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मोकामा हिंसा मामले में देर रात अनंत सिंह गिरफ्तार, पटना पुलिस एक्शन में आई: EC ने अधिकारियों का किया तबादला, कई सस्पेंड

                                  जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह गिरफ्तार ( फोटो साभार-it)
बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल और बिहार ऐसे राज्य हैं जिनमे माफिया और दबंगों का बोलबाला रहा है। उत्तर प्रदेश में तो योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद से स्थिति काफी हद तक काबू में आ गयी है। लेकिन बंगाल और बिहार में जब तक योगी की तरह राज्य सरकारें सख्त नहीं होंगी दबंगों का बोलबाला ख़त्म नहीं होगा। बंगाल में पहले वामपथियों के संरक्षण में दबंग फलफूल रहे थे और अब ममता बनर्जी की छत्रसाया में। 

बिहार में इतने सालों से नितीश कुमार मुख्यमंत्री हैं क्यों नहीं दबंगों पर योगी की तरह कार्यवाही की? फिर कहा जाता है कि नितीश के सुशासन में बिहार विकास कर रहा है। लेकिन कोई पार्टी ऐसी नहीं जिसने दबंगों को चल रहे विधानसभा चुनाव में टिकट न दिया हो। जब अपने आपको ईमानदार का प्रमाण लिए फिर पार्टी ही अपराधियों को टिकट देगी अपराध ख़त्म नहीं हो सकता। फिर चुनाव आयोग अपराधियों(चाहे जमानत पर हो) के नामांकन क्यों स्वीकार करती है? जेलों में बंद अपराधी चुनाव लड़ते हैं, क्यों?      

बिहार के मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या के सिलसिले में जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह को शनिवार (1 नवंबर 2025) देर रात गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पूछताछ के लिए पटना लाया गया है।

पटना पुलिस ने मोकामा से जदयू उम्मीदवार और पूर्व विधायक अनंत सिंह को जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की गुरुवार को हुई हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के नेतृत्व में पुलिस शनिवार रात करीब 11.10 बजे बाढ़ पहुँची। यहाँ के कारगिल बाजार में अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे।

पुलिस की टीम ने उनसे बातचीत की और देर रात हिरासत में लेकर बाढ़ उनके घर पहुँची। पूछताछ के बाद अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और देर रात ही पटना लाया गया।

जनसुराज समर्थक दुलारचंद की हत्या को लेकर दायर एफआईआर में अनंत सिंह का भी नाम है। वह पुलिस की जाँच के घेरे में हैं।

पुलिस ने मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी इस मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि ये लोग दुलारचंद यादव की हत्या के समय घटनास्थल पर मौजूद थे। तीनों को जल्द ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

पटना के पास मोकामा में चुनाव प्रचार के दौरान फेफड़े में चोट और कई पसलियों में फ्रैक्चर के कारण दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। गुरुवार को जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए प्रचार करते समय उन पर हमला करने का आरोप लगा था।

पटना के डीएम त्यागराजन देर रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना की जानकारी दी। इस दौरान पटना के एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने कहा, “पुलिस ने दुलार चंद यादव की हत्या के सिलसिले में तीन लोगों – अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को गिरफ़्तार किया है।”

 उन्होंने आगे कहा, “पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शुरुआती जाँच से पता चलता है कि यह हत्या का मामला है।”

एसएसपी ने आगे कहा कि शुरुआती जाँच में दो प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के समर्थकों के बीच झड़प का पता चला है, जिसके बाद यादव का शव बरामद किया गया। दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई और जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि घटना के समय अनंत सिंह अपने साथियों के साथ मौके पर मौजूद थे। अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी पर भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का भी आरोप है।

अनंत सिंह का नाम एफआईआर में दर्ज

पुलिस ने घटना से संबंधित 3 एफआईआर दर्ज की थी और दो लोगों को गिरफ्तार किया था। दुलारचंद यादव के पोते द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर में अनंत सिंह समेत 5 लोगों के नाम हैं। दूसरी एफआईआर अनंत सिंह गुट द्वारा दर्ज की गई थी, जबकि तीसरी एफआईआर पुलिस ने अपनी जाँच के आधार पर दर्ज की थी।

सिंह ने आरोप लगाया था कि यह हमला पूर्व सांसद सूरजभान सिंह ने कराया है। वह आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी के पति हैं।

सिंह ने दावा किया, “हम लोगों से मिल रहे थे और वोट माँग रहे थे, तभी एक अन्य उम्मीदवार के समर्थकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए। मैंने अपने समर्थकों से कहा कि वे जवाब न दें और आगे बढ़ गए। सूरजभान के लोगों ने हमारे वाहनों पर हमला किया। दुलार चंद ने सबसे पहले हाथ उठाया। यह पूरा खेल सूरजभान सिंह द्वारा खेला जा रहा है।”

