नूपुर विवाद शुरू होते ही जिस की शंका को व्यक्त किया जा रहा था हर बीतते दिन शंका सत्यापित होती जा रही है। विवाद इस पर नहीं है कि नूपुर ने पैगम्बर का अपमान किया, बल्कि इस बात का है कि हमारी इस्लामिक किताबों में लिखी जिस बात को परदे में समझ रहे थे, वह हिन्दुओं को भी मालूम है। कट्टरपंथियों को शायद यह भी नहीं मालूम कि हत्याएं करवाकर जितना डर बैठाने के लिए नूपुर विवाद को जिन्दा रखेंगे उतना ही इस्लाम के लिए घातक होगा। हर कट्टरपंथी मौलानाओं को समझ जानी चाहिए। जिसका शंखनाथ चीन से हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की जिस टिप्पणी को कट्टरपंथी, छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता/पार्टियां और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे ढोंगी नारे लगाने वाले सिरमौर समझे बैठे थे, वही टिप्पणी उन जजों के भविष्य को अँधेरे में डालने जा रहा है।
नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सूर्यकान्त और जस्टिस जेबी पारदीवाला की विवादित टिप्पणी पर रार थमता नहीं दिख रहा है। 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर के नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की टिप्पणी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ करार दिया है। नूपुर शर्मा पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों जजों ने विवादित टिप्पणी की थी।
#नुपुर_शर्मा बहन ने अगर गलत कहा है तो वो माफी मांगे,
— विशाल गुप्ता 🇮🇳 (@SmallTownBoy05) July 4, 2022
लेकिन मुस्लिम समुदाय भी ये साबित करे कि #NupurSharma ने गलत कहा है।
धार्मिक भावनाएं अपनी जगह और सच अपनी जगह,
अगर सच है तो सही कहा है, अगर सच नहीं है तो माफी मांगें नूपुर बहन।@NupurSharmaBJP
BREAKING: 15 retired judges, 77 retired bureaucrats and 25 retired armed forces officers issue an open statement against the “unfortunate and unprecedented” comments by Justice Surya Kant & Justice Pardiwala while the Supreme Court was hearing the petition by Nupur Sharma.
— Nalini (@nalinisharma_) July 5, 2022
Open letter written to Supreme Court in support of Nupur Sharma@anany_b brings in more details
— News18 (@CNNnews18) July 5, 2022
Join this broadcast with @Arunima24#SupremeCourt #NupurSharma pic.twitter.com/dbYcFU0CHc
जो लोग देश के जज होकर ऐंटोनियो मोइनो के चरणों में साष्टांग चरण वन्दना करता है जी हुजूरी करता है भला बो चमचागिरी छोड़ देशहित कैसे कर सकता है भारत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है भारत सरकार को जनहित में न्याय तंत्र को भ्रष्ट तंत्र से मुक्त करना चाहिए बिकास से पहले न्याय जरूरी है भारत
— Swamisarwandasvip @gmail.com (@Swamisarwanda12) July 5, 2022
पत्र में लिखा है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ये विश्वास रखते हैं कि किसी भी देश का लोकतंत्र तभी तक अक्षुण्ण रहेगा, जब तक उसकी सारी संस्थाएँ संविधान के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी। उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों द्वारा की गई ताज़ा टिप्पणी ‘लक्ष्मण रेखा’ का उल्लंघन है और हमें इस पर बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने लिखा कि इन टिप्पणियों से देश-विदेश में लोगो को हैरानी हुई है।
पत्र में लिखा है, “जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा की गई टिप्पणियाँ, जो कि जजमेंट का हिस्सा नहीं हैं – किसी भी तरह से न्यायिक उपयुक्तता और निष्पक्षता के दायरे में नहीं आती। ऐसे अपमानजनक तरीके से कानून का उल्लंघन न्यायपालिका के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। इन बयानों या याचिका से कोई लेनादेना नहीं था। नूपुर शर्मा को न्यायपालिका तक पहुँच से मना कर दिया गया और ये संविधान की भावना के साथ-साथ प्रस्तावना का भी उल्लंघन है।”
In an open letter, #retiredjudges #bureaucrats #armyofficers condemn the observations made by the #SupremeCourtOfIndia in the #NupurSharama case. https://t.co/c8ZFICxMq4 pic.twitter.com/LTC1QgvFke
— Satya Tiwari (@SatyatTiwari) July 5, 2022
पत्र में आगे लिखा है कि जजों का ये बयान कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं – इसका कोई औचित्य नहीं बनता। सेवानिवृत्त जजों, अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों ने लिखा कि ये सब कह कर जजों ने एक तरह से उदयपुर में सिर कलम किए जाने की क्रूर घटना के अपराधियों को दोषमुक्त करार दिया है। पत्र में लिखा है कि देश की दूसरी संस्थाओं को नोटिस दिए बिना उन पर टिप्पणी चिंताजनक और सतर्क करने वाला है।
अवलोकन करें:-
पत्र में आगे लिखा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका के इतिहास पर यर टिप्पणियाँ धब्बे की तरह हैं। इस पर आपत्ति जताई गई है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गे और न्याय देने से इनकार कर दिया गया, जो किसी लोकतांत्रिक समाज की प्रक्रिया नहीं हो सकती। साथ ही याद दिलाया गया है कि एक ही अपराध के लिए कई सज़ा का प्रावधान नहीं है, इसीलिए नूपुर शर्मा FIRs को ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं।
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