कथित तौर पर किसान कानूनों के विरोध में दिल्ली में चल रहे कथित किसान आंदोलन को गैर-राजनीतिक होने के दावों के विपरीत, भारतीय किसान यूनियन (BKU उगराह) ने मानवाधिकार दिवस पर दिसंबर 10, 2020 को माओवादी-नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में ‘गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक (यूएपीए) UAPA के तहत गिरफ्तार किए गए कई आरोपितों की रिहाई की माँग की है।
इन प्रदर्शनकारियों की मांग यह सिद्ध कर रही है कि कृषि बिल के विरोध में हो रहा यह उपद्रव वास्तव में नागरिकता संशोधक कानून की आड़ में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में गिरफ्तार हुए दंगाइयों को रिहा करवाने के लिए है। ये है प्रदर्शनकारियों का असली चेहरा। इनका कृषि बिल से कोई लेना-देना नहीं, अपनी असलियत खुद ही सामने ला दी। शायद इसीलिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस खुलकर इनके समर्थन में आये हुए हैं और अकाली दल इनके चक्रव्यूह में फंस गया। क्योकि इन दंगों में आरोपित अधिकतर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के ही लोग हैं।
हर भारतीय को 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान मौहम्मद रफ़ी के उस गैर-फ़िल्मी गीत "कहनी है एक बात हमें इस देश के पहरेदारों से, संभल कर रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से...." को। जो उस समय भी सार्थक सिद्ध हुई थी और आज 55 वर्ष उपरांत सिद्ध होने जा रही है। वरना कृषि बिल की आड़ में बैठे अराजक दंगाइयों की रिहाई की मांग नहीं करते। इनका एजेंडा शुरू से जगजाहिर होने लगा था, उसके बावजूद संविधान की दुहाई देने वाले और जनप्रतिनिधि का स्वांग रच जनता को मुर्ख बना रहे लोग इनके पीछे खड़े नहीं होते।
‘इन्डियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसमें जिन लोगों की रिहाई की माँग की गई है, उसमें शामिल यूएपीए के तहत बुक किए गए असम को भारत से काटने की बात करने वाले शरजील इमाम, उमर खालिद, गौतम नवलखा, पी वरवरा राव, वर्नन गोंज़ाल्वेस, अरुण फरेरा और कथित मानवाधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज सहित 20 से अधिक आरोपितों की तस्वीरें टिकरी सीमा के पास एक मंच पर लगाई जाएँगी। बताया जा रहा है कि कई मानवाधिकार समूहों के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है।
एक ट्विटर यूजर ने धरने पर बैठे किसानों का एक वीडियो भी ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा है कि जो लोग इस तस्वीर को फेक बता रहे थे उन्हें यह वीडियो देखना चाहिए।
To those saying that Pics are Photo shopped.. See in Video the Posters the "Farmers" are holding #FarmersWithModi #FarmersProtests pic.twitter.com/4NoB3nSGxR
— Rosy (@rose_k01) December 10, 2020
सिंधु बॉर्डर पर किसान नहीं आतंकवादी बैठे हैं और यह बात देश की जनता भली-भांति समझ चुकी है समझे नहीं हैं तो सिर्फ लुटियन लुटियन मीडिया के कारकून और विपक्षी दलों के नेता जैसे @RahulGandhi
— suresh pandey (@sureshpandey69) December 10, 2020
The fun part is the entire thing is already hijacked and the so called farmers don’t even realise it, should wait to see if the farmers are eventually kicked out and the shaheenbagh items take over the protest.
— Rajesh (@Pure_Chutzpah) December 10, 2020
Ye sardar bhai in mullo ki kurafat ko kyu nahi samajh rahe ?
— Pushpa Sharma (@PushpaS23764345) December 10, 2020
किसान आंदोलन के नाम पर देश विरोधी एजेंडा रखने वाले किसान नहीं है।ये लोग किसानों को बदनाम कर रहे हैं।शारजील इमाम और उमर खालिद पर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण #UAPA के तहत केस चल रहा है।ऐसे लोगो कि तस्वीरें किसान नहीं उठा सकता जो देशद्रोही है।#FarmersProtest
— Vijay Gupta (@vijaykglg) December 10, 2020
From #FarmersProstests about the #FarmerBill2020 that no one including #rajdeepsardesai knew ,what exactly was wrong about it or what they wanted changed, To #Khalistan , To now #ANTINATIONAL the degradation of protest from 'Stupid' to 'Treason' has been accomplished !! 🙏🙏🙏
— Wondering Woman 🇮🇳 (@indiclogic) December 10, 2020
he is real Sikh 💪💪 pic.twitter.com/7KTeZgN2Nr
— Woke 🌈 (@reborn2ndtime_) December 8, 2020
वहीं, बीकेयू (उगराह) के वकील और समन्वयक एनके जीत ने कहा कि यह पहले दिन से ही उनकी माँग रही है कि जेलों में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने कहा है कि शहरी नक्सलियों, कॉन्ग्रेस और खालिस्तानियों द्वारा कृषि आंदोलन को भड़काया गया है। एनके जीत ने कहा कि शहरी नक्सल लोगों पर मुकदमा चलाने का यह एक बहाना है और पंजाब में लोगों को स्टेट टेररिज्म और आतंकवादियों के बीच फंसाया जाता है जबकि नक्सलवाद ने आदिवासी लोगों को उनके अधिकार दिलाने में मदद की है।”
अपनी माँगों पर अडिग रहकर केंद्र द्वारा पेश 20 पेज के प्रस्ताव को किसान संघों ने बुधवार को खारिज कर दिया है। किसानों ने दिल्ली की ओर जाने वाले राजमार्गों को अवरुद्ध करके अपने आंदोलन को तेज करने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि 14 दिसंबर को भाजपा नेताओं, मंत्रियों और कार्यालयों के आवासों को घेरा जाएगा, और देश भर के जिला मुख्यालयों पर धरने होंगे। इस के साथ ही दक्षिणी राज्यों में विरोध अनिश्चित काल तक जारी रहेगा।
इस साल की शुरुआत में ही दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में 53 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसमें कई कथित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अर्बन नक्सल समूहों पर दंगा भड़काने का आरोप भी लगा है। ऐसे समूहों के कुछ लोगों को जनता को गुमराह करने और सड़क पर उतरकर दंगा करने के लिए उकसाने के आरोप के तहत UAPA गिरफ्तार किया गया है।

No comments:
Post a Comment