जैसाकि अपने पिछले लेख में कोरोना वायरस दूसरी लहर के माध्यम से भारत को कमजोर करने का भीतरी एवं बाह्म षड्यंत्र की शंका व्यक्त की गयी थी, उसे सत्यापित करती उत्तर प्रदेश से आयी ये रिपोर्ट। वास्तव में मोदी सरकार को इन षड्यंत्रकारियों को बेनकाब कर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए। कभी नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में शाहीन बाग बनाना तो कभी कृषि कानूनों की आड़ में अराजकता फैलाना और अब कोरोना की आड़ में देश की आर्थिक स्थिति को कमजोर करना।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने अप्रैल 28, 2021 को ट्विटर पर जानकारी दी कि गाजियाबाद की एक लड़की की मौत के बारे में किए सभी ट्वीट्स फर्जी थे। हाल ही में, कई ट्वीट वायरल हुए थे, जिसमें यह दावा किया गया था कि एक लड़की ने अपने गुल्लक को तोड़ कर पीएम केयर्स फंड को 5,000 रुपए का दान दिया, लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण उसकी मृत्यु हो गई। देखिए सभी ट्वीट्स में नाम भिन्न-भिन्न है, लेकिन भाषा एक-सी। अब इसे योगी एवं मोदी सरकारों को बदनाम करने का षड्यंत्र नहीं कहा जाये तो क्या कहा जाये?
इस तरह के कुछ ट्वीट्स में यह भी दावा किया गया कि लड़की गाजियाबाद की थी। हालाँकि, यह सच नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अप्रैल 28 को मामलों के बारे में जानकारी देने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।
Well done UP police for teaching them an exemplary lesson.!! Such rumours create panic among people.
— RAJNEESH TIWARI (@RajneeshTrainer) April 28, 2021
There are Devils media headed by dirty lutyens, spreading fake, concocted news and lies ,when the entire country is engaged in taming the spread of Covid19. Instead of helping- the maroons are defaming Corona warriors, Doctors,Nurses. Sponsors are aligning with Abbas Siddigi
— KRS (@rajanp78) April 29, 2021
उत्तर प्रदेश के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट करते हुए बताया गया कि कोविड महामारी के बीच, कुछ निहित स्वार्थ प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों से संबंधित फेक न्यूज फैला रहे हैं।
क्लिप में, लड़की के पिता का कहना है कि उनकी 18 साल की बेटी स्वस्थ है और फिलहाल वह अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुकी है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने आरोप लगाया है कि बदमाशों द्वारा अफवाह फैलाने और COVID-19 के फैलने के बीच दहशत पैदा करने के लिए ‘टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल किया जा रहा था। एक अन्य ट्वीट में, पुलिस ने कहा कि नोएडा पुलिस के बारे में ऐसे ही ’टूल किट ट्वीट’ का इस्तेमाल कर कई लोगों ने प्रशासन को बदनाम करने के लिए त्रासदियों के बारे में फर्जी खबरें पोस्ट कीं। इसमें यह भी कहा गया है कि इंटरनेट पर अफवाह फैलाने के लिए जिम्मेदार दोषियों के खिलाफ मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उत्तर प्रदेश पुलिस सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ दर्ज किया एफआईआर
पिछले शनिवार को, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा पुलिस की छवि को धूमिल करने के लिए फर्जी एकाउंट्स का उपयोग करके अफवाह फैलाने और कोविड -19 के प्रकोप के बीच दहशत पैदा करने की कोशिश के लिए सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।
Similar ‘tool kit tweets’ were found about Noida where several people faked about their tragedy in which also FIR has been lodged. We mourn the loss of precious human lives & request unscrupulous elements to refrain from making a capital out of people’s tragedies (2/2) https://t.co/6EIRCOZMCY
— UP POLICE (@Uppolice) April 28, 2021
अवलोकन करें:-
जिन ट्विट्स के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई, उसमें सोशल मीडिया यूजर्स ने जोर देकर महामारी के कारण उनके प्रियजनों की मौत का दोष प्रशासन पर लगाया था। ट्वीट में उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और कई अन्य प्रमुख हस्तियों का जिक्र किया गया था। पुलिस ने कॉपी-पेस्ट किए गए संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी शेयर किए। स्क्रीनशॉट में महामारी के कारण अपने प्रियजनों के नुकसान पर शोक व्यक्त करते हुए कई यूजर्स के ट्वीट अक्षरश: एक जैसे थे।
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