि भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा तैयार नक्शों को जारी किया गया है जिनमें 31 अक्टूबर 2019 को सृजित नए जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश और नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को दर्शाया गया हैं। इसके अलावा भारत का नया नक्शा जारी किया गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि संसद की सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को प्रभावी तौर से निरस्त कर दिया और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को मंजूरी दी। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में और गृह मंत्री अमित शाह की देख रेख में पूर्ववर्ती जम्मू - कश्मीर राज्य का 31 अक्टूबर 2019 को नए जम्मू कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश और नए लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के रूप में पुनर्गठन किया गया।

पाकिस्तान के 5 सैनिक ढेर, 4 आतंकी लॉन्च पैड तबाह: POK के आतंकी शिविरों पर सेना ने दागे गोले

भारतीय सेना की बड़ी कार्रवाई: PoK में आर्टिलरी गन से तबाह किए 4 आतंकी लॉन्च पैडजम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार सेक्टर में पाकिस्तान द्वारा किए गए सीजफायर उल्लंघन का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में स्थित आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया है। तोपों से आतंकी शिविरों पर गोले दागे जाने की खबर है। इन शिविरों में जुटे दहशतगर्दों को घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी सेना लगातार कोशिश कर रही थी। सूत्रों के अनुसार तंगधार सेक्टर से सटे पीओके के इलाकों में भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 4-5 सैनिक मारे गए हैं और कई जख्मी भी हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार पीओके नीलम वैली में आतंकियों के चार लॉन्च पैड भी सेना ने तबाह कर दिए हैं। इससे पहले रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को भी पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों को घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लंघन किया। सीजफायर उल्लंघन में दो जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। साथ ही एक आम नागरिक की भी मौत हो गई।
घुसपैठ के मंसूबे नाकाम रहने पर पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे 2 गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं और 19 गायों और भेड़ों के साथ 2 गोशाला भी नष्ट हो गए। सेना ने बताया कि पाकिस्तान की इस नापाक हरकत का करारा जवाब दिया गया है और जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा और उसके सैनिक भी मारे गए हैं।


पाकिस्तान द्वारा गोलाबारी के बाद कठुआ जिले के हीरानगर सेक्टर के मनियारी गाँव के कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। पाकिस्तान की तरफ से लगातार की जा रही गोलाबारी से वहाँ के लोग काफी परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने इस पर अपनी व्यथा जाहिर करते हुए कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि बच्चे अंदर नहीं सो रहे थे। हम पीएम से अनुरोध करते हैं कि वे पाकिस्तान को करारा जवाब दें। पाकिस्तान द्वारा गोलीबारी के कारण हमें पहले ही नुकसान हो चुका है।”
उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। हालाँकि हर बार भारतीय जवानों ने इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुआ पाकिस्तान की हर नापाक हरकत को नाकामयाब किया है।

नेहरु की गलती से हुआ था कश्मीर पर चीन का कब्ज़ा : मनीष तिवारी, कांग्रेस सांसद

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कहते हैं, सुबह भुला अगर शाम को घर लौट आये तो उसे भूला नहीं कहते", जो कांग्रेस पर चरितार्थ होती नज़र आ रही है। अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस ने भी स्वीकारना शुरू कर दिया है कि जवाहर लाल नेहरू द्वारा की गयी गलतियों को आज तक देश को भुगतना पड़ रहा है।   
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने चीन के मसले पर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को चीन से बात कर भारत के आतंरिक मामलों में दखल न देने की बात कहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी को यह साफ़ कर देना चाहिए कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है।
अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि यदि चीन यह कहता है कि उसकी नज़र कश्मीर पर है तो उसे यह भी याद दिला दिया जाना चाहिए कि हमारी (भारत की) नज़र हॉन्ग-कॉन्ग पर है।
हॉन्ग-कॉन्ग में मानवाधिकारों के उल्लंघन और लोकतान्त्रिक मूल्यों के पतन का हवाला देते हुए अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि तिब्बत में चीन का अत्याचार हम न जाने कब से देखते आ रहे हैं, साथ ही उन्होंने अपने इसी ट्वीट में दक्षिणी चीन सागर (साऊथ चाइना सी) का भी ज़िक्र किया। मनीष तिवारी ने सवाल उठाया कि चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत क्यों सवाल नहीं उठाता?


कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने यह बयान उस वक़्त दिया है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आने वाले हैं। इतना ही नहीं, मनीष तिवारी ने यहाँ तक कह दिया कि मोदी को चीन से अक्साई चीन के मुद्दे पर बात करनी चाहिए जिसे अनधिकृत रूप से चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था और मौजूदा वक़्त में उसने वह पकिस्तान को सौंपा हुआ है।
स्मरण हो, सन् 1962 में पंडित नेहरु के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की बेहद लाचार रक्षा नीतियों के चलते भारत को चीन से युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा था जिसके बाद कश्मीर का एक हिस्सा चीन ने अपने कब्ज़े में ले लिया था जिसे आज हम अक्साई-चिन के नाम से जानते हैं।

पाक ने फिर खाई मात: भारत के दबाव में फ्रांस ने POK के ‘राष्ट्रपति’ को नेशनल असेंबली में बोलने से रोका

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भारत को फ्रांस में बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने फ्रांस के निचले सदन में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के राष्ट्रपति मसूद खान के कार्यक्रम को रद्द करवा दिया है। भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक आपत्ति पत्र लिखा था जिसके बाद पीओके के राष्ट्रपति को कार्यकम में शामिल होने से रोक दिया गया।
दरअसल, फ्रांस की राजधानी पेरिस में पाकिस्तानी मिशन 24 सितंबर को नेशनल असेंबली में पीओके के राष्ट्रपति मसूद ख़ान की बैठक के लिए ज़ोर दे रहा था। इसके बारे में जैसे ही भारत को पता चला उसने कूटनीतिक क़दम उठाया। इस क़दम के तहत भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक डेमार्श (आपत्ति पत्र) भेजते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से भारत की संप्रभुता का उल्लंघन होगा।

भारतीय समुदाय ने भी नेशनल असेंबली के स्पीकर और सांसदों को इस मामले के संबंध में मेल भेजे। ख़ान, फ्रांस के निचले सदन मे आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाले थे। जब उन्हें फ्रांस सरकार ने कार्यक्रम में जाने की अनुमति नहीं दी गई तो पाकिस्तान के राजदूत मोइन-उल-हक ने इसमें हिस्सा लिया और उनकी तरफ़ से संबोधित किया। कार्यक्रम पूरी तरह से फ्लॉप रहा और इसमें स्थानीय हस्तियों ने भी शिरक़त नहीं की।
इस पूरे घटनाक्रम के चश्मदीदों के अनुसार, फ्रांस के सांसदों के नहीं पहुँचने की आशंका की वजह से पाकिस्तानी राजदूत को मसूद ख़ान के सम्मान में आयोजित डिनर को भी रद्द करना पड़ा। ये डिनर नेशनल असेंबली के कार्यक्रम की पूर्वसंध्या यानी 23 सितंबर को आयोजित होना था। जानकारी के अनुसार, फ्रांस सरकार ने फ्रांस-पाकिस्तान फ्रेंडशिप ग्रुप को पहले ही स्पष्ट संदेश दे दिया था कि मसूद ख़ान और उनके कार्यक्रम से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखनी है। इस तरह, भारत अपने मंसूबे में क़ामयाब हो गया और फ्रांस में भी पाकिस्तान की चालबाज़ियों पर पानी फिर गया।
ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान की उम्मीद के विपरीत कार्यक्रम ने किसी भी स्थानीय जनता का ध्यान अपनी ओर नहीं आकर्षित किया। कार्यक्रम में शिरक़त करने वाले अधिकतर लोग पाकिस्तानी कर्मचारी ही थे। बता दें कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। उसने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा की जाने आतंकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ भारत का साथ दिया था। इसके अलावा, फ्रांस ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति में वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने पर भी भारत का साथ दिया था।

पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का है, पाकिस्तान तुरंत PoK को छोड़ दे : लंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन

बॉब ब्लैकमैन, रूचि घनश्यामलंदन स्थित हैरो ईस्ट के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर पर खरी-खरी सुनाई है। ब्लैकमैन ने साफ़ कर दिया कि पाकिस्तान को पीओके छोड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर पूरी तरह भारतीय गणराज्य का हिस्सा है। बॉब ब्लैकमैन के बयान से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेइज्जती का रिकॉर्ड बना रहे पाकिस्तान को नया झटका लगा है। शनिवार (सितम्बर 12, 2019) को कश्मीरी पंडितों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए सांसद बॉब ब्लैकमैन जम्मू कश्मीर पर यूएन रेजॉल्यूशन की भी चर्चा की।
लंदन में ब्रिटेन स्थित कश्मीरी पंडितों के एक समूह को संबोधित करते हुए  कंजरवेटिव पार्टी के एमपी बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा इस मुद्दे पर यूएन में प्रस्ताव पेश करने की योजना पर सवाल खड़े किये ब्लैकमैन बलिदान दिवस पर आयोजित खास कार्यक्रम में अपनी बात रख रहे थे  इस कार्यक्रम का आयोजन कश्मीरी पंडित कल्चरल सोसायटी और ऑल इंडिया कश्मीरी समाज (AIKS) ने किया था कार्यक्रम में एक नाटक का भी मंचन किया गया जिसका शीर्षक था- 'वी रिमेंबर: द जर्नी ऑफ कश्मीरी पंडित्स.' जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से ही नॉर्थ लंदन से एमपी बॉब ब्लैकमैन इस फैसले का समर्थन करते रहे हैं और भारत के पक्ष में बोलते रहे हैं वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी प्रशंसक हैं हाल ही में सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले आर्टिकल 370 को हटा दिया इसके बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बना हुआ है बॉब ब्लैकमैन ने कहा, 'पूरा जम्मू-कश्मीर संप्रभु भारत का हिस्सा है ऐसे लोग, जो वहां संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को लागू करने की बात करते हैं, वे उस प्रस्ताव को भूल जाते हैं, जिसके मुताबिक राज्य के एकीकरण के लिए पाकिस्तानी सेना को कश्मीर छोड़ देना चाहिए'   
यूएन रेजॉल्यूशन को लागू करने की माँग पाकिस्तान भी करता रहा है। शुरुआत में पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग ठुकरा दी थी लेकिन अब वह हमेशा इसकी माँग करता है। बॉब ब्लैकमैन ने याद दिलाया कि यूएन की रिजॉल्यूशन के मुताबिक़, सबसे पहले पाकिस्तान और उसकी फ़ौज को कश्मीर छोड़ना पड़ेगा, जिससे पूरे राज्य का एकीकरण हो सके। इस कार्यक्रम में भारतीय उच्चायुक्त रूचि घनश्याम भी उपस्थित थीं। 
कश्मीरी पंडितों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने काफ़ी अच्छी प्रस्तुतियाँ दी, जिनकी प्रशंसा रूचि ने भी की। उच्चायुक्त ने बॉब ब्लैकमैन को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि बॉब ब्लैकमैन कंजर्वेटिव पार्टी की ‘1922 कमिटी (प्राइवेट मेंबर्स कमिटी)’ के जॉइंट एग्जीक्यूटिव सेक्रटरी हैं और वह 2012 से ही इस पद पर बने हुए हैं। लंदन के अनुभवी नेताओं में से एक ब्लैकमैन पिछले 9 साल से हैरो ईस्ट के सांसद बने हुए हैं।

बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू कश्मीर के सम्बन्ध में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को भी पत्र लिखा था। बॉब के पत्र का जवाब देते हुए ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री इस जयशंकर से बात की है। उन्होंने साफ़ किया कि जम्मू कश्मीर भारत-पाक्सितान के बीच का मुद्दा है और ब्रिटेन का शुरू से यही मानना रहा है। बॉब ब्लैकमैन कश्मीरी पंडितों को उनकी मातृभूमि से निकाल बाहर किए जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाते रहे हैं।
इससे पहले सांसद बॉब ने लेबर पार्टी के कुछ सांसदों को हिन्दू-विरोधी करार देते हुए याद दिलाया था कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद कहा था कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा था कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?