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साभार : X_ANI |
देश में नोटबंदी और अनुच्छेद 370 के समाप्त होने को आतंकवाद पर एक जीत माना जा रहा था, लेकिन थोड़े दिन बीतते नहीं, फिर आतंकी चले आते हैं, आखिर ये आतंकी कहाँ से आ रहे हैं? कौन इनको पनाह दे रहा है? जब तक भारत सरकार इजराइल की तरह इनके अड्डों को बर्बाद नहीं करेगी, उस स्थान की बिजली पानी बंद नहीं होगी, ये proxy war समाप्त नहीं होगी। सेना में जवान घुसपैठियों द्वारा मारे जाने के लिए नहीं जाता। इजराइल इस बात की परवाह नहीं कर रहा कि आतंकी हमास ने स्कूल, मदरसा या हॉस्पिटल में अपने अड्डे बनाये हैं, वहां हमला करने पर बेगुनाह भी मारे जाएंगे, बस मिशन अर्जुन की तरह मछली की आंख यानि आतंकवाद को समाप्त करना।
सेना के एक अधिकारी ने बताया, “ये हमला उस काफिले को निशाना बनाकर किया गया, जो थाना मंडी इलाके में जारी मुठभेड़ में री-इन्फोर्समेंट के लिए पहुँच रहा था। उस इलाके में कल (20 दिसंबर 2023) शाम से ही मुठभेड़ चल रही थी। वहाँ जाते वक्त आतंकियों ने दोनों वाहनों को निशाना बनाया। इस हमले में तीन जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं।”
#WATCH | J&K: Three Army personnel lost their lives while three others were injured in a terrorist attack on two military vehicles in the Thanamandi area in the Rajouri sector. Indian Army troops also immediately retaliated after being attacked by terrorists. The troops were… pic.twitter.com/JUmV5flvdy
— ANI (@ANI) December 21, 2023
रोजाना हमारे जवान शहीद हो रहे हैं यह जंग नहीं तो और क्या है? पाकिस्तान केवल प्रॉक्सी वार ही कर सकता है बजाय आमने-सामने की लड़ाई के।
— kumar Gautam (@kumargautam_KGS) December 21, 2023
दो गाड़ियों में ये जा रहे इन जवानों पर घात लगाकर बैठे आतंकियों ने अंधाधुन फायरिंग शुरू कर दी। इन जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की, जिनमें तीन जवान बलिदान हो गए। दरअसल, पिछले कुछ समय से आतंकी जम्मू-कश्मीर में शांति और कानून व्यवस्था को बिगाड़ने में लगे हुए हैं। हालाँकि, सुरक्षाबल उनके नापाक मंंसूबों को हर बार नाकामयाब करती रही है। इस दौरान कई कुख्यात आतंकी भी मार गिराए गए।
बीते नवंबर माह में राजौरी के कालाकोट जंगलों में चल रही मुठभेड़ में 23 नवंबर 2023 को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इनमें से एक लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर कारी था। वो कम से कम पाँच हत्याओं में शामिल रहा था। जानकारी के मुताबिक, दोनों आतंकियों को जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में फिर से आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भेजा गया था।
मारे गए दोनों आतंकी आईईडी बनाने में और उसे चलाने में माहिर थे। इसके अलावा दोनों ही एक्सपर्ट स्नाइपर भी थे। इन दोनों ने गुफाओं में छिपने में भी महारत हासिल की थी। इन दोनों आतंकियों के खिलाफ चलाए गए उस ऑपरेशन में सेना के अधिकारी समेत 4 जवानों को वीरगति प्राप्त हुई थी।
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