कर्नाटक : राहुल गांधी का एक और चुनावी पाखंड, जनेऊ उतार दत्तात्रेय ब्राह्मण से बने लिंगायत

आज नेता राजनेता की बजाए पक्के सियासतखोर हो गए हैं, जो अपनी कुर्सी की खातिर कब अपना रंग बदल ले कि गिरगिट भी शरमा जाए। हैरानी होती है कि जिसका दादा फ़िरोज़ जहांगीर कब्र में हो उसका पोता कब हिन्दू हो गया? या फिर उसकी दादी इन्दिरा गाँधी ने निकाह के वक़्त इस्लाम कबूलने के बाद हिन्दू धर्म कब अपना लिया? कांग्रेस की इतनी दुर्गति में राहुल का बहुत बड़ा योगदान है, जो हिन्दू वोट के लिए कभी कोट पर जनेऊ पहनते हैं, तो चुनावों में मंदिरों में माथा टेकने पर बंद कमरे में बैठ मुसलमानों से माफ़ी मांगने के साथ-साथ कहते हैं कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। मुस्लिम वोट के लिए हर पार्टी उनके लिए मनलुभावन वायदे एवं प्रलोभन देती है, मुसलमानों को खुश रखने के लिए हिन्दुओं पर गोलियां चलवा देती है, लेकिन उस पार्टी का मुखिया यह नहीं कहता कि 'यह मुसलमानों की पार्टी है।'      
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी भारत के सियासी बहुरुपिया और चुनावी हिन्दू हैं, जो चुनाव और स्थान देखकर हुलिया, आस्था और धर्म बदल लेते हैं। चुनावी फायदे के लिए कभी ‘कश्मीरी हिन्दू’, ‘जनेऊधारी ब्राह्मण’, ‘दत्तात्रेय गोत्रवाले ब्राह्मण’ तो कभी ईसाई बन जाते हैं। राहुल गांधी के इस चुनावी पाखंड का सिलसिल जारी है। राहुल गांधी ने बुधवार (03 अगस्त, 2022) को कर्नाटक का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने चित्रदुर्ग में श्री मुरुग मठ में डॉ. श्री शिवमूर्ति मुरुग शरणारू से लिंगायत समुदाय को दी जाने वाली दीक्षा प्राप्त की। दरअसल राहुल गांधी का यह सियासी पाखंड अगले साल होने वाले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर किया जा रहा है।

कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में ली दीक्षा

आमतौर पर लिंगायत समुदाय के लोग क्रिस्टल से बना इष्टलिंग पहनकर इस अनुष्ठान को करते हैं और दीक्षा लेते हैं। यह दीक्षा इसी समुदाय के लोगों को दी जाती है। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘यह सम्मान की बात है कि श्री जगदगुरु मुरुगाराजेंद्र विद्यापीठ का दौरा किया और डॉ. श्री शिवमूर्ति मुरुगा शरणनारु से ‘‘ईष्टलिंग दीक्षा’’ली।’’ विभिन्न मठों के लिंगायत संतों के साथ बातचीत के बाद राहुल गांधी को पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में लिंगायत समुदाय में दीक्षा दिलाई गई।

दीक्षा लेने से पहले राहुल गांधी को उतारना पड़ा जनेऊ 

लिंगायत समुदाय में दीक्षित होने के बाद राहुल गांधी अब जनेऊ नहीं पहन सकते, क्योंकि लिंगायत समुदाय के सदस्य इसे नहीं पहनते हैं। राहुल गांधी ने लिंगायत की दीक्षा लेने से पहले जनेऊ को उतार दिया। जनेऊ धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति अगर लिंगायत में दीक्षा लेता है तो उसे जनेऊ को उतारना पड़ता है। चूंकि लिंगायत समुदाय के सदस्य हिंदू धर्म या सनातन धर्म की नियमित प्रथाओं का पालन नहीं करते हैं, इसलिए वे जनेऊ नहीं पहनते हैं। इस समुदाय का हिस्सा बनने के बाद राहुल गांधी अब निश्चित रूप से ‘जनेऊधारी हिंदू’ नहीं हैं।

लिंगायत समुदाय में यज्ञोपवीत संस्कार का निषेध 

लिंगायत संप्रदाय को 12 वीं शताब्दी में संत और दार्शनिक बसवन्ना द्वारा शुरू किया गया था, जिन्हें संत बसवेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 1131 ई. में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बसवण्णा यानि बसवेश्वरा छोटी उम्र से ही धार्मिक कर्मकांडों का विरोध शुरू कर दिया था। जब 8 वर्ष की उम्र में बसवण्णा का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया तो उन्होंने रिवाजों का विरोध करते हुए जनेऊ उतार दिया और घर छोड़कर कुदालसंगम चले गए। यहीं पर आगे की शिक्षा ग्रहण की। 

