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पूर्व राष्ट्रपति, प्रणव मुखर्जी को कांग्रेस समर्थक ने कहा ‘रंगीन चू#^%’… बेटी शर्मिष्ठा ने राहुल गाँधी को लिखा खुला खत

मोदी-योगी विरोध में कांग्रेस की बुद्धि भी भ्रष्ट हो गयी है। किस को क्या बोलना है, कुछ पता नहीं, बस बोल दो। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें और उनके पिता को उस कांग्रेस समर्थक द्वारा गाली दी जा रही है जिसे कई कांग्रेसी नेता भी फॉलो करते हैं।

वैसे शर्मिष्ठा मुखर्जी को पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के को लिखना था, राहुल गाँधी को पत्र लिखने का मतलब है अध्यक्ष का खुलेआम उपहास। दूसरे, राहुल को पत्र लिखकर शायद यह सिद्ध करने की कोशिश है कि खड़के का रिमोट तो राहुल के ही हाथ है, फिर क्यों इधर-उधर भागा जाए। परिवार भक्ति भी हो जाएगी और शायद अपना काम। 

अपने पत्र में उन्होंने राहुल गाँधी को बताया है कि उनकी किताब पब्लिश होने के बाद से उनके साथ ये ट्रोलिंग हो रही है। उनको निरंतर दुर्व्यवहार और यौन अपमान का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस समर्थक उनकी किताब की निंदा कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति को ‘चू&^%#’ जैसे शब्द कहे जा रहे हैं।”

उन्होंने इस शिकायतपत्र को सोशल मीडिया पर भी डाला है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि नवीन शाही नाम पर कांग्रेस समर्थक उनके लिए ऐसा कह रहा है। अपनी खबर में उन्होंने ट्वीट भी जोड़े। इन ट्विट्स में देख सकते हैं नवीन शाही प्रणव मुखर्जी के लिए लिखता है- चु&^% को चु&^% बोलना कहाँ मना है? रंगीन था वो, कु&^% भी मंजूर थी उसे।

एक अगले ट्वीट में नवीन शाही लिखता है, “जिंदगी भर कांग्रेस के सहारे ऐश करने और छुप-छुप के रंगीनियाँ करने वाले की बेटी जब कांग्रेस पर बोलेगी तो सच बोलना ही पड़ेगा।”

इन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, “राहुल गाँधी न्याय की बात कर रहे हैं। मैं उनसे न्याय माँगती हूँ। अगर ये शख्स कोई साधारण भी कांग्रेस समर्थक भी है तो इसके विरुद्ध पुलिस शिकायत होनी चाहिए आखिर वो मेरा और मेरे पिता का अपमान उन्हीं के नाम (राहुल गाँधी) पर कर रहा है।”

बता दें कि शर्मिष्ठा द्वारा ये ट्वीट किए जाने के बाद नवीन शाही, जिसके खिलाफ उन्होंने शिकायत करने की अपील की है, उसने ट्वीट के नीचे माफी माँगी है।

अपने ट्वीट में उस शख्स ने लिखा, “मैं उस ट्वीट के लिए माफी माँगता हूँ जिससे आपको दुख पहुँचा है…मैं प्रार्थना करता हूँ कि भावनाओं में बहकर मैंने जो कुछ भी लिखा, उसे क्षमा करें। कांग्रेस मेरी माँ की तरह है।”

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने जो पत्र राहुल गाँधी को लिखा है उसमें उन्होंने राहुल को लिखा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक होने के नाते, राहुल गाँधी को उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो उन्हें और उनके पिता को गाली दे रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति की बेटी ने खुले पत्र में कहा, “आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अग्रदूत प्रतीत होते हैं, आपको पता होना चाहिए कि FoE में सिर्फ किसी की प्रशंसा करना शामिल नहीं है, बल्कि आलोचना को शालीनता से सहन करने की क्षमता भी शामिल है। लेकिन ऐसा लगता है कि आप हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक, जो कांग्रेस के मूल मूल्यों में से एक है, के बारे में अपने फॉलोवर्स को समझा नहीं पाएँ हैं। आपका पसंदीदा नारा ‘नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान’ भी आपके अपने समर्थकों के कानों पर नहीं पड़ता है क्योंकि वे आपकी आलोचना करने करने की हिम्मत करने वाले किसी भी व्यक्ति पर अपनी सारी ‘नफ़रत’ लगा देते हैं।”

वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब से मेरे पिता पर किताब आई है… कुछ कांग्रेस नेता इसके खिलाफ बोलने लगे। वह मुझे बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं। कुछ दिन पहले, जयपुर लिटफेस्ट के मौके पर, मैंने एक साक्षात्कार में एक बयान दिया था, जहाँ मुझसे कांग्रेस के बारे में मेरे विचार पूछे गए थे। मैंने कहा था- मैं कांग्रेसी हूँ। राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेसका अभी भी बहुत महत्व है। लेकिन कांग्रेस को गांधी-नेहरू परिवार के नेतृत्व से परे देखना चाहिए…तब से सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। मुझ पर हर तरह की गालियाँ बरसाई गईं, मेरे पिता को घसीटा गया। मैंने इस संबंध में राहुल गाँधी से शिकायत की लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया तक नहीं दी इसलिए मैंने खुला पत्र लिखा।”

