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उत्तर प्रदेश : ‘मैं बंदर हूँ, गधा हूँ…इस्तीफा ले लो’ : समाजवादी विधायक इरफान, कोर्ट में पेशी के बाद पुलिस पर भड़के

समाजवादी पार्टी विधायक इरफान सोलंकी को पेशी के लिए महाराज गंज जेल से कानपुर लाया गया था। जहाँ वह पुलिसकर्मियों पर भड़क गए। उन्होंने कहा है कि वह जानवर, गधा या बंदर नहीं हैं जो उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है। वहीं, इरफान की पत्नी नसीम कोर्ट के बाहर रोती हुई नजर आई। नसीम का कहना था कि योगी सरकार उस पर दया नहीं दिखा रही।

दरअसल, पुलिस इरफान सोलंकी को लेकर जा रही थी। इस दौरान पुलिस कर्मियों के साथ धक्का मुक्की हो गई। इससे वह भड़क गए। उन्होंने कहा, “पुलिस वाले धक्का मारते रहते हैं। हम विधायक हैं या अपराधी या आतंकवादी। तुम लोग (मीडिया) इन लोगों के खिलाफ कुछ नहीं चलाते। पुलिस वाले बदतमीजी करते हैं ये क्यों नहीं दिखाते तुम लोग। विधायक हैं हम की क्या हैं? धक्का मारते हैं। हम आदमी हैं कि जानवर हैं। बंदर हो गए हैं हम, गधे हो गए हैं। इनको इस्तीफा लेना है तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूँ। ये मुझे परेशान क्यों कर रहे हैं?”

वहीं, इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी कोर्ट के बाहर रोती हुई नजर आई। नसीम का कहना था कि सरकार ने उन्हें परेशान कर रखा है। महाराजगंज जेल में ठीक से मुलाकात नहीं हो रही, छोटी सी जाली से मुलाकात करवाते हैं। कानपुर कोर्ट में 5 मिनट की भी मुलाकात नहीं हो पाती। क्या वह इरफान सोलंकी को त्याग दें, या फिर मरा हुआ समझ लें? रमजान आ रहे हैं, उनकी परेशानी योगी को नहीं दिखती क्या?

नसीम ने आगे कहा है कि एक महिला ने झूठा आरोप लगाया, उसकी सुनवाई हो रही है। वह रो रहीं हैं लेकिन सरकार उनकी नहीं सुन रही। सरकार और पुलिस दोनों उनके पीछे पड़ी हुई है। नसीम ने यह भी कहा है, “हमें और इरफान को माफ कर दिया जाए। बच्चों के 10वीं और 12वीं के एग्जाम हैं। हम बच्चों के एग्जाम दिलवाएँ या कोर्ट में आएँ।”

जाजमऊ आगजनी मामले में आरोप तय होने के बाद इरफान की पहली बार कोर्ट में पेशी हुई। इरफान के अलावा रिजवान, मोहम्मद, शरीफ शौकत अली और इसराइल आटे वाला भी इस मामले में आरोपित हैं। सभी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। वहीं, इरफान सोलंकी और उसके भाई रिजवान सोलंकी की रंगदारी मामले में भी जिला जज की कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है।


उत्तर प्रदेश : निधि गुप्ता की हत्या कर भाग रहे सूफियान को पुलिस ने गोली मारी

                                      निधि गुप्ता का हत्यारा सूफियान गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
उत्तर प्रदेश के निधि गुप्ता हत्‍याकांड (Nidhi Gupta Murder) में फरार चल रहे आरोपित सूफियान को 18 नवंबर 2022 को लखनऊ पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी लखनऊ के ठाकुरगंज से हुई है। सूफियान पुलिस से भागने की कोशिश कर रहा था। एनकाउंटर में आरोपित के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एनकाउंटर के तुरंत बाद घायल आरोपित को गिरफ्तार किया और उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा है। अभी सूफियान खतरे से बाहर है। सोशल मीडिया पर आरोपित की तस्वीर भी सामने आई है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि वह एक जंगली इलाके में घायल अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ है।

