Showing posts with label #AAP government. Show all posts
Showing posts with label #AAP government. Show all posts

क्लेम कमीशन की सिफारिश के अनुसार पीड़ितों को जारी करो मुआवजा: दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में AAP सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश, नई योजना बनाने से किया था इनकार; मुआवजा देगा कौन आतिशी, सुनीता या कोई और?

        दिल्ली दंगों के पीड़ितों को राहत देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट निर्देश (फोटो साभार: आजतक और दैनिक भास्कर)
आतिशी सरकार पर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से बड़ी दुविधा में पड़ गयी है। देखना यह है कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन आतिशी करेंगी या संभावित मुख्यमंत्री सुनीता केजरीवाल या फिर सत्ता परिवर्तन के बाद बनने वाले मुख्यमंत्री द्वारा? क्योकि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आ भी जाती है तो अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, सियासत के बाजार में चर्चा चल रही है कि अगर पार्टी सत्ता में आ जाती है तो अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री आतिशी तो क्या किसी और को भी मुख्यमंत्री बनाने को तैयार नहीं। आतिशी को तो पहले ही अस्थायी मुख्यमंत्री कह चुके है। ऐसे में एक ही विकल्प होगा वह है सुनीता केजरीवाल। 

दिल्ली सरकार के सामने सिर्फ पीड़ितों को मुआवजा देने तक नहीं है, सबसे बड़ी गले की फांस है लंबित CAG रिपोर्ट। ये वो बारूद है जिसके टेबल होते ही आम आदमी पार्टी ताश के पत्तों की हवा होकर एक इतिहास बन जाएगी। 

दिल्ली दंगों के पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा दिलाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि ‘क्लेम कमीशन’ की सिफारिश के मुताबिक दिल्ली सरकार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के पीड़ितों को सहायता राशि जारी करे।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, 20 याचिकाओं के समूह का यह मामला जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ के समक्ष सुना गया। इसमें याचिकाकर्ताओं ने ‘दंगा पीड़ितो की सहायता के लिए सहायता योजना’ के अनुसार मुआवजा माँगा गया था। कुछ याचिकाकर्ता इसमें बढ़ाकर मुआवजा देने की माँग भी कर रहे थे।

15 जनवरी को इन याचिकाओं के बाबत कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया गया कि उत्तर-पूर्वी दंगा दिल्ली आयोग ने बैच में से 14 याचिकाओं के संबंध में दावों के संबंध में सिफारिशें की हैं। अदालत को ये भी बताया गया कि उत्तर-पूर्वी दंगा दिल्ली आयोग द्वारा निर्धारित और अनुशंसित राशि याचिकाकर्ताओं के हक की राशि का एक अंश थी। फिर भी जल्द से जल्द अनुशंसित राशि जारी करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

कोर्ट में जब दिल्ली सरकार के वकील द्वारा इस माँग का विरोध नहीं किया गया तो अदालत ने इस संबंध में आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी नंबर 2 यानी दिल्ली सरकार को वर्तमान मामलों के समूह में याचिकाकर्ताओं के लिए उत्तर पूर्व दंगा दिल्ली आयोग द्वारा अनुशंसित राशि जारी करने का निर्देश दिया जाता है।” यह आदेश यह सुनिश्चित करता है कि मुआवजे की राशि याचिकाकर्ताओं के अधिकारों और तर्कों को ध्यान में रखते हुए दी जाएगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई को होगी। इससे पहले, अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह कोई नई योजना नहीं बनाएगी, बल्कि केवल यह देखेगी कि क्या दिल्ली सरकार ने पहले से बनाई गई योजना के अनुसार काम किया है या नहीं।

गौरतलब है कि दिल्ली के उत्तर पूर्वी इलाके में साल 2020 में हिंदू विरोधी दंगे हुए थे। इस दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी। पुलिस की जाँच में सामने आया था कि ये दंगा पूर्व नियोजित था। दंगों को लेकर करीबन 750 एफआईआर दर्ज हुई थी और कई आरोपित गिरफ्तार हुए थे। ताहिर हुसैन उन्हीं आरोपितों में से एक है।

दिल्ली जल संकट : पानी के लिए तरसते आम आदमी को दिखाया ठेंगा: सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस की हिमाचल सरकार का खेला; दिल्ली को देने के लिए पानी नहीं


पार्टियां जिस तरह मलाई खाने के लिए 'हम प्याला हम नवाले' रहती है ,लेकिन जन सुविधाओं के नाम पर सुप्रीम कोर्ट तक में रोज एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नज़र आ रहे हैं। जनता पानी से तड़प-तड़प कर मरती है, परवाह नहीं, लेकिन अपनी गन्दी सियासत से बाज नहीं आ रहे। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में जल संकट को लेकर एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा है, जिसमें हर रोज राज्य सरकारें ही अपनी बातों से पलट जा रही हैं। शुरुआत में दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट ये कहकर पहुँची थी कि हिमाचल प्रदेश सरकार उसे 136 क्यूसेक पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा सरकार उसे दिल्ली में नहीं आने दे रही है। अब हिमाचल प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी है ही नहीं, तो वो दिल्ली को क्या ही देगा?

