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गरीब, मजलूम शांतिदूतों ने आजमगढ़ के कबीरुद्दीनपुर में क्षतिग्रस्त कर दी भगवान शिव की प्रतिमा

भगवान शिव प्रतिमा, क्षतिग्रस्त
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने से पूर्व जब सभी का मत था कि "जो भी निर्णय होगा मान्य होगा", फिर आज हिन्दुओं पर प्रहार, मंदिरों पर हमला और रामधुन पर मंदिरों से लाउडस्पीकर उतरवाना कौन-सी धर्म-निरपेक्षता का परिचय दिया जा रहा है? क्या इसी का नाम लोकतंत्र है? क्या यही गंगा-जमुना तहजीब है? आखिर कौन हैं ये लोग, गुंडे या मुग़ल वंशज? और इस हो रहे उपद्रव के सबसे बड़े दोषी हैं वह इतिहासकार, जिन्होंने चंद चांदी के टुकड़ों की खातिर अपने जमीर को बेच मुग़ल आक्रांताओं के खुनी एवं हिन्दू विरोधी कुकर्मों को छुपाकर उन्हें महान बताकर पढ़ने के मजबूर किया। इन उपद्रवियों पर सख्त कार्यवाही करने के साथ-साथ उन इतिहासकारों के खिलाफ भी कार्यवाही करे। क्योकि छद्दम इतिहासकारों के कारण देश को पता नहीं कितने उपद्रवियों को झेलना पड़ेगा। पत्तों पर कार्यवाही के साथ जड़ को पकड़ उस पर भी कार्यवाही हो। यह आरोप नहीं कटु सत्य है। 
योगी सरकार इन उपद्रवियों पर कार्यवाही करने के साथ-साथ इनके समर्थकों पर भी कार्यवाही करे, क्योकि ये शांतिदूत, मजलूम और गरीब बिना किसी लालच के कुछ नहीं कर सकते। इनके समर्थकों पर भी कार्यवाही उतनी ही जरुरी है, जितनी इन बिकाऊ उपद्रवियों पर।  
आजमगढ़ स्थित एक शिव मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की ख़बर आई है। अराजक तत्वों ने शुक्रवार (अगस्त 7,2020) को भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। जैसे ही ग्रामीणों को मंदिर में तोड़फोड़ की सूचना मिली, वो आक्रोशित हो गए। तनाव की खबर मिलते ही कई थानों की पुलिस के साथ पहुँचे वरिष्ठ अधिकारियों ने नई प्रतिमा लगाने का आश्वासन दिया।
‘न्यूज़ 18’ की ख़बर के अनुसार, पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार करके कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। ये घटना अतरौलिया थाना क्षेत्र के शेखपुरा कबीरूद्दीनपुर गाँव की है, जहाँ ग्राम समाज की ही जमीन पर 15 वर्ष पहले शिव मंदिर की स्थापना की गई थी। श्रावण मास में यहाँ श्रद्धालुओं का मेला भी लगता था।
शिव मंदिर में फ़िलहाल कोई पुजारी नहीं था। ग्रामीण ही मंदिर के दरवाजे को खोलने और बंद करने का काम किया करते थे। श्रावण के महीने में मंदिर में ताला नहीं बंद किया जाता था। शुक्रवार(अगस्त 7) की देर रात बदमाशों ने मंदिर में शिव प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर फरार हो गए। सुबह जब महिलाएँ वहाँ पूजा करने पहुँची तो उन्होंने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त पाया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वहाँ पहुँचे।

ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने इस मामले का विरोध किया। पुलिस ने ग्रामीणों से वार्ता कर के मामले को शांत कराया। खंडित शिव प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा लगवाने की बात भी कही गई है। बुढ़नपुर सीओ शीतला प्रसाद ने कहा कि किसी ने क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए इस तरह की करतूत की है। पुलिस दोषियों की पहचान कर के उनकी गिरफ़्तारी के प्रयास में लगी हुई है। फ़िलहाल वहाँ शांति बनी हुई है।
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सुल्तानपुर में राम भक्तों पर हमला (साभार: दैनिक जागरण) राम मंदिर भूमिपूजन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर मे.....
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रज़ा बाजार में पूजा के विरोध में जुटे मुस्लिम 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का ऐतिहासिक भूमि पूजन हुआ। इस मौके पर .....
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तीनो आरोपी जेल भेजे गए उत्तर प्रदेश के बहराइच से रामजन्मभूमि पूजन के दौरान सोशल मीडिया पर लोगों को बरगलाने और उन्म...
इसी तरह नवम्बर 2019 में आज़मगढ़ में ही महाराजगंज थाना क्षेत्र के सहदेव गंज रोड पर स्थित मुंडीलपुर प्राइमरी विद्यालय के पास स्थित शिव मंदिर में तोड़फोड़ कर के प्रतिमा को खंडित किया गया था। वहाँ शराब बोतलें भी पड़ी हुई मिली थी। पूजा करने गए ग्रामीणों ने इसे देख कर विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने मूर्ति की मरम्मत कराई थी। अब फिर से ऐसी घटना सामने आना चिंता का विषय है।

