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सीरियन आतंकियों को कश्मीर भेजने पाकिस्तान की मदद के लिए आगे आया तुर्की : ग्रीस पत्रकार का दावा

एक समय था जब हर मुस्लिम देश किसी भी तरह की मदद के लिए सऊदी अरब की तरफ देखता था, लेकिन इस्लामिक आतंकवाद के चलते अधिकतर मुस्लिम देश आतंकवाद को पनाह देने वालों से दूरी बना रहे हैं। इस बदलते परिवेश में तुर्की विश्व में आतंकवाद को पनाह और संरक्षण के लिए चर्चित पाकिस्तान को हर संभव मदद के लिए आगे आने से, संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं कि क्या सीरिया और पाकिस्तान की तरह अन्य मुस्लिम देश तुर्की से दूरी बनाने की कोशिश करेंगे। भारत ने विश्व में पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है, जिस कारण IMF से मिलने वाली वित्तीय सहायता पर अंकुश ही नहीं लगा, बल्कि ग्रे लिस्ट में बना हुआ है। 

जैसाकि प्रधानमंत्री ने कुछ समय पूर्व ही स्पष्ट कहा था कि विश्व को केवल आतंकवाद ही नहीं, आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों पर भी सख्ती करनी होगी। जिस आज विश्व मोदी की बातों को गंभीरता से ले रहा है, तो क्या उस स्थिति में पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों में शुमार होगा?

 
पाकिस्तान की मदद करने के लिए अब तुर्की ने सीरिया के आतंकी समूहों को कश्मीर भेजने का निर्णय लिया है। यह खुलासा ग्रीस के एक मशहूर पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट में पत्रकार ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन पाकिस्तान की मदद के लिए कश्मीर में सीरिया के आतंकियों को भेजने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए उन्होंने आतंकी समूहों से बात भी की है।

एंड्रियास माउंटजौरौली का यह लेख ग्रीस की न्यूज वेबसाइट Pentapostagma पर प्रकाशित है। इसमें उन्होंने लिखा है कि सीरियन नेशनल आर्मी मिलिशिया के सुलेमान शाह ब्रिगेड्स के कमांडर मुहम्मद अबू इम्सा ने कुछ दिन पहले ही अपने साथी आतंकियों से कहा है कि तुर्की यहाँ से कश्मीर में अपने कुछ यूनिट्स को तैनात करना चाहता है। 

पत्रकार का दावा है कि उत्तरी सीरिया के अफरीन जिले पर नियंत्रण करने वाली सुलेमान शाह ब्रिगेड्स को तुर्की का खुला समर्थन है। उनके अनुसार इम्सा का कहना है कि तुर्की के अधिकारी सीरिया के अन्य हथियारबंद गिरोहों से इस बारे में बात कर रहे हैं और कमांडरों से ऐसे लोगों के नाम बताने को कह रहे हैं जो कश्मीर जाना चाहते हैं।

रिपोर्ट से आतंकियों को कश्मीर जाने के लिए 2000 डॉलर की राशि देने की बात भी सामने आई है। आतंकियों को कहा जा रहा है कि कश्मीर भी उतना ही पहाड़ी है जितना आर्मीनिया का नार्गोनो काराबाख है।

इससे पहले तुर्की ने आर्मीनिया के साथ लड़ाई में खुलकर अजरबैजान का साथ दिया था। इतना ही नहीं, फ्रांस राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने भी इस पर खुलासा करते हुए कहा था कि तुर्की ने सीरिया में अपने सहयोगी आतंकी संगठन के लड़ाकों को काराबाख में लड़ाई के लिए तैनात किया था। साथ ही युद्ध के लिए काफी पैसा भी मुहैया करवाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की राष्ट्रपति खुद को मुस्लिम देशों में सबसे बड़ा नेता बनाना चाहते हैं। वह खुद के कद को बढ़ाने के लिए सऊदी अरब को चुनौती देने की तैयारी में लगे हैं। पत्रकार का दावा है कि पाकिस्तान और तुर्की एक दूसरे को सहयोग देकर दूसरे देशों की जमीन कब्जाना चाहते हैं। हाल में ही शील्ड ऑफ मेडेटेरियन युद्धाभ्यास के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमान तुर्की पहुँचे थे।

रिपोर्ट कहती हैं कि तुर्की के राष्ट्रपति पाक की सहायता से ग्रीस की जमीन हथियाने की फिराक में हैं, यही कारण है कि वह कश्मीर के मुद्दे पर उनकी सहायता के लिए आतंकी गुटों को भेजने की योजना बना रहे हैं। 

