एक समय था जब हर मुस्लिम देश किसी भी तरह की मदद के लिए सऊदी अरब की तरफ देखता था, लेकिन इस्लामिक आतंकवाद के चलते अधिकतर मुस्लिम देश आतंकवाद को पनाह देने वालों से दूरी बना रहे हैं। इस बदलते परिवेश में तुर्की विश्व में आतंकवाद को पनाह और संरक्षण के लिए चर्चित पाकिस्तान को हर संभव मदद के लिए आगे आने से, संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि क्या सीरिया और पाकिस्तान की तरह अन्य मुस्लिम देश तुर्की से दूरी बनाने की कोशिश करेंगे। भारत ने विश्व में पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है, जिस कारण IMF से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अंकुश ही नहीं लगा, बल्कि ग्रे लिस्ट में बना हुआ है।
जैसाकि प्रधानमंत्री ने कुछ समय पूर्व ही स्पष्ट कहा था कि विश्व को केवल आतंकवाद ही नहीं, आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर भी सख्ती करनी होगी। जिस आज विश्व मोदी की बातों को गंभीरता से ले रहा है, तो क्या उस स्थिति में पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों में शुमार होगा?
76 Mosques and Muslim prayer halls in #France put under government scrutiny for their suspected links with “Islamist Extremism”. https://t.co/8bKQ8bWPeg
पाकिस्तान की मदद करने के लिए अब तुर्की ने सीरिया के आतंकी समूहों को कश्मीर भेजने का निर्णय लिया है। यह खुलासा ग्रीस के एक मशहूर पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट में पत्रकार ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन पाकिस्तान की मदद के लिए कश्मीर में सीरिया के आतंकियों को भेजने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आतंकी समूहों से बात भी की है।
एंड्रियास माउंटजौरौली का यह लेख ग्रीस की न्यूज वेबसाइट Pentapostagma पर प्रकाशित है। इसमें उन्होंने लिखा है कि सीरियन नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने कुछ दिन पहले ही अपने साथी आतंकियों से कहा है कि तुर्की यहाँ से कश्मीर में अपने कुछ यूनिट्स को तैनात करना चाहता है।
पत्रकार का दावा है कि उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर नियंत्रण करने वाली सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन है। उनके अनुसार इम्सा का कहना है कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य हथियारबंद गिरोहों से इस बारे में बात कर रहे हैं और कमांडरों से ऐसे लोगों के नाम बताने को कह रहे हैं जो कश्मीर जाना चाहते हैं।
रिपोर्ट से आतंकियों को कश्मीर जाने के लिए 2000 डॉलर की राशि देने की बात भी सामने आई है। आतंकियों को कहा जा रहा है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।
इससे पहले तुर्की ने आर्मीनिया के साथ लड़ाई में खुलकर अजरबैजान का साथ दिया था। इतना ही नहीं, फ्रांस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने भी इस पर खुलासा करते हुए कहा था कि तुर्की ने सीरिया में अपने सहयोगी आतंकी संगठन के लड़ाकों को काराबाख में लड़ाई के लिए तैनात किया था। साथ ही युद्ध के लिए काफी पैसा भी मुहैया करवाया था।
रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की राष्ट्रपति खुद को मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा नेता बनाना चाहते हैं। वह खुद के कद को बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं। पत्रकार का दावा है कि पाकिस्तान और तुर्की एक दूसरे को सहयोग देकर दूसरे देशों की जमीन कब्जाना चाहते हैं। हाल में ही शील्ड ऑफ मेडेटेरियन युद्धाभ्यास के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान तुर्की पहुँचे थे।
रिपोर्ट कहती हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति पाक की सहायता से ग्रीस की जमीन हथियाने की फिराक में हैं, यही कारण है कि वह कश्मीर के मुद्दे पर उनकी सहायता के लिए आतंकी गुटों को भेजने की योजना बना रहे हैं।

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