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दिल्ली : जबरदस्ती मार्केट बंद करवाना चाहते थे AAP के मंडी चेयरमैन आदिल खान

गिरगिट से तेज रंग बदलने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से पूछा जाए कि जब किसान प्रदर्शन का समर्थन ही करना था, फिर क्यों दिल्ली में कृषि कानून को लागु किया? वास्तव में जो आदमी बच्चों की झूठी कसम खा सकता है, गिरगिट क्या है उसके आगे?
केंद्र सरकार से अपनी माँग मनवाने के लिए किसानों ने आज (दिसंबर 8, 2020) भारत बंद का आह्वान किया है। इस बंद में उन्हें कई अलग-अलग क्षेत्रों (राजनीतिक दलों) से समर्थन मिल रहा है। लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो किसानों के साथ खड़े हैं, मगर भारी नुकसान उठाने की स्थिति में नहीं हैं। सब्जी और फल मंडियों के व्यापारी इसी सूची में आते हैं।

महाराष्ट्र के पुणे में तो भारत बंद के बावजूद सब्जी मंडियाँ खुली हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने इस पर कहा, “हम किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हैं, लेकिन हमने बाजार खोले हुए हैं ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाली फसल स्टोर की जा सके और वह खराब न हो। इन्हें हम कल ही बेचेंगे।”

                                                                                                                                        साभार दिल्ली में भी सब्जी मंडी के व्यापारियों की यही स्थिति है लेकिन यहाँ सुबह तक मंडियों को बंद रखने के लिए AAP नेता द्वारा दबाव बनाया जा रहा था। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने अपने ट्वीट में इसका जिक्र किया। उन्होंने सुबह-सुबह अपने ट्वीट में लिखा, “मेरे पास दिल्ली की फल सब्जी मंडियों के व्यापारियों के फोन आ रहे हैं। व्यापारी मजदूर सब आज मंडियाँ खोलना चाहते हैं। केजरीवाल सरकार के नियुक्त मंडी चैयरमैन जबरदस्ती बंद के निर्देश दे रहे हैं।”

हालाँकि इसके बाद उनका ट्वीट आया, जिसमें उन्होंने फल सब्जी मंडियाँ खुलने की बात कहीं। उन्होंने लिखा, “दिल्ली की फल सब्जी मंडियाँ खुल गई हैं। ओखला, आजादपुर मंडियों में व्यापार जारी है। दिल्ली की सारी मार्केट, बाजार, इंडस्ट्रियल एरिया खुलेंगे- सदर बाजार, चाँदनी चौक, लाजपत नगर, सरोजिनी, गाँधी नगर, नेहरू प्लेस, कनॉट प्लेस, करोलबाग, कमला नगर सब खुलेगा। दिल्ली में बंद फ्लॉप।”

उनके अलावा नीलकांत बक्शी ने भी अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी द्वारा नियुक्त चेयरमैन के दबाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “ओखला मंडी पूर्ण रूप से खुली है। आम आदमी पार्टी नियुक्त चेयरमैन आदिलजी ने बड़ा जोर लगाया कि यहाँ तो उनकी चल जाएगी लेकिन कुछ ना हुआ, मंडी खुली और माल का भरमार है। ओखला मंडी आभार।”

दिल्ली में  APMC के अध्यक्ष आदिल अहमद खान हैं। इसके अलावा राजीव सिंह मेंबर सेक्रेट्री हैं। इनके अतिरिक्त मार्केटिंग कमेटी में 8 अन्य सदस्य भी नियुक्त किए गए हैं। APMC का उद्देश्य फलों और सब्जियों के विपणन की सुविधा देना है। इसके अलावा किसानों, उत्पादकों/विक्रेताओं व उपभोक्ताओं के फायदे व सुरक्षा के लिए नियमन लागू करना है।

भारत बंद को लेकर इससे पहले आदिल खान ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि आजादपुर मंडी समेत दिल्ली की दूसरी मंडियों के व्यापारियों ने भारत बंद का समर्थन करते हुए मंडी में व्यापार न करने का निर्णय लिया है। मंडी के सभी संगठनों ने निर्णय लिया है कि किसानों के समर्थन के लिए मंडी में अपना व्यापार बंद रखेंगे।