चुनाव आयोग ने लिया एक्शन

चुनाव आयोग ने मोकामा में यादव की हत्या से जुड़ी हिंसा को कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले में बाढ़ के SDO चंदन कुमार को हटा दिया है। इनकी जगह पर 2022 बैच के IAS अधिकारी आशीष कुमार को भेजा गया है। इसी तरह बाढ़ के SDPO-1 राकेश कुमार को भी हटा दिया है। इनकी जगह CID के डीएसपी आनंद कुमार सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा बाढ़-2 के अनुमंडल पुलिस अधिकारी अभिषेक सिंह को भी निलंबित करने का निर्देश दिया है।

शनिवार(नवम्बर 1) को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को बताया, “आयोग ने निर्देश दिया है कि पटना के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) विक्रम सिहाग का भी तबादला किया जा सकता है। इसलिए, उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों का एक पैनल तत्काल भेजा जाए।”

अधिकारियों को चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

बिहार में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि मतों की गिनती 14 नवंबर को होगी।

‘माँ कामाख्या मंदिर में होती है नरबलि’, एंकर के बयान पर CNN न्यूज18 ने माँगी माफी… कहा- क्लिप भी हटा रहे: राजा रघुवंशी की हत्या से जोड़ी थी फर्जी बात; TRP के चक्कर में हिन्दू देवी-देवताओं पर कुछ भी बकवास बंद करो

                               सीएनएन न्यूज 18 ने माँगी माफी ( फोटो साभार-सीएनएन न्यूज18 )
सीएनएन न्यूज़18 ने गुरुवार (12 जून 2025) को अपने एक एंकर के ऑन एयर कही गई बातों को लेकर माफी माँगी है। एंकर आकांक्षा स्वरूप ने कामाख्या मंदिर में मानव बलि का दावा किया था और राजा रघुवंशी की हत्या को उससे जोड़ा था। चैनल ने इसे पूरी तरह से गलत बताया और कहा कि ऐसा करने का उनका कोई इरादा नहीं था।
एंकर आकांक्षा स्वरूप को माँ कामाख्या मन्दिर के महत्व का अध्ययन करना चाहिए। एंकर आकांशा क्या बताएगी कि यह मन्दिर किस देवी को अर्पित है और क्यों? अपनी TRP के चक्कर में हिन्दू देवी-देवताओं पर कुछ भी कर दो बकवास। 

सीएनएन न्यूज़18 ने एक्स पर पोस्ट किया, “कल प्रसारित एक शो में, राजा रघुवंशी हत्याकांड के संदर्भ में, सीएनएन न्यूज़18 के एंकर ने असम के पवित्र कामाख्या मंदिर में ‘नर बलि’ का गलत उल्लेख किया। यह पूरी तरह से गलत निर्णय था। हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था। हम उन सभी लोगों से माफी माँगते हैं, जिनकी धार्मिक भावनाएँ इन टिप्पणियों के बाद आहत हुई हैं। इसके अलावा हमने अपने सभी प्लेटफॉर्म से इस तरह के किसी भी क्लिप का संदर्भ हटा दिया है। हमें इन टिप्पणियों पर गहरा खेद है और हम इसके लिए माफी माँगते हैं।”

जून 11 को राजा रघुवंशी की बहन श्रास्ती रघुवंशी से बात करते हुए एंकर आकांक्षा स्वरूप ने विवादित टिप्पणी की। श्रास्ती रघुवंशी ने उनसे बात करते हुए दावा किया कि यह नर बलि का मामला भी हो सकता है, क्योंकि हनीमून कपल मेघालय जाने से पहले गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर गए थे। राजा की हत्या उनकी पत्नी सोनम ने मध्य प्रदेश के तीन सहयोगियों की मदद से की थी।

आकांक्षा स्वरूप ने कहा, “ऐसा कहा जा रहा है कि यह मानव बलि का मामला हो सकता है। हमने राजा रघुवंशी के भाई से बात की है, जिन्होंने कहा कि इसे नर बलि कहा जा सकता है क्योंकि उन्हें पीछे से चाकू मारा गया था और उनके गले में माला भी थी। वे कामाख्या गए थे, जहां मानव बलि दी जाती है।”

फिर एंकर ने पूछा, “तो क्या ये बातें संदेह पैदा करती हैं कि यह तांत्रिक हत्या हो सकती है?” इसका जवाब देते हुए राजा की बहन ने कहा कि वह इस पर कुछ नहीं कह सकती। हालाँकि उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि कामाख्या में नर बलि दी जाती है।

यह CNN News18 की एंकर आकांक्षा स्वरूप द्वारा लगाया गया एक पूरी तरह से झूठा दावा है। कामाख्या में कोई मानव बलि नहीं दी जाती है। हाँ, शक्ति पीठ पर पशु बलि दी जाती है। यहाँ दुर्गा पूजा के दौरान कई तरह के जानवरों और पक्षियों की बलि दी जाती है।