सुल्तानपुर: भूमिपूजन पर बॉंटी मिठाई तो घर पर समुदाय विशेष के लोगों ने बोला हमला, दुकान में तोड़फोड़

सुल्तानपुर में राम भक्तों पर हमला
सुल्तानपुर में राम भक्तों पर हमला (साभार: दैनिक जागरण)
राम मंदिर भूमिपूजन के अवसर पर उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भगवान राम के भक्तों पर हमला करने वाले उपद्रवियों के ख़िलाफ़ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। उपद्रवियों पर आरोप है कि इन्होंने पहले एक व्यापारी के घर पर हमला किया, उसके परिवार को पीटा और फिर हनुमानगंज बाजार स्थित उसकी दुकान में भी तोड़फोड़ की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना 5 अगस्त को उस समय घटी जब भूमिपूजन संपन्न होने के बाद ग्रामीण बाजार में इकट्ठा हुए और मिठाइयाँ बाँटनी शुरू की। इसी बीच यह सब देखकर दूसरे समुदाय के लोगों को गुस्सा आ गया और दर्जन भर लोगों ने सियाराम मोदनवाल के घर पर हमला बोलकर उनके परिजनों को पीट दिया।
जब पुलिस घटनास्थल पर हिंसा को रोकने पहुँची तो उन पर भी ईंट और पत्थरों से हमला किया गया। इस पूरी घटना में सियाराम घायल हो गए। लेकिन पुलिस ने उपद्रवियों को पकड़ लिया। वहीं इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस टीम को क्षेत्र में तैनात कर दिया।
अगस्त 6 की सुबह लंभुआ के डिविजनल ऑफिसर विद्धेष कुमार और सीओ लालचंद्रा चौधरी घटनास्थल पर पहुँचे व स्थिति का जायजा लिया। एसपी शिव हरि मीणा ने बताया कि कुलदीप मोदनवाल की बाइक पैदल जा रहे सद्दाम से टकरा गई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। फिलहाल मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
लखीमपुर में उपद्रव का प्रयास 
उत्तरप्रदेश के लखीमपुर में भी कुछ समुदाय विशेष के युवकों पर धार्मिक भावना को भड़काने का आरोप लगा।
जानकारी के अनुसार, 5 अगस्त को मोहल्ला शुक्लापुर के मोहम्मद फैय्याज मंसूरी ने अपनी फेसबुक आईडी पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने वाली पोस्ट की। मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद शादाब व तीन चार अन्य लोगों ने इसका समर्थन किया।
इस संबंध में बाजारगंज निवासी सागर कपूर ने मामला दर्ज करवाया। लेकिन केस दर्ज होते ही आरोपित भाग निकले। इसके बाद कुछ हिंदू संगठन ने मोहम्मदी नाम के युवक की गिरफ्तारी के लिए जमकर हंगामा किया और सड़क जाम कर दीं।

बंगाल : ‘घुस के मारो सालों को’: मुस्लिम भीड़ ने राम की पूजा कर रहे हिंदुओं को बनाया निशाना; कहाँ है #not in my name, #intolerance गैंग?

बंगाल, राम, मुस्लिम
रज़ा बाजार में पूजा के विरोध में जुटे मुस्लिम 
5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का ऐतिहासिक भूमि पूजन हुआ। इस मौके पर भी पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएँ सामने आई। धीरे-धीरे कर इन हिंसक घटनाओं से जुड़ी कई जानकारी सामने आ रही है। ये घटनाएँ तब हुई जब राज्य सरकार ने 5 अगस्त को पूरे प्रदेश में लॉकडाउन लगा रखा था।
प्रदेश के खड़गपुर में अलग-अलग जगहों पर पूजा का आयोजन किया गया था। इन्हें पुलिस वालों ने जबरन रुकवाया था। ख़बरों के मुताबिक़ पुलिस ने मंदिरों में पूजा कर रहे लोगों को घसीटकर बाहर निकाला। लाठी चार्ज किया और मंदिरों को भी नुकसान पहुँचाया।
बंगाल और झारखण्ड में जिस तरह हिन्दुओं को पूजा करने से रोकने का तांडव किया गया है, किसी #not in my name, #intolerance, #right to worship, #award vapasi, #mob lynching और "गंगा-जमुना तहजीब" की बात करने गैंगस्टर क्यों मुंह में दही जमाए बैठे हैं? कहाँ है लोकतंत्र की दुहाई देने वाले? क्या भारत में मुग़ल वंशज की मनमानी चलेगी? क्या हिन्दू अपनी मर्यादा को स्थापित नहीं कर सकता? विरोध उनका नहीं किया जाता, जिन लोगों ने गलत भारतीय इतिहास को जनता को पढ़ाकर गुमराह किया? यदि तुष्टिकरण को त्याग देशहित में वास्तविक इतिहास पढ़ाया जाता, ये हिंसक वारदातें नहीं होती। इस सब विवाद के जन्मदाता तथाकथित इतिहासकार हैं, जिन्होंने चंद चांदी के टुकड़ों  लालच में अपने जमीर को बेच दिया। इन लालची इतिहासकारो से पूछो कि "कहां है मुग़ल आक्रांताओं से पूर्व हज़ारों वर्षों तक राज करने वाले हिन्दू सम्राटों का इतिहास?   
अब जो जानकारी सामने आ रही है उससे पता चलता है कि ऐसा केवल पुलिस ने ही नहीं किया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी भारी संख्या में मंदिरों में घुस कर हिंदुओं को पूजा करने से रोका था। बीजेपी समेत कई हिंदू संगठनों ने कोलकाता में अलग-अलग जगहों पर पूजा का आयोजन किया था। इनमें से कई पूजा स्थलों पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। इस काम में पुलिस भी उनका साथ दे रही थी। कोलकाता का रज़ा बाज़ार मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने राम के नाम पर आयोजित की गई हर पूजा को निशाना बनाया।
 मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भगवा झंडे पर भी गुस्सा जताया और हटाने की हरसंभव कोशिश की। वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है एक हिंदू ने अपनी दुकान के सामने भगवा झंडा लगा रखा है। इस वजह से एक मुस्लिम उससे विवाद कर रहा है। वीडियो में मुस्लिम व्यक्ति का भगवा झंडे को लेकर घृणा साफ नजर आ रहा है। 