अब भारत बर्दाश्त नहीं करेगा पाक का समर्थन, मोदी हुए सख्त

नरेंद्र मोदी, तुर्की
तुर्की दौरे की योजना पर लगाया ब्रेक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना तुर्की दौरा रद्द कर दिया है। तुर्की द्वारा जम्मू कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को समर्थन दिए जाने के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की लगातार कुर्दिश और सीरिया के लोगों की हत्या कर रहा है, जिसकी भारत ने आलोचना की थी। भारत ने कुर्द की स्वतंत्रता का समर्थन किया था। साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने साइप्रस के राष्ट्रपति से मुलाक़ात कर उसकी सम्प्रभुता को समर्थन दिया था। बता दें कि तुर्की ने साइप्रस के एक बड़े भाग पर कब्ज़ा कर रखा है। पीएम मोदी का तुर्की दौरा रद्द होने से वहाँ के राष्ट्रपति रेसेप तैयब अर्दोगान को करारा झटका लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिन के दौरे पर तुर्की जाने वाले थे लेकिन वहाँ के राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में अनुच्छेद 370 निरस्त करने के ख़िलाफ़ दिए गए बयान को भारत ने गंभीरता से लिया है क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। यहाँ तक कि एफएटीएफ (फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स) की पेरिस में आयोजित बैठक में भी तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया। इससे पहले तुर्की, चीन और मलेशिया के समर्थन के कारण ही पाकिस्तान एफएटीएफ में ब्लैकलिस्ट होने से बच गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर 27-28 को सऊदी में एक बड़े निवेश समिट में भाग लेने जा रहे हैं। वो वहीं से तुर्की जाने वाले थे। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस दौरे को अभी तक अंतिम रूप दिया ही नहीं गया था, इसीलिए दौरा कैंसल करने वाली बात उठती ही नहीं। पीएम मोदी इससे पहले 2015 जी-20 समिट में भाग लेने तुर्की गए थे। तुर्की के राष्ट्रपति भी जुलाई 2018 में भारत दौरे पर आए थे। लेकिन, तुर्की के राष्ट्रपति ने जम्मू कश्मीर में ‘भारत द्वारा मानवाधिकार हनन’ की बातें कर के दोनों देशों के रिश्तों में खटास ला दी।


हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी तुर्की की आलोचना की थी। तुर्की की राष्ट्रपति को भेजे गए एक अजीबोगरीब पत्र में उन्होंने धमकी दी थी कि अगर वो एक डील पर सहमत न हुए तो तुर्की की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया जाएगा। भारत ने भी तुर्की को लताड़ लगाते हुए सलाह दी थी कि जम्मू कश्मीर पर बिना परिस्थितियों को समझे किसी देश के पूर्णरूपेण आंतरिक मुद्दे पर नकारात्मक टिप्पणी करना सही नहीं है। हालाँकि, तुर्की ने कुर्द पर बमबारी का सिलसिला अभी रोका नहीं है और वहाँ के राष्ट्रपति को कई हत्याओं का जिम्मेदार माना जा रहा है।

भूख से तडप रहे ISIS में शामिल केरल के युवक ने परिजनों को फोन कर घर वापस आने की जताई इच्छा

आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुए केरल के एक युवक ने अपने घर फोन कर वापस आने की इच्छा जताई है। 25 साल का ये युवक इस्लामिक स्टेट की ओर से सीरिया में लड रहा है। किंतु अब वह अपने घर वापस आना चाहता है। इस युवक ने अपने परिजनों के ऐसे वक्त में फोन किया है जब इस आतंकी संगठन के तथाकथित खलीफा का पतन हो चुका है। फोन कर इस युवक ने अपने परिवार को बताया कि, यहां मौजूद आईएस के सदस्य बहुत गरीबी में हैं और वह खाने के लिए लड़ाई कर रहे हैं।
शंका व्यक्त की जा रहीं है कि आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध विश्व को एक एकजुट करने वाले देश यानि भारत में ही जाल बिछाकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दो। अगर सरकार द्वारा गिरफ्तार किया जाने की स्थिति में वहाँ आधी रात को कोर्ट खुलवाने वाले वकीलों की कमी नहीं। जबकि यहाँ अमेरिका सैनिको द्वारा गिरफ्तार करने पर कोई हमारे पक्ष में कोई खड़ा वाला और हमें न जाने कितनी यातनाओं को झेलना पड़ेगा। 
इस आतंकवादी संगठन में सम्मिलित होने वाले अधिकतर कश्मीर और केरल के ही युवक और युवतियाँ सामने आ रही है। जो संगठन दूसरे देशों में अपना जाल बिछाने को बेताब है, वहाँ भुखमरी अथवा धन की कमी होने का सोंचना बेवकूफी होगी।    
फिरोज उर्फ फिरोज खान केरल के कासरगोड़ के इलामबाची गांव का रहने वाला है। वह उन दर्जनों युवाओं में शामिल है जो ISIS में शामिल होने के लिए जून 2016 में घर छोडकर चले गए थे। इनमें से ज्यादातर लोग अफगानिस्तान चले गए। वहीं फिरोज गैर कानूनी तरीके से सीरिया में प्रवेश कर गया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक करिबी रिश्तेदार ने बताया कि,”हमें पिछले महीने फिरोज का फोन आया था। उसने अपनी मां हबीबा से बात की और घर वापस आने और आत्मसमर्पण करने की इच्छा जाहिर की। यह फोन तब आया जब अमेरिकी सेनाओं ने सीरिया के खलीफा को मार गिराया। उसने अपनी मां को बताया कि वह बहुत परेशानी, गरीबी में है और खाने के लिए लड़ रहा है।”
फिरोज के रिश्तेदारों के मुताबिक, उसने अपने परिवार को बताया कि आईएस ने मलेशिया की एक लड़की के साथ उसकी शादी करवाई। जिसने बाद में उसे छोड़ दिया। उन्होंने कहा, “फिरोज यह जानना चाहता था कि क्या वापस घर आने पर उसे किसी केस का सामना करना पड़ेगा। वह आत्मसमर्पण करना चाहता है लेकिन यह नहीं बताया कि वह ऐसा कहां करने की योजना बना रहा है। इसके बाद से हमारी उससे कोई बात नहीं हुई।”
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मेलबर्न : ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय में पढने वाली एक बांग्लादेशी छात्रा को 42 साल जेल की सजा सुनाई गई। उसने आईएस....

खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि केरल के कन्नूर जिले के कई युवा इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ने को सीरिया गए थे। पिछले साल कन्नूर के कूडाली के ३२ साल के शाहजहां वल्लूवाकंडी को तुर्की से उस समय डिपोर्ट कर दिया गया जब वह सीरिया में घुसने की कोशिश कर रहा था।

कश्मीर : इस्लामिक स्टेट में आतंकी बना आदिल, पिता ने भारत सरकार से की वापस लाने की अपील

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उस कश्मीरी व्यक्ति का आवेदन केंद्र को भेज दिया है, जिसमें उसने अपने बेटे को वापस भारत लाने का अनुरोध किया है! बताया गया कि, कश्मीर निवासी आदिल अहमद आतंकवादी संगठन आईएसआईएस में शामिल हो गया था और अब सीरिया में अमेरिकी सहयोगी बलों की हिरासत में है। 
अधिकारियों ने जून 2 को बताया कि, आदिल अहमद ने अपनी एमबीए की पढ़ाई ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड से की थी। उसने इस साल की शुरुआत में सीरिया में आईएसआईएस के अन्य लड़ाकों के साथ अमेरिकी सहयोगी बलों द्वारा पकड़े जाने के बाद आत्मसमर्पण कर दिया था। अहमद 2013 में सीरिया गया था और अपने परिवार को सूचित किया था कि, वह वहां एक एनजीओ के साथ काम कर रहा है। उसके पिता फयाज अहमद एक ठेकेदार के तौर पर कार्य करते हैं और एक डिपार्टमेंटल स्टोर भी चलाते हैं।

