पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें वो कहते दिख रहे हैं कि उनके जितने भी फंड्स थे, उनमें से एक-एक पैसा उन्होंने मदरसों, स्कूलों और कॉलेजों को दिया। उदाहरण के रूप में उन्होंने सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जिलों का नाम लिया और कहा कि उन्होंने अपने फंड्स के अधिकतर रुपए यहाँ खर्च किए हैं। किसी मौलाना निसार का नाम लेते हुए उन्होंने बताया कि उसके मदरसे को तो 1 करोड़ रुपए दिए थे।
अब प्रश्न यह होता है कि क्या लोकसभा/राज्यसभा सांसद को मिलने वाला फण्ड मदरसों की सहायतार्थ दिया जाता है? क्या किसी हिन्दू पार्षद से लेकर सांसद तक ने अपने क्षेत्र के किसी मंदिर, हिन्दू स्कूल या फिर गुरुकुल खुलवाने पर खर्च किया? आखिर कब तक हिन्दू इस छद्दम सेकुलरिज्म का शिकार होता रहेगा? आखिर कब तक गंगा-जमुनी तहजीब जैसे भ्रमित नारों से हिन्दुओं को छला जाता रहेगा? बिना किसी बहस के संविधान में शामिल किये गए Secular को कब संविधान से निकाला जायेगा? क्योकि Secular शब्द उस समय संविधान में डाला गया था, जब देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगाया था और समूचा विपक्ष जेलों में था।
Here is @shahid_siddiqui proudly telling in a Muzaffarnagar village how he transferred all his MPLADS funds to Madrassas & Maszids in Western UP. pic.twitter.com/eunqVN8kaL
— Rahul Kaushik (@kaushkrahul) August 3, 2021
Agree, they all are loyal to their religion no matter who they are what they are. You can't blame them for failure of our Hindu's leaders who became seculars as soon as they earn money, fame and power.
— Mohan Bisht (@MohanBi53465294) August 3, 2021
Govt will decide how to use tax payers money. Building Ram Mandir was in BJP manifesto so Hindus voted for them. Muslims visited Mecca for free using tax payers money as well. Atleast they are not stashing it in their pockets like previous govt.
— cherry (@PS90859436) August 3, 2021
और एक हमारे नेता हैं
— Pradeep pal 🇮🇳 (@Iproud108) August 3, 2021
जिनको सबका विश्वास जीतने मैं दिन रात एक करना है 🙏
क्या हमारे नेताओ ने अपनें अपने एरिया में वेदिक गुरुकुल, वेदिक कॉलेज, न्यू टेम्पल्स खुलवाते है क्या?🤐👏
सारा सेकुलरिज्म हमारे नेताओं मैं ही है 🙏🤐
It is audited ji. pic.twitter.com/kJfmaje4at
— Suresh N 🇮🇳 (@surnell) August 3, 2021
शाहिद सिद्दीकी के बारे में बता दें कि वो ऐसे नेता रहे हैं, जो कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक का भी हिस्सा रहे हैं। 90 के दशक के अंत में वो कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हुआ करते थे। पेशे से पत्रकार 71 वर्षीय शाहिद सिद्दीकी अभी भी ‘नई दुनिया’ नाम की साप्ताहिक उर्दू पत्रिका के संपादक हैं। इस पत्रिका को दिल्ली से प्रकाशित किया जाता है।
हालाँकि, उनका वायरल वीडियो कब का है ये साफ़ नहीं है। इसमें वो कहते हैं, “अल्लाह का करम है कि मैंने एक-एक रुपया मदरसों और स्कूलों को दिया है। लेकिन, हराम है कि मैंने किसी के यहाँ एक प्याली चाय तक भी पी हो। क्योंकि मुझे पता है कि मेरी जवाबदेही अल्लाह के प्रति है। आपलोगों के ऊपर आपके परिवार की जिम्मेमदारी रहती है। सांसदों-विधायकों से तो अल्लाह पूछेगा कि इन लोगों ने तुम्हें चुना था, तुमने इनके लिए क्या किया?”
बकौल शाहिद सिद्दीकी, अल्लाह उनसे सवाल करेगा कि जैसे लोग अपने बच्चों और बहन-बेटियों के लिए काम करते हैं, तुमने लोगों के लिए क्या किया। शाहिद सिद्दीकी 2002-08 में सपा से राज्यसभा सांसद रहे थे। इसके बाद वो बसपा में शामिल हुए, जहाँ मायावती के खिलाफ बोलने पर उन्हें निकाल बाहर किया गया। जब रालोद ने कांग्रेस से गठबंधन किया तो शाहिद सिद्दीकी वापस सपा में आ गए थे।
नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेने के कारण जुलाई 2012 में सपा ने भी उन्हें निकाल बाहर किया था। शाहिद सिद्दीकी इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। नवंबर 2020 में दीवाली के दौरान उन्होंने पूछा था कि सुबह के साढ़े 4 बजे किस किस्म के लोग पटाखे उड़ाते हैं? उन्होंने दावा किया था कि उन्हें तब भी तेज़ आवाज़ में पटाखे छोड़ने की गूँज सुनाई दे रही थी। साथ ही उन्होंने पूछा था कि जब कोई फैसला लागू ही नहीं किया जा सकता है तो पटाखों को प्रतिबंधित करने का क्या फायदा?

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