वेद और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करता लिंगायत समुदाय

संत के रूप में सुधारक बासवन्ना ने हिंदुओं में जाति व्यवस्था में दमन के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। उन्होंने मूर्ति पूजा को नहीं माना और कहा कि यह शरीर ही मंदिर ही। व्यक्ति का जो भी ईष्ट हैं वह इसी शरीर में रहते हैं और इसी प्रतीक स्वरूप में लिंगायत समुदाय के लोग एक तरह से शैव मत से होने के बाद भी भगवान शिव की पूजा नहीं करते हैं। बल्कि अपने ही शरीर पर ईष्टलिंग को धारण करते हैं। लिंगाकृति धारण करने के कारण ही यह समुदाय लिंगायत कहलाता है। यह समुदाय वेदों और मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता हैं। 

लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की कांग्रेस की साजिश

कांग्रेस हमेशा अपने सियासी फायदे के लिए हिन्दू धर्म को बांटने की कोशिश में लगी रहती है। इसी तरह का प्रयास 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के पहले किया गया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की कोशिश की थी, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट ने पलट दिया था। कांग्रेस लिंगायत धर्म को अलग धर्म का दर्जा देने का समर्थन करती रही है। लिंगायत संप्रदाय भी खुद को हिंदू समुदाय से अलग होने लगातार प्रयासरत है। वहीं, बीजेपी लिंगायतों को हिंदू धर्म का ही हिस्सा मानती है और अलग धर्म का दर्जा दिए जाने का विरोध करती है। 

राहुल और कांग्रेस की लिंगायत वोट बैंक पर नजर

दरअसल कर्नाटक में लिंगायतों की आबादी करीब 18 प्रतिशत है। पास के राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी लिंगायतों की अच्छी खासी आबादी है। राजनीतिक रूप से इसे काफी प्रभावशाली माना जाता है। राहुल गांधी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जनेऊ का परित्याग कर ईष्टलिंग को धारण किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले विधानसभा चुनाव में लिंगायतों को साधने के लिए उन्होंने ईष्टलिंग की दीक्षा ली है। वहीं, राहुल गांधी हिंदू और हिंदुत्व में अंतर बताकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमले करते रहते हैं। 

“राहुल गांधी जी न केवल हिंदू हैं, बल्कि जनेऊधारी हिंदू भी”

2017 में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने देश के लोगों को बताया था कि राहुल गांधी एक ‘जनेऊधारी हिंदू’ है। गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। सोमनाथ मंदिर के ‘गैर-हिंदू’ रजिस्टर में राहुल गांधी के नाम की एंट्री का फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था, इसके बाद राहुल के धर्म को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ था। सुरजेवाला ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा था, ”राहुल गांधी जी न केवल हिंदू हैं, बल्कि वे जनेऊधारी हिंदू भी हैं। इसलिए बीजेपी को राजनीतिक विमर्श को इस स्तर तक नहीं लाना चाहिए।” 

राहुल गांधी हैं ‘फर्जी’ हिंदू , जानिये हकीकत
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भोपाल में कार्यकर्ता संवाद के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता शोभा ओझा सवाल करती हैं कि कार्यकर्ता आपके कैलास मानसरोवर यात्रा के संस्मरण जानना चाहते हैं। ये सुनते ही राहुल गांधी कुछ बोल ही नहीं पाए। ऐसा लगा जैसे वे कैलास यात्रा के बारे में कुछ जानते ही न हों। राहुल को चुप देख कर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने भी शुरू कर दिए।  

काफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।

राहुल गांधी ने दावा किया था कि वे 31 अगस्त से 9 सितंबर के बीच कैलास मानसरोवर यात्रा पर गए थे। यात्रा शुरू करने से पहले नेपाल में सूअर और चिकेन कुरकुरे खाने को लेकर भी काफी विवाद हो चुका है। इतना ही नहीं लोग यह भी जानना चाहते हैं कि जिस कैलास मानसरोवर की यात्रा में कम से कम 21 दिन लगते हैं, कांग्रेस अध्यक्ष ने 9 दिनों में ही अपनी यात्रा कैसे पूरी कर ली?

‘ढोंगी’ हिंदू हैं राहुल गांधी

अगस्त 2022
राहुल गांधी 
ने कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी में लिंगायत समुदाय में दीक्षा ली।

मार्च 2017
काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा के दौरान नमाज की मुद्रा बना ली

नवंबर, 2017
सोमनाथ मंदिर के एंट्री रजिस्टर में अपने नाम के आगे ‘M’ लिखा

जुलाई, 2018
मुस्लिम बुद्धिजीवियों से राहुल ने कहा- ‘’कांग्रेस एक मुस्लिम पार्टी’’

फरवरी, 2018
कर्नाटक में हंपी के विरुपाक्ष शिव मंदिर में जाने से किया इनकार

अगस्त, 2014
मंदिर दर्शन को जाने वाले हिंदुओं को लड़कियां छेड़ने वाला बताया

जुलाई, 2009
विकिलीक्स को बताया कि अलकायदा-लश्कर से खतरनाक हैं हिंदू

कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है- राहुल गांधी
जम्मू कश्मीर में छपने वाले उर्दू दैनिक अखबार “इंकलाब” ने 12 जुलाई, 2018 को बहुत बड़ा खुलासा किया। फ्रंट पेज पर खबर छापी कि 11 जुलाई को राहुल गांधी ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ ‘सीक्रेट मीटिंग’ में कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। इसके साथ यह खबर भी छपी है कि राहुल ने कहा कि उनका और उनकी मां का कमिटमेंट है कि मुसलमानों को उनका हक मिलना चाहिए और इससे वो कोई समझौता नहीं कर सकते।

गुजरात में मंदिर दर्शन के लिए राहुल ने मांगी माफी
12 तुगलक लेन स्थित अपने निवास पर राहुल गांधी ने लगभग 2 घंटे तक मुस्लिमों से बातचीत की। इस दौरान मुस्लिम नेताओं ने राहुल से आपत्त्ति दर्ज कराई और कहा कि आप तो सिर्फ मंदिर जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने तो मुसलमानों को भुला ही दिया है। मुस्लिम नेताओं की बात सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि मैं कर्नाटक में कई मस्जिदों में भी गया हूं। अब मस्जिदों में लगातार जा रहा हूं। खबर ये भी है कि उन्होंने कहा कि  गुजरात में मंदिरों में गया था उसके लिए माफी मांगता हूं।
Video Playerकाफी सोचने के बाद राहुल ने जो जवाब दिया वह भी काफी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘’जो एक बार कैलास पर्वत और मानसरोवर चला जाता है वापस आने पर सब-कुछ बदल जाता है। सोच बदल जाती है और गहराई आ जाती है।‘’ जाहिर है राहुल के जवाब में उनका ‘झूठ’ छिपा हुआ है क्योंकि यात्रा वे यात्रा के संस्मरण बता ही नहीं पाए।

हिंदू आस्था का मजाक उड़ाने में अपनी शान समझते हैं राहुल गांधी

अयोध्या में राम भूमि पूजन को लेकर दुनिया भर में हिंदुओं के बीच उत्साह का माहौल था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। भूमि पूजन से पहले अयोध्या में जश्न का माहौल था, लेकिन इस सबके बीच गांधी परिवार के सदस्यों ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी थी। राम मंदिर निर्माण पर सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा ने कुछ नहीं कहा था। खुद को जनेऊधारी हिंदू बताने वाले और चुनाव के समय मंदिरों में चक्कर लगाने वाले राहुल गांधी ने भी कुछ नहीं कहा था। एक ट्वीट भी नहीं किया था। सवाल उठा था कि क्या राम मंदिर के भव्य निर्माण से खुश नहीं हैं राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और सोनिया गांधी? क्या माथे पर चंदन लगाकर मंदिरों में घूमना सिर्फ राहुल गांधी का दिखावा है?

राहुल गांधी ने राम मंदिर के मुद्दे पर साधी चुप्पी
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी राम मंदिर मामले पर कुछ बोला था। जब राम मंदिर मामला सुप्रीम कोर्ट में था तो कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता ही राम मंदिर के विरोध में दलीलें देते रहते थे। यहां तक कि यूपीए शासन के दौरान इसी कांग्रेस पार्टी ने भगवान राम के अस्तिव पर भी सवाल उठा दिए थे। 

हिंदू आस्था से खिलवाड़
राहुल गांधी सिर्फ जनेऊधारी हिंदू होने का नाटक किया हैं, असल में उनकी हिंदू धर्म में कोई आस्था नहीं रही हैं। मध्य प्रदेश में चुनाव अभियान के दौरान जबलपुर में कांग्रेस पार्टी ने राहुल के शिव भक्त की तरह है नर्मदा भक्त होने का जमकर प्रचार किया। राहुल गांधी के लिए मां नर्मदा की आरती का भी आयोजन किया गया। पर यहां अपनी राजनीतिक चमकाने के लिए राहुल गांधी ने हिंदू आस्था का अपमान किया और मां नर्मदा की शाम को होने वाली आरती दोपहर में ही कर दी। दरअसल, राहुल गांधी को सिर्फ हिंदुओं को प्रभावित करने के लिए आरती का नाटक करना था, असर में तो उन्हें रोड शो करना था।

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