आ गयी भीम और मीम की जोड़ी
दिल्ली में चल रहे किसान ‘आंदोलन’ में अपना समर्थन देने के लिए आज भीम-मीम एक बार दोबारा एक साथ खड़े हैं। टाइम्स नाउ की खबर के मुताबिक एक ओर जहाँ भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँच चुके हैं तो वहीं शाहीन बाग की दादी बिलकिस ने कहा है कि ये किसान उनके प्रदर्शन (शाहीन) में उनके साथ जुटे थे। अब समय है कि इनका साथ दिया जाए। बिलकिस का यही बयान अपने आप सबकुछ बयां कर रहा है।
#Breaking | 'Isn’t it tantamount to interference in India’s sovereign matters?', asks BJP's @rammadhavbjp over the comment made by Canadian PM @JustinTrudeau on the farmers' protest. | #ShaheenKisanConspiracy pic.twitter.com/WZfob5nLLi
— TIMES NOW (@TimesNow) December 1, 2020
#Breaking | @BhimArmyChief Chandra Shekhar Azad reaches the farmers' protest site at the Ghazipur border. | #ShaheenKisanConspiracy pic.twitter.com/Oj0emT9ERQ
— TIMES NOW (@TimesNow) December 1, 2020
कांग्रेस नेता उदित राज का भी इस बीच बयान आया है। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं। लेकिन किसानों के ख़िलाफ़ फैलाए जा रहे प्रोपगेंडा का विरोध करते हैं।
Farmers stood by our protest, it is our turn to stand with them: Bilkis Dadi, Shaheen Bagh protester, tells TIMES NOW. | #ShaheenKisanConspiracy pic.twitter.com/hO5iATdDDz
— TIMES NOW (@TimesNow) December 1, 2020
Expect a riot any time. The clouds ( criminals) are gathering... innocent farmers will be caught in the crossfire between criminals and the Police.
— Anirudh Ganu (@anirudhganu) December 1, 2020
शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन में एक से चेहरे
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था।
उचित दाम पर AbduI सिख किसान बनने को और शाहीन बाग वाली दादी आंदोलन करने को उपलब्ध हैं! pic.twitter.com/pVSr7XqPWN
— डॉ. राज तक (@rajtakk) November 28, 2020
इच्छाधारी किसान नजीर मोहम्मद pic.twitter.com/cALzubfjo1
— 🦁 कुख्यात किसान नेता (@AndColorPockeT) November 28, 2020
सब कुछ शांतिपूर्ण तरीक़े से होगा https://t.co/BmQxY2Mzem
— मरज़ा ग़ालिब 🚩 (@Marja_Ghalib) November 27, 2020
दिल्ली पुलिस को अब किसानो को दिल्ली में आने से रोकना नही चाहिए
— मरज़ा ग़ालिब 🚩 (@Marja_Ghalib) November 27, 2020
किसान जाने ओर केजरीवाल ओर दिल्ली की जनता pic.twitter.com/lHN7iYsYtk
Girgit pic.twitter.com/NEF4hZmwsk
— मरज़ा ग़ालिब 🚩 (@Marja_Ghalib) November 30, 2020
जिन लोगों ने JNU में हिंसा को बढ़ावा दिया था, दिल्ली दंगों के दौरान मुस्लिमों को भड़काया था, वही हरियाणा-पंजाब सीमा पर चल रहे इस ‘किसान आंदोलन’ को भी उपद्रव में बदल रहे हैं।
हजारों लोगों के दिल्ली कूच करने के बाद हरियाणा की सिंधु सीमा पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। ‘रावण’ के पहुँचने की जानकारी मिलने के बाद कई लोग सोशल मीडिया पर प्रदर्शन स्थल पर हिंसा भड़कने की आशंका जता रहे हैं। उनकी चिंता है कि कहीं मासूम किसान अपराधियों और पुलिस के बीच मुठभेड़ में मारे न जाएँ।
Random Protest Exists
— 𝐊𝐞𝐬𝐡𝐮 𝟗.𝟎 (@Keshu_02) December 1, 2020
Le* Dadi - pic.twitter.com/9HotzXj03K
शाहीन बाग़ के बाद अब किसान आंदोलन में बिरयानी
Biryani time at Ghazipur farmers protest spot#DelhiChalo #DelhiFarmersProtest pic.twitter.com/iziM5Q3vWE
— TOI Delhi (@TOIDelhi) November 30, 2020
गुरूद्वारों के होते हुए बाहर की बिरयानी खाने वाले असली सरदार नहीं हो सकते, वो भी गुरूपर्ब के दिन ।https://t.co/iNz5YqvwQ1
— Virendra (@viren56002) November 30, 2020
05 साल पहले VadraCongress के हरियाणा किसानो का उपद्रव,अबV CongressकेPunjabकिसानो की खुराफ़ात मे UrbanNaxaliओ के साथ PFI केagentsओ की घुसपेट एक चिन्ता का विषय, जिनके तार खालिस्तान-इमरान पाकी से जुडे PunjabCMका कडा रुखCongress की खुराफ़ात को द्रशाता है
— NKSRana (@NKSR2016) November 30, 2020
VadraCongress कितनी गिरेगी?
