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उत्तर प्रदेश : FIR करवाने की जगह ट्ववीट क्यों किया? मोहम्मद जुबैर से हाई कोर्ट का सीधा सवाल, कहा- पोस्ट से लग रहा अशांति पैदा करने की थी कोशिश


इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार (18 दिसंबर 2024) को ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक एवं कथित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर से कई सवाल किए। अदालत ने पूछा कि यति नरसिंहानंद के भाषण को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के बजाय सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर क्यों पोस्ट किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जुबैर के ट्वीट देखकर लगता है कि वे अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे।

दरअसल, जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है। खंडपीठ ने पूछा कि मोहम्मद जुबैर पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने के अपराध के लिए मामला क्यों दर्ज किया गया है। कोर्ट ने 20 दिसंबर तक जवाब माँगा है।

खंडपीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “यदि यह व्यक्ति (यति नरसिंहानंद) अजीब व्यवहार कर रहा है तो क्या आप पुलिस के पास जाने के बजाय और भी अजीब व्यवहार करेंगे? क्या आपने उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है? मैं आपके आचरण को देखूँगा। यदि आपको उसका (यति) भाषण, चेहरा पसंद नहीं है तो आपको उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।”

दरअसल, जुबैर ने गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के पुजारी यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताते हुए ट्वीट किया था। इसको लेकर जुबैर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नरसिंहानंद के समर्थकों द्वारा दायर मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा की माँग करते हुए मोहम्मद जुबैर ने हाई कोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर सुनवाई हुई।

 दरअसल, यति नरसिंहानंद ने 29 सितंबर को एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ टिप्पणी की थी। जुबैर ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें उसने इस भाषण को ‘अपमानजनक और घृणास्पद’ बताया था। इसके बाद यति नरसिंहानंद फाउंडेशन की महासचिव उदिता त्यागी ने जुबैर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

त्यागी ने डासना देवी मंडी में हिंसक विरोध प्रदर्शन के लिए जुबैर, अरशद मदनी और असदुद्दीन ओवैसी को दोषी ठहराते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। गाजियाबाद पुलिस ने इसके बाद जुबैर पर बीएनएस की धारा 196 (धार्मिक आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देना), 228 (झूठे सबूत गढ़ना), 299 (धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना), 356 (3) (मानहानि) और 351 (2) (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगाए। इसके बाद बीएनएस की धारा 152 के तहत अपराध भी जोड़ा गया।

इसके बाद जुबैर ने एफआईआर के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और गिरफ्तारी से बचने की माँग की। अपनी याचिका में जुबैर ने कहा है कि उसने यति नरसिंहानंद की बार-बार की सांप्रदायिक टिप्पणियों और महिलाओं और वरिष्ठ राजनेताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों को उजागर करने के लिए एक्स पर पोस्ट किया था।

कांग्रेस मुखपत्र के लिए काम करने वाली संजुक्ता बसु को राहुल गाँधी के लिए आर्टिकल लिखने के लिए बोले 3000 रूपए , दिए बस 1000 रूपए

कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड (National Herald) ने अपनी पूर्व संपादकीय सलाहकार संजुक्ता बसु (Sanjukta Basu) को कथित तौर पर राहुल गाँधी के पक्ष में लेख लिखने के लिए 3000 रुपए का भुगतान करने का वादा किया था। लेकिन उन्हें केवल 1000 रुपए प्रति लेख का ही भुगतान किया गया।

संजुक्ता बसु ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पब्लिक इमेज से भले से लोगों को ऐसा लगता है कि वह लाखों रुपए कमा रही हैं। लेकिन यह सच नहीं है। उन्होंने खुलासा किया कि वह नेशनल हेराल्ड में एक संपादकीय सलाहकार थी। लेकिन राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए उन्हें कभी लाखों रुपए नहीं दिए गए। बल्कि उन्हें 3000 रुपए देने का वादा करके केवल 1000 रुपए थमा दिए गए। पूरे पैसे भी कभी नहीं दिए गए।

उन्होंने 6 मार्च 2023 को ट्वीट किया, “यह बेहद चौंकाने वाला है कि मैंने कभी भी पैसे न दिए जाने के बारे में खुलकर नहीं बोला है। मेरी पब्लिक इमेज से भले ही ट्रोल्स को ऐसा लगता हो कि मैं लाखों कमा रही हूँ। नेशनल हेराल्ड ने मुझे राहुल गाँधी के समर्थन में लेख लिखने के लिए लाखों रुपए दिए हो। लेकिन उन्होंने तो मुझे पूरे पैसे भी नहीं दिए। 3000 रुपए का वादा करके केवल 1000 रुपए का ही भुगतान किया।”

