तीन तलाक से लेकर कृषि कानून तक बने समस्त कानूनों पर सरकार का विरोध कर रहे मोदी विरोधियों के असली चेहरे सामने आ गए हैं। हकीकत यह है कि ये ही पार्टियां अपने-अपने मैनिफेस्टो में इन मुद्दों का जिक्र करते रहे हैं। जबकि जिन मुद्दों पर सरकार का विरोध करना चाहिए था, उनमें से एक भी मुद्दे पर 2014 से आज तक उठाने की हिम्मत नहीं हुई, क्यों? भ्रष्टाचार से लेकर बेरोजगारी तक इतने मुद्दे हैं, उन्हें क्यों नहीं उठाया जाता? आज सरकार में कितने प्रतिशत कर्मचारी कार्यरत हैं? उठाया किसी ने इस मुद्दे को? क्यों सेवानिर्वित कर्मचारियों को रखा जा रहा? हर चुनाव में भ्रष्टाचार दूर करने का दावे किये जाते हैं, जो चुनाव संपन्न होते ही, ठंठे बस्ते में चले जाते हैं, क्यों?
पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की नेता हरसिमरत बादल ने 9 फरवरी, 2021 को लोकसभा में भाषण दिया। बादल कृषि कानून और चल रहे किसान विरोध पर अपना विचार प्रस्तुत कर रही थीं। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत गुरु नानक देव के नाम से किया, जो सिखों के पहले गुरु थे। गुरु नानक देव ने तीन बड़ी सीख दी थी- कीरत करो, नाम जपो और वंड छको। इसका मतलब है कि कड़ी मेहनत से कमाएँ, भगवान से प्रार्थना करें और जो आपके पास जो है या कमाया है, उसे दूसरों में भी बाँटें।
शुरुआती भाषण में वह किसानों के लिए चिंतित नजर आईं, लेकिन जल्द ही उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए हिंदुओं पर सांप्रदायिक टिप्पणी की। उनका भाषण जल्द ही हिंदू-सिख विभाजन की तरफ मुड़ गया।
किसानों को गोलियों का सामना करना पड़ा : हरसिमरत
बादल ने दावा करते हुए आरोप लगाया कि नवंबर में जब किसानों ने सिंघु बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करने की कोशिश की तो झड़प के दौरान सुरक्षा बलों ने किसानों पर वाटर कैनन और आँसू गैस के गोले के साथ गोलियाँ चलाई। हालाँकि, सच्चाई यह है कि सुरक्षा बलों ने किसानों के साथ हुई किसी भी झड़प के दौरान एक भी गोली नहीं चलाई, चाहे वो नवंबर 2020 हो या 26 जनवरी, 2021।
पुलिस ने निहत्ते किसानों पर हमला किया : बादल
अपने भाषण के दौरान बादल ने कहा कि पुलिस ने झड़प के दौरान निहत्थे किसानों पर हमला किया। नवंबर और जनवरी दोनों के दौरान पुलिस कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई, किसानों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेडिंग को तोड़ने के लिए ट्रैक्टर सहित अपने भारी-भरकम वाहनों का इस्तेमाल किया। 26 जनवरी की हिंसा के दौरान, पुलिस कर्मियों पर डंडों और तलवारों से हमला किया गया।
कुछ प्रदर्शनकारियों को जब रोका गया तो उन्होंने पुलिस कर्मियों को ट्रैक्टरों से रौंदने का प्रयास किया। लाल किले में, ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की गई, डंडों से पीटा गया, लात मारी गई और एक दीवार से धक्का दे दिया गया। हजारों प्रदर्शनकारी हथियार और तलवारों से लैश थे। एक प्रदर्शनकारी 26 जनवरी को असाल्ट राइफल लहराते हुए भी देखा गया था।
सरकार जिद्दी है और किसानों से बात नहीं कर रही : बादल
भाषण के दौरान बादल ने एक विचित्र दावा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों से बात करने में दिलचस्पी नहीं रखती है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार जिद्दी है और 75 से अधिक दिनों में प्रदर्शनकारियों के दिल्ली पहुँचने के बाद, एक भी मंत्री ने किसानों से संपर्क नहीं किया। उसने यह भी दावा किया कि सितंबर से पंजाब में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों के साथ मुद्दों पर चर्चा करने की कोई कोशिश नहीं की गई।