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को जब टैंकर माफिया के मुद्दे पर घेरा और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए पूछा, तो पहले तो दिल्ली सरकार ने ये बहाना बनाया कि टैंकर माफिया पर उसका बस नहीं चलता, क्योंकि दिल्ली पुलिस उसके कब्जे में नहीं है, लेकिन जब सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को डाँटा कि अगर तुम कार्रवाई नहीं कर सकते, तो हम दिल्ली पुलिस को कार्रवाई का आदेश देंगे, इसके बाद अब दिल्ली सरकार ने कहा है कि टैंकर माफिया तो यमुना के उस पार यानी हरियाणा से ऑपरेट करते हैं, वो दिल्ली सरकार का इलाका ही नहीं है।

वैसे, ये साफ है कि लोकसभा चुनाव तक दिल्ली और हिमाचल की सत्ताधारी पार्टियाँ एक पक्ष में खड़ी थी। उन्होंने हरियाणा को घेरने की भरपूर कोशिश की। हिमाचल प्रदेश सरकार के वादे को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी और कहा था कि हिमाचल सरकार पानी दे रही है, लेकिन हरियाणा उसे दिल्ली तक नहीं पहुँचने दे रहा, लेकिन अब जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने अलग-अलग चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, तो सुप्रीम कोर्ट में भी हिमाचल सरकार पलट गई और कहा कि उसके पास एक्स्ट्रा पानी नहीं है। ऐसे में पार्टियों और सरकारों की आपसी नूरा-कुश्ती में आम जनता पिस रही है और वो प्यास से तड़प रही है।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सरकार को डाँट भी लगाई थी कि कोर्ट में सरकार झूठ बोल रही है। दिल्ली सरकार न तो टैंकर माफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रही है और न ही जल संकट से निपटने के लिए कोई स्थाई कदम उठा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने तो यहाँ तक कहा था कि दिल्ली सरकार अगर कार्रवाई नहीं कर रही है, तो बता दे, खुद सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस को टैंकर माफिया के खिलाफ कार्रवाई के आदेश देगी। अब सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार ने एक और दावा किया है कि दिल्ली में सक्रिय टैंकर माफिया सारे हरियाणा वाले हैं और वो दिल्ली को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

बहरहाल, अभी सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो अपर यमुना रिवर बोर्ड से अपील करे कि वो ज्यादा पानी दिल्ली के लिए छोड़े। चूँकि सुप्रीम कोर्ट पानी के बँटवारे की एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए यमुना के पानी के बँटवारे की जिम्मेदारी अपर यमुना रिवर बोर्ड पर छोड़ दें। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि वो जल संकट से निपटने की क्या कोशिशें कर रही है, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने हलफनामा दायर किया है और कहा है कि वो दिल्ली में पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम तो उठा रही है, लेकिन यमुना पार सक्रिय हरियाणा के टैंकर माफिया की वजह से पानी ही नहीं मिल पा रहा है और वो उनके खिलाफ कोई कदम इसलिए नहीं उठा पा रही, क्योंकि वो इलाका हरियाणा का है।

अगर हरियाणा से पानी/टैंकर माफिया पानी चोरी कर रहा है तो दिल्ली सरकार ने दिल्ली में कम होते पानी पर  दिल्लीवासियों के हित में क्या कार्यवाही की? क्यों नहीं हरियाणा सरकार या राज्यपाल को क्यों नहीं शिकायत की?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार(जून 12) को ही सभी सरकारों को डाँट लगाई थी कि वो उसके सामने झूठ बोला जा रहा है, लेकिन दिल्ली में सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी और हिमाचल की सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की सरकारें अब भी अपना बयान बदलती जा रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या कदम उठाती है, ये देखने वाली बात होगी।

पंजाब : फ्री रेवड़ी कल्चरः APP सरकार आने के बाद कर्मचारियों को समय पर नहीं मिलते वेतन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले कुछ समय में देश का ध्यान इस ओर आकर्षित कर चुके हैं कि रेवड़ी संस्कृति किस तरह लोकतंत्र और अर्थतंत्र का बेड़ा गर्क कर रही है। यह वही संस्कृति है, जिसे मुफ्तखोरी की राजनीति भी कहा जाता है। 