इसके बाद उन्होंने लिखा, “लेकिन जो चीज मुझे जीवंत महसूस कराती है, जो मुझे मेरा MOJO देती है। वह मेरी पब्लिक इमेज है। मुझे इससे बहुत प्यार है। मैं इसके लिए ही पैदा हुई थी। मैं देखने और सुनने के लिए पैदा हुई थी। लेकिन जो चीजें मैं करती हूँ, लिखती हूँ, कहती हूँ, जरूरी नहीं कि उसके लिए पैसा ही मिले।” इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यूजर्स के सवालों का जवाब देने के लिए भी कई ट्वीट किए।

नेशनल हेराल्ड द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड द्वारा प्रकाशित किया जाता है। इसका स्वामित्व राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के स्वामित्व वाली कंपनी यंग इंडियंन के पास है। ‘नेशनल हेराल्ड’ की स्थापना 1937 में हुई थी। AJL तब उर्दू में ‘कौमी आवाज़’ और हिंदी में ‘नवजीवन’ नामक अख़बार निकालता था। नेहरू के लेख इसमें अक्सर आया करते थे। अंग्रेज सरकार ने इसे 1942 में बैन कर दिया था। नेहरू स्वतंत्रता के बाद इसके बोर्ड के अध्यक्ष पद से तो हट गए, लेकिन अख़बार कांग्रेस से ही चलता रहा।

1963 में इसके सिल्वर जुबली कार्यक्रम में नेहरू ने सन्देश जारी किया। 2016 में इसे फिर से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में लॉन्च किया गया।

हिंदू घृणा की नई हाइट पर लीना: पहले ‘काली’ को सिगरेट पीते दिखाया, अब शिव-पार्वती को

                          लीना ने अब 'शिव-पार्वती' का मजाक उड़ाया (फोटो साभार: @LeenaManimekali)
हिंदू घृणा में सनी फिल्ममेकर लीना मणिमेकलई (Leena Manimekalai) ने एक नया ट्वीट किया है। इसमें भगवान शिव और देवी पार्वती का मजाक बनाया है। जो फोटो ट्वीट की गई है उसमें शिव-पार्वती बने कलाकारों को धूम्रपान करते दिखाया गया है। लीना वही फिल्ममेकर हैं जिनकी डॉक्यूमेंट्री ‘काली’ विवादों में है।

लीना ने बीते 2 जुलाई को ‘काली’ का पोस्टर ट्विटर पर रिलीज किया था। इसमें ‘काली’ बनी एक्ट्रेस को सिगरेट पीते दिखाया गया था। साथ ही एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में LGBT का झंडा था। इस पर विवाद होने के बाद लीना ने माफी माँगने से इनकार कर दिया था। वहीं, इसके प्रदर्शन के लिए कनाडा की आगा खान म्यूजियम ने माफी माँगी थी।

लीना एक तरफ सोशल मीडिया में हिंदुओं और उनके अराध्यों को लेकर लगातार जहर उगल रही हैं, दूसरी तरफ वह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में खुद को असुरक्षित बताकर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को भी आगे बढ़ा रही है। द गार्डियन को उन्होंने बताया कि भारत नफरत की मशीन बन चुका है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के तमिलनाडु के मदुरै में पैदा हुईं लीना मणिमेकलई का पालन-पोषण एक हिंदू के रूप में हुआ। लेकिन अब वह एक नास्तिक है। उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि ‘काली’ हिंदू धर्म के प्रति अपमानजनक है। साथ ही अपनी सांस्कृतिक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए सेंसरशिप पर एतराज जताया है।

इस रिपोर्ट में लीना के हवाले से कहा गया है, “मैं जिस राज्य से आती हूँ, वहाँ काली को एक बुतपरस्त देवी माना जाता है। वह बकरी के खून में पका हुआ मांस खाती हैं। शराब पीती हैं। बीड़ी (सिगरेट) पीती हैं और जंगली नृत्य करती हैं। यही वह काली है जिसे मैंने फिल्म के लिए अपनाया है।”

लीना का दावा है कि ‘काली’ का पोस्टर ऑनलाइन शेयर करने के बाद उन्हें, उनके परिवार और सहयोगियों को 200,000 से अधिक अकाउंट्स से ऑनलाइन धमकी मिली। उन्होंने इसके लिए दक्षिणपंथी हिंदू समूहों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “मुझे अपनी संस्कृति, परंपराओं और ग्रंथों को कट्टरपंथी तत्वों से वापस लेने का पूरा अधिकार है। इन ट्रोल्स का धर्म या आस्था से कोई लेना-देना नहीं है।” साथ ही कहा है कि भारत सबसे बड़े लोकतंत्र से नफरत की सबसे बड़ी मशीन बन गई है। लिहाजा मैं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हूँ।