जवाब में जब हिंदू व्यक्ति ने कहा कि यह क्षेत्र किसी एक व्यक्ति का नहीं है, तब मुस्लिम ने धमकाते हुए कहा पूरा भारत मेरा है। इसके बाद उसने भगवा झंडा जलाने की धमकी तक दे डाली। इसके कुछ ही समय बाद मौके पर मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा हुई। इसकी वजह से दोनों समुदायों के बीच विवाद शुरू हुआ।
रज़ा बाज़ार इलाके के दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है मुस्लिमों की भीड़ भगवा झंडे उतारने में जुट जाती है। वीडियो में बेहद साफ़ तौर पर यह भी सुनाई देता है, जब एक आदमी कहता है- उतारो-उतारो सब को (झंडे)। इसके बाद दूसरा व्यक्ति कहता है-घुस के मारो सालों को।


 
 रज़ा बाज़ार के नरकेलदंगा इलाके में भी मुस्लिम समुदाय द्वारा उपद्रव की घटनाएँ नज़र आई। मुस्लिम इस बात पर आपत्ति जताते हुए देखे जा सकते हैं कि हिंदू राम की पूजा कर रहे हैं और राम के नारे लगा रहे हैं। पूजा रोकने के लिए मुस्लिमों ने रास्ते तक जाम कर दिए थे। घटनास्थल पर दंगे जैसे हालात होने के पहले पुलिस आ गई और स्थिति को नियंत्रण में किया।



जहाँ एक तरफ हिंदुओं पर 5 अगस्त के दिन राम मंदिर के नाम पर पूजा करके लॉकडाउन की अनदेखी का आरोप लगा। वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के लोग अलग-अलग जगहों पर भारी संख्या में नज़र आए।  


सोशल मीडिया पर एक और वीडियो खूब चर्चा में रहा। इसमें साफ़ देखा जा सकता है कि मुस्लिम समुदाय के लोग पूजा रोक रहे हैं। वह इतने पर थमते नहीं हैं बल्कि नज़र आने वाले हर भगवा झंडे को फेंकते हैं। 5 अगस्त के दिन ममता बनर्जी की सरकार ने पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का ऐलान किया था। 
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प्रतीकात्मक(साभार हिन्दू जागरण संघ) अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास जरूर हो गया है, लेकिन भारत में अभी भी पल रहे ....
भाजपा सरकार ने इस सम्बन्ध में पश्चिम बंगाल सरकार से निवेदन भी किया था कि 5 अगस्त का लॉकडाउन किसी दूसरे दिन रखा जाए। लेकिन ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के इस आग्रह को ठुकरा दिया था। 

जमशेदपुर: हनुमान मंदिर में रामधुन बजाने पर झारखंड सरकार ने पुलिस भेज उतरवा लिए लाउडस्पीकर