इस घटना के बाद से सूफियान के घरवाले उसे बचाने का प्रयास कर रहे ​थे। वहीं, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने निधि के हत्यारे सूफियान पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। लखनऊ पुलिस निधि गुप्ता की मौत के बाद से लगातार सूफियान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। उसके पीछे लखनऊ पुलिस की 6 से ज्यादा टीमें लगी हुई थीं। पुलिस को सूफियान के फोन की आखिरी लोकेशन चौक में मिली थी। वहीं एक टीम दिल्ली के लिए रवाना की गई थी। इस बीच उसकी लोकेशन दुबग्गा इलाके में पता चली और टीम वहाँ पहुँच गई। यहीं पर पुलिस टीम की सूफियान के साथ मुठभेड़ हो गई। खबर है कि वह ठाकुरगंज से बालागंज की ओर भाग रहा था।

निधि गुप्ता हत्‍याकांड

लखनऊ के दुबग्गा इलाके के डूडा कॉलोनी में 15 नवंबर 2022 को निधि गुप्ता नाम की लड़की हत्या कर दी गई थी। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि सूफियान ने उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इलाज के दौरान निधि की मौत हो गई थी। घटना के बाद से सूफियान फरार था। हत्या के पीछे का कारण निधि का धर्म परिवर्तन और निकाह से इनकार करना बताया गया है।

सूफियान पर आरोप है कि वह काफी समय से निधि के पीछे पड़ा था। वह उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह का दबाव डाल रहा था। उसकी सनक से तंग आकर निधि को उसके परिजनों ने कुछ समय के लिए ननिहाल भी भेज दिया था। उसके वापस लौटते ही सूफियान की हरकतें फिर शुरू हो गई। इससे तंग आकर 14 नवंबर 2022 को निधि की माँ ने अपने भाई को बुलाया। वे सूफियान के घर जा रहे थे। इसी दौरान सूफियान ने पहले उन्हें धमकाया और फिर बाद में निधि को छत से धक्का दे दिया।

बहलोलपुर में शिवलिंग तोड़ा, मूर्तियाँ खंडित की, फर्श पर मिले खून के निशान मिलने पर एक्शन में आई नोएडा पुलिस, मीट की दुकानों पर चला बुलडोजर

         शिवलिंग और मूर्तियाँ खंडित की, पुलिस ने मीट की दुकानों पर चलवाया बुलडोजर (फोटो साभार: हिंदुस्तान)
उत्तर प्रदेश में नोएडा (Noida) के बहलोलपुर गाँव में स्थित शिव मंदिर के अंदर शिवलिंग और भगवान की अन्य मूर्तियों को खंडित (Vandalizing Shiv Temple) करने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, असामाजिक तत्वों ने शिव मंदिर में रविवार (20 मार्च 2022) रात को तोड़फोड़ की। उन लोगों ने शिवलिंग और मंदिर में रखी मूर्तियाँ भी खंडित कर दीं। इसके अलावा मंदिर के फर्श पर खून के निशान भी मिले।

21 मार्च 2022 सुबह जब ग्रामीण मंदिर पहुँचे, तो वे भगवान की खंडित मूर्तियाँ देखकर आग बबूला हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और हंगामा करने लगे।

वहीं, मंदिर के अंदर मांस फेंके जाने की भी खबर है। इस घटना के सामने आने के बाद आज दोपहर को पुलिस ने बहलोलपुर में स्थित मीट की दुकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया।

पुलिस उपायुक्त (मध्य नोएडा) हरीश चंदर ने बताया, “स्थानीय पुलिस को बहलोलपुर गाँव में एक शिव मंदिर के अंदर तोड़फोड़ के बारे में सूचना मिली थी। इसके बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वॉड के साथ पुलिस की एक टीम तुरंत घटनास्थल पहुँची, जहाँ भगवान की मूर्ति उन्हें क्षतिग्रस्त मिली।”

वहीं, अपर पुलिस उपायुक्त (जोन द्वितीय) इला मारन का कहना है, “घटनास्थल पर खून के धब्बे भी मिले हैं, जो प्रथम दृष्टया मानव के खून की तरह दिखते हैं। जाहिर है, शीशे में रखी मूर्ति को निकालने के लिए जिस व्यक्ति ने शीशा तोड़ा होगा, उसे चोट लग गई होगी और उसका खून फर्श पर गिर गया होगा।”

