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दिल्ली : शाहीन बाग से हर महीने 15 लाख रूपए वसूलती थी शाइस्ता परवीन

                                                                                                                              साभार: न्यूज 18
अतीक अहमद की भगोड़ी बीवी शाइस्ता परवीन और बहन आयशा नूरी की तलाशी में उत्तर प्रदेश की पुलिस जगह-जगह छापेमारी कर रही है। पिछले दो दिन से यूपी पुलिस प्रयागराज के कछार क्षेत्र की खाक छान रही है। हालाँकि, शाइस्ता का अभी तक पता नहीं चला है। वहीं, पुलिस को जानकारी मिली है कि दिल्ली के शाहीन बाग से शाइस्ता रंगदारी वसूल करती थी।

अब बात जब शाहीन बाग की आयी है, आवाज़ दूर तक जाएगी। अब इस बात की जाँच होनी चाहिए कि CAA विरोध में जो रूपए, बिरयानी, फलों का नाश्ता आदि पर खर्चा कहाँ से आया? इसकी जाँच भी शायद बहुत बड़ा रहस्य खोल सकती है।  

उमेश पाल हत्याकांड की प्रमुख सूत्रधार बताई जा रही शाइस्ता परवीन की खोज के लिए पुलिस प्रयागराज और पड़ोसी कौशांबी जिलों के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर रही है। इन ठिकानों में शाइस्ता और अतीक के रिश्तेदारों के घरों सहित वो सभी संभावित ठिकाने शामिल हैं, जहाँ उसके छुपे होने की आशंका है।

19 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने कौशांबी में कई जगहों पर छापेमारी की। यहाँ तक कि शाइस्ता की खोज के लिए पुलिस ने ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि गंगा की तलहटी में कुछ अपराधी छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस ने करीब 2 घंटे तक ऑपरेशन चलाया।

50,000 रुपए की इनामी भगोड़ी शाइस्ता का पता लगाना मुश्किल होता जा रहा है। यूपी एसटीएफ के डीआईजी अनंत देव तिवारी ने कहा था कि बुर्का में होने के कारण उसे खोजने में पुलिस को परिशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खबर ये भी है कि शाइस्ता के साथ अतीक की बहन नूरी और दर्जन भर बुर्के वाली महिलाएँ साथ में चल रही हैं। शूटर साबिर भी उनके साथ साए की तरह लगा रहता है। वे लोग हर समय अपना लोकेशन बदल रहे हैं। कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि शाइस्ता रोजाना अपना फोन और नंबर बदल रही है, ताकि वह पुलिस की पकड़ से बची रहे।

उधर, अतीक को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाहीन बाग से हर महीने 15 लाख रुपए की वसूली की जाती थी। ये रकम अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन को पहुँचती थी।

पुलिस ने शाहिद को हिरासत में लिया था। उसने ही पुलिस को यह जानकारी दी है। इतना ही नहीं, शाहिद ने अतीक के बेटे असद का नया नंबर यूपी एसटीएफ को दिया था। इसके बाद सर्विलांस के जरिए UP STF झाँसी पहुँची थी। ये भी कहा जा रहा है कि असद को पनाह देने वालों ने ही पुलिस की हिरासत में आने के बाद असद के बारे में जानकारी दी थी।

बताते चलें कि यूपी एसटीएफ ने 13 अप्रैल 2023 को अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम को झाँसी में एक एनकाउंटर में मार गिराया था। जिस दिन कसारी-मसारी के कब्रिस्तान में असद को दफनाया गया, उसी दिन यानी 15 अप्रैल की रात को मेडिकल कराने के लिए ले जाते समय अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी।

क्या गुड्डू मुस्लिम ने करवाई अतीक-अशरफ की हत्या? मीडिया में भाटी से लेकर बिश्नोई गैंग कनेक्शन तक की बातें

प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद अब सुंदर भाटी गैंग भी चर्चा में है। हमला करने वाले तीन शूटरों में से एक सनी सिंह के इस गैंग से जुड़े होने की बात कही जा रही है। सनी पर पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज हैं। कहा जा रहा है कि अतीक की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्टल भाटी गैंग ने ही सनी को दी थी। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स इस हत्याकांड में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की भी मिलीभगत की तरफ इशारा कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अतीक अहमद और उसके भाई की हत्या में जिगाना पिस्टल का प्रयोग हुआ है। जिगाना पिस्टल तुर्की में बनती है। लगभग 6 लाख रुपए कीमत की यह पिस्टल भारत में बैन है। यह पिस्टल सुंदर भाटी गैंग द्वारा सनी सिंह को देने की आशंका जताई जा रही है। मूल रूप से हमीरपुर के रहने वाले सनी सिंह के सुंदर भाटी से सम्पर्क जेल में होने की बात कही जा रही है। जिगाना पिस्टल आरोपितों के पास कहाँ से आई इसका खुलासा फिलहाल अभी नहीं हो पाया है। पुलिस को अभी तक सुंदर भाटी और अतीक अहमद के बीच किसी पुरानी दुश्मनी का भी सुराग नहीं मिल पाया है। सुंदर भाटी फिलहाल सोनभद्र जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