सीलमपुर मर्डर : दिल्ली : तमंचे वाली ‘जिकरा डॉन’ के इशारे पर चाकुओं से गोद दिया गया था 17 साल का कुणाल : हत्या के बाद से दहशत में हैं हिंदू

                                                         जिकरा (बाएँ) कुणाल (दाएँ) 
दिल्ली के सीलमपुर में हिन्दू लड़के कुणाल की हत्या मामले में पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए जाने वालों में मुख्य आरोपित लेडी डॉन जिकरा भी है। पुलिस को पता चला है कि जिकरा के भाई पर 6 महीने पहले हुए हमले का बदला लेने के लिए कुणाल की हत्या की गई थी। पुलिस अब इन आरोपितों की उम्र का सत्यापन कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में जिकरा ने बताया है कि उसके भाई साहिल पर दीवाली के समय हमला हुआ था। जिकरा ने बताया है कि यह हमला कुणाल के 2 दोस्तों ने किया था। उनके नाम शंभू और लाला है। इस हमले के बाद से लाला फरार चल रहा है।

जिकरा से पूछताछ में पुलिस को मालूम हुआ है कि हमले से पहले उसके भाई साहिल ने कुणाल से लाला का पता पूछा था। साहिल को जब कुणाल ने लाला के विषय में नहीं बताया तो उसी की चाकू घोंप कर हत्या कर दी गई। यह भी पता चला है कि इस हत्या की साजिश जिकरा ने खुद ही रची थी और भाइयों को इसके लिए उकसाया था।

वहीं इस मामले की जाँच की कड़ी में पुलिस ने 7 लोगों को पकड़ा है। मुख्य आरोपित जिकरा और साहिल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। आशंका जताई जा रही है कि गिरफ्तार हुए कुछ लोग अभी नाबालिग हो सकते हैं, इसलिए उनकी आयु का सत्यापन हो रहा है।

दिल्ली पुलिस को जिकरा की रिमांड 19 अप्रैल, 2025 को मिली थी। उसे 2 दिन की रिमांड पर भेजा गया था। अब उसके भाई साहिल को भी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। यह भी सामने आया है कि जिकरा आर्म्स एक्ट के मामले में जेल भी जा चुकी है। घटना से 15 दिन पूर्व ही वो जेल से बाहर आई थी। 

रील बनाने की शौक़ीन जिकरा सीलमपुर की ही रहने वाली है। अपने साथ तमंचा लेकर चलती रही है। इंस्टाग्राम पर भी उसके 15,000 से अधिक फॉलोवर्स हैं। पुलिस को यह भी पता चला है कि जिकरा एक और गैंगस्टर हाशिम बाबा की बीवी के साथ रहती थी। इस दौरान वह अपना गैंग भी बना रही थी।

16 अप्रैल, 2025 को घर से बाहर दूध लेने के लिए निकले कुणाल की हत्या चाकुओं से गोद कर दी गई थी। इसके बाद सीलमपुर में काफी विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। लोगों ने आरोप लगाया था कि यहाँ हिन्दुओं का जीना मुहाल है। अब इस मामले में जाँच और कार्रवाई चल रही है।

दिल्ली से लेकर हरियाणा तक दंगों में आम आदमी पार्टी नेता ही क्यों आरोपित?

ताहिर हुसैन के बाद अब नूँह दंगों में हत्यारोपित जावेद अहमद 
हरियाणा के नूँह और गुरुग्राम के इलाकों में हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप कुमार की मौत हो गई थी। सोहना में प्रदीप की हत्या के मामले में AAP नेता जावेद अहमद के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी निकलकर सामने आ रही हैं कि जावेद का भतीजा तौसीफ फरीदाबाद के चर्चित निकिता तोमर हत्याकांड में दोषी पाया गया था। उसे कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आप नेता जावेद अहमद का नूँह दंगों में नाम आते ही आम आदमी पार्टी उसके बचाव में उतर गई है ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में AAP ने मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन के बचाव में किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, AAP नेता जावेद अहमद के सोहना इलाके में लगे पोस्टर में उसे अल्पसंख्यक मोर्चे का अध्यक्ष बताया गया है। वहीं, नूँह दंगे में हत्या और मुस्लिम दंगाई भीड़ का नेतृत्व करने के मामले में आप नेता पर FIR दर्ज होने के बाद दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने ट्वीट किया और अरविंद केजरीवाल से सवाल पूछा है। सचदेव ने लिखा, “दिल्ली में ताहिर हुसैन और अब हरियाणा में जावेद अहमद… जगह अलग हो सकती है, पर पार्टी एक ही है।”

सचदेव ने AAP सुप्रीमों अरविन्द केजरीवाल से सवाल पूछा है, “क्या दंगा करना और मासूमों की हत्या करना ही है AAP की अलग तरह की राजनीति है?” वहीं उन्होंने आगे AAP के दंगाई और हिंदू-विरोधी चेहरे की बात करते हुए केजरीवाल को लताड़ लगाई है। 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में उतरी पार्टी 

