स्वीडन के बाद नॉर्वे में इस्लामीकरण रोकने के लिए निकली रैली

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भारत को वोट के भूखे नेताओं ने सराय बना दिया है। कट्टरपंथियों की हर नाजायज मांग के आगे घुटने टेके जाते हैं। 1972 में पाकिस्तान को तोड़ बांग्लादेश बनाए जाने के कारण मुस्लिम वोट को खिसकते देख तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने Muslim Personal Law Board बनवाकर मुस्लिम वोट कांग्रेस पाले में रखने में कामयाब हुई। फिर राजीव गाँधी ने मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में आए निर्णय को पार्लियामेंट के माध्यम से बदल दिया, जिसे शाहबानो के नाम से ज्यादा जाना जाता है। फिर 1986 में दिल्ली की एक अदालत द्वारा कुरान के विरुद्ध दिए निर्णय को भी निरस्त कर दिया। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा इसी गंभीर समस्या पर सत्ता का दुरूपयोग कर बदलवाने में सफल होने पर कांग्रेस सुरमा भोपाली बन गयी। यानि भारत में अब तक सियासत मजहब देख कर किए जाने के ही कारण आए दिन दंगे-फसाद होते रहते हैं। 
स्वीडन में शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को कुरान जलाने की घटना सामने के बाद इस्लामिक भीड़ ने वहाँ जम कर हिंसा की। अल्लाह हू अकबर के नारों के साथ भीड़ ने पत्थरबाजी की। सड़कों को जाम करके आगजनी की कोशिश की गई। इसी बीच नॉर्वे में भी स्वीडन जैसी एक रैली निकाले जाने की खबर अगले ही दिन सामने आई।
जानकारी के मुताबिक, नॉर्वे की राजधानी ओसलो में शनिवार को यह रैली निकाली गई। इस रैली को Stop Islamisation of Norway (SIAN) नामक समूह ने आयोजित किया। ये रैली संसद की बिल्डिंग के पास निकाली गई। सैंकड़ों लोग इसमें शामिल हुए। यहाँ रैली का विरोध करने वाले भी आए। मगर, पुलिस ने उन्हें उस समय रोक दिया।
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि धुर दक्षिणपंथियों का यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के नेता लार्स थोर्सन ने वहाँ इस्‍लाम विरोधी कई बयान दिए। उन्होंने पैगंबर के बारे में बातें कहीं और संस्था के लोग नारेबाजी करते रहे।
न्यूज एजेंसी एनटीबी ने दावा किया कि इस रैली में एक SIAN की एक महिला सदस्य ने पहले पवित्र कुरान के पन्नों को फाड़ा और फिर उन पर थूक भी दिया। इसके अलावा उसने दूसरे पक्ष के प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा, “देखों अब मैं कुरान को अपवित्र कर दूँगी।”
इसके बाद इस्‍लाम‍ समर्थकों ने पुलिस के बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नार्वे के समर्थकों से भिड़ गए। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। हालाँकि, बाद में प्रशासन ने पेपर स्प्रे और टियर गैस का इस्तेमाल करके दोनों समूहों को अलग कर दिया।
पुलिस ने इस संबंध में 29 लोगों को गिरफ्तार भी किया। जबकि एक व्‍यक्ति घायल हो गया। कहा जा रहा है कि भड़काऊ बातें करने वाली महिला पर पहले ऐसे प्रोटेस्टों में हेट स्पीच के आरोप लग चुके हैं।
स्वीडन के मालमो में शुक्रवार की घटना के बाद नॉर्वे में यह मामला प्रकाश में आया था। स्वीडन में दक्षिणपंथियों द्वारा कुरान की प्रति जलाने के बाद हिंसा भड़की थी और इस्लामिक भीड़ ने काफी तबाही मचाई थी। वहीं इससे पहले नवम्बर 2019 में भी नार्वे में इस्लाम के ख़िलाफ़ हुई रैली में एक व्यक्ति ने कुरान जला दी थी, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया था।
पाकिस्तान ने नॉर्वे और स्वीडन में हुई इन घटनाओं की निंदा करते हुए अगस्त 30 को अपना बयान जारी किया और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मजहबी नफरत को जस्टिफाई नहीं कर सकती। इसके अलावा विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिर हाफिज चौधरी ने कहा, “इस तरह से इस्लामोफोबिक घटनाओं की बढ़ोतरी किसी भी मजहब की भावना के ख़िलाफ़ है।”
जबकि पाकिस्तान में ही हिन्दुओं के मंदिरों को तोडा जा रहा है, हिन्दुओं को जबरन इस्लाम कबूल करवाया जा रहा है, लेकिन आदत है दूसरे की फटी में तांग फंसाने की, पाकिस्तान अपनी गिरेवान में झांक कर देखे पहले। 




उन्होंने आगे कहा, “दूसरों की धार्मिक मान्यताओं के लिए सम्मान सुनिश्चित करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है और वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए बिल्कुल महत्वपूर्ण है।”

1 comment:

Unknown said...

पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जिन देखा तो रूप घनेरे। पाकिस्तान स्वीडन और नॉर्वे को तो उपदेश दे रहा है लेकिन अपने देश में क्या हो रहा है उसे नजर अंदाज कर रहा है। पाकिस्तान में अल्प संख्यक हिन्दू समाज के साथ क्या हो रहा है बहा पर मंदिर और गुरुद्वारे तोड़े जा रहे हैं बह उसे नहीं दिखाई देता।