बुर्जुर्गो की कहावत है कि अगर किसी को कुछ नहीं दे सकते तो बद्दुआ मत लो। इतिहास साक्षी है। 7 नवम्बर 1966 को जब गो-हत्या का विरोध कर रहे निहत्ते साधु-संतों से पार्लियामेंट स्ट्रीट पर खून की होली पार्लियामेंट स्ट्रीट खून से लाल हो गयी थी, लाशे बिछी हुई थीं तब कृपालु जी महाराज ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को श्राप दिया था कि "इंदिरा जिस तरह गोपाष्टमी के दिन हम निहत्ते साधु-संतों से खून की होली खेली है तेरी भी मौत गोपाष्टमी को ही होगी और तेरी पार्टी को ख़त्म करने हिमालय से आधुनिक ड्रेस में एक तपस्वी आएगा" याद हो 31 अक्टूबर 1984 को गोपाष्टमी ही थी। श्राप और दिल से निकली हाय कभी व्यर्थ नहीं जाती।
मुंबई नगर निगम चुनावों में उद्धव ठाकरे की जितनी दुर्गति हुई है उसके वह खुद जिम्मेदार हैं। पहले बीजेपी को धोखा फिर मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने पाखंडी सेक्युलरिस्टों से समझौता कर पालघर में निर्दोष साधुओं पर प्रहार और हनुमान चालीसा पढ़ने पर नवनीत राणा को जेल में डालना आदि बहुत सनातन विरोधी घटनाएं हैं। काश अपने बेटे की इन करतूतों को देखने बालासाहब जी जीवित होते। जिस मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने सनातन विरोधी हरकतें की उस मुस्लिम वोटबैंक ने भी ठोकर मार दी क्योकि जो अपने धर्म का नहीं हो सका किसी का नहीं हो सकता। ऐसे लोगों को कालनेमि हिन्दू कहा जाता है।
उद्धव ठाकरे को नवनीत राणा और कंगना राणावत के साथ-साथ इस मराठी फिल्मों की मराठी अभिनेत्री केतकी चिताले का भी श्राप लगा है
उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे
मराठी अस्मिता की बात करने वाले उद्धव ठाकरे ने इस मराठी लड़की पर जो जुल्म किया उसका उदाहरण कहीं और नहीं मिलेगा
1) 40 दिनों से ज़्यादा जेल में।
2) 22 एफआईआर।
3) आईटी एक्ट 2000 की धारा 66ए को लगा दिया गया।
4) जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब उन्हें 104 डिग्री बुखार था और उन्हें कपड़े भी नहीं पहने दिए गए
5) पुलिस हिरासत में भी उनके बाल खींचने की और उन्हें मारने की कोशिश की गई
लेकिन लिबरल गैंग ने कभी भी उनकी “अभिव्यक्ति की आज़ादी” के बारे में ट्वीट नहीं किया।
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