हाल ही में ‘Haggai इंटरनेशनल’ पर उनका एक इंटरव्यू आया। इसमें उन्होंने दावा किया कि ‘राष्ट्रवादी’ सरकार आधुनिक दवाओं को पश्चिमी बता कर उन्हें नष्ट करना चाहती है। उन्होंने लोगों से ‘अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना’ की अपील करते हुए दावा किया कि अगर भारत सरकार सफल होती है तो 2030 तक भारत में कोई आधुनिक मेडिकल कोर्स ही नहीं रह जाएगा। डॉक्टर जयलाल अपने पद का इस्तेमाल ईसाई मिशनरी गतिविधियों के लिए भी करना चाहते हैं।
एक तरह से देखा जाए तो कोरोना वायरस संक्रमण महामारी भी उनके लिए मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और रोगियों को ईसाई में धर्मांतरित करने का एक अवसर बन कर आया है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि IMA ‘जीसस क्राइस्ट के प्यार’ को साझा करे और सभी को भरोसा दिलाए कि जीसस ही व्यक्तिगत रूप से रक्षा करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि चर्चों और ईसाई दयाभाव के कारण ही विश्व में पिछली कई महामारियों और रोगों का इलाज आया।
उन्होंने ईसाई संस्थाओं में भी गॉस्पेल (ईसाई सन्देश) को साझा करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने IMA में अपने अध्यक्षीय भाषण में भी कहा था कि आज जो भी हैं वह ‘सर्वशक्तिमान ईश्वर जीसस क्राइस्ट’ का गिफ्ट है और कल जो होंगे, वे भी उनका ही गिफ्ट होगा। उन्होंने इस दौरान मदर टेरेसा के उदाहरण का जिक्र किया, जिन पर पहले से ही ईसाई धर्मांतरण के आरोप लगते रहे हैं। ‘क्रिस्चियन टुडे’ के इंटरव्यू में भी उन्होंने बताया कि कैसे महामारी के बावजूद ईसाई मजहब आगे बढ़ रहा है।
Quite self explanatory, isn’t it. Opposition to Ayurveda because people will learn Sanskrit and then everything will be Hindutva. pic.twitter.com/rKKbnpwHVN
— Amit Thadhani (@amitsurg) March 30, 2021
Who the hell is @jayalal10 to propogate Christianity n Conversion what authority does have to question Ayurveda & Sanskrit he might say this about Yoga too the Xtians have expressed their rejection of this .But Yoga n Auyurveda are global movements to aviod allopthy .
— SBK1963 (@sbk1963) March 30, 2021
We need to question this within IMA. Totally unacceptable.
— Amit Thadhani (@amitsurg) March 30, 2021
— Paritosh Bhatt🇮🇳 (@drparitoshbhatt) March 31, 2021
What IMA President thinks: Using hospitals to convert to Christianity, contempt for Hinduism, seeing COVID as a ‘silver lining’ because of conversions and more https://t.co/cKmgESdZb5
— SBK1963 (@sbk1963) March 30, 2021
https://t.co/La09p77Lla@jayalal10 @docraviw As an IMA Life Member, I demand an explanation from Dr. Jayalal, on his unprofessional activities using IMA platform. He must also step down from his post of President, for misusing his office.
— 🇮🇳 Dr D Datta 🇮🇳; MBBS*, MD* Anatomy (@ddatta16) March 30, 2021
वे कोरोना के प्रकोप के कम होने के लिए भी जीसस को ही क्रेडिट देते हैं। उन्होंने कहा था कि जीसस की कृपा से ही लोग सुरक्षित हैं और इस महामारी में उन्होंने ही सभी की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि फैमिली प्रेयर्स और नाइट प्रेयर्स की मदद से ईसाई अब स्वर्ग की अनुभूति कर रहे हैं, न कि भौतिकतावादी दुनिया की। इस तरह से भारत के सबसे बड़े मेडिकल संगठन के मुखिया के लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन या टीकाकरण का कोरोना से लड़ने में कोई रोल नहीं है।
आयुर्वेद की आलोचना में भी डॉक्टर JA जयलाल पीछे नहीं रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि मोदी सरकार इसलिए आयुर्वेद में विश्वास करती है, क्योंकि उसके सांस्कृतिक मूल्य और पारंपरिक आस्था हिंदुत्व में है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 3-4 वर्षों से आधुनिक मेडिसिन की जगह आयुर्वेद को लाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथी और योग इत्यादि की जड़ें संस्कृत में हैं, जो हिंदुत्व की भाषा है।
डॉ जयलाल को एक डॉक्टर होने के नाते इतना तो ज्ञान होना ही चाहिए कि जो इलाज आयुर्वेद में है, उस मूल को असत्य नहीं किया जा सकता। आज आधुनिक चिकित्सा में कितने डॉक्टर हैं, जो बिना कोई टेस्ट करवाए रोगी की नब्ज देख बीमारी की जड़ तक पहुँच सके। नब्ज वो टेस्टिंग मशीन है जो यह बता सकती है कि मरीज ने क्या खाया है। बशर्ते डॉक्टर ठीक से नब्ज पढ़ना जानता हो। यह कोई हवा की बात नहीं, कटु सत्य है। दूसरे, संस्कृत ही समस्त भाषाओं की जननी है। संस्कृत ही विश्व की सबसे प्राचीनतम भाषा है।
बात लगभग 40 वर्ष पुरानी है, जब किसी परिचित को देखने लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल गया था, इमरजेंसी में एक बुजुर्ग हकीम अपनी रीढ़ की हड्डी से पानी निकलवाने के लिए आये, डॉक्टर ने उन्हें कई टेस्टिंग बता दी। अपनी हाकिमीयत दिखाते उन्होंने वहां आये एक मरीज की नब्ज देख, क्या खाया है, क्या बीमारी है, कब से है, जो खाया है वह इस बीमारी में नहीं खाना चाहिए, आदि आदि बता दवाइयां लिख दी। डॉक्टर हैरान, हकीम जी ने साफ लब्जों में कहा कि न डॉक्टरी पढ़ी, और न ही कोई पढ़ाने वाला। आज डॉक्टरी चलती है, टेस्टिंग पर, हमारे समय में चलती थी नब्ज पर। नब्ज कुछ नहीं छिपाती। आखिरकार उस डॉक्टर को टेस्टिंग की जिद छोड़ हकीम जी के आगे नतमस्तक हो उनकी बात माननी पड़ी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन सबके जरिए सरकार लोगों के दिलो-दिमाग में संस्कृत भाषा को घुसाना चाहती है। डॉक्टर जयलाल ने बताया कि उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों के जरिए देश भर में सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करवाए थे। उन्होंने हिन्दुओं में काफी देवताओं के होने की बात करते हुए एक बार कहा था कि उन्हें अब जीसस और मुहम्मद को ईश्वर मान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये हर ईसाई का कर्तव्य है कि वे बाइबिल का संदेश सभी तक पहुँचाए।
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