डीसीपी चंदर ने आगे कहा कि पुलिस मामले में हर दृष्टिकोण से जाँच कर रही है। उन्होंने मंदिर परिसर के अंदर मांस का एक टुकड़ा होने और घटना के वक्त मंदिर के पुजारी को बंधक बनाए जाने की अफवाह को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मंदिर के पुजारी से भी संपर्क किया है, जो रात में अपने घर चला गया था और सुबह मंदिर आने पर उसने तोड़फोड़ देखी। गाँव में कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है और मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जाँच की जा रही है।

योगी को फिर मिली जान से मारने की धमकी, कहा- 4 द‍िन में जो करना है कर लो

यूपी पुलिस के डायल 112 कंट्रोल रूम व्हाट्सएप पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए धमकी भरा मैसेज भेजा गया। कंट्रोल रूम पर मौजूद ऑपरेटर ने मैसेज मिलते ही अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मैसेज भेजने वाले नम्बर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

डायल 112 में 29 अप्रैल की शाम 7.58 मिनट पर मीडिया डेस्क के व्हाट्सएप नम्बर पर एक मैसेज आया था। जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें नुकसान पहुँचाने की धमकी दी गई।

मैसेज में सीएम योगी को पाँचवे दिन जान से मार देने की धमकी दी गई थी। मैसेज में धमकी देने वाले ने कहा कि चार दिन के अंदर मेरा जो कुछ कर सकते हो कर लो। यह मैसेज पढ़ते ही ड्यूटी पर तैनात कॉल टेकर अंकित दूबे सन्न रह गए। उन्होंने धमकी भरा मैसेज आने की सूचना ऑपरेशन कमांडर अंजुल कुमार को दी। 

जिसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मोबाइल धारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मुख्यमंत्री के लिए भेजे गए मैसेज को गम्भीरता से लेते हुए सर्विलांस सेल की मदद से जाँच जारी है। अभी तक संदिग्ध नम्बर की लोकेशन का सही पता नहीं चल सका है।

इससे पहले भी यूपी पुलिस की इमरजेंसी सेवा डायल 112 पर फोन कॉल कर के धमकी दी गई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को AK-47 से मार डाला जाएगा। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में FIR दर्ज कर के कार्रवाई शुरू की। 

मोबाइल नंबर 8874028434 से आए व्हाट्सप्प मैसेज में लिखा था “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 24 घंटों के भीतर AK-47 से भून दूँगा। ढूँढ सको तो ढूँढ लो।” इसके बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया। तुरंत ही 112 में तैनात ऑपरेंशंस कमांडर सहेंद्र यादव ने इस मामले की FIR दर्ज करवाई थी।

वहीं सीआरपीएफ के मुंबई कार्यालय को मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) की सुबह एक ई मेल भेजा गया। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी गई।

जानकारी के मुताबिक, मेल में धार्मिक स्थान जैसी जगह पर हमले की बात थी। यह भी लिखा था कि योगी आदित्यानाथ और अमित शाह को फिदायीन हमले में मारा जाएगा। इंडिया टुडे के अनुसार, मेल में उल्लेख था कि ‘हम 11 फिदायीन हमलावर हैं”, जो योगी आदित्यनाथ और अमित शाह को मारेंगे। 

‘योगी की मौत सुनिश्चित’ – बीवी को कुत्ते से कटवाने वाले AAP विधायक सोमनाथ भारती

जब कोई बन्दर अपने सिर पर चमेली का तेल मल बादशाह समझने लगता है, वही स्थिति आम आदमी पार्टी की है। दिल्ली में मुफ्त की रेवड़ियों बांट सत्ता हथियाने वाले अरविन्द केजरीवाल यह समझ बैठे हैं कि दिल्ली की तरह दूसरे राज्यों की जनता भी मुफ्त की रेवड़ियों के लालच में इनको सिर पर उठा लेगी। कोरोना काल में रोहिंग्यों का लालन-पालन करने प्रवासी मजदूरों को दिल्ली छोड़ने को मजबूर किया था। यही कारण है कि बिहार चुनाव में दूर रहे, हैदराबाद निकाय चुनावों में भी चुनाव लड़ने का साहस नहीं हुआ, आम आदमी पार्टी समर्पित आज़ाद उम्मीदवारों को मैदान में उतारा और सभी की जमानत जब्त हो गयी। 
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सवाल उठाने के लिए रायबरेली पहुँचे आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सोमनाथ भारती (Somnath Bharti) के मुँह पर कालिख (स्याही) फेंक दी गई। AAP ने स्वयं उनकी तस्वीर अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से साझा की। पार्टी ने इस घटना के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ये भी बताया कि सोमनाथ भारती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

