2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से इनकी विरोधियों रोटी-पानी के साथ-साथ रातों की नींद भी हराम हो चुकी है। मोदी शायद ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके खानपान से लेकर उनके आने-जाने पर विरोधी गिद्ध की नज़र रखने को आतुर हैं। पहले इनके खाने-पीने की जानकारी और फिर इनकी माताश्री के दिल्ली अपने पुत्र के पास और रुकने आदि तक की RTI डाली जा चुकी हैं, लेकिन PMO से हर बार एक ही जवाब मिला कि "पता नहीं, प्रधानमंत्री जी अपने निजी करते हैं, किसी को नहीं पता।" लेकिन अब जो सूचना मांगी गयी है, उसमे जहाज से आने-जाने की सूचना। आखिर विरोधी क्यों और किस कारण जानकारी लेना चाह रहे हैं। ऐसे में प्रश्न होता है कि क्या जानकारी लेने वाला कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा क्यों लेना चाहता है? यह गंभीर जाँच का विषय है।
PM मोदी कहाँ गए थे, कब गए थे, कैसे गए थे और किस-किस रूट से गए थे – RTI करके एक शख्स ने यह जानकारी माँगी थी। आश्चर्य की बात यह है कि यह RTI एक ऐसे शख्स ने डाली थी, जो खुद भारतीय वायुसेना के कोमोडोर रह चुके हैं, नाम है – लोकेश के बत्रा।
कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा ने PM मोदी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में भी यह सब जानकारी माँगी थी – 2013 से लेकर अब तक जब RTI डाली गई थी, उस तिथि तक)। आश्चर्य यह कि केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने 8 जुलाई 2020 को भारतीय वायु सेना को यह जानकारी देने के लिए निर्देश भी जारी कर दिया।
अब भारतीय वायु सेना ने CIC के इस निर्देश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। भारतीय वायु सेना का कहना है कि प्रधानमंत्री से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री की हवाई यात्रा से संबंधित जानकारी साझा नहीं की जा सकती है। वायु सेना ने इसे ‘सेंसिटिव डिटेल’ की कैटेगिरी में बताया है।
भारतीय वायु सेना ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री के साथ चलने वाले SPG ग्रुप के जवान और पूरी यात्रा डिटेल को सार्वजनिक करने से न सिर्फ प्रधानमंत्री की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी बल्कि देश की अखंडता और संप्रभुता पर भी खतरा बन सकता है।
Delhi HC stays Central Information Commission's order directing IAF to provide information relating to PM's foreign trips
कोमोडोर (रिटायर्ड) लोकेश के बत्रा ने PM मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे इस तरह की जानकारी के लिए जून 2018 में RTI डाली थी। भारतीय वायु सेना ने कोर्ट को यह बताया कि RTI एक्ट के तहत इस तरह की जानकारी को निषेध बताया गया है। अपने तर्क में वायु सेना ने कहा कि CIC ने निर्देश देने में भयंकर चूक की है क्योंकि SPG को RTI एक्ट के तहत छूट दी गई है।
RTI एक्टिविस्ट और सुप्रीम कोर्ट
दिसंबर 2019 में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने प्रशांत भूषण को उनकी एक याचिका के लिए फटकार लगाई। यह याचिका प्रशांत भूषण की ही एक पुरानी याचिका के बारे में थी। उस पुरानी याचिका को दायर कर प्रशांत भूषण ने आरटीआई एक्ट के संबंध में राज्यों के सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बारे में सवाल उठाए थे।
इसके जवाब में सीजेआई ने माना था कि आरटीआई को लेकर कुछ गंभीर चिंताएँ अवश्य जायज़ हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग सूचनाएँ माँग रहे हैं, जिनका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। उन्होंने भूषण को लेकर नाराज़गी जताते हुए कहा, “कुछ लोग खुद को ‘आरटीआई एक्टिविस्ट’ कहते हैं। मुझे बताइए, ये कोई व्यवसाय है क्या?”

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