गिरफ़्तारी वैध थी केजरीवाल की, फिर भी CBI के खिलाफ विधवा विलाप क्यों किया?

सुभाष चन्द्र

सिसोदिया/कविता/विजय नायर के बाद केजरीवाल को बेल मिलना एक Foregone Conclusion लेकिन जिस तरह जमानत दी गई है उससे सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट को निरर्थक बता दिया

किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार करने में कोई बाधा नहीं है जो पहले से ही किसी अन्य मामले में जेल में हो इसलिए CrPc की धारा 41A(3) का उल्लंघन नहीं हुआ, इसलिए गिरफ़्तारी वैध है, जस्टिस भुईया ने भी वैध कही लेकिन CBI पर बरस पड़े

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जस्टिस भुईया ने कहा कि उन्हें उस शर्तों पर आपत्ति है जो केजरीवाल को ऑफिस जाने और फाइलों पर साइन करने से रोकती है। लेकिन मैं न्यायिक संयम के कारण टिप्पणी नहीं कर रहा हूं क्योंकि वह ED के अलग मामले में था

इसका मतलब यह निकाला जा सकता है कि CBI के मामले में बेल देते हुए जस्टिस भुईया वो शर्तें नहीं लगाना चाहते थे और शायद  यह मतभेद था जिसके कारण फैसला 10 सितंबर की जगह 4 दिन बाद दिया गया जस्टिस सूर्यकांत से शायद वे इसलिए भी मतभेद रखते थे कि वे गिरफ़्तारी पर CBI के खिलाफ बोलना चाहते लेकिन जैसा जस्टिस सूर्यकांत ने नहीं

इसलिए जस्टिस भुईया ने जोर दिया कि वे CBI पर जरूर प्रहार करेंगे, तब ही फैसला सुनाया गया और उन्होंने ही सुनाया

जस्टिस भुइयां ने CBI ने 22 महीने तक गिरफ़्तारी नहीं की और lower court से ED के केस में बेल मिलने के बाद ही गिरफ्तार किया गया

लेकिन जस्टिस भुईया भूल गए कि CBI को गिरफ़्तारी की अनुमति lower court ने दी थी और अगर गिरफ्तार करना गलत होता तो वह अनुमति नहीं देता इसलिए CBI को दोष  देना था तो गिरफ़्तारी को वैध न कहते 

जस्टिस भुईया ने कहा Not long ago, this court castigated the CBI comparing to a CAGED PARROT. It is imperative that CBI dispel the notion of it being a Caged Parrot rather the perception should be of an "Uncaged Parrot".

CBI को मीलॉर्ड आपने 2013 UPA शासन में पिंजरे का तोता कहा था जब उसके खिलाफ सरकार के दखल से  मंत्रियों को बचाने के आरोप को सही माना था

लेकिन आप से यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि ऐसा आरोप मोदी के कार्यकाल में CBI पर क्यों नहीं लगा और आपने मौका ढूंढ लिया केजरीवाल की गिरफ़्तारी में जस्टिस भुईया ने एक tipical कांग्रेस के नेता की तरह सम्भाषण किया विपक्ष के आरोप को धार देने के लिए कि मोदी ने CBI/ED पर कब्ज़ा किया हुआ है और उनका दुरूपयोग किया जा रहा है

अब जस्टिस भुईया ने फिर से CBI को “पिजरे के तोता” की छवि से बाहर निकलने के लिए कह कर कांग्रेस की Corrupt सरकार और मोदी सरकार को बराबरी पर ला दिया जैसे विपक्ष के निशाने पर मोदी रहता है, जस्टिस भुईया का भी लक्ष्य मोदी ही थे 

जिस CBI का success rate 2022 में 74% था और पिछले वर्ष भी 71% था, उसके लिए मुझे याद नहीं  सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज ने कभी एक बार भी गलती से CBI की तारीफ की हो और कोई बेंच ऐसी नहीं होगी जिसने मौका मिलते ही CBI की फटकार न लगाईं हो 

केजरीवाल पर संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने केस बड़ी बेंच को भेजते हुए 12 जुलाई को जो शर्तें ED के केस में लगाई थी, वो CBI के केस में भी लगाई गई है लेकिन वह बड़ी बेंच आज तक नहीं गठित हुई है

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस भुइया का केजरीवाल की गिरफ़्तारी को “वैध” कहना साबित करता है कि जस्टिस भुइया ने CBI के खिलाफ विधवा विलाप कर भंडास निकाली मोदी के खिलाफ थी और विपक्ष को हथियार दिया मोदी पर हमला करने के लिए

Milord just peep out of the windows of your chambers and see and hear what people talk and think about you.

आप CBI को कह रहे हैं कि Caged Parrot की छवि से बाहर निकले लेकिन यह काम आपको करना है कि आप सुप्रीम कोर्ट के Judges कांग्रेस भक्त और मोदी विरोधी होने की छवि से बाहर निकलें!

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