निशिकांत दुबे ने रहस्योघाटन कर विपक्ष, कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट की रातों की नींद ही हराम कर दी है। बिना लॉ की डिग्री के बिना सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाना तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जजों और सरकार ने न्यायपालिका का मजाक बना दिया था।
न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका को लेकर जारी बहस के बीच बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक और बड़ा खुलासा किया है। कांग्रेस राज के काले कारनामे को सामने लाते हुए उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू जी ने क़ानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी।’
कांग्रेस के संविधान बचाओ की एक मजेदार कहानी,असम में बहरुल इस्लाम साहिब ने कांग्रेस की सदस्यता 1951 में ली,तुष्टिकरण के नाम पर कांग्रेस ने उन्हें 1962 में राज्यसभा का सदस्य बना दिया,छह साल बाद दुबारा 1968 में राज्य सभा का सदस्य सेवाभाव के लिए बनाया,इनसे बड़ा चमचा कॉग्रेस को नज़र…
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) April 22, 2025
इसके साथ ही बीजेनी नेता दुबे कांग्रेस काल के एक और काले कारनामे का खुलासा करते हुए लिखा कि ‘कांग्रेस के संविधान बचाओ की एक मजेदार कहानी,असम में बहरुल इस्लाम साहिब ने कांग्रेस की सदस्यता 1951 में ली,तुष्टिकरण के नाम पर कांग्रेस ने उन्हें 1962 में राज्यसभा का सदस्य बना दिया,छह साल बाद दुबारा 1968 में राज्य सभा का सदस्य सेवाभाव के लिए बनाया,इनसे बड़ा चमचा कॉग्रेस को नज़र नहीं आया राज्यसभा से बिना इस्तीफ़ा दिलाए हाईकोर्ट का जज 1972 में बना दिया,फिर 1979 में असम हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बना दिया,बेचारे 1980 में रिटायर हो गए,लेकिन यह तो कांग्रेस है जनवरी 1980 में रिटायर हुए जज को दिसंबर 1980 में सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया,1977 में इंदिरा गांधी जी के उपर लगे सभी भ्रष्टाचार के केस इन्होंने तन्मयता से ख़त्म कर दिए ,फिर ख़ुश होकर कांग्रेस ने इन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर कर कॉग्रेस से राज्यसभा का तीबारा सदस्य 1983 में ही बना दिया ।मैं कुछ नहीं बोलूँगा?’
क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू जी ने क़ानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी ।
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) April 21, 2025
निशिकांत दुबे की ओर से किए गए खुलासे के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में ये खबर सुर्खियों में है। वकालत की डिग्री ना होते हुए भी सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठाए जाने को लेकर लोग सवाल कर रहे हैं कि जब वांचू ने कानून की पढ़ाई नहीं की, तब उन्हें उच्च न्यायिक पदों पर कैसे नियुक्त किया गया। खुलासे के बाद संविधान बचाओ का नारा लगाने वाले कांग्रेसी नेता निशाने पर आ गए हैं। लोग सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर तंज कस रहे हैं। आप भी देखिए सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है…
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक न्यायधीश ऐसे भी थे कैलाश नाथ वांचू जिनके पास लॉ की डिग्री तक नहीं थी... 😵💫
— Bhaskar Mishra (@Bhaskar_m11) April 19, 2025
जी हाँ! साल 1967 जब देश के राष्ट्रपति चुनाव में जीत की घोषणा जामा मस्जिद से हुई, तो दूसरी ओर बिना लॉ की डिग्री वाले व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट का CJI बना दिया :-
साल था… pic.twitter.com/5lKHY6eila
क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू जी ने क़ानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी ।
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) April 21, 2025
जो कांग्रेस आज लोकतंत्र और संविधान की बड़ी बड़ी बातें कर रही है जरा उनके काले कारनामे में भी देख लो...!!
— अजय प्रताप सिंह (Ajay) (@iAjaySengar) April 20, 2025
जब देश के राष्ट्रपति चुनाव में जीत की घोषणा जामा मस्जिद से हुई, तो दूसरी ओर बिना लॉ की डिग्री वाले व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट का सीजेआई बना दिया।
साल था 1967 यह साल राजनीतिक… pic.twitter.com/mb0y3V9d6x
बात जब उठी हैं तो दूर तक जाएगी जब तक पूरे विश्व में किरकिरी नहीं हो जाती ??
— ऋषि राज शंकर (सनातनी)🇮🇳 (@Principalrashtr) April 21, 2025
क्या आप जानते हैं कि भारत में #सुप्रीम_कोर्ट के एक कैलाश नाथ वांचू नाम से ऐसे #मुख्य_न्यायाधीश भी अप्वाइंट हुए थे जिनके पास लॉ की डिग्री तक नहीं थी ??
चलिए #इंदिरा #कांग्रेस का काला कारनामा पढ़िए ??
👇 pic.twitter.com/cFdRGH8ChD
लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में प्रत्येक संस्था की जवाबदेही निश्चित होती है!
— Adv Sunil Sharma (@AdvSunilSharma_) April 22, 2025
लेकिन भारतीय न्यायिक व्यवस्था को हर प्रकार की जवाबदेही से परे रखना, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए बहुत घातक है! pic.twitter.com/oe92YapMtS
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