कोरोना दूसरी लहर वायरस क्या भारत को कमजोर करने कोई आंतरिक व बाह्य षड़यंत्र है?

कोरोना की आई इस दूसरी लहर में मरीजों को साँस की तकलीफ एवं ऑक्सीजन की कमी क्यों हो रही है, इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय को गहन चिंतन करने की जरुरत है। आखिर वो क्या कारण हैं, कि अब यह बीमारी विशेषकर युवा वर्ग को निशाना बना रही है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने सम्बोधन में भारत की युवा पीढ़ी का उल्लेख कर जनता में नयी किरण अथवा चेतना जगाते है, कहीं किसी षड्यंत्र के तहत देश विरोधी भारत की इस युवा शक्ति को निशाने पर रख काम कर रही है? भारत सरकार को इस पर गंभीरता से मंथन कर, इस षड्यंत्र को विफल करना होगा। यह अफवाह न मान विचार करना होगा, क्योकि बीमारी आयु देखकर नहीं आती। कुछ बीमारियां होती है, जो आयु के साथ चलती हैं, लेकिन कोरोना की ये दूसरी लहर अधिकतर युवा वर्ग को ही क्यों लपेटे में ले रही है, लपेटे में वरिष्ठ भी आ रहे हैं। परन्तु उनकी संख्या युवा शक्ति के मुकाबले कम है। ये है मुद्दा।   
क्या आप मानते हैं कि भारत में वर्तमान में फैली हुई महामारी की दूसरी लहर वायरस के सामान्य रूप से फैलने के कारण आई है? एक पखवाड़े पहले तक कोई यह नहीं मानता था कि यह दूसरी लहर है, पर अब बहुत गहरा संदेह घर कर गया है। क्योकि संकट की इस घडी में मोदी विरोधी सरकार के साथ खड़े होने की बजाए अपनी रोटियां सेंक रहे है। क्यों? मीडिया भी अप्रत्यक्ष रूप से इन्हीं के साथ खड़ी दिखाई दे रही है। जितने भी खोजी पत्रकार हैं, सब या तो कोप भवन में विश्राम कर रहे हैं या कहीं हनीमून का आनंद। हर वक़्त चीख पुकार दिखाए जाने के कारण कई लोगों ने टीवी ही देखना बंद कर दिया है। कोई मीडिया अथवा मोदी विरोधी यह नहीं बता रहा कि आखिर ऑक्सीजन की ही क्यों कमी हो रही है? सरकार को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। दवाइयों की ब्लैक हो रही है। मीडिया हॉस्पिटल जाकर चीख-पुकार सुनाने की बजाए, दवाइयां ब्लैक करने वालों को उजागर कर जनता को आसानी से दवाई मिलने का मार्ग क्यों नहीं सुगम बनाती। 

हमें इस बात पर भी विचार करना होगा कि बाबा रामदेव के उत्पादन से पूर्व तक सरसों के तेल की बजाए रिफाइंड तेल के प्रयोग करने का प्रचार एवं प्रसार किया जाता था, राजीव दीक्षित(अब स्वर्गीय) अपने प्रवचनों के माध्यम से रिफाइंड के प्रयोग से सावधान करते रहते थे। इतना ही नहीं मंजन एवं पेस्ट में नमक, कोयला आदि से सावधान रहने के लिए कहा जाता था, लेकिन रामदेव द्वारा पेस्ट एवं अन्य खाद्य पदार्थों के उत्पादन बाजार में आने से सब रामदेव के ही मार्ग पर चलने लगे। हालांकि रामदेव उत्पादनों के विरुद्ध जो षड्यंत्र किए गए, लेकिन हर कदम पर मिल रही शिकस्त ने अपने व्यवसाय को बचाने के लिए बाबा रामदेव की राह पकड़ी।  

आप संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप की स्थिति देखिए।‌ पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान। आज वहाँ वैसी ही स्थितियाँ हैं जैसी स्थितियाँ दो-ढाई महीने पहले भारत में थीं। फिर यह बम भारत में ही कैसे फटा? क्या उन सभी देशों के नागरिक भारतीयों से बहुत अधिक अनुशासित हैं? क्या वे महामारी से बचने के लिए चौबीस घंटे मास्क पहने रहते हैं? नहीं! क्या उनकी भौगोलिक स्थिति भारत से भिन्न है? नहीं! फिर, दूसरी लहर इन देशों को छू भी नहीं सकी और भारत को तोड़ रही है, क्यों? 

आईसीएमआर पहली वेव के समय कह चुकी है कि भारत में करोड़ों लोगों को यह बीमारी हो गई और उन्हें पता भी नहीं चला तो जब करोड़ों लोग इसे झेल गए, उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बन गई तब दूसरी लहर इतनी खतरनाक कैसे हो गई ? और केवल भारत में ही क्यों हुई? 

आप इस महामारी के पश्चात् की वैश्विक परिस्थितियों को देख लीजिए। दवा, वैक्सीन से लेकर अर्थव्यवस्था प्रबंधन तक। भारत ने पूरी दुनिया को चकित किया। और अब चीन की असल चिंता को समझिए।‌ चीन आज भारत को मदद की बात कर रहा है। पिछले साल महामारी काल में भी घुसपैठ कर रहा था। वहाँ लात खाने के पश्चात् वह इतना सुधर गया कि हमारी मदद करने लगा? इतना ही नहीं, पाकिस्तान जैसा चिरशत्रु और लंगड़ा मदद की बात कर रहा है। 

एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारण यह दिखाई दे रहा है कि भारत की राष्ट्रवादी सरकार देशद्रोहियों के सामने झुक नहीं रही है।

विश्व की फार्मा लाॅबी, ऑयल लाॅबी और आर्म्स लॉबी ने इस महामारी और BlackLivesMatter तथा जॉर्ज फ्लाॅयड मुद्दों का मीडिया में भयानक उफान मचाकर जैसे अमेरिकन राष्ट्रवादी ट्रंप को हराया। क्योंकि ट्रंप इन लॉबीज के सामने खुलकर आ खड़े हुए थे। आज वही लोग मोदी के पीछे लगे हैं। जानते है क्यों? क्योंकि...