AAP ने अपने ट्वीट में यूपी के अंदर तानाशाही चरम पर बताते हुए योगी राज को ‘अपराधी बचाओ, विरोध दबाओ’ के समकक्ष कहा। ट्वीट में लिखा गया, “पूर्व मंत्री व विधायक सोमनाथ भारती पर रायबरेली में भाजपाइयों ने हमला कर दिया और सोमनाथ जी को ही पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया।” आगे लिखा गया, “स्कूल, अस्पताल की बदहाली पर सवाल उठाने पर योगी सरकार ने AAP नेताओं को आतंकित करना शुरू कर दिया है।”

जानकारी के मुताबिक, रायबरेली में यूपी पुलिस से नोंकझोंक के दौरान AAP नेता सोमनाथ भारती के मुँह पर कहीं से एक युवक द्वारा स्याही फेंकी गई। कथित तौर पर यह युवक हिंदू युवा वाहिनी का है, जिसे उत्तर प्रदेश के अस्पतालों पर दिए गए भारती के विवादित बयान से आपत्ति थी।

इस घटना के बाद सोमनाथ भारती स्वयं युवक को पकड़ने के लिए दौड़ने लगे और ‘पकड़ो साले को’ कह कर उसके पीछे भागने लगे। पुलिस ने उन्हें संभालने की कोशिश की। मगर थोड़ी देर में माहौल बिगड़ गया और उनकी पुलिस से बहस हो गई।

बाद में पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर दोबारा अमेठी ले गई।

 कहा जा रहा है कि अमेठी में विधायक भारती पर एफआईआर दर्ज है, इसलिए उन्हें वहाँ ले जाया गया है।

मुख्यमंत्री योगी के लिए सोमनाथ भारती ने कहा- मौत सुनिश्चित है

इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई है। वीडियो में सोमनाथ भारती पुलिसकर्मी से कहते दिख रहे हैं, “ये सब करने से कुछ नहीं होगा अतुल, योगी की मौत सुनिश्चित है। उसको अरेस्ट करिए। और मेरी बात समझ लो। योगी से बोल दो ये सब करने से कुछ नहीं होगा। आप समझ लीजिए। यही सब करवा रहे हैं आप?”

सोमनाथ भारती ने पुलिस से की बदसलूकी, कहा-वर्दी उतरवा लूँगा

एक अन्य वीडियो में वो पुलिसकर्मी की वर्दी उतरवाने की बात कर रहे हैं। स्याही मुँह पर फेंके जाने से पहले की इस वीडियो में वह कहते हैं, “और आपकी वर्दी उतरवाएँगे हम। हम पहचान रहे हैं आपको। जो-जो आज बद्तमीजी कर रहा है मेरे साथ, सबकी वर्दी उतरवाऊँगा मैं। आप हट जाइए यहाँ से।” आगे पुलिस उनसे रुकने को कहती है, जवाब में वह कहते हैं, “किस कानून में लिखा है, किस संविधान में लिखा है। हम कोई अनपढ़ मंत्री हैं?”

AAP नेता का विवादित बयान- अस्पताल में होते हैं कुत्ते के बच्चे पैदा

गौरतलब है कि रविवार को रायबरेली पहुँचने से पहले AAP विधायक सोमनाथ भारती शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर अमेठी पहुँचे थे। इस दौरान योगी सरकार पर निशाना साधने के लिए उन्‍होंने विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, “हम उत्तर प्रदेश में आए हैं। हम यहाँ के स्कूलों को देख रहे हैं। यहाँ के अस्पताल को देख रहे हैं। ऐसी बदतर हालत में हैं कि अस्पतालों में बच्चे तो पैदा हो रहे हैं, लेकिन कुत्तों के बच्चे पैदा हो रहे हैं।”

