पंजाब और हरियाणा के किसान केंद्र सरकार के कृषि सुधार क़ानून के विरोध में ‘दिल्ली चलो मार्च’ निकाल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रदर्शनकारी किसान करनाल से देश की राजधानी दिल्ली की तरफ बढ़ रहे थे। इस बीच पुलिस प्रशासन ने भी स्थिति पर नियंत्रण करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कई पहलू सामने आ रहे हैं जिसमें सबसे ज़्यादा उल्लेखनीय है किसान आंदोलन का हिंसक पहलू। कथित तौर पर ऐसी तमाम तस्वीरें और वीडियो सामने आए जिसमें प्रदर्शन के दौरान खालिस्तान के समर्थन की बात सामने आ रही है।
किसानों से समर्थन मूल्य छीनने वाले कानून के विरोध में किसान की आवाज सुनने की बजाय भाजपा सरकार उन पर भारी ठंड में पानी की बौछार मारती है। सँभल जाओ....
किसानों से सबकुछ छीना जा रहा है और पूंजीपतियों को थाल में सजा कर बैंक, कर्जमाफी, एयरपोर्ट रेलवे स्टेशन बांटे जा रहे हैं। #FarmersProtest pic.twitter.com/al8dG8ZZhi
जिस दिन दिल्ली का हुक्का पानी किसानों ने बंद कर दिया उस दिन क्या करोगे...? https://t.co/ZBif7sFS6o
कुछ खालिस्तानी आतंकी किसान हैं जो खुलेआम आज टीवी पर जी न्यूज के कैमरे पर बोल रहे थे कि उधम सिंह ने विदेश जाकर गोरों को ठोका तो दिल्ली तो यहीं है, इंदिरा को ठोका मोदी को भी ठोक देंगे, आतंकवादी कहीं के, और कांग्रेस भी ऐसे लोगों का समर्थन कर रही है pic.twitter.com/PzXOvnfeUb
— Atul Bhardwaj (@AtulBha86037049) November 27, 2020
इसी तरह का एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक तथाकथित किसान द्वारा स्पष्ट तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि जैसे इंदिरा गाँधी को ठोका वैसे ही नरेंद्र मोदी को भी ठोक देंगे।
ट्विटर पर साझा किए गए एक समाचार चैनल के वीडियो में व्यक्ति कहता है, “अभी हमारी सरकार के साथ एक मीटिंग है अगर उसमें कुछ हल निकलता है तो ठीक है। मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गई है और हम तब तक यहीं पर रहने वाले हैं। अगर उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे। हमारे शहीद उधम सिंह कनाडा की धरती पर जाकर उन्हें (अंग्रेज़ों को) ठोक सकते हैं तो दिल्ली कुछ भी नहीं है हमारे लिए। जब इंदिरा ठोक दी तो मोदी की छाती भी ठोक देंगे।”
इसी वीडियो के अगले हिस्से में लोगों को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि सरकार के साथ 3 दिसंबर को होने वाली बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलता है। तब वहाँ मौजूद लोगों के पास बैरीकेडिंग तोड़ने और हिंसक होने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा। ज़मीन पर हो रहे प्रदर्शन के अलावा सोशल मीडिया पर भी किसान आंदोलन को लेकर काफी प्रतिक्रिया सामने रही हैं। एक पंजाबी मीडिया समूह द्वारा साझा किए गए वीडियो में तमाम यूज़र्स ने टिप्पणी की है और टिप्पणी में वह इस आंदोलन को हिंसक बनाने की बात कह रहे हैं।
पीछे भिंडरावाले का पोस्टर लगा तो क्या हुआ
— Manjeet Bagga (@Goldenthrust) November 26, 2020
ये किसान है खालिस्तानी थोड़ा है।
MSP के साथ थोड़ा सा खालिस्तान मांग लिया तो क्या हुआ
ये किसान है खालिस्तानी थोड़ा है। pic.twitter.com/y73WHKv0P0
भिंडरांवाला ???
— सुरेश गोस्वामी (@_sureshgoswami) November 27, 2020
वह प्रदर्शन कर रहे किसानों को उग्र और हिंसक होकर अपनी बातें रखने का आह्वान कर रहे हैं।
एक टिप्पणी में यूज़र किसानों के हाथों में एके-47 देने की बात कह रहा है। एक और यूज़र टिप्पणी करते हुए कहता है कि यह सार्वजनिक संपत्ति ही तो है, किसी के बाप की जागीर नहीं है। इसके अलावा तमाम टिप्पणियों में प्रधानमंत्री और सरकार के लिए अपशब्द भी कहे गए हैं।Khalistan too has strong presence. pic.twitter.com/cKGjZDhjtB
— Woke Poet Shashogulla 🤓🌈 (@Irate_Indian) November 27, 2020
किसानों के प्रदर्शन के नाम पर इस तरह की हिंसक विचारधारा और खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा देने पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। ट्विटर पर ऐसी तमाम तस्वीरें साझा की गई जिसमें खालिस्तान समर्थक पोस्टर लेकर प्रदर्शन करते हुए देखे जा सकते हैं।
पोस्टर और तस्वीरों में ‘राज करेगा खालिस्तान’ जैसे नारे भी लिखे हुए हैं,
ये उस प्रजाति के हैं जिन्होंने समय समय पर अपनी वफादारी बदली है,जिस पार्टी ने सिखों के साथ इतना नरसंहार किया ये उसी पार्टी के झंडावरदार बने हुए हैं.