HINDU JAGARAN SANGHA - AAGNI Trust on Twitter: "Every #Mandir, In ...
प्रतीकात्मक(साभार हिन्दू जागरण संघ) 
अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास जरूर हो गया है, लेकिन भारत में अभी भी पल रहे मुग़ल वंशज अपनी मौजूदगी दिखाने पर उतारू हैं।  
5 अगस्त के दिन अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन हो रहा था। वहीं झारखंड के जमशेदपुर में एक हनुमान मंदिर में रामधुन बजाने पर पुलिस ने लाउडस्पीकर ही उतरवा लिया।
बीते दिन पूरे देश में उल्लास का माहौल था। मंदिर में सजावट की गई थी और घरों में दीपक जलाए गए थे। ऐसा ही नज़ारा झारखंड के जमशेदपुर में भी था, मंदिरों में उत्सव का माहौल था और हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा था। 
शहर के कदमा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले शास्त्री नगर स्थित हनुमान मंदिर में एक ऐसा ही धार्मिक आयोजन कराया गया था। मंदिर में लगे लाउडस्पीकर के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी, जिसे देख कर कदमा पुलिस थाने की पुलिस वहाँ पहुँची। इसके बाद मंदिर में लगे सारे लाउडस्पीकर उतरवा लिए। मंदिर समिति और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना का विरोध किया। 
पुलिस वालों ने इनकी आपत्ति यह कहते हुए अनसुनी कर दी कि इसकी वजह से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। घटना पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा इससे यह साबित होता है कि झारखंड सरकार श्रीराम विरोधी है। मंदिर के स्पीकर में कैसेट के ज़रिये रामधुन बजाई जा रही थी। जिसे कदमा पुलिस थाने के थानेदार ने उतरवा लिया। 
इस मुद्दे पर थाने के दरोगा का यह भी कहना था कि सरकार की तरफ से आदेश जारी किया गया है। इसलिए रामधुन नहीं बजाई जाएगी। इससे माहौल बिगड़ने की आशंका बढ़ती है। जिस पर भाजपा नेता देवेन्द्र सिंह ने कहा “हम झारखंड सरकार के इस असंवैधानिक कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हैं। झारखंड सरकार की बाबरी नीति और औरंगज़ेब मानसिकता को हम किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे।” 
उन्होंने कहा कि इस फैसले की वजह से भारी विरोध का सामना करना पडेगा। अब लोकतांत्रिक तरीके से सरकार की इस कार्रवाई का विरोध होगा। सरकार अपनी इस अ-लोकतांत्रिक कार्रवाई के लिए अब सावधान हो जाए।
हालाँकि, एक स्थानीय समाचार समूह की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस घटना की जानकारी किसी व्यक्ति ने ट्विटर पर साझा कर दी थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी एमवी राव ने शहर जमशेदपुर एसएसपी को मामले पर कार्रवाई के आदेश दिए।
साथ ही उनका यह भी कहना था कि अगर ऐसी किसी घटना की वजह से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है तो उस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। जिस पुलिसकर्मी ने ऐसे कदम को अंजाम दिया है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
इस मामले से जुड़ी जानकारी लेने के लिए हमने जमशेदपुर के कदमा थाना से 6572221670 इस नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन कई बार फोन व्यस्त गया और कई बार कॉल जाने पर पर भी फोन नहीं उठा।
थाने से संपर्क न होने के बाद हमने इस थाने के सब इन्स्पेक्टर के नंबर 9431706490 पर संपर्क करने का प्रयास किया। लेकिन यह नंबर शुरू से ही बंद था। हम पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई पर उनका पक्ष जानना चाहते थे लेकिन उनके द्वारा प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इससे पहले जमशेदपुर के कदमा में 6 फल विक्रेताओं पर सिर्फ़ इसलिए केस दर्ज कर दिया गया था क्योंकि वे अपनी दुकानों में ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ का बैनर लगा कर और ‘हिन्दू’ लिख कर फल बेच रहे थे। पुलिस कार्रवाई के बाद पूर्व सीएम रघुबर दास पीड़ित फल विक्रेताओं की दुकान पहुॅंचे थे और उन्होंने आश्वासन दिया था कि इन फल विक्रेताओं के खिलाफ कोई केस नहीं दर्ज होने दिया जाएगा।(एजेंसीज)

असम: राम मंदिर का जश्न मना रहे बजरंगदल कार्यकर्ताओं से मुस्लिमों ने की हिंसक झड़प, कर्फ्यू

असम-सोनितपुरअसम के सोनितपुर जिले में थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है और प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर दो समुदायों के बीच बुधवार (अगस्त 05, 2020) रात 10 बजे के करीब हुई झड़प में कई लोगों के घायल होने के बाद 5 अगस्त (बुधवार) की रात से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है।
बताया जा रहा है कि जब भूमिपूजन की ख़ुशी में स्थानीय बजरंगदल के कार्यकर्ताओं ने नजदीकी शिव मंदिर तक ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाते हुए रैली निकाली। इसी रास्ते के बीच एक मुस्लिम समुदाय की बस्ती भी पड़ती है। यहाँ पर मुस्लिम युवकों, जिनमें कथित तौर पर बांग्लादेशी भी शामिल थे, ने उन्हें धार्मिक नारे लगाने और डीजे बजाने से भी रोका।

पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगे 
यही नहीं, पाकिस्तान के समर्थन में भी नारे लगाए गए और बजरंगदल के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प शुरू कर दी और उनके वाहनों को क्षतिग्रस्त भी करना शुरू कर दिया। मुस्लिम युवकों ने बजरंगदल के करीब 25 कार्यकर्ताओं को बंधक भी बना दिया और पुलिस अधिकारियों तक को वहाँ पहुँचना पड़ा।
सोनितपुर में इस झड़प में बजरंग दल कार्यकर्ता, विश्व हिन्दू परिषद और राम सेना के तकरीबन 12 घायल हो गए जबकि, कई बाइक और चौपहिया वाहन जल गए हैं। संघर्ष में सोनितपुर के उपायुक्त (डीसी) मानवेंद्र प्रताप सिंह का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट मानवेन्द्र प्रताप ने कहा कि थलपारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र ‘गोरूडूबा और भारहिंगोरी’ वर्तमान परिस्थितियों के कारण कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
परिस्थितियों को देखते हुए सेना ने जिला प्रशासन के अनुरोध पर बृहस्पतिवार (अगस्त 06, 2020) को अशांत इलाकों में फ्लैग मार्च किया। जिले के थेलामारा और ढेकियाजुली पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगाया गया है।

सोनितपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नुमल महता ने कहा कि पहले ही दो व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कल रात से किसी भी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं थी और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
बजरंग दल रैली पर मुस्लिमों का हमला 
दरअसल, बुधवार (अगस्त 05, 2020) को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन समारोह का जश्न मनाने के लिए बाइक रैली का आयोजन करने वाले बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर हमला करने के बाद असम में तनाव बढ़ गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “स्थानीय लोगों ने अपने क्षेत्र में जोर से संगीत बजाने वाले लोगों पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी पूछा कि जब लोग COVID​​-19 महामारी से लड़ रहे थे, तो रैली का आयोजन क्यों किया गया? इससे बहस शुरू हुई, जो अंततः भयानक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई।”
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुँचे सोनितपुर जिले के उपायुक्त मानवेन्द्र प्रताप सिंह पर भी दोनों समूहों द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झड़प के साम्प्रदायिक टकराव में बदलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया और फिर हवा में गोलीबारी की।
सिंह ने कहा कि वाहनों के जलने पर वहाँ अतिरिक्त पुलिसबल तैनात किया गया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। इस बीच, जिला मजिस्ट्रेट कीर्ति जल्ली ने कहा कि चरमपंथी तत्वों को बांग्लादेश से कछार तक जाने से रोकने और कानून और व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए धारा 144 लगाई गई है।

जब बाबरी विध्वंस को ‘राष्ट्रीय कलंक’ बताने पर शेखर गुप्ता को बंद करनी पड़ी थी मैगजीन

लिबरल-राम मंदिर
अयोध्या में पवित्र श्रीराम मंदिर के ऐतिहासिक भूमिपूजन के अवसर पर पूरा देश उत्सव के मूड में है, लेकिन देश के कुछ चुनिन्दा इस्लामिक और सेक्युलर विचारकों ने आज इस शुभ दिन पर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने का अपना पारम्परिक व्यवसाय जारी रखते हुए खुद को प्रासंगिक बनाए रखा है।
इन लोगों ने जनमानस की नस पढ़ने की भी जहमंत नहीं की। कहने को कोई सियासत का बड़ा खिलाडी तो कोई खोजी पत्रकार बन जनता को गुमराह ही करते रहे। अपनी तिजोरियां भरने के लालच में राम की वास्तविकता पर ही प्रश्नचिन्ह लगाते रहे। धर्म-निरपेक्षता के बन रहे किसी सुरमा भोपाली ने तुष्टिकरण के चलते मुग़ल वंशज बनने की चाहत में, यह पूछने तक का साहस नहीं किया कि "खुदाई में मिले मंदिर के अवशेषों को किस कारण कोर्ट से छुपाया गया? लेकिन अपना जमीर बेच जनता को दंगों की आग में झोंक मालपुए खाते रहे। क्या यही उनकी योग्यता है? क्या झूठ के पुलंदे बांध सिर्फ हिन्दू और हिन्दू धर्म को अपमानित करने को धर्म निरपेक्षता, लोकतंत्र और समाजवाद कहते हैं? क्या इसी का नाम गंगा-जमुना तहजीब है? अगर यही गंगा-जमुना तहजीब है, बंद करो इस धूर्त नारे को। आखिर इस धूर्तता का कब जनाजा निकलेगा?  
लिबरल जमात का यह मानसिक आघात सिर्फ भूमिपूजन के दिन ही शुरू नहीं हुआ बल्कि पिछले काफी समय से वो इस ‘बुरे दौर’ से गुजर रहे थे और आज उनका यह दुःख बरबस फूट रहा है। यही वजह है कि कुछ ही दिन पहले ट्विटर पर ‘कहीं पूजन, कहीं सूजन’ जैसे दुखद हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे।
आज के दिन की शुरुआत में ही सबसे पहले जहाँ ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक जहरीले बयान से हुई, वहीं यह क्रम पूरे दिन जारी रहा और इस्लामिक प्रपंचकारी राणा अयूब से लेकर आरफ़ा खानम रह-रहकर अपना दर्द ट्विटर पर उगलते रहे।
इस्लामिक विचारधारा समर्थक राना अयूब तो इस बात से भी खफ़ा हैं कि कॉन्ग्रेसी नेता भी राम मंदिर के जश्न में हिन्दुओं के साथ अपनी उपास्थिति दर्ज कराने के लिए मरे जा रहे हैं।
दरअसल, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ट्वीट में लिखा- “अयोध्या में राम मंदिर की ऐतिहासिक नींव रखने पर भारत के लोगों को मेरी हार्दिक बधाई, जो कि हर भारतीय की लम्बे समय से इच्छा थी। भगवान राम के धर्म का सार्वभौमिक संदेश न केवल भारत के लिए, बल्कि दुनिया के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है।”
इस से राना अयूब अपने भीतर के ज्वालामुखी को रोक नहीं सकीं और उन्होंने इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा – “भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस अपना असली चेहरा दिखाते हुए।”
2002 के गुजरात दंगों की काल्पनिक कहनियों को अपनी पत्रकारिता बताने वाली राना ने इससे पहले एक अन्य ट्वीट में लिखा – “हम हैरान क्यों हैं? यहाँ एक ऐसा व्यक्ति है जिसने मुस्लिमों का नरसंहार किया और उसके लिए उसे सत्ता मिली। वह शख्स, जिसने उन्हें हिंदू भारत का सपना बेचा था और अब इसे पूरा कर रहा है। यह नाटक बंद करो।”