पिता को उम्मीद- मोदी सरकार करेगी मदद

फयाज को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि, उनका बेटा इस खतरनाक आतंकवादी संगठन में शामिल हो गया है! वह अपने पुत्र की वापसी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटक रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि, राजधानी देहली में नई सरकार आने के बाद चीजें (पुत्र को वापस लाने की दिशा में) आगे बढ़ेंगी !’
अधिकारियों ने बताया कि, फयाज अहमद की अर्जी आवश्यक कार्रवाई के लिए नई देहली में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भेज दी गई है। एक अधिकारी ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, ‘अगर आदिल को वापस लाया जाता है तो वह आईएसआईएस के कामकाज के तरीके और उनकी योजनाओं के बारे में बता सकता है !’
ऐसे में प्रश्न यह भी होता है कि जब बेटा अमेरिकी सहयोगी बलों की हिरासत में है, तब ही क्यों गुहार लगाई? जब विश्व किसी भी तरह के आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट है, इस स्थिति में क्या भारत सरकार की माँग उचित होगी? और जब भारत सरकार इसे फाँसी देगी, यहाँ आतंकवाद समर्थक वकीलों और नेताओं का आधी रात को सुप्रीम कोर्ट के ताले खुलवाकर mercy petition फाइल कर देंगे। जेएनयू जैसे शिक्षण संस्थानों में "टुकड़े-टुकड़े गैंग" सक्रीय हो जाएगा। अमेरिका में ऐसा कोई गैंग साहस नहीं करेगा। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने चेतावनी दी है कि ब्रिटेन से भाग गई आईएसआईएस की सदस्य दु....
  

आतंकवाद के खिलाफ जंग तेज, अमेरिका ने ओसामा के बेटे पर रखा 10 लाख डॉलर का इनाम

आतंकवाद के खिलाफ जंग तेज, अमेरिका ने ओसामा के बेटे पर रखा इतने करोड़ का इनामअमेरिका ने अल-कायदा सरगना ओसामा बिन-लादेन के बेटे के संबंध में सूचना देने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम देने की घोषणा की है।अमेरिका ओसामा के बेटे हमजा बिन-लादेन को आतंकवाद के ऊभरते हुए चेहरे के रूप में देखता है। ‘जिहाद के युवराज’ के नाम से जाने जाने वाले हमजा के ठिकाने का कोई अता-पता नहीं है। 
ईरान में नजरबंद हो सकता है हमजा
कई सालों से इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया में रह रहा है या फिर ईरान में नजरबंद है
। अल-कायदा का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'हमजा बिन-लादेन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन-लादेन का बेटा है और वह अल-कायदा से जुड़े संगठनों में नेता के रूप में ऊभर रहा है।'
अल-कायदा का हवाला देते हुए विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘हमजा बिन-लादेन अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन-लादेन का बेटा है और वह अल-कायदा से जुड़े संगठनों में नेता के रूप में ऊभर रहा है।’ विदेश मंत्रालय ने किसी भी देश में हमजा की मौजूदगी की खबर देने वाले को 10 लाख डॉलर इनाम देने की घोषणा की है।
30 साल है हमजा की उम्र...
विदेश मंत्रालय ने किसी भी देश में हमजा की मौजूदगी की खबर देने वाले को 10 लाख डॉलर इनाम देने की घोषणा की है
। अमेरिका के अनुसार हमजा की उम्र करीब 30 साल है और 2011 में अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए अमेरिका पर हमलों की धमकी दी है। अमेरिकी नेवी सील्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर 2011 में ओसामा बिन-लादेन की हत्या कर दी थी।
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अब महबूबा से कोई पूछे युद्ध के लिए ललकार कौन है? फिर अप्रत्यक्ष रूप से देखा जाए तो वह पाकिस्तान को ही जाहिल करार कर रही हैं, क्योकि इतने वर्षों से भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देकर भारत को उन्ही का लाडला पाकिस्तान उकसा रहा है। उनके इस वयक्तत्व पर पाकिस्तान को संज्ञान लेकर उन पर फटकारना चाहिए, नाकि हमें उत्तेजित होना चाहिए।

इस वेबसाइट का परिचय
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पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रधान महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान से युद्ध की पैरवी करने वालों को असली जाहिल करार दि.....

पिछले वर्ष अगस्त में खबर आई थी कि अलकायदा की भारतीय उपमहाद्वीप इकाई (एक्यूआईएस) अपने ‘वैचारिक झुकाव’ के चलते भारत में हमले करने की ताक में है लेकिन उसके पास ऐसा करने की क्षमता कम है और देश में सुरक्षा के बेहतर उपायों के चलते वह हमले कर नहीं पा रहा है। अलकायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी ने क्षेत्र में आतंकी समूह का प्रभाव बढ़ाने के लिए 2014 में एक्यूआईएस का गठन किया था। एक्यूआईएस का नेतृत्व हरकत-उल-जेहाद अल-इस्लामी का पूर्व सदस्य असिम उमर कर रहा है जो एक भारतीय है। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)