भारती के इस बयान के बाद कई जगह उनका विरोध हुआ और कई लोगों ने अपना गुस्सा जाहिर किया। हालाँकि ये बात अलग है कि ‘कुते’ शब्द से उनका संबंध पुराना है। साल 2015 में सोमनाथ भारती की पत्नी ने भारती पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने कुत्ते डॉन से उन्हें कटवाया।

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‘योगी को 24 घंटे के भीतर AK-47 से भून दूँगा’: UP के मुख्यमंत्री को फिर से मिली धमकी
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‘योगी को 24 घंटे के भीतर AK-47 से भून दूँगा’: UP के मुख्यमंत्री को फिर से मिली धमकी

अपनी शिकायत में लिपिका (सोमनाथ भारती की पत्नी) ने कहा था, “भारती ने कुत्ते से मुझे कटवाया। जब कुत्ते ने मुझ पर हमला किया, तब सोमनाथ भारती वहीं खड़े रहे और देखते रहे। कुत्ते ने मुझे पेट में और कई अन्य हिस्सों पर काटा। भारती ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं और मुझे तत्काल कोई प्राथमिक चिकित्सा तक मुहैया नहीं करवाई।”

दिल्ली : AK-47 रखने वाला पूर्व कांग्रेस विधायक गिरफ्तार, जिसके समर्थन से केजरीवाल बने पहली बार मुख्यमंत्री

                      पूर्व कांग्रेस MLA रामबीर शोकीन (फाइल फोटो, साभार: इंडियन एक्सप्रेस)
रामबीर शोकीन मुंडका से विधायक थे। पहले कांग्रेस से जुड़े थे, बाद में निर्दलीय लड़े और केजरीवाल को पहली बार दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाने के लिए समर्थन भी दिया। अब 
पुलिस की गिरफ्त में हैं।

पूर्व विधायक रामबीर शोकीन पर 2016 में MCOCA लगाया था। आरोप था – डकैती, वसूली और अवैध हथियार रखने का। 2016 में गिरफ्तार भी हुए थे लेकिन 2018 में पुलिस को चकमा दे कर भाग गए थे। अब फिर से गिरफ्तार कर लिए गए हैं।

रामबीर शोकीन पर आरोप था कि उनके पास से AK-47 राइफल बरामद हुआ था। 2018 में वो उत्तर प्रदेश पुलिस को चकमा देकर भाग गए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल लेकर आई थी, जहाँ से वो भाग निकले थे।

आरोपित के भाग निकलने के बाद उत्तर प्रदेश की बागपत पुलिस ने उन्हें ढूँढने का प्रयास किया था, लेकिन वो नहीं मिला था। अंत में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस को इस बारे में सूचित किया था।

दिल्ली पुलिस ने पूर्व विधायक रामवीर शोकीन पर आरोप लगाया था कि उनके गार्डन से एके-47 राइफल मिली थी, जिसे कुख्यात बदमाश और दिल्ली का डॉन कहे जाने वाले नीरज बवानिया ने लूटी थी।

ऐसे में प्रश्न होता है कि क्या रामबीर को मिलने वाली पेंशन जारी रहेगी या बंद होगी? क्योकि MCOCA में गिरफ्तार पूर्व विधायक सरकार की किसी भी सुविधा का अधिकारी नहीं होना चाहिए। 

इस हाई प्रोफाइल केस में पूर्व विधायक रामवीर शोकीन को अस्पताल लेकर गए पुलिस वाले समन सिंह, राजेन्द्र कुमार और सुंदर कुमार को तब सस्पेंड कर दिया गया था।

उत्तर प्रदेश : मजार के अंदर सेक्स रैकेट, नासिर उर्फ़ काले बाबा को रंगे-हाथ पकड़ा

मजार में देह व्यापार करवाता था नासिर उर्फ़ काले बाबा (चित्र साभार: एशिया नेट न्यूज़)
लखनऊ में एक चौंकाने वाली घटना में मजार के एक संरक्षक काले बाबा उर्फ़ नासिर को एक सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ‘एशिया नेट न्यूज़’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके के हुसैनाबाद में स्थित जामा मजार के केयर टेकर ‘काले बाबा’ कथित तौर पर इलाज के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण करता था और देह व्यापार का धंधा भी चलाता था।