मुफ्तखोरी राजनीति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रहार एक अच्छा कदम जरूर है। लेकिन इसके लिए प्रधानमंत्री को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अथवा अपने विरोधियों को जिम्मेदार ठहराना गलत होगा, क्योकि केजरीवाल ने उस मुफ्त योजना को आम जनता को लाभान्वित करना शुरू किया जो उन्हें राजनीति की विरासत में मिला है। इस सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता, अगर कोई नेता-चाहे वह किसी भी पार्टी से हो- इसे झुठलाता है, वह झूठ बोलकर जनता को पागल बना रहा है। केजरीवाल के राजनीति में आने से वर्षों पूर्व से निर्वाचित सदस्य फ्री की रेवड़ियां का आनंद ले रहे हैं। केजरीवाल ने फ्री रेवड़ी कल्चर को शुरू करने पर स्पष्ट रूप से कहा था कि जब नेताओं को मिल रही फ्री रेवड़ियों पर हर महीने करोड़ों खर्च हो रहे हैं, फिर जनता उस फ्री रेवड़ी कल्चर से क्यों वंचित रहे? यही मुख्य कारण है कि आम आदमी पार्टी के विरोधी भी चुनाव में आप को वोट देते हैं। दिल्ली में 62 सीटें आने का मुख्य कारण यही है।  

यह राजनीति न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली भी है। यह किसी से छिपा नहीं कि रेवड़ियां बांटने की राजनीतिक संस्कृति ने न जाने कितने देशों को तबाह किया है। पीएम मोदी ने इसके नुकसान के बारे में पहले ही बताया था और लोगों को इससे बचने की सलाह दी थी। ‘रेवड़ी कल्चर’ भले ही चुनाव में लोगों को आकर्षित करता हो, लेकिन इसका नतीजा यह हो रहा है कि राज्यों की आर्थिक सेहत बिगड़ने लगी है और वो कर्ज की बोझ तले दबने लगे हैं। जाहिर है अगर खर्च ज्यादा हो और आमदनी कम हो, फिर कर्ज तो लेना ही पड़ेगा।

हमारे देश के कई राज्यों में भी आज ऐसा ही हो रहा है। इनमें पंजाब की स्थिति सबसे खराब है। वित्त वर्ष 2021-22 में पंजाब पर उसकी GDP के 53 प्रतिशत हिस्से के बराबर कर्ज था और ये पूरे देश में सबसे ज्यादा था। इसे ऐसे समझिए कि अगर पंजाब की GDP 100 रुपये है तो 53 रुपये उस पर कर्ज है। सोचिए, जिस राज्य पर उसकी GDP के 53 प्रतिशत हिस्से के बराबर कर्ज है, उस राज्य की सरकार लोगों को बसों को मुफ्त यात्रा, मुफ्त बिजली देकर अपने कर्ज को और बढ़ा रही है। अब पंजाब की भगवंत मान सरकार के लिए आर्थिक तंगी से जूझ रहे विभागों को संकट से उबारना एक चुनौती बन गया है। हालत यह है कि रोडवेज कर्मचारियों को पिछले कई महीने से या तो सैलरी समय से नहीं दी जा रही या फिर किस्तों में दी जा रही है।

रोडवेज का सरकार पर 300 करोड़ रुपये बकाया

पंजाब में रोडवेज की PRTC और PUNBUS दो कंपनियां हैं। PRTC की बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों समेत अन्य स्टाफ को हर महीने सैलरी का इंतजार रहता है, लेकिन पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद से सैलरी देरी से दी जा रही है। पनबस के प्रेसिडेंट रेशम सिंह गिल के मुताबिक कर्मचारियों के लिए हर महीने सैलरी की समस्या खड़ी हो जाती है। वहीं पंजाब सरकार के पास PUNBUS का करीब 100 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि PRTC का 200 करोड़ रुपये बकाया है। पंजाब सरकार पर दोनों रोडवेज का कुल 300 करोड़ रुपए बकाया चुकाना है, लेकिन कर्मचारियों को समय से सैलरी ही नहीं दी जा रही है।

पंजाब में फ्री रेवड़ी कल्चर से सरकार पर बढ़ा आर्थिक बोझ

पहले की सरकारों के दौरान PUNBUS और PRTC का आर्थिक संकट इतना नहीं गहराया था, जितना वर्तमान AAP सरकार द्वारा बसों में फ्री सफर करने के बाद से बढ़ा है। पंजाब में महिलाओं का बस सफर फ्री रखा गया है। फ्री सफर की जो पेमेंट रोडवेज को मिलती है, वह अमाउंट भी 6 महीने से सालभर तक का पेंडिंग पड़ा है। फिलहाल जितनी कमाई है, उससे डीजल का बंदोबस्त भी मुश्किल से हो रहा है। बसों में महिलाओं का सफर फ्री होने पर उनकी संख्या अधिक बढ़ गई है और इससे एक सीट महज करीब 7 रुपए पर आ गई है जो कि पहले 35-40 रुपये होती थी। नकदी की सवारी करीब 10-15 ही रहती है, जबकि बस में भारी संख्या में सवारियां होती हैं।

आप सरकार बनने के बाद हर माह वेतन लेट मिल रहा

जून महीने का वेतन जब जुलाई में 11 तारीख तक नहीं मिला तो पंजाब रोडवेज, पनबस के कांट्रेक्ट कर्मियों ने रोडवेज डिपो के आगे रोष प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार और पंजाब रोडवेज की मैनेजमेंट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की था। इस अवसर पर पंजाब रोडवेज पनबस कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा था राज्य में जब से आप सरकार बनी है तब से रोडवेज कर्मियों को हर माह वेतन लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। मामूली वेतन पर काम करने वाले अस्थायी कर्मियों की दिक्कतों की राज्य सरकार और रोडवेज अधिकारियों को कोई चिंता नहीं है। समय पर वेतन न मिलने पर कर्मचारियों को बेहद आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह सिलसिला लगातार चल रहा है और राज्य सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है।

यूनियन पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि सरकार कांट्रैक्ट कर्मियों को स्थायी करने के मामले में भी गंभीर नहीं है। जबकि चुनाव से पहले लालजीत सिंह भुल्लर सहित अनेक आप नेताओं ने उनके धरनों में शामिल होकर उनकी सरकार बनने पर स्थायी करने का वादा किया था। लेकिन अब ट्रांसपोर्ट मंत्री बनने के बाद लालजीत भुल्लर स्थायी करने के मामले में आनाकानी कर रहे हैं। उन्हें तो स्थायी क्या करना था, उल्टा पनबस में आउटसोर्स पर भर्ती की जा रही है और पीआरटीसी में प्राइवेट बस मालिकों की किलोमीटर स्कीम के तहत बसें डाली जा रही हैं।

दिल्ली : केजरीवाल जी किराड़ी में 458 बेड का अस्पताल कहाँ है?

अपने विरोधी नेताओं के भ्रष्टाचार पर शोर मचाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल उनकी अपनी ही सरकार में पनप रहे भ्रष्टाचार पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं? वैसे भाजपा ने मीडिया के माध्यम से बिगुल तो बजा दिया है, लेकिन इस लापरवाही के लिए केजरीवाल सरकार को कोर्ट में खींचना चाहिए। 
भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजाकर अरविंद केजरीवाल ने दिल्लीवासियों का जो भरोसा जीता था, वो भरोसा अब पूरी तरह से टूट चुका है। केजरीवाल के दावे के विपरीत दिल्ली में भ्रष्टाचार बदस्तूर जारी है। इसी बीच अस्पताल का एक बड़ा घोटाला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि किराड़ी में जिस 458 बेड वाले अस्पताल के निर्माण का दावा केजरीवाल सरकार कर रही थी, उस अस्पताल की जमीन पर अभी तक एक ईंट नहीं रखी गई है।

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता बीजेपी सांसद मनोज तिवारी के साथ बुधवार (22-06-2022) को रोहिणी के किराड़ी पहुंचे। दोनों ने PWD की साइट पर जाकर खुद अस्पताल की हकीकत जानने की कोशिश की। बीजेपी ने अस्पताल की साइट का मुआयना करने के बाद कहा कि आम आदमी पार्टी जिस अस्पताल के 2020 में तैयार होने का दावा कर रही थी, वह खोखला साबित हुआ है। मनोज तिवारी ने कहा कि अभी तक सिर्फ पैसों को लेकर भ्रष्टाचार की बात हो रही थी लेकिन जमीनी हकीकत में तो अस्पताल का निर्माण ही नहीं हुआ है।

बीजेपी नेताओं के मुताबिक अस्पताल की जगह सिर्फ खाली जमीन मिली। जिसमें लंबे समय से पानी भरा हुआ है। अस्पताल के नाम पर नीले टीन के चद्दर वाली बाउंड्री और सिर्फ दिल्ली स्वास्थ्य मंत्रालय का बोर्ड मिला। आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना काल में DDA ने जमीन सिर्फ 49 रुपए में जनता की सेवा के लिए दिल्ली सरकार को दी थी। 1256 करोड़ में 7 अस्थाई अस्पताल बनाने थे। लेकिन केजरीवाल सरकार ने हजारों करोड़ के घोटाले में बदल कर जनता को धोखा दिया।

आदेश गुप्ता ने कहा कि यह महज संयोग नहीं है जब 2020 में बनकर तैयार हुए अस्पताल के लिए 10 अगस्त 2021 में टेंडर निकाला गया। मतलब एक अस्पताल बनाने के पीछे दो बार भ्रष्टाचार किया गया। पहला बिना बनाए इसको कागजों में दिखा दिया गया कि अस्पताल बनकर तैयार है और दूसरा 2020 में कागजों में बने बनाए अस्पताल का टेंडर अगस्त 2021 में पास किया गया।

केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी सूची काफी लंबी है। आइए देखते हैं केजरीवाल सरकार किस तरह दिल्ली को लूट रही है…

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल के स्वास्थ्य मंत्री गिरफ्तार
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी मंत्री सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग केस में फिलहाल हिरासत में हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने कोर्ट में बताया कि सत्येंद्र जैन ने पूछताछ के दौरान कहा कि उनको कोरोना हुआ था, जिसकी वजह से अब उनकी याददाश्त चली गई है। जैन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 30 मई को गिरफ्तार किया था। 6 जून को ईडी ने उनके घर सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। एबीपी न्यूज के अनुसार ईडी ने कोलकाता की एक कंपनी से जुड़े हवाला लेनदेन मामले में जांच में पाया कि 2015-16 के दौरान सत्येंद्र जैन को एक लोकसेवक रहते शेल कंपनियों से 4.81 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। बताया जाता है कि पूछताछ के दौरान सत्येंद्र जैन जांच एजेंसियों को इन पैसों का कोई हिसाब नहीं दे पाए। 

केजरीवाल सरकार की योजना ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ में घोटाला
दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अक्टूबर 2019 में ‘फ़रिश्ते दिल्ली के’ नाम से एक योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य था रास्तों पर होने वाली दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाना। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन पर काफी खर्च किए गए। लेकिन यह योजना भी घोटालों की भेंट चढ़ गई। दिल्ली स्थित तिलक नगर के रहने वाले अधिवक्ता अनंतदीप सिंह ने आरटीआई दायर कर ‘फ़रिश्ते दिल्ली’ के लाभार्थियों और उस पर हुए खर्च के बारे में जानकारी मांगी गई, तो आधी-अधूरी जानकारी दी गई। 

बिजली कंपनियों को 10000 करोड़ रुपये का फायदा
दिसंबर 2019 में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बिजली कंपनियों को 10 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट बिजली सब्सिडी देने के नाम पर में बड़े घोटाले को अंजाम दिया। उन्होंने इसकी सीबीआई से जांच की मांग की।

केजरीवाल सरकार ने पूरा नहीं किया सब्सिडी का वादा
केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री हारून यूसुफ ने बताया कि निजी बिजली कंपनियों को 8532 करोड़ रुपए की सब्सिडी देना आपने आप में एख बड़ा घोटाला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली से ये वादा किया था कि सब्सिडी सीधे उनके खाते में डाली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्या वजह है कि उपभोक्ताओं के खाते में सब्सिडी की राशि नहीं दी जा रही है।

2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला 
दिल्ली के शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया का भी एक घोटाला सामने आया, ये घोटाला स्कूलों के निर्माण से जुड़ा था। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया है। आरटीआई से पता चला कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए। लोग ने सवाल उठाए कि एक कमरे की लागत में 24 लाख रुपये कैसे हो सकती है। क्या केजरीवाल जी ने कमरे में सोने की टाइल्स लगवाईं हैं? यही नहीं ट्विटर पर #SisodiaKaGhapla ट्रेंड करने लगा और लोग अपनी बेबाक राय दीं। 

खुद केजरीवाल पर लगा रिश्वत लेने का आरोप
सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार पर भ्रष्टाचार का सबसे गंभीर 2 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप उनके अपने ही कैबिनेट सहयोगी रहे कपिल मिश्रा ने लगाया था। सबसे बड़ी बात ये है कि दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने केजरीवाल से जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने का आरोप लगाया, वो उन्हीं की सरकार में सीएम के चहते मंत्री सत्येंद्र जैन हैं। कपिल मिश्रा के आरोपों में कितना दम है ये तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन कुछ तथ्य ऐसे हैं जिससे ईमानदारी का चोला ओढ़े केजरीवाल की कलई खुल जाती है। 

हवाला के जरिए पैसे जुटाने का आरोप
दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा दावा कर चुके हैं कि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने फर्जी कंपनी बनाकर हवाला के जरिए पैसा जुटाया। उन्होंने इसके संबंध में दस्तावेज होने के भी दावे किए। यही नहीं कपिल मिश्रा ने पार्टी के नेताओं के विदेश यात्राओं की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए। लेकिन हैरानी की बात है कि केजरीवाल ने अबतक सार्वजनिक रूप से कपिल मिश्रा के एक भी सवाल का जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई है।

सीएनजी घोटाला
केजरीवाल सरकार में मंत्री रह चुके कपिल मिश्रा ने दिल्ली सरकार के एक और बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया। अंग्रेजी समाचार पोर्टल टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में 10,000 कारों में जो सीएनजी किट लगावाए, वो फर्जी कंपनी ने तैयार किए। ये सारे सीएनजी किट 10 महीनों के भीतर कारों में फिट किए गए थे। सबसे बड़ी बात ये है कि फर्जी सीएनजी किट कंपनी को इसका ठेका ऑड-इवन के फौरन बाद दिया गया था। जाहिर है कि इसके समय को लेकर भी दिल्ली सरकार की मंशा संदेहों से परे नहीं है। अपने आरोपों के समर्थन में कपिल ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

पीडब्ल्यूडी घोटाले में केजरीवाल का रिश्तेदार गिरफ्तार
घोटाला और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर भरोसा करके दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल का सिर पर बिठाया लेकिन सत्ता में आते ही केजरीवाल का चेहरा बेनकाब होने लगा है। पीडब्ल्यूडी घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के साढू सुरेन्द्र बंसल के बेटे विनय बंसल को एसीबी ने गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री के रिश्तेदार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कंपनियों के नाम से ठेके लेने और उसके लिए जाली बिल बनाकर सरकारी खजाना लूटने का आरोप का आरोप लगा। इस मामले में एसीबी ने तीन एफआईआर दर्ज की थी। जिनमें से एक सुरेंद्र बंसल की कंपनी के खिलाफ थी। एसीबी ने पिछले साल 9 मई को कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता 
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली स्वास्थ्य विभाग में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई। यह अनियमितता आउटसोर्स या कांट्रेक्ट पर रखे गए कर्मचारियों से जुड़ी है। स्वास्थ्य विभाग में 15 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स पर रखा, लेकिन ठेकेदार ने इन कर्मचारियों को ईपीएफ (इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड), इंश्योरेंस और बोनस का लाभ नहीं दिया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच साठ-गांठ के जरिए हजारों करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इतना ही नहीं कामगारों का शोषण भी किया गया।

करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा
सीबीआई ने स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के विभाग से जुड़ी दिल्ली डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ ऋषि राज और काउंसिल के वकील प्रदीप शर्मा को 4.73 लाख रुपये रिश्र्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। मामले में अहम बात यह है कि रजिस्ट्रार के लॉकर से करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए, जो सत्येंद्र जैन और उनकी पत्नी के नाम पर हैं। जागरण के अनुसार रजिस्ट्रार के लॉकर से सत्येंद्र जैन की तीन संपत्तियों के दस्तावेज मिले। इनमें 12 बीघा दो बिस्वा और आठ बीघा 17 बिस्वा जमीन की खरीद के दस्तावेज और 14 बीघा जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी के कागज हैं। ये जमीनें बाहरी दिल्ली के कराला गांव में हैं। इसके अलावा, सीबीआइ के हाथ दो करोड़ रुपये की बैंक की डिपॉजिट स्लिप बुक भी मिली है।

स्वास्थ्य मंत्री का घोटाला छिपाया!
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ आयकर विभाग की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। उनपर पर हवाला के जरिए 16.39 करोड़ रुपये मंगाने का आरोप है। इन मामलों में उनकी सघन जांच हो रही है। इसके अलावा जैन पर अपनी ही बेटी को दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में सलाहकार बनाने का भी आरोप लगा। इस केस की जांच भी सीबीआई के जिम्मे है। शुंगलू कमेटी ने भी इस मामले में दिल्ली सरकार पर उंगली उठाई। यहां ये बताना आवश्यक है कि केजरीवाल के पूर्व सहयोगी और मौजूदा बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इन्हीं पर केजरीवाल को पैसे देने के आरोप लगाए थे। मिश्रा के अनुसार जैन ने अपनी करतूतों पर पर्दा डाले रखने के लिए केजरीवाल के किसी रिश्तेदार की 50 करोड़ रुपये की डील भी कराई थी।

दवा घोटाला
केजरीवाल सरकार ने अपनी मोहल्ला क्लीनिक का खूब ढिंढोरा पीटा है। वो दावा करते रहे हैं कि गरीब जनता के स्वास्थ्य के ख्याल से उठाया गया ये कदम बहुत फायदेमंद साबित होगा। लेकिन अब पता चल रहा है कि केजरीवाल और उनके गैंग के लोग भले ही इसका फायदा उठा रहे हों, उनकी गंदी नीयत के चलते अब गरीबों की जान पर बन आई है। इसका खुलासा तब हुआ जब 1 जून, 2017 को एसीबी ने दवा प्रोक्योरमेंट एजेंसी के ताहिरपुर, जनकपुरी और रघुवीर नगर स्थित सेंटर के गोदामों पर छापा मारा। एसीबी को यहां से भारी मात्र में एक्सपाइरी मेडिसिन के साथ दवाओं की खरीद-फरोख्त के बिल भी मिले हैं। ये दवा घोटाला करीब 300 करोड़ रुपये का बताया गया। 

