जिस ‘The Satanic Verses’ के लिए सलमान रुश्दी पर हमला हुआ उसी किताब की बिक्री में जबरदस्त उछाल

साभार: फ्री प्रेस जर्नल
न्यूयॉर्क में लेखक सलमान रुश्दी (Salman Rushdie) पर हुए जानलेवा हमले के बाद जहाँ कट्टरपंथी जश्न मनाने में जुटे रहे। वहीं दूसरी ओर रुश्दी की किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज (The Satanic Verses)’ अमेजन पर तेजी से बिकने लगी। बताया जा रहा है कि रुश्दी की उस किताब को पढ़ने के लिए लोग इतने उत्सुक हैं कि अमेजन पर ये टॉप लिस्ट वाली किताबों में शामिल हो गई है।

कट्टरपंथी रुश्दी पर हमला कर जरूर खुश हो रहे हैं, लेकिन उसी किताब की अब बिक्री अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच रही है। ठीक उसी प्रकार जितना नूपुर शर्मा विवाद को जिन्दा रखा जा रहा है, उतनी ही तेजी से सोशल मीडिया पर कुरान, हदीस और शरीयत पर इतनी खुली बहस हो रही, आज तक कभी नहीं देखा गया। परिणाम क्या हो रहा है ये कट्टरपंथी अनजान होने का ड्रामा कर रहे हैं, सोशल मीडिया और News Nation चैनल पर "इस्लाम क्या कहता है" पर बहस हो रही है, कोई मुस्लिम देश तक नहीं बोल रहा। इस्लाम छोड़ चुके मुसलमान ही कुरान, हदीस और शरीयत की आपत्तिजनक आयतों पर मौलानाओं से बहस कर रहे हैं, जिनका जवाब देने की बजाए अपना पसीना पोंछते नज़र आते हैं। पता नहीं कितने मुस्लिम नूपुर हिन्दू नूपुर नहीं, द्वारा जिस प्रकार खुलकर चर्चा हो रही वह इस्लाम के विरुद्ध जा रही है, इस कटु सच्चाई को हर मुसलमान को समझना होगा, जितने भी मौलाना और मौलवी हैं, सभी ने उसी तरह आंखे मुंदी हुई, जिस तरह लेखक अनवर शेख की पुस्तकों पर। यदि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी द्वारा Calcutta High Court में दर्ज कुरान की 124 आयतों के खिलाफ मुक़दमे में आने वाले निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया होता और तीस हज़ारी कोर्ट द्वारा 24 आयतों के खिलाफ आये निर्णय को ठंठे बस्ते में डालने की बजाए लागु कर दिया होता आज कोई कट्टरपंथी सिर उठाने की हिम्मत नहीं करता।     

द इंडिपेंडेंट की खबर के अनुसार, सलमान रुश्दी का यह उपन्यास 15 अगस्त 2022 को अमेजन के समकालीन साहित्य और कथा वाले चार्ट (Contemporary Literature and Fiction Chart) में सबसे ऊपर रहा। वहीं सेंसरशिप और पॉलिटिक्स वाले चार्ट में भी ये किताब दूसरे स्थान पर थी।

कुल मिलाकर बताएँ तो ई-कॉमर्स साइट पर 15 अगस्त 2022 को ये 18वीं बेस्ट सेलिंग किताब थी। इसके अलावा इस किताब का किंडल ई-बुक वर्जन भी धड़ाधड़ पढ़ा जा रहा है। अमेजन के चाट में किंडल बेस्टसेलर्स में यह किताब 23वें नंबर पर रही।

अमेजन का बेस्टसेलर चार्ट हर घंटे अपडेट होता है। इसी से लोग किताबों की बिक्री का स्पष्ट अंदाजा लगा पाते हैं। लेकिन इसके अलावा जो सामान्य बुकस्टोर वाले हैं वो भी कह रहे हैं कि घटना के बाद लोग सलमान रुश्दी की किताबों को पढ़ रहे हैं। न्यूयॉर्क के स्ट्रैंड बुकस्टोर ने बताया कि उन्होंने रुश्दी की किताबों की बिक्री में अचानक उछाल देखा है।

कट्टरपंथी हमले के बाद लोगों ने न केवल सैटेनिक वर्सेज को पढ़ने में उत्साह दिखाया, बल्कि रुश्दी के अन्य उपन्यास जैसे मिडनाइट चिल्ड्रन आदि भी पढ़ने शुरू किए। जोसेफ एंटोन जैसा उनके संस्मरण , जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे उन्होंने अपने जीवन का एक दशक पुलिस सुरक्षा में गुजारा, वो भी धार्मिक अहिष्णुता और उत्पीड़न सूची (Religious Intolerance And Persecution List) में टॉप 4 पर है।

1988 में लिखी गई थी ‘द सैटेनिक वर्सेज’

उल्लेखनीय है कि सलमान रुश्दी ने द सैटेनिक वर्सेज को 1988 में लिखा था। कथिततौर पर ये किताब पैगंबर मोहम्मद के बारे में थी। इसके बाजार में आने के बाद कट्टरपंथी भड़क गए थे। ईरान के सुप्रीम लीडर अयोतुल्लाह खमनेई ने उनके खिलाफ फतवा जारी किया था और रुश्दी का सिर कलम करके लाने वाले को 3 मिलियन डॉलर ईनाम देने को कहा था। इसके बाद रुश्दी बच-बच कर विदेशों में ही रहे। लेकिन 33 साल बाद जब शुक्रवार को उन पर हमला हुआ तो कट्टरपंथियों खूब जश्न मनाते दिखे। वे लोग यहाँ तक पूछ रहे थे, “कमीना जिंदा है अब तक या मर गया?”

भारत में ‘द सैटेनिक वर्सेज’ की हुई थी रिकॉर्ड बिक्री: आरिफ मोहम्मद खान

इस किताब का विश्व भर के कट्टरपंथियों ने विरोध किया था। भारत में यह सबसे पहले बैन हुई थी। इस संबंध में केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जानकारी भी दी थी। उन्होंने बताया था कि कैसे भारत ने इस किताब को बैन किया और उसके बाद पाकिस्तान जैसे देशों में इसका विरोध हुआ, लेकिन तीन महीने बाद उन्हें बताया गया कि भारत में किताब बैन के बावजूद एक किताब जब्त नहीं हुई थी, उलटा इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई थी।

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