— Vinod Singh (@VinodSi93337263) November 27, 2020
इनके लिए कनाडा अमेरिका और पाकिस्तान से आने वाला पैसा कहीं अधिक प्रिय है,
मंडी का कमीशन कुत्ते की हड्डी की तरह पीछा नहीं छोड़ रहा 🤔
ये उस प्रजाति के हैं जिन्होंने समय समय पर अपनी वफादारी बदली है,जिस पार्टी ने सिखों के साथ इतना नरसंहार किया ये उसी पार्टी के झंडावरदार बने हुए हैं.
— Vinod Singh (@VinodSi93337263) November 27, 2020
इनके लिए कनाडा अमेरिका और पाकिस्तान से आने वाला पैसा कहीं अधिक प्रिय है,
मंडी का कमीशन कुत्ते की हड्डी की तरह पीछा नहीं छोड़ रहा 🤔
🇮🇳🇮🇳
— Sangita Chopra 🇮🇳 (@sangitaRchopra) November 27, 2020
Galti??
— Kapil (@Just__Kapil) November 27, 2020
It's planned..
कुछ पोस्टर में तो भिंडारवाले की तस्वीर भी लगी हुई है।
यही भिंडरेवाला का भी पोस्टर लगाते हैं और यही लोग कांग्रेस के साथ भी खड़े रहते हैं । मारा गया निर्दोष सिक्ख 1984 के दंगों में ।
— आयुष देशवाली (@ayusnl60) November 26, 2020
👉These Agitating Fraud Farmers are Looters, Gangsters, criminals, paid political party rogues (include Khalistani Jihadis).. sponsored by Khangress, Left, Lutyens ecosystem & Urban Naxals..!
— Chander (@Namo_JaiHind) November 27, 2020
Have anyone read these three Farm Bills? - "NO"
👉" These Frauds are NOT FARMERS"..!
कथित किसान आंदोलन की आड़ में कुछ और चल रहा है यह मिलीभगत है कांग्रेश और आप की
— संजय पाराशर (@sanjayganga) November 27, 2020
आज मोदी जी का विरोध करते करते ही है देशद्रोह के मार्ग पर चल पड़े हैं
भाई ये है असली चेहरा और असली कहानी.. pic.twitter.com/GGtN0aUiCU
— लेहरू जी (@Naresh58725959) November 27, 2020
अभी गेहूं बुआई का समय है और असली किसान तो अपने खेतों में व्यस्त हैं,यह नकली किसान हैं जो कांग्रेस पार्टी ने हंगामा करने के लिए सड़कों पर भेजे हैं।
— कृणवंतौविश्वमार्यम् (@AARYAN6515) November 27, 2020
100% correct but it is a failure of bjp ..they did not counter this fake activists since 2014
— Free Hindu Temples from govt control🚩 (@Hindu_ritik1) November 27, 2020
Yogendra salim yadav and medha patkar are involved in farmers protest
We know it was PFI in the garb on anti CAA protest.
— Ashutosh Tibrewal (@ashu9892) November 27, 2020
We know who are in the garb of Farmers protest.
Will the government watch in silence again? @AmitShah @narendramodi
ये सब आढ़ती और दलाल हैं। आखिर सिर्फ पंजाब के किसान ही क्यों धरने पर उतरे हैं? भारत के बाकी २७ राज्यों से कोई खबर नहीं छप रही।
— VP Singh 🇮🇳 (@2020Vpsingh) November 27, 2020
छत्तीसढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल, झारखंड से तो कोई बोला भी नहीं जो की भाजपा की सरकारें भी नहीं हैं। ये दलाल वाली राजनीति सिर्फ पंजाब में ही क्यों?😡
असल मायनों में इस प्रदर्शन का मकसद किसान हित है तो इसमें हिंसा का समर्थन और ‘इंदिरा को ठोका और मोदी को भी ठोक देंगे’ इस तरह के जहरीले बयानों का क्या अर्थ बनता है। आंदोलन की आड़ में हिंसात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और खालिस्तान का समर्थन करने से किसानों का भला होने से रहा। बशर्ते आम नागरिकों के हिस्से की असुविधा और माहौल बिगड़ना ज़रूर सुनिश्चित हो जाएगा। ऐसे में सबसे पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि प्रदर्शन के दौरान ऐसी अराजक ताकत प्रासंगिक न होने पाएँ।
पंजाब और हरियाणा के किसानों का ‘दिल्ली चलो’ प्रदर्शन अंबाला-पटियाला सीमा पर उग्र हो गया था। यहाँ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बैरीकेडिंग तोड़ कर आगे बढ़ने का प्रयास किया था और पथराव की ख़बरें भी सामने आ रही थीं। इसके अलावा पुलिस ने इन पर आँसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया था और इस बीच किसान कई दिनों का राशन लेकर दिल्ली की तरफ कूच कर रहे थे। इस मुद्दे पर कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बयान दिया था, उन्होंने किसानों से प्रदर्शन नहीं करने की अपील की थी और 3 दिसंबर को बातचीत के लिए आमंत्रित किया है।
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