AAP नेता जावेद अहमद के बचाव में पार्टी ने अपने कई नेता उतार दिए हैं। AAP के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनुराग ढांडा (Anurag Dhanda) ने जावेद अहमद पर दर्ज FIR पर सफाई देते हुए उल्टा बीजेपी पर ही पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “बीजेपी को हरियाणा के लोग सिरे से खारिज करने लगे हैं। इसलिए बीजेपी अब षड्यंत्र रचना चाहती है और समाज को बाँटने का काम कर रही है। आज पूरा देश जानता है कि कौन दंगे भड़काता है और उसके बाद झूठी FIR कर दूसरे पार्टी के नेताओं को फँसाने का काम करते हैं।”
AAP नेता अनुराग ढांडा ने आगे कहा कि जावेद अहमद जो हमारी पार्टी के नेता है उनके खिलाफ झूठी FIR दर्ज करवाई गई है। उन्होंने दावा किया कि जहाँ पर ये घटना हुई उस दौरान जावेद उस जगह से करीबन 100-150 किलोमीटर दूर थे।

‘इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा’: जावेद अहमद 

बजरंग दल नेता प्रदीप की हत्या के मामले में पुलिस को एक फुटेज भी हाथ लगा है, जिस सीसीटीवी फुटेज में बजरंग दल के नेता प्रदीप को घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया है। बता दें कि 31 जुलाई को हुई हिंसा में बजरंग दल के नेता प्रदीप शर्मा को गाँव रायसीना के समीप गंभीर रूप से हमला किया गया था, जिसके 1 दिन बाद ही उनकी मौत हो गई। इस मामले में आप नेता जावेद अहमद पर FIR दर्ज हुई है। 
दर्ज FIR में चश्मदीद पवन ने बताया, “नूहं के नल्हड़ मंदिर से प्रदीप कुमार और मुझे रेस्क्यू कराने के बाद नूहं की पुलिस लाइन लाया गया। वहाँ से रात 10:30 बजे वो अपनी तीन गाड़ियों में घर के लिए निकले। उन्हें एक पुलिस वैन एस्कॉर्ट कर रही थी, लेकिन सोहना के पास पुलिस वैन के पुलिसकर्मी ये कहते हुए चले गए कि आगे रूट क्लीयर है। इसके बाद एक स्कॉर्पियो कार ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। इसके बाद केएमपी पर उनकी गाड़ी को कार ने ओवरटेक करके रुकवा लिया। पवन के मुताबिक, “भीड़ में मौजूद जावेद अहमद ने कहा कि इन्हें मार दो बाकी मैं देख लूँगा।”
प्रत्यक्षदर्शी पवन के अनुसार, दंगाई मुस्लिम भीड़ ने दोनों को कार से निकाल कर बुरी तरह पीटा। पवन के मुताबिक उसे तो किसी तरह पुलिस भीड़ के चंगुल से निकाल कर ले गई, लेकिन प्रदीप नहीं निकल सके क्योंकि उनके सिर पर दंगाइयों ने रॉड मार दी थी। वहीं बाद में प्रदीप की दिल्ली के अस्पताल में मौत हो गई। पवन ने एफआईआर में लिखाया कि वो जावेद अहमद को अच्छी तरह पहचानते हैं। इसी बीच सोहना चौक पर 200 लोगों की भीड़ मिली जिसे जावेद अहमद लीड कर रहा था।
इससे पहले दिल्ली दंगों के समय भी तमाम वीडियो सबूत मिलने के बाद भी मुख्य साजिशकर्ता ताहिर हुसैन को आम आदमी पार्टी अंत तक बचाती रही थी वही एक बार फिर दोहराया जा रहा है। AAP ने तब उलटा ताहिर हुसैन को ही पीड़ित बताते हुए कहा था कि भीड़ उसके घर में घुस गई। बता दें कि नूहं दंगा मामले में अब तक कुल 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 80 को एहतियातन हिरासत में लिया गया है तथा 104 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। 

‘सभी को मार डालो, जो होगा मैं देख लूँगा’: AAP नेता जावेद अहमद के कहने पर मुस्लिम भीड़ ने की प्रदीप कुमार की हत्या, निकिता तोमर को गोली मारने वाला तौसीफ का चाचा

                                                       मृतक प्रदीप और AAP नेता जावेद अहमद
ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2023 को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर चौतरफा हमला कर दिया था। सड़क से लेकर मंदिर तक में उन पर फायरिंग की गई। अस्पताल में मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से उनका धर्म पूछकर मारा-पीटा गया है। इस हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों घायल हैं।

हिंसा की जाँच कर रही SIT ने भी प्रथम दृष्ट्या इसे एक सुनियोजित षडयंत्र माना है। जाहिर सी बात है कि बिना नेतृत्व के एक समुदाय के हजारों व्यक्ति सड़कों पर रणनीति के तहत उतर कर हमला नहीं कर सकते। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे। ये हथियार भी उन्हें आसानी ने नहीं मिले होंगे। इन सब शंकाओं के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का नाम सामने आ रहा है।