मोहल्ला क्लिनिक घोटाला
मोहल्ला क्लीनिक को लेकर एबीपी न्यूज ने एक बड़ा खुलासा किया।
एबीपी न्यूज के अनुसार दिल्ली में आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक वैसे तो लोगों की सुविधाओं के लिए बनाया गया, लेकिन मोहल्ला क्लीनिक की हालत ही ठीक नहीं है। विजिलेंस विभाग इसमें धांधली की जांच कर रहा है। विजिलेंस की जांच का दायरे में दो मुख्य आरोप हैं।

  1. मोहल्ला क्लीनिक परिसर का किराया बाजार किराए से ज्यादा क्यों है?
  2. पार्टी कार्यकर्ताओं के परिसर किराए पर क्यों लिए गए?         

एबीपी न्यूज की पड़ताल में पता चला कि कार्यकर्ता अपने मकान को बाजार दर से दो से तीन गुना ज्यादा किराये पर मोहल्ला क्लीनिक को दिए हुए हैं। इस तरह से मोहल्ला क्लीनिक खोलने में आम आदमी पार्टी के नेताओं को जमकर फायदा पहुंचाया गया है। कांग्रेस नेता अजय माकन का आरोप है कि मोहल्ला क्लिनिक एक बड़ा घोटाला है। माकन ने आरोप लगाया कि ये क्लिनिक ‘आप’ कार्यकर्ताओं की बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं। उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए मार्केट से कई गुना ज्यादा किराया दिया जा रहा है।

ब्लू स्टार की बरसी पर स्वर्ण मंदिर : हवा में नंगी तलवार, हाथ में भिंडरावाले के पोस्टर और मुँह पर खालिस्तानी नारे

किसान आंदोलन से लेकर पंजाब विधान सभा चुनाव तक खालिस्तान की आवाज़ उठने पर किसी भी पार्टी ने गंभीरता से नहीं लिया, क्योकि उनको मोदी का विरोध जो करना था। मोदी विरोध के आगे उन्होंने देश की शांति और कानून व्यवस्था को ताक पर रख दिया। दूसरे, पंजाब चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी को खालिस्तान समर्थन के समाचार सामने आते रहे हैं। अब जब पंजाब ने जलने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार बनवा दी, जबकि इस पार्टी का चुनाव से पूर्व ही खालिस्तान सम्बन्ध सामने आते रहे हैं।  
पंजाब में खालिस्तान की माँग एक बार फिर से सिर उठ रही है। इसका सबूत 6 जून 2022 को उस समय दिखा जब ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) की बरसी पर स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) के गेट तक पहुँचे सैकड़ों की संख्या में लोगों ने खालिस्तानी नारेबाजी की। इस दौरान लोगों ने अपने हाथों में नंगी तलवारें और खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले (Jarnail Bhindranwale) के पोस्टर लिए हुए थे।

इन लोगों ने जरनैल सिंह भिंडरावाले के बैनर और पोस्टरों को लहराते हुए स्वर्ण मंदिर के अंदर घुसने की कोशिशें की, लेकिन उन्हें गेट पर ही रोक दिया गया। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है। 42 सेकंड के वीडियो में सैकड़ों सिखों को हाथों में नंगी तलवारें और पोस्टर लेकर नारेबाजी करते देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि आज ही के दिन 38 साल पहले (6 जून 1984) सेना का ऑपरेशन ब्लू स्टार समाप्त हुआ था। इस दिन सेना ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में सेना ने आतंकी जरनैल सिंह भिंडरावाले को ढेर कर उसे आतंकियों के चंगुल से मुक्त कराया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के बीच कट्टरपंथी संगठनों ने अमृतसर में बंद का आह्वान किया है। दल खालसा नाम के कट्टरपंथी संगठन ने हर जगह ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पोस्टर चस्पा किए हैं। मामले की गंभीरता के मद्देनजर अमृतसर में 7,000 जवानों की तैनाती की गई है। बावजूद इसके खालिस्तानी समर्थक स्वर्ण मंदिर तक पहुँच गए।

भगवंत मान की अकाल तख्त के जत्थेदार संग बैठक

इससे पहले रविवार को पंजाब के सीएम भगवंत मान ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी से पहले स्वर्ण मंदिर में माथा टेका और फिर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह के साथ बंद कमरे में बैठक की। हालाँकि, अंदर किस तरह की बातें हुई, इसका खुलासा नहीं हो सका।
रविवार को ही कट्टरपंथी सिख संगठनों बब्बर खालसा, शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) समेत कई अन्य खालिस्तान समर्थकों ने आजादी मार्च निकाला था। इस दौरान खालिस्तान की आजादी की माँग के नारे लगाए गए थे।

