क्या विरोधाभास है, जिस कांग्रेस ने खालिस्तान के मुद्दे को उछाला देश को कठिन स्थिति में डाला था, फिर चल रहे किसान आंदोलन के नाम पर दलालों के कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली दल द्वारा प्रायोजित प्रदर्शन में इंदिरा गाँधी के ठोके जाने का गुणगान, खालिस्तान समर्थन के नारे लगने पर पूरी कांग्रेस चुप्पी साधे हुए है, उसी कांग्रेस का सांसद जब गायक दिलजीत पर खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ाने का आरोप लगाना बहुत ही हास्यप्रद लगता है?(नीचे पढ़िए किस तरह और कैसे एक संत को कांग्रेस ने आतंकवादी बना दिया था।)
यही कांग्रेसी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू इंदिरा गाँधी की हत्या का गुणगान होने पर अपने मुख्यमंत्री और पार्टी से प्रदर्शन को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष समर्थन वापस लेने के लिए क्यों नहीं बोलते? आखिर प्रदर्शन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को ठोके जाने की बात करने वाले कौन लोग हैं? क्या रवनीत सिंह इन नारों का समर्थन करते हैं या विरोध? क्या प्रदर्शन में उठ रहे आपत्तिजनक नारों पर तीनों पार्टियों ने चुप्पी इसलिए साधी हुई है, क्योकि इन नारों में इंदिरा की तरह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ठोके जाने की बात की जा रही है? बिट्टू को एक ही कश्ती में बैठना होगा, दोनों में एक साथ नहीं। क्योकि प्रदर्शन को समर्थन तुम्हारा(रवनीत सिंह) भी है।
सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू का एक ट्वीट काफी वायरल हो रहा है। इस ट्वीट में पंजाब के लुधियाना से कांग्रेस सांसद बिट्टू ने सिंगर दिलजीत दोसांझ पर अपने गानों से खालिस्तानी एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से इन दोनों के खिलाफ पंजाब के थानों में केस दर्ज कराने को भी कहा। उसके साथ ही उन्होंने राज्य के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार से इन दोनों के खिलाफ जांच कराने की मांग भी की। ट्विटर पर आज दिलजीत दोसांझ टॉप ट्रेंड कर रहा है, जिसमें यूजर्स बिट्टू के आरोप का जिक्र कर रहे हैं। असल में किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थक नारे लगने के बाद दिलजीत दोसांझ भी चर्चा में आ गए है। दिलजीत दोसांझ किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
8/ Harsimrat Kaur ji and Bikram Majithia ji that atleast now they should come clean about their stand in regards of the Jathedar. Are they still in his support? It still isn’t too late. I urge them to come forward and stop this fire from spreading further than it already has..
— Ravneet Singh Bittu (@RavneetBittu) June 18, 2020
Ludhiana MP Ravneet Singh Bittu Demands Registration Of Fir Against Akal Takhat Jathedar, Singers Diljit Dosanjh & Jazzy Bains For Openly Supporting Sikhs For Justice Demand For Khalistan#KanganaRanaut#DiljitDosanjh https://t.co/7x62yMdLcv pic.twitter.com/HnSBWovgVa
— Rosy (@rose_k01) December 3, 2020
Congress MP @RavneetBittu has exposed the singer @diljitdosanjh 's Khalistan connection.
— Modi Bharosa (@ModiBharosa) December 3, 2020
Aap Chronology Samajhiye#DiljitDosanjh is a Khailstani supporter#DiljitDosanjh is supporting #FarmersProtest
Congress is also supporting Diljit & farmers protest https://t.co/rYffrrhesE pic.twitter.com/c4rhLDyx9M
Here is #DiljitDosanjh with ISI agent Rehan Siddiqui . Search about Rehan Siddiqui on Google. pic.twitter.com/uqs5W2BcmH
— Hitesh Bansal (@ihiteshbansal) December 3, 2020
Bhai tu aisa kr ke Youtube khol aur search kr who was Sant Bhindrawale and rare audio with reporters. Ja fr Subramanian Swamy ji ki interview dekh dr dsi kon ki aa. JA MERA PUTT pic.twitter.com/WAvftdOAUy
— Anmoldeep Singh Sandhu (@_Am_Sandhu) December 3, 2020
1% Sikhs who want Khalistan are terrorists led by then Bhindranwale, was Indira n Zail Singh's creation to fight Akalis. Today the same SAD fools are siding with Congress, ironical
— BALBIR SINGH #AtmaNirbharBharat (@balbir59) December 2, 2020
@capt_amarinder has fallen into trap set by khalistani stooges against his nationalist image. By supporting stage managed protests he has unified khalistani sentiments in youth minds...daljit like ppl are dependent on funding from canada possibly.