वहीं, जेएनयू की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद ने राम मंदिर पर कोई विशेष टिप्पणी ना करते हुए बस पीएम मोदी की दाढ़ी और नए लुक पर सवाल किया कि आखिर मोदी जी ‘एर्तुग्रुल दाढ़ी’ क्यों रख रहे हैं?

शेहला के इस ट्वीट के जवाब में कई तरह की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं, जिनमें से कुछ लोगों ने भाषा की मर्यादा का ध्यान ना रखते हुए पीएम मोदी की दाढ़ी की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ भी की।
शीला भट्ट ने द प्रिंट के संस्थापक शेखर गुप्ता से जुड़े एक किस्से को याद दिलाते हुए ‘इंडिया टुडे’ मैगजीन की कवर फोटो शेयर किया जिसमें अयोध्या बाबरी विध्वंस का जिक्र करते हुए मुख्य पन्ने पर लिखा था- “राष्ट्रीय कलंक।”
इस फोटो के साथ शीला भट्ट ने लिखा है – “दिसंबर 1992 में, इंडिया टुडे के गुजराती संस्करण, (तब, मैं वरिष्ठ संपादक थी और शेखर गुप्ता इसके संपादक थे) ने इसके कवर पर लिखा था ‘राष्ट्र नु कलंक।’ गुजरात का तब तक इतना भगवाकरण कर दिया गया था कि पाठकों ने गुजराती इंडिया टुडे के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। आखिरकार गुजराती संस्करण बंद हो गया।”
इसके जवाब में शेखर गुप्ता ने अपने दर्द का स्मरण करते हुए लिखा है – “हमने अक्टूबर 1992 में गुजराती संस्करण का शुभारंभ किया था। 6 सप्ताह के भीतर, हम 75 हजार तक बढ़ गए थे। इसके बाद अयोध्या के शीर्षक और कवरेज में विरोध की बाढ़ आई। अगले 4 हफ्तों में, हम 25 हजार तक गिर गए। संस्करण हमारे मार्केटिंग हेड के कहे अनुसार ही डूब गया।”

‘द प्रिंट’ की ही जर्नलिस्ट जैनाब सिकंदर ने ट्वीट किया है – “मुझे अयोध्या में सैंटा की मौजूदगी महसूस हो रही है।”

इसके जवाब में उन्हें ट्विटर यूजर ने कई क्रिएटिव जवाब दिए –


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का भूमिपूजन किए जाने पर असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) देश है और पीएम मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखकर प्रधानमंत्री कार्यालय की शपथ का उल्लंघन किया है। ओवैसी ने कहा कि यह लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की हार और हिंदुत्व की सफलता का दिन है।

इसके अलावा आईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपना दर्द शेयर करते हुए कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं भावुक हूँ। मैं कहना चाहता हूँ कि मैं भी उतना ही भावुक हूँ क्योंकि मैं सह-अस्तित्व और नागरिकता की समानता में विश्वास करता हूँ। प्रधानमंत्री, मैं भावुक हूँ क्योंकि एक मस्जिद 450 साल से वहाँ खड़ी थी।”

‘बाबरी मस्जिद थी और हमेशा रहेगी… परिस्थति हमेशा ऐसी नहीं होगी’ : मुस्लिम लॉ बोर्ड की धमकी