Biryani brigade is back on Roads
— Mihir Jha ✍️ (@MihirkJha) November 30, 2020
ShaheebBagh-ification of Farmers protest is complete. IB should be alert https://t.co/VHVXmPEOtC
Did you see similar arrangement when Migrant workers were leaving Delhi due to lack of Food and shelter ????? pic.twitter.com/TTs0dOlAwU
— Rishi Bagree (@rishibagree) November 29, 2020
Sikh protestors then :
— मरज़ा ग़ालिब 🚩 (@Marja_Ghalib) November 30, 2020
Jo bole So Nihal
Sikh protestors now :
Jo bole Soniyaaaa..#FarmerProtestHijacked
Farmers want article 370 and 35A to restored in Kashmir .. pic.twitter.com/Cs4qLE7RcG
— Exsecular (@ExSecular) November 30, 2020
असली किसान V/S खालिस्तानी समर्थक pic.twitter.com/gfyltkYbtU
— 🇮🇳 राठौड़ 🇮🇳 (@lokarlorajniti) November 29, 2020
Farmers ? Imran Khan humara bhai he Dushman Delhi mein betha hai pic.twitter.com/lSLVImJivp
— Chayan Chatterjee (@Satyanewshi) November 28, 2020
शाहीन बाग और किसानों के इस ‘आंदोलन’ में एक जैसे चेहरों के अलावा एक अन्य कॉमन चीज बिरयानी भी निकल कर आई है। पिछले दिनों राजधानी दिल्ली के गाजीपुर क्षेत्र से वीडियो सामने आई, जिसमें दिखाया गया कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के इस वीडियो के साथ कैप्शन भी लिखा हुआ था, “गाजीपुर में किसानों के विरोध-प्रदर्शन की जगह पर बिरयानी का समय हो चुका है।” वीडियो में देखा जा सकता है कि सैकड़ों लोग बिरयानी के लिए पंक्ति बना कर खड़े हैं।
इतिहास में पहली बार हुआ जब पूरी दुनिया को लंगर खिलाने वाली कौम टोपी वालों के आगे हाथ फैला के खा रही है 😔
— जिनल पटेल भारतीय 🇮🇳RSS संघी🚩 (साइबर योद्धा) (@Jinalpatel007) November 29, 2020
क्या मुँह दिखाएंगे अपने गुरुओं को 🙄
थु है सालो पर😼😠😼😠 pic.twitter.com/wcHVgvOPVS
इस वीडियो को देखने के बाद कुछ ही समय में काफी प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, क्योंकि इस नज़ारे ने यूजर्स की शाहीन बाग़ की यादें ताज़ा कर दी, जब पिछले साल दिसंबर महीने में तमाम इस्लामी सीएए और एनआरसी के तथाकथित ‘विरोध’ में धरने पर बैठे थे।
शाहीन बाग़ प्रदर्शन को मिली थी भरपूर फंडिंग और समर्थन (और बिरयानी भी)
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस मुद्दे का ज़िक्र किया ही था कि शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों और सहयोगियों के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। बिरयानी के साथ-साथ पानी की बोतल, फलों का रस और खाने की चीज़ें भी बाँटी गई थीं। अगर इतने से बात स्पष्ट नहीं होती है तो वहाँ पर एक म्यूज़िक सिस्टम भी लगा हुआ था, जिसका प्रतिदिन का किराया आठ से दस हज़ार रुपए था। इसके अलावा वहाँ पर लगाए गए टेंट का प्रतिदिन का किराया लगभग दस से तीस हज़ार रुपए के बीच था। दिन के वक्त में वहाँ पर 200 से 300 लोग हमेशा ही बैठे रहते थे, जिन्हें मुफ्त चाय-नाश्ता और भोजन दिया जाता था। यानी इस तरह के विरोध-प्रदर्शन का प्रतिदिन खर्च लगभग दस लाख रुपए था।
इतना ही नहीं भाजपा आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने एक वीडियो भी साझा किया था जिसमें साफ़ देखा जा सकता था कि प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को 500 से लेकर 700 रुपए तक दिए जा रहे थे। जो व्यक्ति वीडियो में नज़र आया था उसका यहाँ तक कहना था कि यह लोग शिफ्ट में काम करते थे, जिससे वहाँ भीड़ कम नज़र नहीं आए। महिलाओं को अपने खाली वक्त में वहाँ बैठने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था। व्यक्ति ने यह भी बताया कि प्रदर्शन करने वालों के प्रबंधित रूप से ‘ड्यूटी के घंटे’ तय होते थे, उसके मुताबिक़ शाहीन बाग़ धरना-प्रदर्शन स्थानीय लोगों के लिए आमदनी का ज़रिया से बढ़ कर कुछ नहीं था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शाहीन बाग़ धरने में शामिल होने वाली तमाम महिलाएँ किसानों के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल होने पहुँची थीं। किसान यूनियन के नेताओं का दावा है कि इस विरोध-प्रदर्शन में लगभग 3 लाख किसान हिस्सा ले रहे हैं।
किसान आंदोलन पर उठती उँगलियाँ
इस आंदोलन को लेकर लगातार कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे हैं। खासकर जब से इस प्रदर्शन को खालिस्तानियों और इस्लामी कट्टरपंथी समूह पीएफआई का समर्थन मिला है।
पिछले दिनों SFJ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने उन किसानों के लिए 10 मिलियन डॉलर की वित्तीय सहायता की घोषणा की थी, जिन्हें दिल्ली की यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नुकसान हुआ हो। हाल ही में अपलोड किए गए एक वीडियो में पन्नू ने किसानों से उनको हुए नुकसान का डिटेल भेजने के लिए कहा था ताकि उनका संगठन राशि की क्षतिपूर्ति कर पाए।
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