सोशल मीडिया पर नासिर उर्फ़ काले बाबा के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जिनमें मजार के अंदर बने कमरे में एक महिला और पुरुष को आपत्तिजनक हालत में देखा जा सकता है। यह खुलासा होने पर मौके पर जमा हुई भीड़ नासिर उर्फ़ काले बाबा को मजार से बाहर घसीट लाई और पिटाई के बाद उसे पुलिस को सौंप दिया।

जाँच में पता चला कि आरोपित नासिर उर्फ काले बाबा नाम का व्यक्ति मजार में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चला रहा था। स्थानीय लोगों को बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) सुबह उस पर शक हुआ तो वह कमरे में गए। वहाँ देखा कि एक महिला और युवक आपत्तिजनक हालत में लिप्त थे। जिसका वीडियो भी बनाया गया है।

नोट : इस वीडियो में अश्लील दृश्य शामिल हैं, सिर्फ वयस्क ही इसे देखें

यदि यही घटना किसी मन्दिर अथवा आश्रम में हुई होती, समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष, वामपंथी और मीडिया अब तक आकाश-पाताल एक कर देते। खोजी पत्रकार भी एक से बढ़कर एक ब्रेकिंग न्यूज़ से सनसनी फैला रहे होते। जैसाकि यूपीए काल में होता रहा है। लेकिन मस्जिदों और चर्चों में हो रहे घिनौने कामों पर मीडिया भी तुष्टिकरण नीति को अपनाता रहा है। जिस पर यदा-कदा लिखता रहा हूँ। कभी मीडिया तो क्या किसी छद्दम धर्म-निरपेक्ष और वामपंथियों ने इन घटनाओं पर चर्चा तक नहीं की।    

काले बाबा इलाज के नाम पर करता था शोषण

रिपोर्ट्स के अनुसार, लोगों ने बताया कि आरोपित नासिर उर्फ़ काले बाबा महिलाओं को इलाज के नाम पर अपने पास बुलाता था और फिर उनके सफेद दाग या बच्चे न होने की समस्या का इलाज करने का दावा करता था। इसी की आड़ में वह महिलाओं से जिस्म का धंधा भी करवाता आया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते कुछ दिनों से उन्हें मजार के अंदर गलत काम होने की शिकायतें मिल रही थी, जिसके बाद अचानक लोग मजार में घुस गए। एसीपी चौक आईपी सिंह ने बताया कि मजार संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा रहा है।

