इस तथाकथित किसान आंदोलन में एक नया किसान पैदा हुआ, जिसका नाम है योगेंद्र यादव। ये आदमी कब से किसान हो गया, इस बहरूपिए की पृष्ठभूमि देखनी होगी। लेकिन 2014 में मोदी लहर को रोकने जब सोनिया गाँधी ने अपनी समिति के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाया था, तब मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और योगेंद्र यादव आदि सभी अराजक तत्व सोनिया गाँधी की समिति में थे, और उन दिनों हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से निकली आप" और अगले अंक में शीर्षक "कांग्रेस और आप का DNA Positive" रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन तब भी इनके किसान होने की दूर तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं मिला।
चुनाव के दौरान खुद के बचपन में सलीम होने की वोटरों को दुहाई देकर भी करारी शिकस्त को नहीं टाल पाए योगेंद्र यादव सहूलियत के हिसाब से चोला ओढ़ लेते हैं। कभी राजनीतिक विश्लेषक की, कभी राजनैतिक दल के नेता की तो कभी किसान नेता की।वो योगेंद्र यादव जो कभी चुनाव लड़ लें तो खबर बनेगी कि वो अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी NOTA से 500 मतों से पीछे चल रहे हैं, वो दिशानिर्देश दे रहे हैं सबको कि भारत बंद कैसा रखना है। गजबे है।
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) December 6, 2020
Today me and my staff will be showing this video to hundreds of farmers at Singhu Border and Tikri border. You too must download this and forward it to your friends and family in Punjab, Haryana, UP or other farming states to show the truth! बिल मस्त हैpic.twitter.com/tx5yVoHr4w
— 🇮🇳Sudhir🔗 (@seriousfunnyguy) December 7, 2020
सारे ट्रैक्टर पंजाब से दिल्ली आ गये लेकिन वो सोफे वाला ट्रैक्टर कहीं नहीं दिख रहा..!
— Mohit Babu 🇮🇳 (@Mohit_ksr) December 4, 2020
😂😂 pic.twitter.com/C5jF1vyMPd
Remember ? He is working on His agenda pic.twitter.com/mmXj8TYbWX
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga) December 7, 2020
फिलहाल विफल राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। दिसंबर 6, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।
December 8 #BharatBandh will start from morning. Chakka Jam will remain imposed till 3PM. Delivery of essential commodities will also remain shut. However, emergency services will be allowed: @_YogendraYadav #FarmersProtest #Farmers pic.twitter.com/cRPEzRDvQQ
— Mirror Now (@MirrorNow) December 6, 2020
जनता में होते रोष का भी इनको सामना करना पड़ेगा। जो तथाकथित नेता दूध, सब्जी आदि को बंद कर दे,उसे नेता कहना नेता की गरिमा का अपमान है, इसलिए इन तथाकथित नेताओं को चुनावों में नकार रही हैं, देखिए ट्विटर पर जनता का गुस्सा:-8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा। दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी: सिंघु बॉर्डर पर जय किसान आंदोलन से योगेंद्र यादव pic.twitter.com/gvc14gxSLR
— ANI_HindiNews (@AHindinews) December 6, 2020
कितना मासूम समझता था योगेंद्र यादव तुमको,
— हिन्दू अशोक गोयल (@AshokGo46043024) December 6, 2020
इस चेहरे के पीछे शैतान छुपा है, पता ना था pic.twitter.com/jVD836e2lK
Delhi citizens deserve this. They have voted for this kind of peace-ful governance. You may cut water/electricity all citizens. Central government is committed to adhere to democratic values, not the emergecy of Congress. Congress leaders seems to have left Delhi for holidays.
— KRS (@rajanp78) December 6, 2020
Yogendra Yadav is a 'so called' educated criminal misleading the farmers. His Bank accounts/assets must be scrutinized. He has become a professional rioter.
— Tarun Das (@BlrTarun) December 6, 2020
Just go thru all pic.twitter.com/03tXXIApse
— Amit Seth (@amitrajseth) December 6, 2020
Western up ka hi hai bhai Rakesh Tikket
— MALIK ANKIT (@Ankittmalikk99) December 6, 2020
सरकार इन्हें झेल क्यों रहीं हैं मेरे समझ के बाहर है, सुप्रीम कोर्ट में केस गया है वहां से आर्डर मिला तो सही नहीं तो ट्रक में भर के इन सब को इनके घर छोड़ आना चाहिए
— ডাক্তার বাবু |डॉक्टर बाबू |Doctor Babu|🇮🇳🌈 (@abhi_22_) December 6, 2020
योगेंद्र यादव कौन सा किसान नेता है।जो कह रहा कि चक्का जाम रहेगा।फल, दूध, सब्जियों जो किसान की हैं।उनका नुकसान कौन सा नेता देगा।भारत बन्द से किसी और का नही सबसे ज्यादा नुकसान किसान का होगा।यह राजनितिक पार्टियों के नेता किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी रणनीतिक रोटियां सेंकने लगे।
— Munesh Yadav 🇮🇳 (@MuneshY9320) December 6, 2020
सही कहा आपने,
— रवींद्र कुमार सिंह (@Rabindr48131282) December 6, 2020
सही कहा आपने बिलकुल सही, धन्यवाद, शुभ संध्या
— रवींद्र कुमार सिंह (@Rabindr48131282) December 6, 2020
joote khaane kaa time aa gaya hai iss urban naxal yogendra yadav kaa. Yehi deserve kartaa hai ye aadmi.
— Manoj Sinha (@mksbabbles) December 6, 2020
No he is farmer also
— A Arora (@ashwanindia1408) December 6, 2020
He has 8 plant in his balcony
Sir कुत्ते से compare करके कुत्ते की insult मत करिए. Please
— psychologistchavi (@drchavi) December 6, 2020
ये नाश कर रहे है https://t.co/kCKAqzG8n5
— Satya Chaudhary (@satyagodara) December 6, 2020
Who r u to allow or disallow
— Brijesh Popat (@brijesh_Bharat) December 6, 2020
Don't try to instigate sentiment of common man.
If they gather against your gang. Wint fund shelter to hide .
Ransom is v risky mind it ..Don't play this fire
Sharad Pawar as the Agriculture Minister wrote to CMs in August 2010 to undertake APMC reforms to encourage participation of private sector. @maryashakil pic.twitter.com/FDn3nZiktd
— हिन्दू अशोक गोयल (@AshokGo46043024) December 6, 2020
So all the transporters and businessmen are supporting this.
— Lohit Acharya (@Lohit_Acharya) December 6, 2020
They are all MIDDLEMEN. Not farmers.
हालाँकि योगेंद्र यादव ने कहा कि विवाह और इमरजेंसी सेवाओं की अनुमति होगी। दूध, फल, सब्जियों और अन्य सेवाओं की डिलीवरी बंद रहेगी। सिंघु बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा।
वैसे योगेंद्र यादव खुद किसान नहीं हैं। उन्हें हाल ही में किसानों और केंद्र सरकार के बीच इस मामले पर चर्चा में शामिल होने से रोका गया, क्योंकि वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। यादव ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।”
योगेंद्र यादव ने अपने बहिष्कार को लेकर कहा था, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इसका हिस्सा होने पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति हूँ। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर आगे बढ़ गए।”
योगेंद्र यादव जैसों के ‘इच्छाधारी’ चोले और विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर की गई सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं।
पिछले दिनों किसान संगठन और केंद्र सरकार के बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया। सरकार ने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो।
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