बाबरी मस्जिद मुस्लिम बोर्ड

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB), जिसकी स्थापना 1971 इंडो-पाक युद्ध में पाकिस्तान तोड़ बांग्लादेश बनाए जाने से मुस्लिम वोट बैंक को नाराज होते देख तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इस बोर्ड की स्थापना एक NGO के रूप में कर मुस्लिम वोट को कांग्रेस से बाहर जाने से रोका था। 
समय बीतते, छद्दम धर्म-निरपेक्षों ने इस NGO को खूब भुनाया, जिस कारण इस एनजीओ को लगा कि "हम बहुत शक्तिशाली हैं, जो कुछ भी बोलेंगे और कहेंगे मुसलमान हमारी बात मानेगा।" जो चरितार्थ होते दिख भी रहा है। जो एनजीओ सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने पर खामोश रहा, अब मंदिर का शिलान्यास होने पर मुस्लिमों में जहर फैलाकर अराजकता फैला रहा है। यह इस बात को सिद्ध करता है कि इनका भारत की न्यायालय पर भरोसा नहीं। सच्चाई को स्वीकार करने में इनको अपमान दिख रहा है। फिर वही बात आती है कि "यदि खुदाई में मंदिर के प्रमाण नहीं मिलते, जितने भी छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता और पार्टियां इनके साथ मिल आधी रात को कोर्ट खुलवाकर मस्जिद के पक्ष में फैसला करवा लेते। 
पहले कहते थे कि जो भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा, सभी को सर्वमान्य होगा, फिर आज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड क्यों आग उगल रहा है? किस आधार पर कह रहा है कि 'बाबरी मस्जिद थी और रहेगी', जबकि सच्चाई यह है कि कई वर्षों से यहाँ कोई नमाज तक नहीं पढ़ी गयी। सिर्फ बाबर के नाम पर अपना अधिकार जता कर मुस्लिम समाज को भ्रमित कर पागल बनाया गया, जिसे बेगुनाह मुसलमान सच मानता रहा और आज भी मान रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय आने पर अपने आपको ढका हुआ महसूस कर रहा है, जिसके जिम्मेदार यही एनजीओ, मुस्लिम नेता और तुष्टिकरण पुजारी समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियां हैं। इसका मतलब यह है कि यदि किसी तरह समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष पार्टियां मिलकर सोनिया गाँधी के बिल एंटी-कम्युनल वायलेंस बिल संसद में पेश कर पारित करवा लेतीं, निश्चित रूप से हिन्दू मुगल राज में जीने को विवश हो गए होते।   
वैसे इस तरह के वक्तव्य देना इनकी मजबूरी हो सकती है, यदि ये लोग इस तरह नहीं बोलेंगे तो कल कोई मुसलमान इनकी बात नहीं सुनेगा। इसलिए इनकी बातों को गंभीरता से न लेते हुए, इनकी मजबूरी को समझ इनकी बातों को नज़रअंदाज़ करना ही उचित है। 

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन समारोह से कुछ ही घंटों पहले, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए धमकी भरा सन्देश जारी किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक ट्वीट में लिखा है कि दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि कोई भी परिस्थिति हमेशा नहीं रहती।

AbbreviationAIMPLB
Formation7 April 1972 (48 years ago)
TypeNGO
Legal statusActive
Region served
India
Official language
Urdu, English
President
Rabey Hasani Nadvi
Key people
Muhammad Tayyib QasmiAbul Hasan Ali Hasani NadwiWali Rahmani
Staff
51
Volunteers
201
Websitewww.aimplboard.in
 इस ट्वीट में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिखा है –



“बाबरी मस्जिद थी, और हमेशा एक मस्जिद रहेगी। हागिया सोफिया हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। अन्यायपूर्ण, दमनकारी, शर्मनाक और बहुसंख्यक तुष्टिकरण वाले फैसले से भूमि का पुनर्निमाण इसे बदल नहीं सकता है। दुखी होने की जरूरत नहीं है। परिस्थति हमेशा के लिए नहीं रहती है।”