सीरिया जाकर ISIS में शामिल होने वाली जिहादी शमीमा बेगम से नागरिकता छीनेगा ब्रिटेन

सीरिया जाकर आईएसआईएस में शामिल होने वाली 19 साल की शमीमा बेगम से ब्रिटेन नागरिकता वापस लेगा। ये जानकारी शमीमा बेगम के परिवार के वकील ने दी है। शमीमा सीरिया में आईएसआईएस में शामिल हो गई थी और अब अपने बच्चे के साथ घर लौटना चाहती है। आईटीवी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने शमीमा की मां को एक चिट्ठी भेजी है। साल 2015 में अपने दो साथियों से साथ शमीमा आईएसआईएस में शामिल हो गई थी।

शमीमा ने तीसरे बच्चे को जन्म दिया

कुछ दिनों पहले ही उसने अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया है। शमीमा ने ब्रिटिश अधिकारियों से अपील करते हुए कहा था कि ब्रिटेन में उसके बच्चे को पालने की अनुमति देकर उस पर दया दिखाएं। जबकि उसने आईएस में शामिल होने पर कोई अफसोस जाहिर नहीं किया था। शमीमा के दो अन्य दो बच्चों की कुपोषण के कारण मौत हो गई थी।
अक्सर पहले भी कई समाचार सामने आते रहे हैं कि आतंकवादी संगठन महिलाओं को भर्ती केवल आतंकवादियों की हवस दूर करने के लिए करते हैं। संगठन में शामिल हुई महिलाओं के साथ किसी सामूहिक बलात्कार से भी बुरी तरह दरिंदगी होती है। अन्तर केवल इतना होता है कि वहां उनकी तकलीफ सुनने वाला कोई नहीं होता, वहां तो बस उनको अपनी हवस पूरी करनी होती है। 
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इस वेबसाइट का परिचय
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आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट के चंगुल से आजाद हुई यजीदी लड़की ने अपनी आपबीती सुनायी तो लोगों के रोंगटे सिहर उठे। ...

ब्रिटेन शमीमा से नागरिकता वापस लेगा

पिछले दिनों ही युद्ध की खबर देने वाले एक रिपोर्टर ने शरणार्थी शिविर में उसका पता लगाया था और तब देखा था कि वह गर्भवती है। उस वक्त शमीमा अपने अजन्मे बच्चे की सुरक्षा के लिए युद्ध क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए परेशान थी। परिवार के वकील ने बताया कि शमीमा ने तीसरे बच्चे को दिया हैं। शमीमा अपनी दो दोस्तों खदीजा सुल्ताना और अमीरा अबेस के साथ साल 2015 में सीरिया चली गई थी जहां उसने आईएसआईएस ज्वाइन कर लिया था।
ऐसे में भारत सरकार से प्रश्न है कि क्या ब्रिटेन की तर्ज पर आईएसआईएस या आईएसआई में शामिल होने वालों की भारतीय नागरिकता वापस लेगा? 

'दुनिया भर में हुए Terror Attack हर बार एक ही सूत्र की ओर इशारा करते हैं'--मोदी का पाकिस्तान की ओर निशाना