इस राजनेता का नाम एक FIR में आया है। यह FIR बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या से संबंधित है। प्रदीप कुमार नल्हड मंदिर पर हुए हमले में बच गए थे और पुलिस टीम अन्य हजारों लोगों के साथ उन्हें भी बचाकर नूहं के पुलिस लाइन तक लाई थी। हालाँकि, मंगलवार (1 अगस्त 2023) को नूहं पुलिस लाइन से जब वे अपने घर जा रहे थे, उसी दौरान दंगाई भीड़ ने घेर कर उन्हें मार डाला था।

प्रदीप कुमार के अलावा, उन्मादी भीड़ ने शक्ति सैनी और अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत और होमगार्ड के दो जवानों की भी हत्या कर दी थी। इसमें अभिषेक चौहान अपने साथ आए महिलाओं और बच्चों को बचाते हुए मारे गए थे। दंगाइयों ने पहले उन्हें गोली मारी थी। उसके बाद उनका गला काटकर सिर को पत्थर से कुचल दिया था।

ऑपइंडिया के पास प्रदीप की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर उपलब्ध है। लगभग 200 से अधिक लोगों की हत्यारी भीड़ द्वारा उनकी हत्या के एक दिन बाद यानी, 2 अगस्त 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्राथमिकी बजरंग दल के एक अन्य कार्यकर्ता पवन कुमार ने दर्ज कराई है। पवन मृतक प्रदीप के साथ थे।

                                               ऑपइंडिया द्वारा हासिल की गई एफआईआर की कॉपी

पवन कुमार ने अपनी शिकायत में जावेद अहमद नामक व्यक्ति को मुख्य आरोपित बताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ ने जावेद अहमद के आदेश पर प्रदीप कुमार और उनके साथ आए बजरंग दल के अन्य सदस्यों पर जानलेवा हमला किया था। गौरतलब है कि आरोपी जावेद अहमद आम आदमी पार्टी का नेता है।

शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी।

उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा। पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है।

FIR के अनुसार, उन्होंने पुलिस की सुरक्षा के बिना कुछ ही दूरी तय की थी कि एक अपरिचित स्कॉर्पियो कार ने तेज रफ्तार से उनका पीछा करना शुरू कर दिया। उनकी कार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP एक्सप्रेसवे) पर केवल एक या दो किलोमीटर ही चली होगी, तभी अचानक स्कॉर्पियो कार ने उन्हें रोक लिया।

पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”

पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।”

शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे। बाद में पुलिस ने प्रदीप कुमार को बचाया और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गई, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

कौन है जावेद अहमद?

एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कई बार उल्लेख किया कि बजरंग दल कार्यकर्ता प्रदीप कुमार पर हमले और हत्या के पीछे मुख्य आरोपित जावेद अहमद नामक व्यक्ति है। चूँकि एफआईआर में केवल आरोपित के नाम का उल्लेख किया गया था, इसलिए ऑपइंडिया ने उसके बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करने के प्रयास में शिकायतकर्ता पवन कुमार से बात की।
पवन कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि जावेद अहमद कोई और नहीं, बल्कि हरियाणा के सोहना निर्वाचन क्षेत्र से आम आदमी पार्टी का नेता है। उन्होंने कहा कि जावेद ने ही भीड़ को जुटाया था और प्रदीप कुमार एवं बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने के लिए उकसाया था।
पवन कुमार ने हमें आगे बताया, “इस्लामी भीड़ ने उसके उकसाने पर ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए हम पर और वहाँ मौजूद अन्य निहत्थे हिंदुओं पर हमला कर दिया।”
जब हमने पवन कुमार से पूछा कि क्या उन्हें यकीन है कि AAP नेता इस्लामवादियों का नेतृत्व कर रहा था तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि वह जावेद को अच्छी तरह पहचानते हैं, क्योंकि उन्होंने अक्सर जावेद और उसके परिवार के सदस्यों को हरियाणा के सोहना के इलाके में घूमते देखा है।
पवन कुमार से बात करने के बाद हमने आरोपित जावेद अहमद के बारे में कुछ और जानकारी जुटाने के लिए खोजबीन शुरू की। खोजबीन के दौरान ऑपइंडिया को 2 अगस्त 2022 को आम आदमी पार्टी, हरियाणा इकाई द्वारा जारी एक प्रेस नोट मिला, जिसमें जावेद अहमद को AAP के अल्पसंख्यक सेल के राज्य समन्वयक के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की गई थी।
जावेद अहमद पहले सोहना विधानसभा से बसपा का उम्मीदवार था। हालाँकि, 14 मार्च 2022 को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वह AAP में शामिल हुआ था।
                                                                       टोपी में जावेद अहमद
आम आदमी पार्टी द्वारा 2022 में पंजाब विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद हरियाणा के कई पूर्व मंत्री, विधायक और उनके सहयोगी AAP पार्टी में शामिल हुए थे। जावेद अहमद भी इनमें से एक था। वह बहुजन समाज पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया था।

