प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद अब सुंदर भाटी गैंग भी चर्चा में है। हमला करने वाले तीन शूटरों में से एक सनी सिंह के इस गैंग से जुड़े होने की बात कही जा रही है। सनी पर पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज हैं। कहा जा रहा है कि अतीक की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल भाटी गैंग ने ही सनी को दी थी। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स इस हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की भी मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या में जिगाना पिस्टल का प्रयोग हुआ है। जिगाना पिस्टल तुर्की में बनती है। लगभग 6 लाख रुपए कीमत की यह पिस्टल भारत में बैन है। यह पिस्टल सुंदर भाटी गैंग द्वारा सनी सिंह को देने की आशंका जताई जा रही है। मूल रूप से हमीरपुर के रहने वाले सनी सिंह के सुंदर भाटी से सम्पर्क जेल में होने की बात कही जा रही है। जिगाना पिस्टल आरोपितों के पास कहाँ से आई इसका खुलासा फिलहाल अभी नहीं हो पाया है। पुलिस को अभी तक सुंदर भाटी और अतीक अहमद के बीच किसी पुरानी दुश्मनी का भी सुराग नहीं मिल पाया है। सुंदर भाटी फिलहाल सोनभद्र जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
लॉरेंस गैंग से भी कनेक्शन की आहट
वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अतीक और उसके भाई अशरफ को मारने वाले हथियार लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिए थे। इस आशंका को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि इन्हीं हथियारों से सिद्धू मूसेवाला की भी हत्या हुई थी। इस मर्डर में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।
गुड्डू मुस्लिम भी करा सकता है अतीक की हत्या
एक रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि अतीक अहमद के बाद उसकी गैंग का मुखिया गुड्डू मुस्लिम बनना चाहता था। हालाँकि अतीक की पसंद उसका भाई अशरफ था। आशंका जताई जा रही है कि यह बात गुड्डू मुस्लिम को रास नहीं आई होगी और उसने अतीक और अशरफ की हत्या करवा दी होगी। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बमबाज गुड्डू उमेश पाल की हत्या में वांटेड है और उसकी तलाश STF लगातार कर रही है। दूसरे यह कि अतीक ने जैसे ही गुड्डू का नाम लिया, वैसे ही ताबरतोड़ गोलियां चल गयीं।
दोनों हाथों से गोलियाँ चलाता है सनी
तीनों शूटरों को अतीक और अशरफ की लोकेशन व मूवमेंट आदि की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रहीं थी। सनी के करीबियों ने बताया कि हत्या के 4 दिन पहले उसने कुछ बड़ा करने की बात कही थी। तब उसने कहा था कि जल्द ही पूरे प्रदेश में लोग उसे जान जाएँगे। सनी सिंह 90 के दशक के उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े डॉन रहे और बाद में UP STF के द्वारा मारे गए श्रीप्रकाश शुक्ला का फैन है। बताया जा रहा है कि वह दोनों हाथों से गोलियाँ चला लेता है। सनी के पड़ोसियों के मुताबिक वह अक्सर साइबर कैफे जाकर बड़े अपराधियों के फोटो प्रिंट करवाकर लाता था। कक्षा 8 पास सनी क्रूड बम भी बना लेता है। साल 2021 में वह चित्रकूट जेल में बंद था। फ़िलहाल पुलिस शूटरों से जुड़े तमाम नेटवर्क को खंगाल रही है।
योगी बाबा को पता था कि कोई सुप्रीम कोर्ट में सिर पटकेगा, इसलिए पहले ही अतीक और अशरफ की "हत्या" पर न्यायिक जांच बिठा दी।
अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घटना की न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए थे क्योंकि उन्हें पता था कि कोई न कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट जाएगा और ऐसी ही जांच की मांग करेगा।
योगी जी ने 3 सदस्यीय आयोग का गठन भी कर दिया जिसके अध्यक्ष होंगे इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार त्रिपाठी और पूर्व पुलिस महानिदेशक सुबेष कुमार सिंह एवं पूर्व न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सोनी अन्य दो सदस्य होंगे। आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट 2 महीने में पूरी करके सरकार को देने के लिए कहा गया है।
वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी और अतीक अशरफ की ही नहीं, 2017 से अब तक हुए Encounters में 183 अपराधियों के मरने की भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से जांच कराने की मांग की है। विशाल तिवारी का कहना है सजा देने का अधिकार पुलिस के पास होना लोकतंत्र के लिए खतरा है और ये अधिकार केवल न्यायपालिका के पास होना चाहिए।
सवाल यह उठता है कि विशाल तिवारी इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने की बजाय सीधा सुप्रीम कोर्ट कैसे चले गए? क्या हाई कोर्ट में न्याय नहीं होता। तिवारी को पता था कि मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट गए जैसे वहां उसके "रिश्तेदार' बैठे हैं। इस तरह की हरकतें विषय को राजनीतिक रंग देने का ही प्रयास है। वकील मित्र पता करें किस पार्टी से पोषित हैं तिवारी जी क्योंकि अक्सर ये उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाते हैं।
विशाल तिवारी की बात ठीक है कि सजा देने का अधिकार न्यायपालिका का है लेकिन जब माफिया लोगों पर अत्याचार करके, हत्याएं, लूट जमीने हड़प कर अपना अपना साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं और पुलिस उनके खिलाफ कुछ करने में पंगु होती है, जज कुर्सी छोड़ कर भाग जाते हैं, तब किस कानून और न्यायपालिका पर भरोसा कर सकते हो।अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, शहाबुद्दीन, आज़म खान और जो दाऊद जैसे लोग भाग लिए क्या उन्हें अंजाम तक कानून से पहुंचा सकते हो। विशाल तिवारी जैसे वकील ही उनके मुक़दमे 20-20 साल तक लटका कर अपराध बढ़ाने में मददगार होते हैं।
जो असद उमेश पाल और उसके 2 सुरक्षा अधिकारियों संदीप और राघवेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था उसके लिए कपिल सिब्बल पूछता है कि वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा कैसे हो सकता था। वो पकड़ा जाता तो सिब्बल उसी का वकील होता।
यही अतीक था और इसी की समाजवादी पार्टी थी जिसने कांग्रेस सरकार को 2008 में बचाया था। इसलिए यही विधवा विलाप कर रहे हैं सबसे ज्यादा अतीक की मौत पर और जंगल राज बता रहे हैं उत्तर प्रदेश में। लेकिन वे लोग अतीक और अशरफ की लाश नोंचने का काम कर रहे हैं। एक खूंखार अपराधी मारा जाए तो जंगल राज आ गया और यदि वही अपराधी लोगों का नरसंहार करे तो वह लोकतंत्र है।
सुना है अतीक कुछ सूचना दे गया है कि कैसे पाकिस्तान से उसके हथियार आया करते थे। पुलिस केवल बदनाम करने के लिए नहीं है, उसके हाथ बड़े लम्बे होते हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस पता लगाने में सक्षम है कि अतीक को हथियारों की तस्करी में कौन मदद करता था -अलबत्ता उत्तर प्रदेश की वर्तमान पुलिस पंजाब की पुलिस नहीं है जो एक महीने से अमृतपाल का ठिकाना नहीं पता कर सकी।

No comments:
Post a Comment