PM Modiप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए अमेरिकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस से कहा कि विश्व भर में हुए आतंकवादी हमलों के सभी सुराग 'एक ही सूत्र और एक ही स्थान से उपजे होने' की ओर इशारा करते हैं। मोदी ने सिंगापुर में ईस्ट एशिया समिट से इतर पेंस से आपसी हितों वाले अनेक द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की साथ ही पाकिस्तान में हाल ही में आयोजित चुनावों में आतंकवादियों के चुनाव लड़ने पर भी चिंता जताई।
दोनों नेताओं के बीच मुलाकात के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि आंतकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। गोखले ने बताया कि बातचीत के दौरान पेंस ने 26 नवम्बर को मुंबई आतंकवादी हमले के 10 वर्ष पूरा होने का जिक्र किया और आंतकवाद को शिकस्त देने के लिए दोनों पक्षों के बीच सहयोग की सराहना की।
मोदी ने सहानुभूति जताने के लिए पेंस का आभार जताया, साथ ही किसी भी देश अथवा संगठन का नाम लिए बिना कहा कि विश्व भर में हुए आतंकवादी हमलों के सभी सुराग किसी न किसी प्रकार से 'एक ही सूत्र और एक ही स्थान से उपजे होने' की ओर इशारा करते हैं।
उनका इशारा परोक्ष रूप से पाकिस्तान की ओर था।गौरतल है कि विश्व भर में हुए आतंकवादी हमलों में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी मूल के लोगों का हाथ होने की बात सामने आई है। कैलिफोर्निया के सैन बर्नार्डिनों में दो दिसंबर 2015 को पाकिस्तानी मूल के व्यक्ति की गोलीबारी में 14 लोग मारे गए थे
वहीं जून 2017 में लंदन में चाकू से हमला करने वाले तीन आतंकवादियों में से एक पाकिस्तानी मूल का था।इस हमले में सात लोग मारे गए थे और 49 लोग जख्मी हो गए थे।
मोदी ने मुंबई आतंकवादी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पार्टी के पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव लड़ने पर भी चिंता जताई। गोखले ने बताया, 'उन्होंने (मोदी) कहा कि मुंबई हमले में शामिल लोगों को पाकिस्तान में हाल ही में हुए चुनाव में एक राजनीतिक प्रक्रिया में मुख्यधारा में लाना केवल दो देशों भारत और अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का कारण होना चाहिए।'
पाकिस्तान में हाल ही में हुए चुनाव में कुछ खुंखार आतंकवादी सरगना भी खडे़ हुए थे। विदेश सचिव ने कहा, 'दोनों देशों के बीच इस बात पर अच्छी सहमति बनी है कि आंतकवाद निरोधक सहयोग को किस प्रकार से आगे बढ़ाया जाए साथ ही दोनों देशों ने स्वीकार किया है कि यह एक चुनौती है जिसके खिलाफ हमें एक साथ तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिल कर लड़ना है।'
Terrorismआतंकवाद में सीरिया से ज्यादा खतरनाक पाकिस्तान 
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद का समर्थक बना हुआ है और इसके अलावा वो मानवता के लिए सीरिया की तुलना में 3 गुना ज्यादा खतरनाक है। 'ह्यूमनिटी एट रिस्क- ग्लोबल टेरर थ्रेट इंडिकेंट (GTTI)' शीर्षक वाली रिपोर्ट ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और स्ट्रैटजिक फोरसाइट ग्रुप (SFG) द्वारा प्रकाशित की गई है। जीटीटीआई के मुताबिक, अफगान तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अधिकतम खतरा पैदा किया है, वहीं पाकिस्तान को सबसे ज्यादा आतंकवादी अड्डों और उनके लिए सबसे सुरक्षित वाले देशों की सूची में रखा गया है।
रिपोर्ट में कहा गया, 'यदि हम तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर सबसे खतरनाक आतंकवादी समूहों को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि पाकिस्तान उनमें से सबसे ज्यादा उनकी सहायता करता है। इसके अलावा, अफगानिस्तान में स्थित समूहों की एक बड़ी संख्या है, जो पाकिस्तान के समर्थन से संचालित होते हैं।'
80 से अधिक पेज की रिपोर्ट, जो अगले दशक में सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए तैयार की गई है, आतंकवाद से निपटने के लिए नीति निर्माताओं के लिए एक विश्लेषणात्मक रूपरेखा प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि हर प्रकार का उग्रवाद, सामूहिक विनाश के हथियारों का दुरुपयोग और आर्थिक व्यवधान, अब से 2030 तक मानव प्रगति को कमजोर कर सकते हैं। वे सभी आतंकवाद से जुड़े हुए हैं।
स्ट्रैटजिक फोरसाइट ग्रुप ने 21वीं शताब्दी के पहले आधे दशक में आतंक के कृत्यों को करने में सक्रिय रूप से शामिल कुछ 200 समूहों का विश्लेषण किया। इनमें से, आईएसआईएस ने पिछले पांच वर्षों में मीडिया में अधिक जगह बनाई है, लेकिन आईएसआईएस के तेज वृद्धि और गिरावट के साथ, अल-कायदा सबसे लचीला नेटवर्क बना हुआ है। 
2011 तक इसका नेतृत्व ओसामा बिन लादेन ने किया था, लेकिन अब उसका बेटा हमजा बिन ओसामा बिन लादेन उभरा है। आतंकवादी समूहों के भविष्य को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारक राज्य, खुफिया एजेंसियां और आपराधिक नेटवर्क से प्राप्त समर्थन होगा।
रिपोर्ट में अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया, यमन और दूसरे देशों के साथ जुड़े वैश्विक आतंकवादी संगठनों के बारे में व्यापक विवरण भी दिए गए हैं।