— kannan (@mkannan75) December 3, 2020
Thank you sir for exposing these people asking for khalistan, shame on these tukde tukde gang members
— manisha ojha 🇮🇳 (@Manisha28379800) December 3, 2020
This is why #DiljitDosanjh is so hyper today... Congress MP @RavneetBittu reveals that #diljit is a Khalistan sympathizer. #कंगना_रानौत_शेरनी_है #kangana https://t.co/Yp60Gw7BRA
— PoliticsSolitics (@IamPolSol) December 3, 2020
Sensed it years ago.
— Sonam Mahajan (@AsYouNotWish) December 3, 2020
Recently, Congress MP, Ravneet Bittu also urged the Punjab CM to order registration of FIRs against Diljit Dosanjh and Jazzy B for openly supporting designated terrorist, Gurpatwant Singh Pannu’s demand for Khalistan. pic.twitter.com/WqLTRJCUE9
खालिस्तान मूवमेंट: इंदिरा गांधी ने कैसे जरनैल सिंह भिंडरावाले को एक संत से आतंकवादी बना दिया!
एक समय था जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार को 1984 में सिख विरोधी दंगा के दौरान सामूहिक हत्या मामले में सजा होने की बात सोचना भी अकल्पनीय था। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका संज्ञान स्वयं हाईकोर्ट ने लिया था कि किस प्रकार सज्जन कुमार को कांग्रेस की ओर से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। जिस प्रकार राजीव गांधी के समय में सज्जन कुमार को संरक्षण प्राप्त था, उसी प्रकार इंदिरा गांधी के समय में खालिस्तान समर्थक आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले को सत्ता का संरक्षण प्राप्त था। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि इंदिरा गांधी ने ही भिंडरावाले को एक संत से आतंकवादी बनाया था। यह खुलासा प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक स्वर्गीय कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा ‘बियॉन्ड द लाइन’ में किया था। उनकी आत्मकथा का कुछ अंश इंडिया टुडे ने प्रकाशित किया है।
इंडिया टुडे में ‘बियॉन्ड द लाइन’ के प्रकाशित अंश के मुताबिक संजय गांधी और जैल सिंह ने मिलकर जरनैल सिंह भिंडरावाले को पैदा किया था, जो शुरू में तो संत था लेकिन बाद में उसके पास इतनी ताकत आ गई कि वह भारतीय कानून को चुनौती देने लगा था। इस आशय का जिक्र नैयर ने अपनी आत्मकथा में किया था। उन्होंने लिखा है “एक बार जब मैं उनसे उनके कमरे में मिला तो पूछा कि आखिर आप इतने सशस्त्र लोगों से क्यों घिरे रहते हैं? उन्होंने उल्टे मुझसे जवाब देने को कहा कि पुलिस हथियार क्यों रखती है? मैंने कहा कि यह तो उसका दायित्व है कि किसी भी अनहोनी को रोके। हमारे इस जवाब पर भिंडरावाले का कहना था कि कभी उन्हें हमें चुनौती देने को कहिए तभी हम उसे दिखा देंगे कि किसके पास अधिकार है।’ सवाल उठता है कि इतनी ताकत भिंडरावाले को मिली कहां से?
दरअसल भिंडरावाले इंदिरा गांधी की देन थी। यह कहानी 1977 से शुरू होती है, जब इंदिरा गांधी पूरे देश में चुनाव हारने के साथ ही पंजाब में भी चुनाव हार गई थी। पंजाब के मुख्यमंत्री ज्ञानी जैल सिंह की कुर्सी चली गई थी। वहां पर प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में जनता दल की सरकार बन गई थी। उसी समय इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी और जैल सिंह ने मिलकर भिंडरावाले को पैदा किया। यह ज्ञानी जैल सिंह वही हैं, जिसे बाद में इसके एवज में इंदिरा गांधी ने राष्ट्रपति बनाया था।
मालूम हो कि इंदिरा गांधी के समय संजय गांधी के पास संविधानेत्तर अधिकार होता था। वैसे ही जैसे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान सोनिया गांधी के पास अधिकार हुआ करता था। कुलदीप नैयर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि जब संजय गांधी से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि किसी मुख्यमंत्री पर अंकुश रखने के लिए उसके ऊपर किसी संत को बैठना चाहिए।
