ईरान विद्रोह में 500+ की मौत और 10,000 गिरफ्तार; मस्जिदों पर हमले

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात लगातार ज्यादा हिंसक होते जा रहे हैं। अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, देशभर में अब तक कम से कम 538 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षा बलों के जवान शामिल बताए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि अब तक 10,670 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ईरान में विद्रोह की आग बुर्का/हिजाब को लेकर शुरू होकर तख्ता पलट तक पहुँच गयी है। भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी बुर्का/हिजाब को लेकर उपद्रव करते हैं जबकि मुस्लिम देशों में महिलाएं इसका विरोध कर रही है। जबकि कुछ देश तो इसे बैन तक कर दिया गया है। ऐसे में सवाल होता है कि भारत और दूसरे देशों चाहे मुस्लिम देश ही क्यों न हो, इस्लाम में फर्क है।   

राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों से हिंसक झड़पों की खबरें सामने आ रही हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कई इलाकों में गोलियों का इस्तेमाल किया। बीबीसी द्वारा तेहरान के पास एक मुर्दाघर के फुटेज के विश्लेषण में करीब 180 शवों की गिनती की गई है जिससे हालात की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई इलाकों में सड़कों पर खून बिखरा पड़ा है और शवों को ट्रकों में भरकर ले जाया जा रहा है।

प्रदर्शनों के बीच ईरानी सरकार ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर सख्त पाबंदियाँ लगा दी हैं। इंटरनेट बंद होने और फोन लाइनें कटने से जमीनी हालात की स्वतंत्र जानकारी मिलना बेहद मुश्किल हो गया है। सरकार ने अब तक हताहतों का कोई आधिकारिक आँकड़ा जारी नहीं किया है।

इस संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान को लेकर ‘कड़े विकल्पों’ पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन विकल्पों में सैन्य कार्रवाई, साइबर हमले, प्रतिबंधों का विस्तार और ईरानी विपक्ष को ऑनलाइन समर्थन शामिल हो सकता है। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह अमेरिका को करारा जवाब देगा।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक टेलीविजन संबोधन में प्रदर्शनों के लिए इजरायल और अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि विदेशी तत्वों ने हथियारों के जरिए लोगों की हत्या की और सरकारी व निजी इमारतों को निशाना बनाया।

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