योगेंद्र यादव करेंगे पंजाब के किसानों के ‘चक्का जाम’ को लीड, दूध-फल-सब्जी भी नहीं आने देंगे

इस तथाकथित किसान आंदोलन में एक नया किसान पैदा हुआ, जिसका नाम है योगेंद्र यादव। ये आदमी कब से किसान हो गया, इस बहरूपिए की पृष्ठभूमि देखनी होगी। लेकिन 2014 में मोदी लहर को रोकने जब सोनिया गाँधी ने अपनी समिति के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाया था, तब मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और योगेंद्र यादव आदि सभी अराजक तत्व सोनिया गाँधी की समिति में थे, और उन दिनों हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से निकली आप" और अगले अंक में शीर्षक "कांग्रेस और आप का DNA Positive" रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन तब भी इनके किसान होने की दूर तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं मिला।  
खैर, इस नए बने किसान के सामने सरसों, पालक, गाजर आदि के बीज रख पूछा जाए कि कौन-सा बीज किसका है? नहीं बता पायेगा ये बहरूपिया तथाकथित किसान। दूसरे, जिन कृषि बिलों को लेकर इन अराजक तत्वों ने इतना उधम मचाया हुआ, बताएं कि "यदि पूर्व के बिल किसानों के हित में थे, तब क्यों किसान भूख और कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहा था? ये विदेशी चंदे से दिल्ली को बंधक बनाकर दिल्लीवासियों की ज़िंदगी दूबर करके क्या मिल रहा है। यह वही दिल्ली है, जिसने योगेंद्र यादव की स्वराज पार्टी को इतनी शर्मनाक हार दी थी कि कोई उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया, क्या योगेंद्र उस अपमानजनक हार का बदला ले रहे हैं? चुनाव के दौरान खुद के बचपन में सलीम होने की वोटरों को दुहाई देकर भी करारी शिकस्त को नहीं टाल पाए योगेंद्र यादव सहूलियत के हिसाब से चोला ओढ़ लेते हैं। कभी राजनीतिक विश्लेषक की, कभी राजनैतिक दल के नेता की तो कभी किसान नेता की।

फिलहाल विफल राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। दिसंबर 6, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।

जनता में होते रोष का भी इनको सामना करना पड़ेगा। जो तथाकथित नेता दूध, सब्जी आदि को बंद कर दे,उसे नेता कहना नेता की गरिमा का अपमान है, इसलिए इन तथाकथित नेताओं को चुनावों में नकार रही हैं, देखिए ट्विटर पर जनता का गुस्सा:-

हालाँकि योगेंद्र यादव ने कहा कि विवाह और इमरजेंसी सेवाओं की अनुमति होगी। दूध, फल, सब्जियों और अन्य सेवाओं की डिलीवरी बंद रहेगी। सिंघु बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा।

वैसे योगेंद्र यादव खुद किसान नहीं हैं। उन्हें हाल ही में किसानों और केंद्र सरकार के बीच इस मामले पर चर्चा में शामिल होने से रोका गया, क्योंकि वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। यादव ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।”

योगेंद्र यादव ने अपने बहिष्कार को लेकर कहा था, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इसका हिस्सा होने पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति हूँ। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर आगे बढ़ गए।”

योगेंद्र यादव जैसों के ‘इच्छाधारी’ चोले और विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर की गई सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं।

पिछले दिनों किसान संगठन और केंद्र सरकार के बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया। सरकार ने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो।

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