हरियाणा की निकिता तोमर हत्याकांड में भी आरोपित

साल 2020 में हरियाणा के बल्लभगढ़ में निकिता तोमर की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी। निकिता की दिन-दहाड़े हत्या करने वाला तौसीफ उससे निकाह करना चाहता था। जब निकिता इसके लिए तैयार नहीं हुई तो उसने अपने साथी रेहान के साथ मिलकर निकिता की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। तौसीफ इसी जावेद अहमद का भतीजा है।
इस हत्याकांड में जावेद अहमद से भी जाँच एजेंसियों ने पूछताछ की थी। पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य आरोपित तौसीफ के अब्बू जाकिर हुसैन, अम्मी असमीना और चाचा जावेद अहमद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराया था। हालाँकि, कोर्ट ने जावेद को अग्रिम जमानत दे दी थी। 

राजनीतिक रूप से रसूखदार है जावेद का परिवार

जावेद अहमद का परिवार काफी रसूखदार है। जावेद का चाचा कबीर अहमद विधायक रह चुके हैं। वही, उसका चचेरा भतीजा आफताब अहमद मेवात जिले की नूहं सीट से कॉन्ग्रेस विधायक है। इतना ही नहीं, आफताब अहमद के अब्बू और जावेद अहमद का भाई खुर्शीद अहमद हरियाणा के पूर्व मंत्री रह चुके हैं।
जावेद अहमद ने पिछली बार सोहना विधानसभा से मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए गया था। हारने के बाद भी इस परिवार का रूतबा कम नहीं है और अक्सर विवादों में रहता है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल इकाई के पदाधिकारी थे। अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला होने के कारण वह छोटे-मोटे काम करते थे। बजरंग दल की गुरुग्राम इकाई से जुड़े लोगों ने कहा कि पुलिस शव परीक्षण और अन्य कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मृतक के शव को सीधे उसके पैतृक गाँव बागपत भेजेगी।
31 जुलाई 2023 को जब हरियाणा के नूहं में हिंदु पर हमला हुआ तो ऑपइंडिया और कई अन्य प्लेटफार्मों पर खुलासा किया गया कि छतों से उन पर पथराव किया गया था। कट्टरपंथी मुस्लिम लड़के और पुरुष पहाड़ी इलाके में चले गए थे और वहीं से मंदिर हिंदुओं पर गोलीबारी कर रहे थे। इनमें 14 साल के बच्चे तक शामिल थे।
पहाड़ की चोटियों से उन पर एसिड की बोतलें फेंकी गईं और कई महिलाओं को परेशान किया गया। हिंसा के दौरान, कई महिलाओं और बच्चों (जिनकी संख्या लगभग 3000 थी) ने मंदिर में शरण ली थी और पुलिस ने उन्हें कुछ घंटों बाद ही बचा लिया था। हमले के दौरान मंदिर परिसर के आसपास मौजूद लोगों पर एके-47 से फायरिंग की गई थीं।(साभार)

उत्तर प्रदेश : निधि गुप्ता की हत्या कर भाग रहे सूफियान को पुलिस ने गोली मारी

                                      निधि गुप्ता का हत्यारा सूफियान गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
उत्तर प्रदेश के निधि गुप्ता हत्‍याकांड (Nidhi Gupta Murder) में फरार चल रहे आरोपित सूफियान को 18 नवंबर 2022 को लखनऊ पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी लखनऊ के ठाकुरगंज से हुई है। सूफियान पुलिस से भागने की कोशिश कर रहा था। एनकाउंटर में आरोपित के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने एनकाउंटर के तुरंत बाद घायल आरोपित को गिरफ्तार किया और उसे ट्रॉमा सेंटर लेकर गई। यहाँ उसका इलाज चल रहा है। अभी सूफियान खतरे से बाहर है। सोशल मीडिया पर आरोपित की तस्वीर भी सामने आई है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि वह एक जंगली इलाके में घायल अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ है।

इस घटना के बाद से सूफियान के घरवाले उसे बचाने का प्रयास कर रहे ​थे। वहीं, लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने निधि के हत्यारे सूफियान पर 25 हजार का इनाम घोषित किया था। लखनऊ पुलिस निधि गुप्ता की मौत के बाद से लगातार सूफियान की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। उसके पीछे लखनऊ पुलिस की 6 से ज्यादा टीमें लगी हुई थीं। पुलिस को सूफियान के फोन की आखिरी लोकेशन चौक में मिली थी। वहीं एक टीम दिल्ली के लिए रवाना की गई थी। इस बीच उसकी लोकेशन दुबग्गा इलाके में पता चली और टीम वहाँ पहुँच गई। यहीं पर पुलिस टीम की सूफियान के साथ मुठभेड़ हो गई। खबर है कि वह ठाकुरगंज से बालागंज की ओर भाग रहा था।

