INDI गठबंधन की हुई चौथी बैठक के बाद जनता यूनाइटिड दल के अध्यक्ष नाराज हैं। वहीं उनके एक सांसद ‘सुनील कुमार पिंटू’ ने विपक्षी बैठक को ‘बेनतीजा’ और ‘फ्लाप’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक पर विपक्षी दलों की दृष्टि थी क्योंकि उन्हें लगा कि कोई मजबूत निर्णय निकलकर आएगा। लेकिन कल भी मीटिंग टांय-टांय फिस्स हो गई।
उन्होंने बताया पहले तो मीटिंग्स में चाय समोसे चलते थे पर अभी कांग्रेस ने खुद कह रखा है कि फंड की कमी है। लोग उन्हें डोनेट करें। जेडीयू सांसद ने कहा कि कल की मीटिंग तो बस चाय बिस्कुट पर रह हई समोसे भी नहीं आ पाए।
JDU सांसद सुनील कुमार पिंटू का बड़ा बयान। I.N.D.I. अलायंस की बैठक को बताया टांय-टांय फिस्स। pic.twitter.com/saHVMze4bJ
— News18 Bihar (@News18Bihar) December 20, 2023
फंड की कमी का रोना दिखावा है।अगर फंड की कमी थी तो इंडी गठबंधन की मीटिंग 5 स्टार होटल के बजाय किसी माननीय के आलीशान सरकारी आवास में भी हो सकती थी।कांग्रेस और भ्रष्ट परिवारवादियों की हमेशा से दोगली नीति और नीयत रही है।
— Madan Singh (@mdnkshr) December 20, 2023
सीतामढ़ी से जदयू के सांसद सुनील कुमार पिंटू इससे पहले भी इंडी की बैठक के बारे में बोल चुके हैं कि वहाँ सिर्फ चाय समोसा पार्टी होती है। इसके अलावा उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी तारीफ की थी। तीन राज्यों में मिली भाजपा की जीत पर कहा था ‘मोदी है तो गारंटी है’ के नारे पर जनता ने मुहर लगाई है। वह नेहरू पर भी निशाना साध चुके हैं।
उनके इन्हीं बयानों से खफा नाराज होकर जदयू ने उनसे उनका इस्तीफा माँग लिया था। जदयू ने उनसे नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्होंने पार्टी के नाम पर वोट लिया और अब पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स बता रही हैं कि जदयू अगली बार सीतामढ़ से देवेश चंद्र ठाकुर को चुनाव लड़ा सकती हैं।
जदयू सांसद के बयान के अलावा यदि देखें तो इंडी गठबंधन की बैठक से नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव भी नजर आ रहे हैं। जदयू ने 29 दिसंबर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (99 सदस्य) और राष्ट्रीय परिषद (200 सदस्य) की बैठक बुलाई है।
दरअसल, इंडी की बैठक को लेकर बताया गया है कि कल जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम बढ़ाया गया तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव नाराज होकर बैठक से जल्दी निकल गए।
खड़गे के नाम को विपक्षी गठबंधन की बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आगे बढ़ाया था। जबकि इससे पहले लालू यादव ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार का नाम इस पद के लिए आगे बढ़ाने पर समर्थन दिया था। लेकिन विपक्ष की बैठक में इस नाम पर सहमित नहीं बनी। अपना नाम आगे होने पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर कोई भी फैसला चुनाव के बाद किया जाएगा।
जबकि हकीकत यह है कि गठबंधन में शामिल कोई भी पार्टी कांग्रेस को प्रधानमंत्री पद पर नहीं चाहता। यदि कांग्रेस के किसी भी नेता को प्रधानमंत्री मनोनीत किया जाने पर हार निश्चित है। दूसरे, खड़के को प्रधानमंत्री मनोनीत करने का मतलब अप्रत्यक्ष रूप से गाँधी परिवार का सत्ता में हस्तक्षेप, जो किसी को बर्दाश्त नहीं।
अब जेडीयू की बैठक में पार्टी ने राष्ट्रीय पदाधिकारियों, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों, दोनों सदनों के सांसदों, जिलाध्यक्षों और समिति के सदस्यों को शामिल होने के लिए कहा है। पार्टी अध्यक्ष नीतीश कुमार के हाव-भाव देख मीडिया में कयास लगने लगे हैं कि शायद वो इन बैठकों में चौंकाने वाले निर्णय लें।

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