इस बिल को मैंने जानबूझकर विधायक लिखा है क्योंकि प्रियंका वाड्रा ने लोकसभा में विधेयक को विधायक कहा था। कांग्रेस और विपक्ष के अन्य नेता आंख बंद कर चीखते रहे। हाय हाय मोदी ने गांधी को भुला दिया।
डी के शिवकुमार कह रहा है कि अगर “बीजेपी में हिम्मत है तो वे रुपए के नोटों से गांधी जी की तस्वीर हटा कर दिखाएं”। कांग्रेस तो वैसे ही विधवा विलाप कर रही है कि मोदी सरकार को गांधी से नफरत है। CPI MP John Brittas कह रहे है कि राम के नाम पर ये फिर से गांधी की हत्या कर रहे है। और कांग्रेस के समय में यह स्कीम NREGA (National Rural Employment Guarantee Act) के नाम से 2005 में शुरू की गई जिसमें 100 दिन का रोजगार “Unskilled Workers” को देने का प्रावधान था। आज गांधी गांधी चिल्लाने वाली कांग्रेस ने तब इसका नाम गांधी जी के नाम पर नहीं रखा। ये NREGA के पहले महात्मा लगाया गया 2 अक्टूबर, 2009 से।
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विपक्ष ने मनरेगा और G RAM G दोनों में फर्क पर ध्यान नहीं दिया, बस एक गांधी के नाम पर सारा विरोध केंद्रित कर दिया। कांग्रेस के 8 साल के समय और मोदी के 11 साल के समय में मनरेगा का मुख्य अंतर देखते हैं -
-कांग्रेस काल : कुल प्रोजेक्ट - 153
-मोदी काल : कुल प्रोजेक्ट - 862
-कांग्रेस काल : बजट - 2 लाख 13 हजार करोड़
-मोदी काल : बजट - 8 लाख 54 हजार करोड़
-कांग्रेस काल : कुल श्रम दिवस - 1660
-मोदी काल : कुल श्रम दिवस - 3210
-कांग्रेस समय : रोजगार की गारंटी - 100 दिन / मजदूरी का भुगतान : 15 दिन में
नई योजना में : रोजगार की गारंटी -125 दिन / मजदूरी का भुगतान : हर हफ्ते
कांग्रेस की मनरेगा में पूरा खर्च केंद्र सरकार वहां करती थी जबकि G RAM G में राज्यों को 10 से 40% खर्च वहन करना होगा। मनरेगा में कोई सीज़नल ब्रेक नहीं था जबकि G RAM G में बुवाई। कटाई सीजन में 60 दिनों का ब्रेक है।
कांग्रेस ने जब योजना शुरू की तब 2.1 करोड़ लोगों को रोजगार दिया गया था और 2014 में कांग्रेस के विदा होने के समय 4.66 करोड़ लोग रोजगार में थे जबकि मोदी के समय में 2025 में यह संख्या बढ़ कर 15.99 करोड़ हो गई है। जिसका मतलब साफ़ है कांग्रेस से कहीं बेहतर तरीके से योजना को मोदी के समय में चलाया गया।
राहुल गांधी क्या ऐसा ही रोजगार देने की मांग करता है जो रोज रोज नारा लगाती है कांग्रेस कि रोजगार नहीं है लोगों के पास और महगांई बढ़ रही है जबकि महगाई भी नेगेटिव चल रही है। Unemployement Index 4.7% पर है।
समस्या विपक्ष को RAM के नाम है। लेकिन ये विधेयक संसद से पारित हो गया।
प्रियंका वाड्रा को तकलीफ थी कि “विधायक” संसद में पेश होता है और बिना किसी चर्चा के पास हो जाता है। अब अगर विपक्ष संसद की कार्यवाही को ठप करता रहेगा तो ऐसे ही बिल पारित होंगे।
कांग्रेस ने तो हर हाल अपनी रैलियों में “मोदी तेरी कब्र खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी” के नारे लगाएगी।
जब मोदी 2014 में सत्ता में आए तो उन्होंने कहा था “मैं मनरेगा को बंद नहीं करूंगा क्योंकि ये कांग्रेस की असफलताओं का “जीवंत स्मारक” है लेकिन फिर भी मोदी ने मनरेगा के काम को बढ़ाया और मजदूरों को उनकी मजदूरी बिना किसी बिचौलिए के सीधी उनके खातों में भेजी।

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