नूपुर शर्मा पर लक्ष्मण रेखा का उल्लंघन करने पर 117 रिटायर्ड जज-नौकरशाहों-सैन्य अधिकारियों का खुला पत्र, CJI को भेजा

नूपुर विवाद शुरू होते ही जिस की शंका को व्यक्त किया जा रहा था हर बीतते दिन शंका सत्यापित होती जा रही है। विवाद इस पर नहीं है कि नूपुर ने पैगम्बर का अपमान किया, बल्कि इस बात का है कि हमारी इस्लामिक किताबों में लिखी जिस बात को परदे में समझ रहे थे, वह हिन्दुओं को भी मालूम है। कट्टरपंथियों को शायद यह भी नहीं मालूम कि हत्याएं करवाकर जितना डर बैठाने के लिए नूपुर विवाद को जिन्दा रखेंगे उतना ही इस्लाम के लिए घातक होगा। हर कट्टरपंथी मौलानाओं को समझ जानी चाहिए। जिसका शंखनाथ चीन से हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट की जिस टिप्पणी को कट्टरपंथी, छद्दम धर्म-निरपेक्ष नेता/पार्टियां और गंगा-जमुनी तहजीब जैसे ढोंगी नारे लगाने वाले सिरमौर समझे बैठे थे, वही टिप्पणी उन जजों के भविष्य को अँधेरे में डालने जा रहा है। 
नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों जस्टिस सूर्यकान्त और जस्टिस जेबी पारदीवाला की विवादित टिप्पणी पर रार थमता नहीं दिख रहा है। 15 सेवानिवृत्त जजों, 77 रिटायर्ड नौकरशाहों और 25 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने खुला पत्र जारी कर के नूपुर शर्मा पर सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की टिप्पणी को ‘दुर्भाग्यपूर्ण और गलत उदाहरण पेश करने वाला’ करार दिया है। नूपुर शर्मा पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों जजों ने विवादित टिप्पणी की थी।

पत्र में लिखा है कि हम एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ये विश्वास रखते हैं कि किसी भी देश का लोकतंत्र तभी तक अक्षुण्ण रहेगा, जब तक उसकी सारी संस्थाएँ संविधान के हिसाब से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी। उन्होंने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों द्वारा की गई ताज़ा टिप्पणी ‘लक्ष्मण रेखा’ का उल्लंघन है और हमें इस पर बयान जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने लिखा कि इन टिप्पणियों से देश-विदेश में लोगो को हैरानी हुई है।

पत्र में लिखा है, “जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला द्वारा की गई टिप्पणियाँ, जो कि जजमेंट का हिस्सा नहीं हैं – किसी भी तरह से न्यायिक उपयुक्तता और निष्पक्षता के दायरे में नहीं आती। ऐसे अपमानजनक तरीके से कानून का उल्लंघन न्यायपालिका के इतिहास में आज तक नहीं हुआ। इन बयानों या याचिका से कोई लेनादेना नहीं था। नूपुर शर्मा को न्यायपालिका तक पहुँच से मना कर दिया गया और ये संविधान की भावना के साथ-साथ प्रस्तावना का भी उल्लंघन है।”

पत्र में आगे लिखा है कि जजों का ये बयान कि देश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सिर्फ और सिर्फ नूपुर शर्मा जिम्मेदार हैं – इसका कोई औचित्य नहीं बनता। सेवानिवृत्त जजों, अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों ने लिखा कि ये सब कह कर जजों ने एक तरह से उदयपुर में सिर कलम किए जाने की क्रूर घटना के अपराधियों को दोषमुक्त करार दिया है। पत्र में लिखा है कि देश की दूसरी संस्थाओं को नोटिस दिए बिना उन पर टिप्पणी चिंताजनक और सतर्क करने वाला है।

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पत्र में आगे लिखा है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की न्यायपालिका के इतिहास पर यर टिप्पणियाँ धब्बे की तरह हैं। इस पर आपत्ति जताई गई है कि याचिकाकर्ता को बिना किसी सुनवाई के दोषी ठहरा दिया गे और न्याय देने से इनकार कर दिया गया, जो किसी लोकतांत्रिक समाज की प्रक्रिया नहीं हो सकती। साथ ही याद दिलाया गया है कि एक ही अपराध के लिए कई सज़ा का प्रावधान नहीं है, इसीलिए नूपुर शर्मा FIRs को ट्रांसफर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं।