नकली गांधी, चुनावी हिंदू और जनेऊधारी- दत्तात्रेय गोत्र वाले बनावटी ब्राह्मण का कर्नाटक में दिखा नया अवतार।
— Jitendra Pratap Singh 'Sudarshan News' (@JitendraStv) August 3, 2022
कर्नाटक चुनाव और लिंगायत वोट के लिए राहुल गाँधी ने लिंगायत धर्म गुरु से दीक्षा भी ली है।
मित्रों, इस चुनावी हिंदू के बारे में आपका क्या कहना है? @Swamy39 @YogiDevnath2 pic.twitter.com/Jo5jEOsYkb
— Bimal Banerjee (@BimalBanerjee8) August 4, 2022
कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में ली दीक्षा
आमतौर पर लिंगायत समुदाय के लोग क्रिस्टल से बना इष्टलिंग पहनकर इस अनुष्ठान को करते हैं और दीक्षा लेते हैं। यह दीक्षा इसी समुदाय के लोगों को दी जाती है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘यह सम्मान की बात है कि श्री जगदगुरु मुरुगाराजेंद्र विद्यापीठ का दौरा किया और डॉ. श्री शिवमूर्ति मुरुगा शरणनारु से ‘‘ईष्टलिंग दीक्षा’’ली।’’ विभिन्न मठों के लिंगायत संतों के साथ बातचीत के बाद राहुल गांधी को पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में लिंगायत समुदाय में दीक्षा दिलाई गई।
It is an absolute honour to visit Sri Jagadguru Murugharajendra Vidyapeetha and receive the 'Ishtalinga Deekshe' from Dr. Sri Shivamurthy Murugha Sharanaru.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 3, 2022
The teachings of Guru Basavanna are eternal and I am humbled to learn more about it from the Sharanaru of the Math. pic.twitter.com/5Dgj53roSp
Veer Savarkar was absolutely right.https://t.co/GwbLqLvlrr
— Hindu Today (@Observe420) August 3, 2022
दीक्षा लेने से पहले राहुल गांधी को उतारना पड़ा जनेऊ
लिंगायत समुदाय में दीक्षित होने के बाद राहुल गांधी अब जनेऊ नहीं पहन सकते, क्योंकि लिंगायत समुदाय के सदस्य इसे नहीं पहनते हैं। राहुल गांधी ने लिंगायत की दीक्षा लेने से पहले जनेऊ को उतार दिया। जनेऊ धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति अगर लिंगायत में दीक्षा लेता है तो उसे जनेऊ को उतारना पड़ता है। चूंकि लिंगायत समुदाय के सदस्य हिंदू धर्म या सनातन धर्म की नियमित प्रथाओं का पालन नहीं करते हैं, इसलिए वे जनेऊ नहीं पहनते हैं। इस समुदाय का हिस्सा बनने के बाद राहुल गांधी अब निश्चित रूप से ‘जनेऊधारी हिंदू’ नहीं हैं।
लिंगायत समुदाय में यज्ञोपवीत संस्कार का निषेध
लिंगायत संप्रदाय को 12 वीं शताब्दी में संत और दार्शनिक बसवन्ना द्वारा शुरू किया गया था, जिन्हें संत बसवेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 1131 ई. में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बसवण्णा यानि बसवेश्वरा छोटी उम्र से ही धार्मिक कर्मकांडों का विरोध शुरू कर दिया था। जब 8 वर्ष की उम्र में बसवण्णा का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया तो उन्होंने रिवाजों का विरोध करते हुए जनेऊ उतार दिया और घर छोड़कर कुदालसंगम चले गए। यहीं पर आगे की शिक्षा ग्रहण की।
वेद और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता लिंगायत समुदाय
संत के रूप में सुधारक बासवन्ना ने हिंदुओं में जाति व्यवस्था में दमन के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। उन्होंने मूर्ति पूजा को नहीं माना और कहा कि यह शरीर ही मंदिर ही। व्यक्ति का जो भी ईष्ट हैं वह इसी शरीर में रहते हैं और इसी प्रतीक स्वरूप में लिंगायत समुदाय के लोग एक तरह से शैव मत से होने के बाद भी भगवान शिव की पूजा नहीं करते हैं। बल्कि अपने ही शरीर पर ईष्टलिंग को धारण करते हैं। लिंगाकृति धारण करने के कारण ही यह समुदाय लिंगायत कहलाता है। यह समुदाय वेदों और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता हैं।
लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की कांग्रेस की साजिशकांग्रेस हमेशा अपने सियासी फायदे के लिए हिन्दू धर्म को बांटने की कोशिश में लगी रहती है। इसी तरह का प्रयास 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पहले किया गया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की कोशिश की थी, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट ने पलट दिया था। कांग्रेस लिंगायत धर्म को अलग धर्म का दर्जा देने का समर्थन करती रही है। लिंगायत संप्रदाय भी खुद को हिंदू समुदाय से अलग होने लगातार प्रयासरत है। वहीं, बीजेपी लिंगायतों को हिंदू धर्म का ही हिस्सा मानती है और अलग धर्म का दर्जा दिए जाने का विरोध करती है।
राहुल और कांग्रेस की लिंगायत वोट बैंक पर नजर
दरअसल कर्नाटक में लिंगायतों की आबादी करीब 18 प्रतिशत है। पास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी खासी आबादी है। राजनीतिक रूप से इसे काफी प्रभावशाली माना जाता है। राहुल गांधी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनेऊ का परित्याग कर ईष्टलिंग को धारण किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव में लिंगायतों को साधने के लिए उन्होंने ईष्टलिंग की दीक्षा ली है। वहीं, राहुल गांधी हिंदू और हिंदुत्व में अंतर बताकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमले करते रहते हैं।
“राहुल गांधी जी न केवल हिंदू हैं, बल्कि जनेऊधारी हिंदू भी”
