किसान आंदोलन में एक बार फिर फूट पड़ती नजर आ रही है। अब भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरनाम सिंह चढूनी ने राकेश टिकैत पर किसान आंदोलन बेचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत बीजेपी की गोदी में बैठे हैं।
जबकि सच्चाई यह है कि इस आंदोलन की मशाल जलाई पंजाब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और हवा दी राहुल गाँधी, आम आदमी पार्टी और अकाली दल ने। और अब जितने भी मोदी विरोधी है, सभी मालपुए खाने एकजुट हो चुके हैं। इसमें कोई दो राय भी नहीं कि किसान आंदोलन तो प्रारम्भ से अपनी राह भटक अराजक तत्वों के अधीन जा चूका था, जो 26 जनवरी को सबके सामने आ गया।
जहाँ तक कृषि कानूनों से किसानों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करनी पड़ेगी का प्रश्न है, इन कानूनों के बनने से पूर्व ही कई राज्यों में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग चल रही है, जिससे किसान ऋण लेने की बजाए ऐश से रोटी खा रहा है। दूसरे, यह भी दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इन कानूनों के लागु होने पर किसानों को अपनी जमीन पूंजीपतियों के हाथ बेचने की नौबत आ जाएगी, लेकिन इस तरह का दुष्प्रचार करने वाले राष्ट्र को बताएं कि दिल्ली में गुलाबी बाग़ से लेकर कीर्ति नगर, सुभाष नगर, विकासपुरी, पालम, द्वारका, और गाँधी नगर से लेकर लोनी तक खेत किसके राज में बिके? दिल्ली के सारे खेत कहाँ गए? किसके राज में बिके थे और क्यों?
जब नीयत खराब हो तो ऊपरवाला भी साथ नहीं देता। 24 घन्टे में नंगे हो गए वामपंथी और एजेंडाधारी कि कैसे ट्वीट करवा रहे थे देश को बदनाम करने के लिए। लानत है। pic.twitter.com/ScPYg5CZ9k
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) February 3, 2021
एक वीडियो जारी कर चढ़ूनी ने राकेश टिकैत पर आरोप लगाते हुए कहा है कि कुछ किसान संगठन इस आंदोलन को सरकार के पास बेचना चाह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टिकैत इस आंदोलन को अपना आंदोलन बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो संगठन सरकार से बात करने के लिए जा रहे हैं, मैं उनसे भी प्रार्थना करना चाहूंगा हूं कि वे इन किसानों पर रहम खाएं और किसानों का ना बेचें।
वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया है कि बहुत से किसान संगठन अपनी निजी फायदे के लिए अपने संगठन को बेच रहे हैं। अब टिकैत भी किसान आंदोलन को अपना आंदोलन बता रहे हैं। जबकि टिकैत साहब बीजेपी की गोदी में बैठे हैं। उनका हरियाणा का प्रधान भी बीजेपी की गोदी में बैठा है। चढूनी ने यह भी कहा कि राकेश टिकैत ने मेरे खिलाफ दो केस दर्ज कराए हैं। उन्होंने मुझ पर झूठे आरोप लगाए।
2/2
— Socho... Samajho... Jaano (@EkSochSachKi) February 3, 2021
On 27 Jan, when we were watching the whole drama. Opposition parties were bargaining with Khalistanis for taking over.
It seems large funds were transferred from opposition and they took over the protest.
And farmers started moving towards borders.
इसके पहले गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों द्वारा की गई हिंसा के बाद दो किसान संगठनों ने खुद को इस आंदोलन से अलग कर लिया था। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह इस आंदोलन से अलग हो गए। इसके साथ ही भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) ने भी बॉर्डर से अपना आंदोलन खत्म कर दिया था।
किसान आंदोलन में खुलकर लगे खालिस्तानी नारे, हुआ तिरंगे का अपमान
दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के नाम भीड़ बढ़ाने वाले लगातार ये पूछ रहे हैं कि आखिर इतने पावन प्रदर्शन को कैसे खालिस्तानियों से जोड़ा जा सकता है। अब इसी सवाल के जवाब में कुछ वीडियोज सामने आई हैं, जिससे साफ हो रहा है कि पूरे प्रदर्शन में खालिस्तानियों की घुसपैठ है।
ये वीडियो ट्विटर पर अंशुल सक्सेना ने शेयर की है। इसमें सुन सकते हैं कि प्रदर्शनकारी कैसे हाथों में झंडा लिए आतंकी भिंडरावाले और आंतकी जगतार सिंह के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। कहा जा रहा है, “भिंडरावाले तेरी सोच पर राज करेगा… भाई जगतार जिंदाबाद-जिंदाबाद।” वीडियो बनाने वाला बार बार जगतार सिंह का नाम लेता है और भिंडरावाले की सोच को राज करवाने की बात कहता है।
Finally found it.