आज, 05 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भूमिपूजन को लेकर देशवासियों में उत्साह का माहौल है। ऐसे में AIMPLB का यह धमकी भरा सन्देश स्पष्ट करता है कि उच्चतम न्यायलय के फैसले के बावजूद भी श्रीराम मंदिर निर्माण के फैसले को लेकर सेक्युलर समाज पूरी तरह से खुश नहीं है।
हागिया सोफिया दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक रहा है। हागिया सोफिया तुर्की में एक ऐतिहासिक संरचना है, जो कई वर्षों से एक संग्रहालय था। ग्रीक ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल के रूप में 1500 से अधिक साल पहले निर्मित यह गुंबदाकार संरचना एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल के साथ-साथ एक ऐतिहासिक स्थल रहा है।
1953 में संग्रहालय बनने से पहले 1453 में ओटोमन विजय के बाद इसे एक मस्जिद में बदल दिया गया था। यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है। गत जुलाई माह की शुरुआत में ही, तुर्की की एक अदालत ने हागिया सोफिया के संग्रहालय की चली आ रही स्थिति को रद्द करते हुए कट्टरपंथी मुस्लिमों को खुश करने के लिए इसे वापस एक मस्जिद में बदल दिया। इस मस्जिद में अब नमाज शुरू हो गई है।
AIMPLB के ट्वीट में एक प्रेस बयान भी शामिल है। AIMPLB उन वादियों में शामिल था, जिन्होंने पिछले साल नवंबर में अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार को अयोध्या में एक मस्जिद के निर्माण के लिए पाँच एकड़ जमीन आवंटित करने का भी निर्देश दिया था।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 9 नवंबर को केंद्र सरकार को अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए स्थल सौंपने का निर्देश दिया था। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए 5 फरवरी को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की गई थी और श्रीराम मंदिर के निर्माण की देखरेख के लिए केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट को अनिवार्य किया गया है।
हालाँकि, कोर्ट के फैसले के खिलाफ AIMPLB ने कहा कि वह वैकल्पिक पाँच एकड़ जमीन को स्वीकार नहीं करेगा। एक अन्य मुस्लिम निकाय, जमीयत उलमा-ए-हिंद (JUH) ने कहा था कि वो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का विरोध करते हैं।
बाबरी मस्जिद भूमि पूजन ओवैसी
‘बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी… इशांअल्लाह’ –ओवैसी ने उगला जहर 
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने एक आज सुबह-सुबह एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “बाबरी मस्जिद थी, है और रहेगी। इशांअल्लाह।” इस ट्वीट के साथ ओवैसी ने दो तस्वीरें भी शेयर की हैं। एक तस्वीर में मस्जिद नजर आ रही है और दूसरे में उसके विध्वंस की घटना है।
ओवैसी के इस ट्वीट पर कई यूजर्स की प्रतिक्रियाएँ आई हैं। इनमें से अधिकांश समुदाय विशेष के हैं। इनका भी ओवैसी की तरह यही कहना है कि बाबरी मस्जिद थी और रहेगी।


एक यूजर तौसिफ रजा अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखता है, “मंदिर चाहे जितना बड़ा बन जाए। मगर हम अपनी 7 पुश्तों को बताएँगे कि पहले यहाँ बाबरी मस्जिद थी, जिसको भारतीय न्यायपालिका द्वारा तोड़कर यहाँ मंदिर बनाई गई। मस्जिद थी, ये बात भारत की न्यायपालिका ने भी माना था और बार-बार दोहराया भी था।”


वह आगे लिखता है, “अंत में भारत की न्यायपालिका ने भी अपना धर्म बदल कर हिंदुत्व अपना लिया था। हम अगर मर भी गए तो ये बताकर और नसीहत देकर जाऊँगा, ये बात अपने पुश्तों को बताऊँगा कि हम पर ज़ुल्म होते रहे, बर्बरता की सारी हदें पार हो गई हमारे ऊपर लेकिन हमें भारतीय न्यायालयों से इंसाफ़ नहीं मिला।”
वहीं, आकिफ मिर्जा नाम का दूसरा यूजर कामना करते हुए लिखता कि वक्फ बोर्ड को इस मामले में रीअपील करनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अगर, वक्फ बोर्ड ऐसा करता तो शायद इस फैसले पर रोक लग जाती।


आलमगीर नाम का यूजर इस मामले पर निराशा जताते हुए कहता है, “वास्तव में यह दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अपमान की सदी है! यहाँ तक ​​कि दुनिया में 1.8 अरब के साथ एक देश में 200 मिलियन मुस्लिम आबादी एक मस्जिद की रक्षा के लिए असहाय हैं।”


इस फैसले के बाद से कट्टरपंथियों में रोष उमड़ गया था। एक ओर जहाँ फैसले से पहले हर कोई शांति की अपील कर रहा था। वहीं दूसरी ओर फैसले के बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठा दिए गए थे। ऐसे में जब राम मंदिर के भूमि पूजन की तारीख नजदीक आई तो ये परेशानी और बढ़ गई। नतीजतन ओवैसी जैसे लोग खुलकर इस फैसले के कारण हर पार्टी का विरोध करने लगे।
आजतक से बातचीत में ओवैसी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ” कांग्रेस हमेशा खामोशी से हिंदुत्व की राजनीति करती आई है। कांग्रेस को खुलकर कह देना चाहिए कि वह हिंदुत्व की विचारधारा को मानती है। कॉन्ग्रेस पहले भी मिली हुई थी। अब उनको यह तय करना है कि वो टीम हिंदुत्व का साथ देंगे या टीम इंडिया का जो धर्मनिरपेक्षता पर विश्वास रखती है।”
इसी प्रकार उन्होंने मुलायम सिंह यादव को भी आड़े हाथों लिया और कहा, “मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी सियासी रोटी हमारे खून पर सेकी है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जब दोबारा मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री बने तो वो इस मामले में सोते रहे। उन्होंने केस में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। जिन लोगों को हमने रक्षक समझा, उन्हीं लोगों ने हमें नुकसान पहुँचाया है।”
इसके अलावा ओवैसी ने प्रियंका गाँधी के एक ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खुशी है कि वे अब और नाटक नहीं कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वो भी अतिवादी विचारधार को गले से लगा रही हैं। लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं। शर्म मत कीजिए, आप इस बात पर गर्व महसूस करिए कि किस तरह से आपकी पार्टी ने उस आंदोलन में योगदान दिया, जिसकी वजह से हमारे बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।”