विवेक हत्याकांडः विरोध करने वालों पर योगी सरकार सख्त


लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड के बाद सिपाहियों पर हुई कार्रवाई के बाद से लगातार पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर टिप्पणी की जा रही है. इसी कड़ी में अमेठी जिले के जामो थाने में तैनात थानाध्यक्ष गजेंद्र सिंह की तल्ख टिप्पणी वाली पोस्ट सार्वजनिक हुई है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि यूपी के कानून मंत्री ‘बृजेश पाठक और डिप्टी सीएम केशव मौर्या को अपने यहां से पुलिस सुरक्षा हटाकर प्राइवेट गार्ड रख लेना चाहिए. दोमुहा नजरिया ठीक नहीं है. फेसबुक पर वायरल हुई यह पोस्ट ने बाद एसपी अनुराग आर्य ने थानेदार को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया. साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट की जांच अपर पुलिस अधीक्षक के साथ ही साइबर सेल को भी सौंप दी है.
इस मामले में एसपी अनुराग आर्य ने बताया कि सोशल मीडिया पर चल रहे संदेश का विश्लेषण कराया जाएगा. जिले में किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है. कोई भी पुलिसकर्मी अगर अनुशासनहीनता करेगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल थानेदार गजेंद्र सिंह की फेसबुक वाल से अब उक्त पोस्ट हटा ली गई है. एसपी ने कहा कि थानेदार को लाइन हाजिर कर दिया गया है. वहीं जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
विवेक तिवारी हत्याकांड में बर्खास्त सिपाहियों प्रशांत चौधरी व संदीप कुमार के पक्ष में खड़े हो रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ शुक्रवार को विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ के तीन थानेदारों को हटा दिया गया और इन्हीं थानों के तीन सिपाहियों को निलंबित भी किया गया। इसके साथ ही वाराणसी व मीरजापुर में दो बर्खास्त सिपाही भी गिरफ्तार कर लिए गए। दरअसल इस मामले में पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह का अनुशासन का डंडा बेजान निकला। गुरुवार को की गई उनकी अपील के बाद भी सिपाहियों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल दीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम मुख्य सचिव अनूपचंद्र पांडेय, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार व डीजीपी ओपी सिंह को तलब कर तस्वीरों व कार्रवाई के बारे में पूरी जानकारी ली। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने डीजीपी से कड़ी नाराजगी जताई। 
अकेले मेरी जिम्मेदारी नहीं 
डीजीपी मुख्यालय में शुक्रवार को हुई पुलिस अधिकारियों की साप्ताहिक बैठक में भी सिपाहियों में पनप रहे असंतोष का मुद्दा छाया रहा। सूत्रों के अनुसार डीजीपी ने अधीनस्थ अधिकारियों से कहा कि यह अकेले उनकी जिम्मेदारी नहीं है। आप लोग भी पुलिसकर्मियों के बीच जाकर सीधे संवाद करें और उनकी समस्याओं को समझें। 
तस्वीरें वायरल होने के बाद इसके नतीजे में अन्य शहरों से भी काली पट्टी बांधे जाने की खबरें आने लगीं। दोपहर बाद तीन महिला सिपाहियों की भी ऐसी ही फोटो सोशल मीडिया पर चलने लगी। इन घटनाओं ने ही डीजीपी के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगा दिया। डीआइजी कानून-व्यवस्था प्रवीण कुमार त्रिपाठी के अनुसार लखनऊ में नाका, अलीगंज व गुडंबा थानों की वायरल तस्वीरें सही पाई गईं लिहाजा अलीगंज इंस्पेक्टर अजय कुमार यादव, इंस्पेक्टर गुडंबा धर्मेश कुमार शाही व इंस्पेक्टर नाका परशुराम सिंह को शिथिल पर्यवेक्षण (काम में ढिलाई) के लिए उनके पदों से हटा दिया गया। पुलिसकर्मियों में असंतोष फैलाने के दोषी अलीगंज थाने के सिपाही जितेंद्र कुमार वर्मा, गुडंबा थाने के आरक्षी सुमित कुमार व नाका कोतवाली के सिपाही गौरव चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। लखनऊ, सीतापुर सहित कई अन्य जिलों की तस्वीरें भी वायरल हुई हैं, जिनके बारे में जांच की जा रही है।
कई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ 
प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार कई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करके भी उनको वायरल किया जा रहा है। कई पुरानी फोटो भी वायरल हो रही हैं। जांच में जो फोटो सही पाई गई हैं, उनमें शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जायेगी। कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों ने हाथ में काली पट्टी बांधकर फोटो खिंचवाने के बाद तस्वीर वायरल की और फिर पट्टी उतार दी थी। हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराये गये मुकदमे के तहत सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों व पोस्टों की जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को विवेक हत्याकांड के आरोपित सिपाही के पक्ष में फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले एटा में तैनात 2011 बैच के सिपाही सर्वेश चौधरी को निलंबित किया गया था। 

एपल मैनेजर हत्याकांड: फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पलटकर रख दी पूरी कहानी