निधि गुप्ता हत्‍याकांड

लखनऊ के दुबग्गा इलाके के डूडा कॉलोनी में 15 नवंबर 2022 को निधि गुप्ता नाम की लड़की हत्या कर दी गई थी। लड़की के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि सूफियान ने उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया। इलाज के दौरान निधि की मौत हो गई थी। घटना के बाद से सूफियान फरार था। हत्या के पीछे का कारण निधि का धर्म परिवर्तन और निकाह से इनकार करना बताया गया है।

सूफियान पर आरोप है कि वह काफी समय से निधि के पीछे पड़ा था। वह उस पर धर्म परिवर्तन और निकाह का दबाव डाल रहा था। उसकी सनक से तंग आकर निधि को उसके परिजनों ने कुछ समय के लिए ननिहाल भी भेज दिया था। उसके वापस लौटते ही सूफियान की हरकतें फिर शुरू हो गई। इससे तंग आकर 14 नवंबर 2022 को निधि की माँ ने अपने भाई को बुलाया। वे सूफियान के घर जा रहे थे। इसी दौरान सूफियान ने पहले उन्हें धमकाया और फिर बाद में निधि को छत से धक्का दे दिया।

नूँह की रोहिंग्या बस्तियों में पुलिस की छापेमारी : बिना दस्तावेज वाले 361 वाहन जब्त, 33 गाँवों में तलाशी अभियान

         DSP हत्या: हरियाणा पुलिस का रोहिंग्या झुग्गियों में सर्च अभियान (फोटो साभार: news 18/etv)
हरियाणा के मेवात जिले के नूँह में DSP सुरेंदर सिंह बिश्नोई की हत्या के बाद से जिलेभर में सर्च ऑपरेशन जारी है। इसी क्रम में हरियाणा पुलिस ने 26 जुलाई, 2022 को नूँह में रोहिंग्या मुस्लिमों की झुग्गियों में सर्च अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने 30 वाहन जब्त किए। इन वाहनों में 11 जुगाड़ से बनाई गई रेहड़ी रिक्शा और 17 बाइक भी शामिल हैं।

नूँह के पुलिस अधीक्षक वरुण सिंगला ने कहा, “हमारे पास रोहिंग्याओं का सारा डेटाबेस है और हमने उनके शिविरों में एक विशेष तलाशी अभियान चलाया। हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि इन शिविरों में कोई गलत तत्व तो पनाह नहीं ले रहा है। अपराधियों, खासकर जिले में अवैध खनन में शामिल तत्वों को पकड़ने के लिए हमारी छापेमारी जारी रहेगी।” सिंगला ने आगे कहा कि उन्होंने अब तक 33 गाँवों में तलाशी अभियान चलाया है और 361 संदिग्ध वाहनों को जब्त किया है।

रोहिंग्या मुस्लिमों के पास इन वाहनों के दस्तावेज नहीं थे। इसलिए, उन वाहनों को जब्त किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी वाहन का कोई रोहिंग्या दस्तावेज लेकर पुलिस विभाग के पास आया और दस्तावेज सही पाए गए, तो उसे छोड़ दिया जाएगा, नहीं तो इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के मुताबिक, नूँह, शाहपुर नंगली, पुन्हाना, चंदेनी और फिरोजपुर में स्थित रोहिंग्या शिविरों में पिछले कई महीनों से कुल 1771 रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं। 26 जुलाई को इन जगहों पर विशेष तलाशी अभियान चलाया गया।

हरियाणा के नूँह में 19 जुलाई, 2022 को DSP सुरेंदर सिंह बिश्नोई पर खनन माफियाओं ने पत्थर से लदा डम्पर चढ़ा दिया था, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। ये घटना उस वक्त हुई, जब पुलिस नूँह के पचगाँव की पहाड़ियों में अवैध खनन माफियाओं को पकड़ने गई थी। वह (DSP) इसी साल रिटायर होने वाले थे। खनन माफियाओं की हिस्ट्री में इसे जिले की अब तक कि सबसे बड़ी घटना माना जा रहा है।

सुरेंदर सिंह बिश्नोई की हत्या की खबर से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। वारदात के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। इससे पहले सोनीपत में अवैध खनन करने वाले माफिया गिरोह ने स्पेशल इन्फोर्समेन्ट टीम पर हमला किया था। इस घटना में एक ASI की वर्दी फाड़ दी गई थी और एक सिपाही को पीटा गया था।

1500 ‘गुस्ताखी’ की लिस्ट, ‘काफिरों’ की हत्या के लिए उकसाते Video: देखिए, किशन भरवाड की हत्या में पकड़े गए मौलाना उस्मानी का जहर

