राहुल गाँधी कोई LoP नहीं बल्कि एक ऐसा बिगड़ा आदमी है जो कभी सुधर नहीं सकता। Toolkit के इशारों पर नाचने वाले क्या मालूम राजनीति क्या होती है, वो बस सियासत करना जानता है और जैसा उसके आका कहने और करने का आदेश देते हैं।
लोकसभा में अमित शाह का कथित चुनाव सुधार के नाम पर हुई बहस का जवाब कल फिर सुना जिससे स्पष्ट हुआ कि उन्होंने “सीधी बात” बोल कर राहुल गांधी की “बकवास” बंद कर दी।
एक बात कही जाती है -
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| लेखक चर्चित YouTuber |
तिरी रहबरी का सवाल है हमें रहजनों से ग़रज़ नहीं”
यह राहुल गांधी पर फिट बैठती है। एक के बाद एक आरोप लगाते रहे लेकिन यह नहीं बताया कभी कि कांग्रेस का काफिला ऐसा क्यों लुटा है कि 1984 के बाद कभी बहुमत नहीं मिला। यह वोट चोरी का रोना तो अब शुरू किया है, इसके पहले क्या हुआ।
अमित शाह ने राहुल गांधी की हर बात का उत्तर दिया। उसने 3 प्रश्न किए थे ➖
चीफ जस्टिस को CEC के चयन से बाहर क्यों किया गया।
CEC को immunity क्यों दी गई और
CCTV का रिकॉर्ड 45 दिन के बाद क्यों नष्ट कर दिया जाता है।
ये बातें उसने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पूछी थी और अमित शाह को चुनौती दे रहा था कि वो उसकी तीनो प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही बातों पर बहस करें। अमित शाह हर बात का जवाब दे रहे हैं लेकिन सुनना ही नहीं चाहते। जबकि किसी विषय पर बहस चाहते हो तो स्पीकर को नोटिस देकर मांग कर सकते हो कि इस पर बहस होनी चाहिए। जो बहस चल रही है उस बहस में नई बहस नहीं हो सकती।
राहुल गांधी बात कर रहा था हरियाणा और मध्य प्रदेश चुनाव की लेकिन क्या किसी भी हारे हुए कांग्रेस उम्मीदवार ने चुनाव रिजल्ट आने के बाद 45 दिन में चुनाव याचिका दायर की थी? नहीं की, तो फिर CCTV रखने का क्या मतलब है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जब तक कानून न बने, तब तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए चीफ जस्टिस की अध्यक्षता की कमेटी निर्णय करेगी। लेकिन जब कानून बन गया तो चीफ जस्टिस नई कमेटी में नहीं थे। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई लेकिन याचिका खारिज हो गई।
शाह ने उसे यह भी बताया कि चुनाव आयुक्त को Immunity 1951 के कानून से लागू है जबकि इंदिरा गांधी ने तो खुद अपने को immunity दे दी थी।
लेकिन वो राहुल गांधी तो शहजादा है। उसने कहा अमित शाह का ये completely defensive है घबराया हुआ है डरा हुआ response है सच्चा response नहीं है।
अमित शाह ने फिर सही रगड़ा दिया कि मुझे किस क्रम में बोलना है ये मैं खुद तय करूंगा, आप मुझे निर्देश देने का अधिकार नहीं रखते। लेकिन अब कोई “समझदारी का इंजेक्शन तो नहीं लगाया जा सकता”।
मजे की बात है कि जब अमित शाह ने अपने भाषण के करीब अंत में कहा कि “मूल मुद्दा है अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची में रखने का” तो बस इस पर सारे विपक्ष ने शोर मचा दिया और भाग गए जैसे खुद अपने “घुसपैठिए” होने का प्रमाण दे रहे हों।
अमित शाह और गरजे कि ये 200 बार भी बहिष्कार करेंगे तब भी हम घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट करेंगे। जब मैंने नेहरू, इंदिरा, राजीव और सोनिया पर आरोप लगाए तब बहिष्कार करते तो समझ आता लेकिन ये घुसपैठियों के लिए बोलने पर बहिष्कार कर गए।
2216 किलोमीटर में से 1653 किलोमीटर की सीमा में बाढ़ लग गई है और जो 600 KM बची है वो बंगाल में है जो ममता नहीं करने दे रही।
राहुल गांधी आरोप लगा रहे हैं कि महत्वपूर्ण पद पर RSS की विचारधारा वाले नियुक्त हो रहे है। शाह ने पूछा कि क्या किसी कानून में लिखा है कि RSS की विचारधारा के लोग किसी पद पर नियुक्त नहीं हो सकते। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी तो RSS की विचारधारा वाले है और जनता से चुनकर आये हैं, किसी की कृपा से नहीं। इंदिरा गांधी ने तो वी वी गिरि के राष्ट्रपति के चुनाव के बाद वामपंथियों को हर संस्था में बिठा दिया। देश के लिए मरना ही RSS की विचारधारा है देश को उन्नति के शिखर पर ले जाना ही RSS की विचारधारा है।

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