फार्मा कंपनियों का बिजनेस कम से कम 4 से 6 ट्रिलियन डॉलर (सालाना) का है। कम से कम 1.25 ट्रिलियन डॉलर का वैक्सीन बिजनेस जीरो कर दिया गया। 500 बिलियन डॉलर का PPE Kit और मास्क का बिजनेस लगभग जीरो कर दिया गया।

भारत की मेडिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से किसको हानि हो रही थी। हमेशा हाथ फैलाने वाला देश वैक्सीन बाँटने वाला देश कैसे हो गया, किसे यह बात पच नहीं रही थी ? जर्मनी जैसे देश की यह पीड़ा जानिए कि ड्रग के क्षेत्र में भारत ने हमें कैसे पछाड़ दिया, फिर विचारिये।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो की पुष्टि आम जनमानस तो नहीं, भारत सरकार की गुप्तचर संस्थायें ही कर सकती है। 


और आगे चलें...

अगले 2-3 सालों में भारत में इलॅक्ट्रिक वाहनों के लिए 75,000 से 1,00,000 चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं जिससे तेल की खपत 30% तक कम हो जाएगी। वैश्विक ऑयल लॉबी के मुँह पर यह करारा तमाचा है।

यही नहीं, भारत ने LCA लड़ाकू विमानों का व ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात चालू कर दिया है जो वैश्विक आर्म्स लॉबी के लिए तगड़ा झटका साबित हो रहा है। वर्तमान राष्ट्रवादी सरकार इन सभी की राह में बहुत बड़ा काँटा है...और यह मानकर चला जा रहा है कि इस काँटे को जनता के गुस्से से ही हटाया जा सकता है।

एक और पहलू

पश्चिम बंगाल में 1.5 करोड़ बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं व असम में भी कई लाख घुसपैठिये मेहमान बनाये जा चुके हैं। असम व बंगाल भारत के लिए कश्मीर की तरह, शायद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में जगह-जगह शाहीन बाग और उनमें हिन्दू विरोधी नारे, और फिर हिन्दू विरोधी दंगे। हमें इन तथ्यों की गहराई में जाना होगा। शाहीन बाग़ किसी भारतीय मुसलमान के हित के लिए नहीं बल्कि अवैध रूप से भारत में मेहमान बनाकर रखे गए पाकिस्तानियों, बांग्लादेशियों और रोहिंग्यों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए थे।   

गूगल पर “चिकन नेक” सर्च करिए।

“आप मानें या ना मानें पर भारत में चीनी बीमारी की दूसरी लहर राष्ट्रवादी सरकार को हर मोर्चे पर विफल करने और देश में सिविल वार करवाने के लिए ही लायी गयी है।” यह चीन और भारत में छिपे बैठे उसके स्लीपर सेल के माओवादियों का खतरनाक खेल है...

विपक्षनीत सरकारों की राष्ट्रवादी सरकार के विरुद्ध महामारी सम्बन्धी निचले स्तर की राजनीति व मीडिया का 24x7 लाशें व ऑक्सीजन की कमी दिखाना इस षड्यंत्र का ही हिस्सा है। हमें इस सच्चाई को भी स्वीकारना करना होगा कि नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने के बाद से भारत और हिन्दू विरोधी नितरोज कोई न कोई षड्यंत्र रचते रहे हैं। बंगाल चुनाव में भाजपा का ठनका बजने की सुगबुगाहट से बेचैन विपक्ष बंगाल रैलियों पर प्रहार कर रहा है, लेकिन अन्य राज्यों में हुई रैलियों पर चुप्पी, क्यों? फिर कुंभ नहान पर प्रहार हो रहे हैं, लेकिन नहान को सांकेतिक किये जाने पर मुंह में दही जम जाता है, क्यों?

एक ही माँ सैकड़ों की माँ बन कर क्यों मर रही है ?

केवल श्मशान में ही भीड़ क्यों? भीड़ कब्रिस्तानों में भी दिखाई जाती है, परन्तु श्मशानों से कम।  

एक ही जैसे 70 ट्वीट क्यों- कि हमारी अम्मा मर गयी बिना ऑक्सीजन के? 

टूल किट गैंग फिर से सक्रिय किसके इशारे पर ?

अचानक से किसान भी लौट आये बॉर्डर पर ? जैसे ही महाराष्ट्र में वसूली कांड सामने आया, राष्ट्रवादी  बंगाल जीतते लगे...

... महामारी फिर से कैसे प्रकट हो गयी ??? 

 यह एक गहरा षड्यंत्र ही है, मानो न मानो !! यह एक बहुत बड़ा युद्ध हो सकता है! मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूँ पर स्थितियाँ देखिए और सोचिए कि अचानक यह केवल भारत के साथ ही क्यों हुआ...

यह एक विकट जैविक अस्त्र हो सकता है!!!

थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद यह लड़ाई बहुत आगे तक जाने वाली है। अगर अगली पीढ़ी को गुलाम नहीं बनाना है तो हर हाल में...आपको क्या करना है इस बारे में आप स्वयं भली-भाँति समझते हैं। अब भी समय है समझ जाओ यह सब राष्ट्रवादी आंदोलन को रोक कर भारत को तोड़ने का षड्यंत्र है।

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