— Anshul Saxena (@AskAnshul) February 3, 2021
1. This is how Khalistanis infiltrated farmers' protest.
Slogans for Terrorist Bhindranwale and Terrorist Jagtar Singh raised in farmers' protest. pic.twitter.com/NofeeGnyJc
कुछ सेकेंड की वीडियो में भारी भीड़ को देख कर कहा जाता है कि पंजाब के नौजवानों को देख सकते हैं जिन्हें नशेड़ी कहा गया, वो आज मोदी तक पहुँच गए हैं।
इसके बाद दूसरी वीडियो में साफ-साफ तिरंगे का अपमान होते देखा जा सकता है। वीडियो बनाने वाला पहले तो तिरंगे को देख कर गंदी गाली देता है। फिर उन प्रदर्शनकारियों की ओर बढ़ता है जिनके हाथ में खालसा का झंडा होता है। आगे के विजुअल्स में तिरंगे को जमीन पर पड़ा, गाड़ी के नीचे दबा देखा जा सकता है जबकि हाथों में खालसा का झंडा चारों ओर नजर आ रहा है।
2. Our Tricolor is also being abused by Khalistani in this video of farmers' protest. pic.twitter.com/PeyL77j670
— Anshul Saxena (@AskAnshul) February 3, 2021
I've uploaded the same..! Someone should arrest them immediately pic.twitter.com/eaGeYa5YEo
— Iakarsh (@Iakarsh1) February 3, 2021
Jaha majority waha gnd dalenge, jaha minority waha nice sardar..
— Sukha Delhi (@delhi_sukha) February 3, 2021
Mahendra Singh Tikait , father of Rakesh Tikait was arrested by UP Police for making provocative statements against Mayawati. pic.twitter.com/y0CbyDDahk
— Asia.India-Defense (@Xia257) February 3, 2021
#खालिस्तान से #खलीफा तक#टूकड़ेटूकड़ेगैंग से #टिकैत तक#वामपंथी #काँग्रेसी से #आप तक#आरजेडी #टीएमसी #एनसीपी से #जिहादी तक#पोपसिंगर_रिहाना से #ग्रेटाटेण्डबर्ग तक..
— Anil Kumar Shukla (@anilshukla_1986) February 3, 2021
सभी #गद्दार सिर्फ़ #मोदीविरोध करते करते देश विरोध पर उतर आए हैं..!!!
Leftists following the old victim card again.
— Ravi Pandey (@RentedSoldier) February 3, 2021
They attacked Delhi Police & CRPF and now playing victim card. Few foreign celebrities with paid tweets supporting their narrative pic.twitter.com/xOiSJRFKqc
इससे पहले कई बार खालिस्तानियों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन हर दफा ये कहकर इन बातों को खारिज कर दिया गया कि जबरदस्ती इस मुद्दे को खालिस्तान से जोड़ा जा रहा है। बेवजह मासूम किसानों को बदनाम किया जा रहा है। मगर, सामने आई दोनों वीडियो दिखाती हैं कि न तो ये प्रदर्शन का कोई वाजिब मकसद है और न ही ये विरोध कृषि कानून पर है।
मामले को तूल देकर हिंसक प्रदर्शन करना भीड़ का एकमात्र एजेंडा लग रहा है। पिछले दिनों भी यही कारनामा 26 जनवरी पर राष्ट्रीय राजधानी में देखने को मिला और अब भी यही हो रहा है। इससे पहले प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने ऐलान किया था कि जो भी दिल्ली के लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 2.5 लाख डॉलर (1.83 करोड़ रुपए) इनाम के रूप में दिए जाएँगे। उसके बाद इसी संगठन द्वारा 1 फरवरी को संसद पर कब्ज़ा और घेराव की धमकी दी गई थी।

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