लॉरेंस गैंग से भी कनेक्शन की आहट

वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अतीक और उसके भाई अशरफ को मारने वाले हथियार लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दिए थे। इस आशंका को बल इसलिए भी मिलता है क्योंकि इन्हीं हथियारों से सिद्धू मूसेवाला की भी हत्या हुई थी। इस मर्डर में बिश्नोई गैंग का नाम सामने आया था।

गुड्डू मुस्लिम भी करा सकता है अतीक की हत्या

एक रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया जा रहा है कि अतीक अहमद के बाद उसकी गैंग का मुखिया गुड्डू मुस्लिम बनना चाहता था। हालाँकि अतीक की पसंद उसका भाई अशरफ था। आशंका जताई जा रही है कि यह बात गुड्डू मुस्लिम को रास नहीं आई होगी और उसने अतीक और अशरफ की हत्या करवा दी होगी। फिलहाल इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बमबाज गुड्डू उमेश पाल की हत्या में वांटेड है और उसकी तलाश STF लगातार कर रही है। दूसरे यह कि अतीक ने जैसे ही गुड्डू का नाम लिया, वैसे ही ताबरतोड़ गोलियां चल गयीं। 

दोनों हाथों से गोलियाँ चलाता है सनी

तीनों शूटरों को अतीक और अशरफ की लोकेशन व मूवमेंट आदि की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिल रहीं थी। सनी के करीबियों ने बताया कि हत्या के 4 दिन पहले उसने कुछ बड़ा करने की बात कही थी। तब उसने कहा था कि जल्द ही पूरे प्रदेश में लोग उसे जान जाएँगे। सनी सिंह 90 के दशक के उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े डॉन रहे और बाद में UP STF के द्वारा मारे गए श्रीप्रकाश शुक्ला का फैन है। बताया जा रहा है कि वह दोनों हाथों से गोलियाँ चला लेता है। सनी के पड़ोसियों के मुताबिक वह अक्सर साइबर कैफे जाकर बड़े अपराधियों के फोटो प्रिंट करवाकर लाता था। कक्षा 8 पास सनी क्रूड बम भी बना लेता है। साल 2021 में वह चित्रकूट जेल में बंद था। फ़िलहाल पुलिस शूटरों से जुड़े तमाम नेटवर्क को खंगाल रही है।
योगी बाबा को पता था कि कोई सुप्रीम कोर्ट में सिर पटकेगा, इसलिए पहले ही अतीक और अशरफ की "हत्या" पर न्यायिक जांच बिठा दी। 
अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने घटना की न्यायिक जांच कराने के आदेश दे दिए थे क्योंकि उन्हें पता था कि कोई न कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट जाएगा और ऐसी ही जांच की मांग करेगा। 
योगी जी ने 3 सदस्यीय आयोग का गठन भी कर दिया जिसके अध्यक्ष होंगे इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार त्रिपाठी और पूर्व पुलिस महानिदेशक सुबेष कुमार सिंह एवं पूर्व न्यायाधीश ब्रजेश कुमार सोनी अन्य दो सदस्य होंगे। आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट 2 महीने में पूरी करके सरकार को देने के लिए कहा गया है। 
वकील विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर दी और अतीक अशरफ की ही नहीं, 2017 से अब तक हुए Encounters में 183 अपराधियों के मरने की भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज से जांच कराने की मांग की है। विशाल तिवारी का कहना है सजा देने का अधिकार पुलिस के पास होना लोकतंत्र के लिए खतरा है और ये अधिकार केवल न्यायपालिका के पास होना चाहिए। 
सवाल यह उठता है कि विशाल तिवारी इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने की बजाय सीधा सुप्रीम कोर्ट कैसे चले गए? क्या हाई कोर्ट में न्याय नहीं होता। तिवारी को पता था कि मुख्यमंत्री ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट गए जैसे वहां उसके "रिश्तेदार' बैठे हैं।  इस तरह की हरकतें विषय को राजनीतिक रंग देने का ही प्रयास है। वकील मित्र पता करें किस पार्टी से पोषित हैं तिवारी जी क्योंकि अक्सर ये उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाते हैं।
विशाल तिवारी की बात ठीक है कि सजा देने का अधिकार न्यायपालिका का है लेकिन जब माफिया लोगों पर अत्याचार करके, हत्याएं, लूट जमीने हड़प कर अपना अपना साम्राज्य स्थापित कर लेते हैं और पुलिस उनके खिलाफ कुछ करने में पंगु होती है, जज कुर्सी छोड़ कर भाग जाते हैं, तब किस कानून और न्यायपालिका पर भरोसा कर सकते हो।अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, शहाबुद्दीन, आज़म खान और जो दाऊद जैसे लोग भाग लिए क्या उन्हें अंजाम तक कानून से पहुंचा सकते हो। विशाल तिवारी जैसे वकील ही उनके मुक़दमे 20-20 साल तक लटका कर अपराध बढ़ाने में मददगार होते हैं।
जो असद उमेश पाल और उसके 2 सुरक्षा अधिकारियों संदीप और राघवेंद्र सिंह की हत्या में शामिल था उसके लिए कपिल सिब्बल पूछता है कि वह देश की सुरक्षा के लिए खतरा कैसे हो सकता था। वो पकड़ा जाता तो सिब्बल उसी का वकील होता।
यही अतीक था और इसी की समाजवादी पार्टी थी जिसने कांग्रेस सरकार को 2008 में बचाया था। इसलिए यही विधवा विलाप कर रहे हैं सबसे ज्यादा अतीक की मौत पर और जंगल राज बता रहे हैं उत्तर प्रदेश में। लेकिन वे लोग अतीक और अशरफ की लाश नोंचने का काम कर रहे हैं।  एक खूंखार अपराधी मारा जाए तो जंगल राज आ गया और यदि वही अपराधी लोगों का नरसंहार करे तो वह लोकतंत्र है। 
सुना है अतीक कुछ सूचना दे गया है कि कैसे पाकिस्तान से उसके हथियार आया करते थे।  पुलिस केवल बदनाम करने के लिए नहीं है, उसके हाथ बड़े लम्बे होते हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस पता लगाने में सक्षम है कि अतीक को हथियारों की तस्करी में कौन मदद करता था -अलबत्ता उत्तर प्रदेश की वर्तमान पुलिस पंजाब की पुलिस नहीं है जो एक महीने से अमृतपाल का ठिकाना नहीं पता कर सकी। 