मौलाना उस्मानी
धर्म संसद पर शोर मचाकर गंगा-जमुनी तहजीब का स्वांग करने वाले मुस्लिम कट्टरपंथियों के भड़काऊ भाषणों पर आखिर क्यों चुप्पी साध लेते रहे हैं? क्या धर्म-निरपेक्षता और गंगा-जमुनी तहजीब का पालन करना केवल हिन्दुओं की जिम्मेदारी है, किसी अन्य धर्म/मजहब की नहीं? CAA के विरोध में जगह-जगह बने शाहीन बागों में हिन्दुत्व के विरुद्ध लग रहे नारों पर चुप्पी और अभी किसान आंदोलन में लगे आपत्तिजनक नारों पर भी चुप्पी, क्यों? आखिर कब तक ये छद्दम सेक्युलरिस्ट जनता को गुमराह करते रहेंगे? 
गुजरात में किशन भरवाड की हत्या के बाद पकड़े गए मौलाना कमर गनी उस्मानी के बारे में धीरे-धीरे खुलासे हो रहे हैं। वीडियोज से पता चल रहा है कि वो कैसे मुस्लिम युवकों को भड़काता था और पैगंबर की शान में गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ़ मुस्लिम युवकों को खड़ा करता था।

एक वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है,

“मैं हिरासत में लिया जा रहा हूँ। मैं पुलिस का सहयोग करूँगा अगर कोई जाँच हुई… तुम मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है आप जिस तरह से तहरीक फरोग-ए-इस्लाम के साथ आप खड़े थे अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ते रहें। अधिक ताकत से आगे आएँ, क्योंकि इनकी जो प्लानिंग है उस प्लांनिंग को सफल नहीं होने देना है। मैं कहीं भी रहूँ, लेकिन आपको मिशन नहीं छोड़ना है। जो अभी भारत में हो रहा है वो सब न हो, जैसे हम पहले रहते थे शांतिपूर्ण ढंग से वैसे ही रहें। एक दूसरे के साथ रहते थे वैसे रहें।”

इस वीडियो में उस्मानी ने अन्य उलेमाओं के शांत रहने पर उनसे कहा, “अगर आपको लगता है कि आप लोग सुरक्षित हैं। तो बता दूँ कोई सेफ नहीं है। सबकी तैयारी की गई है। अगर आज हम कानूनी ढंग से अपने पैगंबर मुहम्मद की शान में नहीं खड़े होंगे, तो सबका समय आएगा। वो किसी को नहीं छोड़ेंगे। उनकी तैयारी पूरी है।” उस्मानी अपने समर्थकों को बताता है, “ये जरूरी है कि हम अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें और उन्हें रोकें जो गैरकानूनी तौर पर कुछ करने का इरादा रखें।”

मौलाना के पास है 1500 ‘गुस्ताखों’ की लिस्ट

पुलिस हिरासत में जाने से पहले कानून, संविधान, अधिकारों की बात करने वाले उस्मानी की सिर्फ ये अकेली वीडियो नहीं है। एक वीडियो आई थी जिसमें वो पुलिस अधिकारियों से इसलिए लड़ रहा था ताकि अपने उन समर्थकों के बीच जा पाए जो कि ईशनिंदा के आरोपित को मौत के घाट उतारने के समर्थन में थे।

मौलाना की एक वीडियो में सुन सकते हैं कि वो उस लिस्ट के बारे में बात कर रहा है जो उन्होंने रिकॉर्ड की हुई हैं कि कब-कब सोशल मीडिया पर गुस्ताखी हुई। इनमें से 1500 की लिस्ट उनके पास है। वह कहता है कि ये जो गुस्ताखियाँ हो रही हैं ये कोई इत्तेफाक से नहीं हैं बल्कि तारीख गवाह है कि जब-जब मुसलमानों को बर्बाद करने की कोशिश हुई है तो सबसे पहले मुसलमानों का तापमान नापा गया है।

अपनी वीडियो में उसने कमलेश तिवारी की हत्या को जायज ठहराया और ऐसे दिखाया जैसे कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या में कोई दोषी नहीं है। अगर कोई है तो वो लोग जिन्होंने उसे जेल से छुड़ाया। मौलाना ने वीडियो में दावा किया कि 5 सालों में जितनी गुस्ताखी हुई है वो पिछले 100 सालों में नहीं हुई।

‘गुस्ताखों’ को सजा देने वालों के समर्थन में मौलाना उस्मानी

एक अन्य वीडियो में मौलाना उस्मानी अपने समर्थकों को ये उपदेश दे रहा है कि वो घर जाएँ, अपने वालिद-वालिदा से कहें कि भले ही उनके उसपर बहुत एहसान हैं लेकिन जब भी बात किसी गुस्ताख को सजा देनी की होगी तो वो (उस्मानी का अनुयायी मुस्लिम) किसी परवाह किए बिना आगे निकल लेगा। कई ऐसी वीडियोज हैं जिसमें मौलाना कमर गनी के स्वागत में कट्टरपंथी राहों में फूल बरसा रहे हैं। साथ ही साथ ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ के नारे बुलंद कर रही है।