2017 में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने देश के लोगों को बताया था कि राहुल गांधी एक ‘जनेऊधारी हिंदू’ है। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। सोमनाथ मंदिर के ‘गैर-हिंदू’ रजिस्टर में राहुल गांधी के नाम की एंट्री का फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, इसके बाद राहुल के धर्म को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। सुरजेवाला ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा था, ”राहुल गांधी जी न केवल हिंदू हैं, बल्कि वे जनेऊधारी हिंदू भी हैं। इसलिए बीजेपी को राजनीतिक विमर्श को इस स्तर तक नहीं लाना चाहिए।”
राहुल गांधी हैं ‘फर्जी’ हिंदू , जानिये हकीकत
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भोपाल में कार्यकर्ता संवाद के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा सवाल करती हैं कि कार्यकर्ता आपके कैलास मानसरोवर यात्रा के संस्मरण जानना चाहते हैं। ये सुनते ही राहुल गांधी कुछ बोल ही नहीं पाए। ऐसा लगा जैसे वे कैलास यात्रा के बारे में कुछ जानते ही न हों। राहुल को चुप देख कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने भी शुरू कर दिए।
काफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।
राहुल गांधी ने दावा किया था कि वे 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे। यात्रा शुरू करने से पहले नेपाल में सूअर और चिकेन कुरकुरे खाने को लेकर भी काफी विवाद हो चुका है। इतना ही नहीं लोग यह भी जानना चाहते हैं कि जिस कैलास मानसरोवर की यात्रा में कम से कम 21 दिन लगते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 दिनों में ही अपनी यात्रा कैसे पूरी कर ली?
‘ढोंगी’ हिंदू हैं राहुल गांधीअगस्त 2022
राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में लिंगायत समुदाय में दीक्षा ली।
मार्च 2017
काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान नमाज की मुद्रा बना ली
नवंबर, 2017
सोमनाथ मंदिर के एंट्री रजिस्टर में अपने नाम के आगे ‘M’ लिखा
जुलाई, 2018
मुस्लिम बुद्धिजीवियों से राहुल ने कहा- ‘’कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी’’
फरवरी, 2018
कर्नाटक में हंपी के विरुपाक्ष शिव मंदिर में जाने से किया इनकार
अगस्त, 2014
मंदिर दर्शन को जाने वाले हिंदुओं को लड़कियां छेड़ने वाला बताया
जुलाई, 2009
विकिलीक्स को बताया कि अलकायदा-लश्कर से खतरनाक हैं हिंदू
कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है- राहुल गांधी
जम्मू कश्मीर में छपने वाले उर्दू दैनिक अखबार “इंकलाब” ने 12 जुलाई, 2018 को बहुत बड़ा खुलासा किया। फ्रंट पेज पर खबर छापी कि 11 जुलाई को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। इसके साथ यह खबर भी छपी है कि राहुल ने कहा कि उनका और उनकी मां का कमिटमेंट है कि मुसलमानों को उनका हक मिलना चाहिए और इससे वो कोई समझौता नहीं कर सकते।
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।Video Playerकाफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।
हिंदू आस्था का मजाक उड़ाने में अपनी शान समझते हैं राहुल गांधी
अयोध्या में राम भूमि पूजन को लेकर दुनिया भर में हिंदुओं के बीच उत्साह का माहौल था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। भूमि पूजन से पहले अयोध्या में जश्न का माहौल था, लेकिन इस सबके बीच गांधी परिवार के सदस्यों ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी थी। राम मंदिर निर्माण पर सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा ने कुछ नहीं कहा था। खुद को जनेऊधारी हिंदू बताने वाले और चुनाव के समय मंदिरों में चक्कर लगाने वाले राहुल गांधी ने भी कुछ नहीं कहा था। एक ट्वीट भी नहीं किया था। सवाल उठा था कि क्या राम मंदिर के भव्य निर्माण से खुश नहीं हैं राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और सोनिया गांधी? क्या माथे पर चंदन लगाकर मंदिरों में घूमना सिर्फ राहुल गांधी का दिखावा है?
राहुल गांधी ने राम मंदिर के मुद्दे पर साधी चुप्पी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी राम मंदिर मामले पर कुछ बोला था। जब राम मंदिर मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ही राम मंदिर के विरोध में दलीलें देते रहते थे। यहां तक कि यूपीए शासन के दौरान इसी कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के अस्तिव पर भी सवाल उठा दिए थे।
हिंदू आस्था से खिलवाड़
राहुल गांधी सिर्फ जनेऊधारी हिंदू होने का नाटक किया हैं, असल में उनकी हिंदू धर्म में कोई आस्था नहीं रही हैं। मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान जबलपुर में कांग्रेस पार्टी ने राहुल के शिव भक्त की तरह है नर्मदा भक्त होने का जमकर प्रचार किया। राहुल गांधी के लिए मां नर्मदा की आरती का भी आयोजन किया गया। पर यहां अपनी राजनीतिक चमकाने के लिए राहुल गांधी ने हिंदू आस्था का अपमान किया और मां नर्मदा की शाम को होने वाली आरती दोपहर में ही कर दी। दरअसल, राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को प्रभावित करने के लिए आरती का नाटक करना था, असर में तो उन्हें रोड शो करना था।




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