विनोद कापड़ी : एजेंडा पत्रकार को नहीं है देश की सुरक्षा का ख्याल

विनोद कापड़ी के 'पीएम ने दी है क्या राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि?' पूछने पर  पड़ी बेहिसाब गालियां – harinayakचीन की साजिशों को नाकाम करते हुए भारतीय सेना ने पैगॉन्ग सो झील के दक्षिणी हिस्से में मौजूद एक अहम चोटी पर कब्जा कर लिया। यह रणनीतिक रूप से काफी अहम मानी जाती है। इससे चीन बुरी तरह बिलबिला उठा है। 
वहीं देश के कुछ एजेंडा पत्रकारों ने अपने क्षुद्र स्वार्थों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ही निशाना साधने की कोशिश की है। देश और सेना के सुरक्षा हितों का ख्याल रखने बिना एजेंडा पत्रकार विनोद कापड़ी ने सरकार से सेना की रणनीति का सोशल मीडिया पर खुलासे की मांग की।
इन एजेंडा पत्रकारों द्वारा सरकार से रणनीति के बारे में पूछकर दुश्मन की मदद कर, क्या सिद्ध करना चाहते हैं? इनकी दृष्टि में देश महान है अथवा दुश्मन? ये पत्रकार चंद टुकड़ों की खातिर क्यों और किस आधार पर दुश्मन के हाथ कठपुतली बने हुए हैं? इन पाखंडी पत्रकारों से पूछा जाए कि जब देश में संकट आएगा क्या इनका (दुश्मन) आका इनको अपने देश का कोई प्रान्त इनके नाम कर देगा? यदि नहीं, फिर किस आधार पर दुश्मन की मदद कर देश को क्यों संकट में डाल रहे हैं?

 
पत्रकार विनोद कापड़ी ने ट्वीट किया, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी,देश को ये जानने का अधिकार है कि लद्दाख में भारत चीन सीमा पर क्या हो रहा है ? अब तक चीनी सेना को क्यों नहीं हटाया गया ? 30 अगस्त की रात चीन के दुस्साहस पर भारत क्या करने जा रहा है ? राष्ट्र की सुरक्षा,संप्रभुता और अस्मिता पर आपकी चुप्पी ख़तरनाक है।”


विनोद कापड़ी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया में लोगों उनकी नासमझी को लेकर जमकर लताड़ लगायी। कई यूजर्स ने इनकी समझ पर सवाल उठाया, तो कई लोगों ने पत्रकारिता छोड़कर सेना में जाने की सलाह दे डाली।




जयचन्दों का युग भी बहुत प्राचीन है, लेकिन इन बिकाऊ लोगों को किसी से इनका सम्मानित सूची में नाम लिखा है, नहीं सुना। ऐसे बिकाऊ कभी किसी के विश्वासपात्र बन ही नहीं सकते। ऐसे लोग कब देश को संकट में डलवा दें, कुछ कहा नहीं जा सकता। ये जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं।
भारतीय सेना ने केवल पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर स्थित पहाड़ियां और 1962 से चीन के कब्जे में पड़ी रेकीन घाटी ही नहीं कब्जिया ली, अपितु गलवान में जो कैंप बनाकर चीनी उसमें घुसे बैठे थे वह भी लगे हाथ कैप्चर कर लिया है। इसके अलावा ऐसी भी अपुष्ट खबरें हैं कि 12-15 चीनी सैनिक निपटा दिये गए और इस समय 20 से अधिक चीनी सैनिक भारतीय सेना की मेहमाननवाजी का आनंद ले रहे हैं।
No photo description available.अब चीन को जो करना है, करले ले, वैसे भी अर्थव्यवस्था चीन के कारण कुछ खास नहीं चल रही जिसकी चिंता सरकार करे, पूरी दुनिया चीन से नाराज़ है, चीन भी जापान ऑस्ट्रेलिया वियतनाम अमेरिका ताइवान फिलीपींस सबसे पिला पड़ा है। ये सारे देश चीन से चिढ़े बैठे है। देखा जाए तो आपदा में अच्छा अवसर है चीन का फुल एंड फाइनल सेटेलमेंट करने का।
मुझे तो कोरोना काल में चीन का काल स्पष्ट दिखाई दे रहा है, चीन से युद्ध हुआ तो पाकिस्तान मुफ्त में रेला जाएगा।
पहली बार भारत को इस तरह आक्रमक देख रहा हूं।
पहले गलवान में चीनियों को पेला।
उसके बाद चीन के कई कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए।
उसके बाद कई चाइनीज ऐप पर प्रतिबंध लगाया।
आत्मनिर्भर भारत से चीन का बॉयकॉट करना शुरू किया।
फिर भारतीय नौसेना ने हिन्द महासागर में चीन के वारशिप को खदेड़ा।
उसके बाद सीडीएस जनरल विपिन रावत का बयान कि जब सारे बातचीत के सैन्य और कूटनीति रास्ते विफल हो जाएंगे तो मिलिट्री कार्यवाही अंतिम विकल्प होगा।
उसके बाद कल सुबह न्यूज में पढ़ा कि भारत ने साउथ चाइना सी में अपना वारशिप उतार दिया है।
फिर दोपहर को ऑफिशियल खबर मिली कि भारतीय सेना ने 29-30 अगस्त को चीनियों को दुबारा रेल दिया है।
शाम होते होते पता चला कि भारतीय सेना ने एलएसी पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कुछ पहाड़ियां कब्जा कर ली है।
लगता है मोदी जी ये समस्या भी सुलझाने के फुल मूड में है, चाहे सीधी उंगली से या उंगली टेढ़ी करके!
मोदी जी पहले ही कह चुके है कि, "मै इंतजार लंबा नहीं कर सकता, चुन चुन के हिसाब लेना, ये मेरी फितरत है"
ये 1962 का भारत नहीं है, 2020 का नया भारत है!

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