लीना के ताजा ट्वीट को लेकर भी नेटिजन्स ने नाराजगी जताई है। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि ये रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि जानबूझकर उकसावे का मामला है। उन्होंने कहा कि हिंदुओ को गाली देना- धर्मनिरपेक्षता? हिंदू आस्था का अपमान- उदारवाद है? बीजेपी नेता ने कहा कि लीना का हौसला केवल इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि उन्हें पता है कि लेफ्ट पार्टियाँ, कॉन्ग्रेस, टीएमसी उनको सपोर्ट करेंगी।

‘रेप-सेक्स को लेकर हिन्दू राष्ट्रवादी सबसे ज्यादा जुनूनी’: पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने दिखाई हिन्दू घृणा

जब हिन्दू स्वयंसेवी संस्थानों, लेखक एवं पत्रकारों द्वारा मुस्लिम मानसिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाने पर तुष्टिकरण एवं छद्दम धर्म-निरपेक्षों को लोकतंत्र, संविधान और गंगा-जमुनी तहजीब पर संकट के बादल मंडराने दिखने पड़ते हैं, लेकिन जब यही हिन्दू विरोधी गिरोह हिन्दुओं की आस्था पर अपनी प्रक्रिया व्यक्त करता है, सबको सांप सूंघ जाता है।यूपीए के समय में इस्लामिक आतंकवाद को संरक्षण देने हिन्दू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के नाम हिन्दू धर्म को बदनाम किया जा रहा था।    

दूसरे, हिन्दुओं को भी अपनी आंखें और दिमाग खोल कर गंगा-जमुनी तहजीब की बात बोलनी चाहिए। हिन्दुओं को क्या इतना भी नहीं मालूम की यमुना का नाम बिगाड़ कर जमुना करने वाले यही हिन्दू विरोधी है? 
खुद को इस्लामोफोबिया के विरुद्ध काम करने वाला एक्टिविस्ट बताने वाले ऑस्ट्रेलियाई लेखक सीजे वर्लमैन ने एक बार फिर से अपनी हिन्दू घृणा का प्रदर्शन किया है। उन्होंने ट्वीट किया, “दुनिया का कोई भी जाति-मजहब-राष्ट्रवादी समूह सेक्स और रेप को लेकर उतना जुनूनी नहीं है, जितने कि हिन्दू राष्ट्रवादी।” उनके इस ट्ववीट को राज्यसभा के पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया। उन्होंने इसे लाइक और रीट्वीट किया।

                              सीजे वर्लमैन का हिन्दू घृणा वाला ट्वीट, शाहिद सिद्दीकी ने आगे बढ़ाया
पाकिस्तान सहित कई देशों के मुस्लिमों ने सीजे वर्लमैन के इस ट्वीट का समर्थन किया। खुद को मानवाधिकार कार्यकर्ता बताने वाले मीर रसूल ने दावा किया कि हिन्दुओं के पुस्तकों में रेप के बारे में लिखा हुआ है। हालाँकि, कई लोगों ने उन्हें आईना भी दिखाया। लोगों ने उन्हें ऐसी कई घटनाएँ दिखाईं, जहाँ मदरसों में मौलवियों द्वारा रेप किया गया। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में रेप की घटनाओं पर भी लोगों ने सवाल दागे।

वैसे, ये पहली बार नहीं है जब सीजे वर्लमैन ने इस तरह की हरकत की हो। कुछ ही हफ़्तों पहले सीजे वर्लमैन ने लिखा था, “मैं ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में न्यूजीलैंड का समर्थन कर रहा हूँ। ऐसा इसीलिए, क्योंकि 50 करोड़ हिंदुत्व कट्टरपंथियों को मैं एक सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता। उनके खुश होने से मैं असहज महसूस करता हूँ।” भारत-न्यूजीलैंड में होने वाले WTC फाइनल से पहले उनका ये ट्वीट आया था।

जहाँ तक शाहिद सिद्दीकी की बात है, हाल ही में वायरल हुए उनके एक वीडियो में वो कहते दिखे थे कि उनके जितने भी फंड्स थे, उनमें से एक-एक पैसा उन्होंने मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों को दिया। 90 के दशक के अंत में वो कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुआ करते थे। पेशे से पत्रकार 71 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी अभी भी ‘नई दुनिया’ नाम की साप्ताहिक उर्दू पत्रिका के संपादक हैं। वो सपा-बसपा का भी हिस्सा रहे हैं।

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‘एक-एक पैसा मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के मदरसों को दिया’: शाहिद सिद्दीकी, पूर्व सांसद, समाजवादी पार
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‘एक-एक पैसा मुजफ्फरनगर व सहारनपुर के मदरसों को दिया’: शाहिद सिद्दीकी, पूर्व सांसद, समाजवादी पार