मृतक एपल मैनेजर विवेक तिवारी (बाएं), आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी
मृतक एपल मैनेजर विवेक तिवारी (बाएं), आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी
28 सितंबर की देर रात इसी कार में थे विवेक, जिस पर कॉन्स्टेबल प्रशांत ने गोली चलाई थी।
28 सितंबर की देर रात इसी कार में थे विवेक,
 जिस पर कॉन्स्टेबल प्रशांत ने गोली चलाई थी।
एपल मैनेजर हत्याकांड मामले में सामने आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने कहानी पलटकर रख दी है। रिपोर्ट से हत्याकांड के मेन आरोपी कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी की वो दलील खारिज होती दिख रही है, जिसमें उसने विवेक द्वारा तीन बार कुचलने के प्रयास के बाद सेल्फ डिफेंस में गोली चलाने की बात कही थी। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बाइक से उतरते ही विवेक पर प्रशांत ने पिस्टल तानी होगी। जिससे घबराकर मैनेजर ने भागने की कोशिश की होगी। रिपोर्ट यह भी कहती है कि गोलीकांड के बाद कॉन्स्टेबल की बाइक और विवेक की कार में तोड़फोड़ की गई है। फिलहाल, फॉरेंसिक रिपोर्ट के हिसाब से जानते हैं आखिर क्या हुआ होगा उस रात।
कार के बोनेट से की गई छेड़छाड़
कार के बोनेट से की
गई छेड़छाड़
28 सितंबर की देर रात गोमतीनगर इलाके में एपल मोबाइल लॉन्चिंग कार्यक्रम से लौटने के दौरान कॉन्स्टेबल प्रशांत की गोली से एपल सेल्स मैनेजर विवेक की मौत हो गई थी।
फॉरेंसिक टीम के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कॉन्स्टेबल प्रशांत ने विवेक की कार से तकरीबन ढाई से तीन फीट आगे बाइक खड़ी की।
इसके बाद हाथ में पिस्टल लिए विवेक की ओर पहुंचा। लेकिन उसने कार का शीशा नहीं उतारा। पिस्टल देख विवेक घबराया होगा और डर से भागने की कोशिश में कार आगे बढ़ा दी।
घबराहट में विवेक ने कार की स्टीयरिंग पूरी तरह से घुमाई, लेकिन बाइक पास खड़ी होने से कार का बायां पहिया बाइक के अगले पहिए से टकराया और बाइक गिर गई।
लेकिन विवेक को जाने नहीं देना चाहता था प्रशांत: एक्सपर्ट
फॉरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक, बाइक से टकराने के बाद विवेक ने कार बैक कर फिर से आगे बढ़ाई। लेकिन प्रशांत उसे भागने नहीं देना चाहता था।
अवलोकन करें:--
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लखनऊ में हुए विवेक हत्याकांड के बाद सिपाहियों पर हुई कार्रवाई के बाद से लगातार…
इस कारण प्रशांत पिस्टल तानकर कार के सामने आ गए। फिर फायर करने के इरादे से ट्रिगर दबा दी। जिसके बाद गोली विंड स्क्रीन को चीरते हुए सीधे विवेक की ठोड़ी में जा लगी।
हत्याकांड की इकलौती गवाह सना ने बताया था, सफेद अपाचे सवार दो कॉन्स्टेबल गुस्से में हमारी कार की ओर आए। फिर कार के सामने बाइक खड़ी कर दी। वो हमें रोकना चाहते थे। हमें पता नहीं था कि आखिर हमें क्यों रोका जा रहा है।
एक्स्पर्ट्स का कहना है, जिस दूरी से खड़े होकर प्रशांत ने विवेक पर गोली चलाई थी बुलेट उसकी गर्दन को चीरती हुई पार हो जाती। लेकिन विंड स्क्रीन में टकराने के बाद रेंज कम हो गया और गोली गर्दन में फंसी रह गई।
प्रशांत के पास 9 एमएम पिस्टल थी। जो 50 मीटर तक इफेक्टिव फायर कर सकती है। हालांकि, इसकी अधिकतम रेंज 1800 मीटर है।
हड़बड़ी में पुलिस ने छोड़ दिए कई सुराग
वारदात को सेल्फ डिफेंस का रूप देने के लिए पुलिस ने स्क्रिप्टिंग करना शुरू कर दी थी। लेकिन इस दौरान कई बड़ी गलती कर दी। रिपोर्ट के मुताबिक, उस रात मौके पर पड़ी बाइक में कार के बंपर के नीचे लगे सपोर्टर को फंसा दिखाया गया।
जबकि फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बंपर में अगर बाइक फंसती, तो वह घिसटती जाती या फिर कार उसके ऊपर से होकर निकल जाती। लेकिन कार के नीचे से ऐसे कोई निशान नहीं मिले, जिससे कॉन्स्टेबल के बयान पर मुहर लगे।
मतलब, घटना के बाद बाइक से तोड़फोड़ की गई। यह भी कहा जा रहा है कि विवेक की कार से भी तोड़फोड़ की गई थी। पिलर से टकराने के बाद की फोटो और दूसरे दिन की तस्वीर में अंतर है।