उसी किताब में मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने भी स्वीकार किया था कि अपने काम करने के लिए भिंडरावाले को कांग्रेस पैसे दिया करती थी। उन्होंने कहा था “जब हमने पहली बार भिंडरावाले का इंटरव्यू लिया था तो वह ‘साहसी टाइप’ बिल्कुल नहीं लगा था, हां वह अक्खर लगा था और लगा था कि वह हमारे उद्देश्य पूरा करने में सही साबित होगा। हम उसे अक्सर अपने काम के लिए पैसे दिया करते थे, लेकिन हमने कभी यह नहीं सोचा था कि वह आतंकवादी बन जाएगा।”
इस किताब में एक और वाकया का जिक्र है जिससे स्पष्ट होता है कि केंद्रीय मंत्री तक भी भिंडरावाले के सामने कुर्सी पर बैठने का साहस नहीं करते थे। कुलदीप नैयर ने लिखा है “एक दिन मैं भिंडरावाले के साथ एक रूप में बैठा था। उस रूम में एक ही कुर्सी थी जिसपर मै बैठा था, उसी समय केंद्रीय मंत्री स्वरण सिंह वहां आ गए, मुझे अकेले कुर्सी पर बैठा देख वह जमीन पर ही बैठ गए। जब मैंने उन्हें अपनी कुर्सी पर बैठने का आग्रह किया तो वह बोल उठे कि किसी संत की मौजूदगी में वह जमीन पर ही बैठना उचित समझते हैं।” उसी समय से भिंडरावाले खुद को हर कानून से ऊपर मानता था। उसकी महत्वाकांक्षी इतनी ताकत अर्जित करने की थी ताकि भारत की न तो कोई पुलिस न ही सेना उसे चुनौती देने का साहस जुटा सके।
इंदिरा गांधी किसी दूसरे की सरकार को बर्दाश्त नहीं कर पाती थी। इसलिए उसने पंजाब में प्रकाश सिह बादल की सरकार को अस्थिर करने के लिए भिंडरावाले को खड़ा किया। जबकि भिंडरावाले की महत्वाकांक्षा किसी से भी अधिक थी। दोनों एक दूसरे का उपयोग करने लगे। भिंडरावाले की राजनीतिक भूमिक 1977 से ही बढ़नी शुरू हुई। जब अकाली दल-जनता पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री जैल सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी को हराकर पंजाब की सत्ता में आई। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में बनी सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री जैल सिंह की कारस्तानी के खिलाफ गुरदियाल सिंह आयोग का गठन किया था। उस आयोग ने जैल सिंह को अपनी पावर का दुरुपयोग करने का दोषी भी माना था। इसी कारण जैल सिंह ने संजय गांधी के साथ मिलकर भिंजरावाले का उपयोग करना शुरू कर दिया।
भिंडरावाले को राजनीतिक सुर्खी में आने का पहला मौका 13 अप्रैल 1978 को बैसाखी के दिन तब मिला जब सिखों का एक दस्ता निरंकारियों से भिड़ गया। मालूम हो कि निरंकारी खुद को सिख मानते हैं जबकि सिख निरंकारियों को सिख मानने को तैयार नहीं थे। इस हमले में 16 सिखों की मौत हो गई थी। बस क्या था इसी वाकये को लेकर भिंजरावाले ने अकाली दल के खिलाफ सिखों को भड़काना शुरू कर दिया। जब यह घटना घटी तब मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल मुंबई में थे। वहां से आते ही कई पुलिस वालों को निलंबित कर दिया तथा निरंकारी के मुखिया गुरबचन सिंह को गिरफ्तार किया। इतना सब करने के बावजूद सिखों के गुस्सा को शांत नहीं कर पाए। इस घटना का खामियाजा बादल को अगले चुनाव में हार कर चुकाना पड़ा।
यहां से भिंडरावाले का जो दौर शुरू हुआ वह खालसा के नाम पर खालिस्तान की मांग पर जाकर खत्म हुआ। भिंडरावाले को जितनी ताकत मिलती गई उसका संतत्व खत्म होता चला गया। जब तक उसे ताकत मिली तब तक वह पूरे तौर पर आतंकवादी बन गया था और उसी इंदिरा सरकार को ललकारना शुरू कर दिया था। इंदिरा गांधी ने सत्ता के लालच में आतंकवाद का जो पेड़ लगाया था, बाद में उसी के अंत का कारण भी बन गया।
एक संत को शैतान भिंडरावाले किसने और क्यों बनाया, देखिए
◆ पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता की लालच में भिंडरावाले को किया था पैदा
◆ संजय गांधी और पूर्व राष्ट्रपति जैल सिंह ने भिंडरावाले को आगे बढ़ाया
◆ पंजाब की सरकार को गिराने के लिए लिया था भिंडरावाले का साथ
◆ अपने काम को अंजाम देने के लिए भिंडरावाले को दिया जाता था पैसा
◆ स्वर्गीय कुलदीप नैयर की आत्मकथा ‘बियॉन्ड द लाइन’ में हुआ है खुलासा
◆ कांग्रेस के कारण ही भिंडरावाले संत से बन गया ‘शैतान’ आतंकवादी
◆ सिखों की हत्या कराकर सिखों का तारणहार बन बैठा
◆ 13 अप्रैल 1978 को निरंकारियों के साथ सिखों के एक दस्ते की हुई थी भिड़ंत
◆ इस घटना में 16 सिखों की हो गई थी मौत
◆ इसी घटना से भिंडरावाले ने बादल के खिलाफ सिखों को भड़काना शुरू किया था


No comments:
Post a Comment