चीफ जस्टिस गवई रिटायर होने से पहले क्यों खुद को बेनकाब कर रहे हो? क्या कभी “झुग्गियों” में रहे हैं आप ?

सुभाष चन्द्र

परसों(17 सितम्बर) भगवान विष्णु पर बेहूदा टिप्पणी करके मजाक का पात्र बनने के बाद चीफ जस्टिस गवई ने सफाई देते हुए कहा है कि “मेरी बात को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत कुछ लिखा जा रहा है, मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत ढंग से पेश किया जा रहा है, मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं”। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों के जड़खरीद गुलाम कपिल सिब्बल ने कहा है कि सोशल मीडिया बेलगाम घोड़ा बन गया है जबकि उसी सोशल मीडिया के सहारे उसका नेता राहुल गांधी देश में तख्ता पलट करने की बात कर रहा है। 

सोशल मीडिया में गवई साहेब के बयान पर चर्चा न होती तो आपको सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ती, केवल कहने से बात नहीं बनती कि आप सभी धर्मों का सम्मान करते हैं आप स्वयं सुप्रीम कोर्ट में कह चुके हैं कि आप एक कांग्रेस परिवार से आते हैं और इसलिए ही आपने राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी क्या साधारण मानस इन बातो को नहीं समझता? 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
कांग्रेस का DNA आपको सभी धर्मों का सम्मान करने से रोकता है क्योंकि कांग्रेस खुल कर सनातन धर्म को समाप्त करने वालों के साथ खड़ी है और आपका कोर्ट ऐसे नेताओं पर कोई रोक नहीं लगाता बल्कि उन्हें सनातन धर्म का अपमान करने पर और सनातन धर्म के लिए घ्रणित बयानों के लिए गिरफ्तार भी नहीं होने देता इसलिए भगवान विष्णु का अपमान करना आपके लिए कोई विचित्र बात नहीं है

वैसे भी आप धर्म से एक “बौद्ध” हैं और “बौद्ध” धर्म में पहली प्रतिज्ञा यही होती है कि “मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को न मानूंगा और उनकी पूजा करूँगा” तो फिर क्या बचा विष्णु भगवान के अपमान करने में और इसलिए स्वयं मान लीजिए कि वो अपमान आपने जानबूझकर किया, आपको तो कोई कुछ नहीं कह सकता क्योंकि आप तो “भगवान” की सत्ता से भी बड़ी सत्ता पर बैठे हैं 

एक बात आपने मीडिया में और कही है कि “बाबा साहेब की बदौलत मैंने झुग्गियों से कोर्ट तक का सफर तय किया”। यह सरासर आपने झूठ बोला है क्योंकि आप कभी झुग्गियों में नहीं रहे जिसके सबूत  आपके पिता की पृष्ठभूमि से मिलते हैं

चीफ जस्टिस गवई के पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई थे (30 October 1929 – 25 July 2015) - He was an Ambedkarite and Buddhist.[3][4] An agriculturist by profession and an avid wrestler, Gavai was from the state of Maharashtra. From 1964 to 1994, he was a member of the Maharashtra Legislative Council; during that time, he was Deputy Chairman of the Legislative Council from 1968 to 1978, chairman from 1978 to 1984, and twice Leader of the Opposition of the Legislative Council from 1986 to 1988 and from 1990 to 1991”

चीफ जस्टिस गवई का जन्म 1960 में हुआ और 1964 से 1994 तक उनके पिता महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य थे जाहिर है 1964 से पहले उनके पिता रसूकदार रहे होंगे तब ही तो वे विधान परिषद के सदस्य बने और जब 1960 में बी आर गवई का जन्म हुआ, तब उनके पिता झुग्गियों में तो नहीं रहते होंगे तो फिर आप कैसे दावा कर सकते हैं कि आप झुग्गियों में रहे

जनाब गवई साहेब बोलने से पहले सोच लेना चाहिए आज सोशल मीडिया में सब कुछ उपलब्ध है और कुछ भी गलत बोला हुआ पकड़ा जाता है यह सब सूचना जो मैंने दी है वो आपके पिताश्री की wikipedia से लेकर दी है और इसमें कुछ गलत हो तो बता दीजिये अब यह मत कहना कि आपकी बात का मतलब कुछ और था और निकाला गया कुछ और 

मैं तो बस इतना जानता हूं भगवान का अपमान बड़ा महंगा पड़ सकता है भगवान अपना अपमान भूलते नहीं और न दंड देना भूलते अब आप प्रतीक्षा कीजिए अभी सुना है एक दुष्कर्म आपकी अदालत और करने जा रही है कि जिन राज्य सरकारों ने धर्मान्तरण रोकने के लिए कानून बनाए हैं, आप उन पर रोक लगाने की सोच रहे हैं कुछ वामपंथी वकील कोर्ट की बुद्धि  भ्रष्ट कर हिंदुओं का  दमन कर देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट को भागीदार नहीं होना चाहिए

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