कांग्रेस ने अपनी आदत के अनुसार महाराष्ट्र चुनाव में चुनाव आयोग पर घिसे पिटे आरोप लगाए जिनका जवाब आयोग ने दिया और आज शाम 5 बजे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाया है।
मुंबई कांग्रेस नेता भाई जगताप महायुति की प्रचंड जीत और कांग्रेस की शर्मनाक हार से इतना बौखला गए उन्होंने कांग्रेस का उच्च कोटि का गालीबाज बनकर चुनाव आयोग के खिलाफ भड़ांस निकालते हुए उसकी तुलना कुत्ते से कर दी।
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लेखक चर्चित YouTuber |
“चुनाव आयोग एक कुत्ते की तरह है जो नरेंद्र मोदी के बंगले के बाहर बैठ कर काम कर रहा है”। हर तरफ उसके बयान की निंदा होने के बाद भी जगताप ने माफ़ी मांगने से मना कर दिया और कहा कि “यदि आयोग दबाव में काम कर रहा है तो जो मैंने कहा वह सही है”।
कांग्रेस तो पहले से गाली बाजों की टोली है और इसलिए उसके किसी नेता ने जगताप के विरोध में एक शब्द भी नहीं कहा। किसी ने उसके बयान की निंदा नहीं की और न कांग्रेस ने अपने को उसके बयान से अलग किया।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि मतदान के दिन 5 बजे और रात 11 बजे के आंकड़े में भारी अंतर था। आयोग ने कहा कि वोटिंग प्रतिशत की एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है और जैसे जैसे मतदान के आंकड़े आते हैं, वैसे ही उन्हें पूर्व के आंकड़ों में जोड़ दिया जाता है।
सत्य यह है कि चुनाव समाप्त होने के समय जो भी लाइन में खड़ा होता है, उसको वोट डालने दिया जाता है और इसलिए भी 5 बजे और 11 बजे के आंकड़ों में अंतर हो सकता है। साथ में यह भी सत्य है कि हर पोलिंग बूथ पर सभी दलों के प्रतिनिधि बैठे होते हैं। कुछ गलत हो रहा था तो उसकी शिकायत तब ही की जानी चाहिए थी।
कांग्रेस की एक शिकायत मतदाता सूची को लेकर थी जिसके जवाब में आयोग ने सही कहा कि मतदाता सूचियां सभी दलों को उपलब्ध करा दी जाती हैं। कोई भी उस पर आपत्ति दर्ज करा सकता है।
आज सुप्रीम कोर्ट में भी किसी की दायर याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें शिकायत थी कि चुनाव आयोग ने प्रति बूथ मतदाता 1200 से 1500 कैसे कर दिए। कोर्ट ने आयोग तो नोटिस तो जारी नहीं किया लेकिन उसे जवाब दाखिल करने को कहा। वैसे यह बात सामने आई है कोर्ट में कि मतदाताओं की यह संख्या 1200, वर्ष 1957 से 2016 तक चलती रही थी और अब उसमे बढ़ोतरी होना भी स्वाभाविक है।
कल चुनाव आयोग ने कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को शाम 5 बजे बुलाया है जिससे उनकी शंकाओं का निवारण किया जा सके। अब पता नहीं कांग्रेस के कौन कौन खलीफा जाएंगे आयोग को मिलने लेकिन आयोग से मेरा अनुरोध है कि कुछ भी चर्चा शुरू करने से पहले कांग्रेस के नेताओं से पूछे -”आप किसे मिलने आए हैं, चुनाव आयुक्त को या कुत्तों को”? आपके पार्टी का नेता हमें “मोदी का पालतू कुत्ता” कहता है और आपकी पार्टी के सभी नेता खामोश रहते हैं। फिर हमारे साथ मुलाकात का क्या मतलब है।
यह बात चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट में भी रखनी चाहिए कि कांग्रेस एक संवैधानिक संस्था को ऐसे अपशब्द बोलकर बदनाम करती है -
कांग्रेस एक ही ढपली गले में बांध रखी है कि और उसे ही बजाती रहती है कि EVM बंद करो और बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएं - यह ढपली बजाते बजाते पागल हो गए हैं कांग्रेसी, ऐसा ही लगता है -
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