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इमाम शब्बीर सिद्दीकी (फोटो साभार: गैटी) |
इमाम सिद्दीकी ने कहा, “अभी आपने देखा नमाज पढ़ना। एक भी औरत नजर आई? इस्लाम में सबसे ज्यादा अहमियत नमाज को है। अगर औरतों को इस तरह से लोगों के सामने आना इस्लाम में जायज होता तो उन्हें मस्जिद में नहीं रोका जाता। मस्जिद से रोक दिया गया, क्योंकि औरत का इस्लाम में एक मुकाम है।”
सिद्दीकी मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने वालों पर भी भड़के। उन्होंने कहा, “जो मुस्लिम औरतों को टिकट देते हैं, वे इस्लाम के खिलाफ बगावत करते हैं। इस्लाम के खिलाफ उनका ये अमल है। आपको मर्द नहीं मिला कि आप औरतों को ला रहे हैं? इससे हमारा मजहब कमजोर होगा। कमजोर इसलिए होगा, क्योंकि कल कर्नाटक में हिजाब का मसला चला तो काफी हंगामा हुआ।”
महिलाओं को टिकट देने से इस्लाम कैसे कमजोर होगा, इसको लेकर सिद्दीकी तर्क देते हैं, “अब कल अपनी औरतों को काउंसलर या विधायक बनाएँगे तो हम हिजाब को महफूज नहीं रख पाएँगे। इस मसले को हम फिर नहीं उठा सकेंगे, क्योंकि इसे उठाने के लिए हम सरकार से बात करेंगे तो वे कहेंगे कि आपकी औरतें तो अब एसेंबली हॉल में आ रही हैं, पार्लियामेंट में जा रही हैं, म्युनिसिपालिटी के बोर्ड में बैठ रही हैं। स्टेज पर वो लोगों से अपील कर रही है। इलेक्शन लड़ने के लिए घर-घर जाना पड़ेगा। इस्लाम में औरत की आवाज भी औरत है। इसलिए मैं इसका सख्त मुखालिफ हूँ।”
#WATCH | Those who give election tickets to Muslim women are against Islam, weakening the religion. Are there no men left?: Shabbir Ahmed Siddiqui, Shahi Imam of Jama Masjid in Ahmedabad#Gujarat pic.twitter.com/5RpYLG7gqW
— ANI (@ANI) December 4, 2022
— SaJo (@Jo06076898Jo) December 4, 2022
मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने के पीछे के ‘साजिश’ को समझाते हुए सिद्दीकी ने कहा, “आप मर्द को टिकट दीजिए। अगर कहीं हमारे देश का है कि उस सीट से औरतें ही लड़ सकती हैं तो वहाँ आप कह सकते थे कि भाई वहाँ तो मजबूरी है। मेरा मानना है कि ये औरतों या लड़कियों को इसलिए टिकट दे रहे हैं ताकि पूरे कब्जे में किया जा सके। आजकल तो औरतों की चलती है तो वो आगे आ जाएगी तो पूरा परिवार कब्जे में आ जाएगा। इसके सिवाय तो और कोई मकसद मुझे नहीं लगता।”
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