उनके बयान के विपरीत, किसानों के दिल्ली की तरफ कूच करने से पहले केंद्र सरकार ने पंजाब में किसानों से बात करने के लिए कई प्रयास किए। रिपोर्टों से पता चलता है कि किसान यूनियनों ने हर बार एक नई माँग के साथ सरकार द्वारा चर्चा के लिए मार्ग खोलने से इनकार कर दिया। जब किसान दिल्ली की ओर बढ़ने लगे, तो बैठक के लिए पहले से ही तारीख तय कर दी गई थी और यूनियनें केंद्र सरकार द्वारा दी गई तारीख का इंतजार कर सकती थीं। हालाँकि, उन्होंने अराजकता की स्थिति पैदा करते हुए दिल्ली की ओर मार्च करने का फैसला किया।
दिसंबर 2020 में चर्चा के पहले दौर के बाद से, सरकार अब तक किसान संघों के साथ चर्चा के 11 दौर की वार्ता कर चुकी है। सरकार ने उन्हें समस्याओं की एक सूची देने और कानूनों को क्लॉज-बाय-क्लॉज पर चर्चा करने के लिए कहा है। किसान यूनियनों ने मामले में हठ दिखाया और माँग की है कि सरकार को कानूनों को निरस्त करना चाहिए।
निशान साहब को कटघरे में खड़ा किया गया : बादल
बादल ने दावा किया कि लाल किले पर जो झंडा फहराया गया था, वह निशान साहिब था और यह गुरुद्वारों की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री और कई विदेशी नेताओं द्वारा धारण किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इसे तिरंगे के लिए अपमान का कार्य बताकर, हर कोई निशान साहिब को कठघरे में खड़ा कर रहा है। हालाँकि, निशान साहिब, जो सिख समुदाय के पवित्र प्रतीक के साथ एक त्रिकोणीय झंडा है, एकमात्र ध्वज नहीं था जो गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर फहराया गया था। एक अन्य आयताकार झंडा भी वहाँ पर फहराया गया था, जो कि खालिस्तान समूहों के झंडे से काफी मिलता-जुलता था।
बादल ने विवाद को हिन्दू बनाम सिख बनाते कहा: हमारे गुरुओं ने जनेऊ और तिलक की रक्षा में अपना बलिदान दिया
अपने भाषण के अंत में, बादल हिंदुओं के लिए जहर उगलने से नहीं कतराई। उन्होंने दावा किया कि सिख गुरुओं ने तिलक और जनेऊ पहनने वालों के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने दावा किया कि सिखों ने हमेशा हिंदुओं को बचाया है और अब हिंदू सिख गुरुओं का अपमान कर रहे हैं।
वास्तव में, कोई भी सिखों के खिलाफ नहीं है। राज्यसभा में भी अपने हालिया भाषण के दौरान, पीएम मोदी ने भारत की प्रगति में सिख समुदाय द्वारा किए गए योगदान का उल्लेख किया था। किसान विरोध की बहस और मीडिया प्रचार के दौरान, सिख विरोधी कोई टिप्पणी नहीं की गई है। वास्तव में, प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ अलगाववादी तत्वों ने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी टिप्पणी की थी, जो कि पाकिस्तान द्वारा प्रोत्साहित किए गए अलगाववादी खालिस्तानी भावनाओं को भड़का रहा था।
“आपके जनेऊ और तिलक को बचाने के लिए हमारे गुरु ने शहादत दी” says @HarsimratBadal_
Leftist-Izlamists hate Hindus, so does Khalistaπis.
Lady speaking the language of ISI trained Trolls pic.twitter.com/pqurhcBiSf
— Mihir Jha ✍️ (@MihirkJha) February 9, 2021
प्रधानमंत्री ने किसानों को परजीवी कहा : बादल
बादल ने अपने भाषण के दौरान एक अन्य फर्जी दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की सीमाओं पर विरोध कर रहे किसानों को परजीवी कहा। दरअसल, पीएम मोदी ने उन लोगों का जिक्र किया, जो हमेशा विरोध में मौजूद रहते हैं, भले ही विरोध का एजेंडा कुछ भी हो।
अवलोकन करें:-
पीएम मोदी ने कहा कि ये लोग विरोध प्रदर्शनों पर जोर देते हैं और अक्सर प्रदर्शनों को दुष्प्रचार में बदल देते हैं। ऐसे पेशेवर प्रदर्शनकारियों को परजीवियों की संज्ञा देते हुए, पीएम मोदी ने कहा कि उनकी पहचान करना आवश्यक है क्योंकि वे राष्ट्र के लिए परेशानी का कारण हैं। पीएम की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि यह किसानों के खिलाफ नहीं है, लेकिन कुछ राजनीतिक व्यक्ति विरोध प्रदर्शन को राजनैतिक प्रासंगिकता के लिए हाइजैक कर रहे हैं।


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