किसान आंदोलन : महिला पत्रकारों का यौन उत्पीड़न, प्रदर्शनकारी नितंबों पर काटते हैं चुटकी: इंडिया टुडे की एडिटर

नए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। अब 7 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के दौरान किसानों की भीड़ ने महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। ट्रैक्टर मार्च कवर करने गईं रिपब्लिक टीवी की पत्रकार शिखा शर्मा और उनके कैमरापर्सन के साथ भीड़ ने छेड़छाड़ करने की भी कोशिश की। शिखा ने इस बारे में एक वीडियो के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आंदोलन नहीं गुंडागर्दी हो रही है, पूरा देश देख ले #TractorMarch में गए मैं और कैमरापर्सन को विरोध के नाम पर मारने और #molest करने की कोशिश कर रही थी ये 500 लोगों की भीड़, किसी तरह ज़िंदा बचे, जवाब दीजिए क्या ये किसान हैं।’

ट्रैक्टर मार्च में शामिल इन गुंडों ने ना सिर्फ बदतमीजी की बल्कि जान से मारने की भी कोशिश की। इसे लेकर पत्रकारों में नाराजगी है।
किसान आंदोलन के नाम पर पिछले दिनों रिपब्लिक टीवी और जी न्यूज की महिला एंकर के साथ बदसलूकी हुई थी। अब इंडिया टुडे की एडिटर प्रीति चौधरी ने दावा किया है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद ‘कुछ प्रदर्शनकारी’ रिपोर्टरों (पत्रकारों) का यौन उत्पीड़न भी करने लगे हैं, वहीं वहाँ मौजूद अन्य लोग ये सब होने दे रहे हैं।

प्रीति चौधरी ने दावा किया कि ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट करने के लिए उनकी खुद की टीम के पास कई ऐसे वाकये हैं, जब रिपोर्टर को यौन उत्पीड़न झेलना पड़ा।

उनके इस दावे के बाद कांग्रेस नेता व भारत किसान यूनियन के सदस्य भूपेंद्र चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और यौन उत्पीड़न को जस्टिफाई करने के लिए उन रिपोर्टर्स को खबरों का भूखा कहा है, जो ‘बलपूर्वक’ खबरों को लेने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे रिपोर्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

अब यहाँ यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिर यदि एक रिपोर्टर किसी की बाइट लेने के लिए एक सीमा को भी पार करता है, फिर भी उसके साथ हुए यौन उत्पीड़न को महज इस तर्क से कैसे जस्टिफाई किया जा सकता है कि उसने ‘बल’ का इस्तेमाल किया। प्रीति चौधरी उनके इस तर्क पर जवाब देती हैं, “अगर बाइट देना नहीं चाहते तो मत दो। लेकिन कम से कम उसके नितंबों पर चुटकी तो मत काटो।” 
महिला पत्रकारों के साथ हो रही बदसलूकी से फिर प्रमाणित हो रहा है कि यह किसान आंदोलन नहीं, बल्कि किसान नेताओं, यूनियन और सियासतखोरों के संरक्षण में देश में अराजकता फैलाने वाले गुंडे और नक्सली इस आंदोलन पर कब्जा कर चुके हैं। कहाँ है केजरीवाल, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और वामपंथी नेता? पत्रकार महिलाओं के साथ हो रही अमान्य घटनाओं पर ट्विटर पर जनता का गुस्सा उसी भांति फूट रहा है, जिस तरह CAA विरोध में बन रहे शाहीन बाग़ों पर फूट रहा था:-

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के साथ 8 राउंड की बातचीत के बाद भी किसान यूनियन किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाई है। लगातार केवल नए कानूनों को वापस लेने की माँग की जा रही है। साथ ही नए-नए तरीके अपनाकर प्रदर्शन को तूल देने का प्रयास हो रहा है। हाल में रेवाड़ी में Gangaicha सीमा पर एक नया विरोध स्थल भी सामने आ गया है।

प्रीति चौधरी की शिकायत से पहले भी सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज आए थे जिसमें जी न्यूज और रिपब्लिक भारत की पत्रकारों के साथ बदसलूकी हो रही थी। हालाँकि, उस समय यौन उत्पीड़न जैसे दावे नहीं हुए थे। लेकिन अब यह बिलकुल नया खुलासा है।

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