पंजाब : ‘एक्शन’ में आप सरकार : किसानों द्वारा खराब फसल का मुआवजा मांगने पर मिली लाठियां, सोते किसानों को भी नहीं बख्शा

कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों का समर्थन करने वाली आम आदमी पार्टी उन्ही किसानों के समर्थन से पंजाब में सरकार बनवाने का इनाम मिलना शुरू हो गया। जब ख़राब फसल का मुआफजा मांगने पर लाठियां मिली। इतना ही नहीं, आप सरकार ने सोते किसानों को भी नहीं बक्शा। 

अरविन्द केजरीवाल की पंजाब में सरकार बनवाने में सक्रीय राकेश टिकैत और अन्य किसान यूनियन किसानों पर हुए लाठी चार्ज पर मुंह में दही जमाए बैठे हैं, क्यों? 

सरहदी राज्य पंजाब में भगवंत मान को मुख्यमंत्री बने अभी कुछ ही दिन हुए हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऑपरेशन लाठीचार्ज शुरू कर दिया है। किसानों से हमदर्दी का दिखावा करने वाली आप सरकार के एक्शन से उसकी पोल भी खुल गई है। जो किसान खराब हुई फसल का मुआवजा मांग रहे थे, उनपर आप सरकार ने मुआवजा देने के बजाए लाठियां बरसाईं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र लांबी में हुए इस लाठीचार्ज में एक दर्जन से ज्यादा किसान चोटिल हो गए। इनमें से सात को गंभीर चोट आई हैं। किसानों में आप सरकार की बर्बर कार्रवाई के खिलाफ काफी रोष देखा जा रहा है।

किसानों से हमदर्दी की खुली पोल, सरकार बनते ही किसानों की समस्याएं नजरअंदाज

पंजाब में आप सरकार बनने के बाद से किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। कपास के मुआवजे की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बैनर तले पंजाब में किसान आंदोलन हो रहा है। आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर पंजाब की सियासत गरमा गई है। बीकेयू उगराहां की ओर से आरोप लगाया गया है कि लांबी में हुए लाठीचार्ज के दौरान सात किसान गंभीर घायल हुए हैं। मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का समूह लांबी में तहसील ऑफिस के बाहर धरना दे रहा था। किसानों ने तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों के बाहर जाने से रोका, तो उनको समझाने के बजाए पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

प्रकाश सिंह बादल के विधानसभा क्षेत्र में लाठीचार्ज में सात किसान गंभीर घायल

पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक विधानसभा क्षेत्र लांबी में नरमा की फसल के मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के नेतृत्व में सोमवार देर रात तहसील कॉम्प्लेक्स के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस ने किसानों का आंदोलन समाप्त करने के लिए बर्बर रास्ता अपनाया और सोते हुए किसानों पर रात करीब बारह बजे के बाद लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज कर किसानों को खदेड़ने के बाद नायब तहसीलदार सहित स्टाफ दफ्तर से चला गया। लाठीचार्ज में सात किसान घायल हुए हैं जो लांबी के सिविल अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

सरकार की गिरदावरी में भेदभाव, 30 गांवों को शामिल ही नहीं किया
किसानों का आरोप है कि गुलाबी सुंडी से खराब हुई नरमा की फसल के मुआवजे के मामले में मुक्तसर जिले को नजरंदाज किया गया है। मुक्तसर जिले में अधिकतर नरमा की खेती लंबी ब्लाक में ही होती है। गिरदावरी में लंबी ब्लाक के केवल छह गांवों को ही शामिल किया गया है और उन्हें भी अभी तक मुआवजा नहीं दिया गया। जबकि अन्य करीब 30 गांवों को शामिल ही नहीं किया गया। वहीं भाकियू द्वारा अभी भी तहसील दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन जारी है।

पंजाब के राजस्व अधिकारी और पटवारी भी हुए नाराज, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
लाठीचार्ज में हुए घायलों में किसानों में हरपाल सिंह किल्लियांवाली, निशान सिंह कख्खांवाली, जगदीप सिंह खुड्डियां, दविंदर सिंह मानांवाला, एमपी सिंह भुल्लरवाला, गुरलाभ सिंह कख्खांवाली, काला सिंह खुन्नण खुर्द आदि शामिल हैं। वहीं, इस घटनाक्रम में एक एएसआई भी घायल हुआ है। इस मामले के विरोध में पूरे पंजाब के राजस्व अधिकारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। दूसरी ओर देर रात को ही पटवारियों ने दफ्तर से बाहर आने के बाद नेशनल हाईवे पर धरना देकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी पटवारी किसानों पर कार्रवाई करने की मांग की।