प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले कुछ समय में देश का ध्यान इस ओर आकर्षित कर चुके हैं कि रेवड़ी संस्कृति किस तरह लोकतंत्र और अर्थतंत्र का बेड़ा गर्क कर रही है। यह वही संस्कृति है, जिसे मुफ्तखोरी की राजनीति भी कहा जाता है।
मुफ्तखोरी राजनीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रहार एक अच्छा कदम जरूर है। लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अथवा अपने विरोधियों को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा, क्योकि केजरीवाल ने उस मुफ्त योजना को आम जनता को लाभान्वित करना शुरू किया जो उन्हें राजनीति की विरासत में मिला है। इस सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता, अगर कोई नेता-चाहे वह किसी भी पार्टी से हो- इसे झुठलाता है, वह झूठ बोलकर जनता को पागल बना रहा है। केजरीवाल के राजनीति में आने से वर्षों पूर्व से निर्वाचित सदस्य फ्री की रेवड़ियां का आनंद ले रहे हैं। केजरीवाल ने फ्री रेवड़ी कल्चर को शुरू करने पर स्पष्ट रूप से कहा था कि जब नेताओं को मिल रही फ्री रेवड़ियों पर हर महीने करोड़ों खर्च हो रहे हैं, फिर जनता उस फ्री रेवड़ी कल्चर से क्यों वंचित रहे? यही मुख्य कारण है कि आम आदमी पार्टी के विरोधी भी चुनाव में आप को वोट देते हैं। दिल्ली में 62 सीटें आने का मुख्य कारण यही है।
यह राजनीति न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली भी है। यह किसी से छिपा नहीं कि रेवड़ियां बांटने की राजनीतिक संस्कृति ने न जाने कितने देशों को तबाह किया है। पीएम मोदी ने इसके नुकसान के बारे में पहले ही बताया था और लोगों को इससे बचने की सलाह दी थी। ‘रेवड़ी कल्चर’ भले ही चुनाव में लोगों को आकर्षित करता हो, लेकिन इसका नतीजा यह हो रहा है कि राज्यों की आर्थिक सेहत बिगड़ने लगी है और वो कर्ज की बोझ तले दबने लगे हैं। जाहिर है अगर खर्च ज्यादा हो और आमदनी कम हो, फिर कर्ज तो लेना ही पड़ेगा।
रोडवेज़ कर्मियों और स्कूल टिचर्स को सेलरी नहीं, MLAs को भी सेलेरी नहीं
— Dr. Nandini Sharma (@DrNandiniBJP) October 14, 2022
पंजाब से ‘एक मौक़ा आप नुं’ के रुझान आने लगे हैं। pic.twitter.com/WFnFrNmGNV
हमारे देश के कई राज्यों में भी आज ऐसा ही हो रहा है। इनमें पंजाब की स्थिति सबसे खराब है। वित्त वर्ष 2021-22 में पंजाब पर उसकी GDP के 53 प्रतिशत हिस्से के बराबर कर्ज था और ये पूरे देश में सबसे ज्यादा था। इसे ऐसे समझिए कि अगर पंजाब की GDP 100 रुपये है तो 53 रुपये उस पर कर्ज है। सोचिए, जिस राज्य पर उसकी GDP के 53 प्रतिशत हिस्से के बराबर कर्ज है, उस राज्य की सरकार लोगों को बसों को मुफ्त यात्रा, मुफ्त बिजली देकर अपने कर्ज को और बढ़ा रही है। अब पंजाब की भगवंत मान सरकार के लिए आर्थिक तंगी से जूझ रहे विभागों को संकट से उबारना एक चुनौती बन गया है। हालत यह है कि रोडवेज कर्मचारियों को पिछले कई महीने से या तो सैलरी समय से नहीं दी जा रही या फिर किस्तों में दी जा रही है।
पंजाब के रोडवेज कर्मचारियों को सता रहे हो फिर किस मुँह से गुजरात में समर्थन मांग रहे हो ?
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) October 14, 2022
धूर्तता की हद है ! pic.twitter.com/EvhMhmeA8V
रोडवेज का सरकार पर 300 करोड़ रुपये बकाया
पंजाब में रोडवेज की PRTC और PUNBUS दो कंपनियां हैं। PRTC की बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों समेत अन्य स्टाफ को हर महीने सैलरी का इंतजार रहता है, लेकिन पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद से सैलरी देरी से दी जा रही है। पनबस के प्रेसिडेंट रेशम सिंह गिल के मुताबिक कर्मचारियों के लिए हर महीने सैलरी की समस्या खड़ी हो जाती है। वहीं पंजाब सरकार के पास PUNBUS का करीब 100 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि PRTC का 200 करोड़ रुपये बकाया है। पंजाब सरकार पर दोनों रोडवेज का कुल 300 करोड़ रुपए बकाया चुकाना है, लेकिन कर्मचारियों को समय से सैलरी ही नहीं दी जा रही है।
पंजाब सरकार के पंजाब रोडवेज की कमाई बढ़ने के दावे खोखले,पंजाब में सरकारी बसों के हालात बेहाल है।ट्रांसपोर्ट मंत्री के अपने कस्बे पट्टी में रोडवेज के 23रूट स्पेयर पार्ट्स न होने के कारण बंद पड़े है,बहुत सी बसे पासिंग न होने की वजह से बंद खड़ी है मुख्य कारण पैसे की कमी है। pic.twitter.com/6xQlcjvDSL
— Punjab Congress Sevadal (@SevadalPB) October 14, 2022
Punjab: मुफ्त की रेवड़ी बाटने वाली पंजाब सरकार हुई दिवालिया।।
— Views24 (Digital) (@Views24_Digital) October 13, 2022
◆ पंजाब रोडवेज के कर्मचारियो को अभी तक नही मिला वेतन
◆ मुफ्त की सवारी से रोज़ घाटे में जा रही है पंजाब रोडवेज
◆ पंजाब सरकार के पास PRTC-PUNBUS के 300 करोड़ देने कैलिये पैसे नही।। pic.twitter.com/awHGxkqu6F
पंजाब में फ्री रेवड़ी कल्चर से सरकार पर बढ़ा आर्थिक बोझ
पहले की सरकारों के दौरान PUNBUS और PRTC का आर्थिक संकट इतना नहीं गहराया था, जितना वर्तमान AAP सरकार द्वारा बसों में फ्री सफर करने के बाद से बढ़ा है। पंजाब में महिलाओं का बस सफर फ्री रखा गया है। फ्री सफर की जो पेमेंट रोडवेज को मिलती है, वह अमाउंट भी 6 महीने से सालभर तक का पेंडिंग पड़ा है। फिलहाल जितनी कमाई है, उससे डीजल का बंदोबस्त भी मुश्किल से हो रहा है। बसों में महिलाओं का सफर फ्री होने पर उनकी संख्या अधिक बढ़ गई है और इससे एक सीट महज करीब 7 रुपए पर आ गई है जो कि पहले 35-40 रुपये होती थी। नकदी की सवारी करीब 10-15 ही रहती है, जबकि बस में भारी संख्या में सवारियां होती हैं।
जबसे पंजाब में @AamAadmiParty की सरकार बनी,तबसे पंजाब रोडवेज का बदहाली का दौर शुरु हो गया।सरकार की मिस मैनेजमेंट के कारण बसों के टैक्स उतराने के लिऐ पैसे नही और बसे डीपू में खड़ी है।नई खरीदी बसों की 4करोड़ किस्त है पर ड्राइवरों की कमी के कारण बसे खड़ी खड़ी कबाड़ मे बदल रही है। pic.twitter.com/nQBTNcJmbv
— Punjab Congress Sevadal (@SevadalPB) October 8, 2022
आप सरकार बनने के बाद हर माह वेतन लेट मिल रहा
जून महीने का वेतन जब जुलाई में 11 तारीख तक नहीं मिला तो पंजाब रोडवेज, पनबस के कांट्रेक्ट कर्मियों ने रोडवेज डिपो के आगे रोष प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार और पंजाब रोडवेज की मैनेजमेंट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की था। इस अवसर पर पंजाब रोडवेज पनबस कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा था राज्य में जब से आप सरकार बनी है तब से रोडवेज कर्मियों को हर माह वेतन लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मामूली वेतन पर काम करने वाले अस्थायी कर्मियों की दिक्कतों की राज्य सरकार और रोडवेज अधिकारियों को कोई चिंता नहीं है। समय पर वेतन न मिलने पर कर्मचारियों को बेहद आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह सिलसिला लगातार चल रहा है और राज्य सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है।
अब कर लेना फ्री की यात्रा मूर्ख बन गए न फ्री के चक्कर में
— Manisha Sinha (@manisha_791995) October 10, 2022
महिलाओं की फ्री यात्रा के कारण पंजाब रोडवेज की बसों की आमदनी बंद होने से 150 बसों का परिचालन ठप हो गया है। कारण रोडवेज इनके लिए रोड टैक्स तक नहीं जमा करवा पाया है। अधिकारियों ने बसों को वर्कशाप में खड़ा कर दिया गया है। pic.twitter.com/N67qzOA7fb
बोर्ड देखकर लगता है पंजाब रोडवेज़ की बसें सीधे आस्ट्रेलिया कनाडा की सवारी जलंधर अड्डे से उठाने लग पड़ी हैं अब ..😝 pic.twitter.com/CbgrK2ENOP
— Ashish Chadha (@AshishskgtKumar) October 11, 2022
यूनियन पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार कांट्रैक्ट कर्मियों को स्थायी करने के मामले में भी गंभीर नहीं है। जबकि चुनाव से पहले लालजीत सिंह भुल्लर सहित अनेक आप नेताओं ने उनके धरनों में शामिल होकर उनकी सरकार बनने पर स्थायी करने का वादा किया था। लेकिन अब ट्रांसपोर्ट मंत्री बनने के बाद लालजीत भुल्लर स्थायी करने के मामले में आनाकानी कर रहे हैं। उन्हें तो स्थायी क्या करना था, उल्टा पनबस में आउटसोर्स पर भर्ती की जा रही है और पीआरटीसी में प्राइवेट बस मालिकों की किलोमीटर स्कीम के तहत बसें डाली जा रही हैं।
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