उम्रकैद की सज़ा सुनते ही बेहोश हो गया अतीक अहमद: वकीलों ने लगाए ‘फाँसी दो, फाँसी दो’ के नारे

प्रयागराज जिले की MP-MLA कोर्ट ने उमेश पाल अपहरण के 28 फरवरी 2006 के केस में माफिया अतीक अहमद को 2 अन्य साथियों सहित उम्रकैद की सजा सुनाई है। हालाँकि इसी केस में आरोपित अतीक के छोटे भाई अशरफ को बरी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद उमेश पाल और अतीक अहमद दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में अपील करने का ऐलान किया। जहाँ उमेश पाल का परिवार अशरफ की रिहाई से नाखुश है तो वहीं अतीक के वकील ने इस सजा को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

कहा जा रहा है कि कोर्ट में अतीक अहमद की सजा मुकर्रर होते ही वो कोर्ट रूम में बेहोश हो गया और भाई से गले मिल रोया भी। जबकि प्रयागराज कोर्ट में उसके ही आगे वकीलों ने ‘फाँसी दो-फाँसी दो’ की नारेबाजी की।

दोनों पक्ष जाएँगे हाईकोर्ट

अतीक अहमद को मिली सजा पर उमेश पाल की माँ ने उसे फाँसी के लायक बताया। उन्होंने कहा कि कई साल तक फैसले का इंतजार करना पड़ा। उमेश पाल की माँ ने शांति देवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास जताया है। वहीं उमेश पाल की पत्नी जया देवी ने अशरफ को बरी किए जाने के फैसले को समाज के लिए नुकसानदेह बताया है। उन्होंने अपने वकील से बात कर के इस फैसले को हाईकोर्ट में चैलेन्ज देने की जानकारी दी। उमेश पाल के वकील ने भी हाईकोर्ट में सजा को चुनौती देने का एलान किया है। वकील ने कहा कि घटना में अशरफ की पिस्टल शामिल थी ऐसे में अशरफ को बरी करने को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

अतीक के वकील भी जाएँगे हाईकोर्ट

अतीक अहमद को मिली उम्रकैद की सजा पर उनके वकील दयाशंकर मिश्रा की भी प्रतिक्रिया सामने आई। दयाशंकर ने अतीक अहमद को मिली उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही। वकील दयाशंकर ने अपील को अधिकार बताया है। गौरतलब है कि 100 केसों में नामजद अतीक को पहली बार कोई सजा सुनाई गई है।

उमेश पाल के 8 गवाह अतीक के 51 गवाहों पर भारी पड़े

उमेश पाल के वकील ने बताया कि उनकी तरफ से 8 गवाहों ने कोर्ट में गवाही दी थी। वहीं अतीक अहमद ने अपने पक्ष में 51 गवाह पेश किए। हालाँकि अतीक के गवाहों में अधिकतर लोग आपराधिक प्रवित्ति के बताए जा रहे हैं। अंत में कोर्ट ने उमेश पाल के गवाहों को विश्वसनीय माना।
मिल रही जानकारी के मुताबिक फ़िलहाल अभी अतीक अहमद को प्रयागराज की नैनी जेल में ही रखा जाएगा। अब पुलिस उमेश पाल हत्याकांड में दर्ज हुए नए केस में उस से जल्द ही पूछताछ कर सकती है। इस बाबत पुलिस टीम अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ का रिमांड भी लेने की तैयारी कर रही है।