योगेंद्र यादव करेंगे पंजाब के किसानों के ‘चक्का जाम’ को लीड, दूध-फल-सब्जी भी नहीं आने देंगे

इस तथाकथित किसान आंदोलन में एक नया किसान पैदा हुआ, जिसका नाम है योगेंद्र यादव। ये आदमी कब से किसान हो गया, इस बहरूपिए की पृष्ठभूमि देखनी होगी। लेकिन 2014 में मोदी लहर को रोकने जब सोनिया गाँधी ने अपनी समिति के अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी का गठन करवाया था, तब मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और योगेंद्र यादव आदि सभी अराजक तत्व सोनिया गाँधी की समिति में थे, और उन दिनों हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते शीर्षक "कांग्रेस के गर्भ से निकली आप" और अगले अंक में शीर्षक "कांग्रेस और आप का DNA Positive" रिपोर्ट प्रकाशित की थी, लेकिन तब भी इनके किसान होने की दूर तक कहीं कोई नामोनिशान नहीं मिला।  
खैर, इस नए बने किसान के सामने सरसों, पालक, गाजर आदि के बीज रख पूछा जाए कि कौन-सा बीज किसका है? नहीं बता पायेगा ये बहरूपिया तथाकथित किसान। दूसरे, जिन कृषि बिलों को लेकर इन अराजक तत्वों ने इतना उधम मचाया हुआ, बताएं कि "यदि पूर्व के बिल किसानों के हित में थे, तब क्यों किसान भूख और कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहा था? ये विदेशी चंदे से दिल्ली को बंधक बनाकर दिल्लीवासियों की ज़िंदगी दूबर करके क्या मिल रहा है। यह वही दिल्ली है, जिसने योगेंद्र यादव की स्वराज पार्टी को इतनी शर्मनाक हार दी थी कि कोई उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाया, क्या योगेंद्र उस अपमानजनक हार का बदला ले रहे हैं? चुनाव के दौरान खुद के बचपन में सलीम होने की वोटरों को दुहाई देकर भी करारी शिकस्त को नहीं टाल पाए योगेंद्र यादव सहूलियत के हिसाब से चोला ओढ़ लेते हैं। कभी राजनीतिक विश्लेषक की, कभी राजनैतिक दल के नेता की तो कभी किसान नेता की।

फिलहाल विफल राजनेता और पेशेवर प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव पंजाब के किसानों के विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। दिसंबर 6, 2020 को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, योगेंद्र यादव ने कहा कि बंद के दौरान आवश्यक वस्तुओं के वितरण की भी अनुमति नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 3 बजे तक चक्का जाम रहेगा। किसान संगठनों ने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान कर रखा है।

जनता में होते रोष का भी इनको सामना करना पड़ेगा। जो तथाकथित नेता दूध, सब्जी आदि को बंद कर दे,उसे नेता कहना नेता की गरिमा का अपमान है, इसलिए इन तथाकथित नेताओं को चुनावों में नकार रही हैं, देखिए ट्विटर पर जनता का गुस्सा:-

हालाँकि योगेंद्र यादव ने कहा कि विवाह और इमरजेंसी सेवाओं की अनुमति होगी। दूध, फल, सब्जियों और अन्य सेवाओं की डिलीवरी बंद रहेगी। सिंघु बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद रहेगा। चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा।

वैसे योगेंद्र यादव खुद किसान नहीं हैं। उन्हें हाल ही में किसानों और केंद्र सरकार के बीच इस मामले पर चर्चा में शामिल होने से रोका गया, क्योंकि वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता हैं। यादव ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने खुद उनकी उपस्थिति पर आपत्ति जताई थी।दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी। शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी।”

योगेंद्र यादव ने अपने बहिष्कार को लेकर कहा था, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से इसका हिस्सा होने पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति हूँ। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर आगे बढ़ गए।”

योगेंद्र यादव जैसों के ‘इच्छाधारी’ चोले और विरोध-प्रदर्शनों में कथित तौर पर की गई सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर लोग विरोध-प्रदर्शनों के पीछे की मंशा पर सवाल उठाने लगे हैं।

पिछले दिनों किसान संगठन और केंद्र सरकार के बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया। सरकार ने कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि वह नहीं चाहती कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो।